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                <title>Lalu prasad  yadav - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Lalu prasad  yadav RSS Feed</description>
                
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                <title>आखिर कौन है ये ​शख्स, जिसने आरजेडी को दिया था 25 सीटों का श्राप? सच साबित हुई बात</title>
                                    <description><![CDATA[RJD नेता मदन शाह ने कहा कि टिकट न मिलने के आघात ने उन्हें टूटने पर मजबूर किया और ग़ुस्से में उन्होंने पार्टी को 25 सीटों पर सिमटने का श्राप दिया, जो सच साबित हुआ। शाह ने आरोप लगाया कि टिकट वितरण में लालू यादव की सलाह नहीं ली गई और आंतरिक गुटबाज़ी ने पार्टी को कमजोर किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-all-who-is-this-person-who-gave-the-curse/article-132681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/madan.png" alt=""></a><br /><p>पटना। राष्ट्रीय जनता दल के नेता मदन शाह, जो पिछले महीने टिकट न मिलने पर अपने कपड़े फाड़कर और जमीन पर गिरकर रोते नजर आए थे, उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के बुरे प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी है। मदन शाह ने कहा, टिकट नहीं मिलने के दर्द ने उन्हें पागल बना दिया था। मैं पटना में लालू यादव से मिलने गया था, लेकिन कोई मिला नहीं। मैं इतना आहत था कि कपड़े फाड़ दिए। जमीन पर गिर पड़ा और श्राप दे दिया कि उनकी पार्टी 25 सीटों पर सिमट जाएगी, और वाकई ऐसा हो गया।</p>
<p>मदन शाह ने कहा, मैं अब भी पार्टी के लिए दुखी हूं। पार्टी की हार से मुझे दर्द है, लेकिन जो भगवान करता है, अच्छा करता है। पार्टी में जो चाणक्य कहलाते हैं, वे पार्टी को बर्बाद करने पर तुले हैं। जब तक उन्हें पार्टी से नहीं निकाला जाएगा, कुछ सुधार नहीं होगा। इस बार टिकट वितरण में लालू यादव से सलाह नहीं ली गई। इसलिए पार्टी को यह मुकाम मिला। टिकट के लिए पैसे मांगे जाने के सवाल पर मदन शाह ने कहा कि उनसे सीधे किसी ने ऐसी कोई डिमांड नहीं की थी।</p>
<p><strong>पार्टी के लिए काम करता हूं तो पैसे क्यों दूंगा?</strong></p>
<p>उन्होंने कहा, मुझसे पैसे सीधे नहीं मांगे गए (टिकट के बदले); यह मीडिया के जरिए किया गया। तो मैं पैसे कहां देता? सड़क पर तो फेंक नहीं सकता था। मैं 1990 से पार्टी के साथ जुड़ा हूं, कार्यकर्ता हूं, पार्टी के लिए काम करता हूं। टिकट के लिए क्यों पैसे दूंगा और कहां से दूंगा? मधुबन से ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया गया जो पार्टी का प्राथमिक सदस्य तक नहीं था। सरकारी डॉक्टर है, उसने इस्तीफा तक नहीं दिया था. अपनी पत्नी संध्या रानी के नाम पर फिर टिकट लिया।</p>
<p>मदन शाह ने कहा कि मुझे लालू यादव ने आश्वासन दिया था कि मदन तैयारी करो तुमको टिकट देंगे। तेजस्वी यादव ने भी कहा था। <br />मैं क्षेत्र में पूरे दमखम से लगा था, टिकट की जिस दिन घोषणा होनी थी 2 बजे तक मुझसे कहा गया कि टिकट आपको मिलेगा, लेकिन जब लिस्ट आई तो मेरा नाम नहीं था। मुझे इतना दुख हुआ, मैं पटना में लालू यादव के आवास के बाहर जमीन पर लोटता रहा, लेकिन मुझे किसी से मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने संजय यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी वजह से ही राजद की चुनाव में ये दुर्गती हुई है। शाह ने कहा कि जब तक संजय यादव को पार्टी से बाहर नहीं निकाला जाता, हालात नहीं सुधरेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 12:04:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिहार चुनाव नतीजों के साथ खत्म हो सकती है नीतीश-लालू की विरासत : देश की राजनीति को दिया आकार, दोनों ने शुरू की एक विचारधारा की राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और लालू यादव की विरासत दांव पर है। 2025 विधानसभा चुनाव नतीजे तय करेंगे कि सुशासन या सामाजिक न्याय की विचारधारा टिकेगी। नीतीश के उत्तराधिकारी स्पष्ट नहीं, जबकि तेजस्वी यादव लालू की विरासत संभाल रहे हैं। यदि तेजस्वी हारे, तो आरजेडी में आंतरिक कलह और राजनीतिक भविष्य संकट में आ सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nitish-lalus-legacy-may-end-with-bihar-election-results-both-gave/article-129251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में प्रदेश के मुख्यमंत्री व जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री व आरजेडी के मुखिया लालू प्रसाद यादव दो दिग्गज हैं, जिन्होंने दशकों तक राज्य ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति को आकार दिया है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के दोनों शिष्यों ने एक साथ, एक विचारधारा की राजनीति शुरू की, लेकिन आज की तारीख में दोनों दो ध्रुव बन चुके हैं। नीतीश कुमार बिहार में सुशासन के प्रतीक बन चुके हैं. एक बार तो उन्होंने अपनी ऐसी छवि बनाई कि उन्हें भविष्य का पीएम कहा जाने लगा था। दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव ने सामाजिक न्याय की लड़ाई से पिछड़ों और वंचितों को इतना सशक्त किया कि आज देश के सभी राजनीति दलों की मुख्य विचारधारा ही यही हो गई है। 2025 के विधानसभा चुनावों के जब 14 नवंबर को नतीजे आएंगे, तो न केवल सत्ता का फैसला होगा बल्कि यह भी तय होगा कि इनकी विरासत का क्या होगा ?</p>
<p><strong>क्या होगा नीतीश कुमार की विरासत का ?</strong></p>
<p>नीतीश कुमार के समर्थकों का कहना है कि 2005 में उन्होंने बिहार को लालू-राबड़ी के जंगलराज से निकालकर विकास की राह पर लाया। 2023 की जाति जनगणना और 75% आरक्षण नीति ने सामाजिक न्याय को नया आयाम दिया, लेकिन बार-बार गठबंधन बदलने से उन्हें पलटीबाज की छवि दी। उनकी बीमारी को भी विपक्ष बार बार मुद्दा बना रहा है। जाहिर है कि जेडीयू के लिए यह मुश्किल घड़ी है। नीतीश ने अपने बेटे निशांत कुमार (47 वर्ष, इंजीनियर) को अभी तक राजनीति से दूर रखा है। अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं तो कुछ दिनों के लिए जरूर नीतीश कुमार के पुत्र होने के नाम पर उन्हें सपोर्ट मिले, जिस तरह तेजस्वी को मुस्लिम और यादव का सपोर्ट लालू यादव के नाम पर आज तक मिल रहा है। पर निशांत के सक्रिय नहीं होने पर गैर यादव ओबीसी और ईबीसी जातियों की नेचुरल पसंद बीजेपी बन जाएगी।</p>
<p>नीतीश ने स्पष्ट किया कि वह 2025 में खुद सीएम फेस हैं, लेकिन उनकी उम्र और स्वास्थ्य आदि उनके उत्तराधिकार की चर्चा को जरूरी बनाते हैं। जेडीयू में अन्य चेहरे भी हैं, लेकिन उनकी व्यापक स्वीकार्यता सीमित है। यदि एनडीए 130-160 सीटें जीतता है, जैसा कि कई पोल्स बता रहे हैं तो नीतीश की सुशासन विरासत कुछ समय तक बरकरार रहेगी। लेकिन यदि जेडीयू 40 से नीचे सीटें जीतती है, तो बीजेपी हावी हो सकती है. बीजेपी, जो ऊपरी जातियों (15%) और पासवान (5%) पर निर्भर है, नीतीश की विरासत को हिंदुत्व और विकास के साथ जोड़ सकती है। नीतीश का करिश्मा और ईबीसी गठजोड़ उनके बिना टिकना मुश्किल है, क्योंकि जेडीयू में दूसरी पंक्ति का नेतृत्व कमजोर है। नीतीश ने अपने ठीक पीछे किसी नेतृत्व को पनपने ही नहीं दिया।</p>
<p><strong>लालू प्रसाद यादव की विरासत :</strong></p>
<p>लालू प्रसाद यादव ने मंडल आंदोलन के जरिए बिहार में सामाजिक न्याय की नींव रखी, जिसने पिछड़ों, दलितों और मुस्लिमों को सशक्त किया।  उनका मुस्लिम-यादव (31%) गठजोड़ आरजेडी का आधार है। लालू ने पंचायतों में ओबीसी आरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया। लेकिन चारा घोटाला, जंगलराज और खराब प्रशासन ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया। जेल और स्वास्थ्य समस्याओं (किडनी प्रत्यारोपण) के बावजूद, लालू की रणनीति ने 2020 में आरजेडी को 75 सीटें और 23% वोट शेयर दिलाया।</p>
<p>उनकी विरासत सामाजिक न्याय, ओबीसी-दलित-मुस्लिम सशक्तिकरण और करिश्माई नेतृत्व है। लालू की विरासत का स्पष्ट उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव (35 वर्ष) हैं। जनवरी 2025 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने उन्हें लालू के बराबर शक्तियां दीं।  तेजस्वी ने एमवाई बाप फॉमूर्ला अपनाकर यादव (14%), मुस्लिम (17%) और कुछ गैर-यादव ओबीसी-दलितों को जोड़ा है। उनके 10 लाख नौकरियों का वादा और नीतीश के खिलाफ युवा अपील 41% लोगों के लिए सीएम पद की पसंद बनाया है। जिसके चलते 2020 में आरजेडी को सबसे बड़ी पार्टी बन सकी। तेजस्वी की ताकत उनकी युवा अपील और लालू की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की महत्वाकांक्षा है, लेकिन वह लालू के करिश्मे को पूरी तरह दोहरा नहीं पाए हैं।</p>
<p><strong>तेजस्वी इस बार हारे तो लालू की विरासत खत्म :</strong></p>
<p>तेजस्वी की उम्र अभी बहुत कम है। उनके पास राजनीति के लिए बहुत वक्त है। पर बिहार की राजनीति दिन प्रतिदिन और कठिन हो रही है। अगर इस बार तेजस्वी मुख्यमंत्री नहीं बन सके तो अगली बार जनसुराज और बड़ी पार्टी के रूप में चुनाव में मौजूद होगी। दूसरी तरफ कांग्रेस लगातार अपने परंपरागत वोटर्स को साथ लेने के लिए तैयार है। मतलब साफ है कि तेजस्वी के लिए अभी नहीं तो कभी नहीं की स्थिति है। नेतृत्व कमजोर होने पर पहले परिवार में विघटन होता है फिर पार्टी में। तेज प्रताप यादव और रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी के खिलाफ दम भर दिया है। मीसा भारती भी शायद नाखुश लोगों की श्रेणी में ही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Oct 2025 11:02:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बड़ा झटका, ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में ट्रायल पर रोक लगाने से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बड़ा झटका लगा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/lalu-prasad-yadav-refused-to-ban-trial-in-the-land/article-122089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/1ne1ws.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बड़ा झटका लगा है। ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में लालू यादव की तरफ से दायर याचिका को सुनने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच द्वारा यह अहम फैसला सुनाया गया।</p>
<p>लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हाई कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चर्चा करते हुए कहा- ‘हम रोक नहीं लगाएंगे। हम अपील को खारिज कर देंगे और कहेंगे कि मुख्य मामले का फैसला होने दें। हम इस छोटे मामले को क्यों रखें ?’ सुप्रीम कोर्ट का इसमें कहना है कि जब हाई कोर्ट पहले से ही इस मामले पर सुनवाई कर रहा है, तो सुप्रीम कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 16:07:47 +0530</pubDate>
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                <title>नीतीश-लालू के रिश्तों में खटास के संकेत, सियासी तापमान बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[ बिहार में भले ही कड़ाके की ठंड पड़ रही हो लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख घटक जदयू और राजद के बीच रिश्तों में खटास के संकेत ने राज्य में सियासी तापमान काफी बढ़ा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/signs-of-sourness-in-relations-between-nitish-and-lalu-political/article-68166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/untitled-design-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में भले ही कड़ाके की ठंड पड़ रही हो लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख घटक जनता दल यूनाइटेड(जदयू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच रिश्तों में खटास के संकेत ने राज्य में सियासी तापमान काफी बढ़ा दिया है।</p>
<p>भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की सौवीं जयंती पर बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का परिवारवाद पर चोट के बाद गुरुवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भी सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर एक के बाद एक तीन पोस्ट बिना किसी का नाम लिए किया है, जिसे अप्रत्यक्ष रूप से नीतीश कुमार पर ही पलटवार माना जा रहा है।</p>
<p>लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में कहा कि समाजवादी पुरोधा होने का करता वही दावा है, हवाओं की तरह बदलती जिनकी विचारधारा है। अपनी अगली पोस्ट में वह लिखती हैं, खीज जताए क्या होगा, जब हुआ न कोई अपना योग्य, विधि का विधान कौन टाले, जब खुद की नीयत में ही हो खोट। इसके बाद अपनी अगली पोस्ट में उन्होंने लिखा, अक्सर कुछ लोग नहीं देख पाते हैं अपनी कमियां, लेकिन किसी दूसरे पे कीचड़ उछालने को करते रहते हैं बदतमीजियां।</p>
<p>हालांकि रोहिणी ने बाद में अपनी पोस्ट को हटा दिया हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jan 2024 19:38:55 +0530</pubDate>
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