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                <title>deepfake - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>deepfake RSS Feed</description>
                
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                <title>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए केंद्र सरकार ला रही नया आईटी नियम: AI Misinfo, Deepfake जांच के दायरे में</title>
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                        <![CDATA[सरकार ने इंटरनेट पर डीपफेक और गुमराह करने वाले AI से बने कंटेंट से निपटने के लिए एक नए कानून को नोटिफाई किया है। इसके तहत प्लेटफॉर्म और यूज़र्स को ऐसी सामग्री साफ तौर पर बतानी होगी जो असली नहीं है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/central-government-is-bringing-new-it-rules-for-social-media/article-142672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(15)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने डीपफेक और भ्रामक एआई कंटेंट पर रोक लगाने के लिए सख्त आईटी नियम अधिसूचित किए हैं। नए कानून के तहत एआई से बने या बदले गए फोटो, वीडियो और ऑडियो को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा। इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म को भी ऐसे कंटेंट पर साफ चेतावनी देनी होगी, ताकि यूजर्स गुमराह न हों। शिकायत निवारण की समयसीमा घटाकर दो घंटे में शिकायत स्वीकार और सात दिन में समाधान तय किया गया है। इन कदमों का उद्देश्य ऑनलाइन पारदर्शिता बढ़ाना, एआई के दुरुपयोग को रोकना और डिजिटल धोखाधड़ी पर तेजी से कार्रवाई करना है।</p>
<p><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 18:29:34 +0530</pubDate>
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                <title>द. कोरिया में डीपफेक से जुड़े मामले में टेलीग्राम के खिलाफ जांच शुरू</title>
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                        <![CDATA[यह जानकारी योनहाप समाचार एजेंसी ने यह रिर्पोट हाई-रैंकिंग पुलिस सूत्रों के हवाले दी। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/investigation-started-against-telegram-in-case-related-to-deepfake-in/article-89382"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer.png" alt=""></a><br /><p>सोल। दक्षिण कोरिया की पुलिस ने डीपफेक वीडियों से जुड़े  मामले में मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के खिलाफ जांच-पड़ताल शुरु कर दी है।  यह जानकारी योनहाप समाचार एजेंसी ने यह रिर्पोट हाई-रैंकिंग पुलिस सूत्रों के हवाले दी। </p>
<p>एजेंसी के अनुसार, पुलिस टेलीग्राफ के खिलाफ जांच में फ्रांसीसी जांच एजेंसी और विभिन्न  अंतरराष्ट्रीय संगठन के साथ मिलकर काम करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।</p>
<p>योनहाप समाचार एजेंसी ने पहले बताया था कि द. कोरिया के राष्ट्रपति यून सूक-योल पोर्नोग्राफी को एक गंभीर अपराध के रूप में देखे जाने का आह्वान कर चुके हैं और इन्हें एक सामाजिक घटना के रूप में समाप्त करने को भी कह चुके हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/investigation-started-against-telegram-in-case-related-to-deepfake-in/article-89382</link>
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                <pubDate>Mon, 02 Sep 2024 16:45:34 +0530</pubDate>
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                <title>रश्मिका मंदाना के डीपफेक वीडियो मामले में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पहले भी कई साइबर क्राइम कर चुका है आरोपी</title>
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                        <![CDATA[रश्मिका मंदाना ने 10 नवंबर को दिल्ली पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस चार लोगों को पहले ही पकड़ चुकी थी। शनिवार को मुख्य आरोपी को भी पकड़ लिया गया है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/main-accused-arrested-in-rashmika-mandannas-deepfake-video-case/article-67633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/deepfake-video.jpg" alt=""></a><br /><p>रश्मिका मंदाना के डीपफेक वीडियो मामले के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पूर्व में भी साइबर अपराध को अंजाम दे चुका है।</p>
<p>मामला पिछले साल 6 नवंबर का है। रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। यह वीडियो जारा पटेल नाम की ब्रिटिश इंडियन इंफ्लुएंसर के वीडियो को एडिट करके बनाया गया था जिसमें वह स्पेगिटी पहने लिफ्ट में दिखाई दे रही थी। एक्ट्रेस को जैसे ही इसके बारें में पता चला तो उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दुख जताते हुए इस पर बात की थी। उन्होंने 10 नवंबर को दिल्ली पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस चार लोगों को पहले ही पकड़ चुकी थी। शनिवार को मुख्य आरोपी को भी पकड़ लिया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jan 2024 16:19:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>डीपफेक की पहचान के लिए ऐप की खासी जरूरत</title>
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                        <![CDATA[ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड पर कोई ऐप ऐसा बने जो फोटो और वीडियो की पहचान कर सके कि डीपफेक है साथ ही वह ऐप आप जनता के पास उपलब्ध हो जाए।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-a-strong-need-for-an-app-to-identify-deepfakes/article-65005"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/mmd-(5).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। टेक्नोलॉजी जिस तेजी से बदल रही है  उसमें हैरान करने वाली ऐसी कई चीजें हैं जिनके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते थे। ऐसी ही एक समस्या बनकर सामने आ रही है डीपफेक । पिछले कुछ दिनों में डीपफेक तकनीक के शिकार होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस तकनीक के गलत इस्तेमाल से आम लोग प्रभावित हो रहे हैं। एआई की मदद से जनरेट होने वाले डीपफेक कंटेंट को लेकर  चिंता बढ़ रही है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि इस तरह के स्कैम के प्रति लोगों की जागरुकता बढ़े और  देश में डीपफेक से निपटने के लिए एक ठोस कार्ययोजना लागू करने के साथ डीपफेक पर नया कानून ला सकती है। जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेनएआई) तकनीकें तेजी से आगे बढ़ रही हैं। डीपफेक वीडियो फोटो की पहचान  केवल उच्च तकनीकी विशेषज्ञ ही कर सकते है, आम जनता इसको नहीं पहचान सकती। ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड पर कोई ऐप ऐसा बने जो फोटो और वीडियो की पहचान कर सके कि डीपफेक है साथ ही वह ऐप आप जनता के पास उपलब्ध हो जाए। सरकार को इस तरह का ऐप बनाना चाहिए। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों को योगदान देना चाहिए। इस तरह का ऐप सरकार और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर बनाए ताकि आम जनता के पास सरकार उस ऐप को पहुंचा सके और मोबाइल में आसानी से उपलब्ध हो सके।  आने वाले समय में मोबाइल में जेनरेटिव चिप्स आ रही है उससे समाधान आसान हो  सकता है। जो भी तकनीक आए उसका आम इंसान उपयोग कर सके। जो भी ऐप आए उससे आम इंसान फोटो या वीडियो को स्वयं चैक कर सके कि वह सही है या फेक है। क्योंकि, डीपफेक के जरिए एडिट की गई फोटो का इस्तेमाल करके आम जनता को परेशान करके  ब्लैकमेल किया जा सकता है। हाल ही में डीपफेक टेक्नोलॉजी के जरिए एक पूर्व आईपीएस  को शिकार बनाया गया । स्कैमर्स ने पूर्व आईपीएस  को फेसबुक पर वीडियो कॉल किया था और उसके बाद उनका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में वीडियो को किसी अन्य वीडियो के साथ एडिट करके सीनियर सिटीजन को  ब्लैकमेल करने लगे। उन्होंने बदनामी से बचने के लिए स्कैमर्स को करीब 74 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। ऐप एक ऐसा माध्यम है जो आम इंसान को आसानी से उपलब्ध हो सकता है। अगर ऐसा संभव नहीं हो सके तो फिर ऐसी तकनीक आए जो डीपफेक रोकने के लिए आम इंसान की पहुंच में हो। दैनिक नवज्योति ने इस बारे में  इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ की राय को जाना ।<br /> <br /><strong>डीपफेकहै क्या?</strong><br />डीपफेक दरअसल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस(एआई) का इस्तेमाल करता है जिसके जरिए किसी की भी फर्जी  तस्वीर बनाई जाती है। इसमें किसी भी तस्वीर,ऑडियो या वीडियो को फर्जी  दिखाने के लिए एआई के एक प्रकार डीप लर्निंग का इस्तेमाल होता है और इसलिए इसे डीपफेक कहा जाता है। डीपफेक को अनुभवी लोगों की प्रशिक्षित आंखेंं ही वास्तविक वीडियो और डीपफेक कंटेंट के बीच अंतर पहचान सकती है। डीपफेक एक साइबर हमला है जिसमें व्यक्ति का चेहरा एक दूसरे के चेहरे में स्थित किया जा सकता है, और इससे ऐसा महसूस हो सकता है कि वह व्यक्ति वास्तविक रूप से वही है जिसे वह दिखता है। यह तकनीक डीप मशीन लर्निंग और तस्वीरों के संग्रहण का उपयोग करके किया जाता है।<br />- लोगों को तकनीकी खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए सामाजिक मीडिया, विशेषज्ञों, और सरकार का सहयोग करना आवश्यक है।<br />- सॉफ़्टवेयर डेवेलपर्स को सुरक्षित तकनीकी उपाय विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है जो डीपफेक को पहचानने और रोकने में मदद कर सकते हैं। कुशलता से चेहरा पहचान, तस्वीरों की उपयोगिता का मूल्यांकन, और अन्य सुरक्षा सुरक्षा तकनीकियों का उपयोग हो सकता है।<br />- सरकार को डीपफेक के खिलाफ कानूनी उपायों को मजबूत करने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए, जिसमें व्यक्तिगत गोपनीयता और तकनीकी अपराधों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई शामिल हो।</p>
<p>आने वाले समय में डीपफेक साइबर सुरक्षा में एक गंभीर समस्या है। वैसे कुछ एप्लीकेशन्स जैसे डीपवेयर स्कैनर, माइक्रोसॉफ्ट वीडियो ऑथेंटिकेटर, सीएनसीलैब्स का डीपवेयर स्कैनर, इंटेल द्वारा फेककैच जैसे कुछ एप्लिकेशन अभी उपलब्ध हैं, लेकिन उनके बारे में आम लोगो को  जानकारी कम है... इसलिए लोगों को डीपफेक  के परिणामों के बारे में जागरूक करना जरुरी है। कोई एप्लीकेशन या  ऐसा सिस्टम होना चाहिए जो आम जनता के मोबाइल फोन में उपलब्ध हो जो डीपफेक वीडियो और इमेजिस की  पहचान या वेरीफाई  कर सके। साथ ही डीपफेक जैसे साइबर सुरक्षा मुद्दों के लिए सख्त नियम बनना  चाहिए।<br /><strong>- डॉ. सत्येन्द्र सिंह चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर, मालवीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर</strong></p>
<p>डीपफेक तकनीक एक बडी समस्या के रूप में उभरा है । इस से बचने के लिये सभी इन्टरनेट यूजर्स को सोशल मीडिया एवं अन्य इन्टरनेट प्लेटफॉर्म्स पर अपने फोटो, वीडियो को प्राइवेसी सुरक्षा के साथ डालना चाहिए । अतिरिक्त सुरक्षा के लिए आप अपने फोटो एवं वीडियो में वाटरमार्क भी इस्तेमाल कर सकते हो । जिस से आपके फोटो वीडियो के दुरुपयोग की सम्भावना घट जाती है । इस प्रकार की फोटो एवं वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करने से बचना चाहिए एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रिपोर्ट भी करना चाहिए। भारत सरकार ने भी डीप फेक  तकनीक को एक बड़ी समस्या माना है । इसके लिए सुरक्षा गाइडलाइन्स के बारे में सरकार अहम कदम उठाने वाली है ।<br /><strong>- सचिन कुमार शर्मा, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, जयपुर</strong></p>
<p>इस फील्ड में बहुत सारे लोग काम कर रहे हैं। हमें ये उम्मीद करनी चाहिए कि बहुत जल्दी ही डीपफेक की पहचान करने के लिए और टूल्स उपलब्ध हो जाएगें। लेकिन वह ऑफलाइन में आ पाते है या नहीं आ पाते हैं। ऑफलाइन में टूल्स से बहुत ज्यादा मदद मिलती नहीं हैं। मोबाइल में  इतनी प्रोसेसिंग कपेसिटी होती नहीं है कि वह कर सके। होगा यही की सोशल मीडिया पर ही चैक होगें। मॉर्फ्ड इमेज एक ही इमेज होती है। यहां पर पूरा का पूरा वीडियो मॉर्फ्ड इमेजिस से बनाया उसमें प्रोसेसिंग भी की है। एआई तकनीक भी लगाई तो एक मॉर्फ्ड इमेज की पहचान करने में समय लगता है। यह थोड़ा मुश्किल है लेकिन ऐसा नहीं है कि नहीं होगा, होगा...लेकिन अभी कोई टेक्नोलॉजी उपलब्ध नहीं है।<br /><strong>-डॉ. सी.पी. गुप्ता, प्रोफेसर कम्प्यूटर साइंस आरटीयू कोटा</strong></p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Dec 2023 15:28:08 +0530</pubDate>
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