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                <title>Jaipur Literature Festival - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Jaipur Literature Festival RSS Feed</description>
                
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                <title>दिल्ली पहुंचे उप प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की, भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की जयपुर साहित्य उत्सव के बाद दिल्ली पहुंचे। वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ रक्षा, सुरक्षा और व्यापार पर रणनीतिक चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/deputy-prime-minister-of-poland-radoslaw-sikorski-reached-delhi-possible/article-140066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/polamnd.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को नयी दिल्ली पहुंचे। जहां उनका स्वागत अतिरिक्त सचिव पूजा कपूर ने किया। उनके दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना और भारत और पोलैंड के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाना है।</p>
<p>पोलैंड के उप प्रधानमंत्री के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा, नयी दिल्ली में आपका हार्दिक स्वागत है।</p>
<p>पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की आज नई दिल्ली पहुंचे। नयी दिल्ली में उनके कार्यक्रम भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं। राजधानी पहुंचने से पहले सिकोरस्की ने 17 से 18 जनवरी तक जयपुर का दौरा किया, जहां उन्होंने जयपुर साहित्य महोत्सव में भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:21:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एआई अभिव्यक्त को दोहराता है, मानव बुद्धि अनकहे को रचती है: प्रसून जोशी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में प्रसून जोशी ने कहा कि एआई केवल संकलित डेटा है, जबकि मानव रचनात्मकता अनकहे 'अव्यक्त' को रचती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ai-repeats-the-expressed-human-intelligence-creates-the-unspoken-prasoon/article-139978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jlf1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के फ्रंट लॉन में रविवार को आयोजित सत्र में गीतकार और लेखक प्रसून जोशी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानव रचनात्मकता के बीच मूलभूत अंतर को रेखांकित किया। किश्वर लाल देसाई के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि एआई में वास्तव में “आर्टिफिशियल” जैसा कुछ नहीं होता, क्योंकि उसका समूचा आधार मानव द्वारा तैयार किए गए डेटा पर टिका होता है। एआई वही बता सकता है जो पहले से कहा, लिखा या व्यक्त किया जा चुका है।</p>
<p>प्रसून जोशी ने स्पष्ट किया कि मानव बुद्धि की विशिष्टता यह है कि वह अभिव्यक्त से आगे जाकर अनकहे को रच सकती है-ऐसे विचार, दर्शन और दृष्टियां जो अब तक देखी या लिखी नहीं गईं। उन्होंने कहा कि रचनात्मक लेखन महज तकनीक नहीं, बल्कि गहरी संवेदनशीलता की उपज है। संवेदना ही वह शक्ति है जो कल्पना को जन्म देती है और नई राहें खोलती है। सत्र में श्रोताओं ने इस विचारोत्तेजक संवाद का गर्मजोशी से स्वागत किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 14:12:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल : अपनी किताब को लेकर बोली हुमा कुरैशी, कहा- मैं यहां अपनी किताब बेचने आई हूं </title>
                                    <description><![CDATA[ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार फिल्म अभिनेत्री हुमा कुरैशी अपने पहले उपन्यास जेबा पर आधारित एक सत्र में भाग लेने आई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-literature-festival-said-about-her-book-huma-qureshi-said/article-102931"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/78-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार फिल्म अभिनेत्री हुमा कुरैशी अपने पहले उपन्यास जेबा पर आधारित एक सत्र में भाग लेने आई। इस सत्र का नाम सुपर वूमेन एंड सुपर पावर्स: रीगेमिंग फिक्शन था। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी किताब के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह उपन्यास उन सभी लोगों के लिए है जो खुद पर फोकस कर अपनी सुपरपावर बनना चाहते हैं। यह एक ऐसी कहानी है जिसमें जादू, आश्चर्य और गहरी भावनाओं का मिश्रण है। इस उपन्यास की पृष्ठभूमि वीरता, बदलाव और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की मानवीय भावना पर आधारित है। इस किताब में समकालीन मुद्दों को काल्पनिक विषयों के साथ जोड़ा गया है, जिससे यह और भी अधिक प्रभावशाली बन जाती है। यह कहानी पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं के संघर्ष, सत्ता और परिवार जैसे जटिल मुद् दों पर चर्चा करती है। उपन्यास में जादुई यथार्थवाद, सांस्कृतिक आलोचना और समकालीन प्रासंगिकता को जोड़ा गया है। कहानी एक बिगड़ैल, अमीर लड़की की है, जो अपने आलीशान न्यूयॉर्क अपार्टमेंट की छत पर आराम फरमाने और अपनी पसंदीदा मारिजुआना के गहरे कश लेने के अलावा किसी भी चीज में दिलचस्पी नहीं रखती। </p>
<p>जेबा को सिर्फ अपने बाहरी शत्रुओं से ही नहीं, बल्कि अपने भीतर के राक्षसों से भी जूझना है। यह केवल उसके परिवार को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को बचाने की लड़ाई है। किताब को लिखने में उन्हें दो साल लगे। हालांकि उन्होंने 2019 में इस पर काम शुरू किया था, लेकिन शुरुआत में वे केवल दस-बीस लाइनें ही लिख पाई और फिर मामला आगे नहीं बढ़ा। हुमा ने यह भी खुलासा किया कि शुरुआत में उन्होंने इस कहानी को एक फिल्म की स्क्रिप्ट या टेलीविजन शो के रूप में लिखा था, लेकिन बाद में इसे उपन्यास के रूप में प्रकाशित करने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि हार्पर कॉलिन्स के साथ काम करते हुए उन्हें एक नई तरह की स्वतंत्रता मिली और उन्होंने इस कहानी को अपने अनुसार गढ़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2025 10:47:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल : एम के रैना बीच सत्र में उठकर चले गए, जाने से पहले कहा- लोगों को जाति, धर्म के नाम पर बांटा जा रहा </title>
                                    <description><![CDATA[जेएलएफ के दूसरे दिन चारबाग में आयोजित सत्र में बॉलीवुड अभिनेत्री इला अरुण ने कहा कि चोली के पीछे गाना मेरा सिग्नेचर सॉन्ग बन गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/before-going-to-jaipur-literature-festival-mk-raina-beach-session/article-102642"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/7818.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जेएलएफ के दूसरे दिन चारबाग में आयोजित सत्र में बॉलीवुड अभिनेत्री इला अरुण ने कहा कि चोली के पीछे गाना मेरा सिग्नेचर सॉन्ग बन गया। चोली के पीछे यानी पर्दे के पीछे कार्य करने वालों से है। आजकल पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ को भी ये गाना गाते हुए दिख जाएंगे। किताब लिखने के लिए लोगों ने मुझे प्रेरित किया है। जो औरतें पर्दे के पीछे रहती हैं। उनके लिए मैंने किताब भी लिखी है। मैंने राजनीति को इसमें शामिल नहीं किया है।</p>
<p>मेरे लिए थियेटर एक मंदिर और जिंदगी है। जो कुछ भी कहना है आप कला के माध्यम से कह सकते है। लेकिन आज थियेटर की स्थिति सही नहीं है। आजकल लोग थियेटर में रुचि नहीं लेते हैं। वे आजकल बड़े बड़े मॉल्स और फास्ट फूड में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उन्हें समझना होगा कि थियेटर समाज का आईना होता है। अपनी बात कहने और थियेटर के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का अच्छा माध्यम है। इस बीच जैसे ही इला अरुण कश्मीर पर एडॉप्ट किए इप्शन के नाटक पर कुछ प्ले कर रही थीं, तो ऐसे में एम के रैना मंच छोड़ कर चले गए। इस पर इला अरुण ने तंज करते हुए कहा कि एलबर्ट पिंटो को आखिर गुस्सा क्यूं आया। </p>
<p>बाद में इला ने सफाई में कहा कि रैना को इस तरह मंच छोड़कर नहीं जाना चाहिए थे लेकिन उन्हें गुस्सा बहुत आता है।  वहीं मंच से अंत में असद लालाजी ने कहा कि किसी भी लेखक का अपमान करना पैनल का उद्देश्य नहीं है, लेकिन अंत तक रैना मंच पर नहीं आए। जबकि इला ने सभी से उनकी किताब को खरीदने की अपील की। सत्र के बीच में जाने से पहले एम के रैना ने कहा था कि कश्मीर पर जो फिल्में बनाई जा रही है। इसमें वहां की हकीकत नहीं दिखाई जाती। लोगों को जाति, धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 12:57:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ममता बेनर्जी पर पता नहीं कौनसा दबाव था जो उन्होने राष्ट्रपति पद के लिए मेरे पिता की खिलाफत की थी : शर्मिष्ठा मुखर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल में सोमवार को फ़्रंट लॉन में हुए ‘प्रणब माय फादर’ सत्र में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि मेरे पिता की डायरी में काफी कुछ लिखा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dont-know-what-pressure-was-on-mamata-banerjee-that-she-sharmistha-mukherjee/article-69213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(3).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल में सोमवार को फ़्रंट लॉन में हुए ‘प्रणब माय फादर’ सत्र में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि मेरे पिता की डायरी में काफी कुछ लिखा था। वह हर दिन कौन-कौन से नेताओं से मिल रहे थे। वह कहा जाते थे। क्या सोचते थे। सब कुछ उस डायरी में लिखा था। <br />इंदिरा गांधी के साथ मेरे पिता के रिश्ते काफी अच्छे थे। यहां तक कि वे क्या कपड़े पहनेंगे, इसपर भी वह इंदिरा गांधी जी से पूछते थे। यहां तक कि जब मेरे पिता मंत्री बने तो इंदिरा गांधी ने उन्हें धोतीं कुर्ता छोड़कर सूट पहनने के लिए कहा। इंदिरा गांधी ने मेरे पिता के इंग्लिश एक्सेंट (बंगाली) को लेकर जब आपत्ति जताई और उन्हें नए सिरे से सीखने के कहा था। लेकिन मेरे पिता ने उन्हें कहा यहीं मेरा एक्सेंट है।</p>
<p>शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बन गए थे। उसके बाद भी वह मेरे पिता को सर बोलकर संबोधित करते थे। जिसपर मैंने पिता ने भी कई बार आपत्ति जताई थी। वह दोनों एक दूसरे की काफी रिस्पेक्ट करते थे।</p>
<p>मुखर्जी ने कहा कि मैं अब तक नहीं समझ पाई हूं कि ममता बेनर्जी पर ऐसा कौनसा दबाव था। जो उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए मेरे पिता की खिलाफत की थी। मुखर्जी  ने कहा कि जब मेरे पिता नागपुर गए थे। तब में कांग्रेस में सक्रिय थी। मैने उनके RSS के कार्यक्रम में जाने का काफी विरोध किया। मेरी इस बात पर उनसे लड़ाई भी हुई। तब उन्होंने मुझे समझाया था कि वह RSS के कार्यक्रम में कांग्रेस की विचारधारा को बताने गए थे। उन्होंने वहां पंडित नेहरू की सोच बताई थी।</p>
<p>मुखर्जी ने कहा कि यूपीए के दौरान मेरे पिता ने सोनिया गांधी से कहा था कि एक कमजोर सरकार की जगह विपक्ष में होना ज्यादा बहतर होता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Feb 2024 14:33:57 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर लिट्रेचर फेस्टीवल का एक रंग यह भी</title>
                                    <description><![CDATA[यह जयपुर लिट्रेचर फेस्टीवल की सुहानी शाम है और चारों तरफ अंधेरा दुनिया भर से आए लोगों को अपने आगोश में लेते हुए फैल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/this-is-also-a-color-of-jaipur-literature-festival/article-69209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(7).png" alt=""></a><br /><p>यह जयपुर लिट्रेचर फेस्टीवल की सुहानी शाम है और चारों तरफ अंधेरा दुनिया भर से आए लोगों को अपने आगोश में लेते हुए फैल रहा है। एक आवाज हलके वातावरण में तैर रही है, बॉदलेयर की एक कविता की पंक्ति है यह अंधेरा है, लेकिन देखो तो यह कितना दमकता हुआ खूबसूरत अंधेरा है।</p>
<p>जेएलएन मार्ग पर क्लार्क्स आमेर के इस परिसर में जेएलएफ का यह दूसरा दिन है, लेकिन इसमें गुलजार, मणिशंकर अय्यर, नमिता गोखले, गुरचरणदास, मृणाल पांडे, नवदीप सूरी या विलियम डेलरिंपल से आगे भी इतना कुछ है कि उसे सुनना और महसूस करना किसी बेहतरीन डुएट के आनंद से कम नहीं।</p>
<p>यहां कंधे से कंधे टकरा रहे हैं, कोई मुस्कुराकर निकल रहा है या किसी ने आपके कंधे पर हाथ रखकर महसूस किया तो आपको मालूम ही न हो कि ऊष्मा से भरा वह हाथ किसी विदेशी राजदूत का हो। कोई आपके सामने आए और हो सकता है कि वह इन सर्च ऑव मैरी : दॅ मदर ऑव ऑल जर्नीज जैसी बेहतरीन कृति देने वाली शख्सियत बी रॉलेट हो, जो दिल्ली-लंदन या यार्कशाइर में अक्सर रहते हुए अक्सर दॅ डेली टेलीग्राफ  के पन्नों पर दिख जाती हों। आप अगर गहरे में नहीं उतरे और मेला ही देखते रहे तो संभव है कि आप चूक जाएं कि यहां कोई बायोग्राफी ऑव दॅ अवर लेकर आया है और अब ऐसी लड़की की कहानी आपको बताने वाला है, जिसकी चोरी की लत ही नहीं छूट रही।</p>
<p>श्रीलंका और भारत में नॉर्वे की अंबेसडर एलिन स्टेनर कई कार्यक्रम सुन रही हैं और जैसे कोई दुर्लभ विदेशी पक्षी भारत की धरती पर गहरी घास में अपने लिए कोई मोती ढूंढ़ रहा है, वैसे ही वे एक-एक शब्द और ऐसा वाक्य तलाश रही हैं, जो झकझोर दे। मुगल टेंट में मैनी फेमिनिज़्म पर क्लेयर राइट, मार्टा ब्रीन और बी रॉलेट स्त्रियों के संसार की हकीकत और अफसानों का बयान कर कर रही हैं। मार्टा ब्रीन कहती हैं, ऑल्वेज वियर दॅ फेमिजिस्ट ग्लासेज! हमने इतना संघर्ष किया। यहां तक पहुंचीं और अभी हमें और दूर जाना है। बहुत कम स्थानीय लोग हैं, जो साहित्य की सबसे प्राचीन विधाओं में से एक यात्रा लेखन पर चल रहे विमर्श में दिलचस्पी ले हैं। संवाद बता रहा है कि यह अमूल्य थाती हमें सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है, जो व्यक्तिगत यात्राओं, विकास, स्थानों और लोगों के जटिल इतिहास और यहां तक कि मन की शक्ति और सीमाओं को दर्शाता है।</p>
<p>किसी को लग रहा है कि जयपुर साहित्य महोत्सव में पाठकों, लेखकों और पुस्तक प्रेमियों के लिए वही सब पुराना दिख रहा है, लेकिन आप इसकी परत उतारकर थोड़ा गहरे में उतरेंगे तो आपको दिल्ली से आए युवा अभिनव कृष्ण और मुकुल मिश्रा की तरह यह एक रूटीन लिट्रेरी इवेंट भर नहीं,  कुछ अलग लगेगा। जैसे आप कह सकते हैं मैग्नम ओपस मूवमेंट। शब्द को दोनों अर्थ में देखें। लम्हे की खूÞबसूरती भी और युवाओं के जीवन में उतरते साहित्य के एक आंदोलन के रूप में भी।</p>
<p>आप घूमते भी रहेंगे तो फिल स्कार्फ  और प्रियांक कृष्णा आपको एक ट्विस्ट के साथ नॉर्वेजियन जंगल जैसा कुछ एहसास कराएंगे। आपको दिल्ली विश्वविद्यालय के अंगरेजी विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल तनेजा के शब्द भीतर तक झकझोर देंगे। वे कह रहे हैं, एक समय था जब दिव्य-दृष्टि के लिए न कोई स्कूल था और न कोई किताब। लेकिन आज यह प्रेरक कहानी की तरह है कि एक दिव्य-दृष्टि दुनिया के एक बेहतरीन विश्वविद्यालय का विभागाध्यक्ष है। एक घर में छह महिलाओं के साथ रह रहा और अपने आपको बहुत डरा हुआ महसूस कर रहा एक आदमी आपको अपने कोविड के दिनों के अनुभव सुना रहा है और बता रहा है कि कैसे उन महिलाओं ने उसे एक बेहतरीन लेखक बना दिया।<br />और यह क्या किसी छूटे हुए प्रेमी के अचानक टकरा जाने से कम है कि आपको एके रामानुजन की कविताएं भी सुनने को मिलें और फिर वहां वे डिस्कशन चलें, जो उनके निबंध की यादें ताजा कर देते हैं।</p>
<p><strong>-त्रिभुवन</strong><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Feb 2024 12:39:56 +0530</pubDate>
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                <title>JLF के दौरान ट्रैफिक रहेगा डायवर्ट  </title>
                                    <description><![CDATA[जवाहर सर्किल से होटल क्लार्क आमेर के बीच सर्विस लेन में आवासीय कॉलोनी में रहने वाले निवासियों के वाहनों के अलावा सभी प्रकार का यातायात प्रतिबंधित रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/traffic-will-remain-diverted-during-jlf/article-68831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/jlf.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। होटल क्लार्क आमेर में गुरुवार से पांच दिवसीय जयपुर लिटरेचर फिस्टिवल शुरू होगा। कार्यक्रम में देश-विदेश से साहित्यकार, लेखक, विशिष्ट अतिथि और बड़ी संख्या में लोगों के भाग लेने की सम्भावना है। इसको लेकर यातायात पुलिस ने विशेष इंतजाम किए हैं। <br /><br />पासधारी व्यक्तियों के वाहनों की पार्किंग श्री विहार कॉलोनी कट के पास खाली भू-खण्ड, गोकुल वाटिका के पास खाली भू-खण्ड और जवाहर सर्किल के पास जगतपुरा कट के पास खाली जमीन में होंगी। कार्यक्रम में आने वाले लोगों का पिक एंड ड्रॉप पॉइंट होटल क्लार्क आमेर मैन गेट रहेगा। इनके वाहन जवाहर सर्किल की तरफ  से सर्विस लेन में प्रवेश करेंगे और एसएल कट की तरफ सर्विस से निकलेगें। जवाहर सर्किल से होटल क्लार्क आमेर के बीच सर्विस लेन में आवासीय कॉलोनी में रहने वाले निवासियों के वाहनों के अलावा सभी प्रकार का यातायात प्रतिबंधित रहेगा। एसएल कट से होटल क्लार्क आमेर की तरफ  सर्विस लेन में भी यातायात प्रतिबंधित रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Feb 2024 09:51:57 +0530</pubDate>
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                <title>1 फरवरी से शुरु होगा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 17वां संस्करण, पहले दिन कुल 40 सत्र होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[ पहले दिन गुलज़ार, अमीश, रघुराम राजन, अजय जड़ेजा, चित्रा बनर्जी दिवाकरुनी, पवन के. वर्मा सहित अन्य कुछ प्रमुख वक्ताओं के साथ साहित्यिक वार्ता होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-17th-edition-of-jaipur-literature-festival-will-start-from/article-68801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/jlf.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 17वां संस्करण 1 फरवरी से होटल क्लार्क्स आमेर में शुरू होने वाला है। इस साहित्यिक समारोह में 550 से अधिक लेखक, वक्ता और कलाकार भाग लेंगे और 16 भारतीय और 8 अंतर्राष्ट्रीय भाषाएं प्रस्तुत की जाएगी। भारतीय भाषाओं में असमिया, अवधी, बंगाली, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कुरुख, मलयालम, उड़िया, पंजाबी, राजस्थानी, संस्कृत, तमिल, टोडा, उर्दू और बंजारा भाषा - लामानी (लंबाडा) शामिल हैं। इस साल भी फेस्टिवल की डेकोर थीम 'उत्सव' रखी गई है। 'उत्सव' राजस्थान के रंगों का जश्न मनाना और उज्जवल रंगों का प्रदर्शन है।<br /><br />फेस्टिवल के पहले दिन की शुरुआत उद्घाटन समारोह से होगी। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी मुख्य अतिथि होंगी। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी का मुख्य संबोधन होगा। द मॉर्निंग म्यूज़िक में पंडित कुमार गंधर्व की 100वीं जयंती मनाते हुए कलापिनी कोमकली की प्रस्तुति दी जाएगी। पहले दिन गुलज़ार, अमीश, रघुराम राजन, अजय जड़ेजा, चित्रा बनर्जी दिवाकरुनी, पवन के. वर्मा सहित अन्य कुछ प्रमुख वक्ताओं के साथ साहित्यिक वार्ता होगी। फेस्टिवल के पहले दिन कुल 40 सत्र होंगे, जो क्लार्क्स में 5 अलग-अलग स्थानों - फ्रंट लॉन, बैठक, मुगल टेंट, चारबाग और दरबार हॉल में होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jan 2024 19:14:26 +0530</pubDate>
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