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                <title>Lok Sabha - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और भविष्य के साथ विश्वासघात किया : प्रवीन खंडेलवाल</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक गिरने को लोकतंत्र का 'काला अध्याय' बताया। उन्होंने राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इस ऐतिहासिक पहल को रोकना महिलाओं के सम्मान और भविष्य के खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-and-its-allies-betrayed-womens-rights-respect-and-future/article-151301"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/praveen.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विधायिका में महिलाओं के आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन के लोकसभा में पूर्ण बहुमत से पारित नहीं होने को चाँदनी चौक से भारतीय जनता पार्टी सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय बताया है और कहा है कि इस संशोधन विधेयक को गिराकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और भविष्य के साथ घोर विश्वासघात किया गया है। खंडेलवाल ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक संशोधन विधेयक की हार नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और भविष्य के साथ किया गया घोर विश्वासघात है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित पूरे विपक्ष ने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत इस संशोधन विधेयक को गिराने का शर्मनाक कार्य किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों के चलते न केवल इस संशोधन विधेयक का विरोध किया, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़े हो गए। यह आचरण उनके नेतृत्व की विफलता, दूरदृष्टि के अभाव और महिला सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को उजागर करता है।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद ने कहा कि जिस प्रकार राहुल गांधी ने सदन के भीतर मेज ठोक कर इस संशोधन विधेयक के गिराने का ऐलान किया और इसके खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया और उसके बाद विपक्षी दलों द्वारा विधेयक के गिरने का जश्न मनाया गया, वह अत्यंत निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र के मूल्यों का खुला उपहास है। यह स्पष्ट संकेत है कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी दल महिलाओं को अधिकार देने के बजाय उन्हें राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू पर तौलते हैं।</p>
<p>खंडेलवाल ने कहा कि जिस लोकसभा में राहुल गांधी ने इस संशोधन विधेयक को गिरवाने का दुस्साहस किया है। वहीं, सदन भविष्य में इस ऐतिहासिक अन्याय को सुधारेगा और महिलाओं को उनका अधिकार देकर नया इतिहास रचेगा। उन्होंने कहा कि यदि यह संशोधन विधेयक पारित होता, तो कांग्रेस के भीतर प्रियंका गांधी एक सशक्त और प्रभावशाली नेतृत्व के रूप में उभर सकती थीं और संभवतः इसी राजनीतिक आशंका ने राहुल गांधी को इस संशोधन विधेयक के विरोध के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए की गयी इस ऐतिहासिक पहल को विफल करना "महापाप" से कम नहीं है। राहुल गांधी और विपक्ष ने अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के चलते देश की महिलाओं के सपनों को कुचलने का काम किया है, जिसे देश कभी नहीं भूलेगा। खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं को केवल एक "वोट बैंक" के रूप में देखने का रहा है। दशकों तक इस महत्वपूर्ण मुद्दे को टालना और जब इसे लागू करने का समय आया, तब उसका विरोध करना,यह उनकी दोहरी नीति, अवसरवादी राजनीति और महिला विरोधी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शासन में महिला आरक्षण केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और राष्ट्र के समग्र विकास का आधार है। इसे रोकना देश की प्रगति को रोकने जैसा है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। देश की महिलाएं और जागरूक नागरिक इस विश्वासघात का लोकतांत्रिक जवाब देंगे और उन सभी को जवाबदेह ठहराएंगे जिन्होंने उनके अधिकारों को कुचला है। इस दौरान चांदनी चौक भाजपा के जिलाध्यक्ष अरविंद गर्ग और केशवपुरम भाजपा के जिलाध्यक्ष अजय खटाना भी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 16:30:22 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार परिसीमन की आड़ में देश का निर्वाचक मानचित्र बदलना चाहती है : राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इसे ओबीसी और दलितों के हितों पर हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के नाम पर जनता को भ्रमित कर रही है और चुनावी लाभ के लिए भारत का चुनावी नक्शा बदलना चाहती है। राहुल ने इसे 'मनुवाद' का प्रयास करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-government-wants-to-change-the-electoral-map-of-the/article-150845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rahul-gandhi-on-mnerga.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार परिसीमन की आड़ में भारत का निर्वाचक मानचित्र बदल देना चाहती है लेकिन इससे महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं होने वाला है। राहुल गांधी ने संसदीय सीटों के परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह 'देश द्रोह' है और विपक्ष इसे किसी कीमत नहीं होने देगा। राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( एक सौ इकतीसवां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर हो रही चर्चा में शामिल होते हुए यह भी कहा कि सरकार लोक सभा सीटों का परिसीमन और विधायिका में महिलाओं का आरक्षण जिस तरह से देना चाहती है, वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) , दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों पर हमला है। विपक्षी सदस्य इसका कड़ा विरोध करते हैं।</p>
<p>उन्होंने सत्ता पक्ष से कहा, "आप ओबीसी को, दलितों को हिन्दू तो कहते हैं लेकिन सत्ता में उन्हें स्थान नहीं देते। आप इन्हें हिन्दू तो कहते हैं, लेकिन इन्हें कोई स्थान नहीं देते। कार्पोरेट में ओबीसी, दलित कहां हैं, शिक्षा क्षेत्र में वंचित वर्ग कहां है, निजी क्षेत्र में ओबीसी-दलित कहां हैं। सार्वजनिक क्षेत्र से वंचित वर्गों को हटाया जा रहा है।" राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने वाला पुराना विधेयक लाइये, वह उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अतीत में ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यकों के लोगों के साथ बहुत क्रूर बर्ताव किया गया। अब यह विधेयक लाकर उनके साथ बिल्कुल वही काम किया जा रहा है। ऐसा काम किया जा रहा है, जिससे पिछड़ों और दलितों के हाथ में सत्ता कभी न आने दी जाये। उन्होंने कहा, " मनुवाद संविधान पर हावी है। "</p>
<p>विपक्ष के नेता ने कहा कि सरकार जनता को भ्रमित करना चाहती है, वह जानती है कि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होगा। वह महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के नाम पर चुनावी लाभ लेना चाहती है। अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं कहें, जो सदन की गरिमा और मर्यादा के खिलाफ हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:06:39 +0530</pubDate>
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                <title>विपक्षी दलों ने किया परिसीमन विधेयक का विरोध: लोकसभा सीटों में कमी होने की जताई आशंका, परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध किया है। कनिमोझी और शशि थरूर ने तर्क दिया कि नई व्यवस्था से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर तुरंत लागू करने और सहकारी संघवाद के तहत छोटे राज्यों के हित सुरक्षित करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/opposition-parties-opposed-the-delimitation-bill-expressed-fear-of-reduction/article-150823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shashi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में शुक्रवार को विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि विधेयक के इस रूप में पारित होने से दक्षिण और छोटे राज्यों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम होगा और उनके हक़ मारे जाने की आशंका बनी रहेगी। सदन में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( 137वां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर अधूरी रही चर्चा की शुरुआत करते हुए द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोझी ने आज कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन के बाद राज्यों की बढ़ने वाली लोक सभा की सीटें बढ़ाने का जो सूत्र बताया है उसे भविष्य में बदला जा सकता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि परिसीमन के मामले में सरकार अपना एजेंडा लागू कर सकती है। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को नकारा भी जा सकता है। ऐसी स्थिति में न्याय कहां मिलेगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की द्रमुक सरकार सहकारी संघवाद मानती है। द्रमुक सरकार ने महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के लिए केन्द्र को पत्र लिखा था, द्रमुक की महिला मोर्चा ने इसके लिए दिल्ली में रैली की थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भारतीय महिलाओं को शील्ड के रूप में इस्तेमाल कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आंकड़े दर्शाते हैं कि इस सरकार ने सदन में किये गये 80 से 90 प्रतिशत आश्वासनों को पूरा नहीं किया है। सरकार सहकारी संघवाद की भावना का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने महिलाओं को आरक्षण देने का विधेयक तुरंत लागू करने की मांग की। उन्होंने परिसीमन विधेयक को ऐसी संसदीय समिति को भेजने की मांग की जो सभी दलों के सदस्यों से सलाह-मशविरा करके अपनी रिपोर्ट दे। इस मामले में जल्दबाजी न करें और पूरी प्रक्रिया को कम से कम तीन महीने तक जनता के समक्ष रखे और सबकी राय के बाद ही महिला आरक्षण को लागू किया जाये।</p>
<p>कांग्रेस के शशि थरूर ने कहा कि विधायिका में महिला आरक्षण की व्यवस्था को तुरंत लागू किया जाये, इसे परिसीमन से जोड़कर क्यों रखा जा रहा है।उन्होंने कहा कि राज्यों की बढ़ने का जो सूत्र बताया गया है, उसे बदला भी जा सकता है। थरूर ने कहा कि लोक सभा में 850 सीटें हो जाने से यह बड़ी बोझिल हो जायेगी, कार्यवाही का संचालन बहुत दुष्कर हो जायेगा। प्रश्न काल और शून्य काल में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका कैसे मिलेगा। उन्होंने कहा,"हमें ऐसा सूत्र बनाना चाहिए जिससे छोटे-छोटे राज्य भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व कर सकें। हितधारकों और राज्यों के साथ व्यापक परामर्श करके सीटों का निर्धारण किया जाना चाहिए। ऐसी क्रियाविधि अपनायी जाये जिससे नया भारत आपस में विभाजित न हो।" उन्होंने कहा कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिण के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में महती योगदान दिया है और ये राज्य केन्द्र को तुलनात्मक रूप से अधिक राजस्व देते हैं जिससे केन्द्र सरकार चलती है।</p>
<p>ऐसी स्थिति में इन राज्यों के साथ लोक सभा सीटों के मामले में अन्याय न हो, इसके विधायी प्रावधान किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सरकार से कहते हैं, "कृपया देश हित में दूरदृष्टि रखें, छोटे-छोटे लाभ न देखें।" वाईएसआरसीपी के पी वी मिधुन रेड्डी ने चर्चा में शामिल होते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में सभी दलों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचाने का कार्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों के लिए कड़े कानून बनाये जायें। महिलाओं का सशक्तीकरण तभी हो सकता है जब उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाये जायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 17:34:39 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी की अपील : सोच-विचार कर संवेदनशीलता से महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें सांसद, आज होगी वोटिंग</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए सभी सांसदों से एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने मतदान से पहले सांसदों से अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और दशकों पुराने इस अधिकार को सुनिश्चित करने की अपील की। पीएम ने कहा कि यह इतिहास रचने और देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का महान अवसर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modis-appeal-to-mps-to-vote-thoughtfully-and-sensitively/article-150805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi-maan-ki-baat.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए चल रही चर्चा के बीच सांसदों से सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लेने तथा महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करने की अपील की है। लोकसभा में यह चर्चा गुरुवार को शुरू हुई थी और मैराथन चर्चा तथा इस पर जवाब के बाद शाम को मतदान होना निर्धारित है। पीएम मोदी ने कल इस चर्चा में हिस्सा लेते हुए सांसदों से राजनीति से ऊपर उठकर इसका समर्थन करने को कहा था। शुक्रवार को उन्होंने मतदान से पहले सभी सांसदों से सोशल मीडिया के माध्यम से अपील कर कहा, "संसद में इस समय नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा चल रही है। कल रात भी एक बजे तक चर्चा चली है। जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है। </p>
<p>महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें। आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं। अब कुछ ही देर लोकसभा में मतदान होने वाला है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं… अपील करता हूं...कृपया करके सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें, महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें। मैं देश की नारी शक्ति की तरफ से भी सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा… कुछ भी ऐसा ना करें, जिनसे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों। देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम सभी पर है, हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है। कृपया करके नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का साथ दें।"</p>
<p>एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह सांसदों के लिए बड़ा अवसर है और वे अपनी मां , बहन, बेटी और पत्नी सभी का स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा के आधार पर निर्णय लें। उन्होंने कहा , "मैं सभी सांसदों से कहूंगा...आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए ...देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए। ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी… देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा। आइए… हम मिलकर आज इतिहास रचें। भारत की नारी को… देश की आधी आबादी को उसका हक दें।" उल्लेखनीय है कि सरकार ने वर्ष 2023 में महिलाओं को विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित किया था। अब इस कानून को अमल में लाने के लिए संबंधित अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:04:29 +0530</pubDate>
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                <title>विधायिका में महिलाओं को आरक्षण देने से किसी राज्य का सीटों का नुकसान नहीं होगा ; जो दल विरोध करेंगे, चुनावों में भुगतना पड़ेगा खामियाजा : पीएम मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में आश्वासन दिया कि महिला आरक्षण और परिसीमन से किसी राज्य या दल का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने विरोध करने वाले दलों को चुनावी नतीजों की चेतावनी देते हुए इसे राजनीति से ऊपर रखने की अपील की। पीएम ने इसे लैंगिक समानता और राष्ट्र विकास के लिए 'प्रायश्चित और गौरव' का क्षण बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/by-giving-reservation-to-women-in-the-legislature-no-state/article-150719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोक सभा में कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने से किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा और जो दल इसका विरोध करेंगे, उन्हें चुनावों में खामियाजा भुगतना पड़ेगा। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने से न तो पुरुषों के लिए सीटें कम होंगी और न ही किसी राज्य को सीटों के लिहाज से कोई नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि वह सदन में 'गारंटी' देने का तैयार हैं कि किसी दल या राज्य को इससे कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि देश की महिलायें सब देख रही हैं और जो दल महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने का विरोध करेंगे, उन्हें चुनावों में इसका नुकसान उठाना ही पड़ेगा</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,"मैं जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि दक्षिण, उत्तर, पूरब हो या छोटे-बड़े राज्य हों, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी। किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी। वह गारंटी देते हैं कि किसी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। वह इसका वादा करते हैं।" उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि 'गारंटी' के लिए तमिल भाषा में कोई शब्द हो तो वह उसे भी यहां बोलने के लिए तैयार हैं। पीएम मोदी ने परिसीमन विधेयक, 2026 संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर सदन में एक साथ हो रही चर्चा के दौरान कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने में पहले ही बहुत देरी हो चुकी है और अब यह क्षण आये हैं, जो राजनीतिक दल तकनीकी और अन्य बहानों से इसका विरोध करेंगे, उनका चुनावों में नुकसान होना तय है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने हालांकि इसका सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है लेकिन सदन में विभिन्न कारण पेश करते हुए इसका समर्थन नहीं करते। वे चुनावों में हालांकि इसका खामियाजा भी भुगतते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2023 में नारी वंदन विधेयक जब सदन में लाया गया तो सभी दलों ने इसका समर्थन किया, जिससे 2024 के आम चुनावों के दौरान यह मुद्दा-विषय ही नहीं बना। पीएम मोदी ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने देखा है कि महिलाएं जिन-जिन क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका में रहीं, वहां बेहतर काम हुए। उन्होंने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने से लाखों महिलायें नेता बन चुकी हैं। उन्हें अब और आगे बढ़ाने का वक्त आ गया है। जो दल इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि एक बार महिलाओं को लोक सभा और विधानसभा में आने तो दीजिए, वे निर्णय करेंगी कि आगे क्या करना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नारी शक्ति देश का गौरव बढ़ाने वाली है। वह विपक्षी दलों से अपील करते हैं कि इस विषय को राजनीति के तराजू से न तौलिए। उन्होंने कहा, " नारी शक्ति हमारे निर्णय देखेगी, निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत देखेगी। यदि इसका विरोध करते हैं, तो नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी। यह समय की मांग है, ज्यादा विलंब न करें। "पीएम मोदी ने कहा कि जब नीयत साफ हो तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, " हम भ्रम में न रहें, हम अहंकार में न रहें। नारी शक्ति देख रही है। उसका हक है, हमने कई दशक तक उसे रोककर रखा है। इससे प्रायश्चित करके, उससे मुक्ति का यह समय है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "बहानेबाजी और तकनीकी बातों काे अब छोड़ दें, तीन दशक तक हम इसे नहीं कर पाये, अब तो करें। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए। सर्वसम्मति से इसे पारित करें। नारी शक्ति की राष्ट्र के विकास में सहभागिता सुनिश्चित करें। हम आग्रह करते हैं कि सर्वसम्मति से इस पर आगे बढ़ें। हम इसे राजनीतिक तराजू में न तौलें। इसे पारित करने से अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और किसी का हक नहीं मारा जायेगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 18:43:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय सर्वसम्मति से हो, इसका श्रेय विपक्ष को देने को भी मैं तैयार हूं : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले विधेयकों का विरोध करने वाले दलों को राजनीतिक नुकसान की चेतावनी। उन्होंने सभी दलों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि यह विधेयक देश की दिशा तय करेंगे। मोदी ने कहा कि सर्वसम्मति से पारित होने पर सभी दलों को राजनीतिक लाभ मिलेगा और महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-i-am-ready-to-give-credit-to-the-opposition/article-150706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोक सभा में कहा कि महिलाओं को विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े विधेयकों का जो दल विरोध करेंगे, उनका राजनीतिक नुकसान होना निश्चित है।</p>
<p>मोदी ने परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( एक सौ इकतीसवां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर एक साथ हो रही चर्चा के दौरान कहा कि जो दल इन विधेयकों का राजनीतिक कारणों से विरोध कर रहे हैं, उन्हें चुनावों में इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने सभी दलों से इन विधेयकों का समर्थन करने का आग्रह करते हुए कहा कि वह इसका श्रेय उन्हें देने को तैयार हैं। वह सरकार की ओर से विज्ञापन देकर इसका समर्थन करने वाले विपक्षी दलों का इसका श्रेय देने के साथ-साथ विपक्षी नेताओं के चित्र भी विज्ञापनों में छपवा देंगे।</p>
<p>मोदी ने कहा- यह विधेयक देश की दिशा और दशा तय करने वाले साबित होंगे। उन्होंने कहा- इस अवसर को हम जाने न दें। सर्वसम्मति से इन्हें पारित करें। हम शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने वाले सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति और देश की दशा तथा दिशा तय करने वाला होगा। देश आगे बढ़ रहा है। हम चाहते हैं कि विकसित भारत में'सबका साथ, साथ विकास समाहित हो।पचास प्रतिशत जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने, हमें ऐसी व्यवस्था करनी ही चाहिए। पहले ही बहुत देर हो गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का यदि सभी दल साथ देते हैं तो इसका लाभ किसी एक पक्ष में नहीं जाएगा। सभी दल इसका राजनीतिक लाभ ले सकेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 17:27:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल का लोकसभा में जवाब: बिजली के स्मार्ट मीटर वैकल्पिक हैं अनिवार्य नहीं, बिजली की चोरी रोकने की दिशा में ठोस कदम</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि देश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं बल्कि पूर्णतः वैकल्पिक हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी उपभोक्ता पर इसे जबरन नहीं थोपा जाएगा। हालांकि, बिजली चोरी और घाटा रोकने के लिए डिफॉल्टरों पर सख्ती जारी रहेगी। उपभोक्ता अपनी सुविधानुसार कभी भी इस सेवा को चुन या हटा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/union-energy-minister-manohar-lals-reply-in-lok-sabha-smart/article-148808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/manoha-lal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने लोकसभा में कहा है कि देश में बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक हैं और जो उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाना चाहते हैं उन्हें ही यह सुविधा दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कहीं जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगाये जा रहे हैं। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि प्रीपेड बिजली मीटर स्मार्ट व्यवस्था वैकल्पिक व्यवस्था है और इस सुविधा का फायदा जो उपभोक्ता लेना चाहता है यदि उसका लाभ उपभोक्ता लेना चाहता है तो उसको यह दिया जाएगा और इसके लिए उसे पहले सिक्योरिटी देनी पड़ेगी और यदि वह बाद में प्रीपेड वापस लेता है तो उसकी सिक्योरिटी भी वापस कर दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी का प्रावधान वैकल्पिक है आवश्यक नहीं है। उपभोक्ता जब चाहे उसे हटा सकता है और अपनी सुविधा अनुसार बिजली सुविधा का लाभ ले सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रीपेड मीटर से कई राज्यों को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि कहीं भी कोई प्रीपेड मीटर जबरन नहीं लगाया जा रहा है और यदि कहीं ऐसी सूचना है तो उसे पर ध्यान दिया जाएगा। उनका कहना था कि कई राज्यों में डिफाल्टर उपभोक्ता लंबे समय से बिजली का बिल नहीं दे रहे हैं उनके लिए आवश्यक कर दिया गया है कि जब तक बिजली का बिल नहीं देंगे तब तक वहां बिजली सुविधा नहीं दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जहां प्रीपेड हुआ है वहां कंपनियों का घाटा कम हुआ है और हर उपभोक्ता बिजली का भुगतान कर रहा है जबकि पहले यह उल्टा था लोग बिजली का बिल न भरना स्वाभिमान की बात मानते थे। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार बिजली की चोरी रोकने के लिए कदम उठा रही है और इसमें जो भी जरूरी होगा उपाय किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 16:20:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लोकसभा में विपक्ष का केंद्र पर हमला: आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पर जताया रोष, अमरावती को राजधानी बनाने के लिए प्रदेश को मिले आर्थिक मदद</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाने हेतु ऐतिहासिक विधेयक पेश हुआ। टीडीपी और भाजपा ने इसे विकास का आधार बताया, जबकि विपक्ष ने किसानों के पुनर्वास और आर्थिक सहायता की मांग की। वाईएसआरसीपी ने भूमि विवादों का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया, लेकिन विधेयक से राजधानी परिवर्तन पर पूर्ण विराम लगना तय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/opposition-in-lok-sabha-attacks-the-center-and-expresses-anger/article-148718"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में बुधवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा में शामिल होते हुए विपक्षी सदस्यों ने कहा कि अमरावती को राज्य की राजधानी बनाने काे कानूनी रूप से अनिवार्य किये जाने का तो वे स्वागत करते हैं, लेकिन राज्य को करों से छूट देने और इसके लिए जमीन देने वाले किसानों के पुनर्वास के समुचित उपाय न किये जाने पर रोष जताया। चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के मणिक्कम टैगाेर ने कहा कि वह इस विधेयक के पक्ष में हैं, लेकिन आंध्रप्रदेश को आर्थिक सहायता की जरूरत है। उसे करों में छूट दी जानी चाहिए। अमरावती को राजधानी बनाने के लिए पर्याप्त राशि दी जानी चाहिए। वह चाहते हैं कि अमरावती विश्व स्तरीय राजधानी बने, लेकिन उसे विशेष क्षेत्र के अधिकार प्राप्त हों। इसके लिए केन्द्र सरकार को आर्थिक मदद भी देनी चाहिए।</p>
<p>संचार राज्य मंत्री एवं तेलुगूदेशम पार्टी के डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासामी ने कहा कि इस विधेयक के संसद से पारित हो जाने के बाद अमरावती आंध्रप्रदेश की राजधानी बनेगी और भविष्य में कोई भी सरकार राज्य में आये, राजधानी नहीं बदल पायेगी। उन्होंने कहा कि वह बहुत खुश हैं कि आज यह विधेयक सदन में लाया गया है, जिससे अमरावती को आंध्रप्रदेश की राजधानी बनाया जा सकेगा। अमरावती कृष्णा के तट पर स्थित है। हजारों किसानों ने इसके लिए जमीन दी है, वे अमरावती को राजधानी बनाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और इसके लिए धरने पर भी बैठे हैं।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के सी एम रमेश ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी शहर को राजधानी बनाने के लिए विधेयक लाया गया हो। इस विधेयक के माध्यम से अमरावती को आंध्रप्रदेश की राजधानी बनाने को अनिवार्य किया गया है। इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद यह सुनिश्चित होगा कि अमरावती ही राजधानी हो। उन्होंने कहा कि राज्य की पूर्ववर्ती वाईएसआरसीपी सरकार ने प्रदेश में तीन राजधानियां बनायी थीं, विश्व में कहीं ऐसा है कि किसी देश या प्रदेश की तीन-तीन राजधानियां हों। अमरावती के राजधानी बन जाने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य में उद्योग स्थापित होंगे। राजस्व में बढ़ोतरी होगी और राज्य विकसित होगा।</p>
<p>वाईएसआरसीपी के पीवी मिधुन रेड्डी ने कहा कि अमरावती में 34 हजार एकड़ भूमि किसानों से ली जा चुकी है, इसके अलावा और भूमि भी लेने के प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य की राजधानी बनाने के लिए आखिर कितनी भूमि की आवश्यकता है। जिन किसानों की भूमि ली गयी है, उनके पुनर्वास के कोई उपाय नहीं किये गये है। वादे के अनुसार उन्हें घर नहीं दिये गये, उनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा नहीं दी जा रही है। किसानों को भूखंड कब दिये जायेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य कर्ज में डूब रहा है, सरकार के पास राजस्व नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अमरावती के पास पांच से 10 लाख रुपये प्रति एकड़ भूमि खरीद ली गयी जो अब करोड़ों रुपये प्रति एकड़ हो गयी है। गलत तरीकों से धन कमाने के वहां खेल चल रहे हैं। उन्होंने आंध्रप्रदेश को आर्थिक सहायता दिये जाने की मांग की। रेड्डी ने कहा कि पूरे राज्य को विकसित करने के लिए समान रूप से निधि की आवश्यकता होती है। राज्य सरकार का पूरा जोर अमरावती पर केन्द्रित है, जो उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि अमरावती को राजधानी बनाने की समय सीमा निर्धारित की जाये। यह विधेयक अर्थहीन है। वह इस रूप में इसका विरोध करते हैं। इसके बाद वाईएसआरसीपी के सांसद सदन से बहिर्गमन कर गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 14:55:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>''विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक'' का विरोध : विपक्ष का संसद में प्रदर्शन, गैर सरकार संगठन-संस्थाओं को लाभ पहुंचाने का आरोप; सरकार से वापस लेने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में पेश होने वाले विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध जताया। सांसदों का आरोप है कि यह कानून एनजीओ और सामाजिक संस्थाओं को निशाना बनाने की मंशा से लाया गया है। विपक्ष ने सरकार से इस विवादित विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/oppositions-demonstration-in-parliament-against-the-foreign-contribution-regulation-amendment/article-148685"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/parliament.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस तथा अन्य कई विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन परिसर में बुधवार को लोकसभा में पेश होने वाले 'विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026' के विरोध में प्रदर्शन किया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। विपक्षी दलों के सांसदों ने हाथों में बैनर लेकर नारेबाजी की और कहा कि यह विधेयक गैर सरकार संगठन (एनजीओ) तथा संस्थाओं को लक्ष्य करने की मंशा से लाया जा रहा है इसलिए सरकार को इसे तत्काल वापस लेना चाहिए।</p>
<p>गौरतलब है कि, लोकसभा में आज विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हो सकती है। यह विधेयक विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम 2010 में संशोधन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 14:03:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>टिकटों की दलाली करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई: ट्रेनों में कितनी होती हैं जनरल और स्लीपर डिब्बों की संख्या? रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रश्नकाल में बताया सबकुछ</title>
                                    <description><![CDATA[रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में घोषणा की कि ट्रेनों में अब 70% स्लीपर और सामान्य कोच हैं, जिससे आम यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। दलाली रोकने के लिए 3 करोड़ फर्जी अकाउंट हटाए गए हैं। सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि 'कवच' और आधुनिक सुरक्षा उपायों के कारण ट्रेन दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/strict-action-against-those-who-broker-tickets-how-many-general/article-147845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rail-minister1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोक सभा में बताया कि ट्रेनों में 70 प्रतिशत स्लीपर और सामान्य डिब्बे लगाये गये हैं। वैष्णव ने प्रश्नकाल में बताया कि कुल ट्रेनों में 78 प्रतिशत सीटें स्लीपर और सामान्य डिब्बों की हैं। उन्होंने बताया कि गर्मियों और त्योहारों के समय तथा भीड़ बढ़ने के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेन चलायी गयी हैं, जिससे यात्रियों को बहुत सहूलियत हुई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि आरक्षित टिकटों के लिए दलाली करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गयी है। उन्होंने कहा कि आईआरसीटीसी की वेबसाइट से तीन करोड़ फर्जी एकाउंट हटाये गये हैं। अब आम लोगों को कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होने लगी है।</p>
<p>रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि ट्रेन दुर्घटनायें रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किये गये हैं और इसके नतीजे भी बहुत अच्छे आये हैं। दुर्घटनाएं कम हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 18:01:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विदेशी फंडिंग पर सरकार का पहरा: लोकसभा में विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पुरः स्थापित, नित्यानंद राय ने देशहित वाला विधेयक बताया</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पेश किया गया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे पारदर्शिता और देशहित के लिए जरूरी बताया, जबकि विपक्ष ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन और शक्तियों का केंद्रीकरण करार दिया। यह कानून विदेशी चंदे को जवाबदेह बनाने और निजी स्वार्थ के लिए दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से लाया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/to-make-foreign-funding-transparent-and-accountable-the-foreign-contribution/article-147844"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/parliament1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पुरः स्थापित किया गया जो विदेशी फंडिंग को पारदर्शी और उत्तरदायी बनायेगा। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 सदन में पेश करते हुए कहा कि यह आवश्यक संशोधन विधेयक है। उन्होंने कहा कि यह सेवा, पारदर्शिता और देशहित वाला विधेयक है। उन्होंने कहा कि विदेशी अभिदाय (विनियमन) अधिनियम 2010 को संशोधित करने के लिए इस विधेयक को लाया गया है। </p>
<p>इस कानून में पारदर्शी और उत्तरदायी ढांचा बनाने के लिए संशोधन विधेयक को लाया गया है। उन्होंने कहा कि नामित प्राधिकरण को दिये गये अधिकार नियमों के अधीन है। विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान को पारदर्शी बनाना है। कोई भी संस्था जो देश की भावना और कानून के अनुरुप होगा उसे यह विधेयक बाधित नहीं करेगा। देशहित के खिलाफ कोई काम करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई किया जायेगा।</p>
<p>गृह राज्य मंत्री ने विपक्ष के आरोपों के जवाब में कहा कि यह खतरनाक उसके लिए होगा जिसके नीयत में खोट होगा। जो अपनी संस्था को निजी लाभ पहुंचाना चाहेगा उसके लिए यह अवश्य खतरनाक है। इससे पहले कांग्रेस के मनीष तिवारी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसमें आवश्क विधायी शर्ते होनी चाहिए थी वह नहीं है। इससे यह संसद के अधिकारों को भी कम करता है इसलिए इस विधेयक के इस फार्म में पेश नहीं किया जाए।</p>
<p>कांग्रेस के एडवोकेट गोवाल कागदा पडवी ने कहा कि इसमें केंद्र के पास अधिक शक्तियां देता है और संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करने वाला है। यह विधेयक अनुच्छेद 25 और 26 का भी उल्लंघन करता है। तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह बहुत खतरानाक है। इसमें शक्तियों को केंद्रीकृत किया गया है। यह संविधान की मूल रुप रेखा का उल्लंखन होता है इसलिए वह इस विधेयक का विरोध करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 17:44:33 +0530</pubDate>
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                <title>प्रल्हाद जोशी का लोकसभा में जवाब: हर पात्र व्यक्ति को मिल रहा मुफ्त राशन, दुकान से बिना राशन वापस नहीं जा रहे लोग</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लोकसभा में आश्वस्त किया कि प्रमाणीकरण की कमी के बावजूद किसी भी पात्र लाभार्थी को मुफ्त राशन से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राशन दुकानदारों का कमीशन और आवंटन राज्य सरकारों के अधीन है। मध्य प्रदेश में 100% राशन कार्ड आधार से लिंक हो चुके हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pralhad-joshis-answer-in-lok-sabha-every-eligible-person-is/article-147850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rashan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को लोक सभा में कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को सरकार की मुफ्त राशन वितरण योजना के तहत राशन पाने से वंचित नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>प्रल्हाद जोशी ने प्रश्न काल में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन कार्ड प्रमाणीकरण एवं अन्य औपचारिकतायें पूरी न होने पर भी राशन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पात्र व्यक्ति को राशन की दुकान से बिना राशन वापस नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में बताया कि राशन दुकानों का आवंटन एवं राशन दुकानदारों का कमीशन राज्य सरकारें तय करती हैं। केन्द्र सरकार का इन मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं होता।</p>
<p>उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में बताया कि मध्य प्रदेश में शत-प्रतिशत राशन कार्ड आधार से लिंक कर दिये गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 15:43:07 +0530</pubDate>
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