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                <title>CAR-T cell therapy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>CAR-T cell therapy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सीएआर-टी सेल थैरेपी : ब्लड कैंसर के इलाज में नई क्रांति साइड इफेक्ट नहीं, कैंसर दोबारा होने की संभावना भी कम</title>
                                    <description><![CDATA[ब्लड कैंसर के अधिकांश मरीजों के इलाज के तौर पर प्रथम लाइन ट्रीटमेंट में कीमोथैरेपी और इम्यूनोथैरेपी का प्रयोग किया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/car-t-cell-therapy-not-new-revolution-side-effects-in-the/article-105130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(18)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ब्लड कैंसर के अधिकांश मरीजों के इलाज के तौर पर प्रथम लाइन ट्रीटमेंट में कीमोथैरेपी और इम्यूनोथैरेपी का प्रयोग किया जाता है। मरीजों को सफल इलाज भी इन प्रणालियों के कॉम्बिनेशन से हो जाता है, लेकिन जब कभी प्रथम लाइन ट्रीटमेंट विफल हो जाते हैं या फिर मरीज में कैंसर दोबारा पनपने लगता है, तो इलाज के तौर पर दो ही विकल्प बचते हैं। पहला बोन मेरो ट्रांसप्लांट और दूसरा अत्याधुनिक सीएआर-टी सेल यानी चिमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल थैरेपी। लिम्फोमा और एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक लिम्फोमा जैसे ब्लड कैंसर के मरीजों को अक्सर बोन मेरो ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया जाता है, लेकिन मेडिकल क्षेत्र में आई उन्नत तकनीक सीएआर-टी सेल थैरेपी से अब एडवांस्ड स्टेज ब्लड कैंसर का सफल इलाज और भी कारगर तथा सुरक्षित हो गया है।</p>
<p>इस थैरेपी में आधुनिक जीन एडिटिंग पद्धति से शरीर में कुछ कोशिकाओं को कैंसर से लड़ने के लिए मॉडिफाई किया जाता है और फिर से शरीर में डाला जाता है, जिससे वे शरीर में पनप रही कैंसर कोशिकाओं को खत्म करती हैं। एचसीजी कैंसर हॉस्पिटल जयपुर के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश सोमानी और डॉ. अभिषेक चारण ने सीएआर-टी सेल थैरेपी के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी।</p>
<p><strong>सवाल: सीएआर-टी सेल थैरेपी क्या है ?</strong><br />जवाब: यह एक उन्नत इम्यूनोथैरेपी तकनीक है, जिसमें मरीज के शरीर से टी-कोशिकाओं (जो श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार जो प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होते हैं और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं) को फेरेसिस तकनीक के जरिए खून में से निकाला जाता हैं और जेनेटिक रूप से मॉडिफाई करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता हैं। </p>
<p><strong>सवाल: इसका आविष्कार कब और किसने किया ?</strong><br />जवाब: इस थैरेपी का विकास 1980 और 1990 के दशक में वैज्ञानिकों द्वारा शुरू किया गया था। वर्ष 2010 में डॉ. कार्ल जून और उनकी टीम ने इसे व्यावहारिक रूप से मरीजों पर उपयोग करना शुरू किया। वर्ष 2017 में अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने पहली सीएआर-टी सेल थैरेपी को मंजूरी दी, जिससे यह कैंसर के इलाज के लिए उपलब्ध हुई। </p>
<p><strong>सवाल: यह थैरेपी कैसे काम करती है ?</strong><br />जवाब: फेरेसिस प्रक्रिया के जरिए टी-सेल्स को रक्त में से निकाला जाता है। ये कोशिकाएं शरीर में कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए जिम्मेदार होती हैं, पर बीमारी के बढ़ने के कारण कमजोर पड़ जाती हैं। जीन एडिटिंग से इन सेल्स को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए तैयार किया जाता हैं और फिर शरीर में डाला जाता है।  </p>
<p><strong>सवाल: कौनसे कैंसर के इलाज में इसका उपयोग किया जा सकता है ?</strong><br />जवाब: मुख्य रूप से ब्लड कैंसर, जिनमें एक्यूट लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया यानी एएलएल, डिफ्यूज लार्ज बी-सेल लिंफोमा, फॉलिक्यूलर लिंफोमा, मल्टीपल मायलोमा और मैंटल सेल लिंफोमा जैसे कैंसर के इलाज के लिए उपयोग की जाती हैं।</p>
<p><strong>सवाल: क्या यह थैरेपी बच्चों के लिए भी उपयोगी है ?</strong><br />जवाब: हां, यह थैरेपी विशेष रूप से उन बच्चों के लिए प्रभावी है, जिन्हें एक्यूट लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया हुआ हो। ल्यूकेमिया बच्चों में सबसे आम रक्त कैंसर हैं। यह थैरेपी उन बच्चों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती हैं, जिनके लिए कीमोथैरेपी या अन्य इलाज काम नहीं कर रहे हैं। यह प्रणाली 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में ही उपयोग की जाती हैं। हालांकि 12 से कम उम्र के बच्चों में इस पद्धति को प्रयोग के बारे में रिसर्च चल रही हैं। </p>
<p><strong>सवाल: यह थैरेपी अन्य कैंसर उपचारों से कैसे बेहतर है ?</strong><br />जवाब: यह एक टार्गेटेड थैरेपी है, जो केवल कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं, जबकि कीमोथैरेपी और रेडिएशन थैरेपी स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। यह शरीर की अपनी इम्यून प्रणाली को मजबूत बनाती है, जिससे कैंसर के दोबारा होने की संभावना कम हो जाती है। </p>
<p><strong>सवाल: किन मरीजों के लिए यह थैरेपी उपयोगी हो सकती है ?</strong><br />जवाब: यह थैरेपी उन मरीजों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनका कैंसर बार-बार लौट आता है या जिन पर कीमोथैरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसे अन्य उपचार असर नहीं कर रहे।</p>
<p><strong>सवाल: थैरेपी की लागत कितनी होती है ?</strong><br />जवाब: विदेश में इस इलाज के लिए तकरीबन 4 से 5 करोड़ का खर्चा आता है, लेकिन भारत में और राजस्थान में एचसीजी अस्पताल में यह इलाज लगभग 40 लाख तक में हो जाता है। हाल ही में एक 62 वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 12:35:36 +0530</pubDate>
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                <title>सीएआर टी-सेल थेरेपी बनी कैंसर मरीजों के लिए वरदान</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में हर साल ब्लड, लंग, प्रोस्टेट, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/car-t-cell-therapy-became-a-boon-for-cancer-patients/article-104884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(12)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कैंसर एक गंभीर बीमारी है। भारत में हर साल ब्लड, लंग, प्रोस्टेट, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कैंसर उपचार में कई नई तकनीकों का विकास हुआ है। भारत की पहली जीन आधारित सीएआर टी-सेल थेरेपी ब्लड, लिंफोमा कैंसर मरीजों में उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरी है। यह तकनीक न केवल प्रभावी है बल्कि इसे किफायती और सुलभ भी बनाया गया है। </p>
<p>मानसरोवर स्थित एचसीजी कैंसर सेंटर जयपुर में डायरेक्टर ऑन्कोलॉजी डॉ. नरेश सोमानी और डॉ. अभिषेक चारण मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया कि सीएआर टी-सेल थेरेपी से अस्पताल में एक मरीज को जीवन दान मिला है। उन्होंने बताया कि मरीज की आयु 63 साल है। बीते सालों से बी सेल लिंफोमा से ग्रसित था। उसने अपना इलाज बाहर से लिया लेकिन छह माह के पश्चात ही उसे फिर से बीमारी ने घेर लिया। उसके बाद वह यहां आया और यहां सीएआर टी-सेल थेरेपी से मरीज का इलाज किया गया। पूर्ण इलाज के बाद जब मरीज की एक बार फिर पेट सिटी की जांच की गई तो पेट सिटी के मुताबिक पेशेंट पूरी तरह से स्वस्थ है और अपनी सामान्य जीवन जी रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Feb 2025 11:17:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कैंसर मुक्त करने वाली स्वदेशी CAR-T सेल थैरेपी, ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए है प्रभावी</title>
                                    <description><![CDATA[ लिंफोमा, ल्यूकेमिया जैसे ब्लड कैंसर से ग्रसित उन मरीजों के लिए अच्छी खबर है, जिन पर मौजूदा इलाज बेअसर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cancer-free-indigenous-car-t-cell-therapy-is-effective-for-blood-cancer/article-77412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/car-t.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लिंफोमा, ल्यूकेमिया जैसे ब्लड कैंसर से ग्रसित उन मरीजों के लिए अच्छी खबर है, जिन पर मौजूदा इलाज बेअसर है। आईआईटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल अस्पताल के विशेषज्ञों ने मिल कर CAR-T सेल थेरेपी नेक्सकार-19 बनाई है, जो मरीजों को ठीक करने में नई आस बनकर उभर रही है। डॉक्टरों ने दावा किया है कि यह देश में बनी पहली CAR-T सेल थैरेपी है, जो विदेश में मौजूद थेरेपी से बेहद किफायती है और इसके साइड इफेक्ट भी काफी कम हैं। हाल ही में राष्टÑपति द्रौपदी मुर्मू ने इस नई थैरेपी को इंडिया में लॉन्च किया है।</p>
<p><strong>साइड इफेक्ट्स कम, सक्सेस रेट ज्यादा</strong><br />भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के सीनियर हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. उपेंद्र शर्मा ने बताया कि इसका दो फेज में ट्रायल किया गया है। पहले फेज में सेफ्टी को लेकर ट्रायल किया। विदेश में उपलब्ध थैरेपी में न्यूरोटॉक्सीसिटी जिससे दिमाग पर असर पड़ता है और दूसरा साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम जैसे साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं लेकिन भारत में बनी सेल थैरेपी  में दोनों ही साइड इफेक्ट्स कम मिले हैं। दूसरे फेज में उन मरीजों पर इस थैरेपी का ट्रायल किया गया, जिन पर स्टैंडर्ड थैरेपी  फेल हो गई है। इनमें वे मरीज भी शामिल हैं, जिनकी आयु छह महीने से भी कम बची है। ऐसे मरीजों में हमने 70 फीसदी सकारात्मक रिजल्ट पाए हैं।</p>
<p><strong>कैसे काम करती है CAR-T सेल थैरेपी</strong><br />डॉ. उपेंद्र ने बताया CAR-T सेल थैरेपी में मरीज के शरीर से रोग प्रतिरोधक सेल्स को निकाला जाता है। लैब में सेल्स को जेनेटिकली मॉडिफाई किया जाता है। सेल्स में एक जीन इंट्रोड्यूस किया जाता है, जिसमें दो महत्वपूर्ण फीचर्स होते हैं। पहला अच्छे सेल्स, जो शरीर में धीरे-धीरे बढ़ रहे थे, वे तेजी से बढ़ेंगे। दूसरे फीचर में यह होता है कि वह कैंसर सेल्स को प्रभावी तरीके से टारगेट कर नष्ट करता है। लैब की प्रक्रिया पूरी होने के बाद CAR-T सेल्स मरीज में ट्रांफ्यूज किया जाता है। वैसे तो उपचार एक साइकिल में ही हो जाता है लेकिन जरूरत पड़ी तो दूसरा साइकिल भी कर सकते हैं। जैसे प्लेटलेट्स चढ़ाया जाता है, उसी प्रकार से CAR-T सेल भी चढ़ाया जाता है। </p>
<p><strong>विदेशी तकनीक से किफायती</strong><br />विदेश में इस थैरेपी में लगने वाले जेनेटिकली मोडिफाइड सेल्स की कीमत 3 से 4 करोड़ रुपए होती है। सबसे कम मूल्य 80 लाख से एक करोड़ रुपए में चीन और इजरायल में केवल प्रॉडक्ट मिलता है। थैरेपी देने में यदि कोई साइड इफेक्ट होते हैं तो उन्हें ठीक करना आदि। यह प्रॉडक्ट स्वदेशी है, इसकी कीमत 40 से 50 लाख रुपए होगी। यह यूएसए में बिकने वाली थैरेपी का केवल 10 फीसदी खर्चा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 May 2024 10:16:37 +0530</pubDate>
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                <title>कैंसर मरीजों के लिए नई थेरेपी, तकनीकी को CAR-T नाम दिया</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के दवा नियामक सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने CAR-T cell therapy के कमर्शियल इंस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/new-therapy-technology-for-cancer-patients-named-car-t/article-69633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(5)3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ईलाज की नई थेरेपी आने से कैंसर पीड़ितों के लिए नई उम्मीद की किरण आई है। कैंसर के इलाज के लिए काम में लेने वाली इस तकनीकी को CAR-T नाम दिया गया है। इस थेरेपी को आईआईटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल द्वारा विकसित किया गया है। इस तकनीकी से एक कैंसर पीड़ित को कैंसर से मुक्त कर दिया गया है। </p>
<p>भारत के दवा नियामक सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने CAR-T cell therapy के कमर्शियल इंस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Feb 2024 18:09:46 +0530</pubDate>
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