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                <title>Consumer rights - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Consumer rights RSS Feed</description>
                
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                <title>स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर अखिलेश यादव का हमला: ‘प्रीपेड पीड़ित’ शब्द दिया नया नाम, बिजली कंपनियों और सरकार के बीच मिलीभगत का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर की खामियों पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि खाते में पैसे होने के बावजूद बिजली गुल होना 'डिजिटल अन्याय' है। अखिलेश ने उपभोक्ताओं को 'उपभुगता' बताते हुए आरोप लगाया कि सरकारी मिलीभगत से जनता परेशान है। उन्होंने वादा किया कि सपा सरकार आने पर पारदर्शी बिजली व्यवस्था लागू होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhilesh-yadavs-attack-on-smart-prepaid-electricity-meters-new-name/article-149186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/akhilesh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर के एकाउंट में पैसे होने के बावजूद बत्ती गुल होने को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश में ‘प्रीपेड पीड़ित’ नाम की एक नई श्रेणी पैदा हो गई है। रविवार को सोशल मीडिया के जरिए अखिलेश यादव ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने पहले से ही बिजली के लिए भुगतान कर दिया है, वे भी स्मार्ट मीटर की खामियों के चलते बिजली कटौती और तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे हैं। </p>
<p>अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब बिजली कंपनियों को पहले ही पैसा मिल जाता है, तो फिर आम जनता को परेशान क्यों किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियों और सरकार के बीच तालमेल की कमी या मिलीभगत के कारण आम उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है। इसके चलते लोग बार-बार शिकायत करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार में जनता ‘उपभोक्ता’ से ‘उपभुगता’ बन गई है, जिसे नीतियों की खामियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने ‘पीडीए’ (पीड़ित, दलित, अल्पसंख्यक) का जिक्र करते हुए कहा कि प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब ‘प्रीपेड पीड़ित’ भी इसमें शामिल हो गए हैं।</p>
<p>अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और आने वाले समय में स्थिति बदलेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार बनने पर बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता हित में बनाया जाएगा, जिससे लोगों को राहत मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 18:23:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल का लोकसभा में जवाब: बिजली के स्मार्ट मीटर वैकल्पिक हैं अनिवार्य नहीं, बिजली की चोरी रोकने की दिशा में ठोस कदम</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि देश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं बल्कि पूर्णतः वैकल्पिक हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी उपभोक्ता पर इसे जबरन नहीं थोपा जाएगा। हालांकि, बिजली चोरी और घाटा रोकने के लिए डिफॉल्टरों पर सख्ती जारी रहेगी। उपभोक्ता अपनी सुविधानुसार कभी भी इस सेवा को चुन या हटा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/union-energy-minister-manohar-lals-reply-in-lok-sabha-smart/article-148808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/manoha-lal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने लोकसभा में कहा है कि देश में बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक हैं और जो उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाना चाहते हैं उन्हें ही यह सुविधा दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कहीं जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगाये जा रहे हैं। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि प्रीपेड बिजली मीटर स्मार्ट व्यवस्था वैकल्पिक व्यवस्था है और इस सुविधा का फायदा जो उपभोक्ता लेना चाहता है यदि उसका लाभ उपभोक्ता लेना चाहता है तो उसको यह दिया जाएगा और इसके लिए उसे पहले सिक्योरिटी देनी पड़ेगी और यदि वह बाद में प्रीपेड वापस लेता है तो उसकी सिक्योरिटी भी वापस कर दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी का प्रावधान वैकल्पिक है आवश्यक नहीं है। उपभोक्ता जब चाहे उसे हटा सकता है और अपनी सुविधा अनुसार बिजली सुविधा का लाभ ले सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रीपेड मीटर से कई राज्यों को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि कहीं भी कोई प्रीपेड मीटर जबरन नहीं लगाया जा रहा है और यदि कहीं ऐसी सूचना है तो उसे पर ध्यान दिया जाएगा। उनका कहना था कि कई राज्यों में डिफाल्टर उपभोक्ता लंबे समय से बिजली का बिल नहीं दे रहे हैं उनके लिए आवश्यक कर दिया गया है कि जब तक बिजली का बिल नहीं देंगे तब तक वहां बिजली सुविधा नहीं दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जहां प्रीपेड हुआ है वहां कंपनियों का घाटा कम हुआ है और हर उपभोक्ता बिजली का भुगतान कर रहा है जबकि पहले यह उल्टा था लोग बिजली का बिल न भरना स्वाभिमान की बात मानते थे। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार बिजली की चोरी रोकने के लिए कदम उठा रही है और इसमें जो भी जरूरी होगा उपाय किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 16:20:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डिजिटल फ्रॉड वालों की अब खैर नहीं: कर्ज वसूली एजेंटों पर लगाम की तैयारी, धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन पर लगेगा 25 हजार तक का हर्जाना </title>
                                    <description><![CDATA[आरबीआई ने कर्ज वसूली एजेंटों पर लगाम और धोखाधड़ी वाले लेनदेन में 25,000 रुपये तक हर्जाने का प्रावधान घोषित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/digital-fraudsters-are-no-longer-in-trouble-preparations-to-rein/article-142163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(7)3.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए कई उपायों की घोषणा की जिनके तहत कर्ज वसूली एजेंटों पर लगाम लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने और धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन के मामले में 25,000 रुपये तक का हर्जाना देने का प्रावधान शामिल है। </p>
<p>आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जारी बयान में इन उपायों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कम मूल्य के धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन के मामलों में 25,000 रुपये तक का हर्जाना देने के लिए एक फ्रेमवर्क लाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा ऋण वसूली के लिए रिकवरी एजेंटों के इस्तेमाल से संबंधित एक प्रारूप दिशा-निर्देश जारी किया जायेगा। </p>
<p>बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा उनके काउंटर पर तीसरे पक्ष के उत्पादों के विज्ञापन, विपणन और बिक्री के नियमन के लिए भी एक दिशा-निर्देश जारी किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन में धोखाधड़ी रोकने के लिए विलंबित भुगतान और बुजुर्गों तथा अन्य विशेष श्रेणी के ग्राहकों के लिए अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था की जा सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:58:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें उपभोक्ता</title>
                                    <description><![CDATA[15 मार्च, 1962 को उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों के मुद्दे को संबोधित करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस को एक विशेष संदेश भेजा, ऐसा करने वाले वे पहले नेता थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/consumers-should-be-aware-of-their-rights/article-72749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(10)4.jpg" alt=""></a><br /><p>विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस हमें यह याद दिलाता है कि उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की जागरूकता होनी चाहिए। संवाद का महत्व इस दिन पर विशेष रूप से बढ़ जाता है, क्योंकि यह एक मंच प्रदान करता है जहां उपभोक्ताओं की समस्याओं को सुना जा सकता है और समाधान निकाला जा सकता है। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस का इतिहास राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी से शुरू होता है। 15 मार्च, 1962 को उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों के मुद्दे को संबोधित करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस को एक विशेष संदेश भेजा, ऐसा करने वाले वे पहले नेता थे। उपभोक्ता आंदोलन इस प्रकार 1983 में शुरू हुआ और प्रति वर्ष इस दिन, संगठन उपभोक्ता अधिकारों के संबंध में महत्वपूर्ण मुद्दों और अभियानों पर कार्रवाई करने का प्रयास करता है।<br /><br />विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस हमें उपभोक्ताओं के हक की महत्वपूर्णता को समझाने और सुरक्षित और ठीक से उत्पादों और सेवाओं का उपयोग करने के लिए जागरूक करता है। यह दिवस उन उपभोक्ताओं के योगदान को मान्यता देता है जो निर्माताओं के साथ समान खिलाफ खड़े होते हैं। यह एक अवसर है कि हम सभी सोचे कि हमारे पास क्या अधिकार हैं? और कैसे हम उन्हें सुनिश्चित कर सकते हैं। उपभोक्ता अधिकारों की गणना कई विषयों पर होती है, जैसे कि उत्पाद की गुणवत्ता, मूल्य और सेवाओं की उपलब्धता। सुरक्षित और ठीक से उत्पादों और सेवाओं का अधिकार हमें स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करता है।<br /><br />उपभोक्ता अधिकार दिवस का महत्व है क्योंकि यह हमें उपभोक्ता अधिकारों के महत्व को समझने के लिए जागरूक करता है और साथ ही सरकारों और निर्माताओं को लेकर जिम्मेदारी बढ़ाता है। इस दिवस के माध्यम से हम उपभोक्ता अधिकारों के बारे में जागरूकता फैला सकते हैं और समाज में उनका समर्थन कर सकते हैं। इसलिए विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे पास अधिकार है और हमें इन अधिकारों का समान और संवेदनशील उपयोग करना चाहिए। इस दिन का महत्व व्यापकता में नहीं है सिर्फ  एक व्यक्ति की जरूरतों के आधार पर बल्कि समाज के हर व्यक्ति के अधिकारों और स्वतंत्रताओं को महसूस करने के साथ ही उनकी सुरक्षा की भी जरूरत है। इस दिन के माध्यम से हमें उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने का मौका मिलता है। उपभोक्ता को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी होनी चाहिए, ताकि वह न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए भी सही निर्णय ले सकें। उपभोक्ता संरक्षण की बात करते हुए, इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। सरकारों और संगठनों को उपभोक्ताओं के हित में नीतियों और कानूनों को स्थापित करने की जरूरत है, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और हित का पूरा ध्यान रखा जा सके। इस विशेष दिन पर, हमें यह समझना चाहिए कि उपभोक्ता संरक्षण केवल एक समाचार मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपभोक्ताओं के अधिकारों की समझ और समर्थन करने के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अनुसार उपभोक्ताओं के लिए भारत में छह मौलिक अधिकारों की रूपरेखा तय की गई है। सुरक्षा का अधिकार के अन्तर्गत उपभोक्ता को यह अधिकार होता है कि वो वस्तुओं या सेवाओं से सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। क्रय किए गए प्राप्त सेवाओं से न केवल तात्कालिक जरूरतें पूरी होनी चाहिए बल्कि इससे दीर्घ अवधि के लाभ भी पूरे होने चाहिए। चुनने का अधिकार के अन्तर्गत उपभोक्ताओं को उत्पादों और सेवाओं के चयन करने की स्वतंत्रता प्रदान करना है। कम कीमत पर वस्तुओं की किस्मों और सेवाओं पर, जहां तक संभव हो, पहुंच पाने का अधिकार सुनिश्चित होता है। सूचना पाने का अधिकार के अधिकार के अन्तर्गत उपभोक्ताओं को उत्पादों और सेवाओं के बारे में सही और संपूर्ण जानकारी प्रदान करने का अधिकार होता है। वस्तुओं की गुणवत्ता, मात्रा, शक्ति, शुद्धता, मानक और मूल्य के बारे में भी जानकारी करना उसका अधिकार है।सुनवाई का अधिकार के अन्तर्गत उपभोक्ताओं को अपनी शंकाओं और अपने विचार व्यक्त करने के लिए यह अधिकार प्राप्त है। उपभोक्ता के लाभ के लिए इन मंच के माध्यम से अधिकार प्राप्त है। इसमें उपभोक्ता कल्याण पर विचार करने के लिए गठित विभिन्न मंचों में वाद करने का अधिकार भी शामिल है। निवारण पाने का अधिकार के अन्तर्गत उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए और मुआवजा, समाधान देने के लिए यह अधिकार सक्षम बनाता है। उपभोक्ताओं के शोषण या अनुचित व्यवहार के लिए यह अधिकार प्राप्त है। इसमें ग्राहक की वास्तविक शिकायतों के निष्पक्ष निपटान का अधिकार भी शामिल है। उपभोक्ताओं को अपनी शिकायत अवश्य दर्ज करवानी चाहिए। उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार के अन्तर्गत उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित करने का यह अधिकार है। उपभोक्ता को ज्ञान और शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है, उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। ताकि वो समय-समय पर इसका उपयोग कर सके। उपभोक्ता दिवस मनाने का उद्देश्य है अपने अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के प्रति लोगों को जागरूक बनाना। <br /><br />-डॉ. वीरेन्द्र भाटी मंगल<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Mar 2024 11:49:24 +0530</pubDate>
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