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                <title>चोरी की गई 5 किमी दीवार वापस पहुंची अपनी जगह</title>
                                    <description><![CDATA[ जांच के बाद भी दोषी अधिकारी व कर्मी के खिलाफ कार्रवाई नहीं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-stolen-5-km-wall-returned-to-its-place/article-94837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(8)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रावतभाटा रोड स्थित आवंली-रोजड़ी प्लांटेशन की सुरक्षा दीवार चोरी के मामले में एक ओर बड़ा खुलासा हुआ है। नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद गायब हुई 5 किमी सुरक्षा दीवार वापस अपनी जगह पहुंच गई। जबकि, इस दीवार के फिर से निर्माण   के लिए कोटा वन मंडल को वन विभाग से अलग से कोई बजट आवंटित हुआ ही नहीं, फिर यह दीवार अचानक कैसे प्रकट हो गई। चोरी की गई दीवार का फिर से बन जाना चोर और चौकीदार की सांठगांठ का स्पष्ट प्रमाण है। वहीं, जघन्य वन अपराध की जांच में कोटा वन मंडल द्वारा खानापूर्ति कर दी गई। जांच हुए करीब 6 माह से अधिक समय बीत चुका है, इसके बावजूद संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक द्वारा दोषी वनकर्मियों व अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। </p>
<p><strong>सांठगांठ की खुली पोल</strong><br />दैनिक नवज्योति ने गत 8 अप्रेल को आवंली-रोजड़ी के तीन प्लांटेशनों की 5 किमी लंबी पत्थरों की सुरक्षा दीवार चोरी होने की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद  वन महकमे में हड़कम्प मचा और कुछ दिनों बाद वापस चोरी हुई दीवार अचानक से अपनी जगह फिर से बन जाती है। जबकि, इस दीवार के निर्माण के लिए वन विभाग द्वारा कोटा वनमंडल को बजट आवंटित हुआ ही नहीं। ऐसे में चोर और चौकीदार की सांठगांठ जगजाहिर हो गई। चोरी की गई दीवार का बिना बजट फिर से बन जाना जघन्य वन अपराध में संबंधित नाकेदार, तत्कालीन लाडपुरा रैंजर, बीट गार्ड, वनपाल सहित वन अधिकारियों की माफियाओं से मिलीभगत जाहिर होती है। </p>
<p><strong>जांच के नाम पर लीपापोती, तथ्य किए नजरअंदाज</strong><br />वन अधिकारियों ने जांच में प्लांटेशन की 5 किमी पत्थरों की सुरक्षा दीवार चोरी और अवैध खनन होना स्वीकार किया है। वहीं, तत्कालीन रैंज अधिकरी व संबंधित फोरेस्टर सहित अन्य कर्मचारियों की लापरवाही मान रहे हैं लेकिन मिलीभगत होना नहीं मान रहे। ऐसे में सवाल उठता है, वर्ष 2022-23 में इस प्लांटेशन से पहले डायवर्जन चैनल से सटे नगर उद्यान व इसके आगे  कैम्पा योजना का आवंली-रोजड़ी प्लांटेशन-14 का काम चल रहा था। यह काम एक साल से लगातार चल रहा था। इन दोनों के बीच में यह 5 किमी सुरक्षा दीवार थी, जो पूरी तरह से चोरी हो गई थी, इसके बावजूद साइड्स के निरीक्षण के दौरान यह वन अधिकारियों को दिखाई नहीं दी, जो संभव नहीं है। इसके अलावा दीवार चोरी होना जांच में माना तो उस समय वन अधिनियम और पुलिस में राजकीय सम्पति चोरी होने का मुकदमा  क्यों दर्ज नहीं करवाया गया। कई सवाल हैं जो वनकर्मियों की माफियाओं से सांठगांठ को उजागर करती है।</p>
<p><strong>यह हैं सुलगते सवाल</strong><br />-  जून 2022 में आवंली-रोजड़ी प्लांटेशन-2,3 व 4 की दीवार चोरी होने की वन अधिनियम व पुलिस में मामला क्यों दर्ज नहीं करवाया गया?<br />- 8 अप्रेल 2024 को दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद अचानक फिर से दीवार कैसे बन जाती है?<br />- नगर उद्यान व आवंली-रोजडी प्लांटेशन-14 के निर्माण के दौरान साइड निरीक्षण के वक्त स्टाफ व अधिकारियों का आना-जाना था, फिर भी चोरी हुई दीवार को नजर अंदाज क्यों किया?<br />- सीसीएफ ने जांच रिपोर्ट के अनुसार मिलीभगत नहीं मानते तो फिर चोरी हुई दीवार वापस कैसे बन गई, जबकि, इस निर्माण के लिए विभाग को कोई बजट आवंटित ही नहीं हुआ?<br />- जब दीवार चोरी हुई तो उस वक्त मामले की जांच क्यों नहीं की गई?</p>
<p><strong>इस जांच में खुला था भ्रष्टाचार </strong><br />गत 6 फरवरी 2024 को वन मंडल की 12 सदस्य टीम ने गश्ती दल रैंजर अशोक खोजा के नेतृत्व में आंवली रोजड़ी-2, 3 व 4 तीनों 50-50 हैक्टेयर में हुए के प्लांटेशन की दीवार की जांच की थी। इसमें 5 किमी की सुरक्षा दीवार गायब मिली। वहीं, टीम सदस्यों ने 4 ब्लॉक बनाकर प्लोटिंग सैम्पलिंग करवाकर पौधों की गणना की थी। मौके पर 650 गड्ढ़े मिले। जिसमें 243 पौधे ही जीवित मिले। तीनों वृक्षारोपण में लगाए गए पौधों का सरवाइल रेट करीब 36 प्रतिशत मिला। इस पर तत्कालीन डीफओ ने तत्कालीन लाडपुरा रैंजर व नाका प्रभारी को नोटिस देकर मामले में स्पष्टीकरण मांगा। लेकिन, उस समय जांच नतीजे पर पहुंचती उससे पहले ही उनका ट्रांसफर हो गया और जांच ठप हो गई। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उजागर किया था मिलीभगत का गठजोड़</strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि कुमार ने बताया कि दैनिक नवज्योति ने गत 8 अप्रेल को वन विभाग की सुरक्षा दीवार चोरी, 150 हैक्टेयर प्लांटेशन फेल शीर्षक से खबर प्रकाशित कर वनकर्मियों का माफियाओं से मिलीभगत का गठजोड़ उजागर किया था। इसके बाद वन विभाग ने मामले की जांच की, जिसमें पत्थरों की दीवार चोरी होना सही पाया गया। इसके बावजूद वन अधिकारियों द्वारा जिम्मेदार संबंधित वनकर्मी व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न कर बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />नॉबार्ड योजना में वर्ष 2018 से 2022 तक लाडपुरा रैंज में आवंली-रोजड़ी में प्लांटेशन हुआ था। जिसे आवंली-रोजड़ी-2, 3 व 4 का नाम दिया गया। तीनों प्लांटेशन 50-50 हैक्टेयर में पौधरोपण किए गए। प्रत्येक 50 हैक्टेयर में 10 हजार पौधे रोपे गए। इस तरह कुल 150 हैक्टेयर में 30 हजार पौधे लगे थे। जिनकी सुरक्षा के लिए सड़क किनारे 5 किमी लंबी और 4 फीट उंची सुरक्षा दीवार बनवाई थी। पौधों की देखरेख व सुरक्षा की जिम्मेदारी तत्कालीन रैंजर व नाका प्रभारी के जिम्मे थी। इसके बावजूद वर्ष 2022 जून से जुलाई 2023 के बीच दीवार के सारे पत्थर चोरी हो गए। </p>
<p><strong>जांच पर उठे सवाल</strong><br />पगमार्क फाउंडेशन के अध्यक्ष देवव्रत सिंह हाड़ा ने कहा कि कोटा वन मंडल ने जांच के नाम पर लीपापोती की है। दीवार व अवैध खनन में लिप्त तत्कालीन रैंज अधिकारी व संबंधित वनकर्मचारियों को बचाया जा रहा है। वर्तमान डीएफओ द्वारा हाल ही में की गई जांच में प्लांटेशन अच्छी स्थिति में होना बताया लेकिन, प्लोटिंग सैंपलिंग कर पौधों की गणना नहीं करवाई गई। यदि, प्लोटिंग सैंपलिंग की जाती तो वास्तिविक सरवाइवल रेट नजर आती। वहीं, प्लांटेशन के अंदर 10 से 12 फीट गहरे अवैध खनन व माइनिंग के जख्म व तस्वीरें प्लांटेशन बर्बाद होने की दास्ता खुद बयां करता है।  </p>
<p>आवंली रोजड़ी प्लांटेशन की पत्थरों की सुरक्षा दीवार चोरी  हुई है और अवैध खनन भी मिला है। जांच में संबंधित वनकर्मी व जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है लेकिन, मिलीभगत मिलना प्रतित नहीं हुआ। जब यह वन अपराध हुआ तब जिम्मेदार अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए थी। संबंधित वनकर्मी व जिम्मेदारों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, मुख्य वन संरक्षक एवं फिल्ड निदेशक, कोटा संभाग वन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Nov 2024 15:48:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वन विभाग की सुरक्षा दीवार चोरी, 150 हैक्टेयर प्लांटेशन फेल </title>
                                    <description><![CDATA[अवैध खनन व माइनिंग से चढ़ी 30 हजार पौधों की बली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/forest-department-s-security-wall-stolen--150-hectare-plantation-fails/article-74723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/van-vibhag-ki-suraksha-diwar-chori,-150-hector-plantation-fail...kota-news-08-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रावतभाटा रोड पर नगर वन से सटे आंवली-रोजड़ी प्लांटेशन की 5 किमी लंबी सुरक्षा दीवार चोरी हो गई। 4 फीट ऊंची यह दीवार गायब होते ही करोड़ों का प्लांटेशन भी फेल हो गया। माफियाओं के ट्रैक्टर-ट्रॉली दिनदहाड़े पौधों को रौंद वन सम्पदा लूटता रहा और वन अधिकारी चुप्पी साधे रहे। 150 हैक्टेयर में लगे 30 हजार पौधों में से 66 प्रतिशत से अधिक पौधे बर्बाद हो गए। वर्तमान में इस प्लांटेशन में पौधों की सरवाइल रेट मात्र 36 प्रतिशत ही रह गई। जब वन मंत्री के सामने मामला उठा तो अधिकारियों ने आपाधापी में रातोंरात रोड किनारे एक-एक फीट ऊंची दीवार चुनवा दी। लेकिन, प्लांटेशन के अंदर की दीवार के पत्थर गायब कर दिए। हैरानी की बात यह है, प्लांटेशन की सुरक्षा में रैंजर से नाका प्रभारी तक की तैनाती होने के बावजूद पत्थर चोरी हो गए। विशेषज्ञों का तर्क है, बिना मिलीभगत के चोरी संभव नहीं है। वनकर्मी व माफियाओं के गहरे गठजोड़ ने सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है।  </p>
<p><strong>सरकार को 1.29 करोड़ का नुकसान </strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रत्येक 50 हैक्टेयर में प्लांटेशन के लिए सरकार की ओर से कोटा वन मंडल को चार किस्तों में 43 लाख रुपए का बजट मिला था। ऐसे में 50-50 हैक्टेयर के तीनों प्लांटेशन को मिलाकर कुल 1 करोड़ 29 लाख का रुपए मिले थे। इस राशि से 30 हजार पौधे लगाना, पत्थरों की दीवार बनाना, पानी की व्यवस्था करना सहित अन्य देखरेख के कार्य करने थे। गत पांच सालों में प्लांटेशन फेल हो गया। दीवार चोरी हो गई। वर्तमान में अधिकतर पौधे पानी के अभाव में सूखी झाड़ियों में तब्दील हो गए। ऐसे में वनकर्मियों की लापरवाही से सरकार को 1.29 करोड़ का नुकसान हो गया।</p>
<p><strong>जांच में खुली भ्रष्टाचार की पोल </strong><br />गत 6 फरवरी 2024 को वन मंडल की 12 सदस्य टीम ने गश्ती दल रैंजर के नेतृत्व में आंवली रोजड़ी-2, 3 व 4 तीनों 50-50 हैक्टेयर में हुए के प्लांटेशन की दीवार की जांच की थी। इसमें 5 किमी की सुरक्षा दीवार गायब मिली। वहीं, टीम सदस्यों ने 4 ब्लॉक बनाकर पौधों की जांच की तो मौके पर 650 गड्ढ़े मिले। जिसमें 243 पौधे ही जीवित मिले। तीनों वृक्षारोपण में लगाए गए पौधों का सरवाइल रेट करीब 36 प्रतिशत मिला। इस पर तत्कालीन डीफओ ने तत्कालीन लाडपुरा रैंजर व नाका प्रभारी को नोटिस देकर मामले में स्पष्टीकरण मांगा। लेकिन, जांच नतीजे पर पहुंचती उससे पहले ही उनका ट्रांसफर हो गया और जांच ठप हो गई। </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />150 - हैक्टेयर में प्लांटेशन<br />50-50 - हैक्टे. के तीन ब्लॉक<br />30,000 - पौधे लगाए<br />243  - पौधे जीवित मिले</p>
<p><strong>वन अधिकारी कहिन</strong><br />आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच करवाएंगे, जिसमें दोषी पाए जाने वाले अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- रामकरन खैरवा, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक</strong></p>
<p>आप से ही मामले की जानकारी मिली है। पहले मैं खुद मौके पर जाकर स्थिति देखूंगा, इसके बाद नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।<br /><strong>- अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, उपवन संरक्षक</strong></p>
<p><strong>खुद चोरी करवाकर खरीद रहे पत्थर</strong><br />वन मंडल में भ्रष्टाचार लंबे अरसे से चल रहा है। वर्तमान में पुराने प्लांटेशन के आगे ही आंवली-रोजड़ी-12 नाम से नया प्लांटेशन चल रहा है। जिसमें बनी पत्थरों की दीवार में लगा अधिकतर पत्थर पुराने प्लांटेशन की दीवार से चोरी किया हुआ है। कुछ वनकर्मियों ने माफियाओं से मिलीभगत कर पहले पत्थर चोरी करवाया फिर नए प्लांटेशन की दीवार बनवाने के लिए उसे ही खरीद कर सरकार के लाखों रुपए डकार गए। दोषी कर्मचारियों से हो नुकसान की भरपाई।<br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, अध्यक्ष, पगमार्क फाउंडेशन </strong></p>
<p><strong>पहले 4 फीट थी अब नजर तक नहीं आती</strong><br />वर्ष 2019-20 में वाइल्ड लाइफ प्रोजेक्ट वर्क के सिलसिले में रावतभाटा आना-जाना होता था। तब, आंवली रोजड़ी प्लांटेशन की दीवार 4-4 फीट ऊंची नजर आती थी। हाल ही में गत 11 जनवरी, 23 व 26 फरवरी को यहां से गुजरा तो दीवार का नामो-निशान नहीं मिला। इसके बाद तीन दिन पहले 4 अप्रेल को इधर से गुजरा तो एक-एक फीट ऊंची बेतरतीब दीवार नजर आई। जब 27 फरवरी को वन मंत्री के सामने भ्रष्टाचार का मामला उठा तो वन मंडल ने रातों रात दीवार खड़ी कर दी। जबकि, जून 2022 में दीवार चोरी होने लगी जो जुलाई 2023 में पूरी तरह से गायब हो गई। सेटलाइट इमेज से स्पष्ट हो रहा है।  <br /><strong>- रवि नागर, वाइल्ड लाइफ रिसर्चर</strong></p>
<p><strong>माफिया से गठजोड़</strong><br />दीवार चोरी वन कर्मियों की माफियाओं के साथ मजबूत गठजोड़ का उदारहण है। वनों को जो नुकसान हुआ और वन भूमि पर बनी पुरानी सुरक्षा दीवार चोरी होने की उच्च स्तरीय जांच करवाई जानी चाहिए। जिन वनकर्मियों व अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण सरकार को नुकसान हुआ है, उसकी तमाम भरपाई दोषी कर्मचारियों से की जानी चाहिए।<br /><strong>- बाबूलाल जाजू, पर्यावरणविद एवं प्रदेशाध्यक्ष, पीपुल्स फॉर एनिमल</strong></p>
<p><strong>गंभीर प्रकृति का अपराध</strong><br />कोटा वन मंडल के आंवली-रोजड़ी वन क्षेत्र के ठीक सामने  मुकुंदरा टाइगर रिजर्व है। ऐसे में वन मंडल और मुकुंदरा के इको सेंसिटिव जोन में वन संपदा की चोरी, अवैध खनन और सरकारी राशि की अनियमितता गंभीर प्रकृति का अपराध है। जिसकी जांच राज्य सरकार को वरिष्ठ अफसरों से करानी चाहिए। वन अधिकारियों की अपराधिक गतिविधियों से वन की सुरक्षा के अतिरिक्त वन्य प्राणियों के लिए भी खतरा पैदा होता है।<br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट, भोपाल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Apr 2024 18:18:50 +0530</pubDate>
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                <title>बायोलॉजिकल पार्क में मंडराया पैंथर-भालू का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा दीवार टूटे हुए 6 माह बीतने के बाद भी पक्की दीवार का निर्माण नहीं करवाया जा सका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger-of-panther-bear-looming-in-biological-park/article-68141"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/untitled-design1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शाकाहारी वन्यजीवों पर बाहरी मांसाहारी जानवरों के हमले का खतरा मंडरा रहा है। चीतल के एनक्लोजर के नजदीक सुरक्षा दीवार टूटी हुई है। जिसकी अब तक मरम्मत नहीं करवाई गई। जबकि, पूर्व में पैंथर द्वारा बायोलॉजिकल पार्क में घुसकर ब्लैक बक के बच्चे का शिकार करने की घटना हो चुकी है। इसके बावजूद वन्यजीव विभाग के अधिकारियों की कुंभकरणीय नींद नहीं टूटी। अधिकारियों की लापरवाही से शाकाहारी वन्यजीवों की जान खतरे में पड़ गई।  दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के पीछे थर्मल परिसर व वन मंडल का घना जंगल है। जहां पैंथर, भालू, जरख, सियार का मूवमेंट रहता है। ऐसे में सुरक्षा दीवार टूटने से इनके पार्क में घुस आने व शाकाहारी वन्यजीवों पर हमले की आशंका बनी हुई है। </p>
<p><strong>गत वर्ष टूटी थी सुरक्षा दीवार</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में गत वर्ष जुलाई माह में बारिश के दौरान पानी का बहाव अधिक होने से 24 मीटर सुरक्षा दीवार ढह गई थी और चीतल के एनक्लोजर में पानी भर गया था। जिससे वन्यजीवों में अफरा तफरी मच गई थी। इसके बावजूद विभाग ने दीवार की मरम्मत नहीं करवाई। हालांकि एक माह बाद अगस्त में 4 फीट ऊंची कच्ची दीवार बनाकर औपचारिकता पूरी कर दी। जबकि, सुरक्षा की दृष्टि से  8 फीट ऊंची पक्की दीवार का निर्माण करवाया जाना बेहद जरूरी है। </p>
<p><strong>6 माह बाद भी नहीं बनी </strong><br />सुरक्षा दीवार टूटे हुए 6 माह बीतने के बाद भी पक्की दीवार का निर्माण नहीं करवाया जा सका। जबकि, पार्क के पीछे जंगल में मांसाहारी जानवरों का मूवमेंट अधिक रहता है। ऐसे में रात के समय पैंथर, जरख व सियार के हमले का खतरा अधिक रहता है। पूर्व में भी घटना हो चुकी है, इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा बजट का रोना रोया जा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 24 मीटर लंबी और 8 फीट ऊंची पक्की दीवार निर्माण के लिए दो लाख रुपए की लागत आएगी। लेकिन अधिकारियों द्वारा सरकार से बजट मांगने के लिए सार्थक प्रयास नहीं किए जा रहे। </p>
<p><strong>पैंथर कर चुका हिरण के बच्चे का शिकार</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में गत वर्ष 28 अप्रेल की रात को पैंथर ने बायोलॉजिकल पार्क की 8 फीट ऊंची दीवार फांद परिसर में प्रवेश किया फिर ब्लैक बक के एनक्लोजर में छलांग लगा नाइट शेल्टर तक पहुंच गया। पैंथर को सामने देख ब्लैक बक में भगदड़ मच गई। इस दौरान शेल्टर के गेट से 6 दिन का शावक बाहर निकल गया। जिस पर पैंथर ने हमला कर शिकार कर लिया। विभाग को घटना का पता अगले दिन लगा था। पार्क साढ़े तीन किमी लंबा है और वन्यजीवों की निगरानी के लिए 4 गार्ड तैनात हैं।</p>
<p><strong>सीजेडए ने जताई थी आपत्ति</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने पूर्व में अभेड़ा बायोलोजिकल पार्क की सुरक्षा दीवार पर लगी लोहे की एंगलों पर आपत्ति जताई थी। प्राधिकरण का कहना था कि लोहे की एंगल की जगह सौलर वाली पैंथर प्रूफ फैंसिंग लगवाई जाए। इस फैंसिंग से वन्यजीवों को हल्का करंट का झटका लगता है। जिससे पैंथर अंदर नहीं आ सके। </p>
<p>24 मीटर लंबी दीवार है जो टूट गई थी। ऐसे में तत्कालीन व्यवस्था कर 4 फीट ऊंची कच्ची दीवार बना दी है। जू-मेंटिनेंस के लिए सरकार से 20 लाख का बजट मांगा है, जिसमें प्रोटेक्शन वॉल के साथ अन्य काम भी करवाए जाएंगे। जब तक बजट नहीं मिल जाता तब तक हम पक्की दीवार बनवाने की स्थिति में नहीं है। <br /><strong>- सुनील गुप्ता, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jan 2024 16:22:37 +0530</pubDate>
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                <title>शाहाबाद घाटी में क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवार, हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ठेकेदार की लापरवाही के चलते  सुरक्षा दिवार क्षतिग्रस्त हो गई और दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/damaged-security-wall-in-shahabad-valley--danger-of-accidents/article-63623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/gan-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। उपखंड मुख्यालय शाहाबाद को जाने के लिए नेशनल हाईवे 27 से लगभग 3 से 4 किलोमीटर घाट सेक्शन से गुजरना पड़ता है। शाहाबाद घाटी की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हो रही है, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। यह रास्ता प्राचीन समय से है तथा शाहबाद आने वाले सभी वाहन इसी घाटी क्षेत्र से होकर शाहाबाद पहुंचते हैं। सरकार द्वारा लगभग 5 करोड़ की लागत से डामरीकरण मरम्मत कार्य सड़क का कराया गया जिसको लगभग एक माह से अधिक समय गुजर गया। ठेकेदार द्वारा सड़क से जो मलवा खुद गया था हटाया गया था। उसको बाउंड्री वॉल सुरक्षा दीवार के पीछे फेंका गया जिससे दर्जनों जगह सुरक्षा दिवार क्षतिग्रस्त हो गई और दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>सुरक्षा दीवार से ऊंचा हुआ रोड</strong><br /> नवीन रोड निर्माण में सुरक्षा दिवार से कई जगह रोड ऊंचा हो गया है और सुरक्षा दिवार निचे रह गई जबकि यह घाटी क्षेत्र है ऐसे में सुरक्षा दीवार का नीचे होना बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे रहा है। क्योंकि इस घाटी में विकट मोड भी तीन जगह हैं। ऐसे में सुरक्षा दिवार क्षतिग्रस्त एवं नीची रह जाने के कारण कभी भी बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है। ठेकेदार की लापरवाही के चलते जिस जगह सुरक्षा दिवार क्षतिग्रस्त है या नीचे रह गई है। वहां पर वैकल्पिक रूप से सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए थे परंतु इंतजाम नहीं किए गए।</p>
<p><strong>रोड निर्माण में नहीं की गई पानी निकासी की व्यवस्था</strong><br />कस्बे के बाबूलाल पटवारी सुरेश सोनी ने बताया कि 5 करोड़ की लागत से जो रोड का निर्माण घाटी क्षेत्र में कराया गया है। वहां पर पहाड़ों से आने वाले पानी निकासी की व्यवस्था भी बिल्कुल भी नहीं की गई। बरसात के समय में यह पानी रोड पर आएगी और पूरा रोड खराब हो जाएगा। जबकि पहाड़ी इलाका होने के साथ बरसात का पानी सबसे अधिक रोड पर आता है। यदि ऐसे में पानी निकासी की व्यवस्था नालियों के माध्यम से नहीं की गई तो पूरा रोड खराब हो जाएगा। हरिशंकर शर्मा, महेंद्र राजेंद्र तोमर, पवन शर्मा आदि ने  रोड के दोनों तरफ बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था करने और  सुरक्षा दीवार को ठीक करने की मांग की है। </p>
<p><strong>सड़क ठेकेदार ने पैंथर मूवमेंट इलाके में सड़क से निकले हुए मलबे को फेंका</strong><br />कोटा शिवपुरी नेशनल हाईवे 27 से शाहाबाद कस्बे को जोड़ने वाली पुरानी घाटी क्षेत्र में सड़क का निर्माण कर चल रहा है। इस दौरान सड़क की खुदाई से निकला हुआ मलबा वन क्षेत्र की भूमि में डाल दिया है और निर्माण कार्य के दौरान कई पेड़ों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। चार-पांच किलोमीटर घाटी क्षेत्र में बनाई जा रही सड़क के दोनों और गहरे गड्ढे बने हुए हैं और बाउंड्रीवॉल भी क्षतिग्रस्त है। इसका निर्माण कार्य आरएसआरडीसी के माध्यम से एक कार्य एजेंसी करा रही है । निर्माण कार्य में ठेकेदार की मनमानी के चलते पैंथर के मूवमेंट एरिया में सड़क से निकलने वाले मलबे को फेंक दिया है और इस दौरान कई पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा दिया है। सड़क निर्माण का कार्य लगभग 5 करोड़ की लागत से किया जा रहा है।</p>
<p>घाटी क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार ने सड़क के मलबे को वन भूमि में डाल दिया है तो इसके खिलाफ उचित कार्रवाई वन विभाग द्वारा की जाएगी।<br /><strong>- हाफिज मोहम्मद, क्षेत्रीय वन अधिकारी शाहाबाद</strong></p>
<p>शाहाबाद पुरानी घाटी क्षेत्र में लगभग 5 करोड़ की लागत से निर्माण कर करवाया जा रहा है। एक साइड में कंक्रीट डालेंगे बाउंड्री वाल बनाएंगे। निर्माण के दौरान मलबा सड़क का निकला है। उसको सुरक्षित स्थान पर फेंकना है, नुकसान किसी का ना हो। नाली निर्माण के लिए घाटी क्षेत्र में जगह नहीं है।<br /><strong>- मनोज माथुर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, आरएसआरडीसी, झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Dec 2023 17:35:42 +0530</pubDate>
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