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                <title>China - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>China RSS Feed</description>
                
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                <title>ट्रंप-जिंनपिग समिट: बीजिंग शिखर सम्मेलन के बाद बनी सहमति, चीन-अमेरिका के बीच विमान खरीद पर समझौता, 200 विमानों की डील</title>
                                    <description><![CDATA[चीन और अमेरिका के बीच विमानों, इंजनों और कलपुर्जों की खरीद को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बीजिंग शिखर सम्मेलन के बाद इस डील पर मुहर लगी। चीन 200 बोइंग विमान खरीदेगा, जिसे भविष्य में 750 तक बढ़ाया जा सकता है, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मोड़ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-jinpig-summit-agreement-reached-after-beijing-summit-agreement-on-aircraft/article-154108"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china5.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि चीन और अमेरिका के बीच विमानों, विमान इंजनों और अन्य कलपुर्जों की खरीद को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने चीन द्वारा अमेरिकी विमानों की खरीद के साथ-साथ चीन को अमेरिकी विमान इंजनों और अन्य घटकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके साथ ही दोनों देश संबंधित क्षेत्रों में सहयोग को और विकसित करना जारी रखने पर भी सहमत हुए हैं। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया था कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने पर सहमत हुआ है और इस ऑर्डर को भविष्य में 750 विमानों तक बढ़ाने की भी संभावना है। यह महत्वपूर्ण सौदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ट्रंप के बीच बीजिंग में हुए शिखर सम्मेलन के तत्काल बाद हुआ है, जिसे चीन ने ह्यऐतिहासिकह्य करार दिया है।</p>
<p><strong>चीन-अमेरिका संबंधों में नया अध्याय </strong></p>
<p>इस शिखर सम्मेलन को दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से परिभाषित करने वाले एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों नेता रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस वार्ता को द्विपक्षीय संबंधों का एक नया शुरूआती बिंदु करार दिया है जो एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाने के सही रास्ते को खोजने के प्रयासों को दशार्ता है।</p>
<p><strong>चीन-अमेरिका सहयोग पर वांग यी का बयान, एक साथ चल सकते हैं दोनों लक्ष्य</strong></p>
<p>विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग शिखर सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा कि इस बैठक ने दुनिया को संदेश दिया है कि चीनी राष्ट्र का पुनरुद्धार और ह्यअमेरिका को फिर से महान बनानाह्ण(मागा) एक साथ चल सकते हैं और दोनों देश एक-दूसरे की सफलता में सहायक होकर पूरी दुनिया का कल्याण कर सकते हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ताइवान मुद्दे पर चीन की अमेरिका को चेतावनी, जिनपिंग ने कहा-गलत रणनीति दोनों देशों को &quot;संघर्ष&quot; की ओर धकेल सकती है</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी कि ताइवान पर गलत रणनीति "संघर्ष" भड़का सकती है। ट्रंप ने शी को "मित्र" बताकर शानदार भविष्य की उम्मीद जताई। चीन ने "थ्यूसीडिडेस ट्रैप" से बचकर प्रतिद्वंद्विता के बजाय साझेदारी और रणनीतिक स्थिरता पर जोर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-warning-to-america-on-taiwan-issue-jinping-said/article-153850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china5.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है कि ताइवान मुद्दे पर किसी भी प्रकार की गलत रणनीति दोनों देशों को "संघर्ष" की ओर धकेल सकती है। गुरुवार को महाशक्ति शिखर सम्मेलन के तहत हुई बैठक में ट्रंप ने शी जिनपिंग को "महान नेता" और "मित्र" बताते हुए कहा कि दोनों देशों का "भविष्य शानदार" होगा। शी जिनपिंग ने औपचारिक स्वागत समारोह के बीच अपेक्षाकृत सख्त लहजे में यह भी कहा कि दोनों देशों को "प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार" होना चाहिए। उन्होंने शुरुआत में ही ताइवान मुद्दे को चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण विषय बताया।</p>
<p>चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार शी जिनपिंग ने कहा, "ताइवान प्रश्न चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। यदि इसे गलत तरीके से संभाला गया, तो दोनों देश टकराव या यहां तक कि संघर्ष की स्थिति में पहुंच सकते हैं, जिससे पूरे चीन-अमेरिका संबंध अत्यंत खतरनाक स्थिति में चले जाएंगे।" रिपोर्ट के अनुसार, करीब सवा दो घंटे तक चली प्रारंभिक वार्ता के बाद व्हाइट हाउस के जारी आधिकारिक विवरण में ताइवान का कोई उल्लेख नहीं किया गया। इससे संकेत मिला कि दोनों नेता इस मुद्दे पर किसी ठोस सहमति तक नहीं पहुंच सके। ट्रंप की यह यात्रा लगभग एक दशक बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा है। भव्य स्वागत समारोह के बावजूद व्यापार और भू-राजनीतिक तनाव अब भी दोनों देशों के बीच प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।</p>
<p>शी जिनपिंग ने ट्रंप का स्वागत ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में रेड कार्पेट, सैन्य बैंड, तोपों की सलामी और स्कूली बच्चों के स्वागत नारों के साथ किया। ट्रंप ने समारोह के दौरान कहा, "चीन और अमेरिका के संबंध पहले से कहीं बेहतर होने जा रहे हैं।" इसके विपरीत शी जिनपिंग ने प्राचीन यूनानी राजनीतिक सिद्धांत "थ्यूसीडिडेस ट्रैप" का उल्लेख करते हुए कहा कि उभरती शक्ति और स्थापित शक्ति के बीच प्रतिस्पर्धा युद्ध का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा, "क्या चीन और अमेरिका तथाकथित 'थ्यूसीडिडेस ट्रैप' से ऊपर उठकर महाशक्तियों के संबंधों का नया प्रतिमान स्थापित कर सकते हैं? सहयोग दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है, जबकि टकराव दोनों को नुकसान पहुंचाता है।"</p>
<p>वर्ष 2017 में ट्रंप की पिछली चीन यात्रा के बाद से दोनों देश व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और कई वैश्विक मुद्दों पर लगातार मतभेदों में उलझे रहे हैं। ताइवान लंबे समय से दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण रहा है। अमेरिका "वन चाइना" नीति के तहत केवल बीजिंग को मान्यता देता है, लेकिन अमेरिकी कानून के अनुसार वह ताइवान को आत्मरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे अपने नियंत्रण में लेने के लिए बल प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं करता। हाल के वर्षों में उसने ताइवान पर सैन्य दबाव बढ़ाया है। शी की टिप्पणियों के बाद ताइपे ने प्रतिक्रिया देते हुए चीन को क्षेत्रीय शांति के लिए "एकमात्र खतरा" बताया और कहा कि अमेरिका ने ताइवान के प्रति अपने "स्पष्ट और दृढ़ समर्थन" की बार-बार पुष्टि की है। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं की वार्ता अब तक सकारात्मक माहौल में हुई है। ट्रंप ने शी जिनपिंग को "मित्र" बताया और दोनों नेताओं ने "रचनात्मक, रणनीतिक और स्थिर संबंध" स्थापित करने पर सहमति जताई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 18:47:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात : अमेरिका-चीन संबंधों में 'नये दौर' का संकेत, इन अहम मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऐतिहासिक मुलाकात हुई। शी ने ताइवान को 'रेड लाइन' बताते हुए कड़ी चेतावनी दी, लेकिन संबंधों को 'स्थिर और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा' का नया दौर भी कहा। व्यापार, AI और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ दोनों महाशक्तियाँ आपसी तनाव कम करने की कोशिश में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-jinping-meeting-signals-a-new-era-in-us-china-relations-discussion/article-153831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों के उभरते चरण को अधिक स्थिर और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा का 'नया दौर' करार दिया है। साथ ही जिनपिंग ने ताइवान के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों में सबसे संवेदनशील और खतरनाक मुद्दा करार दिया है। चीन के राष्ट्रपति ने ये टिप्पणियां उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के शुरुआत में की। वर्ष 2017 के बाद चीन में यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात थी, जिसने उन चर्चाओं की दिशा तय कर दी, जिनका मुख्य केंद्र रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा होने की उम्मीद है। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर तनाव का माहौल है। </p>
<p>ईरान में जारी संघर्ष, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा शामिल है। चर्चा के लिए मेज पर रखे गये प्रमुख मुद्दों में व्यापार और टैरिफ को स्थिर करना, अमेरिकी बाजारों तक चीन की पहुंच और चीन में अमेरिकी कंपनियों का विस्तार, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, चीन के इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात और वैश्विक ऑटो उद्योग पर इसका प्रभाव तथा ऊर्जा सुरक्षा और ईरान के तेल निर्यात जैसे विषय शामिल हैं। </p>
<p>ईरान के तेल निर्यात के मामले में चीन का काफी प्रभाव है और इस मुद्दे पर दोनों महाशक्तियां अपनी भूमिका निभाएंगी। यह बैठक ईरान युद्ध की छाया में हो रही है, जिसमें दोनों देशों के नेता व्यापक भू-राजनीतिक समीकरणों और दोनों नेता महाशक्तियों के बीच 'नियंत्रित प्रतिस्पर्धा' पर चर्चा करेंगे। जिनपिंग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां दोनों देशों को स्थिरता और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि ताइवान चीन के लिए सबसे अहम चिंता का विषय है और चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने इसे एक 'रेड लाइन' (सीमा रेखा) बताया जो दोनों देशों के संबंधों की भविष्य की दिशा तय कर सकती है। तनाव के बावजूद जिनपिंग ने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच चीन और अमेरिका को एक-दूसरे का विरोधी बनने के बजाय साझेदार के तौर पर काम करना चाहिए। </p>
<p>उन्होंने सुझाव दिया कि समग्र स्थिरता बनाये रखने के लिए दोनों देशों के बीच के मतभेदों को सुलझाया जा सकता है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, दोनों पक्षों ने मध्य-पूर्व में हो रहे घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मार्गों में आ रही बाधाओं पर भी अपने विचार साझा किये। ट्रंप अपने साथ वरिष्ठ अधिकारियों और अमेरिकी व्यापार जगत के दिग्गजों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर आये थे, जो संभावित निवेश और व्यापारिक समझौतों पर उनके विशेष ज़ोर का संकेत था। इस प्रतिनिधिमंडल में उनके मंत्रिमंडल और आर्थिक टीम के प्रमुख सदस्य शामिल थे, जो इस शिखर सम्मेलन के भारी आर्थिक महत्व को दर्शाता है।</p>
<p>जिनपिंग के साथ हालांकि सार्वजनिक रूप से उपस्थित रहने के दौरान ट्रंप ने ताइवान के संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवालों का सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सहयोग से दोनों पक्षों को लाभ होता है, जबकि टकराव से दोनों को ही नुकसान पहुंचता है। ट्रंप ने आर्थिक संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला और दोनों देशों के संबंधों को लेकर आशावादी दृष्टिकोण व्यक्त किया। अब दोनों नेता बंद दरवाज़ों के पीछे आपसी बातचीत (गोपनीय वार्ता) के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। आने वाले दिनों में उनके बीच और भी कई बैठकें, राजकीय कार्यक्रम और आधिकारिक भोज आयोजित किए जाने हैं। अभी तक हालांकि किसी बड़े समझौते की घोषणा नहीं की गयी है, फिर भी ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्ष अपने संबंधों में स्थिरता लाने एवं तनाव को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए एक साझा रूपरेखा तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। यह दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 17:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीनी विदेश मंत्रालय का दावा: मतभेदों को दूर कर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार, वैश्विक शांति और विकास के मुद्दों पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजing यात्रा से पहले चीन ने समानता और आपसी सम्मान के आधार पर सहयोग का हाथ बढ़ाया है। दोनों नेता दुर्लभ खनिज (Rare Earth) निर्यात और वैश्विक स्थिरता पर चर्चा करेंगे। हालांकि, चीन ने ताइवान हथियार बिक्री और जिमी लाई मामले को अपना आंतरिक मुद्दा बताते हुए कड़ा रुख बरकरार रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinese-foreign-ministry-claims-ready-to-overcome-differences-and-increase/article-153708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजकीय यात्रा से पहले बुधवार को कहा कि वह समानता, आपसी सम्मान और साझा लाभ के आधार पर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने और मतभेदों को दूर करने के लिए तैयार है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि चीन 'परिवर्तनशील और अस्थिर दुनिया' में अधिक स्थिरता और निश्चितता लाने के लिए अमेरिका के साथ काम करने का इच्छुक है। गुओ ने कहा, "चीन समानता, सम्मान और आपसी लाभ की भावना के साथ सहयोग का विस्तार करने और मतभेदों को प्रबंधित करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।" प्रवक्ता ने कहा कि चीन ट्रंप की यात्रा का स्वागत करता है, जिसके दौरान दोनों देशों के नेता चीन-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ वैश्विक शांति और विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर 'गहन विचारों का आदान-प्रदान' करेंगे।</p>
<p>नेताओं के बीच आगामी बैठक के दौरान चीन और अमेरिका द्वारा दुर्लभ मृदा पदार्थ (रेयर अर्थ मैटेरियल) के चीनी निर्यात पर प्रतिबंधों को कम करने वाले एक अस्थायी समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है। हालांकि, इस संभावित विस्तार के बावजूद, चीन अभी भी कुछ प्रमुख सामग्रियों के निर्यात को सीमित कर रहा है जो रक्षा और उच्च-तकनीकी विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। गुओ ने ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध करते हुए दोहराया कि इस मुद्दे पर चीन का रुख 'स्थिर और स्पष्ट' बना हुआ है।</p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप द्वारा बातचीत के दौरान मुद्दा उठाए जाने पर चीन हांगकांग के मीडिया उद्यमी जिमी लाई की रिहाई पर विचार करेगा, गुओ ने इस सुझाव को खारिज कर दिया और मामले को चीन का आंतरिक मामला बताया। गुओ ने कहा, "लाई ची-यिंग हांगकांग को हिला देने वाले दंगों के पीछे मुख्य साजिशकर्ता और अपराधी हैं।" उन्होंने कहा कि चीनी सरकार कानून के अनुसार मामले को संभालने में हांगकांग के न्यायिक अधिकारियों का दृढ़ता से समर्थन करती है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप की चीन यात्रा बुधवार से शुरू होकर 15 मई तक जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 18:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: शी जिनपिंग से होगी खास मुलाकात; व्यापार, ईरान और ताइवान मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने बीजिंग पहुंच चुके हैं। इस शिखर सम्मेलन में ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और ताइवान जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होगी। वैश्विक तेल संकट और आर्थिक मंदी के खतरों के बीच दुनिया की नजरें इन दोनों दिग्गजों के बीच होने वाले रणनीतिक समझौतों पर टिकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-visits-china-special-meeting-with-xi-jinping-possible/article-153555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए बीजिंग रवाना हो गए हैं, जहां दोनों वैश्विक नेता व्यापार, युद्ध कूटनीति और ताइवान पर गंभीर चर्चा करेंगे। ट्रंप का 2017 के बाद यह पूर्वी एशियाई देश का पहला दौरा है। इस दौरान दशकों में सबसे अहम अमेरिका-चीन सम्मेलन होने की संभावना है। गुरुवार से शुरू होने वाला दो दिनों का यह सम्मेलन दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच संबंधों को नया आकार दे सकता है। है। ट्रंप 14 मई को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे, जहां दोनों औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और उसके बाद शाम को एक राजकीय दावत का आयोजन किया जाएगा। ट्रंप की 15 मई को वाशिंगटन लौटने से पहले दोपहर के भोजन कार्यक्रम और 'ऐतिहासिक स्वर्ग का मंदिर' जाने की भी योजना है।</p>
<p>जब फरवरी में व्हाइट हाउस ने इस दौरे की पुष्टि की, तो चीनी सामान पर वाशिंगटन के आसमान छूते शुल्क एजेंडे पर छाए हुए थे। लेकिन 28 फरवरी के बाद दुनिया के राजनीतिक हालात बदल गए जब ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया, जिससे एक युद्ध शुरू हो गया और जिसके कारण ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना पड़ा और इस स्थिति ने तेहरान को इस रणनीतिक जलमार्ग को नियंत्रित करने के लिए एक बोर्ड बनाने पर मजबूर कर दिया। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान एक तनावपूर्ण परमाणु गतिरोध में फंसे हुए हैं क्योंकि वाशिंगटन का तर्क है कि परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो सकती और तेहरान प्रतिबंधों में राहत, युद्ध खत्म करने, जब्त की गई संपत्ति को छोड़ने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को रोकने की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को 'पूरी तरह से नामंजूर' कर दिया है क्योंकि दोनों पक्ष किसी भी संभावित समझौते के लिए जरूरी शर्तों से बहुत दूर हैं।</p>
<p>इसलिए दोनों नेताओं को होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव पर चर्चा करनी अनिवार्य है। चीन अपना लगभग आधा कच्चा तेल जलमार्ग से आयात करता है। उसने बड़े स्टॉक और अलग-अलग तरह के ऊर्जा मिश्रण से खुद को सुरक्षित रखा है लेकिन इसका आर्थिक असर बहुत बड़ा है। तेल की कीमतों में उछाल ने पेट्रोकेमिकल पर निर्भर निर्माताओं के लिए लागत 20 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक मंदी की संभावना बनी हुई है क्योंकि चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग पांचवां हिस्सा निर्यात पर निर्भर करता है, इसलिए दुनिया जो आर्थिक रूप से इतनी परेशान है कि चीनी सामान नहीं खरीद सकती, उसके लिए अकेले आयात शुल्क युद्ध से भी बड़ा खतरा है।</p>
<p>बैठक में ताइवान का मुद्दा भी मुख्य रहेगा क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने पिछले दिसंबर में ताइपे को 11 बिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी, जिससे चीन नाराज हो गया था। फिर भी ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह भी सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करने के लिए बाध्य है और कहा है कि अमेरिका को उसकी सुरक्षा गारंटी के लिए पैसे देना काफी नहीं है। इस सप्ताह किसी बडे व्यापारिक समझौते की उम्मीदें कम हैं लेकिन अधिक उम्मीद अक्टूबर के संघर्ष विराम को बढ़ाने की है। इसके साथ ही एक संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा। दुनिया इस सम्मेलन को बड़ी दिलचस्पी से देख रही है और उम्मीद कर रही है कि यह सम्मेलन सफल हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 16:43:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चीन ने निजी स्कूलों और ट्यूशन इंडस्ट्री पर कसा शिकंजा, 100 अरब डॉलर का कारोबार प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने शिक्षा का व्यवसायीकरण रोकने के लिए कक्षा 1 से 9 तक के निजी स्कूलों और मुनाफे वाली कोचिंग पर पाबंदी लगा दी है। बच्चों का मानसिक दबाव कम करने हेतु अब ट्यूशन कंपनियां विदेशी निवेश या शेयर बाजार से फंड नहीं जुटा सकेंगी। इस ऐतिहासिक फैसले से $100 अरब की ट्यूशन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-tightens-screws-on-private-schools-and-tuition-industry-business/article-153583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china2.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अपनी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 6 से 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित लाभ कमाने वाले निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला प्राथमिक और जूनियर सेकेंडरी शिक्षा यानी कक्षा 1 से 9 तक लागू किया गया है। नई नीति के तहत अब स्कूल विषयों की पढ़ाई कराने वाली कंपनियां मुनाफा नहीं कमा सकेंगी, विदेशी निवेश नहीं ले सकेंगी और शेयर बाजार से पूंजी जुटाने पर भी रोक रहेगी। कई कंपनियों को गैर-लाभकारी संस्था में बदलने या संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>इस फैसले से चीन की करीब 100 अरब डॉलर की निजी ट्यूशन इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। कई बड़ीं शिक्षा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सरकार ने सप्ताहांत और छुट्टियों में ट्यूशन, विदेशी पाठ्यक्रम और बच्चों पर अधिक होमवर्क जैसे मामलों पर भी रोक लगाई है।</p>
<p>चीन का कहना है कि बढ़ते शैक्षणिक दबाव और महंगी शिक्षा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परिवारों पर असर डाल रही थी। हालांकि प्रतिबंधों के बावजूद देश में निजी ट्यूशन की मांग अब भी बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:05:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन ने तियानझोउ-10 कार्गो अंतरिक्ष यान को तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन की ओर किया प्रक्षेपित, जानें क्या है ड्रैगन का पूरा प्लान?</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने तियानझोउ-10 कार्गो यान को सफलतापूर्वक तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन की ओर रवाना किया। यह यान ईंधन, स्पेससूट और आवश्यक वैज्ञानिक उपकरण लेकर गया है। 2038 तक संचालित होने वाले इस अत्याधुनिक स्टेशन की क्षमता बढ़ाने की दिशा में यह 39वां महत्वपूर्ण मिशन है, जो चीन की तकनीकी शक्ति को दर्शाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-launches-tianzhou-10-cargo-spacecraft-towards-tiangong-space-station-know/article-153385"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china1.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने सोमवार को तियानझोउ-10 कार्गो अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन की ओर प्रक्षेपित किया। चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी ने इसकी घोषणा की। एजेंसी के बयान में कहा गया, "चांग झेंग-7 वाई11 प्रक्षेपण यान, जो तियानझोउ-10 कार्गो अंतरिक्ष यान को लेकर था, इसे बीजिंग समयानुसार सुबह 8:14 बजे वेंचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से प्रक्षेपित किया गया। लगभग 10 मिनट बाद, तियानझोउ-10 ने यान से सफलतापूर्वक पृथक्करण किया और अपने निर्धारित कक्षा में प्रवेश किया।"</p>
<p>बयान में कहा गया कि यह प्रक्षेपण सफल रहा। अंतरिक्ष यान में बाहरी अंतरिक्ष गतिविधि के लिए एक स्पेससूट, अंतरिक्ष यात्रियों के रहने के लिए आवश्यक सामग्री, ईंधन और प्रयोगात्मक उपकरण हैं। यह यान बाद में तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन से डॉक करेगा। यह प्रक्षेपण चांग झेंग शृंखला के 641वें और तियांगोंग परियोजना के 39वें प्रक्षेपण का प्रतीक है। चीन ने तियांगोंग राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण 29 अप्रैल 2021 को शुरू किया, जब तियान्हे मुख्य मॉड्यूल सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया। स्टेशन के प्राथमिक संयोजन का निर्माण तीन नवंबर 2022 को पूरा हुआ। तियांगोंग स्टेशन की मौजूदा टी-आकार संरचना में तियान्हे मुख्य मॉड्यूल और इसके साथ जुड़े दो प्रयोगशाला मॉड्यूल, वेंतियान और मेंग्तियान शामिल हैं। तीनों मॉड्यूल का संयुक्त वजन लगभग 69 टन है।</p>
<p>स्टेशन का कुल आवासीय स्थल लगभग 110 घन मीटर है और इसमें एक समय में तीन अंतरिक्ष यात्री समायोजित कर सकता है या क्रू रोटेशन के दौरान छह लोग रह सकते हैं। स्टेशन की डिज़ाइन की गयी कार्यशील अवधि 15 वर्ष है, जो 2038 में समाप्त होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप सरकार का बड़ा ऐलान: ईरान के विदेशी सैन्य खरीद नेटवर्क पर लगाया प्रतिबंध, ईरानी हमलों में मदद करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने का आरोप, प्रतिबंधित संस्थाओं में चीनी कंपनियां शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के सैन्य नेटवर्क और ड्रोन कार्यक्रमों को कुचलने के लिए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इनमें सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने वाली चीनी कंपनियां भी शामिल हैं, जो अमेरिकी सेना के लिए खतरा बनी थीं। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान की आपूर्ति शृंखला को वैश्विक स्तर पर बाधित करने का यह सख्त कदम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-governments-big-announcement-ban-on-irans-foreign-military-procurement/article-153241"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के सैन्य खरीद नेटवर्क की सहायता करने के आरोप में कई संस्थानों पर नये प्रतिबंध लगाये हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जिन पर कथित तौर पर पश्चिम एशिया में अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेनाओं के खिलाफ ईरानी हमलों में मदद करने के लिए उपग्रह चित्र (सैटेलाइट इमेजरी) प्रदान करने का आरोप है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी फैक्ट शीट के अनुसार, मिसाइल  और ड्रोन संचालन सहित ईरानी सैन्य गतिविधियों को सक्षम बनाने वाली उपग्रह चित्र और संबंधित तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए चार संस्थाओं को प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p>अमेरिका ने कहा कि इस तरह की सहायता क्षेत्र में अमेरिकी और भागीदार सेनाओं के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। अमेरिकी वित्त विभाग ने भी 10 व्यक्तियों और संस्थाओं को नामित किया है, जिन पर ईरान को उसके मानवरहित विमान (यूएवी) और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से संबंधित हथियार और कच्चा माल प्राप्त करने में मदद करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये उपाय 'नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम 2' के तहत ईरान की सैन्य आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद उसके प्रसार-संवेदनशील कार्यक्रमों को फिर से खड़ा करने के किसी भी प्रयास को रोकने के व्यापक अभियान का हिस्सा हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई परमाणु प्रतिबद्धताओं के प्रति ईरान की 'बेहद लापरवाही' दिखाने के बाद सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रतिबंधों को फिर से लागू किये जाने के बाद की गयी है। इन उपायों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1929 के तहत ईरान को पारंपरिक हथियारों के हस्तांतरण, तकनीकी सहायता और संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध शामिल हैं। प्रतिबंधित संस्थाओं में चीन स्थित कंपनियां जैसे मीनट्रॉपी टेक्नोलॉजी (मिज़ारविज़न) और द अर्थ आई (टीईई) शामिल हैं, जिन पर ईरानी सैन्य उपयोग से जुड़ी उपग्रह चित्र प्रदान करने का आरोप है।</p>
<p>एक अन्य चीनी कंपनी, चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड पर अमेरिकी और सहयोगी सैन्य स्थलों की तस्वीरें एकत्र करने और उनकी आपूर्ति करने तथा पहले अमेरिका के प्रतिबंधित हूतियों को डाटा प्रदान करने का आरोप लगाया गया है। ईरान के रक्षा मंत्रालय के निर्यात केंद्र (माइंडेक्स), जिसे पहले मॉडलेक्स के नाम से जाना जाता था, को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरानी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका के लिए नामित किया गया है। अमेरिकी सरकार ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों के उल्लंघन में ईरान के सैन्य कार्यक्रमों को मिलने वाले किसी भी समर्थन के गंभीर परिणाम होंगे और ऐसी कार्रवाइयों का करारा जवाब दिया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:10:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन की पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट: 21 लोगों की मौत, 60 से ज्यादा लोग घायल, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के हुनान प्रांत स्थित दुनिया के सबसे बड़े पटाखा हब, लियूयांग में हुए भीषण विस्फोट में 21 लोगों की मौत और 61 घायल हो गए। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश और घायलों के इलाज के लिए 500 कर्मियों और रोबोटिक टीम को तैनात किया है। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की इमारतों की खिड़कियां तक टूट गईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/explosion-in-chinas-firecracker-factory-21-people-killed-more-than/article-152730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china.png" alt=""></a><br /><p>हुनान। चीन के हुनान प्रांत में एक पटाखा कारखाने में विस्फोट होने से 21 लोगों की मौत हो गयी है और 61 घायल हो गये हैं। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार विस्फोट में 21 लोगों की मौत हो गयी है और 61 लोग घायल हुये हैं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है कि हुनान प्रांत के लियूयांग शहर के हुआशेंग पटाखा संयंत्र में यह विस्फोट सोमवार को स्थानीय समयानुसार लगभग 16:40 बजे हुआ। बचाव दल ने मुस्तैदी दिखाते हुये संयंत्र के तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। प्रशासन ने खोज और बचाव अभियान चलाने के लिये तत्काल अधिकारियों की तैनाती की तथा घायलों के उपचार के लिए करीब 500 कर्मियों को भी तैनात किया। </p>
<p>रोबोट की मदद से पटाखा कारखाने की इमारत के भीतर फंसे लोगों को ढूंढने का काम किया गया। स्थानीय पुलिस ने विस्फोट के कारणों की जांच का काम आरंभ कर दिया है और इस दौरान पटाखा कंपनी के प्रभारी व्यक्ति से भी पूछताछ की गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने जानकारी दी कि कारखाना परिसर के भीतर स्थित बारूद के दो गोदाम बचाव कार्यों के दौरान उच्च जोखिम पैदा कर रहे थे। बचाव दलों को पटाखा संयंत्र के तीन किलोमीटर के दायरे से सभी को हटाना पड़ा। बचाव कार्यों के दौरान कोई दुर्घटना न हो जाये, इसे ध्यान में रखकर दुर्घटनाग्रस्त इलाके में नमी बढ़ाने के उपाय भी किये गये।</p>
<p>घटनास्थल से प्रसारित एक टीवी कार्यक्रम में सी.सी.टी.वी. के संवाददाता ने बताया कि विस्फोट इतना विनाशकारी था कि कारखाने के पास स्थित एक आवासीय भवन की खिड़कियां भी टूट गयीं। रिपोर्ट के मुताबिक पटाखा कारखाने में हुये विस्फोट में घायल हुये लोगों की आयु 20 से 60 वर्ष के बीच है और कुछ लोगों को उड़ते हुए मलबे की चपेट में आने से हड्डियों में गंभीर चोटें आयी हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने निर्देश दिये हैं कि दुर्घटना के बाद जो लोग अभी भी लापता हैं,उनकी तलाश की जाये औऱ गंभीर रूप से घायल लोगों को बचाने के हर संभव प्रयास किये जायें। जिनपिंग ने दुर्घटना की जांच करने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिये हैं। लियूयांग शहर पटाखा निर्माण के लिए जाना जाता है और रिपोर्टों में इसे दुनिया का सबसे बड़ा पटाखा उत्पादक शहर बताया गया है। चीन में पटाखा फैक्ट्रियों और दुकानों में विस्फोट होना कोई असामान्य बात नहीं है और ये अक्सर जानलेवा होते हैं। फरवरी में वहां हुबेई प्रांत में एक पटाखे की दुकान में हुये विस्फोट में 12 लोग मारे गये थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:03:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता पर साधा निशाना : भारत और चीन को बताया 'नरक', नागरिकता कानूनों की आलोचना की</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता नीति की आलोचना करते हुए भारत और चीन जैसे देशों के लिए विवादास्पद शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर साझा पत्र में प्रवासियों पर संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। ट्रंप ने इस संवैधानिक प्रावधान को बदलने और आप्रवासन कानूनों को और सख्त करने की वकालत की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-targets-birthright-citizenship-calls-india-and-china/article-151453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस के बीच भारत और चीन सहित कुछ देशों को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की है, जिससे नयी राजनीतिक चर्चा छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पत्र साझा करते हुए इन देशों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया और जन्मसिद्ध नागरिकता सहित कई अमेरिकी नागरिकता कानूनों की आलोचना की।</p>
<p>पत्र में कैलिफ़ोर्निया के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नियुक्तियों को लेकर दावा किया गया है कि वहां भारत और चीन से आए लोगों का वर्चस्व है, हालांकि इसके समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। पत्र का मुख्य विषय जन्मसिद्ध नागरिकता की नीति है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता मिलती है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इस प्रावधान का उपयोग कर प्रवासी अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी देश में लाते हैं।</p>
<p>पत्र में कहा गया, "यहां पैदा होने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे चीन, भारत या दुनिया के किसी अन्य 'नरक' से अपने पूरे परिवार को यहां ले आते हैं।" इस पत्र की भाषा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर निर्णय न्यायालयों या वकीलों के बजाय जनमत से होना चाहिए। इसमें एक सामाजिक माध्यम सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि बहुमत इस नीति में बदलाव के पक्ष में है, साथ ही न्यायिक प्रक्रिया पर अविश्वास भी व्यक्त किया गया है। पत्र में अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (एसीएलयू) की भी आलोचना की गई है और उस पर ऐसी नीतियों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है, जो कथित रूप से अवैध प्रवासियों को लाभ पहुंचाती हैं।</p>
<p>इसके अलावा पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रवासी स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते हैं, जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसमें कैलिफ़ोर्निया जैसे प्रांतो में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। पत्र में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही का भी संदर्भ दिया गया है और संवैधानिक व्याख्या को वर्तमान परिस्थितियों से असंगत बताया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ऑप्टिकल संचार और 6जी तकनीक में चीन को मिली बड़ी कामयाबी, डेटा ट्रांसमिशन की गति में स्थापित किया नया विश्व कीर्तिमान</title>
                                    <description><![CDATA[चीनी वैज्ञानिकों ने ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क को जोड़ने वाली प्रणाली बनाकर डेटा ट्रांसमिशन में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। यह 5G से दस गुना अधिक तेज और ऊर्जा-कुशल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-achieved-great-success-in-optical-communication-and-6g-technology/article-143986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/china-6g.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क को जोडऩे वाली एकीकृत संचार प्रणाली विकसित की है, जिसने डेटा ट्रांसमिशन की गति में नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। वैज्ञानिक जर्नल नेचर में गुरुवार को प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एआई डाटा केंद्रों में कंप्यूटरिंग शक्ति की बढ़ती मांग और अगली पीढ़ी के 6जी वायरलेस नेटवर्क के विकास के लिए विभिन्न परिस्थितियों में उच्च गति और कम विलंबता वाले सिग्नल ट्रांसमिशन की आवश्यकता होती है।</p>
<p>ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस संचार प्रणालियों के बीच हालांकि सिग्नल आर्किटेक्चर और हार्डवेयर में अंतर के कारण एक ही बुनियादी ढांचे पर दोनों प्रणालियों के बीच उच्च गति और अनुकूल एंड-टू-एंड ट्रांसमिशन हासिल करना कठिन रहा है। यह उच्च गति दूरसंचार नेटवर्क के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी, जिस पर चीनी शोध दल ने कामयाबी हासिल कर ली है।</p>
<p>पेकिंग विश्वविद्यालय, पेंग चेंग प्रयोगशाला, शंघाईटेक विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स इनोवेशन सेंटर की शोध टीम ने एक एकीकृत संचार प्रणाली विकसित की है, जो ऑप्टिकल फाइबर पर 512 जीबीपीएस और वायरलेस पर 400 जीबीपीएस का सिंगल-चैनल सिग्नल ट्रांसमिशन प्राप्त करती है।</p>
<p>पेकिंग विश्वविद्यालय में इस शोध पत्र के सह-लेखकों में से एक वांग शिंगजुन के अनुसार, यह नयी प्रणाली ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क दोनों के जरिये डुअल-मोड ट्रांसमिशन का समर्थन करती है। यह न केवल बैंडविड्थ की सीमाओं और शोर के संचय से बचाती है, बल्कि हस्तक्षेप-विरोधी क्षमताओं को भी बढ़ाती है।</p>
<p>दल ने बड़े पैमाने के 6जी उपयोगकर्ता एक्सेस परिदृश्य का अनुकरण भी किया है। इसमें 86 चैनलों पर मल्टीचैनल रियल-टाइम 8के वीडियो एक्सेस का प्रदर्शन किया गया। इसने वर्तमान 5जी मानक की तुलना में दस गुना से अधिक ट्रांसमिशन बैंडविड्थ हासिल की है। बहुत अधिक क्षमता वाले संचार को सक्षम करने के अलावा यह प्रणाली ऊर्जा की खपत, लागत और बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए विस्तार क्षमता के मामले में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती है। इस प्रणाली का ऑल-ऑप्टिकल आर्किटेक्चर मौजूदा ऑप्टिकल नेटवर्क के साथ निर्बाध एकीकरण को सक्षम बनाता है, जिससे मोबाइल एक्सेस नेटवर्क और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के बीच गहरे मेल को बढ़ावा मिलता है।</p>
<p>वांग ने उल्लेख किया कि इस नयी प्रणाली में 6जी बेस स्टेशन और वायरलेस डाटा केंद्र जैसे परिदृश्यों में महत्वपूर्ण अनुप्रयोग क्षमता है। यह दूरसंचार प्रणालियों के ढांचे को नया रूप दे सकती है, जिससे अगली पीढ़ी के अल्ट्रा-ब्रॉडबैंड, उच्च क्षमता एकीकृत फाइबर-वायरलेस संचार की नींव पड़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:45:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एआई शिखर सम्मेलन को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर तीखा हमला; बोलें-सरकार ने सम्मेलन को बना दिया तमाशा, चीन उठा रहा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए एआई समिट को 'पीआर तमाशा' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय प्रतिभा के बजाय चीन और विज्ञापन को बढ़ावा दे रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhis-sharp-attack-on-the-center-regarding-ai-summit/article-143640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/rahul.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) शिखर सम्मेलन को लेकर मोदी सरकार पर बुधवार को हमला किया और कहा कि इस वैश्विक मंच का लाभ उठाने की बजाय मोदी सरकार अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल कर इसका तमाशा बना रही है।</p>
<p>राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सम्मेलन से भारतीय प्रतिभाओं को लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार पूरे शिखर सम्मेलन को अव्यस्थित कर इसे जनसंपर्क का तमाशा बना दिया है और सम्मेलन में चीन अब इसका लाभ उठा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन एक अव्यवस्थित जनसंपर्क तमाशा बन गया है, भारतीय डेटा बिक्री के लिए पेश किया जा रहा है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhis-sharp-attack-on-the-center-regarding-ai-summit/article-143640</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 13:25:53 +0530</pubDate>
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