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                <title>US Navy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>US Navy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव : ट्रंप का ऐलान-ईरानी नौकाएं दिखते ही तुरंत नष्ट करें, अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने त्यागपत्र दिया </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली ईरानी नावों को नष्ट करने का सख्त आदेश दिया है। अमेरिकी घेराबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस लौटा दिया गया। तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि ईरान ने बातचीत की शर्त 'हार की स्वीकारोक्ति' रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-increases-in-the-strait-of-hormuz-trump-announces/article-151521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को और बढ़ाते हुए अपनी नौसेना को कड़े आदेश दिए हैं तथा कहा है कि यदि ईरान से जुड़ी कोई भी नाव इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाती हुई पाई जाए, तो उसे तुरंत ‘नष्ट’ कर दिया जाए। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि इस तरह की हरकतों को रोकने में किसी भी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना की टीमें इस रास्ते को साफ करने के काम में जुटी हुई हैं और सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना जरूरी है।</p>
<p><strong>ईरान की घेराबंदी : 31 जहाजों को वापस लौटने का निर्देश</strong></p>
<p>ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री घेराबंदी को और सख्त करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसने ‘ईरान के विरुद्ध अमेरिकी घेराबंदी के हिस्से के रूप में 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।’वापस लौटाए गए जहाजों में अधिकांश तेल टैंकर बताये जा रहे हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका पहले हार माने, तभी होगी बातचीत: ईरान </strong></p>
<p>ईरान के सांसद हामिदरज़ा हाजी बाबाई ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी हार स्वीकार नहीं करता, तब तक उससे किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा, अमेरिका के हार स्वीकार किए बिना कोई भी बातचीत निषिद्ध है। </p>
<p>अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने त्यागपत्र दे दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग ने दी। विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा, नौसेना प्रमुख जॉन सी. फेलन तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। बयान में कहा गया है कि उप प्रमुख हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में सेवा देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने दिया त्यागपत्र, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ थे अच्छे संबंध : युद्ध विभाग ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ मतभेदों के चलते तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। हंग काओ कार्यवाहक प्रमुख होंगे। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक घेराबंदी कर रखी है, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ी सफलता बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-navy-chief-resigns-amid-west-asia-crisis-had-good/article-151407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/अमेरिकी-नौसेना-प्रमुख.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने त्यागपत्र दे दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग ने दी। विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा, "नौसेना प्रमुख जॉन सी. फेलन तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं।” बयान में कहा गया है कि उप प्रमुख हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में सेवा देंगे। एक्सियोस समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, फेलन की विदाई कई लोगों के लिये आश्चर्यजनक रही। उनके संबंध युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ ‘ठीक नहीं’ थे, लेकिन कथित तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंध अच्छे थे।</p>
<p>समाचार पोर्टल ने एक सूत्र के हवाले से कहा, “फेलन यह नहीं समझ पाये कि वह सर्वोच्च अधिकारी नहीं थे। उनका काम दिये गये आदेशों का पालन करना है, न कि उन आदेशों का पालन करना जो उनके अनुसार दिये जाने चाहिये। ” फेलन ने मंगलवार को नौसेना के भविष्य और 'गोल्डन फ्लीट' पहल सहित इसके प्रमुख निवेशों पर चर्चा करने के लिये संवाददाताओं से बात की थी। फेलन का त्यागपत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले सभी समुद्री यातायात की घेराबंदी शुरू कर दी है। दुनिया के तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।</p>
<p>अमेरिका का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिये स्वतंत्र हैं, जब तक कि वे तेहरान को मार्ग कर नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने मार्ग कर लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी घेराबंदी को ‘एक जबरदस्त सफलता’ बताया है और कहा है कि वाशिंगटन तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा, जब तक कि उसके पास ‘अंतिम समझौता’ न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:04:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप का दावा: हॉर्मुज बंद होने से ईरान को प्रतिदिन 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान, ईरान के साथ कभी कोई समझौता नहीं हो सकता</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी घेराबंदी के कारण ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के जरिए बी-2 बमवर्षकों ने ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों को ध्वस्त कर दिया है। ट्रंप ने सख्त चेतावनी दी कि बिना किसी ठोस समझौते के ईरान पर दबाव कम नहीं किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-claim-that-iran-is-suffering-a-loss-of-us/article-151266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)24.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं चाहता, क्योंकि इसके बंद होने से उन्हें प्रतिदिन 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो रहा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, “ वे (ईरान) इसे खुला रखना चाहते हैं ताकि वे प्रतिदिन 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर कमा सकें।” ट्रंप ने दावा किया कि ईरान कह रहा है कि वे इसे बंद करना चाहते हैं, क्योंकि वे ‘अपनी प्रतिष्ठा बचाना’ चाहते हैं, जबकि अमेरिका ने इसकी पूरी तरह से घेराबंदी कर रखी है। उन्होंने कहा कि चार दिन पहले कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया था और बताया था कि ईरान इस जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना चाहता है।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, “ लेकिन अगर हम ऐसा करते हैं, तो ईरान के साथ कभी कोई समझौता नहीं हो सकता, जब तक कि हम उनका बाकी देश और उनके नेताओं को भी उड़ा न कर दें।” डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं और अमेरिकी संचार माध्यमों, विशेष रूप से वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूयॉर्क टाइम्स पर अपना हमला जारी रखते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ को ‘नीचा दिखाने’ या उसकी आलोचना करने की अनुमति कभी नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने परमाणु स्थलों को इस सीमा तक पूरी तरह से नष्ट कर दिया है कि ‘रक्तपिपासु ईरान’ उन तक पहुंचने या उन्हें खोदकर निकालने में असमर्थ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी अंतरिक्ष बल के पास पिछले जून में हमला किये गये तीनों स्थलों के हर इंच पर कैमरों की निगरानी है।</p>
<p>'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' 22 जून, 2025 को ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु केंद्रों के विरुद्ध किये गये अमेरिकी सैन्य हमलों का गुप्त नाम है। इन हमलों का मुख्य केंद्र तीन प्राथमिक परमाणु बुनियादी ढांचा स्थल फोर्डो यूरेनियम संवर्धन संयंत्र, नतंज परमाणु केंद्र और इस्फहान परमाणु प्रौद्योगिकी केंद्र थे। इस अभियान में अमेरिकी वायु और नौसेना शक्ति का विशाल प्रदर्शन देखा गया, जिसमें 7 बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक शामिल थे, जिन्होंने सीधे अमेरिका से 18 घंटे का मिशन संचालित किया। इसमें पहली बार युद्ध में उपयोग किये गये 30,000 पाउंड के 'बंकर बस्टर' बम, एक अमेरिकी पनडुब्बी से दागी गयी 30 टॉमहॉक मिसाइलें और ईरानी हवाई सुरक्षा को ध्वस्त करने के लिए एफ-35 और एफ-22 स्टील्थ लड़ाकू विमानों सहित 125 से अधिक विमान शामिल थे। अमेरिकी अधिकारियों और उपग्रह चित्रों के अनुसार इन स्थलों को ‘अत्यधिक गंभीर क्षति’ पहुंची है। पेंटागन का अनुमान है कि इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लगभग दो वर्ष पीछे धकेल दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:29:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज में भड़का तनाव: अमेरिकी सेना द्वारा जहाज को रोके जाने के बाद ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी, नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेंटकॉम ने ओमान की खाड़ी में नाकाबंदी का उल्लंघन करने पर ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' को गोले दागकर निष्क्रिय कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना ने जहाज पर नियंत्रण कर लिया है। ईरान ने इस कार्रवाई को 'सशस्त्र डकैती' करार देते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-warns-of-retaliation-after-us-military-intercepts-ship-attempt/article-151044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने द्वारा इस बात की पुष्टि किये जाने के बाद की उसने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी व्यापारिक जहाज को रोका है, त्वरित प्रतिक्रिया देने का वादा किया है। यह जहाज कथित तौर पर क्षेत्र में अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास कर रहा था। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी कि अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज को रोका है , जिससे उसके इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>कमान ने एक बयान में कहा, "अरब सागर में तैनात अमेरिकी बलों ने 19 अप्रैल को एक ईरानी बंदरगाह की ओर जाने का प्रयास कर रहे एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू की।" सेंटकॉम के अनुसार, ईरानी पोत को नाकाबंदी उल्लंघन के बारे में कई चेतावनियाँ दी गई थीं। बयान में कहा गया है, "छह घंटे की अवधि में बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद, जब तौस्का के चालक दल ने पालन नहीं किया, तो स्पूरांस ने पोत को अपने इंजन कक्ष को खाली करने का निर्देश दिया। स्पूरांस ने विध्वंसक पोत की 5-इंच एमके 45 तोप से तौस्का के इंजन कक्ष में कई गोले दागकर तौस्का के प्रणोदन तंत्र को निष्क्रिय कर दिया।"</p>
<p>इसके बाद, अमेरिकी मरीन मालवाहक पोत पर सवार हो गए। कमांड के अनुसार, पोत वर्तमान में अमेरिकी नियंत्रण में है। कमान ने कहा, "नाकाबंदी शुरू होने के बाद से, अमेरिकी सेना ने 25 वाणिज्यिक पोतों को वापस मुड़ने या किसी ईरानी बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।" अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, ईरान के खातम अल-अनबिया सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा एक ईरानी पोत को जब्त करने पर ईरान तुरंत जवाब देगा।</p>
<p>एक समाचार एजेन्सी के अनुसार, ईरानी सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम चेतावनी देते हैं कि अमेरिकी सेना द्वारा की जा रही इस सशस्त्र डकैती का जवाब ईरान के सशस्त्र बल जल्द ही देंगे।” 13 अप्रैल को, अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है। वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 12:27:31 +0530</pubDate>
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                <title>ऑयल टैंकरों को कबाड़ में बदल देती हैं ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगें, ऐसी भारत के पास भी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में हजारों समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाकर वैश्विक जहाजरानी के लिए खतरा पैदा कर दिया है। चीन और रूस से प्राप्त ईएम-52 रॉकेट माइंस तेल टैंकरों को पल भर में डुबो सकती हैं। हालांकि अमेरिका ने कई माइनलेयर्स नष्ट किए हैं, लेकिन ईरान की यह अदृश्य मारक क्षमता युद्ध में उसे बड़ी बढ़त दिलाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/even-india-does-not-have-such-iranian-sea-mines-that/article-146322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/oil.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ये खबर आई कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगे बिछा दी हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी-इजरायली जहाजों को नुकसान पहुंचाया जा सके। हालांकि, अमेरिका ने भी कहा है कि उसने ईरान के माइनलेयर्स यानी समुद्री बारूदी सुरंगों को बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया है। हाल ही में उसने 16 माइनलेयर्स को नष्ट करने का दावा किया है। कहा जाता है कि इस तरह की बारूदी सुरंगें भारत के पास नहीं हैं। ईरान के पास कितनी ऐसी माइंस हैं, इसके आंकड़े तो कभी जारी नहीं किए गए हैं, मगर कई रिपोर्टों में यह आकलन किया गया है कि समुद्र की तलहटी में ईरान ने 2,000-6,000 ऐसी समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं।</p>
<p><strong>ईरान के पास दो तरह की माइंस क्षमताएं: </strong>एक वेबसाइट अनुसार, ईरान के पास माइन लेइंग और माइन स्टॉक्स दोनों की ही क्षमता है। ईरान ने बरसों से पूर्व सोवियत संघ, पश्चिमी देशों के साथ इन माइंस के लिए कई करार किए थे। रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान ने ईएम-52 रॉकेट प्रोपेल्ड की खरीद की है। उसने चीन से इस तरह की कई माइन खरीदी हैं।</p>
<p>ईरान ने रूस-चीन, उत्तर कोरिया से हासिल की समुद्री बारूदी सुरंगें: अमेरिकी एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान के हथियार भंडार में कम से कम 2,000 ऐसी माइंस हैं। ईरान के पास बेहद नए, एडवांस माइंस हैं, जिसे उसने रूस, चीन और उत्तर कोरिया से हासिल किए थे। टैंकर युद्ध में समुद्री बारूदी सुरंगें ज्यादा कारगर: एक्सपर्ट का मानना है कि ईरान तेल टैंकरों की लड़ाई में समुद्री बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल करता है। पहले विश्वयुद्ध के दौरान से ही इन समुद्री बारूदी सुरंगों का खूब इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये समुद्री बारूदी सुरंगें ईरान को  युद्ध में बढ़त दिला सकती हैं। खासतौर पर दुनिया की नस कही जाने वाली होर्मुज की खाड़ी में उसकी यह क्षमता बेहद कारगर है।</p>
<p><strong>क्या होती हैं बेहद ताकतवर ईएम-52 माइंस</strong></p>
<p>जो जहाज ईएम-52 माइंस के ऊपर से गुजरते हैं, उनमें विस्फोट हो जाता है। यह इतना ताकतवर होता है कि पूरा का पूरा जहाज ही समंदर में डूब जाता है। समंदर की तली में यह माइन बिछाई जाती है। उस दौरान इसमें लगे सेंसर्र एक्टिव रहते हैं। जैसे ही कोई जहाज ऊपर से गुजरता है तो ये सटीक निशाना लगाकर रॉकेट मारते हैं। ये उन जहाजों में नीचे से रॉकेट बरसाकर उसे फाड़ देती हैं। ऐसे जहाजी तेल टैंकर तकरीबन डूब जाते हैं।</p>
<p><strong>क्या भारतीय नौसेना के पास ऐसी क्षमता है</strong></p>
<p>भारतीय नौसेना के पास पहले माइंस स्वीपर थे, जिनमें माइंस बिछाने की क्षमता थी। भारतीय नौसेना के पास फिलहाल माइन लेयर शिप नहीं हैं। हालांकि, नेवी के पास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (अरह-रहउ) हैं। इनमें जरूरत पड़ने पर माइन ले जाने और उसे बिछाने की क्षमता होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 11:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत: अमेरिका ने सौंपे 2 MH-60R हेलीकॉप्टर, पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता में होगा इजाफा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और अधिक मजबूत करते हुए अमेरिकी नौसेना ने दो एमएच-60आर हेलीकॉप्टर भारतीय नौसेना को सौंप दिए हैं। इन हेलीकॉप्टरों के मिलने से भारतीय नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं में इजाफा होगा। अगले 3 वर्षो में भारत को सभी 24 हेलीकाप्टर सौंप दिए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%A4--%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A5%87-2-mh-60r-%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0--%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%A1%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BE/article-1157"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/e6ehzfzucaih-h7.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और अधिक मजबूत करते हुए अमेरिकी नौसेना ने दो एमएच-60आर हेलीकॉप्टर भारतीय नौसेना को सौंप दिए हैं। सैन डिएगो के नौसैन्य हवाई अड्डे नॉर्थ आइलैंड या एनएएस नॉर्थ आइलैंड में हुए समारोह में अमेरिका की नौसेना ने भारतीय नौसेना को औपचारिक तौर पर मल्टी रोल हेलीकॉप्टर (एमआरएच) सौंपे। इस दौरान अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू भी उपस्थित रहे। इस समारोह में वाइस एडमिरल केनेथ व्हाइटसेल, कमांडर नेवल एयर फोर्सेज, यूएस नेवी और वाइस एडमिरल रवनीत सिंह, डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ के बीच दस्तावेजों को लेकर प्रक्रिया पूरी की गई। कार्यक्रम में अमेरिकी नौसेना और लॉकहीड मार्टिन कॉर्पोरेशन का वरिष्ठ नेतृत्व भी मौजूद रहा।<br /> <br /> भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि ने कहा कि सभी मौसमों में काम करने वाले मल्टी रोल हेलीकॉप्टरों का बेड़े में शामिल होना भारत-अमेरिका के बीच बने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों में महत्वपूर्ण कदम है। भारत-अमेरिका के रक्षा संबंध मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में द्विपक्षीय रक्षा व्यापार बढ़कर 20 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि रक्षा व्यापार से आगे बढ़ते हुए भारत और अमेरिका रक्षा प्लेटफार्मों के को-प्रोडक्शन और को-डेवलेपमेंट पर भी साथ काम कर रहे हैं।<br /> <br /> बता दें कि भारतीय नौसेना 24 मल्टी रोल हेलीकॉप्टरों को अमेरिकी सरकार से 2.4 बिलियन अमरीकी डॉलर की अनुमानित लागत से फॉरेन मिलिट्री सेल्स के तहत खरीद रही है। इन दो हेलीकॉप्टरों का भारत को सौंपा जाना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इस हेलीकॉप्टर पर प्रशिक्षण लेने के लिए भारतीय नौसेना के 18 जवान पहले से ही अमेरिका में मौजूद है। अगले 3 वर्षो में भारत को सभी 24 हेलीकाप्टर सौंप दिए जाएंगे। इन हेलीकॉप्टरों के मिलने से भारतीय नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं में इजाफा होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jul 2021 15:20:46 +0530</pubDate>
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