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                <title>dara tunnel - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोटा से मुंबई तक एक्सप्रेस रफ्तार में अभी दरा टनल और गुजरात की बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे देश के छ राज्यों से गुजर रहा है। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dara-tunnel-and-gujarat-are-still-a-hindrance-in-the-speed-of-the-expressway-from-kota-to-mumbai/article-85518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/kota-s-mumbai-tk-express-raftar-me-abhi-dara-tunnel-or-gujrat-ki-badha...kota-news-22-07-2024.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा से मुंबई तेज रफ्तार से जाने के लिए अभी और लंबा इंतजार करना होगा। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे के पूरा होने में दरा के पास बन रही टनल का कार्य धीमा होना बाधा बन गया है। जिसका कार्य अगले साल अक्टूबर तक पूरा हो पाएगा। इसके अलावा एक्सप्रेस वे के गुजरात में चल रहे कार्य को भी पूरा होने में एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है। जिसके बाद ही एक्सप्रेस वे पूरी तरह से चालू हो पाएगा। हालांकि इस दौरान वाहनों को अन्य वैकल्पिक मार्गों से निकाला जाएगा। जिससे वाहनों को एक्सप्रेस वे से बार बार चढ़ना और उतरना पड़ेगा। जिसमें समय के साथ ईधन भी ज्यादा लगेगा। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सूत्रों के अनुसार जल्द ही बचे हुए कार्यों को पूरा करके एक्सप्रेस वे को पूरी तरह से खोला जाएगा।</p>
<p><strong>एनएचएआई ने बदली टनल खोदने की प्रक्रिया</strong><br />दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर दरा में मुकुंदरा हिल्स के नीचे बन रही टनल का कार्य अभी धीमा हो गया है। जिसकी वजह टनल के सबसे कमजोर भाग में खुदाई का कार्य चलना है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि टनल की खुदाई का लगभग 50 फीसदी कार्य हो चुका है। वहीं ये कार्य टनल के सबसे कमजोर भाग में पहुंच गया है जहां से इसके उपर 500 मीटर तक एक प्राकृतिक नाला गुजर रहा है। ऐसे में टनल की खुदाई के लिए तरीका भी बदना पड़ा है जिसमें पहले टनल की खुदाई मशीनों से ड्रिल एवं ब्लास्ट करके की जा रही थी, लेकिन अब इसके लिए पाइप रूफिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके तहत पहले टनल में पाइप रूफिंग की जाती है जिससे उपरी भाग सुरक्षित हो जाए। टनल के इस हिस्से में 8 गुणा 7 मीटर का पायलट हॉल बनाकर उसे धीरे-धीरे गहरा किया जा रहा है, जिससे पहाड़ का कमजोर हिस्से में किसी प्रकार का क्रेक न आए और जमीन धंसे नहीं। इस प्रक्रिया में एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है जिसके अनुसार टनल अब अगले साल अक्टूबर तक ही चालू हो पाएगी।</p>
<p><strong>एक बार में टनल की 1.2 मीटर खुदाई होती है </strong><br />पाइप रूफिंग तकनी के माध्यम से टनल की एक बार में 1.2 मीटर की खुदाई हो पाती है। एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि इस नई तकनीक के द्वारा टनल की एक बार खुदाई करने पर 8 मीटर चौड़ा और 7 मीटर उंचा का एक पायलट हॉल बनाया जाता है, जिसमें 300 एमएम का पाइप 15 मीटर गहराई में डालकर उसी से टनल में कांक्रीट डाला जाता है। इस प्रक्रिया से पहाड़ जिस हिस्से में खुदाई हो रही है उसके ऊपरी हिस्से में खोखलापन या कमजोरी नहीं आती है और वो सुरक्षित रहता है। इस तरह से एक बार में केवल 1.2 मीटर टनल आगे बढ़ती है, जिसके बाद फिर से पाइप रूफिंग की जाती है। टनल की कुल लंबाई 4900 मीटर होगी, जिसमें से 3300 मीटर की टनल पहाड़ के नीचे से बनाई जाएगी और बाहर की ओर दोनों तरफ 500-500 मीटर के हिस्से को बफर बनाया जाएगा। वहीं पहाड़ के नीचे वाले हिस्से में टनल की अभी तक 2855 मीटर की खुदाई हो चुकी है।</p>
<p><strong>गुजरात में दो पैकेज का कार्य भी अधूरा</strong><br />दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे देश के छ राज्यों से गुजर रहा है। जिसमें इसका कार्य केवल गुजरात को छोड़कर वहीं बाकि राज्यों में लगभग पूरा हो चुका है। एक्सप्रेस वे का गुजरात के वलसाड जिले में 35 किलोमीटर और नवसारी जिले में 27 किलोमीटर का कार्य अधूरा है। इसमें भी वलसाड सेक्शन का कार्य अप्रैल और नवसारी सेक्शन का कार्य इसी माह शुरू हुआ है। जिन्हें पूरा होने में लगभग एक साल का समय लगेगा जिसके बाद ही एक्सप्रेस वे पूरी तरह से चालू हो पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 18:30:54 +0530</pubDate>
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                <title>ऑस्ट्रेलियन मैथड से बन रही है दरा की टनल</title>
                                    <description><![CDATA[एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों के ठहरने के लिए रेस्ट एरिया भी बनाए जा रहे हैं जहां वाहन चालक आवश्यकतानुसार रुक सकेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dara-tunnel-is-being-built-using-australian-method/article-67914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/tunnel-delhi-mumbai-expressway.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश के सबसे बड़े भारत माला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कई सारी नई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। जिनमें फिर दरा में निर्माणाधीन टनल को न्यू ऑस्ट्रेलियन मेथड से बनाना हो या लेनों की चौड़ाई को बढ़ाना। इन सबके अलावा एनएचआई एक्सप्रेसवे के डिवाइडरों पर मौजूद पौधों को पानी देने के लिए अब टैंकरों की जगह ड्रिप इरीगेशन का इस्तेमाल करेगा जिससे वाहनों के लिए एक्सप्रेस वे पर अनावश्यक रूप से किसी तरह की कोई बाधा नहीं आएगी। ऐसे कई सारी नई तकनीक और नई सुविधाओं से लैस होने जा रहा है दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस वे। </p>
<p><strong>ड्रिप इरीगेशन से होगी पौधों की सिंचाई</strong><br />कोटा युनिट के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर योगेश बरार ने बताया कि दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेसवे पर यू आकार में खाईनुमा डिवाइडर बनाए जा रहे हैं जिसमें लगे पौधों की सिंचाई के लिए प्राधिकरण द्वारा ड्रिप इरीगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के इस्तेमाल से एक्सप्रेसवे पर पानी के टैंकरों का अनावश्यक रूप से आवागमन रुकेगा जिससे एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना की संभावनाओं में कमी आएगी। इस तकनीक के लिए एक्सप्रेसवे पर हर 10 किलो मीटर पर टंकियों की व्यवस्था की जाएगी जहां से सिंचाई के लिए पानी स्टोर किया जाएगा।</p>
<p><strong>दरा टनल में नेटवर्क के लिए होगी पूरी सुविधा</strong><br />एक्सप्रेसवे के कोटा जिले के हिस्से में दरा में न्यू आॅस्ट्रेलियन मेथड से 5 किलामीटर की टनल बनाई जा रही है। इस टनल का एक हिस्सा उम्मेदपुरा की और तो दुसरा नयागांव जागीर की तरफ खुलेगा। टनल से गुजरने पर वाहनों को किसी प्रकार की समस्या ना हो इसके लिए टनल को दो अलग-अलग हिस्सों में बनाया जा रहा है जो दोनों आपस में इंटर कनेक्ट होंगे ताकी किसी अपातकालीन स्थिति में वाहनों को बाईपास किया जा सके। वहीं टनल को वाटरप्रुफ बनाने के साथ साथ इसके अंदर प्रेशर पंप भी बनाया जा रहा है जिससे बारीश के समय में टनल में पानी ना भरे। टनल के अंदर मोबाइल फोन नेटवर्क बिना किसी बाधा के चालू रहे इसके लिए भी प्राधिकरण द्वारा नेटवर्क बॉक्स लगाए जाएंगे। वहीं प्रदूषण कंट्रोल के लिए भी टनल में सेंसर लगाए जाएंगे जो प्रदूषण की मात्रा बढ़ने पर एक्टिव हो जाएंगे।</p>
<p><strong>सुरक्षा पर भी फोकस, यू आकार डिवाइडर से दुर्घटना में होगी कमी</strong><br />एक्सप्रेस वे पर दुर्घटना के समय में वाहनों को एक तरफ से दूसरी तरफ जाने से रोकने के लिए यू आकार के खाईनुमा डिवाइडर बनाए जा रहे हैं। डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर योगेश बरार ने बताया कि एक्सप्रेस वे पर हादसे के समय नुकसान में कमी लाने के लिए यू आकार के खाईनुमा डिवाइडर बनाए जा रहे हैं जिनमें बीमा बम्बू जो एक प्रकार का लचीला बांस है प्राकृतिक बाउंड्रीवाल की तरह कार्य करेगा। जो वाहन को दुर्घटनाग्रस्त होकर एक्सप्रेसवे के दुसरे हिस्से की और जाने से रोकेगा। वहीं आमतौर पर किसी हाइवे या एक्सप्रेसवे सड़क पर लेन की चौड़ाई 3.5 मीटर रखी जाती है लेकिन दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेसवे पर इनकी चौड़ाई 0.25 मीटर बढ़ाकर 3.75 मीटर रखी गई है जिससे तेज गति में वाहनों को सम्भालने के लिए अतिरिक्त स्थान मिलेगा। लेन की चौड़ाई ज्यादा होने से वाहन चलाने में भी सरलता होगी। वहीं सड़क के दोनों ओर पूर्ण रूप से क्रेश बेरियर और फ्लश मीडियम होंगे जो ड्राइवर को लेन और सड़क के बारे में जानकारी देंगे। </p>
<p><strong>रेस्ट एरिया भी होगा</strong><br />एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों के ठहरने के लिए रेस्ट एरिया भी बनाए जा रहे हैं जहां वाहन चालक आवश्यकतानुसार रुक सकेंगे। रेस्ट एरीया में वाहन चालकों के लिए हॉटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, पेट्रोल पंप, कैफे और चार्जिंग स्टेशन की भी सुविधा होगी। इसके अलावा इन रेस्ट एरीया में प्राधिकरण द्वारा ट्रोमा सेंटर भी बनाए जाने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jan 2024 16:53:44 +0530</pubDate>
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