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                <title>Unemployment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Unemployment RSS Feed</description>
                
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                <title>खड़गे का केंद्र पर हमला, बोले- सरकार ने झूठ बोलने के कुछ नहीं बदला, क्रोनी कैपिटलिज्म और कर्ज माफी का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जीडीपी वृद्धि के दावों के बीच आम जनता अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और बेलगाम असमानता से त्रस्त है। खरगे ने सरकार पर क्रोनी कैपिटलिज्म और अमीरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharge-attacked-the-centre-said-government-did-not-change/article-164376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kharge.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का जश्न मना रही है लेकिन हकीकत यह है कि आम आदमी बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ती असमानता जैसी समस्याओं से त्रस्त है और उसके लिए इस सरकार में कुछ नहीं बदला है। खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखे एक पोस्ट में कहा कि बदलाव की बात करने वाली सरकार को समझना चाहिए कि जनता से झूठ बोलने के अलावा भाजपा शासन में कुछ नहीं बदला है। आम जनता अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और बेलगाम असमानता के बोझ तले दबी है।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आम लोगों पर तीन 'यू'—अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और बेलगाम असमानता का बोझ है और इसके लिए सरकार जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी 50 साल के उच्चतम स्तर पर है और 40 प्रतिशत युवा स्नातक बेरोजगार हैं। जुलाई 2026 में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के हर छह में से एक युवा बेरोजगार था। उन्होंने कहा कि हर वर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा अब टूट चुका है।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि खुदरा महंगाई 19 महीने के उच्चतम स्तर पर है। चीनी, प्याज, टमाटर, दाल, खाद्य तेल, चावल और दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और सीएनजी भी आम लोगों के लिए महंगे होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्गीय परिवार किसी तरह गुजारा कर रहे हैं, जबकि गरीबों ने उम्मीद छोड़ दी है। खरगे ने आरोप लगाया कि देश में आर्थिक असमानता ब्रिटिश शासन के दौर से भी बदतर स्थिति में पहुंच गई है। उन्होंने दावा किया कि शीर्ष एक प्रतिशत लोगों के पास भारत की कुल संपत्ति का 40 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि निचले 50 प्रतिशत लोग केवल 15 प्रतिशत संपत्ति पर निर्भर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में गरीबों से अमीरों की ओर संपत्ति के सबसे बड़े हस्तांतरण को बढ़ावा दिया है।</p>
<p>उन्होंने सरकार पर 'क्रोनी कैपिटलिज्म' को अपनी एकमात्र आर्थिक नीति बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से कंपनियों के 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज बट्टे खाते में डाले जा चुके हैं। उन्होंने एक हालिया मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि 22,006 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले कर्जदाताओं को केवल 6.5 करोड़ रुपये की वसूली हुई, यानी 99.97 प्रतिशत की 'हेयरकट' हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 18:56:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस ने GDP आंकड़ों पर उठाए सवाल, सलमान सोज ने कहा- मजबूत अर्थव्यवस्था का दावा, फिर परिवार कर्ज लेने को मजबूर क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने जीडीपी आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी प्रवक्ता सलमान सोज और जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि आर्थिक मजबूती के दावे केवल कागजी हैं। उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी, गिरते रुपये, घटते एफडीआई और महंगाई के बीच आंकड़ों की बाजीगरी कर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-raised-questions-on-gdp-figures-salman-soz-said/article-164386"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/salman-soj.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों का जश्न मना रही है लेकिन यदि अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है तो उसका असर आम लोगों की जिंदगी में क्यों दिखाई नहीं दे रहा है। कांग्रेस के मीडिया पैनलिस्ट सलमान सोज ने मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो परिवारों को अपने खर्च के लिए कर्ज क्यों लेना पड़ रहा है, पिछले एक दशक में ग्रामीण मजदूरी महंगाई की तुलना में मामूली रूप से ही क्यों बढ़ी है और निजी निवेश स्थिर क्यों है। उन्होंने कहा कि जनता केवल आंकड़ों पर विश्वास नहीं करती, बल्कि यह जानना चाहती है कि अर्थव्यवस्था की कथित मजबूती का लाभ जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है।</p>
<p>सलमान सोज ने सवाल किया कि देश में जीडीपी के हिस्से के रूप में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) शून्य क्यों है और युवाओं में बेरोजगारी दर 16 प्रतिशत क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 250 लाख करोड़ रुपये निकाले जा चुके हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है तो निर्यात में उसकी हिस्सेदारी पहले के मुकाबले इतनी कम क्यों है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि जब डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 58 रुपये था, तब भारतीय जनता पार्टी के नेता कहते थे कि रुपया 'वेंटिलेटर' पर है, लेकिन आज रुपया करीब 95 रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को केवल आर्थिक आंकड़ों से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। जनता यह जानना चाहती है कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है तो उसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। देश में अभी भी बहुत समस्याएं हैं और भविष्य में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं लेकिन सरकार इससे बेखबर है और केवल आंकड़ों को बेचने में लगी है। </p>
<p>इस बीच, कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि जीडीपी के आंकड़े महज ‘सांख्यिकीय कसरत’ है और सरकार बार-बार पद्धति बदलकर जीडीपी आंकड़ों को अपने हिसाब से तय कर रही है और देश की खराब आर्थिक वास्तविकता को छिपा रही है। उनका कहना था कि नाममात्र और वास्तविक जीडीपी के बीच का अंतर महंगाई को दर्शाता है और सरकार के अनुसार यह अंतर केवल 2.3 प्रतिशत है, जबकि इस तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई नौ प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने इसे स्पष्ट विसंगति बताते हुए आरोप लगाया कि यह स्थिति सरकार ने गणना की पद्धति में बदलाव कर पैदा की है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ ने बहुत कम हासिल किया है लेकिन सरकार की प्रमुख ‘फेक इन इंडिया’ योजना बेरोकटोक जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 18:33:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रमोद तिवारी का केंद्र पर हमला, बोले-महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक पर सरकार जारी करें श्वेत पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार से महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और नीट पेपर लीक मामलों पर "श्वेत पत्र" जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार 2014 के चुनावी वादों का हिसाब दे। साथ ही, 80 परीक्षाओं के पेपर लीक को संगठित अपराध बताते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pramod-tiwari-attacked-the-center-and-said-government-should/article-154267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pramod-tiwari1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस राज्यसभा सांसद एवं उप नेता विपक्ष प्रमोद तिवारी ने सोमवार को केंद्र सरकार से महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और नीट पेपर लीक समेत विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक मामलों पर "श्वेत पत्र" जारी करने की मांग की। प्रमोद तिवारी ने यहां अपने बयान में कहा कि वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान केद्र सरकार ने जनता से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन आज उन वादों की स्थिति जनता के सामने है। जिस पेट्रोल की कीमत 35 रुपये प्रति लीटर करने का वादा किया गया था, वह आज लगभग 100 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुकी है। वहीं घरेलू गैस सिलेंडर, जो करीब 400 रुपये का था, अब लगभग 1000 रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल दो करोड़ नौकरियां देने, लोगों के खातों में 15-15 लाख रुपये आने, विदेशों से काला धन वापस लाने और किसानों की आय दोगुनी करने जैसे वादे पूरे नहीं हुए।</p>
<p>प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार बताए कि इन वादों में कितना काम हुआ और कितना बाकी है। नीट समेत करीब 80 परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संगठित अपराध का मामला है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की तथा भविष्य में निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/pramod-tiwari-attacked-the-center-and-said-government-should/article-154267</link>
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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:05:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा ने हिमाचल सरकार के बजट को बताया 'बैक गियर बजट': आवंटन में 4,000 करोड़ रुपये की कटौती का लगाया आरोप, जन-विरोधी बजट का जताया कड़ा विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुक्खू के 2026-27 बजट को दिशाहीन करार दिया है। उन्होंने ₹4,000 करोड़ की कटौती और 1500 रुपये महिला सम्मान राशि जैसे चुनावी वादे पूरे न करने पर सरकार को घेरा। भाजपा का आरोप है कि बजट में युवाओं और किसानों के लिए केवल खोखले आंकड़े हैं, जो विकास को पीछे धकेल देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-called-himachal-governments-budget-a-back-gear-accused-it/article-147416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/himachal-pradesh-budget-2026.png" alt=""></a><br /><p>शिमला। हिमाचल प्रदेश में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से पेश किए गये वित्त वर्ष 2026-2027 के बजट "बैक गियर बजट" करार दिया है और कहा है कि राज्य के विकास को पीछे धकेल देगा। शिमला में मीडिया को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि इस बजट में दूरदर्शिता की कमी है और यह लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने पिछले वर्ष की तुलना में बजट आवंटन में लगभग 4,000 करोड़ रुपये की कटौती की है, जिसका विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>बिंदल ने कहा कि राज्य में बजट आवंटन में इतनी बड़ी कटौती शायद ही कभी देखने को मिली है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे बुनियादी ढांचे के विकास और कल्याणकारी कार्यक्रमों की गति धीमी पड़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में जिन कई योजनाओं को प्रमुखता से दिखाया गया है, वे असल में राज्य द्वारा शुरू किए गए नये कार्यक्रमों के बजाय, मत्स्य पालन, कृषि, बागवानी और पशुपालन से संबंधित केंद्र प्रायोजित योजनाओं का ही नया रूप हैं।</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस सरकार पर राज्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए बार-बार केंद्र सरकार को दोषी ठहराने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, केंद्र प्रायोजित योजनाओं से राज्य को काफी फायदा होने के बावजूद, बजट दस्तावेज़ की शुरुआत श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना से होती है। कांग्रेस पार्टी की 2022 के चुनावों की गारंटियों को निशाना बनाते हुए श्री बिंदल ने उन्हें "जनता के विश्वास के साथ धोखा" बताया। उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में एक लाख सरकारी नौकरियाँ देने और पाँच लाख रोज़गार के अवसर पैदा करने जैसे वादे पूरे नहीं किए गये हैं। उन्होंने बताया कि 28 लाख महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने का वादा अभी तक लागू नहीं किया गया है।</p>
<p>बिंदल ने आगे आरोप लगाया कि 100 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध खरीदने की प्रतिबद्धता को घटाकर 60 रुपये कर दिया गया है, जिसे उन्होंने किसानों और डेयरी उत्पादकों के लिए गुमराह करने वाला कदम बताया। अन्य मोर्चों पर सरकार की आलोचना करते हुए, उन्होंने दावा किया कि बजट में कानून-व्यवस्था, बढ़ती माफिया गतिविधियों, अस्पतालों में दवाओं की कमी और बंद पड़े संस्थानों को फिर से खोलने से संबंधित चिंताओं का ठीक से समाधान नहीं किया गया है। बजट को खोखले आँकड़ों का पुलिंदा बताते हुए, श्री बिंदल ने कहा कि इसमें युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए स्पष्ट दिशा और सार्थक राहत का अभाव है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस जन-विरोधी बजट का कड़ा विरोध करेगी और हर मंच पर इस मुद्दे को उठाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 14:03:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>&quot;महिला अपराध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, ध्वस्त कानून व्यवस्था, बढती महंगाई&quot; उत्तराखंड़ कांग्रेस ने सांकेतिक रूप से गुब्बारे उड़ा कर सरकार का जताया विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ गुब्बारे उड़ाकर प्रदर्शन किया। पार्टी ने 16 फरवरी को राजभवन घेराव के जरिए भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uttarakhand-congress-symbolically-expressed-its-protest-against-the-government-by/article-143284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(29)1.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून में रविवार को प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने महिला अपराध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, ध्वस्त कानून व्यवस्था, बढती महंगाई के सांकेतिक गुब्बारे उड़ाकर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का आगाज किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने गुब्बारों पर संदेश और नारे लिखकर उड़ाया।</p>
<p>इस अवसर पर राजभवन घेराव कार्यक्रम के संयोजक प्रीतम सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने तय कर दिया है कि 16 फरवरी को होने वाले कार्यक्रम के माध्यम से भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया जायेगा जिसकी शुरूआत कांग्रेस पार्टी कर चुकी है।</p>
<p>पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने कहा कि सोमवार के प्रदर्शन राजभवन घेराव में प्रदेश के कोने-कोने से कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचेंगे तथा यह घेराव ऐतिहासिक होगा जो भाजपा सरकार की जड़ों को हिलाने का काम करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 16:52:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूसी राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने फिनलैंड में आई मुसिबतों के लिए रिश्ते में आई खटास को ठहराया जिम्मेदार, कहा-ईस्टर्न ट्रेड के खत्म होने से देश में आई गहरी आर्थिक मंदी</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने कहा कि रूस से संबंध तोड़कर फिनलैंड गहरे आर्थिक संकट, रिकॉर्ड बेरोजगारी और भारी कर्ज में डूब गया है। देश की जीडीपी वृद्धि भी शून्य हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-ambassador-pavel-kuznetsov-blamed-the-sourness-in-relations-for/article-143164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(8)1.png" alt=""></a><br /><p>हेलेंस्की। फिनलैंड में रूस के राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने कहा है कि रूस के साथ संबंध टूटने के कारण फिनलैंड संकट का सामना कर रहा है। देश में रिकॉर्ड बेरोजगारी, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में शून्य वृद्धि, तेजी से बढ़ता राज्य ऋण और बजट घाटा बहुत ज्यादा है।</p>
<p>रूसी राजदून कुजनेत्सोव ने कहा, फिनलैंड अपने आधुनिक इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक से गुजर रहा है। मौजूदा सामाजिक-आर्थिक स्थिति की तुलना 1990 के दशक के उस संकट से की जा सकती है, जब सोवियत संघ के पतन के बाद ईस्टर्न ट्रेड के खत्म होने से देश गहरे आर्थिक मंदी में चला गया था। </p>
<p>पावेल कुजनेत्सोव के अनुसार, विशेष सैन्य अभियान शुरू होने के बाद फिनलैंड ने रूस के साथ सभी संपर्क और संबंध तोड़ दिये, जिससे दशकों में विकसित व्यापार और आर्थिक सहयोग को झटका लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि फिनलैंड ने यह कदम स्वयं की पहल पर उठाया और अब उसके परिणाम भुगत रहा है।</p>
<p>राजदूत ने कहा कि हाल के वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि ठप हो गयी है और वर्ष 2025 में जीडीपी वृद्धि शून्य या उससे थोड़ा अधिक रहने की संभावना है। सार्वजनिक वित्त की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक ऋण तेजी से बढ़ रहा है और अब जीडीपी के लगभग 90 प्रतिशत के करीब पहुंच चुका है, जबकि कुछ समय पहले तक यह 60 प्रतिशत से कम था। वर्ष 2024 में बजट घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहा और 2025 में इसके और बढऩे की आशंका है।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि फिनलैंड में बेरोजगारी दर 10.6 प्रतिशत तक पहुंच गयी है, जो यूरोपीय संघ में सबसे अधिक बतायी जा रही है। साथ ही, 1990 के दशक के संकट के बाद से कंपनियों द्वारा दिवालिया होने के लिए दायर आवेदनों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो 3,900 से अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 14:53:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना, बोलें-अमेरिका के साथ समझौता कपास किसान, कपड़ा निर्यातक दोनों पर गहरी चोट</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका कपास समझौता किसानों और कपड़ा निर्यातकों के लिए घातक है। उन्होंने इसे "नरेंद्र सरेंडर मोदी" की नीति बताते हुए लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-targets-central-government-says-agreement-with-america-is/article-143141"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/rahul-gandhi-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता कर मोदी सरकार कपास उत्पादक किसान और कपड़ा निर्यातक दोनों को गहरा झटका दिया है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, 18 प्रतिशत टैरिफ बनाम जीरो प्रतिशत-आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इस पर भ्रम फैला रहे हैं और किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर शून्य प्रतिशत टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है - शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करें। भारत के गारमेंट्स पर 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बंगलादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया -'अगर यही फायदा हमें भी चाहिए तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी। आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई। और, ये कैसी नीति है। क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है - या फिर'आगे कुआं, पीछे खाई की हालत में फंसाने वाला जाल।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा और अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।</p>
<p>भारत में कपड़ा उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोजी रोटी इन्हीं पर टिकी है। इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोजगारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना। उन्होंने कहा, एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और कपड़ा एक्सपोर्टर्स-दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती, लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र सरेंडर मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 12:23:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विपक्ष ने बजट में पूंजीगत व्यय और राज्यों के आवंटन में कमी पर सरकार को घेरा, सत्ता पक्ष बोला यह देश की आकांक्षाओं को करेगा पूरा</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा में बजट पर विपक्ष ने कटौती, बेरोजगारी पर सवाल उठाए, जबकि सत्तापक्ष ने इसे विकसित भारत की दिशा में जनआकांक्षाओं को पूरा करने वाला बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-opposition-cornered-the-government-on-the-lack-of-capital/article-142525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(24).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में आम बजट को लेकर सोमवार को विपक्ष और सत्ता पक्ष ने अपनी- अपनी दलीलें दी जिसमें विपक्षी दलों ने जहां बजट में पूंजीगत व्यय, मंत्रालयों और राज्यों के आवंटन में कमी तथा पिछले वादों को पूरा नहीं करने का मुद्दा उठाया वहीं सत्ता पक्ष ने इसे लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने तथा देश को विकसित भारत की ओर तेजी से आगे बढाने वाला बजट करार दिया। पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदम्बरम ने बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय के साथ-साथ रक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, शहरी आवास और सामाजिक कल्याण के आवंटन में कमी की गयी है। उन्होंने मुख्य रूप से पूंजीगत निवेश में कमी, बढती बेरोजगारी और धीमी विकास दर को लेकर सरकार को घेरते हुए कटाक्ष किया कि उसकी रिफॉर्म एक्सप्रेस पटरी से उतर गयी है। उन्होंने कहा कि बजट में आर्थिक सर्वेक्षण में बयान की गयी हकीकतों की अनदेखी की गयी है।</p>
<p>बजट पर अपनी सटीक प्रतिक्रिया करते हुए उन्होंने कहा, यह बजट सतर्क है, कंजूस है और बीते वर्ष को भुला देने वाला है,यह जल्द ही परिदृश्य से ग़ायब हो जाएगा। यह अखबारों से भी ग़ायब हो चुका है और किसी और सौदे तथा किसी और मंत्री ने सुर्खयिाँ घेर ली है। यह एक भुला दिए जाने वाला बजट है, जिसे एक ऐसी वित्त मंत्री ने तैयार किया है जिसने पिछले साल सदन में किए गए अपने वादों को भुला दिया। </p>
<p>चिदम्बरम ने कहा कि देश में बेरोजगारी की दर 15 प्रतिशत पहुंच गयी है और 25 प्रतिशत से भी कम कार्यबल के पास नियमित रोजगार है। लोगों को अपने काम करने की ओर रुख करना पड़ रहा है।  प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2024-24 में बहुत अधिक घट गया है और निजी निवेश भी 22 प्रतिशत पर आ गया है। उन्होंने कहा कि निवेश नहीं आने के बावजूद सरकार ने पूंजीगत व्यय में 44 लाख करोड़ की कमी की है। </p>
<p>कांग्रेस सदस्य ने कहा कि कुल मिलाकर देखें तो सरकार ने पूंजीगत खर्च में एक लाख करोड़ रुपये की कमी लेकिन रिजर्व बैंक ने ही तीन लाख करोड़ रुपये का लाभांश दिया है तो फिर यह कमी क्यों की गयी। उन्होंने कहा कि अजीब स्थिति है कि निवेश भी नहीं आ रहा है और सरकार भी पूंजीगत खर्च कम रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के लिए पैसे का आवंटन कम कर दिया है। जल जीवन मिशन में पिछले वर्ष केवल 17 हजार करोड रुपये का खर्च किया गया है और इस बार सरकार ने 50 हजार करोड़ रुपये की कमी कर दी। उन्होंने कहा कि राज्यों को दी जाने वाली राशि में </p>
<p>33 हजार करोड़ रुपये की कमी की गयी है। सदस्य ने कहा कि रक्षा क्षेत्र का बजट जीडीपी का 1.6 प्रतिशत है जो काफी कम है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बजट में भी कमी की गई है। चिदम्बरम ने कहा कि बायो फार्मा क्षेत्र के लिए बजट में पांच वर्ष के लिए दस हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जिसमें से आगामी वित्त वर्ष के लिए केवल 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।</p>
<p>सत्तापक्ष के अरूण सिंह ने कहा कि विपक्ष आलोचना करते समय इस बात को भूल जाता है कि उसके समय में बजट के लिए किया जाने वाला आवंटन अब 16. 6 करोड से बढकर 53.5 लाख करोड रुपये पहुंच गया है जो तीन गुना बढा है। उन्होंने कहा कि यह देश के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला तथा विकसित भारत के लिए आर्थिक प्रगति को तेज करने का संकल्प दिखता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि बजट में पूंजीगत खर्च के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। वित्तीय घाटे का 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य सराहनीय है और उसे देखते हुए पूंजीगत खर्च को धीरे धीरे बढाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूंजीगत खर्च बढकर बजट का 22.8 प्रतिशत पहुंच गया है जो कांग्रेस के समय 6.7 प्रतिशत था। </p>
<p>सत्तापक्ष के नेता ने कहा कि सरकार की नीतियों और सुधार प्रक्रिया से लोगों का उस पर भरोसा बढा है और आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या कांग्रेस के समय के चार करोड से बढकर नौ करोड़ पहुंच गयी है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में और मोबाइल के क्षेत्र में निर्यात निरंतर बढ रहा है। इलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में भी निर्यात पहले की तुलना में तीन गुना बढा है। उन्होंने कहा कि चालू खाते का घाटा भी जल्दी ही सरपल्स पर चला जायेगा। साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बढ रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया के सबसे बड़े देशों के साथ व्यापार समझौते किये हैं जिससे भारत के प्रति बढते विश्वास का पता चलता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों में महंगाई की दर 9.4 प्रतिशत थी जो अब 2.4 प्रतिशत से भी कम है। बजट में आवास क्षेत्र के लिए 85 हजार करोड का बजट आवंटित किया गया है। किसानों और गरीबों का आर्थिक सशक्तीकरण किया जा रहा है। विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस बार विकसित भारत जी राम जी का बजट 42 प्रतिशत बढाकर 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये किया गया है। </p>
<p>तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बजट आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर पूरी तरह खामोश है। उन्होंने सवाल किया कि जब राज्यों का बजट कम किया जायेगा तो देश विकास कैसे करेगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि उसके छह बजट बिना जनगणना के लाये गये हैं ऐसे में इन बजटों के आवंटन को कैसे सही माना जा सकता है। उन्होंने जनगणना में स्व गणना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने यह काम कोविड के समय जनगणना रोकने के बजाय उस समय क्यों नहीं किया। </p>
<p>उन्होंने जन धन योजना के 13 करोड़ खाते बंद किये जाने का उल्लेख करते हुए सरकार के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर करने के दावों पर भी सवाल उठाया। सदस्य ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के विकास और जीडीपी के आंकड़ों को लेकर बेस ईयर पर सवाल उठाया है लेकिन सरकार पर इसका असर नहीं है। बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कितने युवाओं को रोजगार दिया इसकी संख्या कभी नहीं बतायी जाती। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी 40 प्रतिशत कम हुई है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनसे रुपया गिर रहा है। </p>
<p>तृणमूल नेता ने राज्यों के साथ भेदभाव का सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल का दो लाख करोड़ रुपया रोका गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य का मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना का सबसे अधिक पैसा रोका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर के नाम पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) ला रही है।</p>
<p>द्रमुक के पी विल्सन ने कहा कि भारत का कर्ज निरंतर बढ रहा है और इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने तथा कर्ज को कम करने की कोई योजना नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर आशंकाओं को दूर नहीं किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि भारत ने इस समझौते में अमेरिका से 500 अरब डालर की खरीद की प्रतिबद्धता जतायी है। इसे एकतरफा समझौता बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत जीरो टैरिफ लगा रहा है तो अमेरिका की ओर से 18 प्रतिशत टैरिफ क्यों लगाया जा रहा है। उन्होंने कर धोखाधड़ी कर विदेश भागने वाले भगोड़ों को जल्द देश लाये जाने की मांग की। </p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार अमृत और स्मार्ट सिटी के लिए बजट को नहीं बढा रही है और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अपने वादे को भी पूरा नहीं कर रही। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 18:50:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जर्मनी में रोजगार संकट, नौकरी मिलने की संभावना रिकॉर्ड निचले स्तर पर</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मनी में नौकरी मिलने की संभावना रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गई है। संघीय रोजगार एजेंसी के अनुसार, प्लेसमेंट इंडिकेटर 7 से घटकर 5.7 रह गया है। आर्थिक मंदी और ऊर्जा संकट के कारण बेरोजगारी 30 लाख के करीब पहुंच गई है। सरकार अब रोजगार बढ़ाने के लिए सख्त शर्तों वाले नए बुनियादी आय ढांचे पर विचार कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/employment-crisis-in-germany-chances-of-getting-a-job-at/article-137523"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/jurmany-jo.png" alt=""></a><br /><p>जर्मनी। जर्मनी में नौकरी मिलने की संभावना रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है और सामान्यत: लगभग सात अंकों पर रहने वाला नौकरी प्लेसमेंट इंडिकेटर गिरकर 5.7 पर पहुंच गया है जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। संघीय रोजगार एजेंसी की प्रमुख एंड्रिया नाहलेस ने डीडब्ल्यू न्यूज से बातचीत करते हुए कहा श्रम बाजार को महीनों से एक पटरे की तरह बताया, जिसमें कोई गति नहीं आ रही है। नाहलेस ने कहा कि नए रोजगार आकांक्षी लोगों के लिए संभावनाएं विशेष रूप से कमजोर हैं, और यहां तक कि अच्छी योग्यता वाले कर्मचारियों की भी नौकरी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, हमने पिछले 25 वर्षों में किसी भी समय की तुलना में कम युवाओं को अप्रेंटिसशिप दी है। उनकी टिप्पणियां आर्थिक मंदी के बीच आई हैं, जो बर्लिन के सस्ती रूसी ऊर्जा आयात रोकने के फैसले के बाद आई, जो जर्मन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण थी। रूसी पाइपलाइन डिलीवरी बड़े पैमाने पर रुकने और नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनों के तोडफ़ोड़ के बाद यूरोपीय गैस कीमतें बढ़ गईं।</p>
<p>साल की पहली तीन तिमाहियों में व्यावसायिक दिवालियापन 11 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिससे नौकरियों में भारी कमी आई। हाले इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च का अनुमान है कि 2025 में लगभग 170,000 पद प्रभावित होंगे, जबकि कोविड-19 महामारी से पहले यह संख्या 100,000 से भी कम थी। अगस्त में बेरोजगारी तीस लाख के आंकड़े को पार कर गयी, नवंबर में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 100,000 से अधिक अतिरिक्त लोगों को रोजगार मिला</p>
<p>जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट (आईडब्ल्यू) के अनुसार, अर्थव्यवस्था कमजोर विदेशी मांग, उच्च ब्याज दरों और लंबे समय से चल रही ऊर्जा संकट के कारण मंदी की स्थिति में प्रवेश कर गई। प्रारंभिक संकुचन के अनुमान के बाद, जीडीपी अब केवल 0.2 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है, जबकि 2026 के लिए केवल 0.9 प्रतिशत की भविष्यवाणी की गई है।</p>
<p>दिसंबर के मध्य में, सरकार ने बेरोजगारी भत्तों में सुधारों को मंजूरी दी, जिसके तहत तीन साल बाद मौजूदा प्रणाली को एक नए बुनियादी आय ढांचे से बदल दिया जाएगा। इन परिवर्तनों में लाभार्थियों के लिए सख्त शर्तें और कठोर प्रतिबंध लागू किए गए हैं, जिसका घोषित उद्देश्य रोजगार प्राप्ति में तेजी लाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 16:17:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य में नौकरियों के लिए बन सकता है बहुत बड़ा खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने जताई गहरी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से तेजी से हो रहे आविष्कार से तमाम सुविधाएं मिल रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/artificial-intelligence-can-become/article-111657"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से तमाम सुविधाएं मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर रोजगार से जुड़ी चिंताएं भी लोगों को सता रही हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चिंता में अब सुप्रीम कोर्ट भी शामिल हो गया है। अदालत ने कहा- हालात ऐसे हो गए हैं कि भविष्य में ड्राइवर का काम भी एआई से होगा। इसके खतरनाक परिणाम हो सकते हैं और बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हो सकते हैं। </p>
<p>जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बात कही, जिसमें मांग की थी कि सरकार को इलेक्ट्रिकल वीकल्स की खरीद और उनके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने वाली नीति बनाने को कहा जाए। इसी पर चर्चा करते हुए अदालत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण ड्राइवरों के रोजगार पर भी असर पड़ेगा।</p>
<p>अदालत ने आगे कहा- यह एक बहुत बड़ी चिंता की बात है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इन ड्राइवरों का रोजगार नहीं जाना चाहिए। भारत में ड्राइवर की नौकरी से भी हजारों घर चलते हैं। इसी पर चर्चा करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एआई से तो वकीलों को भी टक्कर मिल रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बढ़ती हुई तकनीक है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Apr 2025 17:55:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बेरोजगार हुआ सांड अब आवारा होकर घूम रहा सड़कों पर</title>
                                    <description><![CDATA[सड़कों पर आवार घुमने वाले ये सांड अक्सर अपनी ताकत की आजमाइश करते नजर आ जाते हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-unemployed-bull-is-now-roaming-on-the-roads/article-85088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/114.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गांवों से लेकर शहरों तक एक समय लगभग हर कार्य के लिए बैलों का उपयोग होता था। लेकिन यह बैल आज बेरोजगार होकर यूं ही सड़कों पर घूम रहा है। जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। शहर में हर महीने किसी ना किसी इलाके से सांड द्वारा लोगों पर हमले की खबर आती है। इन सांडों द्वारा किए गए हमलों में कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। अगर इस सांड को फिर से काम मिल जाए तो ये सांड बैल बनकर लोगों को नुकसान पहुंंचाने के स्थान पर उनके काम आ सकता है। </p>
<p><strong>बेरोजगारी भी दूर करना जरूरी</strong><br />बैल पहले खेत जोतने, बैलगाड़ी चलाने, माल ढोने और घाणी चलाने में काम आते थे। ये सब काम अब मोटर करने लगी, जिससे सांड बेरोजगार हो चुका है। वहीं इंसान की बेराजगारी उसकी जान ले रही है तो सांड की बेराजगारी भी इंसान की ही जान ले रही है। सांड को अब फिर से बैल बनाने की आवश्यकता है। ताकि वो अपनी ताकत का सही स्थान पर उपयोग कर सके। सांड का मालिक भी उसे किसी काम नहीं होने पर खुला छोड़ रहा है। इस पर भी रोक लगाने की आवश्यकता है, ताकि सांड घर मिले और वो आवारा होकर सड़कों पर चिंघाड़ता ना घूमे।</p>
<p><strong>सड़कों पर करते ताकत की आजमाइश</strong><br />सड़कों पर आवार घुमने वाले ये सांड अक्सर अपनी ताकत की आजमाइश करते नजर आ जाते हैं। सड़कों पर होने वाले इनके दंगल की जनता दर्शक तो होती ही है। साथ ही अपनी जान को भी हथेली पर लिए चलती है कि पता नहीं कौनसा सांड कब अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए हमला कर दे। हालांकि ये भी स्वभाविक है कि सांड अपने आचरण का अनुसरण करता है। लेकिन जिनकी जान को वो खतरे में डालता है उनके लिए ये जीवन मरण का सवाल बन जाता है।  </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />सड़कों पर बड़े बड़े सांड सड़कों पर खुले घुमते रहते हैं, ये वाहनों के एकदम से सामने आ जाते हैं। हर समय इनके कारण हादसों की संभावना बनी रहती है। निगम भी इन्हें सड़कों से हटाने में बस खानापूर्ति करता है।<br /><strong>- ज्योति कुमारी, नयापुरा</strong></p>
<p>शहर के हर बड़े चौराहे पर सांडों का झुंड का झुंड बैठा रहता है, वाहनों को निकलने में परेशानी तो होती ही है। ये कभी भी वाहनों या लोगों पर हमला कर देते हैं। जिसके कई बार गंभीर परिणाम भी सामने आ चुके हैं।<br /><strong>- रूपेश जादौन, बोरखेड़ा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सांडों को पकड़ने का लगातार कार्य लगातार किया जा रहा है आगे भी जारी रहेगा। गौशाला में जगह की कमी के चलते कभी कभी कार्य धीमा हो जाता है। जिसके लिए अधिकारियों से भी बोला हुआ है। आस पास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले सांडों को रोकने जरूरत है तभी समस्या का समाधान हो सकेगा।<br /><strong>- जितेंद्र सिंह, चैयरमेन, गौशाला समिति, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 17:20:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा के संकल्प पत्र पर गहलोत का निशाना- मंहगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बात नहीं करती भाजपा</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा के घोषणा पत्र में जारी 'संकल्प पत्र' पर निशाना साधते हुए कहा है कि इसमें महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर वो बात नहीं कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gehlots-target-on-bjps-resolution-letter-bjp-does-not/article-75168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/ashok-gehlot-2-620x400.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा के घोषणा पत्र में जारी 'संकल्प पत्र' पर निशाना साधते हुए कहा है कि इसमें महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर वो बात नहीं कर रहे हैं।</p>
<p>मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि भाजपा वाले राम मंदिर, धारा 370 और जिनकी वे बात कर रहे हैं। ये मुद्दे नहीं बल्कि उनकी सरकार के फैसले हैं। आज देश मे ज्वलंत मुद्दा बेरोजगारी और महंगाई का बड़ा मुद्दा है। उस पर कोई बात नहीं कर रहा है। प्रदेश की सभी 25 लोकसभा सीटों पर भाजपा लगातार दो बार चुनाव जीती है, लेकिन इस बार माहौल वैसा नहीं है। अब माहौल कांग्रेस के पक्ष में है। देशभर में कांग्रेस के पक्ष में माहौल लगातार बन रहा है। कितनी सीट कांग्रेस के खाते में आएगी,इस पर तो नहीं कह सकते, लेकिन परिणाम चौंकाने वाले होंगे।</p>
<p>गहलोत ने कहा कि जो पार्टी सत्ता में होती है, उसकी पहली ड्यूटी यह होती है कि जो बर्निंग समस्याएं हैं, उनके बारे में विचार किया जाए। बेरोजगारी के लिए क्या प्लान है, उस पर कोई चर्चा नहीं है। महंगाई बहुत भयंकर है, उसकी चर्चा किसी भी बहस में नहीं हो रही है। बेरोजगारी और महंगाई पर राहुल गांधी बोलते हैं। कांग्रेस के नेता बोलते हैं या फिर इंडिया गठबंधन के नेता इन मुद्दों पर बात करते हैं। राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' और 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के दौरान जो फीडबैक मिला है। उसके आधार पर हमने अपना चुनावी घोषणा पत्र 'न्याय पत्र' जारी किया है। जिसमें पांच न्याय और 25 गारंटी दी है। मोदी के मिशन-2047 पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे 2047 की बात करते हैं, उनमें कोई दम नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Apr 2024 18:59:20 +0530</pubDate>
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