<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/cattle-free/tag-41834" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>cattle free - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/41834/rss</link>
                <description>cattle free RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>करोड़ों की आवासीय योजना भी नहीं कर पाई शहर को  कैटल फ्री, देव नारायण योजना से लौटे पशु पालक</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में बड़ी संख्या में मुख्य मार्गों तक पर निराश्रित मवेशियों के जमघट लगे हुए है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-the-housing-scheme-worth-crores-could-not-make-the-city-cattle-free/article-105993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । पिछली कांग्रेस सरकार के समय में शहर को कैटल फ्री बनाने के तहत तत्कालीन नगर विकास न्यास द्वारा पशु पालकों के लिए करोड़ों रुपए की लागत से आवासीय योजना बनाई थी। लेकिन हालत यह है कि योजना में जाने के बाद फिर से कई पशु पालक वापस शहर में लौट आए। जिससे सड़कों पर मवेशियों का जमघट कम नहीं हो रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा शहर को कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया गया। इसके लिए शहर के पशु पालकों और पशुओं का सर्वे कराया गया था। उस सर्वे के आधार पर तत्कालीन नगर विकास न्यास(केडीए) की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए की लागत से देव नारायण आवासीय एकीकृत योजना बनाई थी।  इस योजना में स्वयं की भूमि या अतिक्रमण कर बाड़े बनाकर रहने वाले पशु पालकों व पशुओं को शिफ्ट किया गया था। लेकिन हालत यह है कि कुछ समय बाद ही कई पशु पालक वहां से मकान खाली कर वापस शहर में आ गए हैं। इन जगहों पर देखे जा सकते हैं पशु: नए कोटा शहर के महावीर नगर, रंगबाड़ी, जवाहर नगर, आंवली रोझड़ी,बसंत विहार समेत कई जगहों पर पशु पालकों के पशुओं को देखा जा सकता है।  इनके अलावा शहर में बड़ी संख्या में मुख्य मार्गों तक पर निराश्रित मवेशियों के जमघट लगे हुए है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। साथ ही पशु पालकों के बाड़ों से उन क्षेत्रों में गोबर व अन्य कई तरह की गंदगी फेली होने से आस-पास के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>निगम कर रहा कार्रवाई</strong><br />शहर के मुख्य मार्गों पर निराश्रित हालत में बैठे व घूमने वाले मवेशियों को नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से पकड़कर कायन हाउस व गौशाला में बंद किया जा रहा है। हालांकि पूर्व में इस काम को अभियान चलाकर किया गया था। लेकिन बाद में अभियान को रोककर शिकायत वाले स्थानों से ही मवेशियों को पकड़कर  बंद किया जा रहा है। जिससे गौशाला में गौवंश की संख्या बढ़ रही है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार पालतू पशु पकड़े जाने पर लोग छुड़वाने भी आ रहे हैं। लेकिन उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित जुर्माना जमा करवाने के बाद ही छोड़ा जा रहा है। </p>
<p><strong>योजना में बनाई ये सुविधाएं</strong><br />योजना मेंं पशु पालकों के रहने के लिए मकान, पशुओं के लिए बाड़े और भूसा व चारा रखने के लिए गोदाम का प्रावधान किया गया था।  साथ ही पशुओं के गोबर का उपयोग करने के लिए बायो गैस प्लांट बनाया। दूध का उपयोग करने के लिए डेयरी बनाई। बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल, पशुओं व लोगों के उपचार के लिए स्वास्थ्य केन्द्र और वहां रहने वालों की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी तक का प्रावधान किया गया था। </p>
<p><strong>सुविधाएं नहीं होने से लौटना पड़ा</strong><br />पशु पालक कालूलाल गुर्जर का कहना है कि देव नारायण योजना शहर से दूर है। साथ ही वहां कई सुविधाओं का अभाव है। जिससे पशु पालकों को दूध बेचने से लेकर बच्चों को पढ़ाने और अन्य सामान खरीदने के लिए शहर में आना पड़ रहा है। जिससे आने-जाने में समय व पेट्रोल अधिक खर्च हो रहा है। इस कारण से कुछ समय पहले वापस शहर में आ गए।  मोहन गुर्जर का कहना है कि शहर में सुविधाएं अधिक हैं। देव नारायण योजना में बच्चों का मन नहीं लगा। इस कारण से वापस आ गए है। पशुओं को बाड़े में ही रखते हैं। </p>
<p><strong>गौशाला विस्तार जमीन पर बनेगी चार दीवारी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के अधीक्षण अभियंता व गौशाला प्रभारी महेश गोयल ने बताया कि बंधा धर्मपुरा में निगम की गौशाला विस्तार के लिए जमीन का आवंटन हो गया है। उस जमीन  पर चार दीवारी बनाने का काम किया जाएगा। जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। गौशाला का विस्तार होने से यहां अधिक संख्या में पशुओं को रखने में सुविधा होगी। जबकि पूर्व में गौशाला में जगह कम होने से समस्या बनी हुई थी। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />देव नारायण योजना बनने के बाद भी पशु पालक शहर में रह रहे हैं या वहां से वापस शहर में आ गए हैं। ऐसे पशु पालकों का केडीए की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे होने के बाद शीघ्र ही केडीए व नगर निगम मिलकर संयुक्त रूप से ऐसे पशु पालकों के खिलाफ कार्रवाई कर पशुओं को शहर से वापस खदेड़ा जाएगा। निराश्रित को गौशाला में बंद किया जाएगा। जिससे शहर को कैटल फ्री बनाने की जो योजना है उसे मूर्त रूप दिया जा सके।  <br /><strong>-अशोक त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-the-housing-scheme-worth-crores-could-not-make-the-city-cattle-free/article-105993</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-the-housing-scheme-worth-crores-could-not-make-the-city-cattle-free/article-105993</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 15:15:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/257rtrer-%283%291.png"                         length="698526"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैटल फ्री शहर में फिर लगा सड़कों पर मवेशियों का जमघट</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में आवारा मवेशियों की संख्या काफी अधिक है, उनमें भी गायों से अधिक बैल व सांडों की संख्या है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-free-city-again-sees-gathering-of-cattle-on-the-streets/article-63758"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/gan3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल कोटा शहर को कैटल फ्री बनाने का प्रयास तो किया गया लेकिन अभी तक यह पूरी तरह से साकार नहीं हो सका है। जिससे अभी भी सड़कों पर जगह-जगह मवेशियों का जमघट लगा हुआ है। सड़क के बीच दौड़ते सांडों से हादसों का खतरा बना हुआ है।  शहर में कुछ समय पहले तक जहां सड़कों से आवारा मवेशियों की संख्या कम हो गई थी। वहीं एक बार फिर से हर सड़क व मुख्य मार्ग पर मवेशी ही मवेशी नजर आने लगे हैं। वह भी झुंडों में सड़क के बीच और डिवाइडरों के सहारे खड़े व बैठे रहते हैं। जिससे सड़क से निकलने वाले वाहन चालकों के उनसे टकराने पर आए  दिन हादसे हो रहे हैं। सबसे अधिक समस्या रात के समय आ रही है। दिन में ट्रैफिक अधिक होने से और रात में अंधेरा होने से हादसों का खतरा अधिक बना हुआ है। </p>
<p><strong>गायों से अधिक बैल व सांड सड़कों पर</strong><br />शहर में वैसे तो आवारा मवेशियों की संख्या काफी अधिक है। उनमें भी गायों से अधिक बैल व सांडों की संख्या है। भारी भरकम होने से ये सड़क पर गायों के पीछे व लोगों की तरफ दौड़ते रहते हैं। जिससे बचने के प्रयास में शहर में कई जगह पर वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। दुर्घटनाग्रस्त होने वाले अधिकतर लोगों का तो निजी अस्पताल में उपचार होने से जानकारी तक नहीं मिल पाती है। गायों से अधिक लोगों को खतरा भी सांडों से है। </p>
<p><strong>निगम की गौशाला में भी जगह की कमी</strong><br />पीड़ित मुकेश सोनी कहते हैं शहर में सड़कों पर लावारिस हालत में घूमने वाले पशुओं को पकड़ने का काम नगर निगम का है। शहर में कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण दो नगर निगम हैं। उसके बाद भी शहर में मवेशियों के झुंड दिखाई दे रहे हैं। हालांकि निगम की ओर से पशुओं को पकड़कर गौशाला में भेजा जा रहा है। लेकिन वहां भी जगह की कमी होने से मवेयिशों को रखने की समस्या है।  तत्कालीन जिला कलक्टर के निर्देश पर निगम की ओर से करीब एक हजार से अधिक पशुओं को निगम की गौशाला से अन्य निजी गौशालाओं में शिफ्ट किया गया है। लेकिन उसके बाद भी बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जगह की कमी है। </p>
<p><strong>नहीं मिली 25 बीघा जमीन, निर्माण कार्य भी पूरा नहीं</strong><br />नगर निगम कीओर से बंधा धर्मपुरा में गौशाला के पास ही खाली पड़ी करीब 25 बीघा जमीन गौशाला के लिए लेने का प्रयास किया जा रहा है। काफी प्रयासों के बाद भी अभी तक वह जमीन निगम को नहीं मिली है। निगम अधिकारियों ने उस जमीन के लिए न्यास अधिकारियों को पत्र लिखे हैं। न्यास ने वह स्वीकृति के लिए मुख्यालय को भेजा हुआ है। अभी तक वहां से  दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।  वहीं निगम की गौशाला में निर्माण के लिए दो से तीन करोड़ रुपए के  कार्यादेश भी हो चुके हैं। उसके बावजूद अभी तक काम पूरे नहीं हुए हैं।  जिससे वहां नए शेड नहीं बन सके हैं। </p>
<p><strong>सब्जीमंडी और मेन रोड सभी जगह हालत खराब</strong><br />शहर में मेन रोड हो या सब्जीमंडी का क्षेत्र सभी जगह पर मवेशियों के कारण हालत खराब है। नई धानमंडी स्थित थोक फल सब्जीमंडी हो या धानमंडी के सामने डीसीएम रोड। शहर के हर क्षेत्र में बनी छोटी-छोटी सब्जी मंडियों से लेकर मेन रोड व चौराहों तक पर जिधर देखो उधर मवेशी ही  मवेशी नजर आ रहे हैं। कोटड़ी चौराहे पर ग्रेड सेपरेटर के पास, छावनी फ्लाई ओवर, नयापुरा चौराहा, रामपुरा, बैराज के सामानांतर पुल, पुराने शहर का पाटनपोल, टिपटा, कैथूनीपोल, सब्जीमंडी और सीएडी चौराहा, घोड़ा सर्किल समेत सभी जगह पर मवेशियों के झुंड हादसों का कारण बन रहे हैं। </p>
<p><strong>देव नारायण योजना फिर भी सड़कों पर मवेशी</strong><br />शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए नगर विकास न्यास के माध्यम से बंधा धर्मपुरा में देव नारायण आवासीय योजना विकसित की गई है। करीब 300 करोड़ की लागत से बनी इस योजना में शहर के सभी पशु पालकों व उनके मवेशियों को शिफ्ट करने की योजना थी। हालांकि अधिकतर पशु पालक व पशुओं को वहां शिफ्ट किया भी गया है। साथ ही इसके दूसरे फेज का काम भी चल रहा है। उसके बाद भी से पशुओं की संख्या कम नहीं हुई है। </p>
<p><strong>घायल पशुओं की एम्बुलेंस के लिए चालक तक नहीं</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के पार्षद व गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि निगम की गौशाला में जगह की कमी है। वहां निर्माण कार्य पूरे नहीं हुए हैं। गौशाला के लिए 25 बीघा जमीन की फाइल जयपुर में अटकी हुई है। सिंह ने कहा कि निगम की ओर से मवेशियों को पकड़ा तो जा रहा है। लेकिन उनकी संख्या कम है। यहां तक कि घायल पशुओं को लाने के लिए कोटा दक्षिण निगम की एम्बूलेंस है। उसके लिए एक चालक भी स्वीकृत किया हुआ है। लेकिन वह कुछ लोगं के इशारे पर एम्बूलेंस में काम नहीं कर अन्य जगह पर काम करता है। जिससे एम्बूलेंस बेकार खड़ी हुई है। उसकी जगह पर कोटा उत्तर की एम्बूलेंस के चालक से काम चलाना पड़ रहा है।  इस संबंध में महापौर से लेकर आयुक्त तक को अवगत करवा रखा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />निगम की ओर से सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को लगातार पकड़ा जा रहा है। सांडों को भी पकड़ रहे हैं। अभी तक चुनााव के कारण अभियान नीं चल सका था। अब पशु अधिक होने से फिर से अभियान चलाकर इन्हे पकड़ा जाएगा। गौशाला में पशु अधिक होने से कुछ समय पहले ही निजी गौशालाओं को करीब एक हजार पशु शिफट किए हैं। गौशाला में करीब 28 सौ से 3 हजार पशु हैं। जिनमें से करेीब 18 सौ तो सांड हैं। <br /><strong>- दिनेश शर्मा, प्रभारी गौशाला, नगर निगम </strong></p>
<p>गौशाला प्रभारी ने कुछ समय पहले एम्बूलेंस पर चालक नहीं होने की जानकारी दी थी। उस समय चालक की व्यवस्था कर दी थी। उसके बाद उन्होंने इस संबंध में नहीं बताया। यदि वे जानकारी देंगे और आवश्कयता होने पर चालक की व्यवस्था कर दी जाएगी। <br /><strong>- सरिता सिंह, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-free-city-again-sees-gathering-of-cattle-on-the-streets/article-63758</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-free-city-again-sees-gathering-of-cattle-on-the-streets/article-63758</guid>
                <pubDate>Sat, 09 Dec 2023 17:12:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-12/gan3.png"                         length="504217"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        