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                <title>India-Iran relations - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>India-Iran relations RSS Feed</description>
                
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                <title>जयराम रमेश का दावा: अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका भारत के लिए कूटनीतिक झटका, पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में पाकिस्तान प्रमुख मध्यस्थ बनकर उभरा है, जो भारत के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी नेतृत्व की बढ़ती नजदीकियों पर चिंता जताई। रमेश ने केंद्र की इजरायल यात्रा की आलोचना करते हुए इसे भारत की तटस्थ मध्यस्थ भूमिका को कमजोर करने वाला कदम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-claims-pakistans-role-in-us-israel-iran-war-diplomatic-setback/article-147662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका और इजरायल और दूसरी तरफ ईरान के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है जो भारत के लिए एक गंभीर झटका है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर अपने संदेश में कहा, "प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की कई रिपोर्टों ने पाकिस्तान को अमेरिका और इजरायल तथा दूसरी तरफ ईरान के बीच इस्तेमाल किए जा रहे मध्यस्थों में से एक के रूप में पहचाना है। यदि ये रिपोर्ट सच हैं, तो वे भारत के लिए एक गंभीर झटका और तिरस्कार का प्रतिनिधित्व करती हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत की "निस्संदेह सैन्य सफलताओं" के बावजूद पाकिस्तान ने पिछले एक साल में कूटनीतिक रूप से नई दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, "दुखद वास्तविकता यह है कि उसके बाद पाकिस्तान का कूटनीतिक जुड़ाव और विमर्श प्रबंधन केंद्र सरकार की तुलना में काफी बेहतर रहा है।" उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद, जो कभी गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा था, अब फिर से प्रासंगिक हो गया है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान के नेतृत्व और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विकसित होते संबंधों की ओर भी इशारा किया और आरोप लगाया कि इसने इस्लामाबाद की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को "गर्मजोशी से और बार-बार गले लगाया" था और कई मौकों पर असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में मेजबानी की, जिसमें उन्होंने एक "अभूतपूर्व दोपहर के भोजन" का भी उल्लेख किया। रमेश ने कहा कि "पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी घेरे के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित कर लिये हैं।"</p>
<p>केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए रमेश ने उनकी हालिया कूटनीतिक पहुंच की आलोचना की, विशेष रूप से ईरान पर अमेरिका-इजरायल के कथित हवाई हमलों से ठीक पहले की गई इजरायल यात्रा को लेकर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार की इजरायल की अनुचित यात्रा, जो ईरान पर अमेरिका-इजरायल के अकारण हवाई हमले शुरू होने से ठीक दो दिन पहले समाप्त हुई, हमारे राजनीतिक इतिहास में एक बेहद विनाशकारी विकल्प के रूप में दर्ज की जाएगी।" उन्होंने तर्क दिया कि इस यात्रा ने इस क्षेत्र में एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में कार्य करने की भारत की क्षमता को कमजोर कर दिया है।</p>
<p>उन्होंने सरकार की विदेश नीति के प्रति अपने दृष्टिकोण की आलोचना तेज करते हुए कहा, "केंद्र सरकार की कूटनीति की पोल बुरी तरह खुल गई है। देश को इसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।" ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत ने पारंपरिक रूप से इजरायल, ईरान और प्रमुख अरब देशों सहित पूरे पश्चिम एशिया में संतुलित संबंध बना रखे थे ओर अक्सर क्षेत्रीय संघर्षों में खुद को एक संभावित सेतु के रूप में प्रस्तुत किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:26:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम: खामेनेई की मौत पर जताया दुख, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 4 दिन बाद शोक पुस्तिका में दर्ज किया संवेदना संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर औपचारिक दुख प्रकट किया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत से मुलाकात कर शोक पुस्तिका में संदेश लिखा। तेहरान में तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच हुए इस निधन पर भारत ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की कामना करते हुए ईरान के साथ अपनी एकजुटता जताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indias-big-diplomatic-step-expressed-grief-over-khameneis-death-foreign/article-145381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/khamnei.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली में ईरान के राजदूत से मुलाकात की और शोक संवेदना प्रकट की। इस दौरान उन्होंने भारतीय दूतावास में रखी शोक पुस्तिका में संदेश लिखकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>गौरतलब है कि खामेनेई का निधन रविवार को तेहरान में उस समय हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों के कुछ ही घंटों बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। भारत ने ईरान के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता की कामना की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 17:03:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका जंग भारतीय डिप्लोमैसी के लिए चुनौती: इजरायल बेहद करीबी मित्र तो ईरान से भी ऐतिहासिक रिश्ते</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने भारत के लिए रणनीतिक चुनौती। दोनों पक्षों से गहरे रिश्तों के कारण भारत सतर्क। सरकार ने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर तेहरान में फंसे भारतीयों को घरों में रहने की दी सलाह। वैश्विक भू-राजनीति में रूस और चीन की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-america-war-is-a-challenge-for-indian-diplomacy-israel-is/article-145012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/khamnoi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका की ओर से युद्ध शुरू होने के बाद भारत के सामने बहुत ही कठिन राजनयिक चुनौती खड़ी हो चुकी है। भारत और इजरायल बेहद करीबी मित्र हैं, तो ईरान के साथ भी भारत के पुराने ऐतिहासिक रिश्ते हैं और वह भारत के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से भी बहुत ज्यादा अहमियत रखता है। इस लड़ाई में अमेरिका का इजरायल का साथ देने की वजह से भारत के सामने और भी अग्निपरीक्षा की स्थिति पैदा हो चुकी है। ईरान पर शनिवार को जिस तरह से अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला बोला है, उसकी आशंका बीते कई महीनों से थी। पिछले कुछ सप्ताह से तो अमेरिका ने इसके लिए अपना पूरा सैन्य बंदोबस्त भी कर लिया था। लेकिन, अब जंग की शुरूआत हो चुकी है और जिस तरह से कुछ देश ईरान के समर्थन में भी खुलकर सामने आने शुरू हुए हैं, इससे आने वाले अगले कुछ दिन जियोपॉलिटिक्स के लिए बहुत अहम होने वाले हैं।</p>
<p><strong>रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर उंगली भी उठा दी </strong></p>
<p>रूस ने तो खुलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर उंगली भी उठा दी है। हालांकि, वह सीधे इस जंग में ईरान की ओर से कूदेगा, फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं। लेकिन, पहले से ही आफत में अवसर की तलाश में बैठा चीन इसका किस तरह से फायदा उठाना चाहेगा, यह देखने वाली बात है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध पर भारत ने शुरूआती प्रतिक्रिया में दोनों देशों में रह रहे अपने नागरिकों को पूर्ण एहतियात बरतने की एडवाइजरी जारी की है। तेहरान में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों को सलाह दी है, पैदा हो रहे हालातों को देखते हुए, ईरान में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि पूरी सावधानी बरतें, गैर-जरूरी मूवमेंट से बचें और जितना संभव हो घरों के अंदर ही रहें। भारतीय समाचार पर नजर रख सकते हैं, जागरूकता बनाए रखें और भारतीय दूतावास से अगले दिशा-निदेर्शों का इंतजार करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:37:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत से संबंध अटूट, कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, चाबहार पोर्ट पर ईरान की अमेरिका को दो टूक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी छूट खत्म होने की आशंका के बीच ईरान ने कहा, चाबहार पोर्ट भारत-ईरान रिश्तों की मजबूत नींव है, कोई ताकत इसे कमजोर नहीं कर सकती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/relations-with-india-are-unbreakable-no-one-can-cause-any/article-140442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/iran1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान और अमेरिका में जारी तनाव के बीच भारत के महत्वपूर्ण निवेश चाबहार पोर्ट को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। दरअसल, चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी पाबंदियों में मिली छूट आने वाली 26 अप्रैल को खत्म हो रही है। ऐसे में अगर अमेरिका अगर छूट को नहीं बढ़ाता है तो भारतीय निवेश के लिए खतरा हो सकता है। हालांकि, भारत ने कहा है कि चाबहार पोर्ट में अपने हितों की रक्षा के लिए वह अमेरिका के संपर्क में है। इस बीच ईरान के एक प्रमुख उच्च स्तरीय अधिकारी ने भारत के साथ संबंधों को अटूट बताया है और कहा है कि ईरान और भारत के रिश्तों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। </p>
<p>ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य सालार वेलायतमदार ने चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान के रिश्तों में एक अहम आधार बताया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दुनिया में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। बातचीत में वेलायतमदार ने कहा, दुनिया की हालत अच्छी नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति की हरकतें कतई गरिमापूर्ण नहीं हैं। उन्होंने हर देश में उथल-पुथल पैदा कर दी है और वे देश अस्थिरता का सामना कर रहे हैं। इसमें हमारे मित्र देश भारत के महान लोग भी शामिल हैं।</p>
<p>भारत से संबंध ऐतिहासिक</p>
<p>ईरानी अधिकारी ने भारत के साथ ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र किया और कहा कि दोनों देश भाषा, संस्कृति और परंपरा में गहरी समानता साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी चीज भारत और ईरान के मजबूत बंधनों को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। वेलायदमदार ने कहा कि हमने अपने पारस्परिक हितों को सुरक्षित करने के लिए चाबहार में भारत के निवेश के समझौते को अंतिम रूप दिया था। चाबहार पोर्ट में निवेश को सुरक्षित रखने को लेकर दिए गए भारत के हालिया बयानों को लेकर ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य ने कहा कि भारतीय पक्ष तर्कसंगत है। भारतीय अधिकारी समझते हैं कि दुश्मन और प्रतिद्वंद्वियों की उत्तेजक कार्रवाइयों का इन साझेदारी पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हमारे विचार से इसमें कुछ भी नहीं बदला है। </p>
<p><strong>अमेरिका और ईरान में तनाव</strong></p>
<p>ईरान से यह बयान ऐसे समय में आया है जब हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद से तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों ने एक दूसरे पर तीखे हमले किए हैं। तेहरान ने अपनी तरफ बढ़ने वाले हाथ को काटने की धमकी दी है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर उन्हें मारने की कोशिश होती है तो ईरान को धरती से मिटा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:32:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत-ईरान संबंधों की दूरी पाटना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर दोनों देश समझौते के बहुत करीब पहुंच गए हैं। जिसका जिक्र एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री होसैन अमीराब्दुल्लाहियन ने एक्स पर अपनी-अपनी पोस्ट्स में जाहिर किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/it-is-necessary-to-bridge-the-gap-in-india-iran-relations/article-68102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>युगांडा में गुट निरपेक्ष देशों के सम्मेलन में भाग लेने से पहले विदेश मंत्री एस-जयशंकर ईरान के दौरे पर गए। यह यात्रा ऐसे समय पर हुई जब इजरायल और हमास के बीच गाजा में संघर्ष चरम पर है। हमास के समर्थन में हूती विद्रोही लालसागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले बोल रहे हैं। यह सर्वविदित है कि हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन है। ऐसे में जयशंकर की इस्लामिक गणतंत्र की यात्रा में भारतीय हितों को पुनर्जीवित करने की इच्छा का संकेत मिलता है। विदेश मंत्री ने ईरानी सड़क और शहरी विकास मंत्री से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच प्रमुख रूप से चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्टÑीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे को लेकर चर्चा हुई। यह दर्शाता है कि दोनों देश अब बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग पर फिर से अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। लेकिन लालसागर में जहाजों पर हो रहे हूती विद्रोहियों के हमले दोनों देशों के संबंधों को मुश्किल में डाल रहे हैं। ईरान के परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद अमेरिका की ओर से उसके खिलाफ  लगाए प्रतिबंधों की वजह से भारत ने ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों में दूरी बनी थी। ऐसे में इसका प्रभाव चाबहार बंदरगाह परियोजना पर पड़ा। हालांकि यह परियोजना प्रतिबंधों से मुक्त थी। इस क्रम में भारत के सामने उस वक्त निर्माण कार्य के लिए जरूरी क्रेन, आपूर्तिकर्ता से नहीं मिल पा रही थी। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए चीन ने ईरान के साथ अपने संबंध बनाए। दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग वाले समझौते हुए। प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से तेल खरीदता रहा। बीजिंग और तेहरान के बीच नए तालमेल की वजह से भारत के साथ संबंधों में दूरी बढ़ती चली गई।दूसरी ओर अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से स्वदेश लौट जाने पर फिर से वहां अराजकता का माहौल बन गया था। ऐसे में भारत के सामने भी कई मुश्किलें पैदा हो गईं। वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते पर भरोसा करके भारत ने कई रणनीतिक हित के कार्य शुरू किए थे। लेकिन वे भी मुश्किल में पड़ गए। ईरान के परमाणु समझौते से अलग होने और अफगानिस्तान और अमेरिका के बीच बढ़ी दूरी से भारत की कई योजनाएं रद्द हो गईं। इसके साथ ही खाड़ी के अरब देशों के साथ भारत के संबंधों में नाटकीय रूप से सुधार हुआ। कुछ अरब देशों द्वारा भारत के प्रमुख साझेदार इजरायल के साथ संबंध सामान्य हुए। इस क्रम में अमेरिकी नेतृत्व में एक नया वैश्विक संगठन आई 2 यू 2 (भारत, इजराइल, अमेरिका और यूएई) गठन हुआ। इस मंच के जरिए नई दिल्ली के हित सुन्नी अरब देशों से जुड़ते हैं। ऐसे में समय के साथ भारत और ईरान के संबंधों के बीच दूरी बनी। पिछले साल चीन की मध्यस्थता में सऊदी अरब-ईरान के बीच शांति समझौता हुआ। गाजा संघर्ष ने संबंधों को नई दिशा में मोड़ दिया।<br /><br />खाड़ी के अरब देशों में आधुनिकीकरण अभियान, इजरायल की अर्थव्यवस्था और भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी में भारत के हित निहित हैं। यह भी तय है कि मौजूदा वैश्विक माहौल में ईरान को जल्द ही अमेरिकी प्रतिबंधों से मुक्ति नहीं मिलेगी। वह चीन और रूस के साथ साझेदारी से बंधा हुआ है। ऐसे में भारत और ईरान के बीच संबंधों की गुंजाइश बनी हुई है। ईरान के साथ भारत के संबंध, चीन को संतुलित करने की दृष्टि से जरूरी भी हैं। भले ही दोनों देशों के रास्ते अलग-अलग हों, लेकिन तेहरान और नई दिल्ली के बीच संबंधों की मजबूती जरूरी है। <br /><br />संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर दोनों देश समझौते के बहुत करीब पहुंच गए हैं। जिसका जिक्र एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री होसैन अमीराब्दुल्लाहियन ने एक्स पर अपनी-अपनी पोस्ट्स में जाहिर किया है। इस परियोजना पर व्यापक और निर्णायक चर्चा हुई। यह योजना तब चर्चाओं में आई जब वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेहरान की यात्रा की थी।  चाबहार बंदरगाह, ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित सिस्तान बलूचिस्तान प्रांत में कनेक्टिविटी परियोजना है जिसके तहत ओमान की खाड़ी पर वर्ष 2003 से भारत और ईरान के सहयोग से चाबहार बंदरगाह का विकास किया जा रहा है। जिस पर दोनों देशों के बीच आठ अरब डॉलर निवेश के समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए ट्रांजिट रूट के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना से भारत और ईरान के अलावा अफगानिस्तान भी जुड़ा है। जनवरी 2016 में तीनों देशों ने बंदरगाह को विकसित करने के लिए एक त्रिपक्षीय आर्थिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। <br /><br />-महेश चन्द्र शर्मा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jan 2024 09:52:13 +0530</pubDate>
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