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                <title>mukundara tiger reserve - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>mukundara tiger reserve RSS Feed</description>
                
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                <title> मुकुंदरा के बोराबास में इसी माह शुरू होगी नई जंगल सफारी, पर्यटकों को ऐतिहासिक धरोहरों व वन्यजीवों का मिलेगा रोमांच</title>
                                    <description><![CDATA[एंट्री गेट, साइन बोर्ड और सफारी ट्रैक तैयार, सुरक्षा रेलिंग व वॉच टावर का काम अंतिम चरण में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-new-jungle-safari-will-launch-this-month-at-borabas-in-mukundara--offering-tourists-the-thrill-of-exploring-historical-heritage-sites-and-wildlife/article-161671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरवासियों को अब जल्द ही मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में एक ओर जंगल सफारी की सौगात मिलने जा रही है। एमएचटीआर प्रशासन अगस्त माह से बोराबांस रेंज में सफारी शुरू करने की तैयारी में जुटा है। अब पर्यटकों को शहर से 48 किमी दूर दरा सेंचुरी के लिए लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। यहां दौलतगंज स्थित चौकी में पर्यटकों के लिए 10 लाख की लागत से एंट्री गेट व 16 मीटर लंबा सफारी रुट बनकर तैयार कर लिया गया है। हालांकि, कुछेक काम बाकी है, जिसे इसी माह में पूरे करवाकर सफारी शुरू किया जाना है। सफारी शुरू होने पर पर्यटकों को कोटा की ऐतिहासिक विरासत, चंबल घाटियों और वन्यजीवों के अद्भुत नजारों के साथ वाइल्ड लाइफ ट्यूरिज्म को भी नई पहचान मिलेगी।</p>
<p><strong>दौलतगंज से मिलेगी एंट्री और एग्जिट</strong><br />मुकुंदरा प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, पर्यटकों को दौलतगंज स्थित डायवर्जन चैनल के पास चौकी से ही पर्यटकों को एंट्री मिलेगी। यहां से चंबल नदी के किनारे होते हुए कोटिया भील महल, अकेलगढ़ का पुराना किला, चंबल व्यू प्वाइंट, गरड़िया व्यू प्वाइंट, न्यू गरड़िया प्वाइंट होते हुए वापस दौलतगंज से ही एग्जिट दी जाएगी। यह रुट्स गत वर्ष अक्टूबर माह में ही तय किया गया था।</p>
<p><strong>10 लाख से बनेगा वॉच टावर, दिखेगा विहंग्म नजारा</strong><br />बोराबास के घने जंगलों के बीच सफारी रुट्स पर मुकुंदरा प्रशासन 10 लाख की लागत से तीन वॉच टावर बनाएगा। वन अधिकारियों ने बताया कि सफारी रूट पर कुछ जगहों पर सेल्फी प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। जिसका कार्य किया जा रहा है। पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए चंबल किनारे चट्टानों पर सुरक्षा रेलिंग लगाई जाएगी। यह काम भी अगले सप्ताह तक पूरा हो जाएगा।वहीं, जगह-जगह साइन बोर्ड लगा दिए गए हैं।</p>
<p><strong>सफारी के रूट में यह मिलेंगे व्यू प्वाइंट</strong><br />16 किमी लंबे सफारी रूट में पर्यटकों को कोट्या भील फोर्ट, न्यू चंबल प्वाइंट, न्यू गरड़िया प्वाइंट, भंवरकुंज, अकेलगढ़ फोर्ट, चंबल किनारे दो मंजिला वॉच टावर, सेल्फी प्वाइंट, प्रकृति का विहंग्म नजारा, वन्यजीवों की साइटिंग सहित प्रकृति के अद्भुद नजारें देखने को मिलेंगे।</p>
<p><strong>बोराबास में पैंथर व भालू की संख्या अधिक</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बोराबांस के जंगल में टाइगर को छोड़कर सभी वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। यहां लैपर्ड व भालूओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी है। इसके अलावा भेडिए, हायना, लोमड़ी, सियार, हिरण, नीलगाय, जंगली बिल्ली सहित कई एनिमल शामिल हैं।</p>
<p>मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की बोराबास रेंज में इसी माह पर्यटकों के लिए जंगल सफारी शुरू कर दी जाएगी। अभी तक यहां चौकी, सफारी एंट्री गेट, सफारी रूट्स व साइन बोर्ड सहित कई सौंदर्यीकरण कार्य पूरे हो गए हैं। हालांकि, कुछेक कार्य ही बाकी हैं, जो जल्द ही पूरे हो जाएंगे।<br /><strong>-मूथु एस, उप वन संरक्षक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 14:26:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बाघिन एमटी-8 का सफल रेस्क्यू : साठ घंटे बाद कनकटी ट्रैंकुलाइज, पकड़ कर एनक्लोजर में वापस छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एनक्लोजर से बाहर निकली बाघिन कनकटी को तीसरे दिन ट्रैंकुलाइज कर लिया गया। जिसे वापस दरा के 82 वर्ग किमी के एनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया गया है। शिफ्टिंग के बाद दहशत में रहे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।  मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा बाघिन एमटी-8 को दो दिनों तक लगातार निगरानी एवं रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गुरुवार दोपहर को सफलतापूर्वक ट्रैक्यूलाइज करने में सफलता मिली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/successful-rescue-of-tigress-mt-8-in-mukundara-tiger-reserve-after/article-135681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एनक्लोजर से बाहर निकली बाघिन कनकटी को तीसरे दिन ट्रैंकुलाइज कर लिया गया। जिसे वापस दरा के 82 वर्ग किमी के एनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया गया है। शिफ्टिंग के बाद दहशत में रहे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।  मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा बाघिन एमटी-8 को दो दिनों तक लगातार निगरानी एवं रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गुरुवार दोपहर को सफलतापूर्वक ट्रैक्यूलाइज करने में सफलता मिली। इसके बाद उसे दरा रेंज के एनक्लोजर में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया। बाघिन कनकटी पूर्व में रणथम्भौर में एक बालक व रेंजर को मौत के घाट उतार चुकी है, जिससे मुकुंदरा से सटे गांवों के लोग भी वाकिफ है।</p>
<p>ऐसे में मंगलवार की सुबह टइग्रेस एमटी-8 एनक्लोजर से बाहर निकलकर गांवों के बीच पहुंच गई। इससे ग्रामीण कनकटी के खौफ से भयभीत हो गए। एनक्लोजर से निकलने के बाद बाघिन पहले अमझार गांव की दिशा में गई। इसके बाद वह झामरा वैली क्षेत्र की ओर मूव कर गई। इस दौरान इसके मूवमेंट की निगरानी रेडियो टेलीमेट्री से निरंतर की जाती रही थी। फील्ड टीमें 24 घंटे अलर्ट पर रहीं क्योंकि, बाघिन का मूवमेंट कई बार रेलवे लाइन तथा कोटा-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-52 ) के नजदीक रहा, जो बाघिन और आमजन दोनों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता था।</p>
<p><strong>मौका मिलते ही किया ट्रैंकुलाइज, स्वास्थ्य जांचा</strong><br />मुकुंदरा के सीसीएफ सुगनाराम जाट ने बताया कि गुरुवार की दोपहर टीम को बाघिन लक्ष्मीपुरा की ओर अनुकूल स्थान पर दिखाई दी। जहां से उसे सुरक्षित रूप से ट्रैंक्वलाइज किया जा सकता था। इस पर विशेष ट्रैंक्विलाइजेशन टीम ने बिना समय गंवाए बाघिन को सफलतापूर्वक ट्रैंक्वलाइज किया। इसके बाद मौके पर ही उसका प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया फिर सुरक्षित रूप से 82 वर्ग किलोमीटर के एनक्लोजर में छोड़ दिया गया, जहां अब उसकी निरंतर निगरानी की जा रही है। बाघिन एमटी-8 सुरक्षित, स्थिर और एनक्लोजर में निगरानी में है। एनक्लोजर की सुरक्षा एवं फेंसिंग की जांच -मरम्मत को और सुदृढ़ की जा रही है। ट्रैकिंग टीमें आने वाले दिनों में भी सघन निगरानी जारी रखेंगी।</p>
<p><strong> ऐरोहेड टाइग्रेस की संतान है कनकटी</strong><br />बाघिन एमटी-8 रणथंभौर टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध बाघिन ऐरोहेड टी-84 की संतान है। रणथंभौर में मानव  वन्यजीव संघर्ष की घटना के बाद इसे मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया था। यहां इसे 82 वर्ग किमी के संरक्षित एनक्लोजर (दरा रेंज) में रखा गया था।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:01:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टारगेट से ज्यादा किए शिकार फिर भी पिंजरे में कैद बाघिन, रिवाइल्डिंग के नाम पर एक साल से सॉफ्ट एनक्लोजर में टाइग्रेस एमटी-7</title>
                                    <description><![CDATA[अब तक बाघिन 60 से ज्यादा कर चुकी शिकार, फिर भी हार्ड रिलीज नहीं कर रहे अधिकारी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-exceeding-the-target--the-tigress-remains-caged--tigress-mt-7-remains-in-a-soft-enclosure-for-a-year-in-the-name-of-rewilding/article-128894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रिवाल्डिंग के लिए मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की दरा रेंज में शिफ्ट की गई बाघिन एक साल बाद भी पिंजरे में कैद है। जबकि, वन अधिकारियों ने बाघिन द्वारा 50 शिकार सफलतापूर्वक कर लेने पर खुले जंगल में हार्ड रिलीज किया जाना निर्धारित किया था। लेकिन, टाइग्रेस एमटी-7 अब तक टारगेट से ज्यादा शिकार कर चुकी है। इसके बाद भी उसे 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट  एनक्लोजर में ही रखा जा रहा है। वर्तमान में उसकी उम्र करीब 3 वर्ष हो चुकी है। इस उम्र के अन्य टाइगर अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल का चप्पा-चप्पा छान लेते हैं लेकिन एमटी-7 पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर से ही आगे नहीं बढ़ पा रही। इधर, वन्यजीव प्रेमियों का तर्क है, हार्ड रिलीज में अनावश्यक देरी से बाघिन के विकास पर विपरीत असर पड़ सकता है। </p>
<p><strong>60 से ज्यादा शिकार, फिर भी आजादी नहीं</strong><br />मुकुंदरा से मिली जानकारी के अनुसार, बाघिन एमटी-7 अब तक 66 से 70 के बीच सफलतापूर्वक शिकार कर चुकी है। जबकि, टारगेट 50 का ही था। इससे स्पष्ट होता है कि बाघिन शिकार करना सीख चुकी है। ऐसे में उसे खुले जंगल में छोड़ दिया जाना चाहिए। ताकि, वह जंगल की विपरीत परिस्थितियों में खुद को ढाल सके। </p>
<p><strong>चीतल से नीलगाय तक का किया शिकार</strong><br />टाइग्रेस एमटी-7 अब तक चीतल ही नहीं बल्कि बड़े एनिमल नील गाय का भी शिकार कर चुकी है। जबकि, नील गाय का शिकार आसान नहीं होता है। बाघिन के लगातार शिकार किए जाने से 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में प्रे-बेस की भी कमी होती जा रही है। ऐसे में रिवाइल्डिंग के उद्देश्यों की सफलता के लिए उसे शीघ्र ही खुले जंगल में छोड़ा जाना आवश्यक है। </p>
<p><strong>कैसे सीखेगी शिकार ढूंढना व टेरीटरी बनाना </strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि कुमार बताते हैं, पिछले एक साल से बाघिन दरा में 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में रह रही है। जहां रिवाइल्डिंग के नाम पर सिर्फ शिकार करना ही सीखा है। लेकिन, शिकार ढूंढना नहीं सीख पा रही है। क्योंकि, सॉफ्ट एनक्लोजर में पहले से ही प्रे-बेस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जबकि, खुले जंगल में ऐसा नहीं होता है। वहां हर दिन चूनौतियों के बीच उन्हें भोजन ढूंढना पड़ता है, जो पिंजरे में कैद होने के कारण इस गुण का विकास नहीं हो पा रहा। वहीं, अनावश्यक देरी से टेरीटरी बनाने में भी उसे परेशानी का सामना करना पड़ेगा।  </p>
<p><strong>तीन साल की उम्र में भी खुला जंगल नसीब नहीं</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताते हैं, बाघिन एमटी-7 को पिछले साल दिसम्बर माह में शिफ्ट किया गया था। वर्तमान में उसकी उम्र लगभग 3 साल हो चुकी है। इसके बावजूद वह सॉफ्ट एनक्लोजर से बाहर नहीं निकल सकी। जबकि, इस उम्र के अन्य बाघ-बाघिन खुद को एक्सपोलर करते हैं और मां से अलग होकर अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल को सर्च करते हैं। इस बीच कई परिस्थितियों से गुजरने के दौरान बहुत कुछ सीखते हैं, जो जंगल में उनके सरवाइवल रेट को बढ़ाने में मददगार होते हैं। बाघिन को जल्द से जल्द हार्ड रिलीज किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>डब्ल्यूआईआई की टीम पर अटकी शिफ्टिंग</strong><br />बाघिन एमटी-7 की शिफ्टिंग पर फैसला डब्ल्यूआईआई  की टीम द्वारा किया जाना है। लेकिन, टीम का इंतजार 6 माह से हो रहा है, जो अब तक खत्म नहीं हुआ। वन अधिकारियों द्वारा  पूर्व में बारिश से पहले टीम का मुकुंदरा आना बताया जा रहा था, फिर बारिश में जंगल के रास्ते खराब होने का हवाला देते हुए विजिट टाल दी गई। अब अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में आने की बात कही जा रही है। एनटीसीए की टीम  कब आएगी, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिलक पार्क से गत वर्ष दिसम्बर माह में  रिवाइल्डिंग के लिए मुकुंदरा में शिफ्ट की गई बाघिन एमटी-7 को खुले जंगल में छोड़े जाने का फैसला इसी माह में होगा। क्योंकि, इसी अक्टूबर माह डब्ल्यूआईआई की टीम मुकुंदरा आने की संभावना है। टीम यहां बाघिन के व्यवहार, शिकार सहित फिजिकल वेरिफिकेशन कर हार्ड रिलीज को लेकर रिपोर्ट देगी। जिसके आधार पर खुले जंगल में छोड़े जाने को लेकर निर्णय होगा। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:06:18 +0530</pubDate>
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                <title>इन्सेंटिव बेस्ड हो काम तो जंगल बने घर, हर वनकर्मी बने रक्षक</title>
                                    <description><![CDATA[अच्छा काम करने पर प्रोत्साहन राशि के रूप में सम्मान मिलने से वनकर्मियों का जोश दोगुना बढ़ेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-work-is-incentive-based-then-forest-becomes-home--every-forest-worker-becomes-protector/article-67579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/insentive-based-ho-kaam-to-jungle-bne-ghr,-hr-vankrmi-bne-rakshak...kota-news-20-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य में मौजूदा वन क्षेत्र 32 हजार 864.50 वर्ग किमी है, जो प्रदेश के कुल भू-भाग का 9.60 प्रतिशत है। इसमें टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क, सेंचुरी तथा वन अभयारण्य शामिल हैं। वन सम्पदा व वन्यजीवों की रक्षा के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की फौज तैनात है, जो साधन-संसाधनों से लैस होने के  बावजूद माफियाओं से जंगल नहीं बचा पा रहे। अवैध खनन, अतिक्रमण, कटान, शिकार सहित वन अपराध में बढ़ोतरी हो रही है। नवज्योति ने इसके कारणों को तलाशा तो कर्मचारियों का गिरता मनोबल सामने आया। विशेषज्ञों का मत है, यदि वन कर्मचारियों का काम इंसेंटिव बेस्ड किया जाए तो उनके आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ मनोबल बढ़ेगा। जिसके सकारात्मक दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। इसमें बड़ा परिवर्तन मैं की भावना हम में बदल सकेगी। जिससे अवैध गतिविधियों का ग्राफ तेजी से घटेगा। </p>
<p><strong>मनोबल बढ़ेगा, पारिस्थितिकी तंत्र सुधरेगा</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी कहते हैं, अच्छा काम करने पर प्रोत्साहन राशि के रूप में सम्मान मिलने से वनकर्मियों का जोश दोगुना बढ़ेगा। हर महीने कार्य मूल्यांकन हो और रैंकिंग जारी कर लक्ष्य की प्राप्ती करने वाले कर्मचारियों को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित किया जाए। इससे उनमें प्रतिस्पर्दा की भावना बढ़ेगी और अपनी बीट में बेहतर से बेहतर कार्य करने को प्रेरित होंगे। वहीं, पारिस्तिकी तंत्र मजबूत होने से जंगल में खुशहाली आएगी और वन्यजीवों की संख्या में इजाफा होगा। </p>
<p><strong>ट्यूरिज्म बढ़ेगा, रोजगार सेक्टर विकसित होगा</strong><br />बायोलॉजिस्ट साहिल खान का कहना है, अच्छा काम करने पर प्रशंसा या प्रोत्साहन मिलने से पॉजिटिव एनर्जी बूस्ट होती है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारणय और वनमंडल के कर्मचारियों में रिजल्ट आॅरियंटेड काम करेंगे तो  निश्चित रूप से जंगल खुशहाल बनेगा।  ईको ट्यूरिज्म बढ़ेगा। विदेशों में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में रिजल्ट आरियन्टेड इंसेन्टिव दिए जाते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे समझें इन्सेंटिव को </strong><br />उदाहरणार्थ  वन्य जीव रक्षण में जो लोग लगे हैं वह यदि  प्रतिवर्ष वन्य जानवरों की संख्या जितनी है उतनी ही रखने में कामयाब रहते हैं तो उन्हें इन्सेंन्टिव दिया जाना चाहिए। यदि वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि होती है तो उन्हें इंसेन्टिव की मात्रा और बढ़ाकर देना चाहिए। अर्थात कार्मिकों को रिजल्ट बेस इन्सेंन्टिव दिया जाना चाहिए। वन विभाग इन्सेंन्टिव बेस्ड कार्यप्रणाली अपनाए तो जंगल अवैध गतिविधियों से मुक्त हो सकेगा और वन्यजीवों का कुनबा बढ़ेगा। </p>
<p><strong>मुखबिर तंत्र होगा सुदृढ़</strong><br />पगमार्क फाउंडेशन के संस्थापक देवव्रत हाड़ा का कहना है, इंसेंटिव बेस्ड टॉस्क दिए जाने से कर्मचारियों में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगेगी। इसके लिए वे नवाचार अपनाएंगे और वनक्षेत्र को सुरक्षित करेंगे। माफियाओं के चंगुल से जंगल बचेगा और देश के मानचित्र पर  सेंचूरी का नाम प्रदर्शित होगा। <br /><strong>- स्वर्ण अक्षरों में लिखवाएंगे नाम</strong></p>
<p>इंसेंटिव बेस्ड वर्क कर्मचारियों की कार्य प्रणाली को सुव्यवस्थित करने में कारगर है।  मैंने कर्मचारियों को प्रोत्साहन देने के लिए नवाचार किया है। जिसके तहत डीएफओ चेम्बर में बोर्ड लगवा रहे हैं, जिस पर अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवाया जाएगा। कार्य का मूल्यांकन प्रतिमाह किया जाएगा। कर्मचारियों को रिजल्ट आॅरियंटेड टास्क दिए जा रहे हैं। अवैध खनन, माइनिंग, कटान रोकना सहित अन्य कार्यों का मूल्यांकन कर रैंकिंग देकर वन कर्मियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। <br /><strong>- तरुण मेहरा, उप वन संरक्षक, कोटा वनमंडल </strong></p>
<p><strong>कांस्टेबल और वरक्षक  के वेतन में अंतर</strong><br />पुलिस कांस्टेबल और वन रक्षक का पद समान है फिर भी दोनों के वेतन में 15 हजार का अंतर है। पुलिस को हार्ड ड्यूटी एलाउंस दिया जाता है। जबकि, वन कर्मचारी दुर्गम स्थानों पर 24 घंटे ड्यूटी करता है। इसके बावजूद उन्हें हार्ड ड्यूटी एलाउंस नहीं दिया जाता। वेतन विसंगतियां भी कर्मचारियों का मनोबल तोड़ती है। इंसेंटिव के रूप में सम्मानजनक प्रोत्साहन राशि मिले तो आत्मविश्वास बढ़ेगा और जंगल की चुनौतियों से निपटने को बल मिलेगा। <br /><strong>- जसवीर सिंह भाटी, रैंजर, दरा सेंचुरी, मुकुंदरा रिजर्व</strong></p>
<p><strong>मजबूत होगा मुखबिर तंत्र</strong><br />प्रोत्साहन मिलना अच्छी बात है लेकिन इससे पहले पर्सनाल्टी डवलपमेंट की ट्रैनिंग देना बेहद जरूरी है। ताकि, वनकर्मी अच्छे और बूरे में फर्क कर सके। कर्मचारी में बेहतर काम करने की भावना होती है लेकिन उसे काम में कैसे शामिल करें, इसका ज्ञान दिया जाना आवश्यक है। यह काम होंगे तो मजबूत मुखबिर तंत्र का निर्माण होगा। प्रोत्साहन मिलने से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीसीएफ, उड़नदस्ता प्रभारी</strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू </strong><br />हर अवैध कार्य पैसा कमाने के लिए किया जाता है, यदि वनकर्मियों को सम्मानजनक  प्रोत्साहन राशि इन्सेंन्टिव के रूप में दिए जाए तो निश्चित रूप से मानसिकता में सुधार आएगा। अवैध खनन, अतिक्रमण, कटान, वनसम्पदा चोरी, संदिग्ध घुसपैठ, शिकार सहित अन्य वन अपराध का ग्राफ तेजी से घटेगा। अधिकारियों द्वारा सम्मान करने, पीठ थपथपा कर शब्बासी देना वन रक्षकों को मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत करेगा और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित होंगे।      <br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट, भोपाल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jan 2024 15:49:32 +0530</pubDate>
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