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                <title>Folk art - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Folk art RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अल्बर्ट हॉल पर भव्य सांस्कृतिक संध्या: मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में मनाया गया राजस्थान दिवस</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में जयपुर के अल्बर्ट हॉल पर राजस्थान दिवस का भव्य आयोजन हुआ। पद्मश्री अनवर खां और तगाराम भील की सुरीली प्रस्तुतियों के साथ 100 से अधिक लोक कलाकारों ने समां बांध दिया। दो घंटे तक चली इस सांस्कृतिक संध्या का समापन शानदार आतिशबाजी और जोश के साथ हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-day-celebrated-in-grand-cultural-evening-at-albert-hall/article-147113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/albert-hall.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में गुरुवार को राजस्थान दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय सांस्कृतिक संध्या का अल्बर्ट हॉल पर भव्य आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री की पहल पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाए गए राजस्थान दिवस में पद्मश्री अनवर खां मांगणियार एवं दल और पद्मश्री तगाराम भील एवं दल की ओर से सुरीली प्रस्तुतियां दी गई। वहीं 100 से अधिक लोक कलाकारों एवं कथक नृत्यांगनाओं ने विभिन्न आकर्षक प्रस्तुतियों दी।  </p>
<p><strong>भव्य आतिशबाजी ने भरा जोश</strong></p>
<p>अल्बर्ट हॉल पर 2 घंटे से अधिक समय तक आयोजित हुई राज्य स्तरीय भव्य सांस्कृतिक संध्या का समापन रंग-बिरंगी आतिशबाजी से हुआ। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी एवं डॉ. प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, गणमान्य सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 08:51:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने पर्यटन, कला-साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग की समीक्षा बैठक ली</title>
                                    <description><![CDATA[उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बजट घोषणाओं की समीक्षा करते हुए 'राजस्थान दिवस' (14-19 मार्च) को भव्य रूप से मनाने के निर्देश दिए। जयपुर स्थापना के 300 वर्ष हेतु विशेष कार्ययोजना, संभाग स्तरीय नृत्य उत्सव और पर्यटकों के लिए डे-नाइट लग्जरी बस सेवा शुरू होगी। शेखावाटी हवेलियों के संरक्षण और महाराणा प्रताप सर्किट को भी गति दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/deputy-chief-minister-diya-kumari-took-a-review-meeting-of/article-146142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/diya-kumari.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उपमुख्यमंत्री तथा पर्यटन, कला-साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व मंत्री दिया कुमारी की अध्यक्षता में बुधवार को पर्यटन भवन में राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के चैयरमैन ओंकार सिंह लाखावत, अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन,कला-साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व प्रवीण गुप्ता की उपस्थिति में पर्यटन व कला, साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग से सम्बंधित विभिन्न विषयों, योजनाओं तथा बजट घोषणाओँ के क्रियान्वयन  के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। <br /> <br />उपमुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में  वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-2026 की लंबित बजट घोषणाओं के त्वरित क्रियान्वयन तथा वर्ष 2026-2027 के लिए की गई बजट घोषणाओं की समय सीमा बनाकर संबंधित कार्यकारी एजेंसीज के साथ समन्वय कर डीपीआर/ लागत प्रस्ताव तैयार करवा कर अग्रिम कार्यवाही कराने निर्देश प्रदान किए। </p>
<p>उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 14 से 19 मार्च तक राजस्थान दिवस सप्ताह को पूर्ण भव्यता के साथ प्रदेश भर में आयोजित किया जावे। कार्यक्रम में क्षेत्रीय लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जाए तथा राज्य की कला एवं संस्कृति को केंद्र में रख कर राजस्थान दिनस समारोह को सफल  बनाया जाए। उन्होंने इसके साथ ही यह भी निर्देश दिए की 18 नवंबर 2027 में जयपुर के स्थापना के तीन सौ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इसके लिए एक समग्र कार्य योजना बनाकर इसे एक भव्य महोत्सव के रूप में मनाए जाने के लिए आवश्यक तैयारियां की जाएं।<br /> <br />दिया कुमारी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट घोषणाओं की अनुपालना में राज्य के प्रत्येक संभाग स्तर पर वहां की प्रसिद्ध नृत्य शैलियों पर आधारित नृत्य उत्सव आयोजित करने के निर्देश दिए। जिससे कि उस क्षेत्र के लोक कलाकारों को स्थानीय स्तर पर मंच प्राप्त हो सके। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के साथ वहां आने वाले पर्यटकों को क्षेत्रीय लोक संस्कृति से परिचित होने का अवसर भी मिल सके।</p>
<p>उपमुख्यमंत्री ने जयपुर में आने वाले पर्यटकों को दिन व रात में भ्रमण कराने हेतु पर्यटन विभाग- निजी सहभागिता से डे व नाइट बस टूअर ऑपरेट करने के निर्देश दिए।  उन्होंने कहा कि अच्छी लग्जरी बसें  जोकि पर्यटन स्मारकों के भव्य चित्रों से सुसज्जित हो ऐसी बसों का संचालन किए जाने की कार्य योजना बनाकर प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। </p>
<p>उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने पर्यटक सहायता बल की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए की गाइड्स को स्थानीय कला, संस्कृति, इतिहास की अधिकृत  जानकारी देने हेतु रिफ्रेशर कोर्स कराए जाए। इन्हें संस्कृति एवं इतिहास के विशेषज्ञों से व्यावसायिक प्रशिक्षण दिलाया जाए ताकि पर्यटकों को भ्रमण के दौरान ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत की वास्तविक जानकारी मिल सके।  उन्होंने पर्यटन विभाग की ओर से तैयार किए जाने वाले एप व वैबपोर्टल पर शीघ्रता से कार्य करने क निर्देश दिए साथ ही उक्त एप व पोर्टल पर पर्यटक सहायता बल की आवश्यक जानकारियां भी उल्लेखित करने के निर्देश दिए।     </p>
<p>उन्होंने महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट, पुष्कर प्रोजेक्ट , ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट आदि महत्वपूर्ण घोषणाओं की त्वरित क्रियान्विति संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। </p>
<p>दिया कुमारी ने कला, साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग की समीक्षा करते हुए शेखावाटी की हवेलियों की संरक्षण कार्य की प्रगति की जानकारी ली और उन्होंने निर्देश दिए की इस कार्य को और गति प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि इस बार वित्तीय वर्ष-2026-27 में की गई बजट घोषणा की क्रियान्विति की संबंध में शेखावाटी  हवेलियों के क्लस्टर चिन्हित कर कराए जाने वाले कार्यों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 17:56:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने की केरल के केयरगिवर्स के थिरुवथिरा की शानदार प्रस्तुति की तारीफ, संस्कृति को बचाने के लिए की प्रवासियों की प्रशंसा </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के केयरगिवर्स समुदाय द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक थिरुवथिरा नृत्य की सराहना की। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को देश की समृद्ध कलात्मक विरासत का वैश्विक राजदूत बताया। 'एक्स' पर साझा संदेश में पीएम ने कहा कि यह समर्पण भारतीय संस्कृति को सात समंदर पार जीवित रखने और सामुदायिक बंधन को मजबूत करने का बेहतरीन उदाहरण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-praised-the-brilliant-presentation-of-thiruvathira-by-kerala/article-144712"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/pm-modi-israel-visit.png" alt=""></a><br /><p>यरुशलम। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को केरल के केयरगिवर्स समुदाय के सदस्यों की थिरुवथिरा की शानदार प्रस्तुति की तारीफ की और विदेशों में देश की कलात्मक विरासत को बचाए रखने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर प्रशंसा की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, केरल के केयरगिवर्स समुदाय के सदस्यों द्वारा दी गयी थिरुवथिरा की एक शानदार प्रस्तुति देखी। इस प्रस्तुति में केरल की सांस्कृतिक परंपराओं की महानता और इसके प्रति जुनून रखने वालों का समर्पण दिखा। यह देखकर गर्वांवित हूं कि हमारे प्रवासी जहाँ भी जाते हैं, भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को बचाए रखते हैं। </p>
<p>गौैरतलब है कि, थिरुवथिरा केरल का एक पारंपरिक, महिलाओं द्वारा किया जाने वाला समूह नृत्य है, जिसे मुख्य रूप से ओणम और मलयालम महीने धनु (दिसंबर-जनवरी) में किया जाता है। इसे कैकोट्टिकली के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें पारंपरिक कसवू साड़ी पहनी महिलाएं एक दीपक के चारों ओर ताली बजाते हुए शिव-पार्वती को समर्पित गीत गाती हैं। केरल के मंदिर और त्योहारों की परंपराओं से बहुत करीब से जुड़ा हुआ है। इसे अक्सर नारीत्व, भक्ति और सामुदायिक बंधन के उत्सव के रूप में देखा जाता है। </p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणियाँ विदेशों में बसे भारतीय समुदायों के प्रति सरकार की निरंतर पहुँच और सांस्कृतिक कूटनीति पर उसके जोर को रेखांकित करती हैं। वर्षों से मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने में प्रवासी भारतीयों के योगदान को अक्सर सराहा है। केयरगिवर्स समुदाय के सदस्यों (जिनमें से कई विदेशों में हेल्थकेयर और सहायक सेवाओं में काम करते हैं) ने अक्सर अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपने मेजबान समाज में योगदान देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये हैं।</p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ऐसी प्रस्तुति न केवल परंपराओं को जिंदा रखती हैं, बल्कि दुनिया को भारत के अलग-अलग सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से भी परिचित कराती हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासियों के नेतृत्व वाली सांस्कृतिक पहल भारत और दूसरे देशों के बीच एक जरूरी पुल का काम करती हैं। प्रधानमंत्री का यह वैश्विक मंच पर क्षेत्रीय कला को बढ़ावा देने और प्रवासी भारतीयों की युवा पीढिय़ों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करने की कोशिशों के बीच आया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 18:43:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोक कला के नाम पर अश्लीलता परोसना शर्मनाक</title>
                                    <description><![CDATA[आधुनिकता की चकाचौंध में हमारी संस्कृति व विरासत से जुड़े गीत न जाने कहां गुम से हो गए हैं और प्रचलन बढ़ा उन मद भरे गीतों का, जिनमें से संस्कृति व सौन्दर्य गायब होकर उपहासित हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/it-is-shameful-to-serve-obscenity-in-the-name-of/article-67241"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/wetern.jpg" alt=""></a><br /><p>वर्तमान परिदृश्य में लोककला के नाम पर अश्लीलता परोसी जा रही है, जो कि चिंतनीय व शर्मनाक है। यह न केवल इन परंपरागत शैलियों को धूमिल कर रहा है बल्कि विदेशी वेस्टर्न के चक्कर में हम अपनी पहचान से दूर होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया या यूट्यूब, फिल्म हो या टीवी के कार्यक्रम सभी जगह फूहड़ नाच का नंगा प्रदर्शन किए जाने की परंपरा ने जोर पकड़ लिया है। यूट्यूब और सोशल मीडिया पर रिल्स, गानों, फिल्मों, कार्यक्रमों सब में अश्लीलता इस कदर घर करती जा रही है कि आप अपने परिवार के साथ देख ही नहीं सकते। और रही सही कसर अब नंगे होकर रील बनाने वालों ने पूरी कर दी है। अधिकतर गाने, एलबम और सिनेमा अश्लीलता से भरपूर है। आज के लोक गीत सुनने की ही बात कर लें तो उन गानों के हर शब्द में अश्लीलता कूट-कूट कर भरा होता हैै। जब हम- आप परिवार के साथ मिलकर गाना नहीं सुन सकते तो यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन गानों के सीनों का क्या हाल होगा। ऊपर से अश्लीलता का कम्पीटिशन इस कदर होता जा रहा है कि एक से एक हिट एलबम, गाने बनते हैं। अश्लीलता को दिखाने का होड़ इस कदर है कि मत पूछिए। इस बारे में कलाकारों, गायकों से पूछ लिया जाता है तो छूटते ही कहते हैं कि यह तो पब्लिक डिमांड है। जनता यही सब देखना पसंद करती है। ऐसा न परोसें तो गाना हिट ही नहीं होगा।<br /><br />अब ऐसे कलाकारों को कौन समझाए कि अश्लीलता की शुरुआत तो फिल्मों व गानों के जरिए ही हमारे समाज में फैली। जिसे रोकने का कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। ऐसे मजनू कलाकारों के चक्कर में हमारा पूरा समाज दूषित होता जा रहा है। मान-मर्यादा सब छिन्न-भिन्न होता जा रहा है। यदि आज भी हम नहीं सचेते तो न जाने हमारे समाज की दशा और दिशा क्या होगी। ऐसा नहीं है कि ऐसे नृत्यों का असर नहीं हो रहा है। पिछले 5-10 सालों में जिस प्रकार का नृत्य व गाने प्रस्तुत किए हैं, उसने तो हमारे समाज के ताना-बाना को ही हिलाकर रख दिया है। ये मन को शांत करने के बजाय अशांत ही कर देता है।बाजार की लालची और मुनाफाखोर प्रवृत्ति ने एक लोककला की हत्या कर दी और अब उसके नाम पर लोगों को अश्लीलता परोस रही है। इन्टरनेट ने बेशक लोगों तक ज्यादा सूचनाएं पहुंचाई है लेकिन इसने ग्रामीण सौंदर्य बोध और मान-मर्यादा को खंडित कर दिया। वह हर चीज को अधिक बिकाऊ बनाने के लिए अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी। कुल मिलाकर यह आसानी से देखा जा सकता है कि इन्टरनेट के विस्तार और मोनेटाइजेशन ने ऐसी सामग्री को बढ़ावा दिया है जो बहुत ज्यादा देखी जा रही है लेकिन मानवीय संवेदनाओं पर उसने घातक प्रहार किया है। संगीत की शालीनता पर फूहड़पन भारी वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं आशिक मिजाज गीतकार जिससे देशभर में लम्पटीकरण भरे गीतों के प्रचलन से संस्कृति को गहरी चोट पहुंची है।<br /><br />आधुनिकता की चकाचौंध में हमारी संस्कृति व विरासत से जुड़े गीत न जाने कहां गुम से हो गए हैं और प्रचलन बढ़ा उन मद भरे गीतों का, जिनमें से संस्कृति व सौन्दर्य गायब होकर उपहासित हो गई है। लम्पटीकरण के शब्द गीतों में भर आए हैं। वर्तमान में तथाकथित रचनाकारों द्वारा रचित गीतकारों, मजनू गायकों द्वारा गाये हुए गीतों में पाश्चात्य संस्कृति की तर्ज पर नंगापन आ गया है।<br /><br />इन अलफाजों में गीत गाने वाले गायकों को इतनी भी शर्म नहीं है कि जिस अंदाज में वे अपने शब्दों को व्यक्त कर रहे हैं व अंदाज जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काटने जैसा है। यही अंदाज संस्कृति पर गहरी चोट मार रहा है। लोक गायकों के नाम पर अश्लील लिंक्स से सोशल मीडिया बाजार भरा पड़ा है। कई चैनलों पर भी इस तरह के गीतों का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ा है। गीत बिकवाने की होड़, व्यूज और लाइक्स के जरिए पैसा कमाने की लालसा, इन सबने पहले ही संस्कृति व विरासत धूमिल कर डाली है क्योंकि गीत संगीत ही एक ऐसा माध्यम होता है जो समाज को संदेशों का पैगाम देती है। आज ये पैगाम अपनी दिशा बदल चुके हैं। विभिन्न बस स्टेशनों, चलने वाले विभिन्न जीप-कार, बसों में जो गीत सुनने को मिलते हैं उनमें छिछोरापन व लम्पटीकरण का अंदाज साफ  झलकता है। इन गीतों का श्रवण विशेषकर युवा वर्ग आनंदपूर्वक करता है। कई अवसरों पर शादी-व्याह आदि उत्सवों में कुछ बुजुर्ग जन भी इस तरह के गीतों पर जमकर ठुमके लगाते हैं। सांस्कृतिक परम्परा पर चिंतन करने वाले लोग इसे लोक संगीत पर गहरी ठेस मानते हैं। आशिकी अंदाज के साथ पाश्चात्य संस्कृति की चपेट में आकर गीत गाने वाले गायक-गायिकाएं, नायक-नायिकाएं धीरे-धीरे सांस्कृतिक पहरूओं की नजर का कांटा बनते जा रहे हैं। ऐसा मालूम पड़ता है यदि इन्हीं गीतों का दौर अश्लीलता की पराकाष्ठा लांगता रहा तो इस तरह के लोगों का सामाजिक बहिष्कार जरूरी हो सकता है। आज के गानों में बंदूक, दारू, लड़कीबाजी व अश्लीलता का आयाम देखने को मिल रहा है जो कि हमारी संस्कृति के लिए और गानों के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। <br /><br />-प्रियंका सौरभ <br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jan 2024 13:09:22 +0530</pubDate>
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