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                <title>Corruption Case - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Corruption Case RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लैंड फॉर जॉब केस : उच्चतम न्यायालय से लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका, निचली अदालत में पेश होने की छूट</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने 'जमीन के बदले नौकरी' मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को निचली अदालत में पेशी से व्यक्तिगत छूट दे दी है। न्यायालय CBI जांच की कानूनी वैधता और अनिवार्य मंजूरी की चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है। यह मामला 2004-2009 के रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान हुई कथित ग्रुप-डी नियुक्तियों से जुड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/land-for-job-case-big-blow-to-lalu-prasad-yadav/article-150209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/lalu-yadav.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद को 'जमीन के बदले नौकरी' मामले की कार्यवाही के दौरान निचली अदालत में पेश होने से छूट दे दी है। न्यायालय प्रसाद की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मामले को चुनौती दी गई है। इसमें सक्षम प्राधिकारी से अनिवार्य पूर्व मंजूरी के बिना कथित तौर पर नई पूछताछ और जांच शुरू करने के कदम को भी चुनौती दी गई है।</p>
<p>इससे पहले 24 मार्च को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में सीबीआई की प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने श्री यादव के उस तर्क को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी के अभाव में यह कार्यवाही कानूनी रूप से उचित नहीं है। यह मामला 2004 से 2009 के बीच प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में की गई कथित 'ग्रुप डी' नियुक्तियों से संबंधित है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उम्मीदवारों को उन जमीन के टुकड़ों के बदले नियुक्त किया गया था जो लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर उपहार में दिए गए थे या स्थानांतरित किए गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:57:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मध्य प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ 9.78 करोड़ रूपये के धन शोधन का मामला दर्ज, जांच जारी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अमरनाथ मित्तल के खिलाफ भोपाल कोर्ट में शिकायत दर्ज की है। लोकायुक्त की प्राथमिकी के आधार पर हुई जांच में ₹2.38 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। आरोपी ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार की कमाई को भोपाल और रायसेन की अचल संपत्तियों में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/money-laundering-case-of-rs-978-crore-registered-against-former/article-148319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ed1.png" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अमरनाथ मित्तल और अन्य के खिलाफ घन शोधन रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत भोपाल की विशेष अदालत (पीएमएलए) में शिकायत दर्ज की है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि लोकायुक्त भोपाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित) की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। यह प्राथमिकी उन आरोपों से संबंधित है जिसमें डॉ. अमरनाथ मित्तल ने लोक सेवक के रूप में काम करते हुए अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की, जिसकी कीमत लगभग 2.38 करोड़ रूपये थी।</p>
<p>पीएमएलए जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार के तरीकों से हासिल अपराध की कमाई को भोपाल और रायसेन जिलों में स्थित चल और अचल संपत्तियों में निवेश करके धन शोधन किया था। इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 12:32:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आय से अधिक संपत्ति मामला: ईडी ने एसईसीएल अधिकारी की 83.24 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क की, जांच जारी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए SECL कोरबा के सहायक प्रबंधक प्रभाकर शुक्ला की ₹83.24 लाख की संपत्ति जब्त की है। जांच में सामने आया कि शुक्ला ने परिवार के बैंक खातों और बीमा पॉलिसियों के जरिए काली कमाई को सफेद करने का प्रयास किया। सीबीआई की एफआईआर के बाद अब PMLA के तहत शिकंजा कसा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/disproportionate-assets-case-ed-continues-investigation-into-secl-officers-assets/article-148146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को 'साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड' (एसईसीएल), कोरबा (छत्तीसगढ़) के सहायक प्रबंधक (सर्वेक्षण) प्रभाकर शुक्ला और उनके परिवार से जुड़ी 83.24 लाख रुपये की चल और अचल संपत्ति कुर्क करने की घोषणा की है। ईडी के भोपाल जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई सीबीआई (एसीबी), जबलपुर द्वारा प्रभाकर शुक्ला के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई जांच में सामने आया कि एक मार्च 2008 से 30 नवंबर 2022 के बीच शुक्ला ने अपनी वैध आय से लगभग 39.83 प्रतिशत अधिक यानी 83.24 लाख रुपये की अवैध संपत्ति जुटाई।</p>
<p>जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस काली कमाई को बैंकिंग प्रणाली में नकद जमा के माध्यम से खपाया गया था। आरोपी ने अपनी पत्नी और बेटियों सहित परिवार के उन सदस्यों के बैंक खातों का उपयोग किया। इस कमाई को बाद में सावधि जमा, बीमा पॉलिसियों और भूखंडों जैसी अचल संपत्तियों की खरीद में निवेश कर वैध बनाने का प्रयास किया गया। सीबीआई पहले ही इस मामले में जबलपुर की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है, जबकि ईडी की जांच फिलहाल जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 17:56:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अलवर में एसीबी की बड़ी कार्रवाई, 20 हजार की रिश्वत लेते कांस्टेबल सहित दो गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अलवर के कठूमर थाने में केस में मदद के नाम पर 20,000 रुपये की घूस लेते कांस्टेबल रामेश्वर और एक निजी व्यक्ति को रंगे हाथों पकड़ा। एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में रिश्वत की राशि बरामद कर ली गई है, जबकि आरोपी ASI नरेंद्र की तलाश जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/big-action-by-acb-in-alwar-two-arrested-including-constable/article-147928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/alwar.png" alt=""></a><br /><p>अलवर। कठूमर थाने में 20 हजार की रिश्वत लेते कांस्टेबल व निजी व्यक्ति गिरफ्तार, एसीबी की बड़ी कार्रवाई अलवर जिले के कठूमर थाना क्षेत्र में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कांस्टेबल और एक निजी व्यक्ति को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई परिवादी की शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें आरोपियों द्वारा केस में मदद के नाम पर रिश्वत मांगने की बात सामने आई थी।</p>
<p>जयपुर एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर एसीबी दौसा टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी कांस्टेबल रामेश्वर सिंह और निजी व्यक्ति निरंजन सिंह को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, हेल्पलाइन 1064 पर मिली शिकायत में बताया गया कि परिवादी के रिश्तेदार के खिलाफ कठूमर थाने में दर्ज मामले में मदद करने के बदले एएसआई नरेन्द्र सिंह, कांस्टेबल रामेश्वर सिंह और निजी व्यक्ति निरंजन सिंह द्वारा 20,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी भरतपुर इकाई ने ट्रैप की योजना बनाई।</p>
<p>उप महानिरीक्षक अनिल कयाल के सुपरविजन में एसीबी दौसा के उप अधीक्षक रविन्द्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए रिश्वत की राशि बरामद कर ली। ट्रैप के दौरान रिश्वत की रकम निजी व्यक्ति निरंजन सिंह के पास से बरामद की गई। मामले में एएसआई नरेन्द्र सिंह की गिरफ्तारी अभी बाकी है। एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमाला के निर्देशन में आरोपियों से पूछताछ जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:26:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आबकारी नीति मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत की टिप्पणियों पर लगाई रोक; अ​रविंद केजरीवाल समेत सभी आरोपियों को नोटिस जारी, 16 मार्च को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को बरी करने वाले फैसले में सीबीआई के खिलाफ निचली अदालत की टिप्पणियों पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च तय करते हुए पीएमएलए कार्यवाही पर भी फिलहाल रोक लगा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/excise-policy-case-delhi-high-court-bans-the-comments-of/article-145815"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/kejriwal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले के संबंध में केंद्रीय जांच एजेंसियों को बड़ी राहत देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को बरी करते समय निचली अदालत की ओर से केन्द्रीय जांच ब्यूरो पर की गयी टिप्पणियों पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने सभी आरोपियों को नोटिस भी जारी किये हैं।</p>
<p>न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने आरोपियों को बरी किये जाने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश में की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को यह भी निर्देश दिया है कि इस याचिका पर कोई फैसला होने तक वह आबकारी नीति के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रहे मामले पर आगे सुनवाई नहीं करे। </p>
<p>उच्च न्यायालय ने उन सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है जिन्हें इस मामले में बरी किया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता तुषार मेहता ने न्यायालय से याचिका स्वीकार करने का अनुरोध करते हुए कहा कि यह देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और राष्ट्रीय शर्म का विषय है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 17:43:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसीबी की बड़ी कार्रवाई: ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत सुहागपुरा अतिरिक्त चार्ज ग्राम पंचायत कचोटिया व दलाल राजमल ई-मित्र संचालक 8000 रूपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतापगढ़ में एसीबी (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ग्राम विकास अधिकारी यशवंत जोशी और दलाल राजमल को 8,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। आरोपियों ने मकान के पट्टे की रजिस्ट्री के बदले 12,000 रुपये मांगे थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जाल बिछाकर ई-मित्र संचालक और अधिकारी को भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/pratapgarh/big-action-of-acb-village-development-officer-gram-panchayat-suhagpura/article-145412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/acb.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर एसीबी चौकी प्रतापगढ़ इकाई द्वारा आज कार्यवाही करतें हुए आरोपी यशवन्त जोशी ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत सुहागपुरा अतिरिक्त चार्ज ग्राम पंचायत कचोटिया व दलाल श्री राजमल (ई-मित्र संचालक) को 8000 रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।</p>
<p>भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की प्रतापगढ चौकी को एक शिकायत इस आशय की मिली की परिवादी के मकान के पट्टे की रजिस्ट्री करवाने के लिये यशवन्त जोशी ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत सुहागपुरा अतिरिक्त चार्ज ग्राम पंचायत कचोटिया 12,000  रूपये की मांग कर दलाल राजमल हाडोती (ई मित्र संचालक) को देने के लिये कहा जिस पर दिनांक 27.02.2026 को रिश्वत राशि मांग सत्यापन कराया गया जिसमें आरोपी  यशवन्त जोशी ग्राम विकास अधिकारी ने दलाल राजमल (ई-मित्र संचालक) के मार्फत 12000/-रूपये की रिश्वत राशि की मांग की गई व 8000 रूपये रजिस्ट्री करने से पहले व शेष राशि रजिस्ट्री करने के बाद देना तय हुआ।</p>
<p>जिस पर एसीबी  के उप महानिरीक्षक डॉ. रामेश्वर सिंह, के सुपरविजन में एसीबी प्रतापगढ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह के नेतृत्व में आज मय टीम के ट्रेप कार्यवाही करतें हुए आरोपी यशवन्त जोशी ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत सुहागपुरा अतिरिक्त चार्ज ग्राम पंचायत कचोटिया के लिए उसके दलाल  राजमल (ई-मित्र संचालक) को 8000/- रूपये रिश्वत राशि लेते रंगे हाथो गिरफ्तार किया गया है व दलाल  राजमल (ई-मित्र संचालक) से आरोपी यशवन्त जोशी ग्राम विकास अधिकारी से जरिये मोबाईल वार्ता करवाई गई व आरोपी यशवन्त जोशी ग्राम विकास अधिकारी द्वारा रिश्वत राशि हेतु स्वीकृति व्यक्त की व रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर ई मित्र पर आकर करने हेतु कहां जिससे आरोपी यशवन्त जोशी ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत सुहागपुरा अतिरिक्त चार्ज ग्राम पंचायत कचोटिया की भुमिका संलिप्त होने से बाद पुछताछ ग्राम विकास अधिकारी को गिरफ्‌तार किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>प्रतापगढ़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/pratapgarh/big-action-of-acb-village-development-officer-gram-panchayat-suhagpura/article-145412</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 18:26:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसएससी भर्ती घोटाला: ईडी ने की जांच तेज, पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को भेजा समन</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित SSC भर्ती घोटाले में ईडी ने जांच तेज करते हुए पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया है। जमानत पर बाहर चल रहे दोनों आरोपियों से मनी ट्रेल और घोटाले के व्यापक नेटवर्क को लेकर सवाल किए जाएंगे। एजेंसी इस मामले में अन्य संदिग्धों और अभ्यर्थियों के बयान भी दर्ज करने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ed-investigates-ssc-recruitment-scam-sends-summons-to-partha-chatterjee/article-145148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/parth-and-arpita.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में कथित एसएससी भर्ती घोटाले की जांच तेज करते हुए पूर्व राज्य मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। ईडी सूत्रों के अनुसार, चटर्जी को 16 मार्च और मुखर्जी को 18 मार्च के बीच एजेंसी के समक्ष पेश होने को कहा गया है। दोनों फिलहाल जमानत पर हैं। ईडी ने हालांकि पहले प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में उनसे पूछताछ की थी लेकिन एसएससी से जुड़े मामले में यह पहली बार है जब एजेंसी उनसे विशेष रूप से पूछताछ करेगी।</p>
<p>पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को जुलाई 2022 में प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उस समय अर्पिता मुखर्जी से जुड़े दो फ्लैटों से ईडी ने लगभग 50 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। बाद में एसएससी और प्राथमिक भर्ती घोटाले की जांच कर रही केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी चटर्जी को दोनों मामलों में गिरफ्तार किया था। हालांकि, इन घटनाक्रमों के बावजूद ईडी ने अब तक एसएससी मामले में उनसे पूछताछ नहीं की थी।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई अपनी जांच केवल पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी दोनों तक सीमित नहीं रखेगी। कथित अनियमितताओं से जुड़े कई अन्य लोगों को भी इस महीने के अंत तक समन भेजे जाने की संभावना है। ईडी कथित मनी ट्रेल का पता लगाने और घोटाले में शामिल व्यापक नेटवर्क की पहचान के लिए कई अभ्यर्थियों के बयान भी दर्ज करने की तैयारी कर रही है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक पार्थ को पिछले वर्ष नवंबर में सभी मामलों में जमानत मिलने के बाद रिहा किया गया था। उन्होंने तीन वर्ष तीन महीने जेल में बिताए। गत दिसंबर में नक्तला स्थित अपने आवास के बाथरूम में फिसलने से उनके बाएं हाथ में चोट लग गई थी, जिसके बाद उन्हें ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाइपास के पास एक निजी अस्पताल में 25 दिनों तक भर्ती रहना पड़ा था और 31 दिसंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली गयी थी। अर्पिता मुखर्जी को पिछले साल नवंबर में दो वर्ष तीन महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद जमानत मिली थी। उन्हें अब तक किसी भी सीबीआई मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 15:55:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शराब घोटाला मामला: पूर्व मंत्री कवासी लखमा को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री कवासी लखमा और अन्य आरोपियों को शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत अब मुख्य याचिकाओं के साथ इस मामले की विस्तृत सुनवाई करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/liquor-scam-case-big-relief-for-former-minister-kawasi-lakhma/article-139697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kawadi-lakma.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री कवासी लखमा और करोड़ों रुपये के शराब घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों को सोमवार को अंतरिम जमानत देते हुए निर्देश दिया कि उनकी याचिकाओं को विस्तृत विचार के लिये मुख्य मामलों के साथ सूचीबद्ध किया जाये।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की और याचिकाकर्ताओं को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने संकेत दिया कि उठाए गए मुद्दों की अंतिम सुनवाई के समय व्यापक रूप से जांच की जाएगी। राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने जल्द सुनवाई का विरोध किया और कहा कि जांच अभी भी जारी है। </p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले में मंत्रियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग का आरोप है। महेश जेठमलानी ने दावा किया कि आरोपियों ने सरकारी खजाने को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने रिकॉर्ड पर रखे गये हलफनामे का जिक्र करते हुए इस आरोप पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता को कमीशन के तौर पर 64 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से 4.6 करोड़ रुपये कथित तौर पर पार्टी से संबंधित गतिविधियों के लिये और लगभग 10 करोड़ रुपये व्यक्तिगत संपत्ति के लिए इस्तेमाल किये गये थे। इसमें उनके और उनके बेटे के घर शामिल हैं। पीठ ने यह भी कहा कि सुश्री साहू सहित कुछ अधिकारियों के खिलाफ आरोप अधिक गंभीर बताये गये हैं। </p>
<p>याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि कई आरोपी पहले से ही जमानत पर हैं। उन्होंने बताया कि 1,100 से अधिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है और छह आरोप पत्र दायर किये गये हैं। उन्होंने कार्यवाही के इस चरण में लगातार हिरासत में रखने के औचित्य पर सवाल उठाया। पीठ ने अंतरिम जमानत देते हुए आरोपों की गंभीरता पर जोर दिया और कहा कि इस मामले में उच्चतम स्तर पर कथित संलिप्तता शामिल है। पीठ ने स्पष्ट किया कि मुख्य मामलों पर उचित समय पर पूरी सुनवाई की जाएगी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/liquor-scam-case-big-relief-for-former-minister-kawasi-lakhma/article-139697</link>
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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 16:42:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईडी की बड़ी कार्रवाई, विशाखपटनम के पूर्व नगर नियोजक की करोड़ों की संपत्ति कुर्क</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व अधिकारी पसूपार्थी प्रदीप कुमार की 1.09 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। कुर्क की गई संपत्तियों में आवासीय फ्लैट, प्लॉट और बैंक बैलेंस शामिल हैं, जो उनके और उनके परिजनों के नाम पर थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/eds-big-action-property-worth-crores-of-former-city-planner/article-137102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/ed-raid.png" alt=""></a><br /><p>आंध्र प्रदेश। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के विशाखपटनम उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने विशाखपटनम शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक पसुपार्थी प्रदीप कुमार की अर्जित आय से अधिक संपत्ति की जांच के सिलसिले में 1.09 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति कुर्क की है।</p>
<p>ईडी ने बुधवार को बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों में आवासीय फ्लैट, भूखंड और बैंक खातों में जमा धन शामिल हैं। ये पसुपार्थी प्रदीप कुमार, उनकी पत्नी, उनके चाचा और एक बेनामी इकाई कोना सिम्हाद्री के नाम पर हैं। ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) विजयवाड़ा द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी और बाद में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के लिए पसुपार्थी के खिलाफ दायर आरोप पत्र के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी।</p>
<p>प्राथमिकी और आरोप पत्र के अनुसार, पसुपार्थी 1984 में सरकारी सेवा में शामिल हुए थे और जनवरी 2018 में संयुक्त निदेशक के रूप में पदोन्नत होने और अतिरिक्त मुख्य नगर योजनाकार के रूप में तैनात होने से पहले विभिन्न पदों पर रहे। उन्होंने कथित तौर पर अपराध की अवधि (जुलाई 2005 - जनवरी 2018) के दौरान अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और आय से अधिक अवैध धन अर्जित किया।</p>
<p>भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति की राशि लगभग 1.85 करोड़ रुपये आंकी थी। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि पसुपार्थी ने अपने नाम या अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर रखे गए विभिन्न खातों में अवैध आय जमा करके उसे छिपाने का प्रयास किया। अनुसूचित अपराधों के माध्यम से प्राप्त धन को नकद में जमा किया गया था और बाद में संपत्ति अर्जित करने के लिए उपयोग किया गया था।</p>
<p>धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) जांच में मामले में अपराध की कुल आय लगभग 2.94 करोड़ रुपये निर्धारित की गई जो मूल एजेंसी द्वारा गणना की गई आय से अधिक संपत्ति की राशि से अधिक थी। इस अधिक राशि (1.09 करोड़ रुपये) की संपत्ति को पीएमएलए के तहत कुर्क किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/eds-big-action-property-worth-crores-of-former-city-planner/article-137102</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 18:58:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नगर परिषद धौलपुर के भ्रष्टाचार का भांडा फूटा : पांच अधिकारी-कर्मचारी तीन लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[सिंह ने बताया कि गुरुवार को रिश्वत राशि मांगने वाले सभी अधिकारी कर्मचारियों को रंगे हुए रुपए दिलवाए गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dholpur/five-officer-employees-arrested-for-corruption-of-city-council-dholpur-arrested/article-126596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/4562.png" alt=""></a><br /><p>धौलपुर। एसीबी भरतपुर के एएसपी अमित सिंह के नेतृत्व में एसीबी की टीम ने गुरुवार को नगर परिषद धौलपुर में छापेमार कार्रवाई की। जिसमें टीम ने 3 लाख 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए परिषद के 5 अधिकारियों- कर्मचारियों एवं संविदा कर्मी को गिरफ्तार किया है। रिश्वत की राशि नगर परिषद आयुक्त अशोक शर्मा, एईएन प्रिया झा और कैशियर भरत द्वारा मांगी गई थी। एसीबी भरतपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सिंह ने बताया कि पिछले साल नगर परिषद में एक ठेकेदार ने अपनी पत्नी को ठेका दिलवाया था। जिसका 13 लाख रुपए का भुगतान बकाया था। बकाया बिल के भुगतान के एवज में आयुक्त अशोक शर्मा ने 2 लाख रुपए, एईएन प्रिया झा ने 70 हजार रुपए और कैशियर भरत ने 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।</p>
<p>सिंह ने बताया कि गुरुवार को रिश्वत राशि मांगने वाले सभी अधिकारी कर्मचारियों को रंगे हुए रुपए दिलवाए गए। कमिश्नर ने अपने रुपए बाबू नीरज और ड्राइवर देवेंद्र को दिलवा दिए। एईएन प्रिया झा ने संविदा पर कार्यरत कर्मचारी हरेंद्र को रिश्वत की राशि दिलवा दी। कैशियर भरत ने खुद पैसे ले लिए। इसके बाद टीम ने छापेमारी की। अमित सिंह ने बताया कि रिश्वत लेने के आरोप में एईएन प्रिया झा, क्लर्क नीरज, ड्राइवर देवेंद्र, कैशियर भरत और संविदाकर्मी हरेंद्र को गिरफ्तार किया गया है। जिन लोगों ने रिश्वत की राशि ली, उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। वहीं परिषद के आयुक्त अशोक शर्मा की भूमिका पूरे मामले में संदिग्ध है। समाचार लिखे जाने तक आयुक्त के दौसा स्थित आवास पर एसीबी की कार्रवाई चल रही है।</p>
<p><strong>कमिश्नर की भूमिका संदिग्ध</strong><br /> एडिशनल एसपी ने बताया कि आयुक्त अशोक शर्मा ने रिश्वत के 2 लाख रुपए क्लर्क नीरज और ड्राइवर देवेंद्र को दिलवाए थे। जो पैसे लेकर गाड़ी से फ्लाईओवर की ओर भागने लगे। जिनका पीछा कर उन्हें पकड़ लिया गया। क्लर्क और ड्राइवर ने आयुक्त के नाम पर रिश्वत ली थी। जिसके चलते कमिश्नर की भूमिका संदिग्ध है। </p>
<p>नगर परिषद धौलपुर के भ्रष्टाचार की बहुत ज्यादा शिकायतें आ रही थी। जिसे लेकर टीम की ओर से गुरुवार को धौलपुर में कार्रवाई की गई है। एक साथ पांच लोगों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाना टीम की बड़ी सफलता है। हम आगे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ इसी तरह कार्रवाई करते रहेंगे।<br />- राजेश सिंह, डीआईजी, <br />एसीबी जयपुर </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>धौलपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Sep 2025 10:11:47 +0530</pubDate>
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                <title>Corruption Case में राजमुंदरी केंद्रीय कारागार में भेजे गए चंद्रबाबू नायडू</title>
                                    <description><![CDATA[तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को राजमुंदरी केंद्रीय कारागार जेल में भेज दिया गया। जेल अधिकारियों ने नायडू को कैदी नंबर 7691 बनाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chandrababu-naidu-sent-to-rajahmundry-central-jail-in-corruption-case/article-56833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/chandrababu1.png" alt=""></a><br /><p>विजयवाड़ा। तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को राजमुंदरी केंद्रीय कारागार जेल में भेज दिया गया। जेल अधिकारियों ने नायडू को कैदी नंबर 7691 बनाया है।</p>
<p>नायडू को जेल के स्नेहा ब्लॉक में रखा गया है। जेल अधिकारियों ने नायडू को कुछ विशेष सुविधाएं प्रदान की हैं। उन्हें जेल में एक निजी सहायक और पांच सुरक्षाकर्मी दिए गए हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि अदालत ने परिवार को घर से भोजन और जलपान उपलब्ध कराने की अनुमति दी थी, इसलिए नायडू को परिजनों ने सुबह ब्लैक कॉफी, फलों का सलाद और गर्म पानी दिया। नायडू की पत्नी भुवनेश्वरी, पुत्र लोकेश और बहू ब्राह्मणी केंद्रीय जेल में उनसे मिले। </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक एक चिकित्सकीय दल नायडू के स्वास्थ्य की जांच करेगा। राजमुंदरी शहर में पुलिस अधिनियम की धारा 30 लागू कर दी गई और केंद्रीय कारागार के आसपास कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए।</p>
<p>इस बीच, नायडू के वकीलों ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में उनकी जमानत के लिए याचिका दायर की, जिस पर अदालत सोमवार को सुनवाई करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 20:02:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रेवेन्यू बोर्ड में भ्रष्टाचार मामला: निलंबित आरएएस सुनील कुमार को राहत, हाईकोर्ट ने दी जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाइकोर्ट ने राजस्व मंडल में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में निलंबित आरएएस और मंडल के तत्कालीन सदस्य सुनील कुमार को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश देवेंद्र कच्छवाहा ने यह आदेश आरोपी की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE--%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%8F%E0%A4%8F%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4--%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A4/article-1126"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/rajasthan_high_court1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट ने राजस्व मंडल में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में निलंबित आरएएस और मंडल के तत्कालीन सदस्य सुनील कुमार को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश देवेंद्र कच्छवाहा ने यह आदेश आरोपी की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता दीपक चौहान ने कोर्ट को बताया की याचिकाकर्ता से कोई रिकवरी नहीं हुई है। इसके अलावा एसीबी की ट्रांसक्रिप्ट में भी ऐसी कोई बात नहीं है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता ने रिश्वत की मांग की है। इसके अलावा मामले में एसीबी की ओर से विशेष अदालत में आरोप पत्र पेश किया जा चुका है।</p>
<p> </p>
<p>याचिका में यह भी कहा गया कि मामले में अभी तक एसीबी को याचिकाकर्ता के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है, इसलिए याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाए। इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आरोपी पर फैसला पक्ष में देने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है। आरोपी दलाल के जरिए रिश्वत लेता था। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। वहीं कोर्ट ने प्रकरण से जुड़े सह आरोपी बीएल मेहरड़ा और दलाल शशिकांत शर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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