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                <title>Triangular contest - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Triangular contest RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>निर्दलीयों का दम: दो चुनावों में बदला जयपुर निगम का सियासी गणित, 2020 में 23 निर्दलीय पहुंचे थे निगम, 2026 में टिकट कटने से बागियों ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या 150 रहने के बावजूद 700 से अधिक निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में डटे हैं। 2020 की तरह इस बार भी बागी और निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा-कांग्रेस का समीकरण बिगाड़कर कई वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय और दिलचस्प बना रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-strength-of-independents-changed-in-two-elections-political-mathematics/article-164809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी अब केवल वोट काटने वाले उम्मीदवार नहीं रह गए हैं, बल्कि कई मौकों पर सत्ता के समीकरण बदलने की ताकत दिखा चुके हैं। 2020 के चुनाव में जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज के 250 वार्डों में कुल 23 निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर पार्षद बने थे। इस बार निगम के एकीकरण और परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या घटकर 150 रह गई है, लेकिन निर्दलीयों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। नामांकन के बाद सात सौ से ज्यादा निर्दलीय मैदान में हैं।</p>
<p>2020 में हेरिटेज में निर्दलीय बने थे किंगमेकर: 2020 का चुनाव निर्दलीयों की प्रभावशीलता का सबसे बड़ा उदाहरण रहा। जयपुर हेरिटेज में कांग्रेस को 47 और भाजपा को 42 सीटें मिली थीं, जबकि 11 निर्दलीय जीते। बहुमत के लिए 51 पार्षद जरूरी थे। ऐसे में बोर्ड गठन और महापौर चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका निर्णायक हो गई। महापौर चुनाव में कम से कम नौ निर्दलीयों ने कांग्रेस की मुनेश गुर्जर के पक्ष में मतदान किया और कांग्रेस का बोर्ड बन गया। यही नहीं, 2020 में निर्दलीय जीतीं कुसुम यादव बाद में जयपुर हेरिटेज की महापौर बनीं। 2024 में कांग्रेस के आठ पार्षद भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा ने उन्हें कार्यवाहक महापौर बनाया। यानी निर्दलीय के रूप में जीती एक पार्षद का राजनीतिक सफर आगे चलकर निगम के सत्ता समीकरण का केन्द्र बन गया।</p>
<p><strong>तस्वीर ज्यादा चुनौतीपूर्ण</strong></p>
<p>2026 में हालात अलग हैं। एकीकृत जयपुर नगर निगम में 150 वार्ड हैं। परिसीमन और आरक्षण ने कई पुराने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। भाजपा-कांग्रेस ने भी 2020 में जीते 250 पार्षदों में से महज 43 को दोबारा टिकट दिया है। इनमें 23 निर्दलीय विजेताओं में से केवल तीन को इस बार प्रमुख दलों ने टिकट दिया। इससे टिकट से वंचित दावेदारों के निर्दलीय मैदान में उतरने का रास्ता खुला। नामांकन के दौरान 953 निर्दलीयों ने पर्चे दाखिल किए थे और जांच व वापसी के बाद सात सौ से ज्यादा चुनाव मैदान में बचे।</p>
<p><strong>इस बार कई वार्डों में त्रिकोणीय पेंच</strong></p>
<p>इस बार निर्दलीयों की सबसे बड़ी ताकत स्थानीय पहचान और पार्टी के बागियों का नेटवर्क है। कई वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के असंतुष्ट चेहरे निर्दलीय बनकर मुकाबले में हैं। नाम वापसी के लिए दोनों दलों को बागियों को मनाने की कवायद करनी पड़ी। कुछ वार्ड सीधे भाजपा-कांग्रेस मुकाबले वाले हैं, जबकि कई सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 14:01:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुडुचेरी विधानसभा चुनाव: नौ अप्रैल को होने वाले चुनावों के लिए कुल 514 नामांकन पत्र दाखिल, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए 514 नामांकनों की जांच शुरू हो गई है। राज्य में AINRC-BJP, कांग्रेस-DMK और अभिनेता विजय की TVK के बीच कड़ा त्रिकोणीय संघर्ष है। मुख्यमंत्री एन. रंगासामी का मुकाबला थट्टांचवड़ी सीट पर पूर्व सीएम वी. वैथिलिंगम से होगा। 26 मार्च को नाम वापसी के बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-total-of-514-nomination-papers-were-filed-for-the/article-147781"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)61.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जांच मंगलवार को शुरू हो गई। चुनाव आयोग ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश की कुल 30 विधानसभा सीटों के लिए 442 उम्मीदवारों ने कुल 514 नामांकन दाखिल किए थे। जांच के दौरान उन नामांकनों को खारिज कर दिया जाएगा जो नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाएंगे। </p>
<p>पुडुचेरी में इन चुनावों में मुख्य रूप से त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। इसमें मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के नेतृत्व वाला सत्तारूढ़ एआईएनआरसी-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गबंधन (राजग), विपक्षी कांग्रेस-द्रमुक इंडिया गठबंधन और अभिनेता से नेता बने विजय की नई पार्टी टीवीके शामिल हैं। विजय की पार्टी पहली बार अपनी चुनावी किस्मत आजमा रही है। चूंकि दो प्रमुख मोर्चों के बीच सीटों के बंटवारे का मुद्दा सुलझने में देरी हुई थी, इसलिए प्रमुख दलों के उम्मीदवारों ने सोमवार की समय-सीमा समाप्त होने से पहले सभी 30 सीटों पर अपने नामांकन दाखिल कर दिए थे। </p>
<p>अब जबकि सीटों के बंटवारे पर समझौता हो गया है, सहयोगियों को आवंटित निर्वाचन क्षेत्रों में पर्चा दाखिल करने वाले उम्मीदवार 26 मार्च को अपना नाम वापस ले लेंगे। नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद ही चुनाव मैदान में कुल उम्मीदवारों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सीटों के बंटवारे के समझौते के अनुसार, कुल 30 सीटों में से एआईएनआरसी 16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और शेष 14 सीटें अपनी सहयोगी भाजपा को दी गयी हैं। भाजपा ने इनमें से दो-दो सीटें राजग के अन्य सहयोगियों-अन्नाद्रमुक और लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन के बेटे जोस चार्ल्स मार्टिन के नेतृत्व वाली नवनिर्मित एलजेके को दी हैं।  </p>
<p><strong>टीवीके पहली बार चुनाव मैदान में </strong></p>
<p>विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस, जिसका इस केंद्र शासित प्रदेश में काफी प्रभाव रहा है, 16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और शेष 14 सीटें द्रमुक को दी गई हैं। द्रमुक ने बदले में अपने सहयोगियों-भाकपा और वीसीके को एक-एक सीट दी है। टीवीके, जिसने अपनी पहली चुनावी पारी में सभी 30 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की थी, ने अंतिम समय में निर्दलीय विधायक जी. नेहरू की पार्टी नेय्यम मक्कल कषगम(एनएमके) के साथ गठबंधन किया है और उसे दो सीटें दी हैं। एनएमके को आॅरलियनपेट सीट दी गई है जहां से नेहरू फिर से चुनाव लड़ रहे हैं, और महत्वपूर्ण थट्टांचवड़ी सीट भी दी गई है जहां से मुख्यमंत्री एन. रंगासामी छठी बार चुनाव जीतने के प्रयास में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और दो बार मुख्यमंत्री रह चुके वी. वैथिलिंगम से है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:30:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान उपचुनाव : गठबंधन नहीं हुआ तो 3 सीटों पर होगा त्रिकोणीय मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय आदिवासी पार्टी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी इन दोनों दलों को कांग्रेस मना नहीं पाई तो खींवसर व चौरासी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होना लगभग तय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-there-is-no-alliance-in-rajasthan-by-election-there-will/article-91255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/election-symbol3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अक्टूबर माह में प्रस्तावित 7 सीटों पर उपचुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के अलावा इस बार दो तीसरे दल भी चर्चा में है। इनमे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और भारतीय आदिवासी पार्टी शामिल है। लोकसभा चुनाव में इन दोनों ही पार्टी से कांग्रेस ने गठबंधन किया था और डूंगरपुर- बांसवाड़ा लोकसभा सीट भारतीय आदिवासी पार्टी और नागौर लोकसभा सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को गठबंधन में दी थी। इसके चलते भारतीय जनता पार्टी को इन दोनों ही सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था।</p>
<p>प्रदेश से पहली बार भारतीय आदिवासी पार्टी का लोकसभा में खाता खुला और राजकुमार रोत यहां से सांसद बने। वही नागौर में पिछली बार लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी के साथ था, लेकिन पिछले चुनाव में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से लोकतांत्रिक पार्टी का गठबंधन हुआ। यहां हनुमान बेनीवाल एक बार फिर से सांसद चुने गए। बेनीवाल और राजकुमार दोनों ही क्रमशः खींवसर और चौरासी विधानसभा से विधायक थे। अब इन दोनों विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं लेकिन दोनों दलों का कांग्रेस से इस बार गठबंधन विधानसभा में भी जारी रहने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही दोनों दलों से समझौता नहीं करने की बात कही है। ऐसे में अगर कांग्रेस इन दोनों दलों को मना नहीं पाई, तो खींवसर व चौरासी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होना लगभग तय है। वहीं सलूंबर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक अमृतलाल मीणा का पिछले दिनों निधन हो गया था। यह सीट उदयपुर संभाग के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में है। इस सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी चुनाव लड़ने के मूड में है । ऐसे में यहां भी त्रिकोणीय मुकाबला होने की पूरी उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Sep 2024 18:00:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान विधानसभा चुनाव में चालीस से अधिक सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जोधपुर के सरदारपुरा सीट पर भाजपा प्रत्याशी डा महेन्द्र सिंह राठौड़ से सीधा मुकाबला हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/triangular-contest-on-more-than-forty-seats-in-rajasthan-assembly/article-62544"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/election-34.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में राज्य की दो सौ विधानसभा क्षेत्रों में से 199 सीटों पर 25 नवंबर होने वाले विधानसभा आम चुनाव में डेढ़ सौ से अधिक सीटों पर सत्तारुढ़ कांग्रेस एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार नजर आने लगे हैं वहीं दोनों पार्टियों में बागी उम्मीदवार एवं अन्य दल के प्रत्याशियों की वजह से चालीस से अधिक सीटों पर त्रिकोणीय एवं कुछ स्थानों पर चतुष्कोणीय मुकाबला होने के आसार है।         </p>
<p>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जोधपुर के सरदारपुरा सीट पर भाजपा प्रत्याशी डा महेन्द्र सिंह राठौड़ से सीधा मुकाबला हैं। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का झालरापाटन सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार राम लाल चौहान, विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी का नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार विश्वराज सिंह मेवाड़, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ का चुरु जिले में तारानगर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी नरेन्द्र बुढ़ानिया, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का टोंक सीट पर भाजपा प्रत्याशी अजीत सिंह मेहता एवं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का चुनाव पहले भाजपा में शामिल हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया से सीधा मुकाबला माना जा रहा है।       </p>
<p>इसी तरह गहलोत सरकार के कई मंत्री जिनमें कोटा उत्तर से शांति धारीवाल, बीकानेर पश्चिम से बी डी कल्ला, लालसोट से परसादी लाल मीणा, सिविल लाइंस से प्रताप सिंह खाचरियावास सहित कई मंत्रियों का भाजपा प्रत्याशियों से सीधा चुनावी मुकाबला हैं। इसके अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का जयपुर के झोंटवाड़ा, सांसद दिया कुमारी का विद्याधरनगर, डा किरोडी लाल मीणा का सवाईमाधोपुर एवं महंत बालकनाथ का तिजारा में कांग्रेस प्रत्याशी के साथ सीधा मुकाबला होने के आसार हैं। इसके अलावा कांग्रेस एवं भाजपा के दर्जनों विधायकों एवं पूर्व विधायकों सहित कई नेताओं के बीच सीधा चुनावी मुकाबला माना जा रहा है।</p>
<p>इस बार चुनाव में कांग्रेस एवं भाजपा दोनों ही दलों में दर्जनों की संख्या में बागी उम्मीदवार सामने आये जिनमें दोनों ही दलों ने कई प्रत्याशियों के मनाने में सफल भी रहे और कई बागियों को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित भी कर दिया गया लेकिन उसके बावजूद भी कई बागी चुनाव मैदान में डटे रहने के कारण पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के लिए समस्या बने हुए हैं और प्रदेश की चालीस से अधिक सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार नजर आ रहे हैं।</p>
<p>इनमें गहलोत सरकार के मंत्री सुभाष गर्ग भरतपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी विजय बंसल एवं अन्य प्रत्याशी गिरीश चौधरी के साथ त्रिकोणीय संघर्ष में फंसे हुए हैं। इस बार त्रिकोणीय मुकाबले में सबसे हॉट सीट बनी चित्तौडग़ढ़ में मौजूद भाजपा विधायक चन्द्र भान ङ्क्षसह आक्या पूर्व मंती एवं भाजपा उम्मीदवार नरपत सिंह राजवी एवं कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत के लिए मुश्किल बने हुए हैं। आक्या का टिकट कटने के बाद वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी भी सांसद चित्तौडग़ढ से ही हैं और चित्तौडग़ढ़ उनका गृह जिला होने के बावजूद आक्या के समर्थन में जनसैलाब उमड़ने से सबकी नजर चित्तौडग़ढ पर टिकी हुई हैं। </p>
<p>इसी तरह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत श्रीमाधोपुर में भाजपा प्रत्याशी के अलावा कांग्रेस बागी बलराम यादव के चुनाव मैदान में होने से त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। इसी तरह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल का भी निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में भाजपा प्रत्याशी लाला राम बैरवा एवं कांग्रेस उम्मीदवार नरेन्द्र कुमार रेगर के साथ त्रिकोणीय चुनावी मुकाबले होने के आसार है। सांसद भागीरथ चौधरी अजमेर की किशनगढ़ सीट पर भाजपा से कांग्रेस में आये विकास चौधरी एवं नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे विधायक सुरेश टाक के बीच फंसते नजर आ रहे हैं। हालांकि हाल में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनाव सभा के बाद भागीरथ चौधरी में उत्साह नजर आने लगा हैं।</p>
<p>इनके आलवा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के संयोजक एवं सांसद हनुमान बेनीवाल भी खींवसर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा, भाजपा के रेवंतराम डांगा के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे नजर आ रहे हैं। खींवसर में अगर बसपा उम्मीदवार नेमाराम ने जोर मारा तो आखिर में वहां मुकाबला चतुष्कोणीय भी पहुंच सकता है। इसी तरह भोपालगढ़ में रालोपा के विधायक पुखराज गर्ग भी भाजपा की कमसा मेघवाल, कांग्रेस की गीता बरवड़ के साथ त्रिकोणीय चुनावी मुकाबला होने के आसार है। चौरासी सीट पर भी विधायक राजकुमार रोत भाजपा एवं कांग्रेस प्रत्याशियों के सामने त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हैं।</p>
<p>इसी प्रकार नागौर जिले में दशकों तक राजनीति में अपना प्रभुत्व रखने वाले मिर्धा परिवार भी इस बार नागौर विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा हैं जहां चुनाव पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आई पूर्व केन्द्रीय मंत्री नाथूराम मिर्धा की पोती एवं पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा के पुत्र एवं पूर्व मंत्री कांग्रेस उम्मीदवार हरेन्द्र मिर्धा निर्दलीय प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री हबीबुर्रहमान के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा होने के बाद ज्योति मिर्धा का पलड़ा भारी माना जा रहा हैं।   </p>
<p>इसके अलावा प्रदेश में नवलगढ़ में पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा कांग्रेस से, लूणकरणसर में पूर्व गृहराज्य मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हुए नजर आ रहे हैं। इसी तरह डूंगरगढ, श्रीगंगानगर, सादुलशहर, अनूपगढ़, रायङ्क्षसहनगर, हनुमानगढ़, सीकर, वल्लभनगर, जैतारण, धौलपुर, बाडी, बयाना एवं  अलवर जिले में भी दो तीन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। इसी तरह अजमेर उत्तर, पुष्कर, डूंगरपुर, चौरासी, सांगवाड़ा, धरियावद, बस्सी, मनोहरथाना, देवली उनियारा सहित कई विधानसभा क्षेत्रों में त्रिकोणीय चुनावी मुकाबला होने के आसार है।</p>
<p>इनके आलवा कुछ स्थानों पर चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति भी बनी हुई नजर आ रही हैं जिनमें सांचौर विधानसभा सीट पर राज्य के मंत्री एवं कांग्रेस प्रत्याशी सुखराम विश्नोई, भाजपा उम्मीदवार एवं सांसद देवजी पटेल बागी उम्मीदवार जीवराम चौधरी एवं शमशेर अली सैयद के निर्दलीय चुनाव लड़ने से चतुष्कोणीय मुकाबले में फंसे नजर आ रहे हैं।</p>
<p>राजस्थान में लाल डायरी का मुद्दा लाकर प्रदेश की राजनीति में तहलका मचाने वाले पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा उदयपुरवाटी सीट पर शिवसेना प्रत्याशी के रुप में भाजपा प्रत्याशी शुभकरण चौधरी, कांग्रेस के भगवानाराम सैनी एवं बहुजन समाज पार्टी के संदीप सैनी के साथ चतुष्कोणीय मुकाबले का सामना करते नजर आ रहे हैं।</p>
<p>इसी तरह डीडवाना सीट पर कांग्रेस विधायक चेतन सिंह डूडी, भाजपा प्रत्याशी जितेन्द्र सिंह जोधा, पूर्व मंत्री यूनुस खान के निर्दलीय एवं आम आदमी पार्टी से रामनिवास रायल के बीच चतुष्कोणीय मुकाबला बनता जा रहा है। इसी तरह बाड़मेर जिले में शिव विधानसभा सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ एवं बुजुर्ग नेता अमीन खान भाजपा प्रत्याशी स्वरुप सिंह एवं बागी एवं निर्दलीय प्रत्याशी रविन्द्र सिंह भाटी एवं फतेह खान साथ चतुष्कोणीय मुकाबले में चुनावी संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Nov 2023 14:22:31 +0530</pubDate>
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                <title>कोटपूतली विधानसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबला, जातिगत समीकरणों को साधने में जुटे प्रत्याशी</title>
                                    <description><![CDATA[ कोटपूतली विधानसभा में इस बार चुनाव के लिए दोनों ही पार्टियों ने जातिय समीकरण साधते हुए टिकट वितरित किए है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/triangular-contest-in-kotputli-assembly-constituency-candidates-busy-solving-caste/article-62439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/kothputali.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोटपूतली विधानसभा में इस बार चुनाव के लिए दोनों ही पार्टियों ने जातिय समीकरण साधते हुए टिकट वितरित किए है। वहीं 2018 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े मुकेश गोयल इस बार निर्दलीय चुनाव मैदान में है। इस बार कोटपूतली में त्रिकोणिय मुकाबला हो सकता हैं। कांग्रेस ने इस पर वर्तमान विधायक राजेन्द्र यादव पर ही भरोसा जताया है, वहीं भाजपा ने 2018 में निर्दलीय चुनाव लड़े गुर्जर नेता हंसराज पटेल को मैदान में उतारा है। इससे नाराज होकर मुकेश गोयल बीजेपी से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है। यहां पर 25 नवंबर को वोटिंग कराई जाएगी। इसके लिए राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया गया है। 2018 के चुनाव में कोटपूतली सीट पर कांग्रेस को जीत मिली और यहां के विधायक गहलोत सरकार में मंत्री भी बने।  </p>
<p><strong>कितने वोटर, कितनी आबादी</strong><br />2018 के चुनाव में कोटपूतली विधानसभा सीट के चुनावी परिणाम में कांग्रेस के राजेंद्र सिंह यादव को 57 हजार 114 वोट मिले, जबकि बीजेपी के मुकेश गोयल को 43 हजार 238 वोट मिले थे। यादव ने गोयल को 13 हजार 876 वोट से हराया। इसी प्रकार आरएलपी के रामस्वरूप को 28353, निर्दलीय हंसराज को 24960, आप के सत्यनारायण अग्रवाल को 839 वोट मिले। पटेल 2003 में कांग्रेस पार्टी से भी विधायक का चुनाव लड़ चुके है। </p>
<p><strong>जातिय वोट पर एक नजर</strong><br />कोटपूतली विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 26 हजार 739 वोटर्स है। इनमें 120824 पुरुष व 105915 महिला वोटर्स है। इनमें से गुर्जर 48000, यादव 45000, एससी-एसटी व मुसलमान 52000, माली 22000, राजपूत 17000, जाट 13000, ब्राह्मण व बनियां 15000, योगी 5000, स्वामी 6000, सोनी 2000, जांगिड 2500 है। </p>
<p><strong>यह प्रत्याशी मैदान में</strong><br />कोटपूतली विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से राजेन्द्र यादव, बीजेपी से हंसराज पटेल, जननायक जनता पार्टी से रामनिवास यादव, बीएसपी से प्रकाश सैनी, निर्दलीय मुकेश गोयल, अशोक सैनी, लक्ष्मी व एएसपी से सतीश चुनाव मैदान में है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Nov 2023 21:22:45 +0530</pubDate>
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