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                <title>UNFPA - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>UNFPA RSS Feed</description>
                
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                <title> सब-डर्मल इम्प्लांट इंसर्शन प्रशिक्षण सह कार्यशाला : आधुनिक गर्भनिरोधक सेवाओं को सुदृढ़ करना उद्देश्य, विशेषज्ञ हुए शामिल </title>
                                    <description><![CDATA[उम्मेद अस्पताल में UNFPA और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आधुनिक गर्भनिरोधक सब-डर्मल इम्प्लांट पर कार्यशाला आयोजित हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह विधि तीन वर्षों तक सुरक्षित सुरक्षा देती है। जोधपुर में अब तक 1300 सफल इम्प्लांट हो चुके हैं। अब यह सुविधा जिला चिकित्सालय महिलाबाग में भी सुलभ होगी, जिससे परिवार नियोजन सेवाओं को मजबूती मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/promotion-of-modern-contraceptive-services-in-jodhpur-two-day-sub-dermal-implant/article-151567"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)52.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। शहर के उम्मेद अस्पताल में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय सब-डर्मल इम्प्लांट इंसर्शन प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जिले में आधुनिक गर्भनिरोधक सेवाओं को सुदृढ़ करना और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाना रहा। इस प्रशिक्षण में उम्मेद अस्पताल, मथुरा दास माथुर अस्पताल, महिलाबाग जिला चिकित्सालय और एम्स जोधपुर के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। साथ ही जैसलमेर जिले से भी विशेषज्ञ इस कार्यशाला में शामिल हुए।</p>
<p>प्रशिक्षण सत्रों का संचालन डॉ. ओबी नागर (जयपुर) और डॉ. संतोष खोखर (जोधपुर) ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। राज्य कार्यक्रम अधिकारी कृष्ण गोपाल सोनी ने एसडी इम्प्लांट की राज्य स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता के आंकड़े साझा किए, जबकि जिला स्तर पर समन्वय डॉ. गिरीश माथुर ने किया। कार्यशाला में बताया गया कि सब-डर्मल इम्प्लांट एक सुरक्षित, प्रभावी और दीर्घकालिक गर्भनिरोधक विधि है, जो महिलाओं को लगभग तीन वर्षों तक गर्भधारण से सुरक्षा देती है। इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा महिला की बांह में लगाया जाता है और प्रसव या गर्भपात के तुरंत बाद भी उपयोग किया जा सकता है। जोधपुर जिले में इस सुविधा की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई थी और अब तक करीब 1300 सफल इम्प्लांट इंसर्शन किए जा चुके हैं। यह सेवाएं एम्स, उम्मेद अस्पताल, मथुरा दास माथुर अस्पताल और जिला चिकित्सालय पावटा में उपलब्ध हैं। अब महिलाबाग जिला चिकित्सालय में भी यह सुविधा शुरू की जा रही है, जिससे आमजन को और अधिक सुलभ सेवाएं मिल सकेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:12:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत की जनसंख्या का यूएनएफपीए की रिपोर्ट में खुलासा, 77 साल में आबादी हो जाएगी दोगुनी</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में जनसंख्या के साथ-साथ नवजात बच्चों की मौत, महिलाओं और एलजीबीटीक्यू की स्थिति आदी के बारे में भी डेटा दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/unfpa-report-reveals-india-population-will-double-in-77-years/article-75333"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer31.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आबादी के मामले में भारत चीन से आगे निकल चुका है, देश की जनसंख्या को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनएफपीए की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि भारत की कुल आबादी 144 करोड़ है। 2011 में जब जनगणना की गई थी तब भारत की जनसंख्या 121 करोड़ थी। भारत में आखिरी जनगणना 2011 में की गई थी, उस वक्त भारत चीन के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा आबादी वाला देश था और देश की जनसंख्या 121 करोड़ थी। भारत की ताजा जनसंख्या पर यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) ने रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक भारत दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन गया है। भारत की जनसंख्या 144 करोड़ हो गई है, इसमें 24 फीसदी आबादी 0 से 14 साल से कम उम्र की है। इस रिपोर्ट में ये भी अनुमान लगाया गया है कि भारत की आबादी आने वाले 77 सालों में दोगुनी हो जाएगी। रिपोर्ट में जनसंख्या के साथ-साथ नवजात बच्चों की मौत, महिलाओं और एलजीबीटीक्यू की स्थिति आदी के बारे में भी डेटा दिया गया है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि भारत में मातृ मृत्यु में काफी भारी गिरावट आई है। </p>
<p><strong>किस आयु के कितने लोग</strong><br />रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 144.17 करोड़ आबादी में 24 फीसदी आबादी 0-14 साल की है, जबकि 17 फीसदी आबादी 10-19 साल के अंदर है। इतना ही नहीं, 10-24 साल वाले भी भारत में 26 फीसदी हैं, जबकि 15-64 आयु वर्ग के सबसे ज्यादा 68 फीसदी हैं। इसके अलावा भारत की 7 फीसदी जनसंख्या 65 साल और उससे ज्यादा उम्र की है, जिसमें पुरुषों की जीवन प्रत्याशा 71 साल और महिलाओं की 74 साल है।</p>
<p><strong>मातृ मृत्यु पर भारत की सराहना</strong><br />रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मातृ मृत्यु दर में काफी गिरावट आई है, जोकि दुनिया भर में ऐसी सभी मौतें का 8 फीसदी है। भारत में इस सफलता का क्रेडिट सरकार के सस्ती और अच्छी स्वास्थ सेवाओं को जनता तक पहुंचाना और लैंगिक भेदभाव को कम करने के प्रयासों को दिया है। सर्वे में पता चला है कि भारत के 640 जिलों में एक तिहाई जिलों ने मातृ मृत्यु कम करने के लिए सतत विकास लक्ष्य हासिल कर लिया है। बता दें भारत सरकार द्वारा नवजात की मृत्यु दर को कम करने और शिशुओं और माओं को पौष्टिक आहार मुहैया कराने के लिए कई स्कीम चलाई जा रही हैं। इसके अलावा अच्छे और सस्ते स्वास्थीय ने भी जनसंख्या बढ़ोत्तरी में अहम किरदार निभाया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Apr 2024 10:17:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>दिव्यांग युवाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी: डॉ. दीपेश गुप्ता </title>
                                    <description><![CDATA[दिव्यांग युवाओं के लिए स्वास्थ्य और अधिकारों तक पहुंच बनाने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। हमें उनके अधिकारों के लिए भी लड़ना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dr-deepesh-gupta-will-have-to-fight-for-the-rights/article-64680"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/unfpa.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दिव्यांग युवाओं के लिए स्वास्थ्य और अधिकारों तक पहुंच बनाने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। हमें उनके अधिकारों के लिए भी लड़ना होगा। अगर हम ऐसा नहीं कर पाए तो हालातों में सुधार लाना संभव नहीं हो सकेगा। यह कहना है संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के स्टेट हेड डॉ. दीपेश गुप्ता का। उन्होंने बुधवार को यूएनएफपीए की ओर से दिव्यांग युवाओं के लिए लीविंग नो वन बिहाइंड (किसी को पीछे न छोड़ना) विषय पर आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में यह बात कही। लोक संवाद संस्थान के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में विभिन्न सामाजिक संगठनों, सीएसओ और एनजीओ के कार्यकर्ता, विषय विशेषज्ञ, राजस्थान के सरकारी विशेष विद्यालयों और महाविद्यालयों के प्राचार्य, सहायक व्यक्तियों के साथ विभिन्न दिव्यांग युवा, सीएसआर प्रतिनिधि और मीडियाकर्मियों ने सक्रिय भागीदारी की।</p>
<p>कार्यशाला में यूएनएफपीए की कार्यक्रम एवं तकनीकी सहायक प्रमुख डॉ. दीपा प्रसाद ने दिव्यांगता पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि 2011 में अखिल भारतीय स्तर पर दिव्यांगजनों की कुल संख्या 2.21 प्रतिशत थी। इनमें से 7.62 प्रतिशत दिव्यांगजन 0-6 आयु वर्ग के हैं। एनएफपीए के राष्ट्रीय कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीलेश देशपांडे ने युवाओं के लिए एसआरएचआर गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वहीं साइटसेवर्स इंडिया की प्रदेश कार्यक्रम अधिकारी तुषिता मुखर्जी ने दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा पर अपनी बात रखी। उन्होंने ऐसे बच्चों की बेहतरी के लिए तकनीक आधारित प्रशिक्षण पर जोर दिया। विशेष योग्यजन निदेशालय, राजस्थान सरकार के एडिशनल डायरेक्टर अशोक कुमार जांगिड़ ने सरकार की ओर से दिव्यांगों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। </p>
<p><strong>दिव्यांग विश्वविद्यालय से जुड़ेंगे संस्थान: डॉ. देव स्वरूप </strong><br />वहीं बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. देव स्वरूप ने दिव्यांग युवाओं के अधिकार पर अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अधिनियमन ने दिव्यांगता की संख्या को सात स्थितियों से बढ़ाकर 21 कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार प्रदेश में कई कॉलेज विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे। इनमें जोधपुर, पाली और बीकानेर संभाग के कई संस्थान संबद्ध किए जाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से दिव्यांगों के लिए हाल ही में लॉन्च की गई बेवसाइट के बारे में भी जानकारी दी।</p>
<p><strong>तकनीकी का महत्व जानें दिव्यांग युवा: महादेव</strong><br />असिसटेक फाउंडेशन के सीईओ प्रतीक महादेव ने दिव्यांग युवाओं को तकनीकी का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं का पूरी तरह से उपयोग करना होगा। ऑप्टिमस सेंटर फॉर वेल बीइंग की निदेशक डॉ. अमृता पुरी ने दिव्यांगों के लिए चलाई जा रही एजुकेशनल पॉलिसी पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने योजनाओं में सुधार की भी वकालत की। </p>
<p><strong>दिव्यांगजन अपनी ताकत को समझें: नुपूर </strong><br />चेंज इंक फाउंडेशन की निदेशक नुपूर झुनझुनवाला ने दिव्यांगों की एंटरप्रेन्योरशिप क्षमता को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन किसी से कम नहीं हैं, उन्हें अपनी ताकत का अहसास करना होगा। यूएनएफपीए के कुमार मनीष ने नि:शक्तता के विभिन्न मॉडलों को समझाते हुए दिव्यांगजनों के सहयोगी के रूप में काम करने का आह्वान किया। लोक संवाद संस्थान के सचिव कल्याण सिंह कोठारी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दिव्यांग युवाओं को जीवन कौशल, स्वास्थ्य और अधिकार तथा उनकी क्षमतावर्धन के लिए सामूहिक प्रयासों की दरकार है। समापन पर राजस्थान पत्रिका के मानवीय सरोकारों से जुड़े पत्रिका फाउंडेशन से आए चिन्मय दांडेकर ने जन-जागरुकता के अभियान में सहयोग देने के लिए प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Dec 2023 19:21:08 +0530</pubDate>
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