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                <title>बड़ा सवाल: अब तक भी डिजिटल नहीं हुआ निगम का रिकॉर्ड, महापौर व नेता प्रतिपक्ष कई बार उठा चुके यह मामला </title>
                                    <description><![CDATA[ एक तरफ तो सरकार हर काम को आॅनलाइन व डिजिटल कर रही है। वहीं दूसरी तरह आमजन से जुड़ी शहरी निकाय नगर निगम का रिकॉर्ड रूम अभी तक भी डिजिटल व कम्प्यूटराइज नहीं हो सका है
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/big-question--the-corporation-s-record-has-not-been-digitalized-yet/article-117547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)49.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ तो सरकार हर काम को आॅनलाइन व डिजिटल कर रही है। वहीं दूसरी तरह आमजन से जुड़ी शहरी निकाय नगर निगम का रिकॉर्ड रूम अभी तक भी डिजिटल व कम्प्यूटराइज नहीं हो सका है। जिसका खामियाजा आमजन को समय पर पत्रावलियां नहीं मिलने पर भुगतना पड़ रहा है। स्वायत्त शासन विभाग के अधीन कार्यरत नगर निगम का गठन हुए करीब 30 साल से अधिक का समय हो गया। वर्तमान में कोटा में उत्तर व दक्षिण दो नगर निगम है। दोनों नगर निगमों में शहर के आमजन से जुड़े हजारों लोगों का रोजाना काम पड़ता है। ऐसे में लोगों को हर काम के लिए नगर निगम जाना पड़ रहा है। यहां तक कि भूमि संबंधी किसी मामले की पुरानी पत्रावली की जानकारी लेनी हो या उसकी जरूरत पड़ती है तो वह समय पर रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध ही नहीं होती। अधिकतर समय तो कई पत्रावलियां इधर से उधर ही घूमती रहती है। जिनके बारे में न तो अधिकारियों को पता रहता है और न ही रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों को। इसका कारण है अभी तक भी रिकॉर्ड रूम का  डिजिटल व कम्प्यूटराइज नहीं होना। नगर निगम का रिकॉर्ड कम्प्यूटराइज नहीं होने से उसे तलाशने में काफी समय लगता है। </p>
<p><strong>सरकार का फोकस, अधिकारियों को मंशा नही</strong><br />केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार सभी का फोकस इस समय हर काम को आॅनलाइन, डिजिटल व कम्प्यूटराइज करने पर है। यहां तक कि सरकार की ओर से अब तो कार्यालयों में हाथ से लिखी जाने वाली नोटशीट तक को कम्प्यूटराइज कर दिया है। साथ ही पत्रावली को आॅफलाइन एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के कक्ष तक नहीं ले जाना पड़े। इसके लिए सभी को अपने कम्प्यूटर व लैबटॉप पर ही नोटशीट पर  आॅनलाइन टिप्पणी करनी पड़ रही है।  उस स्थिति में भी नगर निगम का रिकॉर्ड रूम अभी तक भी डिजिटल नहीं हो सका है। </p>
<p><strong>महापौर तीन साल पहले लिख चुके यू ओ नोट</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के महापौर राजीव अग्रवाल करीब तीन साल पहले जुलाई 2022 में ही आयुक्त को इस संबंध में यू ओ नोट लिखे चुके है।  यू ओ नोट में महापौर ने लिखा था कि  नगर निगम कोटा दक्षिण के रिकॉर्ड रूम में काफी अव्यवस्थाएं हैं।  किसी भी पत्रावली की जानकारी चाहने पर  वह समय पर उपलब्ध नहीं होती है।   जिससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  ऐसे में  निर्देशित किया जाता है कि कोटा दक्षिण के रिकॉर्ड को डिजिटलाइजेशन कराने की व्यवस्था की जाए। जिससे आमजन को सुविधा हो सके और समय पर रिकॉर्ड व पत्रावली उपलब्ध हो सके।  हालत यह है कि इस यू ओ नोट को लिखे तीन साल हो चुके है। अभी तक भी निगम अधिकारियों ने उनके यू ओ नोट तक को गम्भीरता से नहीं लिया है। जिससे वर्तमान में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जिससे कुछ समय पहले भी कई पत्रावलियों के गायब होने का मामला सामने आ चुका है।  एक दिन पहले फिर से नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी को आयुक्त के नाम पत्र लिखना पड़ा। जिसमें रिकॉर्ड रूप को कम्प्यूटराइज व टिजिटल करने का आग्रह किया गया है।</p>
<p><strong>कम्प्यूटराइज सिस्टम से गड़बड़ी पर रोक</strong><br />लोगों का कहना है कि जब हर काम आॅनलाइन व कम्प्यूटराइज हो रहा है तो निगम का रिकॉर्ड रूम भी डिजिटल होना चाहिए। इससे गड़बड़ी पर रोक लगेगी। वक्फ नगर निवासी मोहम्मद असलम का कहना है कि रिकॉर्ड रूम में बरसों पुरानी पत्रावलियों को संभालकर रखा जाता है। लाइब्रेरी की तरह रिकॉर्ड रूम को भी डिजिटल करने से पुरानी पत्रावलियों को  बिना किसी परेशानी के तुरंत तलाश किया जा सकता है।  अनंतपुरा निवासी महेश जोशी का कहना है कि आॅनलाइन सुुविधा होने से कर्मचारियों की भी परेशानी कम होगी। कम से कम समय में बिना किसी समस्या के पत्रावली को तलाश किया जा सकता है। काम होने के बाद उसे फिर से उसी जगह पर रिकॉर्ड में चढ़ाया जा सकता है। आने वाले समय में निगम को अपना रिकॉर्ड रूम  डिजिटल करना ही होगा। </p>
<p><strong>अधिकारियों की इच्छा शक्ति ही नहीं</strong><br />वर्तमान में जब सब कुछ कम्प्यूटराइज व डिजिटल हो रहा है। ऐसे में निगम का रिकॉर्ड रूम भी अपडेट होना चाहिए। इसके लिए तीन साल पहले ही आयुक्त को यू ओ नोट लिखा जा चुका है। आॅफलाइन व्यवस्था होने से पत्रावलियों को तलाशने में समय अधिक लगने के साथ ही गड़बड़ी की भी आशंका रहती है। ऐसे में रिकॉर्ड रूम डिजिटल होना ही चाहिए। लेकिन निगम के अधिकारियों की इच्छा शक्ति ही नहीं है। अधिकारी चाहें तो यह काम तुरंत हो सकता है।      <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 16:06:39 +0530</pubDate>
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                <title>डिजिटलाइजेशन प्रोसेस में अटकी मिट्टी की सेहत की जांच</title>
                                    <description><![CDATA[अब कृषि विभाग ने खेत से मिट्टी लेकर परीक्षण और किसान को रिपोर्ट देने की प्रक्रिया को सहज व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से हाइटेक कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/soil-health-check-stuck-in-digitalization-process/article-65055"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/digitalization-process-mein-atake-mitte-ki-sehat-ki-janch...kota-news-25.12.2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मृदा परीक्षण को हाइटेक बनाने और किसानों तक सहजता एवं जल्द मृदा स्वास्थ्य कार्ड पहुंचाने के उद्देश्य से पूरी प्रक्रिया को डिजिटलाइज कर दिया गया है, लेकिन कृषि पर्यवेक्षकों के पास आधुनिक उपकरण न होने के कारण उन्हें दिक्कत उठानी पड़ रही है। मोबाइल में स्वॉयल हेल्थ कार्ड एप ठीक से कार्य नहीं कर रहा है। जिससे एक सैंपल लेने में 30 से 45 मिनट का समय लगता है। ऐसे में कोटा जिले में खेतों से मिट्टी के सैंपल लेने की गति अभी भी बहुत धीमी है।</p>
<p><strong>जिले में लेंगे आठ हजार सैंपल</strong><br />विभागीय अधिकारी बताते हैं कि मुख्यालय के निर्देशानुसार जिले से 8 हजार मृदा के सैंपल लेने हैं। इसमें प्रत्येक पंचायत से कम से कम 20 सैंपल लेने के लिए भी कहा गया है। हालांकि कार्मिकों में असंतोष के चलते नई विधि से सैंपल लेने की प्रक्रिया में तेजी नहीं आ सकी है। जहां पर एप चल रहा है वहां सैंपल लिए जा रहे हैं। शेष स्थानों पर सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- 8000 कृषि पर्यवेक्षक प्रदेश में<br />- 170 कृषि पर्यवेक्षक कोटा में<br />- 8000 मृदा सैंपल लेने हैं रबी फसल के जिले में<br />- 20 मृदा सैंपल लिए जाने हैं प्रत्येक पंचायत से</p>
<p><strong>अब हाइटेक कर दी व्यवस्था</strong><br />अभी तक मिट़्टी के परीक्षण में खनिज पदार्थ की कमी और मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदम की जानकारी मैन्युअली पहुंचती आ रही थी। पहले मृदा परीक्षण के बाद स्वास्थ्य कार्ड मैन्युअली बनकर विभाग और कृषि पर्यवेक्षक के पास पहुंचता था। जिसे कृषि पर्यवेक्षक किसानों को पहुंचाते थे। अब कृषि विभाग ने खेत से मिट्टी लेकर परीक्षण और किसान को रिपोर्ट देने की प्रक्रिया को सहज व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से हाइटेक कर दिया है।  अब कृषक के पास मिट्टी की खामी के साथ ही मृदा स्वास्थ्य सुझाव भी मोबाइल पर पहुंचेंगे। इससे किसानों और विभागीय कार्मिकों का समय बचेगा। </p>
<p><strong>सरकार की मंशा पर अभी अल्प विराम</strong><br />मृदा परीक्षण को हाइटेक करने की सरकार की मंशा पर अभी अल्प विराम है। क्योंकि खेतों से मिट्टी के सैंपल लेने वाले कृषि पर्यवेक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कृषि पर्यवेक्षकों का कहना है कि मोबाइल पर स्वॉयल हेल्थ कार्ड एप पूरी तरह से काम नहीं कर रहा है। एक सैंपल लेने में ही काफी समय लग जाता है। डाटा सेव हुआ कि नहीं यह पुष्टि भी नहीं हो पाती है। इसलिए सॉयल सैंपल संग्रहण के लिए उच्च क्षमता वाले मोबाइल / टेबलेट होना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मृदा स्वास्थ्य जानकारी किसानों के लिए अहम है। मृदा के सैंपल न लेने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा क्यों कि उन्हें पता ही नहीं कि खेत में किस पोषक तत्व की जरूरत है। ऐसे में वो गलत पोषक तत्व डालेंगे। इसलिए हाइटेक व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।<br /><strong>-लक्ष्मीचंद नागर, किसान नेता</strong><br /> <br />कृषि पर्यवेक्षकों की ओर से स्वॉयल हेल्थ कार्ड मोबाइल एप में आ रही समस्या को लेकर जानकारी दी गई है। इसे उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जिले में इसका कार्य शुरू हो चुका है। कुछ स्थानों पर सैंपल लिए गए हैं। <br /><strong>-राजूलाल मीणा, सहायक कृषि अधिकारी, कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Dec 2023 19:16:06 +0530</pubDate>
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