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                <title>Rabi season - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - धरतीपुत्रों का इंतजार समाप्त, 25 से होगी फसलों की खरीद</title>
                                    <description><![CDATA[इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 18 फरवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---the-wait-of-the-sons-of-the-soil-is-over--crop-procurement-will-begin-from-the-25th/article-146060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। धरतीपुत्रों का इंतजार अब समाप्त होने वाला है। भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त हो जाने के बाद राजफेड द्वारा रबी-2026 के अंतर्गत सरसों एवं चना की समर्थन मूल्य पर खरीद शीघ्र शुरू की जा रही है। राजफेड के चार क्षेत्रीय कार्यालयों कोटा, अजमेर, भरतपुर एवं श्रीगंगानगर में आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 15 मार्च से एवं खरीद 25 मार्च से शुरू होगी। जबकि, शेष चार क्षेत्रीय कार्यालयों जयपुर, जोधपुर, उदयपुर एवं बीकानेर नें आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 20 मार्च एवं खरीद 1 अप्रेल से शुरू होगी। भारत सरकार द्वारा सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,200 रुपए प्रति क्विंटल एवं चना का समर्थन मूल्य 5,875 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। राज्य में सरसों की 13.78 लाख मीट्रिक टन एवं चना की 5.53 लाख मीट्रिक टन खरीद की सीमा निर्धारित की गई है।</p>
<p><strong>क्यूआर कोड स्कैन से करवा सकेंगे पंजीकरण</strong><br />सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने बताया कि जिलेवार सीमा आॅनलाइन उपलब्ध करवा दी गई है। अजमेर, जोधपुर, बीकानेर एवं कोटा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले 19 जिलों में एनसीसीएफ द्वारा एवं जयपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर एवं भरतपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले 22 जिलों में नेफेड द्वारा खरीद कार्य करवाया जाएगा। सहकारिता मंत्री ने बताया कि सरसों एवं चना विक्रय के इच्छुक किसान स्वयं क्यूआर कोड स्कैन कर अथवा ई-मित्र के माध्यम से पंजीकरण करवा सकेंगे। समर्थन मूल्य पर खरीद किसानों की आधार आधारित बायोमीट्रिक पहचान के माध्यम से ही की जाएगी। भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार नैफेड और एनसीसीएफ के लिए समर्थन मूल्य पर खरीद 60 दिवस की अवधि में की जाएगी। सहकारिता मंत्री ने राजफेड को निर्देश दिए हैं कि खरीद केन्द्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित कर ली जाए।</p>
<p><strong>गुणवत्ता मापदण्डों के अनुरूप होगी खरीद</strong><br />सहकारिता मंत्री ने कहा कि किसान पूर्व की भांति एफएक्यू गुणवत्ता मापदण्डों के अनुरूप अपनी फसल क्षेत्र की क्रय-विक्रय अथवा ग्राम सेवा सहकारी समिति केन्द्र पर विक्रय कर सकेंगे। किसान भाइयों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो इसके लिए राजफेड में कॉल सेन्टर 18001806001 स्थापित किया गया है। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि वे अपनी फसल को साफ-सुथरा कर तथा छानकर क्रय केन्द्रों पर लाएं ताकि गुणवत्ता मापदण्डों के अनुरूप जिंस विक्रय कर सकें। हाड़ौती में कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ जिले के किसानों की फसलों कर खरीद की जाएगी। किसानों में खरीद की तिथि तय होने से खुशी का माहौल है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />हाड़ौती अंचल में रबी सीजन की मुख्य तिलहनी फसल सरसों की कटाई होने के बाद समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 18 फरवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि खेतों में पीली फसल कटकर ढेरों में बदल रही है और मंडियों में नई उपज की आवक दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, लेकिन सरकारी खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं होने से किसानों के चेहरे पर खुशी की जगह चिंता साफ दिखाई दे रही है। समर्थन मूल्य घोषित होने के बावजूद जमीनी स्तर पर खरीद की ठोस शुरूआत न होने से किसान असमंजस की स्थिति में हैं। यदि जल्द ही सरसों की सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 14:02:42 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - खाद संकट से राहत, रफ्तार पकड़ने लगी आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों खाद की कमी के चलते किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---relief-from-fertilizer-crisis--supply-picking-up-pace/article-136215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कोटा जिले में खाद की आपूर्ति अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है। हाल ही में जिले में 1300 मीट्रिक टन खाद की एक रैक पहुंच चुकी है, जिससे सहकारी समितियों और डीलरों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, कृषि विभाग के अनुसार आगामी दिनों में 2600 मीट्रिक टन खाद की एक और रैक जिले में आने वाली है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार वर्तमान में जिले में करीब 8000 मीट्रिक टन खाद का स्टॉक मौजूद है। यह स्टॉक रबी फसलों के लिए किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे वितरित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में वितरण</strong><br />पिछले दिनों खाद की कमी के चलते किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा था और कई जगहों पर असंतोष की स्थिति भी बन गई थी। अब लगातार रैक आने से हालात में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि आगामी रैक के पहुंचते ही जिले में खाद की उपलब्धता और बेहतर हो जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पीओएस मशीन के माध्यम से ही खाद दी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की कालाबाजारी और अनियमितता पर रोक लगाई जा सके। इसके अलावा कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में खाद का वितरण करवाया जा रहा है, ताकि सभी किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद की आपूर्ति हो सके।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />रबी सीजन में अचानक से मांग बढ़ने के कारण कोटा जिले हाड़ौती में खाद का संकट उत्पन्न हो गया था। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 6 दिसंबर के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि हाड़ौती में रबी सीजन के दौरान किसानों के सामने खाद पाने की जद्दोजहद एक बार फिर बढ़ गई है। स्थिति यह है कि सुबह तड़के से शुरू होने वाली खाद वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें दोपहर तक लगी रहती हैं। धरतीपुत्र कहलाने वाले किसान आवश्यक कृषि संसाधन के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। कई बार तो किसानों को खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। कोटा जिले सहित हाड़ौती के अन्य जिलों में सरकारी एवं सहकारी वितरण केंद्रों पर यूरिया की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन सीमित स्टॉक और आधार कार्ड आधारित वितरण प्रणाली के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। सर्दी का असर बढ़ने के कारण अब गेहूं का यूरिया की जरूरत है। ऐसे में किसानों की खाद के लिए भीड़ बढ़ती ही जा रही है।</p>
<p>यदि इसी तरह नियमित आपूर्ति बनी रही तो बुवाई और फसल प्रबंधन में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। कृषि विभाग को जिले में खाद की वितरण व्यवस्था पर सख्ती से निगरानी रखनी चाहिए ताकि सभी किसानों को समय पर खाद मिल सके।<br /><strong>- लक्ष्मीचंद नागर, किसान नेता</strong></p>
<p>खाद की आपूर्ति सुचारू करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एक रैक पहले ही पहुंच चुकी है और जल्द ही 2600 मीट्रिक टन की रैक और आएगी। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, जिले में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।<br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 13:05:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - कृषि पर्यवेक्षक व राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में ही बांटें खाद</title>
                                    <description><![CDATA[सर्द रात के बावजूद भारी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने रात्रि चौपाल में उपस्थित होकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--distribute-fertilizer-only-in-the-presence-of-agricultural-supervisors-and-revenue-officials/article-132236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/_4500-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  जिले में रबी सीजन की बुवाई का दौर तेज होते ही खाद की डिमांड बढ़ गई है। ऐसे में किसानों को खाद के संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने जिले में खाद के संकट को गम्भीरता से लेते हुए अब  कृषि पर्यवेक्षक और राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में ही किसानों को खाद का वितरण करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार रात को कनवास क्षेत्र के विभिन्न गांवों में रात्रि चौपाल की। सर्द रात के बावजूद भारी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने रात्रि चौपाल में उपस्थित होकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान ग्रामीणों की शिकायत पर मंत्री नागर ने खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>खाद की कालाबाजारी की शिकायत</strong><br />रात्रि चौपाल के दौरान किसानों ने खाद न मिलने और विक्रेता द्वारा कालाबाजारी की शिकायत की। किसानों ने खाद विक्रेताओं द्वारा तय कीमत से अधिक वसूलने के भी आरोप लगाए। जिस पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने तुरंत कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक अतीश कुमार शर्मा से फोन पर वार्ता की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्राइवेट और अन्य खाद विक्रेता के जितने भी स्टॉक हैं, उन्हें रोककर आने वाला खाद आगे से कृषि पर्यवेक्षक और राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में ही बांटा जाए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक अटैचमेंट न देकर सिर्फ खाद की बिक्री हो। जिससे किसानों की समस्या का समाधान हो सकेगा। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जिले में खाद के संकट को लेकर दैनिक नवज्योति में गत 3 नवंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार हुई बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी आने से रबी फसलों की बुवाई तेजी से शुरू हो गई है। मौसम पूरी तरह अनुकूल होते ही किसानों ने खाद और बीज की खरीदारी आरंभ कर दी है। इससे सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के यहां खाद की मांग अचानक बढ़ गई है। मांग बढ़ने से कई स्थानों पर खाद की किल्लत जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। किसानों को सुबह से ही खाद लेने के लिए समितियों के बाहर लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। किसानों को खाद लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस दौरान कई स्थानों पर खाद के लिए किसानों को कतारों में लगना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 13:05:20 +0530</pubDate>
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                <title>किसानों के लिए खुशखबरी : रबी फसल सिंचाई के लिए 15 अक्टूबर से खुलेंगी नहरें, किसानों में उत्साह</title>
                                    <description><![CDATA[रबी फसल की सिंचाई के लिए 15 अक्टूबर से नहरें खोलने की तैयारी शुरू। कलेक्टर की अध्यक्षता में नहरों के संचालन की तारीख तय। किसानों में उत्साह का माहौल। राज्य के प्रमुख बांधों में पानी की पर्याप्त आवक। रबी सीजन में सिंचाई की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/good-news-for-farmers-canals-will-open-from-october-15/article-129632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/jal-sansadhan-department.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जल संसाधन विभाग ने रबी फसल की सिंचाई के लिए 15 अक्टूबर से नहरें खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में नहरों के संचालन की तारीख तय की जा रही है। इस निर्णय से किसानों में उत्साह का माहौल है। इस वर्ष राज्य के प्रमुख बांधों में पानी की पर्याप्त आवक हुई है, जिससे रबी सीजन में सिंचाई की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। जवाई बांध से जुड़े क्षेत्रों में 26 अक्टूबर को पहली बार पानी छोड़ा जाएगा, जबकि बीसलपुर बांध से जुड़े किसानों को नवंबर में सिंचाई के लिए पानी देने का प्रस्ताव है।</p>
<p>पानी की उपलब्धता के चलते इस बार गेहूं के रकबे में करीब 4 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी का अनुमान है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पर्याप्त जल भंडारण से रबी फसलों—विशेषकर गेहूं, चना और सरसों—की पैदावार में बढ़ोतरी की संभावना है। विभाग ने नहरों की सफाई और मरम्मत कार्यों को अंतिम चरण में बताया है, ताकि निर्धारित समय पर किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/good-news-for-farmers-canals-will-open-from-october-15/article-129632</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 15:00:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बरसात से कटाई के बाद रखी फसल खराब होने पर मिलेगा बीमा क्लेम, 72 घंटे में देनी होगी सूचना</title>
                                    <description><![CDATA[रखी फसल खराब होने पर किसानों को पीएम फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा। 72 घंटे के भीतर पोर्टल, हेल्पलाइन 14447, ऐप या कृषि कार्यालय में सूचना देना जरूरी। विभाग ने शिविर लगाकर किसानों से सूचना लेकर बीमा कंपनी को तुरंत भेजने के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/insurance-claim-will-be-given-if-the-crop-stored-after/article-129163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मानूसन के चलते खेतों में काटकर रखी गई फसल के खराब होने पर किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए किसानों को 72 घंटे में पोर्टल पर इसकी जानकारी देनी होगी। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के शासन सचिव राजन विशाल ने बताया कि राज्य में वर्तमान में हो रही बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि, चक्रवर्ती वर्षा एवं चक्रवात से कटाई के बाद 14 दिन तक की अवधि तक खेत में सुखाने के लिए रखी फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत नुकसान की भरपाई हो सकेगी।</p>
<p>इसके लिए प्रभावित बीमित फसल के काश्तकार को 72 घंटे के भीतर खराबे की सूचना कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर 14447 अथवा क्रोप इन्श्योरेंस एप, नजदीकी बैंक या कृषि कार्यालय में पर देनी होगी। उन्होंने तकनीकी कारणों से टोल फ्री नम्बर पर  बीमित कृषकों की ओर से नियत अवधि में शिविर लगाकर पात्र बीमित कृषकों से इन्टीमेशन प्राप्त कर संबंधित बीमा कंपनी को उसी दिन सुपुर्द करने के निर्देश दिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Oct 2025 11:59:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रबी सीजन में उर्वरक उपलब्धता पर राज्य स्तरीय बैठक :  कालाबाजारी रोकने और पारदर्शी वितरण पर जोर </title>
                                    <description><![CDATA[कृषि आयुक्त चिन्मयी गोपाल ने प्रस्तुति में बताया कि अब तक यूरिया की 98 प्रतिशत और डीएपी की 88 प्रतिशत आपूर्ति हो चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-level-meeting-on-fertilizer-availability-in-rabi-season-emphasis/article-125860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य स्तरीय फर्टिलाइज़र डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स की बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि रबी सीजन उर्वरक प्रधान होता है, इसलिए किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी कंपनियों को मांग और आपूर्ति पर विशेष ध्यान देने और विभागों को नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में कालाबाजारी रोकने और पारदर्शी वितरण पर जोर दिया गया। पुलिस विभाग को विशेष अभियान चलाने और सहकारी समितियों को पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अब तक नियम उल्लंघन पर 981 खुदरा विक्रेताओं पर कार्रवाई की गई है।</p>
<p>रेलवे विभाग को जयपुर, हनुमानगढ़, झुंझुनू और दौसा में नए रेक पॉइंट विकसित करने के निर्देश दिए गए। वर्तमान में राज्य में 35 रेल रेक पॉइंट्स से आपूर्ति हो रही है। कृषि आयुक्त चिन्मयी गोपाल ने प्रस्तुति में बताया कि अब तक यूरिया की 98 प्रतिशत और डीएपी की 88 प्रतिशत आपूर्ति हो चुकी है। यूरिया आपूर्ति में जीएसएफसी (224%) और आईपीएल (153%) ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि आरसीएफ सबसे पीछे रहा। किसानों ने वैकल्पिक उर्वरकों जैसे एसएसपी और एनपीके का उपयोग भी बढ़ाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Sep 2025 17:00:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रबी सीजन में गेहूं खरीद की सभी तैयारियां समय पर पूरी हों : गोदारा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रमुख सचिव खाद्य सुबीर कुमार ने कहा कि आगामी रबी सीजन को देखते हुए सभी संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का उत्कृष्ट निर्वहन करें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/godara-all-preparations-for-wheat-procurement-in-rabi-season-should/article-101482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(5)24.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खाद्य मंत्री सुमित गोदारा की अध्यक्षता में सचिवालय में रबी सीजन 2025-26 में राज्य में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्रदेश में गेहूं खरीद करने वाली सभी पांच एंजेंसियों (एफसीआई, राजफेड, तिलमसंघ, एनसीसीएफ  और नेफेड) के प्रतिनिधियों समेत सभी संबंधित विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे। गोदारा ने कहा कि आगामी रबी सीजन में गेहूं के समर्थन मूल्य पर खरीद की सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं। खरीद प्रक्रिया में शामिल सभी पांच एजेंसियां आपस में उपयुक्त समन्वय के साथ काम करें, ताकि गेहूं खरीद से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। अधिक उत्पादन की संभावना वाले क्षेत्रों में उचित चयन बाद जरूरत अनुसार नए खरीद केंद्र खोले जाएं।</p>
<p>बैठक में राजस्थान राज्य भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक संदीप वर्मा ने कहा कि रबी सीजन 2025-26 के मद्देनजर राज्य सरकार के निर्देशानुसार सभी भंडारगृहों में उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही है। प्रमुख सचिव खाद्य सुबीर कुमार ने कहा कि आगामी रबी सीजन को देखते हुए सभी संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का उत्कृष्ट निर्वहन करें। बैठक में एफसीआई एमडी सौरव चौरसिया, तिलमसंघ अध्यक्ष राजेश गुप्ता, राजफेड एमडी नारायण सिंह, एनसीसीएफ से मधु शर्मा, नेफेड से महेंद्र सिंह रावत, अतिरिक्त खाद्य आयुक्त पूनम प्रसाद सागर सहित विभिन्न उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2025 12:28:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डीएपी की भारी किल्लत से धरतीपुत्र बेहाल, नैनो बन सकती है सारथी</title>
                                    <description><![CDATA[ नैनो डीएपी का इस्तेमाल कर पा सकते हैं अच्छी पैदावार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dhartiputras-are-suffering-due-to-severe-shortage-of-dap--nano-can-become-the-charioteer/article-95335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में डीएपी की किल्लत विकराल हो गई है। धरतीपुत्र डीएपी  के लिए मारे-मारे फिर रहे हंै। रबी सीजन की फसलों गेहूं, चना, मसूर, सरसों की बुवाई होने का समय निकलता जा रहा है लेकिन डीएपी की कमी होने से काश्तकार परेशान हैं। इसकी वजह डीएपी की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होना है। अंतरराष्टÑीय बाजार में डीएपी की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे विदेश से डीएपी को आयात कम किया जा रहा है। कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए इस सीजन में 1 लाख 15 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन डिमांड की अपेक्षा 16 नवंबर तक महज 17 हजार 545 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हो पाई है। कृषि विभाग के एक्सपर्ट की मानें तो किसानों को लिक्विड नैनो डीएपी का उर्वरक का इस्तेमाल कर अपनी रबी की फसल में उपयोग करनी चाहिए जिससे कम खर्च में अच्छी पैदावार हो सकती है। नैनो डीएपी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध भी है। </p>
<p><strong>डीएपी की किल्लत से बुवाई पर पड़ रहा असर</strong><br />खरीफ फसलों के समय लंबे समय तक बारिश जारी रहने से सभी फसलें बरसाती पानी की वजह से चौपट हो गई। अब रबी फसल की बुवाई का समय आया तो क्षेत्रीय किसानों को रबी फसलों की बुवाई के लिए डीएपी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। धरतीपुत्रों की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। डीएपी खाद की मारामारी हर वर्ष होती आ रही है।  लेकिन इस साल कुछ ज्यादा ही हो रही है। जिससे फसलों की बुवाई में भी लेटलतीफी हो जाती है। समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से फसलों की बुवाई देरी से करने को मजबूर है। इसका असर धरतीपुत्रों की पैदावार पर पड़ता है। उन दिनों धरतीपुत्रों के चेहरों पर मायूसी झलकती है। </p>
<p><strong>डिमांड 1 लाख 15 हजार मीट्रिक  टन, आपूर्ति महज 17 हजार 545 मीट्रिक  टन</strong><br />कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए इस सीजन में 1 लाख 15 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन डिमांड की अपेक्षा 16 नवंबर तक महज 17 हजार 545 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हो पाई है। इसी प्रकार यूरिया और एसएसपी की भी डिमांग के अनुरूप सप्लाई नहीं हो पा रही है। कोटा संभाग में रबी की फसल के लिए यूरिया की कुल 3 लाख 52 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। लेकिन यूरिया की सप्लाई महज 69 हजार 625 मीट्रिक टन ही हुई हो पाई। इसी प्रकार एसएसपी की डिमांड 1 लाख 22 हजार मीट्रिक टन है लेकिन 37 हजार 659 मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हो पाई है। वर्तमान में डीएपी का एक कट्टे की कीमत 2400-2500 तक की है। इसके लिए किसान से 1350 लिए जाते है जबकि सरकार इस पर 1094 सब सीटी डीएपी कंपनी को देती है। लेकिन अंतरराष्टÑीय बाजार में डीएपी की कीमत बढ़ गई है। ऐसे में निर्माता कंपनियों ने भाव भी बढ़ा दिए है लेकिन सरकार डीएपी कंपनियों को सबसिडी1094 ही दे रही है। इस वजह से निर्माता कंपनिया डीएपी का आयात कम कर रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />भारत में 80 से 90 प्रतिशत डीएपी सऊदी अरब और मोरक्को से आती है। अंतरराष्टÑीय बाजार में वर्तमान में डीएपी की कीमतें बढ़ गई है। डीएपी निर्माता कंपनियां भारत में कम मात्रा में आयात कर रही है। जिस वजह से भारत में कम मात्रा में डीएपी आ रही है। इस कारण से भारत में डीएपी की मारामारी हो रही है। डीएपी की समस्या का समाधान के लिए विकल्प अपनाए जा सकते है। जिसमें पहला विकल्प नैनो डीएपी है। इसमें बीज को उपचारित करके बुवाई कर सकते है। इसका काम डीएपी के समान है। 3 एमएल प्रति किलो बीज को उपचारित करके बुवाई कर सकते है। दूसरा विकल्प तीन बैग एसएसपी और एक बैग यूरिया काम में लिया जा सकता है। जिसमें डीएपी की तुलना में ज्यादा पौषक तत्व मिलते है। साथ ही कैल्शियम और सल्फर भी पौधों को मिलता है। जो कि डीएपी में नहीं मिलता है। तीसरा विकल्प एनपीके गेड्स इसमें 20-20-13, 12-32-16, 16-16-16 ये ग्रेड बाजार में उपलब्ध है। डीएपी में केवल नाइट्रोजन व फास्फोरस मिलता है जबकि एनपीके ग्रेड्स में नाइट्रोजन, फास्फोरस के साथ पोटास तीनों मिलते है। जो मिट्टी के लिए  बहुत फायदेमंद है। इससे फसल का उत्पादन भी बढ़ता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढती है। मिट्टी कम पानी भी नुकसान नहीं होता। तेज हवा और आंधी से बचने की भी क्षमता बढ़ती है। <br /><strong>-डॉ. नरेश कुमार शर्मा, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, कोटा</strong></p>
<p>यह सही है कि इस बार डीएसपी की अधिक किल्लत आ रही है। इसका प्रमुख कारण डिमांड की अपेक्षा डीएपी की आपूर्ति कम होती है। ऐसे में कृषि विभाग को चाहिए कि कृषि विभाग को पूरे क्षेत्र का सर्वे करवा कर डीएपी की अतिरिक्त मंगवाना चाहिए। किसानों का डीएपी पर ज्यादा विश्वास रहता है। काश्तकार नैनो डीएपी लेते नहीं है।<br /><strong>-लोकेश मीणा, प्रोफेसर,कृषि महाविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>किसानों की पीड़ा</strong><br /> रबी की बुवाई के समय डीएपी खाद के लिए इस वर्ष मारामारी आगामी वर्ष ओर अधिक मारामारी बढ़ती जा रही है। किसानों को नैनो डीएपी के बारे में जानकारी का अभाव है। ऐसे में कृषि विभाग को समय-समय पर गांव-ढाणी में नैनो डीएपी का उपयोग करने के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। <br /><strong>-नीरूशंकर शर्मा, किसान निवासी बांसी </strong></p>
<p>डीएपी खाद के लिए ज्यो-ज्यो समय गुजरता जा रहा है। वैसे-ही मांग बढती जा रही है। संबंधित विभाग की कमी है या सरकार से जिलेभर में मांग अनुरूप डीएपी खाद की आपूर्ति ही नही होती है। काश्तकारों का डीएपी पर अधिक भरोसा है। ऐसे में किसानों को जब तक कृषि विभाग नैनो डीएपी के बारे में प्रचार-प्रसार नहीं किया जाएगा तब तक कैसे उपयोग करेंगे।  अभी किसानों को नैनो डीएपी के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। <br /><strong>-मुकुट बिहारी दाधीच, किसान निवासी दुगारी </strong></p>
<p>केन्द्र सरकार की नीतियां ही मुख्यरूप से जिम्मेदार है। इस सरकार द्वारा पिछले सालों में खाद पर सब्सिडी में भारी कटौती करने के कारण विदेशों से खाद के आयात पर शिकंजा कस दिया है। इससे खाद की कमी आ गई है। अत: कालाबाजारी पर सख़्ती से रोक लगाकर सभी गरीब व मध्यम किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से डीएपी उपलब्ध करवाना चाहिए।                    <br /><strong>  -दुलीचंद बोरदा, राज्य उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 15:01:32 +0530</pubDate>
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                <title>रबी सीजन में बढ़ी बिजली की डिमांड</title>
                                    <description><![CDATA[ बिजली कंपनियां मंहगी दरों पर बिजली खरीदकर सप्लाई दे रही हैं, लेकिन आगामी 15 दिनों में बिजली संकट बढ़ सकता है और अलग अलग श्रेणी में बिजली कटौती शुरू की जा सकती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/electricity-demand-increased-in-rabi-season/article-65783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/electricity-4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के आधा दर्जन थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की कमी के चलते बिजली उत्पादन घट गया है। रबी सीजन में किसानों की अधिक बिजली डिमांड, औद्योगिक और घरेलू उपभोक्ताओं के यहां भी लोड बढ़ने से डिमांड-सप्लाई में अंतर बढ़ गया है। फिलहाल बिजली कंपनियां मंहगी दरों पर बिजली खरीदकर सप्लाई दे रही हैं, लेकिन आगामी 15 दिनों में बिजली संकट बढ़ सकता है और अलग अलग श्रेणी में बिजली कटौती शुरू की जा सकती है। </p>
<p><strong>डिमांड करीब 18 हजार मेगावाट तक पहुंची</strong><br />प्रदेश में बिजली किल्लत के बीच डिमांड करीब 18 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है और डिमांड-सप्लाई में 1500 मेगावाट से भी ज्यादा अंतर बना हुआ है। प्रदेश के छह थर्मल पावर प्लांट्स में बिजली उत्पादन ठप पड़ा है। कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की 600 मेगावाट की एक यूनिट, सूरतगढ़ सबक्रिटिकल की 250-250 मेगावाट की एक यूनिट, सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल की 660-660 मेगावाट की दो यूनिट, कोटा थर्मल प्लांट की 210 मेगावाट की एक यूनिट तकनीकी कारणों से बंद पड़ी हैं। विद्युत उत्पादन निगम ने इन यूनिट को जल्दी शुरू करने का दावा किया है। प्रदेश की उत्पादन इकाइयों को औसतन हर रोज 21 रैक(84 हजार मैट्रिक टन) कोयले की जरूरत है। छत्तीसगढ़ से राजस्थान की खदानों से भी पूरी सप्लाई नहीं मिल पा रही और हर रोज करीब 20 से 24 हजार मैट्रिक टन कम कोयला मिल रहा है। <br />अधिकांश पावर प्लांट में महज चार से पांच दिन का कोयला ही बचा है। प्रदेश की थर्मल इकाइयां अभी पूरी तरह कोल इंडिया कंपनी पर निर्भर हैं। राज्य उत्पादन निगम को कोल इंडिया के करीब एक हजार करोड़ रुपए चुकाने हैं। उधारी के कारण कोल इंडिया से सप्लाई भी प्रभावित हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jan 2024 10:05:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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