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                <title>Dilip Ghosh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Dilip Ghosh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>खड़गपुर सदर में कड़ा मुकाबला :  दिलीप घोष बनाम सरकार फिर आमने-सामने, जाति, समुदाय, मतदान प्रतिशत और अब मतदाताओं की अनुपस्थिति पर ध्यान केंद्रित </title>
                                    <description><![CDATA[खड़गपुर सदर में दिलीप घोष (भाजपा) और प्रदीप सरकार (TMC) के बीच कड़ा मुकाबला है। 44,000 मतदाताओं के नाम हटने से बूथ प्रबंधन निर्णायक हो गया है। गैर-बंगाली आबादी और औद्योगिक मुद्दों के कारण यहाँ का चुनावी मिजाज अक्सर राज्य की लहर के विपरीत रहता है, जिससे यह एक लो-मार्जिन सीट बन गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tough-contest-in-kharagpur-sadar-ghosh-vs-government-again-face/article-151158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/dilip-ghosh.png" alt=""></a><br /><p>खड़गपुर। पश्चिम बंगाल में खड़गपुर सदर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, जिसे जनसांख्यिकीय रूप से एक 'लघु भारत' कहा जा सकता है, शायद ही कभी मुख्य धारा के साथ चला है, और इसके परिणाम अक्सर पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में देखे जाने वाले रुझानों के विपरीत रहे हैं। चुनाव विश्लेषक इसे 'अल्प अंतर वाली सीट' कह सकते हैं। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के इस निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम अक्सर विजेताओं और हारने वालों के बीच मतों के बहुत कम अंतर से तय होते रहे हैं। खड़गपुर सदर,  दशकों तक, कांग्रेस का गढ़ रहा, और विशेष रूप से बंगाल की राजनीति के सम्मानित ‘चाचा’ - ज्ञान सिंह सोहनपाल का, जिन्होंने 1969 से 2011 के बीच 10 बार जीत दर्ज की, जब तक कि 2016 में अपने अंतिम चुनाव में वे भाजपा के दिलीप घोष से हार नहीं गये। भगवा दल ने 2021 में भी इस सीट पर अपना कब्जा बनाये रखा, जब उसने बंगाली फिल्म और टीवी अभिनेता हिरण चटर्जी को उम्मीदवार बनाया था।</p>
<p>जहां सोहनपाल की अधिकांश जीत तब हुई जब राज्य में वामपंथी मोर्चे ने भारी बहुमत प्राप्त किया था, वहीं 2016 और 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल की सत्ता पर प्रचंड बहुमत के साथ कब्जा किया। चूंकि राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 23 अप्रैल को इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदान होना है, यहां की राजनैतिक लड़ाई लहर के बजाय जाति, समुदाय, मतदान प्रतिशत और अब मतदाताओं की अनुपस्थिति पर अधिक केंद्रित है।</p>
<p>इस प्रतियोगिता के केंद्र में भाजपा के दिलीप घोष और तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप सरकार के बीच एक बड़ा मुकाबला है, ये दो ऐसे नेता हैं जिनका खड़गपुर सदर में चुनावी इतिहास गहराई से जुड़ा हुआ है, लेकिन व्यक्तित्वों से परे, यह चुनाव तीन निर्णायक कारकों के आधार पर आकार ले रहा है: मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) का प्रभाव, निर्वाचन क्षेत्र की जटिल जनसांख्यिकीय संरचना और औद्योगिक क्षमता एवं वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के बीच निरंतर बना हुआ अंतर।</p>
<p>इस बार सबसे बड़ा प्रभाव डालने वाला कारक चुनाव आयोग के एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से लगभग 44,000 नामों का हटाया जाना है। जिस निर्वाचन क्षेत्र में 2021 का परिणाम केवल 3,771 मतों से तय हुआ हो, वहां यह कोई मामूली बदलाव नहीं,- बल्कि एक संरचनात्मक परिवर्तन है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि न तो भाजपा और न ही तृणमूल कांग्रेस आत्मविश्वास के साथ यह कह सकती है कि इन कटौतियों का सबसे ज्यादा असर कहां पड़ा है। खड़गपुर के एक स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “ यदि हटाये गये मतदाताओं का 10-15 प्रतिशत भी विशिष्ट क्षेत्रों में केंद्रित था, तो यह बूथ स्तर के समीकरणों को पलट सकता है। यह चुनाव लहर के बजाय इस बात पर निर्भर करेगा कि शेष मतदाताओं में से कौन मतदान प्रतिशत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करता है।”</p>
<p>यह मुकाबला हालांकि केवल द्विध्रुवीय नहीं है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार मधुसूदन रॉय और कांग्रेस की उम्मीदवार पापिया चक्रवर्ती इस दौड़ में और गहराई जोड़ते हैं, जिससे मतों के विभाजन की संभावना बढ़ जाती है। खड़गपुर के बार-बार राज्यव्यापी रुझान के विरुद्ध जाने का कारण आंशिक रूप से इसकी जनसांख्यिकीय बनावट में निहित है। खड़गपुर जंक्शन और आई.आई.टी. खड़गपुर की उपस्थिति के कारण यह एक रेलवे और औद्योगिक शहर है, जहां गैर-बंगाली और प्रवासी मूल की बड़ी आबादी, जैसे तेलुगु, हिंदी, मराठी और ओडिया भाषी समुदाय — निवास करती है। इनकी मतदान प्राथमिकताएं अक्सर ग्रामीण बंगाल से भिन्न होती हैं।</p>
<p>एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी एस. नारायणन ने कहा, "रेलवे कॉलोनियों में लोग नौकरियों, तबादलों और पेंशन के बारे में बात करते हैं - स्थानीय राजनीति के बारे में नहीं। यहां बहुत से लोगों को लगता है कि राष्ट्रीय मुद्दे अधिक मायने रखते हैं, इसलिए भाजपा को लाभ मिलता है। लेकिन पुराने खड़गपुर और आस-पास के क्षेत्रों में तृणमूल का स्थानीय नेटवर्क मजबूत है।" यह दोहरी स्थिति वह पैदा करती है, जिसे राजनैतिक रणनीतिकार "विभाजित निर्वाचन क्षेत्र" कहते हैं, जहां राष्ट्रीय विमर्श और स्थानीय शासन एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और अक्सर एक-दूसरे के प्रभाव को शून्य कर देते हैं। भाजपा के लिए श्री घोष की वापसी रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों है। 2016 में पहली बार कांग्रेस के गढ़ को तोड़ने वाले श्री घोष आज भी उन गिने-चुने नेताओं में से एक हैं जिनका व्यक्तिगत जनाधार सभी समुदायों में फैला है। उनका अभियान कानून-व्यवस्था, प्रवासन और पहचान की राजनीति के विषयों पर केंद्रित रहा है। साथ ही वे यह तर्क भी दे रहे हैं कि केंद्र के साथ तालमेल बिठाने से रुकी हुई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आ सकती है।</p>
<p>घोष ने मीडिया से कहा, "विकास की कमी एक प्रमुख मुद्दा है। सड़कें खस्ताहाल हैं। खराब जल निकासी व्यवस्था और अपर्याप्त पेयजल अन्य समस्याएं हैं। निर्वाचन क्षेत्र के विशाल क्षेत्रों में औद्योगिक प्रदूषण अधिक है। खड़गपुर एक ऐसा क्षेत्र है, जहां से हमें पिछले कुछ चुनावों में लगातार बढ़त मिली है। यहां तक कि 2024 के लोकसभा चुनावों में हम मेदिनीपुर से हार गये, लेकिन खड़गपुर सदर ने हमारे उम्मीदवार को बढ़त दी थी।" तृणमूल कांग्रेस ने प्रदीप सरकार की सुलभता और संगठनात्मक पहुंच पर केंद्रित एक स्थानीय रणनीति अपनायी है। 2021 में मामूली अंतर से हारने वाले सरकार का अभियान बूथ स्तर की मजबूती और जन कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित है। मालंचा की निवासी शम्पा दास ने कहा, "वे यहीं रहते हैं, हम उन तक पहुंच सकते हैं। चुनाव के बाद भी वे हमसे जुड़े रहते हैं।"</p>
<p>खड़गपुर सदर जैसे बहुत कम निर्वाचन क्षेत्र विरोधाभासों को समेटे हुए हैं। यहां भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक और महत्वपूर्ण रेलवे बुनियादी ढांचा है, फिर भी यह बुनियादी नागरिक समस्याओं से जूझ रहा है। निवासी बार-बार रुकी हुई परियोजनाओं, खराब जल निकासी, पानी की कमी और पास की फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण की ओर इशारा करते हैं। एन.एच.-16 के पास एक दुकानदार सलीम खान ने कहा, "फैक्ट्रियां रहें, लेकिन धूल और धुआं तो बंद हो।"</p>
<p>ऐसी धारणा भी बढ़ रही है कि राज्य और केंद्र के बीच राजनैतिक मतभेदों ने विकास की गति धीमी कर दी है। खड़गपुर कॉलेज के बाहर एक पहली बार मतदाता बने युवा ने कहा, "यदि एक ही दल सत्ता में हो, तो काम तेजी से हो सकता है।" पिछले रुझान बताते हैं कि 2026 का परिणाम संभवतः किसी बड़ी लहर के बजाय मामूली बढ़त,- जैसे बूथ प्रबंधन, मतदान प्रतिशत और अपने मूल मतदाताओं को बनाये रखते हुए प्रतिद्वंद्वी के आधार में सेंध लगाने की क्षमता - से तय होगा। फिलहाल, जमीन पर माहौल न तो निर्णायक रूप से सत्ता के पक्ष में है और न ही सत्ता विरोधी है। यह सतर्क और व्यावहारिक है। गोल बाजार के पास एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा, “हर बार विजेता बदलता है, लेकिन हमारा जीवन नहीं बदलता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:13:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>निर्वाचन आयोग ने दिलीप घोष, सुप्रिया श्रीनेत के बयानों को आपत्तिजनक पाया</title>
                                    <description><![CDATA[आयोग ने अलग-अलग आदेश में घोष और श्रीनेत को सख्त अंदाज में आगाह किया है  कि वे आदर्श आचार संहिता की अवधि में सार्वजनिक वक्तव्य देते समय सावधानी बरतें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/election-commission-found-the-statements-of-dilip-ghosh-supriya-shrinet/article-74218"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer-(15).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और हिमाचल प्रदेश में मंडी लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी कंगना रणौत के विरुद्ध क्रमश: भाजपा नेता दिलीप घोष और कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत के बयानों को आपत्तिजनक, आयोग के निर्देशों और महिलाओं की गरिमा के प्रतिकूल करार देते हुए उनकी निंदा की है और उन्हें चेतावनी दी है।</p>
<p>आयोग को घोष और श्रीनेत के खिलाफ शिकायतें मिली थीं।</p>
<p>आयोग ने अलग-अलग आदेश में घोष और श्रीनेत को सख्त अंदाज में आगाह किया है  कि वे आदर्श आचार संहिता की अवधि में सार्वजनिक वक्तव्य देते समय सावधानी बरतें। आयोग की ओर से जारी दोनों आदेशों में कहा गया है कि आयोग विवादास्पद बयानों की कड़ी निंदा करता है। आयोग ने आदेश में दोनों नेताओं  की भत्र्सना की है।</p>
<p>आयोग ने अपने आदेश की प्रतियां भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजकर उन्हें आयोग की ओर से एक मार्च को जारी सलाह का ध्यान दिलाते हुए अपने-अपने दलों के कार्यकर्ताओं को प्रचार या किसी सार्वजनिक (एजेंसी)लाप में महिलाओं के सम्मान और मार्यदा के विरुद्ध कोई टिप्पणी नहीं करने की सलाह देने को कहा है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि आयोग को तृणमूल कांग्रेस की ओर से 26 मार्च को एक शिकायत मिली थी कि घोष ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बनर्जी के विरुद्ध कहा था कि 'दीदी जब गोवा में जाती हैं, तो गोवा कि बेटी बन जाती हैं और त्रिपुरा में कहती हैं कि वे त्रिपुरा की बेटी हैं। यह ठीक नहीं हैं। तय करो कि आपका पिता कौन हैं। उन्होंने यह टिप्पणी बंगला में की थीं।</p>
<p>इसी तरह भाजपा ने रणौत के बारे में टिप्पणी को लेकर श्रीनेत के खिलाफ 26 मार्च को ही चुनाव आयोग से शिकायत की थी। भाजपा ने श्रीनेत के 25 मार्च के सोशल मीडिया पर एक पोस्ट का उल्लेख किया था, जिसमें उन्होंने रणौत की उम्मीदवारी पर टिप्पणी की थी। क्या भाव चल रहा है मंडी में कोई बताएंगे? इसके साथ उन्होंने रणौत की तस्वीर भी पोस्ट की थी।</p>
<p>आयोग ने दोनों ही शिकायतों पर घोष और श्रीनेत को 27 मार्च को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उनसे 29 मार्च तक  जवाब मांगा था।</p>
<p>आयोग ने सोमवार के आदेशों में कहा है कि उसने दोनों नेताओं के जवाब पर गौर करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि उनके बयान आपत्तिजनक और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ हैं और आदर्श आचार संहिता और राजनीतिक दलों के लिए आयोग की ओर से एक मार्च को जारी निर्देशों के विरुद्ध हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Apr 2024 17:50:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनाव आयोग ने ममता और कंगना पर अभद्र टिप्पणियों के लिए दिलीप घोष और सुप्रिया श्रीनेत को भेजा नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[ आयोग ने घोष और श्रीनेत को 29 मार्च शाम पांच बजे तक नोटिस का जवाब देने का समय दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/election-commission-sent-notice-to-dilip-ghosh-and-supriya-shrinet-for-indecent-comments-on-mamata-and-kangana/article-73852"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(17)7.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)  के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद दिलीप घोष और कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को क्रमश: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिनेत्री तथा मंडी निर्वाचन क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश) से भाजपा की प्रत्याशी कंगना रणौत के विरुद्ध उनकी विवादास्पद टिप्पणियों के लिये कारण बताओ नोटिस भेजे हैं।</p>
<p>इन दोनों नेताओं की हाल की टिप्पणियों के खिलाफ आयोग को शिकायतें मिली हैं और उन पर आदर्श आचार संहिता का  उल्लंघन करने का आरोप है। आयोग ने घोष और श्रीनेत को 29 मार्च शाम पांच बजे तक नोटिस का जवाब देने का समय दिया है।</p>
<p>बनर्जी के खिलाफ भाजपा नेता घोष द्वारा की गयी कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने 26 मार्च को आयोग में शिकायत दर्ज करायी।</p>
<p>शिकायत में घोष की उस टिप्पणी का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कहा था, ''जब दीदी गोवा जाती है तो वह गोवा की बेटी बन जाती हैं, त्रिपुरा में वह कहती हैं कि मैं त्रिपुरा की बेटी हूं, तय करें कि आपका पिता कौन है, यह सही नहीं है।"</p>
<p>कांग्रेस की नेता श्रीनेत ने भाजपा उम्मीदवार रणौत के संबंध में एक सोशल मीडिया पर रणौत की फोटो के साथ पोस्ट की गयी एक अभद्र पोस्ट के संबंध में नोटिस दिया है। यह नोटिस भाजपा की शिकायत पर दी गयी है। आयोग ने इसे प्रथम दृष्टया चुनावों के संबंध में आदर्श संहिता और आयोग द्वारा राजनीतिक दलों को टिप्पणियों में शालीनता बरतने के संबंध में पहली मार्च को जारी अपने परामर्श के विरुद्ध देखा है।श्रीनेत कांग्रेस की सोशल मीडिया समिति की प्रमुख हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Mar 2024 21:07:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिलीप घोष की ममता पर आपत्तिजनक टिप्पणी, TMC बोलीं-  बीजेपी नारी शक्ति से नफरत करती है</title>
                                    <description><![CDATA[टीएमसी ने इस मामले पर कहा कि दिलीप घोष और पवन सिंह में कोई अंतर नहीं हैं। बीजेपी ने ऐसे लोगों को टिकट दिया है। घोष ने फिर एक बार ममता का अपमान किया है। घोष का डीएनए ही यही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dilip-ghosh-objectionable-comment-on-mamta-tmc-said-bjp-hates-women/article-73730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(26)2.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजेपी नेता दिलीप घोष की ममता बनर्जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में बंगाल की सियासत गरमा गई है। टीएमसी ने दिलीप घोष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी की ओर से बीजेपी पर जोरदार हमले शुरु हो गए है।<br /><br />टीएमसी ने इस मामले पर कहा कि दिलीप घोष और पवन सिंह में कोई अंतर नहीं हैं। बीजेपी ने ऐसे लोगों को टिकट दिया है। घोष ने फिर एक बार ममता का अपमान किया है। घोष का डीएनए ही यही है। बीजेपी नारी शक्ति से नफरत करती है। यही दिलीप घोष और बीजेपी का चरित्र है। नारी शक्ति इसका मुंह तोड़ जवाब देगी। टीएमसी ने पूछा कि महिला आयोग इस मसले पर चुप क्यों है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2024 14:27:50 +0530</pubDate>
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