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                <title>शहर ट्रैफिक सिग्नल फ्री, पैदल चलने वाले कहां जाएं</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य रोड पर ना जेबरा क्रासिंग है और ना ही किसी तरह की सूचना पट्टी जिससे वाहन की गति धीमी हो सके और पैदल कोई निकल सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-city-is-traffic-signal-free--where-should-pedestrians-go/article-114990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/shahar-traffic-signal-free,-paidal-chalane-wale-kahan-jaen...kota-news-22.05.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस -1 </strong>कैशवपुरा निवासी भारती कुलश्रेष्ठ और उसके परिजन गोबरिया बावड़ी चौराहे से कुछ आगे निकल कर ट्रांसपोर्ट नगर की तरफ आने के लिए रोड क्रॉस करना चाहते थे लेकिन वह रोड घंटों क्रॉस ही नहीं कर सके। कारण यातायात इतना अधिक था कि वहां से निकलना जान जोखिम में डालने जैसा था। मुख्य रोड पर ना जेबरा क्रासिंग है और ना ही किसी तरह की सूचना पट्टी जिससे वाहन की गति धीमी हो सके और पैदल कोई निकल सके। </p>
<p><strong>केस-2</strong> एडरोड्राम का मुख्य चौराहा। यहां शाम होने के साथ भारी यातायात भी शुरू हो जाता है। यहां से किसी को पैदल निकलना हो तो किसी तरह की जेबरा क्रासिंग नहीं है। सड़क के दोनों तरफ पैदल चलना भी मुश्किल है। हमेशा एक्सीडेंट का भय बना रहता है। ऐसे हालात में कोटा ट्रैफिक लाइट फ्री तो हो गया लेकिन एक्सीडेंट की तादात ज्यादा हो गई है। </p>
<p><strong>पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ तक नहीं:</strong> स्मार्ट सिटी बनाने के साथ ही पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किए जा रहे कोटा शहर में जहां देशी विदेशी पर्यटकों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक व्यवस्था इतनी बदहाल है कि स्थानीय लोग भी इस बढ़ते ट्रैफिक व वाहनों की स्पीड के बीच पैदल सड़क पार नहीं कर पा रहे हैं। बाहर से आने वालों के लिए तो यह किसी चुनौती से कम नहीं है।  वहीं सबसे अधिक पैदल चलने व सड़क पार करने वालों के लिए समस्या हो गई है।</p>
<p><strong>केवल यहां से निकल सकते हैं पैदल</strong><br />शहर में एक मात्र एरोड्राम चौराहे का अंडरपास ऐसा है जहां अंडर ग्राउंड पैदल सड़क पार करने वालों के  लिए व्यवस्था की हुई है। एक तरफ से दूसरी तरफ आने-जाने के लिए सड़क के साइड से नीचे उतरकर रास्ता बनाया हुआ है। लेकिन उन रास्तों के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। जिससे अधिकतर लोगों को मेन रोड से ही बिना जेबरा क्रॉसिंग के जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ रही है। वहीं विवेकानंद सर्किल पर पैदल चलने वालों के लिए पाथ वे है लेकिन सड़क पार करने की सुविधा नहीं है।  जबकि  न तो रेलवे स्टेशन पर और न ही अदालत चौराहे पर। नयापुरा, जेडीबी, अंटाघर, कोटड़ी, नई धानमंडी, विज्ञान नगर, दादाबाड़ी,सीएडी, नगर निगम, चम्बल गार्डन, से लेकर नए कोटा तक में कहीं भी जेबरा क्रॉसिंग नहीं होने से पैदल  सड़क पार करने वालों के लिए खतरा बना हुआ है।</p>
<p>बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था और सिग्नल फ्री शहर के कारण जेबरा क्रॉसिंग तक नहीं होने से सड़क पार करते समय आए दिन छोटे वाहनों से ही एक्सीडेंट हो रहे हैं। जिला प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस को आमजन की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। <br /><strong>-शैलेन्द्र कुमार दाधीच, गुमानपुरा कोटडी</strong></p>
<p>शहर को ट्रैफिक लाइट फ्री बनाकर एक ऐसा काम किया गया है जो कोई नहीं कर सकता था। ट्रैफिक नियमों का पालन कर आप चलें तो कहीं आपको कहीं रुकने की जरूरत नहीं है। सब कुछ नियोजित है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होता है। फिर क्या चाहिए। <br /><strong>-जमील अहमद, संजय कालोनी विज्ञान नगर</strong></p>
<p>शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के प्रोजेक्ट को केडीए ने टैक आॅफ किया है। इसके लिए प्रयास भी शुरु कर दिए गए हैं। करीब एक माह का समय दिया गया है। उस समयावधि में  जबरा क्रॉसिंग से लेकर चौराहों पर सुरक्षित यातायात की जितनी भी व्यवस्थाएं होनी चाहिए वह करने के प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>-रविन्द्र माथुर, निदेशक  अभियांत्रिकी कोटा विकास प्राधिकरण   </strong></p>
<p><strong>फिर ट्रैफिक लाइट फ्री का क्या मतलब</strong><br />योजना के अनुसार पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बना है। जहां जरूरत नहीं है वहां फुटपाथ की व्यवस्था नहीं है। सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। मुंबई और बड़े शहरों में जेबरा क्रासिंग होती है। सड़क के दोनों तरफ यातायात बंद हो जाता है और पैदल चलने वाले जेब्रा क्रॉसिंग से निकल जाते हैं। लेकिन यह ट्रैफिक लाइट फ्री में संभव नहीं है। जिसको रोड क्रास करना है वह देखभाल कर रोड क्रॉस करे।  एक हटा कर दूसरी लाइट लगाने का क्या मतलब। इससे यातायात स्मूथ हुआ है। लोगों को कहीं अनावश्यक रुकना नहीं पड़ रहा। हमने एक विजन के तहत काम किया है। दूसरी पार्टी को पसन्द नहीं है तो ठीक करा लो।<br /><strong>-शांति धारीवाल, विधायक व पूर्व यूडीएच मंत्री </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 May 2025 14:49:32 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा : सिग्नल फ्री होने से शहर में वाहनों की  बढ़ी रफ्तार, अब स्पीड ब्रेकर से लगेगी लगाम </title>
                                    <description><![CDATA[दुर्घटना संभावित स्थानों पर बनाए जा रहे रबड़ व डामर के स्पीड ब्रेकर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/speed-control/article-95946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर जैसे ही ट्रैफिक सिग् नल  फ्री हुआ वैसे ही वाहनों की स्पीड़ बढ़ गई। सिग्नल नहीं होने से वाहनों को चौराहों पर रूकना नहीं पड़ रहा। लेकिन तेज गति से निकल रहे वाहनों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। अब उन दुर्घटनाओं को कम करने के लिए वाहनों की गति पर स्पीड ब्रेकर बनाकर लगाम लगाई जा रही है। पिछली कांग्रेस सरकार के समय में कोटा को ट्रैफिक सिग्नल फ्री शहर बनाया गया। इसके लिए झालावाड़ रोड पर अनंतपुरा से लेकर गोबरिया बावड़ी सर्किल, एरोड्राम व अंटाघर समेत अन्य चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटों को हटा दिया गया। उनके स्थान पर चौराहों पर अंडरपास व फलाईओवर बना दिए। जिससे चारों तरफ से आने वाले वाहनों को बिना चौराहे पर रूके आसानी से निकला जा सके। हालत यह है कि जैसे ही शहर ट्रैफिक सिग्नल फ्री हुआ वैसे ही वाहनों की स्पीड बढ़ गई। दो पहिया वाहन होया चार पहिया वाहन चालक निर्धारित से अधिक गति से वाहन दौड़ाने लगे। नतीजा शहर में आए दिन एक्सीडेंट होने लगे। वह भी मेन रोड व सीधी सड़कों पर।</p>
<p><strong>नियमों की नहीं हो रही पालना</strong><br />लोगों का कहना है कि शहर में स्पीड ब्रेकर होने चाहिए। लेकिन उन्हें बनाने में नियमों की पालना की जानी चाहिए। जबकि हालत यह है कि गली मोहल्लों में तो लोग अपनी मनमर्जी  से ही स्पीड ब्रेकर बनवा रहे है। मेन रोड पर अधिकारियों की देखरेख में ही ये बनाए जाएं। लेकिन अधिकारियों ने ठेकेदारों कोआदेश दे दिया। ठेकेदार अपनी मर्जी से ही बिना मापदंड के स्पीड ब्रेकर बना रहे है। कहीं ऊंचाई अधिक है तो कहीं चौड़ाई कम है। कहीं पास-पास ब्रेकर बना दिए तो कहीं वाहनों की गति के स्थान पर दुर्घटना का कारण बन रहे हैं स्पीड ब्रेकर। </p>
<p><strong>जिला कलक्टर ने बैठक में दिए थे निर्देश</strong><br />जानकारों के अनुसार शहर में दुर्घटनाओं कोदेखते हुए गत दिनों जिला कलक्टर ने ट्रैफिक पुलिस की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं। जिसमें कहा है कि जहां भी एक्सीडेंट जोन हैं उन्हें चिन्हित किया जाए। वहां स्पीड ब्रेकर बनवाए जाएं।जिला कलेक्टर के निर्देश पर ही शहर में स्पीड ब्रेकर बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। कहीं रबड़ वाले तो कहीं डामर के स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे है। </p>
<p><strong>डिवाइडर के कट व रोंग साइड से वाहनों का आवागमन</strong><br />शहर में पिछले कुछ समय से चौराहों के अलावा मेन रोड तक की ट्रैफिक व्यवस्था इतनी अधिक बदहाल है कि सुरक्षित वाहन चला पाना मुश्किल हो रहा है। खासतौर पर महिलाएं तो भीड़-भाड़ वाले इलाकों में वाहन चलाने से घबराने लगी है। ऐसे में मनचलों की हरकतों से भी दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। हालत यह कि कई लोग शॉर्ट कट के प्रयास में डिवाइडरों के कटके बीच से तो कई रोंग साइड से वाहन तेजी से लेकर निकल रहे है। जिससे आए दिन एक्सीडेंट हो रहे है। पहले जहां भारी वाहनों से एक्सीडेंट अधिक होते थे। अब उनका शहर में प्रवेश बंद हुआ था छोटे व चार पहिया वाहनों से भी एक्सीडेंट होने लगे है। यहीकारण है कि उन्हें कम करने के  लिए ट्रैफिक पुलिस और कोटा विकास प्राधिकरण मिलकर वाहनों की गति पर लगाम लगाने में जुटे हैं। जिसके लिए जगहृ-जगह पर स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में कई जगह पर वाहन तेजी से निकलने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। उन दुर्घटनाओं पर रोक लगाने व उनमें कमी लाने के लिए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर स्पीड ब्रेकर बनवाए जा रहे है। दुर्घटना संभावित स्थानों को चिन्हित कर केडीए को वहां स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए निवेदन किया गया है। लोगों को अपने जीवन की सुरक्षा के लिए स्वयं ही जागरूक रहकर वाहनों को निर्धारित गति सीमा में ही वाहन चलाने चाहिए। जिससे दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। हालांकि लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया गया था। फूल देकर, हैलमेट वांटकर व जगह-जगह कार्यक्रम कर समझाइश की गई है। <br /><strong>- पूरण सिंह, निरीक्षक,यातायात पुलिस </strong></p>
<p>शहर में दुर्घटना संभावित स्थानों पर स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस की ओर से निवेदन किया गया था। उनके बताए स्थानों पर ही स्पीड  ब्रेकर बनवाए जा रहे है। जगह के हिसाब से कहीं रबड़ के तो कहीं डामर के बनाए जा रहे है। सभी का मकसद वाहनों की गति पर लगाम लगाकर दुर्घटनाओं को कम करना है। <br /><strong>- रविन्द्र माथुर, निदेशक अभियांत्रिकी, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 15:12:54 +0530</pubDate>
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                <title>हाइवे पर बने अंडरपास में हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने कुछ दिन पहले उन दोनों अंडरपास की बदहाली के बारे में न्यास अधिकारियों को अवगत भी कराया था, लेकिन करीब एक सप्ताह बाद भी अधिकारियों ने उन्हें ठीक नहीं कराया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger-of-accidents-in-the-underpass-built-on-the-highway/article-65149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/highway-pr-bne-underpass-me-hadso-ka-khtra...kota-news-26-12-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास ने शहर को ट्रैफिक सिग् नल  फ्री बनाने के लिए झालावाड़ रोड पर अनंतपुरा से अंटाघर तक ल्लाई ओवर व अंडरपास निर्माण पर करोड़ों रुपए तो खर्च कर दिए। लेकिन हालत यह है कि कुछ ही समय में उनकी गुणवत्ता सामने दिखने लगी है। यह हालत है झालावाड़ रोड स्थित गोबरिया बावड़ी चौराहे पर बने अंडरपास की। करीेब 25 करोड़ से अधिक की लागत से इस अंडरपास का निर्माण कराया गया। साथ ही इसके सौन्दर्यीकरण पर भी करीब 5 करोड़ रुपए खर्च किए गए। जिससे एरोड्राम से अनंतपुरा और अनंतपुरा से एरोड्राम की तरफ जाने वाले वाहन इस अंडरपास से बिना रूके निकल सके। साथ ही जिन वाहनों को को भामाशाह मंडी व महावीर नगर की तरफ जाना है वे अंडरपास के ऊपर की सड़क से निकल सके। वर्तमान में इस अंडरपास की हालत इतनी अधिक खराब है कि यहां पहले अनंतपुरा से एरोड्राम की तरफ जाने वाली अंडरपास की एक तरफ की सड़क पर नाली के ढकान का जाल टूट गया था। जिससे वाहन चालकों को निकलने में हादसों का खतरा बना हुआ था। ऐसे में न्यास ने उस रास्ते को  बेरीकेडिंग लगाकर बंद कर सड़क व जाल को सही करने का काम शुरू किया। जाल की जगह पर आरसीसी करवाई गई। यह काम पूरा नहीं हुआ और रास्ता अभी चालू भी नहीं हुआ। उससे पहले ही दूसरी सड़क का जाल भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। </p>
<p><strong>बड़े-बड़े पत्थर से तेज रफ्तार वाहन गुजर रहे</strong><br />विज्ञान नगर से अनंतपुरा की तरफ जाने वाला अंडरपास का रास्ता अभी चालू है। जिस पर से तेज रफ्तार से वाहन दिन भर निकल रहे हैं। लेकिन हालत यह है कि उस रास्ते पर भी नाली का जाल पूरी तरह से टूट चुका है। उस नाली के जाल को सही करने की जगह उसके स्थान पर बड़े-बड़े पत्थर डाले हुए हैं। हाइवे होने से यहां रोजाना दिनभर चार पहिया वाहन इतनी तेजी से निकल रहे हैं कि उन्हें इस जगह के क्षतिग्रस्त होने का अंदाजा भी नहीं है। ऐसे में कई वाहन दिन में दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। कई वाहन चालक उससे बचने के प्रयास में साइड से निकाल रहे हैं। जिससे वहां से निकलने वाले अन्य वाहनों के टकराने का खतरा बना हुआ है। दो पहिया वाहन चालक तो उस पर से निकल भी नहीं पा रहे हैं। वे साइड से ही निकल रहे हैं। </p>
<p><strong>एरोड्राम अंडरपास भी नहीं हुआ ठीक</strong><br />गोबरिया बावड़ी की तरह ही एरोड्राम व अंटाघर अंडरपास की सड़कों पर ही हादसों का खतरा मंडरा रहा है। नवज्योति ने कुछ दिन पहले उन दोनों अंडरपास की बदहाली के बारे में न्यास अधिकारियों को अवगत भी कराया था। लेकिन करीब एक सप्ताह बाद भी अधिकारियों ने उन्हें ठीक नहीं कराया है। जिससे यहां भी कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>पहले सीपेज होने से खोदकर दोबारा बनाई भी सड़क</strong><br />जानकारों के अनुसार एरोड्राम व अंटाघर अंडरपास से गोबरिया बावड़ी अंडरपास  सही बना हुआ है। लेकिन इसकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। यही कारण है कि यह बार-बार खराब हो रहा है। लोगों ने बताया कि बनने के कुछ दिन बाद ही यहां सीपेज की समस्या हो गई थी। जिससे पूरे अंडरपास में गंदा पानी भरा रहता था। ऐसे में न्यास ने अंडरपास के दोनों तरफ की सड़क को पूरी तरह से खोदकर नया बनाया था। जिससे अंडरपास का रास्ता दोनों तरफ का काफी समय तक बंद रहा था। लेकिन उसका भी फायदा नहीं मिला। कुछ समय बाद अब फिर से वही समस्या हो गई। जिससे हादसों का खतरा कम होने की जगह बढ़ गया। </p>
<p><strong>नाली की जालियां तक गायब</strong><br />नगर विकास न्यास ने नए प्रोजेक्ट बनाने के बाद उन्हें ओ एण्ड एम के तहत संवेदकों को ही उनके रखरखाव व मरम्त की जिम्मेदारी दी है। जिसके लिए संवेदकों को निर्धारित समय के लिए अतिरिक्त राशि का भी भुगतान किया गया है। साथ ही वहां सुरक्षा गार्ड भी लगाए थे। लेकिन हालत यह है कि न तो संवेदक का ध्यान है और न ही न्यास अधिकारियों का। यही कारण है कि अंडरपास बार-बार खराब हो रहे हैं। यहां तक कि इस अंडरपास की नालियों के जालियां तक गायब हो गई है। लेकिन इस पर भी किसी का ध्यान नहीं है। </p>
<p><strong>दीवार से टकराने पर जा सकती है जान</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि न्यास ने अंडरपास की दीवारों को सजाने पर करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। वहां डिजाइन बनाई गई है। लेकिन सड़क की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। जबकि सड़क सही होना सबसे जरूरी है।  लोगों ने बताया कि सड़क पर चलना सुरक्षित होगा तभी तो दीवारों की डिजाइन का फायदा है। लोगों का कहना है कि जिस तरह की स्थिति वर्तमान में है। ऐसे में वहां तेजी से निकलने वाले वाहन यदि दुर्घटनाग्रस्त हुए तो अंडरपास की दीवार से टकराने पर वाहन तो क्षतिग्रस्त होगा ही कई लोगों की जान भी जा सकती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />गोबरिया बावड़ी अंडरपास की नाली का जाल टूट गया था। जिसे सही करने का काम किया जा रहा है। अंडरपास से रोजाना सैकड़ों वाहन निकलते हैं ऐसे में टूट फूट होती रहती है। लेकिन उसे समय-समय पर ठीक भी करते रहते हैं। अभी भी काम चल रहा है। <br /><strong>- मानसिंह मीणा, सचिव, नगर विकास न्यास </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 26 Dec 2023 17:30:24 +0530</pubDate>
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