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                <title>Parliament Session - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Parliament Session RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>विशेष संसद सत्र महिला सशक्तिकरण की दिशा में 'ऐतिहासिक कदम': पीएम मोदी ने कहा-माताओं और बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के विशेष सत्र को महिला सशक्तिकरण के लिए 'ऐतिहासिक' बताया है। उन्होंने विधायिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और गरिमा को राष्ट्र का सम्मान करार दिया। पीएम ने समावेशी विकास और लैंगिक समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इसे राष्ट्रीय गौरव का विषय बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/special-parliament-session-is-a-historic-step-towards-women-empowerment/article-150606"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/modi-sansad.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गुरुवार से शुरू हो रहा संसद का विशेष सत्र देश में महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने की दिशा में एक 'ऐतिहासिक कदम' है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की गरिमा और प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "संसद के आज के विशेष सत्र से हमारा देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं और बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और इसी भावना के साथ हम इस दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक का आह्वान करते हुए कहा, "आप उदय हों और अपनी किरणों से विश्व को आलोकित करें। कण्व वंश के ऋषियों ने समृद्धि और प्रचुरता के लिए अपने भजनों के साथ आपका आह्वान किया है।" पीएम मोदी की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब संसद का एक दुर्लभ विशेष सत्र आयोजित हो रहा है, जिसमें विधायिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों सहित प्रमुख विधायी उपायों को उठाए जाने की व्यापक उम्मीद है। सरकार ने लगातार इस तरह की पहलों को समावेशी विकास और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयास के रूप में पेश किया है।</p>
<p>संसद सत्र से पहले पीएम मोदी का यह संदेश उस दृष्टिकोण को रेखांकित करता है, जो महिला सशक्तिकरण को न केवल एक नीतिगत प्राथमिकता के रूप में बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक लोकाचार के रूप में भी स्थापित करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:20:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>‘महिला आरक्षण’ को लेकर संसद में टकराव संभव : विशेष सत्र में सरकार-विपक्ष होंगे आमने-सामने, महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत </title>
                                    <description><![CDATA[संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 करने वाले विधेयकों पर घमासान तय है। मोदी सरकार जहाँ इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और दक्षिण भारतीय राज्य परिसीमन के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। किरेन रिजिजू ने आश्वस्त किया है कि यह बदलाव संतुलित और आनुपातिक विकास सुनिश्चित करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/clash-possible-in-parliament-over-womens-reservation-government-opposition-will-face/article-150602"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर जोरदार सियासी टकराव देखने को मिल सकता है। मोदी सरकार जहां ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने इसके कई प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है।</p>
<p>विशेष सत्र में मोदी सरकार तीन विवादास्पद विधायी प्रस्तावों को पारित कराने की कोशिश कर रही है, जिनके लिए संविधान संशोधन आवश्यक है, इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 815 करना, महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और इस विस्तार के दायरे में केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करना है। ये तीन विधेयक हैं, संविधान (131वां संशोधनद्ध विधेयक)परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक जिसे विपक्ष के रजामंदी के बिना संसद में पास करना मुमकिन नहीं है। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और इससे संसदीय लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। </p>
<p><strong>परिसीमन के मुद्दे पर कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्री खिलाफ</strong></p>
<p>वहीं, दक्षिण भारत के कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हितों को नुकसान पहुंचा या उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया गया, तो तमिलनाडु में व्यापक आंदोलन होगा। </p>
<p><strong>किसी राज्य के साथ नहीं होगा अन्याय: रिजिजू </strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा सीटों के परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होने की आशंका सिरे से खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 किए जाने से दक्षिणी राज्यों को लाभ होगा, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि की जाएगी। संविधान संशोधन विधेयक पूरी तरह से संतुलित, सुविचारित है और प्रत्येक समुदाय, क्षेत्र और राज्य की आकांक्षाओं का ध्यान रखेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण पर केंद्र सरकार की नीयत पर कांग्रेस ने उठाया सवाल : जातिगत जनगणना से बचने का लगाया आरोप, 16 अप्रैल से शुरू होगा संसद का विशेष सत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ओबीसी चेयरमैन डॉ. अनिल जय हिंद ने महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की है। उन्होंने सरकार पर जातिगत जनगणना से बचने का आरोप लगाया और कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण अधूरा है। जय हिंद ने राहुल गांधी की यात्रा के प्रभाव का जिक्र करते हुए ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटे पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-raised-questions-on-the-intention-of-the-central-government/article-150501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ओबीसी विभाग के चेयरमैन डॉ अनिल जय हिंद ने कहा है कि लोक सभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण चर्चा का नहीं, बल्कि उसके तत्काल क्रियान्वयन का मामला है। उन्होंने बताया कि सरकार 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुला रही है, जिसमें संविधान संशोधन लाने की तैयारी है। जय हिंद के अनुसार, पहले सरकार ने 2027 में जातिगत जनगणना, उसके बाद परिसीमन और फिर महिला आरक्षण लागू करने का रोडमैप बनाया था, लेकिन अब 2011 की जनगणना के आधार पर इसे लागू करने की बात कही जा रही है, जो मौजूदा जनसंख्या बदलावों के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातिगत जनगणना से बचना चाहती है। इस संदर्भ में 2021 में संसद दिये गये आश्वासन और उच्चतम न्यायालय में दिये गये हलफनामों का हवाला दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के बाद दबाव में सरकार ने रुख बदला। उन्होंने केंद्र सरकार पर ओबीसी महिलाओं को आरक्षण से वंचित रखने का आरोप लगाया और साथ ही याद दिलाया कि राजीव गांधी सरकार की ओर से लाये गये 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में ओबीसी आरक्षण का प्रावधान पहले से मौजूद है। जय हिंद ने कहा कि बड़े वर्ग को प्रतिनिधित्व से दूर रखना लोकतंत्र के खिलाफ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:28:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद की तीन दिवसीय बैठक से पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं अहम बैठक, इन अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति फाइनल</title>
                                    <description><![CDATA[संसद के विशेष सत्र से पहले मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं ने अहम बैठक की। विपक्ष ने महिला आरक्षण और सीटों के विस्तार (परिसीमन) को संघीय ढांचे के लिए 'खतरनाक' बताया। राहुल गांधी और शरद पवार समेत दिग्गज नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त रणनीति तैयार की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/before-the-three-day-meeting-of-parliament-the-leaders-of-india/article-150566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/india1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सांसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तथा संसदीय सीटों के विस्तार के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए संसद की कल से शुरू हो रही तीन दिवसीय बैठक से पहले बुधवार को यहां विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई जिसमें संसद में सरकार को घेरने की रणनीति को लेकर विचार विमर्श किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के यहां स्थित आवास 10 राजाजी मार्ग पर हुई इस बैठक में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में विपक्षी नेताओं ने महिला आरक्षण विधेयक और संसदीय सीटों के विस्तार को लेकर व्यापक विचार विमर्श किया।</p>
<p>बैठक को लेकर कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बताया "संसद के कल से हो रहे विशेष सत्र की रणनीति पर चर्चा करने के लिए, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के यहां स्थित आवास पर विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने बैठक में भाग लिया। सरकार का परिसीमन कदम खतरनाक है और देश के लोकतांत्रिक ढांचे, विशेष रूप से राज्यों को केंद्र में उचित हिस्सेदारी देने वाले संघीय ढांचे पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।</p>
<p>हमने कल से शुरू हो रही बैठक के लिए एक संयुक्त विपक्षी रणनीति तैयार करने के वास्ते बैठक की।" इस बैठक में श्री खरगे के अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, सुप्रिया सुले, शिवसेना उद्धव गुट के संजय राउत, द्रमुक के टी आर बालू, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन,राजद के तेजस्वी यादव तथा कपिल सिब्बल सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 17:53:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नीतीश कुमार बने राज्यसभा सांसद : पीएम मोदी ने दी बधाई , मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की संभावना के बीच नीतीश का पहला बयान आया सामने</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेकर केंद्रीय राजनीति में वापसी की। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे बिहार में नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता के नए समीकरणों का रास्ता साफ होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nitish-kumar-became-rajya-sabha-mp-pm-modi-congratulated-amid/article-149878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/nitish-kumar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बिहार से राज्यसभा के लिए नवनिर्वाचित सदस्य नीतीश कुमार ने शुक्रवार को संसद भवन में सदन की सदस्यता शपथ ली। राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने जनता दल यू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शपथ दिलाई। नीतीश कुमार ने हिंदी भाषा में शपथ ली। वह राज्यसभा के लिए हाल ही में हुए द्विवार्षिक चुनाव में उच्च सदन के लिए चुने गये थे। इस अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राज्यसभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा , विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पंचायती राज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सांसद जयराम रमेश, राजीव शुक्ला, संजय कुमार झा, राजीव प्रताप रूडी, राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी और राज्यसभा सचिवालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।</p>
<p>नीतीश कुमार के जल्द ही बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की संभावना है। इसके साथ ही नीतीश कुमार एक बार फिर से राज्य की राजनीति छोड़कर केन्द्र की राजनीति में पारी शुरू करने जा रहे हैं। बिहार की बागडोर संभालने से पहले नीतीश कुमार केन्द्र में मंत्री रह चुके थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि नीतीश कुमार देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं, जिनकी सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता और बिहार के विकास में अमिट योगदान सर्वविदित है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को संसद में लौटते देखना बहुत सुखद होगा और एक अनुभवी विधायक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में उनका व्यापक अनुभव सदन की गरिमा को अत्यधिक बढ़ाएगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा ," नीतीश कुमार जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। सुशासन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता की हर तरफ सराहना हुई है। उन्होंने बिहार के विकास में अमिट योगदान दिया है। उन्हें एक बार फिर संसद में देखना बहुत सुखद होगा। सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव से संसद की गरिमा और बढ़ेगी। राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने पर उन्हें हार्दिक बधाई और आगे के कार्यकाल के लिए ढेरों शुभकामनाएं।" उल्लेखनीय है कि राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने नीतीश कुमार को आज सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 15:18:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सी. पी. राधाकृष्णन ने दिलवाई पार्थ अजीत पवार को राज्यसभा सदस्यता की शपथ, महाराष्ट्र का करेंगे प्रतिनिधित्व</title>
                                    <description><![CDATA[राकांपा (NCP) नेता पार्थ अजीत पवार ने गुरुवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें अंग्रेजी में पद की शपथ दिलाई। दिवंगत अजीत पवार के पुत्र पार्थ अब उच्च सदन में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस अवसर पर जे.पी. नड्डा और सुनेत्रा पवार सहित कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cp-radhakrishnan-administers-oath-of-rajya-sabha-membership-to-parth/article-149695"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajyasabha-member-oath.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता पार्थ अजीत पवार ने गुरुवार को यहां राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली। राज्य सभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्री पवार को शपथ दिलाई। उन्होंने अंग्रेज़ी में शपथ ली और वह राज्यसभा में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। पार्थ अजीत पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख रहे दिवंगत अजीत पवार के पुत्र हैं। वह हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में उच्च सदन के लिए चुने गए थे। इस अवसर पर राज्यसभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार, कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश, एन सी पी के प्रफुल्ल पटेल, लोकसभा सदस्य तटकरे सुनील दत्तात्रेय, राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी और राज्य सभा सचिवालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 16:57:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण विधेयक पर घमासान : कांग्रेस ने सरकार के फैसले को बताया 'एकतरफा' , सर्वदलीय बैठक की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 16 अप्रैल से बुलाई गई संसद की तीन दिवसीय बैठक को सरकार की 'मनमानी' करार दिया है। विपक्ष ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इसे 29 अप्रैल के बाद करने का सुझाव दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बिना सर्वदलीय सहमति के नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों को थोप रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-the-centre-calling-a-three-day-meeting-of-parliament/article-148995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/congress-logo.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच 16 अप्रैल से महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन पर चर्चा के लिए संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाना सरकार का एकतरफा निर्णय है और इस बैठक को लेकर विपक्ष को नजरअंदाज कर पूरी तरह से मनमानी की गई है। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संसद की बैठक 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाई गयी है। </p>
<p>इस बारे में सरकार के साथ जो विचार विमर्श हुआ था उसमें कहा गया था कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव हो रहे हैं इसलिए 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस बारे में विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की इच्छा जताई तो श्री खरगे ने 15 मिनट के भीतर ही पत्र का जवाब देते हुए सुझाव दिया कि अलग-अलग चर्चा करने के बजाय सभी विपक्षी दलों को एक साथ आमंत्रित कर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।</p>
<p>लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी कहा कि यदि सरकार महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन करना चाहती है, तो इस पर सभी दलों की सहमति आवश्यक है और इसके लिए सर्वदलीय बैठक सबसे उपयुक्त मंच होगा। कांग्रेस नेता के अनुसार खरगे ने कहा था कि इस बारे में सामूहिक तौर पर फ़ैसला लीजिए और 29 अप्रैल के बाद सभी दलों की बैठक इस बारे में बुलाइए। सरकार के साथ इसको लेकर 16 से 26 मार्च तक खतों का आदान प्रदान हुआ लेकिन लगता है कि सरकार पहले ही मन बना चुकी थी और अंत में उसने एकतरफा निर्णय लेते हुए 16, 17, 18 अप्रैल को संसद की बैठक बुलाने का निर्णय लिया। मतलब साफ है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले ही आचार संहिता के दौरान ये संसद की बैठक होगी जबकि 24 मार्च को तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर, सभी विपक्षी दल सर्वदलीय बैठक के पक्ष में थे।</p>
<p>विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से सुझाव दिया था कि 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाए क्योंकि तब तक सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाएंगे। इसके बावजूद सरकार ने इस सुझाव को नहीं माना। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष की मांग को दरकिनार करते हुए 16 अप्रैल से तीन दिन की संसद की बैठक बुलाई है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस सत्र में महिला आरक्षण विधेयक के साथ-साथ परिसीमन का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अब तक कोई व्यापक चर्चा नहीं हुई है।</p>
<p>कांग्रेस ने यह भी कहा कि सितंबर 2023 में लोकसभा और राज्यसभा द्वारा पारित महिला आरक्षण विधेयक में 30 महीनों के भीतर संशोधन लाने की बात कही गई थी और अब तीन दिन की बैठक बुलाकर इसी दिशा में कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है और पहली बार चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था। उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 1989 में 64, 65 संविधान संशोधन कर पंचायत और नगर पालिकाओं में एक तिहाई महिला आरक्षण का प्रावधान किया था। लोकसभा में यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हुआ लेकिन राज्यसभा में भाजपा तथा उसके लोगों ने ही इसका विरोध किया था, जिसके कारण ये पारित नहीं हो पाया। तब 1993 में कांग्रेस की सरकार में 73, 74 संविधान संशोधन लोकसभा और राज्यसभा में पारित कराया जिसके कारण आज पंचायत और नगरपालिकाओं में करीब 30 लाख चुने प्रतिनिधियों में से 15 लाख महिलाएं हैं। आरक्षण का प्रावधान एक तिहाई है लेकिन महिलाओं की भूमिका उससे भी ज्यादा बढ़कर 50 प्रतिशत के करीब है लेकिन केंद्र सरकार आज इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:06:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आम आदमी पार्टी का बड़ा फैसला: राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाया, जानें कौन लेगा उनकी जगह ?</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी। अरविंद केजरीवाल के इस फैसले के बाद पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से चड्ढा का बोलने का समय भी रोकने को कहा। यह कदम संसद सत्र से पहले पार्टी के अंदरूनी कलह और नेतृत्व परिवर्तन के बड़े संकेतों को दर्शाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-aam-aadmi-party-raghav-chadha-removed-from/article-148839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/raghav-chadda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने बड़े संगठनात्मक बदलाव के रूप में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाने का फैसला लिया है। पार्टी के संस्थापक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने उनकी जगह भारतीय बिजनेसमैन से पॉलिटिशियन बने और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी ने राज्यसभा सेक्रेटेरिएट को बताया कि सांसद राघव चड्ढा को अब पार्लियामेंट में बोलने का भी समय नहीं दिया जाना चाहिए।</p>
<p>आम आदमी पार्टी का ये बयान पार्लियामेंट सेशन से पहले राज्यसभा में पार्टी के अंदरूनी कलह को उजागर करता है। उन्होंने इस बात पर पूरा जोर दिया कि कानूनों को मॉडर्न पेरेंटिंग की असलियत को दिखाना चाहिए और शुरुआती चाइल्डकेयर में दोनों माता-पिता की बराबर हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 14:43:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अखिलेश यादव का विदेश नीति को लेकर सरकार पर तीखा हमला, बोले-युद्ध जैसे हालातों में संसद और सरकार की प्राथमिकताएं उसी के अनुरूप तय हो</title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने युद्ध के हालातों के बीच भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को गिरवी न रखने की अपील की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि युद्ध क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों और पत्रकारों को सुरक्षित वापस लाया जाए। साथ ही, तेल आपूर्ति और बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाकर देश की संप्रभुता की रक्षा करने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-yadav-made-a-sharp-attack-on-the-government-regarding/article-145825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/akhilesh.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि जब संसद के बजट सत्र का अंतराल हुआ था तब परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन आज युद्ध जैसे हालात बन जाने के कारण देश के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। ऐसे संकट के समय संसद और सरकार की प्राथमिकताएँ भी उसी के अनुरूप तय होनी चाहिए। सोमवार को सोशल मीडिया के जरिये अखिलेश यादव ने कहा कि इस समय सबसे पहले युद्ध की स्थिति में भारत का स्पष्ट पक्ष और राय सामने रखने की जरूरत है। इसके साथ ही विदेश नीति को किसी दबाव में गिरवी रखने का सवाल भी गंभीर है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरागत स्वतंत्र विदेश नीति हमेशा देशहित को ध्यान में रखकर चलती रही है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने कहा कि तेल जैसी महत्वपूर्ण आपूर्ति के मामले में भी भारत को आत्मनिर्णय का अधिकार होना चाहिए। यदि किसी विदेशी दबाव या अमेरिकी आदेश के आधार पर निर्णय लिये जाते हैं तो इससे देश की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे या पर्यटक के रूप में गये भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वहाँ फँसे सभी भारतीयों को सुरक्षित और शीघ्र भारत वापस लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।   </p>
<p>सपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ विदेश दौरे पर गये कुछ पत्रकार और मीडियाकर्मी भी युद्ध शुरू होने के कारण वापस नहीं लौट पाए हैं। सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें सुरक्षित देश वापस लाने की व्यवस्था करनी चाहिए। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि युद्ध की स्थिति में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सरकार को जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति नियमित और सुनिश्चित रखने के साथ-साथ उनके बढ़ते दामों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 16:37:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति मुर्मू प्रोटोकॉल विवाद पर मायावती ने बोला सीएम ममता बनर्जी पर हमला, कहा- संवैधानिक पदों का सम्मान जरूरी, दलगत राजनीति से ऊपर उठें</title>
                                    <description><![CDATA[बसपा प्रमुख मायावती ने दार्जिलिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को उचित प्रोटोकॉल न मिलने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि संवैधानिक पदों को दलगत राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। ममता बनर्जी के स्पष्टीकरण के बीच, मायावती ने राष्ट्रपति पद की गरिमा बनाए रखने और संसद को सुचारू रूप से चलाने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mayawati-attacks-cm-mamata-banerjee-on-president-murmu-protocol-controversy/article-145713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mayawati-and-mamta.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित नौवें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को उचित प्रोटोकाल न दिए जाने पर सियासत गर्म हो गई है। रविवार को सोशल मीडिया के जरिये प्रतिक्रिया देते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि भारतीय संविधान के आदर्शों और मान-मर्यादा के अनुसार सभी को राष्ट्रपति पद का सम्मान करना चाहिए और उनके प्रोटोकॉल का भी पूरा ध्यान रखना आवश्यक है।</p>
<p>बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि इस पद का किसी भी प्रकार से राजनीतिकरण करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ आदिवासी समाज से भी आती हैं। ऐसे में हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे को लेकर जो घटनाएं हुईं, वह नहीं होनी चाहिए थीं और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।</p>
<p>मायावती ने कहा कि पिछले कुछ समय से संसद में भी, विशेषकर लोकसभा अध्यक्ष के पद को लेकर जिस प्रकार का राजनीतिकरण किया जा रहा है, वह भी उचित नहीं है। सभी राजनीतिक दलों को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सम्मान करना चाहिए और उनकी गरिमा बनाए रखनी चाहिए। बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि संसद का जो सत्र शुरू होने जा रहा है, वह देश और जनहित में सुचारू रूप से चले, यही जनता की अपेक्षा और समय की मांग है।  </p>
<p>गौरतलब है कि, राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रोटोकाल का मामला सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन अगर कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इस समय धरने पर बैठी हैं और जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 17:09:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>संसद की कार्रवाई से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने की संसद भवन परिसर में महत्वपूर्ण बैठक, इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तेयारी, जानें कौन कौन रहा मौजूद?</title>
                                    <description><![CDATA[संसद सत्र से पहले इंडिया गठबंधन नेताओं की खड़गे के कार्यालय में बैठक हुई। राहुल गांधी समेत नेताओं ने सदन की रणनीति पर चर्चा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/before-the-proceedings-of-parliament-leaders-of-opposition-parties-held/article-142411"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेताओं की सोमवार को यहां संसद भवन परिसर में राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के ऑफिस में बैठक हुई।</p>
<p>खड़गे की अध्यक्षता में हुई बैठक में इंडिया गठबंधन की विभिन्न पार्टियों के संसदीय दल के नेताओं ने हिस्सा लिया और संसद में अपनी रणनीति को लेकर विचार विमर्श किया। </p>
<p>बैठक में खड़गे के अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, द्रमुक के टीआर बालू, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव तथा रामगोपाल यादव, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन, शिवसेना उद्धव गुट के संजय राउत सहित कई दलों के नेता उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 13:03:52 +0530</pubDate>
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                <title>ओल्ड राजेंद्र नगर में कोचिंग संस्थान के 3 छात्रों की पानी में डूबने से मौत, मुद्दा राज्यसभा में उठा</title>
                                    <description><![CDATA[ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों तथा कुछ अन्य सदस्यों ने राजधानी के राजेन्द्र नगर में एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में तीन छात्रों की डूबने के कारण मौत का मुद्दा उठाते हुए सदन में सभी कामकाज रोक कर इस पर चर्चा कराने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/issue-of-death-of-3-students-of-coaching-institute-in/article-86181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size30.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों तथा कुछ अन्य सदस्यों ने राजधानी के राजेन्द्र नगर में एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में तीन छात्रों की डूबने के कारण मौत हो गई है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने एक दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह मुद्दा उठाते हुए सदन में सभी कामकाज रोक कर इस पर चर्चा कराने की मांग की हालांकि मुख्य विपक्षी दल की सहमति नहीं मिलने पर सभापति ने कहा कि इस पर प्रश्नकाल के बाद नियम 176 के तहत अल्पावधि चर्चा होगी।  </p>
<p>सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर नियम 267 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस मिले हैं। ये नोटिस सुधांशु त्रिवेदी, रामचंद्र जांगडा, सुरेन्द्र नागर तथा आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने दिेए हैं। उन्होंने कहा कि शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के मु्द्दे तथा कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने एक अन्य मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए नोटिस दिए हैं।</p>
<p>उन्होंंने कहा कि युवा आबादी देश का भविष्य है, लेकिन देश में कोचिंग एक व्यवसाय बन गया है जिससे युवा छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अखबारों के पहले पृष्ठ इससे संबंधित विज्ञापन से भरे रहते हैं। यह एक समस्या बन गयी है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे के महत्व से अवगत हैं तथा  मुख्य दल अगर सहमत हों तो वह इस पर चर्चा कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन बातचीत से पता चला है कि कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है।</p>
<p>कुछ देर बाद सभापति ने प्रमुख दलों के नेताओं के साथ विचार विमर्श के बाद कहा कि यह  मुद्दा युवाओं के तथा देश के भविष्य निर्माण से जुड़ा है, इसलिए इस पर प्रश्नकाल के बाद नियम 176 के तहत अल्पावधि चर्चा करायी जायेगी। </p>
<p>इससे पहले सभापति ने सदन को भारतीय जनता पार्टी के सदस्य रहे प्रभात झा के निधन की जानकारी दी। उन्होंंने कहा कि श्री झा ने इस सदन में लगातार दो बार मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि झा जाने माने पत्रकार, लेखक और समाजसेवी थे। उनके निधन से देश ने एक योग्य सांसद खो दिया है। सदस्यों ने दिवंगत सांसद को मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 29 Jul 2024 15:19:48 +0530</pubDate>
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