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                <title>government departments - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>government departments RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपयों का पानी का बिल अब तक बकाया, मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद राजस्व वसूली का लक्ष्य अधूरा, विभाग 30 करोड़ राजस्व की ही कर सका वसूली।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-bills-worth-crores-remain-outstanding-against-government-departments/article-157017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(4)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पानी की हर बूंद का हिसाब रखने वाला जलदाय विभाग खुद अपने ही राजस्व की रक्षा करने में नाकाम रहा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को 78 करोड़ रुपए राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन पूरे वर्ष की कवायद के बाद विभाग महज 30 करोड़ रुपए ही वसूल कर सका। नतीजतन, सरकार को करीब 48 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो गया। गंभीर बात यह है कि सरकारी विभागों, औद्योगिक संस्थानों और हजारों उपभोक्ताओं पर वर्षों से करोड़ों रुपए पानी के बिल बकाया हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी वसूली अभियान चलाने के बजाय नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभाकर इतिश्री करते रहे। इस स्थिति ने विभागीय कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p><strong>कमजोर राजस्व प्रबंधन से सरकार को करोड़ों का नुकसान</strong><br />जलदाय विभाग की लापरवाही और कमजोर राजस्व प्रबंधन का खामियाजा सरकार को करोड़ों रुपए के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही जल विभाग टारगेट हासिल करने में रुचि नहीं दिखाता, पूरे वर्ष कुंभकरणीय नींद की आगोश में रहता है, जैसे ही वित्तीय वर्ष समाप्त होने की कगार पर पहुंचता है तब अफसरों की नींद टूटती है और टारगेट पूरा करने के लिए अफसर दौड़ते हैं लेकिन चुनिंदा महीनों में करोड़ों का राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा होना तो दूर आधा भी हासिल नहीं कर पाते। इसी का नतीजा है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्ति के बाद भी विभाग केवल 30 करोड़ रुपए की ही वसूली कर पाया और 48 करोड़ रुपए का लक्ष्य अधूरा रह गया, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचा है।</p>
<p><strong>सरकारी विभागों व उपभोक्ताओं पर 48 करोड़ बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी विभागों, स्वायत्त संस्थाओं, औद्योगिक इकाइयों और बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पानी के बिलों की करोड़ों रुपए की बकाया राशि वर्षों से बकाया चल रही है। इसके बावजूद जल अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। जबकि, सबसे ज्यादा पानी का बिल सरकारी महकमों पर बकाया चल रहा है। फिर भी उनके खिलाफ न तो कनेक्शन काटने की कार्रवाई की गई और न ही बकाया वसूली के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया। परिणामस्वरूप बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है और हर साल विभाग का राजस्व लक्ष्य अधूरा रह जाता है।</p>
<p><strong>नगर निगम और केडीए पर 103 करोड़ का बकाया</strong><br />जल अधिकारियों का कहना है कि राजस्व वसूली की राह में सबसे बड़ा अडंगा सरकारी महकमा ही है, जो करोड़ों रुपए बकाया राशि पर कुंडली मार बैठा है। जिसकी वजह से जलदाय विभाग का टारगेट पूरा होना असंभव बना हुआ है। इनमें सबसे बड़े बकायदार नगर निगम व केडीए है। दोनों विभागों पर कई वर्षों का 103 करोड़ रुपए पानी का बिल बकाया चल रहा है। जबकि, हमने 16 फरवरी को नोटिस भी दे चुके हैं और हर सोमवार को कलक्टर की अध्यक्षता में होने वाली अंतरविभागीय बैठकोें में भी मामले को उठाते हैं, इसके बावजूद न तो नगर निगम और न ही केडीए द्वारा बकाया जमा करवाया गया। नगर निगम कोटा उत्तर-दक्षिण पर 63 करोड़ तो केडीए पर 40 करोड़ रुपए पानी का बिल वर्षों से लंबित चल रहा है।</p>
<p><strong>गत वर्ष 36 करोड़ की हुई थी राजस्व वसूली</strong><br />गत वित्तीय वर्ष में विभाग को राजस्व वसूली का लक्ष्य 73 करोड़ रुपए मिला था। जिसमें से अधिकारी केवल 36 करोड़ का ही राजस्व हासिल कर सके थे, जबकि, 37 करोड़ रुपए बकाया रह गए थे। इस वर्ष 48 करोड़ रुपए का राजस्व बकाया रह गया।</p>
<p><strong>नोटिसों तक सीमित रही कार्रवाई</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश मामलों में जलदाय विभाग केवल नोटिस जारी कर इतिश्री कर लेता है। इसका सबसे बड़ा उदारहण फरवरी माह का है, विभाग ने केडीए व नगर निगम को बकाया जमा करवाने का नोटिस जारी किया था लेकिन बकायादारों से वसूली सुनिश्चित करने के लिए न तो नियमित फॉलोअप किया जाता है और न ही जवाबदेही तय की जाती है। यही कारण है कि बड़े बकायादारों में भुगतान को लेकर किसी प्रकार का दबाव महसूस नहीं होता।</p>
<p><strong>मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल</strong><br />राजस्व वसूली विभाग की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक मानी जाती है, लेकिन लक्ष्य और उपलब्धि के बीच 48 करोड़ रुपए का अंतर विभागीय मॉनिटरिंग और जल अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। केडीए व नगर निगम के अलावा, पुलिस, शिक्षा विभाग सहित अन्य कई सरकारी विभाग शामिल हैं, जिनके लाखों से करोड़ों का बकाया चल रहा है।</p>
<p><strong>जवाबदेही तय हो तो रफ्तार पकड़े वसूली अभियान</strong><br />जानकारों का मानना है कि बकाया वसूली के लिए विशेष अभियान चलाने, बड़े बकायादारों की सूची सार्वजनिक करने और जिम्मेदारों के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने से ही स्थिति में सुधार संभव है। अन्यथा हर वर्ष सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ता रहेगा।</p>
<p>सरकार से मिलने वाला वित्तीय राजस्व लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने के हमारी ओर से लगातार प्रयास किए जाते हैं। सबसे बड़े बकायादार केडीए व नगर निगम है। जिन्हें बकाया पानी का बिल जमा करवाने के लिए हर साल नोटिस दिया जाता है ओर जिला कलक्टर के समक्ष भी मामला उठाते हैं। गत 16 फरवरी को भी हमने दोनों नगर निगम व केडीए को इस संबंध में नोटिस जारी किए थे।<br /><strong>-दीपक कुमार झा, एक्सीईएन जलदाय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:15:08 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी विभागों पर बकाया है 135 करोड़ रुपए बिजली बिल</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली विभाग ने बकाया के चलते बूंदी मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल का बीते दिनों कनेक्शन काट दिया था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-departments-owe-135-crore-in-electricity-bills/article-148418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब मात्र तीन दिन शेष है। ऐसे में हर विभाग द्वारा उनके बकाया लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। नगर निगम से लेकर परिवहन विभाग तक और बिजली विभाग से लेकर राजस्व से संबंधित अन्य विभागों में इस दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। हालत यह है कि कोटा संभाग में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) के बिजली बिलों के भी करोड़ रुपए बकाया है।जानकारी के अनुसार कोटा संभाग में जेवीवीएनएल के बिजली बिलों का 245 करोड़ रुपए बकाया है। जिनमें से 135 करोड़ रुपए सरकारी विभागों पर है। अकेले नगरीय निकाय विभागों पर 80 करोड़ से ज्यादा की बिजली बिलों की राशि बकाया है।</p>
<p>संभागीय मुख्य अभियंता गजेंद्र सिंह बैरवा ने बताया कि उनके 5.85 लाख उपभोक्ता हैं। जिन पर करीब 245.61 करोड़ रुपए बिजली के बिल का बकाया है। इनमें से करीब आधे से ज्यादा 135.60 करोड़ रुपए सरकारी विभागों का है। जिसकी वसूली का प्रयास किया जा रहा है। कई विभाग आकस्मिक सेवा के है, इसलिए सप्लाई को रोक नहीं सकते हैं. इसके बावजूद भी वसूली अभियान चलाया हुआ है। सभी अधिशाषी और सहायक अभियंताओं को रिकवरी के लिए निर्देशित किया गया है.</p>
<p><strong>नगरीय निकायों पर 80.61 करोड़ बकाया</strong><br />बैरवा के अनुसार सरकारी विभागों में भी नगरीय निकायों पर 80.61 करोड़ रुपए की राशि बकाया है। इसमें रोड लाइटों के साथ-साथ सरकारी पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर लगी लाइट शामिल है। बारां, बूंदी, झालावाड़ नगर परिषद के साथ कोटा नगर निगम व संभाग की सभी नगर पालिकाएं भी शामिल हैं। बिजली विभाग ने बकाया के चलते बूंदी मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल का बीते दिनों कनेक्शन काट दिया था।</p>
<p><strong>केंद्र सरकार के कार्यालयों पर 39 करोड़ बकाया</strong></p>
<p>संभाग में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा बकाया जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का है। जलदाय विभाग का करीब 33 करोड़ रुपए बिजली का बिल बकाया है। केन्द्र सरकार के कार्यालयों पर भी करीब 39 करोड़ रुपए बकाया है। जिनमें रेलवे, पोस्ट ऑफिस, इनकम टैक्स, एफ सीआई और अन्य विभाग शामिल हैं.</p>
<p><strong>इनके भी हैं बिल बकाया</strong><br />कोटा संभाग के चारों जिलों में 80 से ज्यादा पुलिस थाने हैं. इनके अलावा उच्च अधिकारियों के ऑफिस भी है। जिन पर करीब 6 करोड़ रुपए के बिजली बिल बकाया हैं।<br />संभागीय मुख्य अभियंता बैरवा का कहना है कि अधिकतर विभागों से मार्च में ही भुगतान आता है। कुछ विभागों ने पैसा जमा कराया भी है और शेष विभागों के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 15:02:21 +0530</pubDate>
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                <title>उधार की बिजली से रोशन हो रहे सरकारी दफ्तर</title>
                                    <description><![CDATA[सबसे ज्यादा नगर परिषद बून्दी पर करीब 29.54 करोड़ से अधिक बकाया ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/government-offices-being-illuminated-with-borrowed-electricity/article-73735"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/udhar-ki-bijle-s-roshan-ho-rhe-sarkari-daftar...bundi-news-26-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>बून्दी। बूंदी जिले के सरकारी विभागों पर लाखों का बिजली बिल बकाया होने के बावजूद डिस्कॉम यह सख्ती सरकारी विभागों पर नहीं दिखा पा रहा है। स्थिति यह है कि बून्दी जिले में सरकारी विभागों पर डिस्कॉम का करीब 53 करोड रूपए बिजली बिल के बकाया हैं। फिर भी बिजली विभाग की मेहरबानी से सरकारी विभागों के कनेक्शन नही काटना बड़े सवाल उठाता है। हालांकि डिस्कॉम द्वारा इन सरकारी विभागों को बकाया राशि जमा कराने के नोटिस जारी कर मात्र खानापूर्ति कर ली जाती है। लेकिन अभी तक भी डिस्कॉम विभाग ने कनेक्शन काटने की कार्यवाही नहीं की है। फिलहाल डिस्कॉम विभाग द्वारा शिविर लगाकर वसूली का प्रयास किया जा रहा हैं। एक ओर जहां राजस्थान सरकार बिजली उपभोक्ताओं को समय समय पर बकाया बिल चुकाने की नसीहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के ऐसे कई सरकारी विभाग है, जो वर्षों से बिजली के बिलों का भुगतान नहीं कर रहे है। यों कहे तो सरकारी विभागों के कार्यालय उधार की बिजली से रोशन हो रहे हैं। सामान्यतया आम उपभोक्ताओं के 3 महीनों का बिल बकाया होने पर डिस्कॉम की टीम बिजली कनेक्शन काटने पहुंच जाती है। लेकिन सरकारी विभागों पर लाखों का बिजली बिल बकाया होने के बावजूद डिस्कॉम यह सख्ती सरकारी विभागों पर नहीं दिखा पा रहा है। </p>
<p><strong>सरकारी विभागों पर हैं बकाया 5318.52 लाख</strong><br />बून्दी जिले के सरकारी विभागों में डिस्कॉम की बकाया राशि 5318.52 लाख तक पहुंच चुकी है। यह वसूली शत प्रतिशत होने पर विभाग की माली स्थिति में खासा सुधार आ सकता है, लेकिन सरकारी विभाग से बकाया राशि वसूली में डिस्कॉम के सारे हथकंडे फैल है। विभागों के उच्चाधिकारियों ने डिस्कॉम के समक्ष स्पष्ट कर दिया कि बजट आएगा तो देखेंगे, अभी नहीं है। हालांकि जेवीवीएनएल के अधीक्षण अभियंता के.के शुक्ला ने बताया कि सरकारी विभागों से वसूली के प्रयास जारी है। सरकारी विभाग है, इसलिए बकाया राशि देर सबेर आ जाएगी।<br />सरकारी विभागों की इस बकायादारों की सूची में बून्दी़ नगर परिषद, नगर पालिकाऐं, पीएचईडी, प्रशासनिक विभाग, चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग व ग्राम पंचायतें आदि शामिल है। सबसे ज्यादा नगर निकायों में नगर परिषद बून्दी पर करीब 29.54 करोड़ से अधिक बकाया है, जिसमें 19.95 करोड़ रोड लाईट के हैं। वहीं पंचायतों पर 4.23 करोड़, पीएचईडी के 3.52 करोड बकाया चल रहे हैं। इस बकाया की सूची में सबसे ज्यादा बकाया राशि 31.27 करोड़ रूपए स्थानीय निकायों पर रोड़ लाइट की हैं।</p>
<p><strong>किस विभाग का कितना बकाया-(29 फरवरी 2024 तक बकाया)</strong><br />-  प्रशासनिक कार्यालय - 6.65 लाख<br />-  शिक्षा विभाग - 19.29 लाख<br />-  स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग - 25.52 लाख<br />-  नगर पालिका (अन्य) - 1335.89 लाख<br />-  नगर पालिका (रोड़ लाइट) - 3127.50 लाख<br />-  पंचायत - 423.75 लाख<br />-  पीएचईडी - 352.23 लाख<br />-  पुलिस - 13.27 लाख<br />-  अन्य विभाग - 14.43 लाख</p>
<p><strong>सरकार ने लगाई कनेक्शन काटने पर रोक</strong><br />बकाया की वसूली करने और टारगेट पूरा करने के लिए मार्च में सबसे ज्यादा बिजली कनेक्शन कटते हैं। क्योंकि अधिकारियों को रेवेन्यू वसूली का लक्ष्य पूरा करना होता है। लेकिन जेवीवीएनएल द्वारा जयपुर डिस्कॉम एरिया के जयपुर, दौसा, कोटा, सवाई माधोपुर, बूंदी, बारां, झालावाड़, भरतपुर, करौली, धौलपुर, अलवर और टोंक जिलों में आगामी आदेशों तक मौजूदा बिजली कनेक्शनों को काटने पर रोक लगा दी है, जिससे अब बकाया राशि की वसूली में विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। हालांकि ज्यादा जरूरत होने पर डिस्कॉम एमडी या चेयरमैन से अनुमति लेकर कनेक्शन काटे जा सकते हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />जिन विभागों के बिजली बिल बकाया है, उन सभी विभागों को 26 मार्च तक के लिए नोटिस दिया गया है। उसके बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। वर्तमान में सरकार ने बिजली कनेक्शनों को काटने पर रोक लगा दी हैं, उच्च अधिकारियों को अवगत करवाएंगे।<br /><strong>- के.के. शुक्ला, अधीक्षण अभियंता,जेवीवीएनएल, बून्दी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2024 18:47:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यहां दिया तले अंधेरा...</title>
                                    <description><![CDATA[सड़के सही करने पर किसी भी विभाग के अधिकारी का ध्यान नहीं है, जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-darkness-under-here/article-71776"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/yha-diya-tale-andhera...kota-news-04-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिया तले अंधेरा... यह कहावत है जो उन सरकारी विभागों पर सही साबित हो रही है जो शहर में सड़कें बनाने का काम करते हैं। उन सरकारी विभागों के कार्यालय जाने वाली सड़कें ही बदहाल हो रही हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों और हाइवे तक की सड़क बनाने का काम करता है। लेकिन हालत यह है कि राज भवन रोड नयापुरा स्थित पी डब्ल्यूडी कार्यालय की तरफ जाने वाली सड़क ही बदहाल हो रही है। अदालत चौराहे से कार्यालय तक की सड़क पर कई जगह गड्ढ़े हो रहे हैं। डामर उखड़ा हुआ है। जिससे वहां जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं इसी रोड पर और कार्यालय के सामने ही पूर्व स्वायत्त शासन मंत्री व कोटा उत्तर से कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल का आवास भी है। एसबीआई बैंक है जहां रोजाना बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशन के लिए और महिलाएं व अन्य लोग आते हैं। जिनके सड़क के बदहाल होने से गिरने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण एसपी कार्यालय, अदालत और कई अन्य सरकारी कार्यालयों के अलावा लाडपुरा विधायक का आवास तक जाने की भी यही सड़क है। उसके बाद भी  न तो सार्वजनिक निर्माण विभाग और न ही नगर निगम व नगर विकास न्यास द्वारा सड़क को सही कराया जा रहा है। </p>
<p><strong>दो विभागों के बीच की जर्जर सड़क</strong><br />इसी तरह शहर के मुख्य मार्गों से लेकर वार्डों तक में डामर व सीसी रोड बनाने वाले नगर विकास न्यास कार्यालय जाने की सड़क ही जजर हो रही है। सीएडी रोड पर न्यास कार्यालय है। कार्यालय में वर्तमान में प्रवेश व निकास के अलग-अलग गेट हैं। मेन गेट से प्रवेश करने के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों और आमजन को वापस बाहर पीछे वाले गेट से निकलना पड़ रहा है। लेकिन हालत यह है कि पिछले गेट से निकलने के बाद मेन रोड पर आने वाली जो सड़क है उसका पूरा डामर उखड़ा हुआ है। जगह-जगह गड्ढ़े हो रहे हैं। हालत यह है कि इस रोड से निकलने वाले दो पहिया वाहन आए दिन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। </p>
<p><strong>कुछ समय पहले ही बनाई थी सड़क</strong><br />नगर विकास न्यास की ओर से इस रोड को कुछ समय पहले ही बनाया था। लेकिन उस सड़क की हालत काफी अधिक खराब हो रही है। पहले इस सड़क से न्यास कार्यालय जाने वाले लोग बहुत कम उपयोग करते थे। लेकिन जब से कार्यालय से निकास के लिए पिछले गेट से व्यवस्था की गई है। उसके बाद से इस सड़क पर वाहनों का आवागमन अधिक हुआ है। </p>
<p><strong>हाउसिंग बोर्ड कार्यालय भी इसी रोड पर</strong><br />सीएडी मेन रोड से हाउसिंग बोर्ड के उप आवासन आयुक्त कार्यालय तक जाने के लिए भी यही सड़क है। हाउसिंग बोर्ड का यह संभागीय कार्यालय है। लेकिन इस सड़क को सही करने पर किसी भी विभाग के अधिकारी का ध्यान नहीं है। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>बरसात में होगी अधिक परेशानी</strong><br />सरकारी कार्यालयों तक जाने की बदहाल सड़कों से बरसात के समय में अधिक परेशानी होगी। लोगों ने बताया कि बरसात से पहले यदि इन सड़कों को सही नहीं किया तो कीचड़ से होकर निकलना पड़ेगा। उस समय  पानी भरा होने से गड्ढ़े नजर नहीं आने से हादसे होने का भी खतरा अधिक बढ़ जाएगा।  दादाबाड़ी निवासी निर्मल सेन ने बताया कि न्यास कार्यालय से बाहर निकलने के बाद मेन रोड तक दो पहिया वाहन से आना किसी खतरे से कम नहीं है। सड़क की गिट्टी उखड़ी होने से स्कूटर के स्लिप होने से आए दिन लोगों के गिरने की घटनाएं हो रही है। लेकिन उस सड़क को सही नहीं किया जा रहा।  इधर नगर विकास न्यास अभियंताओं का कहना है कि राज भवन रोड व सीएडी रोड की सड़कों को कुछ समय पहले ही सही करवाया था। लेकिन बरसात होने से डामर उखड़ गया है। बरसात से पहले इन सड़कों को फिर से सही करवा दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 18:33:30 +0530</pubDate>
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