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                <title>China - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>China RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑप्टिकल संचार और 6जी तकनीक में चीन को मिली बड़ी कामयाबी, डेटा ट्रांसमिशन की गति में स्थापित किया नया विश्व कीर्तिमान</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[चीनी वैज्ञानिकों ने ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क को जोड़ने वाली प्रणाली बनाकर डेटा ट्रांसमिशन में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। यह 5G से दस गुना अधिक तेज और ऊर्जा-कुशल है।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-achieved-great-success-in-optical-communication-and-6g-technology/article-143986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/china-6g.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क को जोडऩे वाली एकीकृत संचार प्रणाली विकसित की है, जिसने डेटा ट्रांसमिशन की गति में नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। वैज्ञानिक जर्नल नेचर में गुरुवार को प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एआई डाटा केंद्रों में कंप्यूटरिंग शक्ति की बढ़ती मांग और अगली पीढ़ी के 6जी वायरलेस नेटवर्क के विकास के लिए विभिन्न परिस्थितियों में उच्च गति और कम विलंबता वाले सिग्नल ट्रांसमिशन की आवश्यकता होती है।</p>
<p>ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस संचार प्रणालियों के बीच हालांकि सिग्नल आर्किटेक्चर और हार्डवेयर में अंतर के कारण एक ही बुनियादी ढांचे पर दोनों प्रणालियों के बीच उच्च गति और अनुकूल एंड-टू-एंड ट्रांसमिशन हासिल करना कठिन रहा है। यह उच्च गति दूरसंचार नेटवर्क के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी, जिस पर चीनी शोध दल ने कामयाबी हासिल कर ली है।</p>
<p>पेकिंग विश्वविद्यालय, पेंग चेंग प्रयोगशाला, शंघाईटेक विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स इनोवेशन सेंटर की शोध टीम ने एक एकीकृत संचार प्रणाली विकसित की है, जो ऑप्टिकल फाइबर पर 512 जीबीपीएस और वायरलेस पर 400 जीबीपीएस का सिंगल-चैनल सिग्नल ट्रांसमिशन प्राप्त करती है।</p>
<p>पेकिंग विश्वविद्यालय में इस शोध पत्र के सह-लेखकों में से एक वांग शिंगजुन के अनुसार, यह नयी प्रणाली ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क दोनों के जरिये डुअल-मोड ट्रांसमिशन का समर्थन करती है। यह न केवल बैंडविड्थ की सीमाओं और शोर के संचय से बचाती है, बल्कि हस्तक्षेप-विरोधी क्षमताओं को भी बढ़ाती है।</p>
<p>दल ने बड़े पैमाने के 6जी उपयोगकर्ता एक्सेस परिदृश्य का अनुकरण भी किया है। इसमें 86 चैनलों पर मल्टीचैनल रियल-टाइम 8के वीडियो एक्सेस का प्रदर्शन किया गया। इसने वर्तमान 5जी मानक की तुलना में दस गुना से अधिक ट्रांसमिशन बैंडविड्थ हासिल की है। बहुत अधिक क्षमता वाले संचार को सक्षम करने के अलावा यह प्रणाली ऊर्जा की खपत, लागत और बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए विस्तार क्षमता के मामले में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती है। इस प्रणाली का ऑल-ऑप्टिकल आर्किटेक्चर मौजूदा ऑप्टिकल नेटवर्क के साथ निर्बाध एकीकरण को सक्षम बनाता है, जिससे मोबाइल एक्सेस नेटवर्क और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के बीच गहरे मेल को बढ़ावा मिलता है।</p>
<p>वांग ने उल्लेख किया कि इस नयी प्रणाली में 6जी बेस स्टेशन और वायरलेस डाटा केंद्र जैसे परिदृश्यों में महत्वपूर्ण अनुप्रयोग क्षमता है। यह दूरसंचार प्रणालियों के ढांचे को नया रूप दे सकती है, जिससे अगली पीढ़ी के अल्ट्रा-ब्रॉडबैंड, उच्च क्षमता एकीकृत फाइबर-वायरलेस संचार की नींव पड़ेगी।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:45:50 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>एआई शिखर सम्मेलन को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर तीखा हमला; बोलें-सरकार ने सम्मेलन को बना दिया तमाशा, चीन उठा रहा लाभ</title>
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                        <![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए एआई समिट को 'पीआर तमाशा' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय प्रतिभा के बजाय चीन और विज्ञापन को बढ़ावा दे रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhis-sharp-attack-on-the-center-regarding-ai-summit/article-143640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/rahul.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) शिखर सम्मेलन को लेकर मोदी सरकार पर बुधवार को हमला किया और कहा कि इस वैश्विक मंच का लाभ उठाने की बजाय मोदी सरकार अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल कर इसका तमाशा बना रही है।</p>
<p>राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सम्मेलन से भारतीय प्रतिभाओं को लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार पूरे शिखर सम्मेलन को अव्यस्थित कर इसे जनसंपर्क का तमाशा बना दिया है और सम्मेलन में चीन अब इसका लाभ उठा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन एक अव्यवस्थित जनसंपर्क तमाशा बन गया है, भारतीय डेटा बिक्री के लिए पेश किया जा रहा है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 13:25:53 +0530</pubDate>
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                <title>अरुणाचल सीमा के पास चीन ने सिचुआन में गुप्त परमाणु अड्डे को किया अपग्रेड, तेजी से बना रहा परमाणु हथियार </title>
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                        <![CDATA[सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार चीन अरुणाचल सीमा के पास सिचुआन में परमाणु ठिकानों का तेजी से विस्तार कर रहा है। 2030 तक चीन के पास 1,000 से अधिक परमाणु वारहेड होने का अनुमान है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-upgrades-secret-nuclear-base-in-sichuan-near-arunachal-border/article-143590"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम का तेजी से विस्तार कर रहा है। इसका खुलासा द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट से हुआ है। इसमें सैटेलाइट इमेजरी का विश्लेषण कर बताया गया है कि दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में चीन के न्यूक्लियर हथियार प्रोग्राम का तेजी से विस्तार हो रहा है। इमेजरी से पता चलता है कि अरुणाचल प्रदेश से लगभग 800 किलोमीटर दूर कई न्यूक्लियर-लिंक्ड साइट्स पर लगातार कंस्ट्रक्शन और मॉडर्नाइजेशन का काम किया जा रहा है। इससे भविष्य में भारत की चिंता बढ़ने की आशंका है, क्योंकि चीन अरुणाचल प्रदेश पर अधिकार का दावा करता है।</p>
<p><strong>परमाणु हथियारों के मामले में दुनिया का तीसरा बड़ा देश</strong></p>
<p>चीन अपने परमाणु हथियारों के भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है। पिछले 10 वर्षों में चीन परमाणु हथियारों के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अनुमान के मुताबिक, 2026 की शुरूआत तक चीन के परमाणु वॉरहेड्स की संख्या लगभग 600 होगी, जो सिर्फ रूस और अमेरिका से पीछे है। रूस के पास लगभग 5,400 वॉरहेड्स हैं और अमेरिका के पास 5,100 से 5,200 के बीच वारहेड्स हैं। पेंटागन का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक चीन के पास 1000 से अधिक परमाणु वारहेड्स होंगे।</p>
<p><strong>सिचुआन में चीन की नापाक चाल का खुलासा</strong></p>
<p>द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन सिचुआन में स्थित परमाणु फैसिलिटी को तेजी से अपग्रेड कर रहा है। इस फैसिलिटी की शुरूआत छह दशक पहले शीत युद्ध के दौरान हुई थी। इसे चीन के पहले तानाशाह माओत्से तुंग के थर्ड फ्रंट प्रोग्राम के तहत बनाया गया था, ताकि जरूरी रक्षा उद्योग को सुरक्षा की दृष्टि से कमजोर तटीय इलाकों से हटाकर पहाड़ी इलाकों में शिफ्ट किया जा सके। इसका मकसद अमेरिका या उस समय के सोवियत यूनियन के हमलों की हालत में तबाही के खतरे को कम करना था। इस पहल के तहत, दक्षिण-पश्चिमी चीन की दूर-दराज की घाटियों में न्यूक्लियर प्रोडक्शन फैसिलिटीज, लैबोरेटरी और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए गए।</p>
<p><strong>परमाणु फैसिलिटी को अपग्रेड कर रहा चीन</strong></p>
<p>पिछले दो दशकों में खासकर 2019 के बाद से चीन ने कई परमाणु फैसिलिटी पर कंस्ट्रक्शन के काम तेज किए हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया है। इसे चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में परमाणु हथियारों की बढ़ती भूमिका का संकेत माना जा रहा है। </p>
<p><strong>भारत की सुरक्षा को खतरा </strong></p>
<p>अरुणाचल प्रदेश के पास चीन के परमाणु फैसिलिटी के अपग्रेडेशन से भारत की चिंता बढ़ सकती है। भारत और चीन में पुराना सीमा विवाद है। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश पर दावा जताता रहता है। ऐसे में अरुणाचल प्रदेश के पास चीन के परमाणु हथियारों के निर्माण और मौजूदगी से भारत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 11:13:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चीन में भीषण सड़क हादसा: देखते ही देखते जमीन के अंदर समा गया सड़क का बड़ा हिस्सा, कोई हताहत नहीं</title>
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                        <![CDATA[चीन के शंघाई के मिनहांग जिले में सबवे निर्माण स्थल पर तकनीकी खराबी से सड़क का हिस्सा धंस गया। घटना सीसीटीवी में कैद, प्रशासन ने किसी के घायल न होने की पुष्टि की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/horrible-road-accident-in-china-a-large-part-of-the/article-142926"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>चीन। चीन के शंघाई के मिनहांग जिलें से बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि यहां एक सबवे कंस्ट्रक्शन साइट पर तकनीकी खराबी के सड़क का बड़ा हिस्सा जमीन में धंस गया। बता दें कि ये पूरा हादसा वहां पर लगे सीसीटीवी में कैद हो गया, जिसमें सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंसता हुआ दिख रहा है।</p>
<p>हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने या हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई है। स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि किसी की मौत या चोट नहीं आई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना किक्सिन रोड और लियान रोड के जंक्शन पर हुई, यह वह इलाका है जहां अभी नई जियामिन मेट्रो लाइन के लिए बड़े अंडरग्राउंड काम चल रहे हैं।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:32:19 +0530</pubDate>
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                <title>रूसी विदेश मंंत्री सर्गेई लावरोव का दावा, तनाव बढ़ाने की दिशा में पहला कदम नहीं उठाएंगे हम, न्यू स्टार्ट की अवधि समाप्त</title>
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                        <![CDATA[नयी सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (न्यू स्टार्ट) की अवधि समाप्त होने के बाद रूस अमेरिका के कदमों पर कड़ी नजर रखेगा। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि किसी औपचारिक प्रतिबंध के अभाव में अब यह देखना अहम है कि वाशिंगटन कैसे व्यवहार करता है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-foreign-minister-sergei-lavrov-claims-that-we-will-not/article-142673"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)3.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मंगलवार को कहा कि नयी सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (न्यू स्टार्ट) की अवधि समाप्त होने के बाद अब रूस इस बात पर बारीकी से नजर रखेगा कि अमेरिका क्या कदम उठाता है। लावरोव ने रूस के राष्ट्रीय टीवी चैनल के एक साक्षात्कार में कहा, किसी भी प्रतिबंध की औपचारिक अनुपस्थिति के बाद अब हम बहुत करीब से देखेंगे कि अमेरिकी पक्ष कैसे कार्य करेगा। साथ ही, हम इस स्थिति को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभालेंगे और तनाव बढ़ाने की दिशा में पहल करने वाले पहले पक्ष नहीं बनेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस तनाव बढ़ाने की दिशा में पहला कदम नहीं उठाएगा।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस की क्षमताओं को ध्यान में रखे बिना भविष्य में किसी बहुपक्षीय हथियार नियंत्रण समझौते की कल्पना करना कठिन है। इसके आगे विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से कहा है कि अब चीनियों के साथ समझौता करना आवश्यक है। चीन ने कई बार अपना रुख स्पष्ट किया है और हम उसका सम्मान करते हैं। लेकिन अगर इस प्रक्रिया का ध्यान इस तरह के त्रिपक्षीय मोड की ओर स्थानांतरित किया जाता है, तो यह केवल मुद्दे के मूल सार को किनारे करने की इच्छा हो सकती है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 18:29:31 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>राष्ट्रीय सुरक्षा मामला: हांगकांग के पूर्व मीडिया दिग्गज जिम्मी लाई को 20 साल की सजा, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने का आरोप</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[हांगकांग के मीडिया उद्यमी जिम्मी लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून उल्लंघन में 20 साल जेल की सजा मिली, जो अब तक की सबसे कठोर सजा मानी जा रही है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/national-security-case-former-hong-kong-media-baron-jimmy-lai/article-142438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)6.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। हांगकांग के पूर्व मीडिया दिग्गज जिम्मी लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने के आरोप में 20 साल जेल की सजा सुनायी गयी है। यह जानकारी स्थानीय प्रसारक आरटीएचके ने सोमवार को दी।</p>
<p>दिसंबर 2025 में, हांगकांग उच्च न्यायालय ने लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन के तीनों मामलों में दोषी करार दिया था। प्रसारक ने कहा कि लाई को दी गई सजा 2020 के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन के लिए अब तक की सबसे कठोर सजा है।</p>
<p>लाई को अगस्त 2020 में विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत एवं धोखाधड़ी करने के आरोपों में हिरासत में लिया गया था। हांगकांग में 2019 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान रैलियां आयोजित करने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें 2021 में 20 महीने की जेल की सजा सुनाई गई। सजा पूरी करने के बावजूद, लाई अधिक गंभीर आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने तक हिरासत में रहे।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 14:17:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चीन ने कृत्रिम सूर्य में 1300 से अधिक सेकेंड तक प्लाज्मा प्रवाह बनाये रखकर रचा इतिहास, कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रमुख उपकरण</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[चीन के एचएच70 टोकामक ने 1,337 सेकंड तक स्थिर प्लाज्मा प्रवाह बनाए रखा, एआई और सुपरकंडक्टिंग तकनीक से संलयन ऊर्जा को सस्ती व व्यवहार्य बनाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-created-history-by-maintaining-plasma-flow-in-artificial-sun/article-142197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(14)5.png" alt=""></a><br /><p>शंघाई। चीन के शंघाई शहर में स्थित स्टार्टअप एनर्जी सिंगुलैरिटी ने घोषणा की है कि उसके एचएच70 उच्च तापमान सुपरकंडक्टिंग (एचटीएस) टोकामक (कृत्रिम सूर्य) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस नाभिकीय संलयन उपकरण ने 1,337 सेकंड तक निरंतर, लंबी अवधि के प्लाज्मा प्रवाह को बनाए रखने में सफलता हासिल की है।</p>
<p>सूर्य की नकल करने वाले परमाणु संलयन यंत्र को हमारी उर्जा जरूरतों को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रमुख उपकरण के तौर पर देखा जाता है।</p>
<p>चीन की पहली निजी संलयन ऊर्जा कंपनी के रूप में 2021 में स्थापित एनर्जी सिंगुलैरिटी ने जून 2024 में दुनिया के पहले एचटीएस टोकामक एचएच70 का निर्माण और संचालन पूरा किया था। इस उपकरण ने अब तक 5,755 प्रयोग किए हैं, जिसमें नवीनतम दौर ने हजार-सेकंड से अधिक तक उर्जा के स्थिर प्रवाह को प्राप्त किया है। इस स्तर तक स्थिर प्रवाह को प्राप्त करना एक शानदार उपलब्धि है क्योंकि प्लाज्मा बहुत गर्म होने के साथ ही बहुत अस्थिर होता है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि टोकामक से स्थाई उर्जा या बिजली प्राप्त करना तभी संभव है जब प्लाज्मा का प्रवाह लगातार स्थिर बना रहे। कंपनी के अनुसार, यह उपलब्धि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित प्लाज्मा नियंत्रण प्रणाली के निरंतर अनुकूलन से संभव हुई है।</p>
<p>एनर्जी सिंगुलैरिटी के सह-संस्थापक डोंग गे ने कहा, यह सफलता केवल समय के बारे में नहीं है, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दर्शाती है कि एचटीएस और एआई नियंत्रण प्रौद्योगिकियों का गहरा एकीकरण इंजीनियरिंग स्तर पर व्यवहार्य हो गया है। यह भविष्य के संलयन बिजली संयंत्रों के कम लागत और उच्च दक्षता वाले निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>
<p>डोंग ने कहा कि हमारा लक्ष्य संलयन ऊर्जा से बिजली की लागत को थर्मल पावर (तापीय ऊर्जा) के बराबर या उससे भी कम करना है। वर्तमान में, चीन सक्रिय रूप से खुद को संलयन ऊर्जा के लिए एक वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है और एचटीएस टोकामक एवं लेजर फ्यूजन सहित कई तकनीकों में लगातार प्रयोग कर रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 18:25:33 +0530</pubDate>
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                <title>विमानवाहक युद्धपोत को हवा में उड़ाने की तैयारी में चीन, पेश किया लुआननियाओ का कॉन्सेप्ट</title>
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                        <![CDATA[चीन ने मानवरहित ‘लुआननिआओ’ युद्धपोत का कॉन्सेप्ट दिखाया, जो अंतरिक्ष से हाइपरसोनिक मिसाइल दागेगा और स्टील्थ जेट तैनात करेगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-introduced-the-concept-of-luanniao-in-preparation-to-blow/article-142123"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आधुनिक युद्ध के मैदान में अपनी धाक जमाने के लिए चीन ने स्टार वार्स शैली का एक युद्धपोत बनाने की योजना का अनावरण किया है। मानवरहित यह लड़ाकू जेट तैनात करने और अंतरिक्ष से मिसाइल दागने में सक्षम होगा। दरअसल, चीन की सरकारी मीडिया ने एक कॉन्सेप्ट वीडियो जारी किया है जिसमें लुआननिआओ को दिखाया गया है। वीडियो के अनुसार, यह दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत होगा, जो पृथ्वी के वायुमंडल में तेजी से उड़ान भर रहा है और सभी मौजूदा हवाई रक्षा प्रणालियों से बच रहा है।</p>
<p><strong>हाइपरसोनिक मिसाइलें दागने में सक्षम</strong></p>
<p>लुआननिआओ नामक यह प्रस्तावित युद्धपोत एक उड़ता हुआ किला होगा, जो अंतरिक्ष से हाइपरसोनिक मिसाइलें दागने और दर्जनों स्टील्थ लड़ाकू विमानों को तैनात करने की क्षमता रखेगा। प्रसारित हो रहे वीडियो में भयानक अंतरिक्ष यान को रॉकेट दागते हुए दिखाया गया है।</p>
<p><strong>अमेरिकी विमानवाहक पोतों से भी 20% अधिक शक्तिशाली</strong></p>
<p>द सन की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 2,000 फीट चौड़े इस त्रिकोणीय युद्धपोत को बसे शक्तिशाली अमेरिकी विमानवाहक पोतों से भी 20 प्रतिशत अधिक बताया जा रहा है। भूरे रंग के इस त्रिकोणीय आकृति की लंबाई लगभग 800 फीट और चौड़ाई 2000 फीट से अधिक होगी। इसका टेक-आॅफ वजन 120,000 टन बताया जा रहा है - जो आज उपयोग में आने वाले किसी भी अन्य समान विमानवाहक पोत से अधिक होगा। बीजिंग ने दावा किया कि यह भयावह नया जहाज 20 से 30 वर्षों में आसमान में दिखाई दे सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 11:36:41 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>भारत-बांग्लादेश तनाव के बीच भारतीय सीमा के पास ड्रोन की फैक्ट्री लगाने जा रहा चीन, जानें क्या है चीन और बांग्लादेश के बीच हो रहा ये समझौता?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बांग्लादेश ने चीन के साथ ड्रोन फैक्ट्री समझौता किया। तकनीक ट्रांसफर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास प्लांट से भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ी।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-india-bangladesh-tension-china-is-going-to-set-up-a/article-142111"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)13.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बांग्लादेश ने चीन के साथ मिलकर ड्रोन फैक्ट्री लगाने का बड़ा सौदा किया है। ये सौदा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते में तनाव की लकीरें गहरी होती जा रही है। बांग्लादेश और चीन के बीच ये सौदा भारत को असहज करने वाला है। यह समझौता सिर्फ ड्रोन खरीदने का नहीं, बल्कि उन्नत ड्रोन बनाने, असेंबल करने और भविष्य में खुद डिजाइन करने की तकनीक ट्रांसफर का है। यह डील बांग्लादेश एयर फोर्स (बीएएफ) और चीन की स्टेट-ओन्ड कंपनी चीन इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉपोर्रेशन (सीईटीसी) के बीच गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (जी2जी) आधार पर हुई है।</p>
<p>सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब लगेगा प्लांट: इस डील के तहत, फैक्ट्री बांग्लादेश के बोगरा इलाके में लगेगी। इसमें 2026 के अंत तक काम शुरू हो जाएगा। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि ये ड्रोन मुख्य रूप से मानवीय सहायता, आपदा प्रबंधन और सैन्य जरूरतों के लिए होंगे। लेकिन भारत इसे भूराजनीतिक खतरे के तौर पर देख रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह जगह भारत की संवेदनशील उत्तरी सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बहुत करीब है।</p>
<p>बांग्लादेश और चीन के बीच 27 जनवरी 2026 को ढाका कैंटनमेंट में ड्रोन डील साइन हुआ। इसमें सीईटीसी पूरी तकनीक ट्रांसफर करेगी। ड्रोन बांग्लादेश पहले असेंबल करेगा, फिर खुद ड्रोन बना सकेगा और अंत में स्वदेशी डिजाइन तक पहुंच जाएगा। शुरूआत में फैक्ट्री दो तरह के ड्रोन बनाएगी। पहले मीडियम अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (एमएएलई) यूएवी। ये लंबी दूरी की निगरानी और हमले के लिए होते हैं और वर्टिकल टेकआॅफ एंड लैंडिंग (वीटीओएल) यूएवी, जो अलग-अलग इलाकों में जल्दी तैनात हो सकते हैं। बीएएफ का बयान है कि यह सौदा बांग्लादेश को यूएवी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाएगा। प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 608 करोड़ टका (करीब 55 मिलियन डॉलर) है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 11:22:43 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>वन्यजीव संरक्षण के लिए चीन ने तैयार की नयी आद्रभूमि संरक्षण व्यवस्था, इकोलॉजिकल प्रयासों को मिलेगा बढ़ावा </title>
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                        <![CDATA[बीजिंग ने तालाबों व दलदलों की सुरक्षा हेतु बहु-स्तरीय व्यवस्था लागू की, जिससे 83 प्रतिशत से अधिक आद्रभूमि संरक्षित होकर वन्यजीव विविधता को सुरक्षित आवास मिलेगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-has-prepared-a-new-wetland-conservation-system-for-wildlife/article-141825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(14)2.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन की राजधानी बीजिंग ने अपने तालाब और दलदल स्थलों की सुरक्षा के लिए एक बहु-स्तरित संरक्षण व्यवस्था तैयार की है, जिससे उसकी वन्यजीव आबादी को प्रमुख आवास मिलेगा। बीजिंग नगर पालिका वानिकी और उद्यान ब्यूरो ने सोमवार को बताया कि यह नयी व्यवस्था उसके 83.15 प्रतिशत तालाबों और दलदलों (आद्रभूमि) को संरक्षित करती है। ब्यूरो के अनुसार, यह नयी व्यवस्था वन्यजीव विविधता संरक्षण और दूसरे इकोलॉजिकल प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए बीजिंग के प्राकृतिक रिजर्व, आद्रभूमि पार्क और दूसरे छोटे संरक्षित आद्रभूमि इलाकों का इस्तेमाल करता है। </p>
<p>पिछले पांच वर्षों में बीजिंग ने आद्रभूमि संरक्षण को बेहतर बनाने का काम जारी रखा गया है। अब तक, नगर पालिका की 61,200 हेक्टेयर आद्रभूमि में 50 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पौधों की प्रजातियां और 76 प्रतिशत स्थानीय जंगली जानवरों की प्रजातियां रहती हैं। बीजिंग के ये नये प्रयास आद्रभूमि संरक्षण और बहाली में चीन की बड़ी योजना का हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में, देश ने कानूनी सुरक्षा उपायों को मजबूत किया है और आद्रभूमि संरक्षण के लिए अपनी प्रबंधन व्यवस्था में सुधार किया है। राष्ट्रीय वानिकी एवं चारागाह प्राधिकरण ने कल कहा कि इसका कुल आद्रभूमि क्षेत्र अब एशिया में पहले और दुनिया में चौथे स्थान पर है। </p>
<p>प्राधिकरण ने कहा कि 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि (2026-2030) के दौरान, चीन आद्रभूमि के लिए अपने कानूनी और नियामक ढांचे में और सुधार करेगा, आद्रभूमि संरक्षण के लिए निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करेगा, और आद्रभूमि पारिस्थितिक उत्पादों के मूल्य को महसूस करने के लिए तंत्र स्थापित करने में तेजी लाएगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 17:23:13 +0530</pubDate>
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                <title>चीन ने अंतरिक्ष में जनरल पर्पज लार्ज स्केल एआई मॉडल किया स्थापित</title>
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                        <![CDATA[चीन ने अंतरिक्ष में पहला जनरल एआई मॉडल तैनात कर सैटेलाइट पर डेटा प्रोसेसिंग संभव की, जिससे रीयल-टाइम सैन्य खुफिया, हथियार निर्देश और सामरिक बढ़त मिलेगी, वैश्विक शक्ति संतुलन बदलेगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-installs-general-purpose-large-scale-ai-model-in-space/article-141513"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px).png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अंतरिक्ष में दुनिया का पहला जनरल पर्पज लार्ज स्केल एआई मॉडल स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर है। अंतरिक्ष की दौड़ में चीन की इस उपलब्धि से सामरिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इससे चीन अंतरिक्ष में जल्द ही एआई संचालित डाटा सेंटर स्थापित कर युद्ध के मैदान की रीयल टाइम इंटेलिजेंस हासिल कर सकता है। चीन ने अंतरिक्ष में मौजूद अपने सैटेलाइट क्लस्टर पर सीधे एआई प्रॉम्प्ट को प्रोसेस करने में सफलता पाई है। अब तक सैटेलाइट केवल तस्वीरें लेकर कच्चा डेटा जमीन पर प्रोसेस करने के लिए भेजते थे। अब भविष्य में चीन का स्पेस क्लाउड और डेटा सेंटर अंतरिक्ष में ही डेटा का विश्लेषण कर फौरन सटीक नतीजे धरती पर भेज पाएगा। युद्ध में लक्ष्य को पहचानने और नष्ट करने की प्रक्रिया अब तक जमीनी स्टेशनों पर निर्भर थी। चीन का एआई डाटा सेंटर बनने पर हथियार सीधे अंतरिक्ष से मिले निर्देशों पर काम कर सकते हैं।</p>
<p><strong>हाइपरसोनिक मिसाइलों की प्रभावशीलता बढ़ेगी</strong></p>
<p>हाइपरसोनिक मिसाइलों और स्वार्म ड्रोन जैसी प्रणालियों की प्रभावशीलता बढ़ सकती है। इससे विरोधी सेना को संभलने का मौका नहीं मिलेगा। चीन समुद्र में पनडुब्बियों और विमानवाहक पोतों की आवाजाही को रीयल-टाइम में ट्रैक कर सकता है। जमीन पर स्थित डाटा सेंटर्स को युद्ध में नष्ट भी किया जा सकता है, लेकिन अंतरिक्ष में तैरते डाटा सेंटर को रोकना मुश्किल होगा।</p>
<p><strong>अमेरिका के स्पेस-एक्स और स्पेस फोर्स भी कर रहे हैं काम</strong></p>
<p>अमेरिका भी स्पेस-एक्स और स्पेस फोर्स भी स्टारशील्ड परियोजना के जरिए रक्षा उपयोगी नेटवर्क पर काम कर रहा है। जनरल पर्पज लार्ज स्केल एआई मॉडल को अंतरिक्ष में सक्रिय करने से चीन अमेरिका से चंद कदम आगे दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अंतरिक्ष के सैन्यकरण में तेजी ला सकता है।</p>
<p><strong>वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत की सुरक्षा चिंता बढ़ेगी</strong></p>
<p>चीन की यह क्षमता वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ाने वाली है। एआई डाटा सेंटर की मदद से भविष्य में चीन सेना की तैनाती व अन्य गतिविधियों की निगरानी रीयल-टाइम में कर पाएगा। जाहिर है भारत को भी अब अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग और एज-एआई में गति बढ़ानी होगी।</p>
<p>रक्षा विशेषज्ञ और चीन के आधुनिकीकरण पर पैनी नजर रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद (रिटायर्ड) ने कहा कि चीन के मामले में भारत को बेहद सावधान रहना चाहिए। उसकी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताएं काफी आधुनिक हैं। हमें इसलिए सतर्क रहना है क्योंकि चीन के पास वह क्षमता होगी जिससे वो हम पर भारी पड़ सकते हैं। इसका कुछ न कुछ इलाज ढूंढना पड़ेगा। साथ ही चीन के साथ आर्थिक मोर्चे पर मिल कर भी चलना चाहिए। </p>]]>
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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 11:22:28 +0530</pubDate>
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                <title>जापान : प्रधानमंत्री ताकाइची ने संसद भंग की, आठ फरवरी को होंगे चुनाव</title>
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                        <![CDATA[प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने संसद भंग कर 8 फरवरी को मध्यावधि चुनाव की घोषणा की, लोकप्रियता के सहारे जनादेश लेने की कोशिश, बजट मंजूरी टलने की आशंका।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-prime-minister-takaichi-dissolves-parliament-elections-to-be-held/article-140654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(21).png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने पदभार संभालने के केवल तीन महीने बाद शुक्रवार को संसद के निचले सदन 'डाइट' को भंग कर दिया है, जिससे आगामी आठ फरवरी को होने वाले मध्यावधि चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। ताकाइची ने यह कदम अपनी वर्तमान लोकप्रियता का लाभ उठाने और हाल के वर्षों में अपनी पार्टी को हुए नुकसान की भरपाई करने के उद्देश्य से उठाया है। हालांकि, इस फैसले के कारण अर्थव्यवस्था को गति देने और बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए तैयार किए गए महत्वपूर्ण बजट को मंजूरी मिलने में देरी होने की संभावना है। सदन भंग होने की घोषणा के बाद सांसदों ने पारंपरिक 'बान्जाई' के नारे लगाए और चुनाव अभियान की तैयारियों में जुट गए।</p>
<p>अक्टूबर में जापान की पहली महिला नेता के रूप में निर्वाचित होने वाली ताकाइची की लोकप्रियता रेटिंग लगभग 70 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बनी हुई है। हालांकि, उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) अभी भी भ्रष्टाचार के आरोपों और यूनिफिकेशन चर्च के साथ पुराने संबंधों के कारण चुनौतियों का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह अपनी राजनीतिक साख दांव पर लगा रही हैं और अब जनता को यह तय करना है कि उन्हें पद पर बने रहना चाहिए या नहीं। वह अपने पूर्ववर्ती शिगेरु इशिबा की तुलना में अधिक कट्टर रूढि़वादी रुख अपना रही हैं और सैन्य मजबूती तथा सख्त आप्रवासन नीतियों पर जोर दे रही हैं।</p>
<p>ताकाइची ने दक्षिणपंथी 'जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) के साथ मिलकर एक नया गठबंधन बनाया है। यह बदलाव तब आया जब एलडीपी की पुरानी सहयोगी कोमेइतो पार्टी ने वैचारिक मतभेदों के कारण गठबंधन तोड़ दिया था। नए गठबंधन के तहत ताकाइची केवल पुरुषों के शाही उत्तराधिकार और परमाणु रिएक्टरों को फिर से शुरू करने जैसे लक्ष्यों पर आगे बढ़ रही हैं। दूसरी ओर, कोमेइतो ने विपक्षी कांस्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान के साथ मिलकर 'सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस' का गठन किया है। पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिको नोडा ने इस नए गठबंधन को समावेशी राजनीति और लोग पहले की नीति का एक अवसर बताया है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताकाइची के ताइवान समर्थक बयानों के बाद चीन के साथ जापान के संबंधों में तनाव बढ़ गया है, जिससे चीन ने आर्थिक और राजनयिक जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी जापान पर अपनी रक्षा क्षमताओं पर अधिक खर्च करने के लिए दबाव बना रहे हैं। </p>
<p>ताकाइची का मानना है कि उन्हें अपनी नीतियों को लागू करने के लिए जनता के स्पष्ट जनादेश की आवश्यकता है। अब 12 दिनों का आधिकारिक चुनाव अभियान अगले मंगलवार से शुरू होगा, जिसमें ताकाइची अपनी निर्णायक छवि के दम पर बहुमत हासिल करने की कोशिश करेंगी।</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 18:47:42 +0530</pubDate>
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