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                <title>amarinder singh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>amarinder singh RSS Feed</description>
                
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                <title>कांग्रेस के हालात</title>
                                    <description><![CDATA[अश्विनी कुमार से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, अमरिंदर सिंह जैसे बहुत से बड़े नेता कांग्र्रेस से किनारा कर चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/620f8bbf6a645/article-4623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/congress_new.jpg" alt=""></a><br /><p>कांग्रेस छोड़कर जाने वाले बड़े नेताओं में मनमोहन सरकार में कानून मंत्री और अनेक बड़े पदों पर सुशाभित अश्विनी कुमार का नाम भी जुड़ गया है। अश्विनी कुमार से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, अमरिंदर सिंह जैसे बहुत से बड़े नेता कांग्र्रेस से किनारा कर चुके हैं। पंजाब चुनाव से कुछ दिन पहले अश्विनी कुमार का पार्टी छोड़ना इसलिए महत्वपूर्ण और अलग है, क्योंकि वह सोनिया गांधी और परिवार के बेहद निकट थे। जी-23 के नाम से संगठित कांग्र्रेस नेताओं का भी उन्होंने विरोध किया था, लेकिन इतने नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद भी राहुल गांधी या वर्तमान कांग्र्रेस की कार्यशैली में बदलाव आने की संभावना नहीं है। कांग्र्रेस लगातार जनाधार खो रही है और अपने पुराने और अनुभवी नेताओं को भी। अश्विनी कुमार ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए परोक्ष रूप से टिप्पणी की है कि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर के नेता के दौर पर देश के जनमानस को स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में प्रतिभाशाली व वरिष्ठ नेताओं का कोई महत्व नहीं रह गया है। इसका एक तरह से सीधा मतलब यही निकलता है कि केवल परिवार के चाटुकारों का वर्चस्व है। अश्विनी कुमार चार दशक से अधिक समय तक पार्टी से जुड़े रहे हैं और विभिन्न पदों पर रहकर सत्ता का सुख लेते रहे हैं, लेकिन अब जब वैसा पुराना सुख नहीं मिल रहा है, तो फिर सुख प्राप्ति की चाह में पार्टी को छोड़ने को मजबूर हुए हैं। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अपने आगे के कदम के बारे में कोई संकेत नहीं दिया है। बहरहाल, अश्विनी कुमार स्वयं कोई बड़े जनाधार वाले नेता नहीं हैं। पंजाब में वह नगर पालिका तक का चुनाव भी नहीं जीत पाए हैं। पार्टी छोड़कर जाने वाले एक-दो नेताओं को छोड़कर लगभग सभी नेता गांधी परिवार के करीबी बनकर कांग्र्रेस की सत्ता में बार-बार सत्ता का सुख लेते रहे हैं। अब कांग्र्रेस सत्ता में नहीं है तो कांग्र्रेस के नेता अपने नए राजनीतिक सुख की खातिर पार्टी छोड़कर चले गए हैं। दरअसल यह कांग्र्रेस का इतिहास रहा है कि समय-समय पर इसका साथ ऐसे नेता छोड़ते रहे हैं जिन्हें सिर्फ सत्ता की राजनीति से ही मोह होता है। कांग्र्रेस कई बार टूटी है तो फिर सशक्त रूप से खड़ी भी हुई है। लेकिन तत्कालीन केन्द्रीय नेतृत्व भी सशक्त था। लेकिन आज कांग्र्रेस जैसी राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पार्टी की हालत दयनीय है। जनाधार का दायरा काफी घटा है। ऐसे में राष्ट्रीय नेतृत्व को सारे हालात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और पलायन के कारणों पर गहन विचार करना चाहिए। गंभीर आत्म मंथन व पार्टी के काया कल्प की सख्त जरूरत हो चली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Feb 2022 17:51:32 +0530</pubDate>
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                <title>सियासी बदलाव पर चौधरी का ईशारा: पार्टी ने पंजाब में चन्नी को सीएम बनाया तो अमरिंदर सिंह अकेले पड़ गए</title>
                                    <description><![CDATA[राजेंद्र चौधरी ने पंजाब का उदाहरण देते हुए राजनीति ईशारा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%88%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9-%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%9C-%E0%A4%97%E0%A4%8F/article-4090"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/41.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में सियासी बदलाव के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी ने पंजाब का उदाहरण देते हुए राजनीति ईशारा किया। चौधरी ने कहा कि पार्टी ने पंजाब में जब चन्नी को सीएम बनाया तो अमरिंदर सिंह बीजेपी के साथ अकेले खड़े रह गए।</p>
<p><br /> प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए राजेंद्र चौधरी ने कहा कि जहां तक सियासी बदलाव की बात है, यह पार्टी तय करती है। पार्टी आलाकमान ने पंजाब में जब चन्नी को सीएम बनाया तो कैप्टन अमरिंदर सिंह बीजेपी के साथ अकेले खड़े रह गए। सब जान रहे हैं कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार आ रही है। चौधरी ने पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को राष्ट्रीय नेता बताते हुए सियासी बदलाव की बात राजनीतिक इशारों में कहीं। चौधरी के इस बयान के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।</p>
<p><br /> सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी के सवाल पर चौधरी ने कहा कि सरकार में एंटी इनकंबेंसी नहीं है, यह एक सिस्टम है। राजस्थान में जब मंत्रिमंडल पुनर्गठन हुआ तो कई मंत्रियों के विभागों को बदला गया और इन मंत्रियों से किसी ने भी बात नहीं की। इसको एंटी इनकंबेंसी नहीं कह सकते। वसुंधरा राजे जब सीएम थी तो गोविंद मोहन गुप्ता उनके सचिव थे। ब्यूरोक्रेसी में उनका नाम शॉर्ट फॉर्म में चलता था जब उनको वसुंधरा ने हटाया तो वह एक अटैची के साथ अकेले एयरपोर्ट गए। राजनीतिक नियुक्तियों में देरी के सवाल पर चौधरी ने कहा कि नियुक्तियों के संबंध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी प्रियंका गांधी और अजय माकन से बात कर चुके हैं। मुझे लगता है कि राजनीतिक नियुक्तियां जल्द हो जाएंगी। पायलट को कोई बड़ा पद नहीं मिलने के सवाल पर कहा कि पायलट को पार्टी राष्ट्रीय नेता और स्टार प्रचारक के रूप में सभी जगह भेजती हैं। वह केवल एक टोंक एमएलए की भूमिका में नहीं देखे जा सकते। सब जानते हैं जब राजस्थान में कांग्रेस 21 सीटों पर आ गई थी, तब सोनिया गांधी ने पायलट को जिम्मेदारी सौंपकर राजस्थान भेजा था। मैं भी उनकी टीम में था। उन्होंने न्याय यात्रा निकालकर और राजस्थान भर में दौरे करके पार्टी को फिर से सत्ता में लाने के लिए मेहनत की। किसानों के लोन माफ के सवाल पर चौधरी बोले कि राष्ट्रीय कृत बैंकों से लोन माफी के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 20 Jan 2022 14:27:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>अजय माकन का रिट्वीट: अमरिंदर हो या गहलोत, मुख्यमंत्री बनते ही समझ लेते हैं कि उनकी वजह से ही जीती पार्टी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस प्रभारी अजय माकन के एक रिट्वीट किया कि किसी भी प्रदेश में कोई क्षत्रप स्वयं के बल पर नहीं जीतता है। गांधी नेहरू परिवार को लेकर ही गरीब, कमजोर वर्ग और आम आदमी का वोट मिलता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%9F--%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4--%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%9D-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF-%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%B9-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80/article-1182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/ajay_maken.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी अजय माकन के एक रिट्वीट से कांग्रेस में हलचल मच गई है, जिसमें लिखा है कि किसी भी प्रदेश में कोई क्षत्रप स्वयं के बल पर नहीं जीतता है। गांधी नेहरू परिवार को लेकर ही गरीब, कमजोर वर्ग और आम आदमी का वोट मिलता है। मगर चाहे वह अमरिंदर सिंह हों या गहलोत या पहले शीला या कोई और। मुख्यमंत्री बनते ही यह समझ लेते हैं कि उनकी वजह से ही पार्टी जीती। रिट्वीट के दूसरे भाग में लिखा कि 20 साल से ज्यादा अध्यक्ष रहीं सोनिया ने कभी अपना महत्व नहीं जताया। नतीजा यह हुआ कि वे वोट लाती थीं और कांग्रेसी अपना चमत्कार समझकर गैर जवाबदेही से काम करते थे। हार जाते थे तो दोष राहुल पर, जीत का सेहरा खुद के माथे। सिद्धू को बनाकर नेतृत्व ने सही किया। ताकत बताना जरूरी था।<br /> <br /> बता दें कि पंजाब में पार्टी में अंदरुनी खींचतान के कारण नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। प्रदेश में चल रही कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान के सुलह के लिए माकन के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने के बाद यह माना जा रहा था कि कोई समाधान निकल आएगा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इस बीच माकन का यह रिट्वीट सामने आया हैं। नवजोत सिद्धू को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की कथित नाराजगी के बावजूद पंजाब का कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बना दिया गया। प्रदेश में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमा अपनी मांगों के पूरा होने का इंतजार कर रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 19 Jul 2021 17:45:33 +0530</pubDate>
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