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                <title>wires - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बिजली के तार बन रहे वानरों के लिए काल, तीन विभागों के बीच पिस रहे घायल बंदर</title>
                                    <description><![CDATA[पशु प्रेमी भुवन मलिक कर रहे घायल बंदरों की सेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/electric-wires-are-becoming-a-death-trap-for-monkeys--and-injured-monkeys-are-being-crushed-between-three-departments/article-134632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। निराश्रित गायों व आवारा श्वानों को पकड़कर निगम की गौशाला तक पहुंचाने की व्यवस्था है। लेकिन शहर में रोजाना घायल हो रहे कई बंदरों को समय पर उपचार दिलाने की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम, वन विभाग व पशु चिकित्सालय के बीच पिस रहे घायल बंदरों को समय पर उपचार नहीं मिल रहा। ऐसे में पशु प्रेमी भुवन मलिक स्वयं के खर्च पर घायल बंदरों की सेवा कर रहे हैं। पशुप्रेमी व योगाचार्य भुवन मलिक ने बताया कि उनके पास कुछ दिनों से घायल बंदरों के संबंध में कई फोन आ रहे हैं। वे उन्हें रेस्क्यू करके उनके इलाज के लिए नगर निगम में संपर्क करते हैं तो वहां से जिम्मेदारों द्वारा व्यस्त होने की सूचना मिलती है। वहीं पशु चिकित्सालय में इनके इलाज के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं होती है। जंतुआलय लेकर जाने पर वहां से जवाब मिलता है कि उनके यहां काले मुंह के बंदरों की ही व्यवस्था है। लाल मुंह का बंदर जंगली जीवों में आता है इनकी व्यवस्था नगर निगम करता है वहीं लेकर जाओ।</p>
<p>उन्होंने बताया कि घायल बंदरों के लिए न तो कोई अलग से बजट है न ही कोई विभाग। नगर निगम में व्यवस्था बताई जाती है तो वह भी न के बराबर कार्य करती है। उन्होंने बताया कि एक वृद्ध दंपत्ति व एक घर में कुछ महिलाएं और बच्चियां थी जो खुद घायल वानर के लिए कुछ कर सकने के सक्षम नहीं थी। उन्हें सूचना मिली तो वे अपने खर्चे से उसे पशु चिकित्सालय लेकर गए। वे लगातार इन घायल पशुओं की सेवा कर पा रहे हैं। लेकिन हर किसी के लिए यह सेवा कर पाना संभव नहीं है । जिससे लोग घायल वानरों की सेवा करने से पीछे हट रहे है।</p>
<p>पशुप्रेमी व योगाचार्य भुवन मलिक ने बताया कि वन भूमि खत्म होती जा रही है और कोटा सिमटता जा रहा है। विशाल वृक्ष अब बढ़ते शहरीकरण में खत्म होते जा रहे हैं और इसी के कारण वानर शहर में इधर उधर अपना पेट भरने और पनाह के लिए भटक रहे हैं। शहर में कहीं न कहीं जब तब बंदर दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। कोई वाहन की चपेट में आ कर जान गंवा रहा है तो कोई बिजली के खंभों पर करंट की चपेट में आकर घायल हो रहे है। घायल इंसान के लिए रुकने वाले बहुत लोग हैं, इंसानों के लिए एंबुलेंस हैं, गाय के लिए भी हैं, कुत्तों के लिए भी कई पशु कल्याण संगठन काम कर रहे हैं। जबकि कोटा शहर में बंदरों के लिए कौन सेवा कार्य कर रहा है किसी को कोई खबर नहीं है। कुछ समाजसेवी प्रेमी बंदरों के लिए भी कार्य कर रहे हैं किंतु प्रशासन द्वारा उन्हें किसी भी प्रकार की सहायता न दिए जाने से वे भी लाचार हो गए हैं। शहर में लगभग हर दिन कोई वानर दुर्घटना का शिकार होता है। ज्यादातर घटनाएं बिजली के तारों पर झुलसने से हो रही हैं। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वे शहर से उत्पाती बंदरों को पकड़वाते हैं। इसके लिए टेंडर किया हुआ है। संवेदक फर्म के माध्यम से शिकायत पर बंदरों को पकड़कर शहर से दूर जंगल में छोड़ा जाता है।</p>
<p>इधर पशु चिकित्सालय के संयुक्त निदेशक गणेश नारायण दाधीच ने बताया कि घायल पशुओं के लिए 1962 पर कॉल कर वाहन मंगवाया जा सकता है। साथ ही पशु चिकित्सालय में किसी भी तरह के घायल पशुओं का उपचार किया जाता है। फिर चाहे वह गाय हो या कुत्ता या फिर बंदर। यहां बंदरों के आने पर उनका भी उपचार किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 14:38:55 +0530</pubDate>
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                <title>झूलते बिजली तार बने हादसे का खतरा, ग्रामीणोंं की मांग जल्द हो समस्या का समाधान </title>
                                    <description><![CDATA[बहुत से तारों पर कट लगा हुआ है जिनके ऊपर कोई कवरिंग नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dangling-electric-wires-pose-a-risk-of-accidents--villagers-demand-a-quick-solution-to-the-problem/article-131169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/y-of-news-(3).png" alt=""></a><br /><p> खानपुर।  खानपुर स्टेट बैंक की गली जो की एक निजी विद्यालय की तरफ जाती है, गली के बीच में रोड पर लाइट के तारों का जंजाल बना हुआ है। यह तार इतने नीचे झूल रहे हैं कि कभी भी किसी की जान ले सकते हैं। इन तारों में बहुत से तारों पर तो कट लगा हुआ है जिनके ऊपर कोई कवरिंग नहीं है कभी भी खतरे का सामना हो सकता है। निजी विद्यालय से आने वाले छात्र व छात्राओं के लिए भी यह एक मार्ग है, इस मार्ग से उनका आना-जाना लगा रहता है और स्टेट बैंक से इस गली में आने वालों को भी कई परेशानी का सामना करना पड़ता है। आए दिन जानवर तो इससे चिपक जाते हैं इन तारों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है । ग्रामीणोंं ने मांग की है कि जल्द से जल्द झूलते बिजली के तारों की समस्या का समाधान किया जाए । </p>
<p>हमारे मोहल्ले वासियों के लिए यह एक मुख्य मार्ग माना जाता है इस मार्ग से ही हमारा बाजार आना वह जाना लगा रहता है तथा इस मार्ग से ही पूरे मोहल्ले वासियों का आवागमन होता है इन तारों पर ध्यान दिया जाए। <br /><strong>- उदय लाल मालव, ग्रामीण </strong></p>
<p>हमने विद्युत विभाग को कई बार अवगत भी कर दिया है लेकिन इसका कोई समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- राजा राम मेघवाल, कस्बेवासी</strong></p>
<p>खानपुर के स्टेट बैंक की गली वह एक निजी स्कूलों की गली दोनों का मुख्य मार्ग है यह रोड जिस पर तार झूल हुए हैं, यह झूले हुए विद्युत के तारों से कभी भी हादसा हो सकता है। <br /><strong>-सोहन मेघवाल, कस्बेवासी </strong></p>
<p>इन लाइट के तारों से कस्बेवासी परेशान है। विद्युत विभाग को भी अवगत करा दिया गया है, लेकिन विद्युत पोल लगाने में परेशानी आ रही है। <br /><strong>-सत्तू मालव, कस्बेवासी</strong></p>
<p>पहले भी विद्युत विभाग द्वारा नया विद्युत पोल लगाने गए थे लेकिन मोहल्ले में कुछ व्यक्ति को पोल लगाने से आपत्ति है, यदि मोहल्ले में किसी को आपत्ति नहीं रहती है तो नया विद्युत पोल लगा दिया जाएगा। <br /><strong>-महेश कुमार नागर, कनिष्क अभियंता विद्युत विभाग खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 16:21:29 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 54- वार्ड में सीवरेज के लिए खोदी सड़कें बनीं सिरदर्द</title>
                                    <description><![CDATA[ पार्कों की बदहाली: कर्मचारियों ने नाले का कचरा डाला खाली प्लॉट में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-54--roads-dug-for-sewerage-in-the-ward-became-a-headache/article-122694"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  शहर के बीच में स्थित कोटा नगर निगम दक्षिण वार्ड 54 के कुछ हिस्सों में स्थित तंग गलियां वार्डवासियों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। वहीं गलियों के टूटे डिवाइडर व सीवरेज डालने के लिए खोदी गई सड़क की मरम्मत भी सही नहीं हुई है। कॉलोनीवासियों को बारिश व रात के समय पर परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। वार्ड के सिद्धेश्वर महादेव पार्क के पीछे वाली गली में खाली प्लॉट को कॉलोनीवासियों ने कचरा प्वाइंट बना दिया है। वहीं सफाई कर्मचारियों ने भी नाला का कचरा भी उसी प्लॉट में डाल दिया। कचरे की सड़ांध से वहां से निकल रहे राहगीरों के लिए परेशानी बनी हुई है। वार्ड की राजीव गांधी नगर की मुख्य सड़क की खुदाई की गई जो आज तक सही नहीं हो पाई। सड़क में हो रखे गड्ढों से गिट्टी व मिट्टी निकलने से वाहन चालकों को काफी परेशानी हो रही है। कॉलोनियों की नालियां छोटी होने तथा निकासी व्यवस्था सही नहीं होने से पानी भरा रहता है। वार्डवासियों नितेश कुमार, दिनेश व नीरज कुमार ने बताया कि रात में  वाहनचालकों के पीछे दौड़ते रहते है, जिससे चोटिल होने का डर भी बना रहता है। वार्ड में बने सीसी रोड पर स्पीड ब्रेकर आने-जाने को दर्द दे रहे है।</p>
<p><strong> झूलते बिजली के तार से हादसे की आशंका</strong><br />वार्ड में रहने वालें तिजेंद्र कुमार व दीपक ने बताया कि घरों के नजदीक से गुजरने वाली विद्युत लाइन के तार घरों के सामने से गुजर रहे व काफी नीचे तक आ रहे हैं। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। इस संबंध में कई बार अधिकारियों को अवगत कराया पर समस्या का समाधान नहीं हुआ। जिसे कभी भी हादसा हो सकता हैं। </p>
<p><strong>पार्क बदहाली काशिकार</strong><br /> वार्ड में स्थित गजानंद पार्क, सिद्वेश्वर महादेव सहित पार्क में गंदगी के ढेर लगे हुए है तथा फव्वारें भी खराब है। पार्क की बदहाली के कारण घूमने आने वालों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।</p>
<p><strong>तंग गलियों में वाहन पार्किंग बनी परेशानी</strong><br />वार्ड की गजानंद पार्क वाली गली में वार्डवासियों की ओर से घरों के सामने कार पार्किंग करने से वार्ड की गलियां गांव की गलियों की संकरी हो गई है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />आई.एल. कॉलोनी रेजीडेन्स, राजीव गांधी नगर, महावीर नगर प्रथम, पत्रकार कॉलोनी का क्षेत्र वार्ड में आता हैं। </p>
<p>वार्ड की सड़क सीवरेज डालने के लिए खोदी गई थी। सीवरेज लाइन डालने के बाद अभी तक सड़क की मरम्मत नहीं की गई। जिसे परेशानी आती हैं। <br /><strong>-अनिश </strong></p>
<p>घर के सामने स्थित गजानंद पार्क में कचरा जमा हो रखा है। वहीं सिद्धेश्वर पार्क में लाइट काफी दिनों से बंद है। शाम को पार्क में घूमने आने वाले लोगों के लिए अंधेरा बना रहता है।<br /><strong>- त्रिलोकचंद </strong></p>
<p>महादेव वाटिक के पीछे स्थित गली में डिवाइडर बनाने व नाली बंद होने से बारिश के समय का पानी निकलने में परेशानी आती हैं। इस समस्या के बारे में कई बार पार्षद सहित अधिकारियों को अवगत कराया पर परेशानी का समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>-हेमंत शर्मा </strong></p>
<p>अभी नया टेंडर हुआ है। बंद पार्क की लाइटों को चालू करने के लिए अधिकारियों को बोल रखा हैं। साथ ही पौधरोपण में ट्रैक्टर व अन्य साधन लगे है, जिसे पार्क का कचरा उठाने में परेशानी आ रही हैं। <br /><strong>- योगेश शर्मा, वार्ड 54 पार्षद कांग्रेस</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 13:31:23 +0530</pubDate>
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                <title>सालों से खुदी पड़ी वार्ड की सड़कें, सफाई भी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड में कई समस्याएं है जिनका समाधान नहीं होने से वार्डवासी परेशान हो रहे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-of-the-ward-are-dug-up-since-years--no-cleaning-too/article-119492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अपनी अलग पहचान रखने वाला वार्ड 57 नई बसावट वाला इलाका है। लोग पुराने कोटा से निकल कर चंबल किनारे बसते गए और नयापुरा इलाका बसता गया। यह इलाका इतना फैल गया है अब इसके दो वार्ड हो गए हैं। वार्ड सत्तावन में बस स्टैंड, बस स्टैंड के पीछे का इलाका नयापुरा, मुक्तिधाम, कबिस्तान, हनुमान टेकडी, सब्जी मंडी का इलाका आता है। कहने को यह नयापुरा है लेकिन यहां नया कुछ भी नहीं है। समस्याओं का यहां अंबार लगा हुआ है। कोटा उत्तर नगर निगम का वार्ड नंबर 57 राजनैतिक उपेक्षा का शिकार हो रहा है। जिससे वार्ड के विकास कार्य बाधित हो रहे है। वार्ड में कई समस्याएं है जिनका समाधान नहीं होने से वार्डवासी परेशान हो रहे है। वार्ड में घरों के आगे से गुजरते विद्युत के तारों से हर समय करंट का खतरा बना रहता है। वहीं दूसरी और सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है। नालियां को ढक नहीं रखा जिससे मच्छर पनप रहे है। वार्ड पार्षद का कहना है कि पहले वो भाजपा में थी तो कांग्रेस बोर्ड उपेक्षा करता था अब कांग्रेस से वार्ड पार्षद है तो भाजपा बोर्ड वार्ड की उपेक्षा कर रहा है। राजनैतिक द्वेषता से वार्डवासियों का नुकसान हो रहा है। वार्ड के विकास कार्य ठप पड़े है। पार्षद का कहना है नगर निगम के अधिकारियों को कई बार सफाई व्यवस्था सुधारने, नालियों के निर्माण और अन्य कार्यो के  बारे में लिखित में दे रखा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वार्ड में उखड़ी सड़कों से वाहनधारियों को परेशानी हो रही है। मुक्तिधाम में चहुंओर गंदगी फैली है। बैठने की पर्याप्त व्यवस्थाए नहीं है। यही हाल कब्रिस्तान का है। वहां भी विकास की दरकार है।</p>
<p><strong>नहीं हो रही नियमित सफाई </strong><br />वार्ड में सफाई कर्मचारियों के नही होने के कारण वार्ड में कई दिनों तक सफाई नहीं होती है। नालियों से निकला गंदा कचरा कई दिनों तक घर के बाहर ही पड़ा रहता है। उसे उठाने वाले आते ही नहीं है। नालियां खुली होने से मच्छर पनप रहे है। जिससे बीमारियां फैलने का डर रहता है। मुक्तिधाम का विकास होना चाहिए यहां सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। लोगों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। स्नानघर नहीं है। मुक्तिधाम की नियमित सफाई नहीं होती है। <br /><strong>- पवन सैनी, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>उखड़ी सड़के दे रही दर्द</strong><br />वार्ड की उखड़ी सड़कों के कारण वाहनधारियों को भारी परेशानी हो रही है। बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी गड्ढों पानी भरने से होती है। रात में गड्ढे दिखाई नहीं देते है ऐसे कई बार लोग फिसल कर चोटिल हो चुके है। यह सब्जी मंडी सबसे पुरानी है। यहां कोटा, बूंदी और आसपास इलाके किसान इसी सब्जी मंडी में माल बेचने आते थे। बाद में फल सब्जी मंडी बन गई तो किसान वहां जाने लगे। सब्जी मंडी में अतिक्रमण और पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। लोग सड़क पर ही वाहन खड़े कर सब्जी खरीदते जिससे आए दिन जाम लग जाता है।<br /><strong>- फैजल शेख, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>घरों के आगे झूलते तार बन रहे परेशानी का कारण</strong><br />वार्ड के अधिकांश घरों के आगे से विद्युत लाइनों के तार गुजर रहे जिससे हर समय करंट का खतरा बना रहता है। कई लोगों ने तो तार को घर से दूर रखने के लिए प्लास्टिक के पाइप लगा रखे है। वहीं कई मकानों के ऊपर से लाइन निकल रही है ऐसे में छत व बालकॉनी में जाने से हमेंशा डर लगता है। <br /><strong>- पंकज साहु, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>नालियों का ढकान नहीं होने से फैल रहे मच्छर</strong><br /> वार्ड की अधिकांश नालियों को ढक नहीं रखा जिससे मच्छर पनप रहे है। पानी जमा होने से वार्ड में बदबू फैली रहती है। सफाई कर्मी नहीं आने से घर के सामने गुजर रही नाली को  निजी खर्च पर सफाई कर्मी लगाकर कई बार नालियों को साफ करवाया है। <br /><strong>- उदय सिंह राजावत, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />राजनिति कारणों कि वजह से वार्ड में कई सालों से काम नही करवा सकी, निगम में भाजपा का बोर्ड होने से मेरी कोई सुनवाई नही हो रही है, कई बार वार्ड कि समस्याओं के बारे में निगम के अधिकारीयों को मौखिक व लिखित के माध्यम से अवगत करवाया लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब नहीं मिला। जिसके कारण वार्डवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्मशानघाट के विकास के लिए भी कई बार अधिकारियों को लिखित दे रखा है कोई सुनवाई नहीं हो रही है। <br /><strong>- मेघा गुर्जर, पार्षद वार्ड 57</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jul 2025 14:31:09 +0530</pubDate>
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                <title>खंभों पर झूलते अवैध तारों का जाल बना जंजाल </title>
                                    <description><![CDATA[एक तरफ करंट से हादसों का डर तो दूसरी ओर बिजली गुल होने से परेशानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-network-of-illegal-wires-hanging-on-the-poles-has-become-a-mess/article-96772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के अंदरुनी इलाकों में बिजली के खंभों पर झूलते तार व केबलों का जाल लोगों के लिए अब जी-जंजाल बन गया है। जिम्मेदारों की लापरवाही से क्षेत्रवासियों को दोहरी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गली-मोहल्लों व कॉलोनियों में बिजली के तार व केबलें इतने नीचे की ओर झूल रहे हैं कि आए दिन लोडिंग वाहनों में उलझकर टूट रहे हैं। जिससे करंट का खतरा तो बढ़ ही रहा है, साथ ही बिजली गुल होने से दिनचर्या प्रभावित हो रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है, निजी बिजली कम्पनी व जेवीवीएनएल से शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं हो रहा। </p>
<p><strong>बिजली खंभों पर अवैध तारों का जाल</strong><br />विज्ञान नगर छत्रपुरा तालाब, गांधी नगर, संजय नगर, दोस्तपुरा, सकतपुरा, सब्जीमंडी, छावनी सहित विभिन्न इलाकों में लगे बिजली के खंभों पर विद्युत तारों के अलावा अन्य कम्पनियों के अवैध रूप से केबलें डाल रखी है, जिनकी ऊंचाई जमीन से 6 से 7 फीट तक है, ऐसे में लोडिंग वाहनों के आवागमन के दौरान तार उलझकर टूट जाते हैं। इनमें बिजली के तार भी टूट कर सड़कों पर गिर जाते हैं। जिससे बिजली गुल होने व करंट का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, शिकायत पर निजी बिजली कम्पनी के कर्मचारी मौके पर पहुंच समाधान कर जाते हैं लेकिन अवैध रूप से लगे अन्य कम्पनियों के तारों के जाल से बिजली के खंभे मुक्त नहीं हो पा रहे। </p>
<p><strong>लोडिंग वाहन में फंसकर टूटा तार</strong><br />विज्ञान नगर स्थित छत्रपुरा तालाब मुख्य मार्ग पर बिजली के खंभों पर विभिन्न तरह के तार लटक रहे हैं। गत सप्ताह शाम के वक्त लोडिंग वाहनों के गुजरने के दौरान तार उलझकर टूट गए। इसके साथ बिजली का तार भी टूट गया। जिससे इलाके की बिजली गुल होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं क्षेत्रवासी</strong><br />संजय नगर निवासी सुलेमान अहमद, मोहम्मद शाहरुख,  कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि क्षेत्र में बिजली के तार काफी नीचे तक झूले हुए हैं। इलाके में दुकानों पर माल सप्लाई करने आते लोडिंग वाहनों में उलझकर तार टूट कर सड़क पर पड़े रहते हैं। बिजली गुल होने से सड़क पर अंधेरा रहता है, ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।  छत्रपुरा तालाब व गांधी नगर निवासी रघुवीर सैन, रईस खान, मुख्तार अंसारी का कहना है, खंभों पर बिजली के तार के अलावा बड़ी संख्या में अन्य कम्पनियों के तार अवैध रूप से लगे हुए हैं। जिनका मेंटिनेंस नहीं होता। यह लटके रहते हैं। बरसात के दौरान हादसे का खतरा अधिक रहता है। नगर निगम व जेवीवीएनएल में भी शिकायत की थी लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है। समस्या जस की तस बनी हुई है। </p>
<p> मामला संज्ञान में आया है। कहीं ऐसे हालात हैं तो टीम भेजकर दिखवाएं और जिन कम्पनियों के तार झूल रहे हैं, उनसे दुरुस्त करवाएंगे।<br /><strong>- शिवचरण सिंह, एसई जेवीवीएनएल</strong></p>
<p>बिजली के खंभों पर विद्युत तारों की नियमित देखरेख की जाती है। यदि, अनुमति प्राप्त कम्पनी के तार लटके हुए मिलते हैं तो उसकी शिकायत जेवीएनएनएल से करते हैं, अन्य कम्पनियों के तारों व केबलों को हम काट देते हैं। <br /><strong>-अनोमित्रो डोली, तकनीकी हैड केईडीएल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 15:36:31 +0530</pubDate>
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                <title>ना खुद की चिंता ना दूसरों की जान की फिक्र</title>
                                    <description><![CDATA[विद्युत तारों और खंभों के मकान के नजदीक होने से हादसे की संभावना बनी रहती है और कभी बड़ा हादसा हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/neither-worried-about-oneself-nor-worried-about-the-lives-of-others/article-70745"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(9)6.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में मकानों और दुकानों में बिजली करंट से हुए कई हादसों में कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। लेकिन इतने हादसे होने के बाद भी शहर में कई जगहें ऐसी हैं जहां लोगों ने विद्युतीय खंभों को मकान के छज्जे के अंदर लिया हुआ है या 33 केवी और हाइटेंशन लाइन के तार मकान के उपर से निकल रहे हैं। बारिश के दिनों में ऐसे स्थानों से किसी के कंरट लगने की खबर आती रहती हैं। लेकिन प्रशासन से लेकर विद्युत विभाग और मेंटिनेंस कम्पनी सब मात्र नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। विद्युत तारों और खंभों के मकान के नजदीक होने से हादसे की संभावना बनी रहती है और कभी बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>शहर में कहां कहां ऐसे स्थान</strong><br />विद्युत अधिनियम के तहत निगम ने विद्युत लाइनों से दूरी के मापदण्ड निर्धारित किए हुए हैं, यदि इनसे कम दूरी है तो हादसे की संभावना ज्यादा है। जहां शहर में विज्ञान नगर, संजय नगर, इंदिरा गांधी नगर, बापू बस्ती कुन्हाड़ी, संतोषी नगर, विनोबाभावे नगर, प्रेम नगर, लाडपुरा, नयापुरा समेत कई ऐसे इलाके हैं, जहां लोगों ने अपने मकानों के छज्जों में ही बिजली के खंभों को चुनाया हुआ है। बरसात के दौरान खंभों और तारों के गीला होने से मकान में करंट उतरने के कई मामले सामने आते हैं, कई लोग तो करंट से अपनी जान भी गंवा चुके हैं। ऐसे ही प्रेम नगर क्षेत्र में मकानों के उपर से गुजर रही 33 केवी का एक तार कई बार टूट चुका है और इसकी चपेट में कई लोग और बच्चे आ चुके हैं इसके बाद भी हालात वहीं बने हुए हैं।</p>
<p><strong>तारों से कम से कम 1.2 मीटर दूरी जरुरी</strong><br />विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार भवन निर्माण करते समय बालकनी या छज्जों के निकट से गुजर रही विद्युत लाइन से कम से कम 1.2 मीटर की दूरी रखना अनिवार्य है। इससे कम दूरी घातक हो सकती है। विद्युत निगम की ओर से ऐसे उपभोक्ताओं को नोटिस जारी कर दिए जाते हैं, जिला प्रशासन को भी अवगत कराया जाता है, लेकिन इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। विद्युत निगम भी नोटिस की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझता है।</p>
<p><strong>तारों पर चढ़ा लेते हैं प्लास्टिक के पाइप</strong><br />जिन लोगों ने अपने मकानों को बिजली के खंभों तक बढ़ा लिया है, वे मकान के सामने गुजरने वाले तारों पर प्लास्टिक का पाइप बीच में से काटकर चढ़ा लेते हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में भी करंट का खतरा बना रहता है, तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार बिजली के तारों में धारा प्रवाह के दौरान मैग्नेटिक फील्ड बनता है और पाइप होने के बाद भी करंट लग सकता है। इसके साथ ही पाइप बीच में से कटा होने से बरसात में पानी व पाइप के संपर्क में होने के कारण मकान में करंट उतरने की भी आशंका रहती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विद्युत खंभों और तारों के पास मकान बनाने वालों को नोटिस दिया हुआ है। ऐसे में हादसे होने पर स्वयं मकान मालिक की जिम्मेदारी होगी। अगर किसी को तार या खंभा हटवाना है तो निगम को शिकायत कर सकता है।<br /><strong>- आर के जीनवाल, जोनल चीफ, जेवीवीएनएल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Feb 2024 18:40:57 +0530</pubDate>
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