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                <title>rajasthan diwas - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान दिवस पर ‘ओडीओपी’ और ‘जयपुर रत्नम्’ प्रदर्शनी का आगाज़, 120 स्टॉल पर सजे प्रदेश के अनूठे उत्पाद</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में जयपुर के इंटरनेशनल सेंटर में राज्य स्तरीय ODOP और 'जयपुर रत्नम्' प्रदर्शनी शुरू हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर आयोजित इस उत्सव में 120 स्टॉल्स पर प्रदेश के हस्तशिल्प और जेम्स-ज्वेलरी का प्रदर्शन किया जा रहा है। 19 मार्च तक चलने वाली यह प्रदर्शनी स्थानीय कारीगरों को वैश्विक मंच प्रदान करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/odop-and-jaipur-ratnam-exhibition-begins-on-rajasthan-day-unique/article-146588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jaipur3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में राज्य स्तरीय ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) और ‘जयपुर रत्नम्’ प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ रविवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन जयपुर संभागीय आयुक्त श्रीमती पूनम, जयपुर जिला कलेक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी तथा उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त श्री सुरेश ओला ने संयुक्त रूप से किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राजस्थान दिवस (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के उपलक्ष्य में 14 से 19 मार्च तक पूरे प्रदेश में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा राज्य स्तर के साथ-साथ सभी जिलों में ओडीओपी प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाना है।</p>
<p>राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में प्रदेश के सभी जिलों के विशिष्ट ओडीओपी उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। हस्तशिल्प, वस्त्र, खाद्य उत्पाद, कलात्मक वस्तुएं और पारंपरिक कारीगरी की झलक इन स्टॉलों में देखने को मिल रही है। प्रदर्शनी में कुल 120 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां आगंतुक इन उत्पादों को देख ही नहीं, बल्कि सीधे खरीद भी सकते हैं। आमजन के लिए प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक 19 मार्च तक खुली रहेगी।</p>
<p>जेम्स एंड ज्वेलरी की विशेष प्रदर्शनी ‘जयपुर रत्नम्’<br />जयपुर जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र तथा राजस्थान लघु उद्योग निगम (राजसिको) द्वारा ‘जयपुर रत्नम्’ जेम्स एंड ज्वेलरी प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इस विशेष प्रदर्शनी में जिले के ओडीओपी उत्पादों और रत्न-आभूषणों की आकर्षक श्रृंखला को प्रदर्शित करने के लिए 80 स्टॉल स्थापित किए गए हैं।</p>
<p>सभी जिलों में ओडीओपी प्रदर्शनी<br />राजस्थान दिवस समारोह के तहत प्रदेश के सभी जिलों में ओडीओपी प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। इन प्रदर्शनियों में स्थानीय कारीगर अपने उत्पादों की जानकारी दे रहे हैं और सीधे बिक्री के माध्यम से उन्हें बाजार उपलब्ध हो रहा है। यह पहल न केवल स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन दे रही है, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी मजबूत कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 16:35:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>75 साल में बदली सूरत : संकट पर कटौतियों की बिजली, 26 लाख करोड़ के MOU</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीण विद्युतीकरण के तहत 93.88 लाख घरों में से 92.14 लाख घरों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-75-years-the-power-of-the-cuttings-on-the/article-108982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/bhajanlal-sharmaa-(2).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ऊर्जा विभाग ने पिछले एक साल में ऊर्जा क्षेत्र में बिजली संकट से प्रदेश को उबारते हुए रबी सीजन में बिजली कटौती पर काफी हद तक नियंत्रण करके दिखाया। बिजली उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी कर सोलर एनर्जी उत्पादन में राजस्थान ने नए कीर्तिमान स्थापित किए। पीएम कुसुम योजना को गति देते हुए राइजिंग राजस्थान समिट में ऊर्जा क्षेत्र में ही 26 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव आगामी दिनों में प्रदेश की ऊर्जा क्षेत्र में तस्वीर बदल देंगे।</p>
<p><strong>राजस्थान में सर्वाधिक निवेश</strong><br />दस मार्च, 2024 को केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के साथ एक लाख 58 हजार 800 करोड़ के एमओयू हुए। इनमें 3295 मेगावाट की पंरपरागत तथा 31 हजार 843 मेगावाट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं विकसित होंगी। </p>
<p><strong>नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़ोतरी</strong><br />राजस्थान सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है। वर्ष 2024-25 में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार जैसे बीकानेर और अन्य क्षेत्रों में शुरू की गई 300 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाएं, जिनकी आधारशिला 2024 में रखी गई थी। राजस्थान ने 2024-25 में सौर ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। दिसंबर 2024 तक राज्य सरकार ने लगभग 26,000 सौर ऊर्जा संचालित कृषि पंप सेटों की स्थापना के लिए 400 करोड़ रुपए का अनुदान दिया, जो किसानों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है। इसके अलावा सितंबर 2024 में राजस्थान को सौर ऊर्जा क्षमता में देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। </p>
<p><strong>विद्युत ट्रांसमिशन सुदृढ़ीकरण</strong><br />2024 में शुरू की गई 2100 करोड़ रुपए से अधिक की विद्युत ट्रांसमिशन परियोजनाएं जैसे फतेहगढ़ और भड़ला में सौर ऊर्जा क्षेत्रों से बिजली निकासी के लिए ट्रांसमिशन सिस्टम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को बेहतर करने में मददगार साबित होगा। राज्य में नए सब स्टेशनों की स्थापना और पुराने ढांचे का आधुनिकीकरण इस वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि रही। स्मार्ट मीटरिंग से बिजली चोरी और छीजत रोकने में आसानी रही। ऊर्जा क्षेत्र की मजबूती के लिए अन्य स्रोतों में पवन ऊर्जा, बायोगैस और छोटे संयंत्र, सौर लाइट्स और माइक्रो ग्रिड, ऊर्जा संरक्षण अभियान, ऊर्जा ऑडिट, ऊर्जा अधिशेष और निर्यात की स्थिति को सुधारा गया।</p>
<p><strong>हर घर बिजली योजना का विस्तार, रिकॉर्ड उत्पादन</strong><br />ग्रामीण विद्युतीकरण के तहत 93.88 लाख घरों में से 92.14 लाख घरों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है। 2024-25 में शेष घरों को जोड़ने का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में तेजी से पूरा किया जा रहा है। पूर्ववर्ती सरकार के समय कम गुणवत्ता वाले कोयले के कारण थर्मल प्लांट 50 प्रतिशत उत्पादन क्षमता पर काम कर रहे थे। सरकार ने बढ़िया गुणवत्ता कोयला मंगवाकर उत्पादन क्षमता 70 प्रतिशत तक पहुंचाई। कम उत्पादन की वजह से 2022 और 2023 में अघोषित बिजली कटौती से लोग, किसान और व्यापारी परेशान हुए। सरकार ने बेहतर प्रबंधन करके रबी सीजन में कटौती पर नियंत्रण किया। </p>
<p><strong>कुसुम का कार्यान्वयन, बढ़ाया सूर्य घर का दायरा</strong><br />पूर्ववर्ती सरकार ने पीएम कुसुम-सी में चार मेगावाट का एक प्लांट बनाया, जबकि इस सरकार ने 290 मेगावाट क्षमता के विकेन्द्रीकृत सौर संयंत्र और कुसुम-ए और कुसुम-सी में 650 मेगावाट के विकेन्द्रित सोलर प्लांट लगाए हैं। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का दायरा बढ़ाया। इसे सभी बिजली उपभोक्ताओं को जोड़ने की तैयारी करते हुए 150 यूनिट मुफ्त बिजली देने की तैयारी तेज हो गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 09:00:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>75 साल में बदली सूरत : 1949 में एक तिहाई राजस्थान में नहीं थी सड़कें, 3.17 लाख किमी सड़कों का बिछा जाल</title>
                                    <description><![CDATA[निधि के तहत 2004-05 से वर्ष 2023-24 तक 14384.50 करोड़ की निधि प्राप्त की गई, इसमें से दिसंबर 2024 तक 16176.75 करोड़ का व्यय किया गया हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/surat-changed-in-75-years-in-1949-one-third-of/article-108878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/bhajanlal-sharmaa-(2).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ देश का सबसे बड़ा राज्य है। यह तुलनात्मक दृष्टि से कम आबादी का राज्य है। राज्य में 1949 में 13,553 कि.मी. सड़कें थी, जिनमें 794 किमी डामर और 2037 किमी सड़कें मैटल की बनी हुई थी, लेकिन आज राज्य में सड़कों की लंबाई 3,17,121 किमी हो गई हैं अर्थात् हर तरफ सड़कों का जाल बिछा हुआ हैं।</p>
<p><strong>सड़कों का घनत्व 92.66 किमी प्रति 100 वर्ग किमी</strong><br />राज्य में 31 मार्च 2024 तक कुल सड़कों की लंबाई 317121 किमी हो गई हैं, जिसमें से 2,56,148 किमी डामर, 8702 किमी मैटल, 40,736 किमी ग्रेवल सड़कें एवं 11,535 किमी मौसम सड़कें हैं। राज्य में सड़कों का घनत्व 92.66 किमी प्रति 100 वर्ग किमी हैं, जबकि राष्टÑीय घनत्व मोर्थ नई दिल्ली की बेसिक रोड स्टेटिक्स आॅफ इंडिया 2018-19 के अनुसार 165.24 वर्ग किमी हैं।</p>
<p><strong>41 जिलों में से 15 जिले सड़कों से जुडे थे</strong><br />राज्य में 1949 में सड़कों का घनत्व मात्र 3.96 किमी प्रति 100 वर्ग किमी था तथा एक लाख जनसंख्या पर मात्र 85.24 किमी सड़कें थी। यहां तक कि कई जिला मुख्यालय भी सड़कों से जुडेÞ हुए नहीं थे। राज्य के वर्तमान 41 जिलों में से केवल 15 जिले, 100 उपखण्डों में से 54 उपखंड व 339 तहसील मुख्यालयों में से 102 तहसील मुख्यालय ही सड़कों से जुडेÞ हुए थे।</p>
<p><strong>सड़कों के लिए 20 साल से पेट्रोल-डीजल पर वसूल रहे सेस</strong><br />राज्य में सड़क विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के उदेश्य से राजस्थान विधानसभा ने वर्ष 2004 में अधिनियम संख्या 13 के तहत राजस्थान सड़क विकास अधिनियम लागू किया था, जिसके तहत राज्य में पेट्रोल-डीजल  पर सेस अधिरोपित किया गया। वर्तमान में 15 जनवरी 2016 से पेट्रोल पर एक रुपए 50 पैसे और डीजल पर एक रुपए 75 पैसा प्रति लीटर की दर से सेस संग्रहित किया जा रहा है। निधि के तहत 2004-05 से वर्ष 2023-24 तक 14384.50 करोड़ की निधि प्राप्त की गई, इसमें से दिसंबर 2024 तक 16176.75 करोड़ का व्यय किया गया हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Mar 2025 09:34:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>75 साल बाद पंचांग से मनेगा राजस्थान दिवस, कल से सप्ताहभर होंगे कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल देंगे प्रदेशवासियों को सौगातें, बाड़मेर में मातृ वन्दन से होगा उत्सव का आगाज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-75-years-the-program-will-be-held-from-panchang/article-108443"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer93.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में 75 साल बाद सरकार हिन्दू पंचांग से राजस्थान दिवस मनाने जा रही है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को 30 मार्च को यह है, लेकिन सरकार सात दिन तक प्रदेशभर में इसके कई कार्यक्रम आयोजित करेगी। 25 से 31 मार्च तक प्रदेशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में गरीब, युवा, महिला और किसानों को विशेष सौगातें दी जाएगी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। राजस्थान दिवस समारोह का आगाज 25 मार्च को बाड़मेर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा महिला सम्मेलन करेंगे। 26 मार्च को किसान सम्मेलन एवं एफपीओ कार्यक्रम बीकानेर में, 27 मार्च को गरीब एवं अन्त्योदय ना से कार्यक्रम भरतपुर, 28 मार्च को सुशासन समारोह भीलवाड़ा, 29 मार्च को युवा एवं रोजगार उत्सव कोटा में होगा। राज्य स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम 30 मार्च को एवं राज्य स्तरीय निवेश उत्सव 31 मार्च को जयपुर में होगा। इस अवसर पर महिला सम्मेलन के माध्यम से लाड़ो प्रोत्साहन योजना की लाभार्थियों एवं विभिन्न महिला समूहों को सीआईएफ राशि का हस्तान्तरण किया जाएगा।</p>
<p>महिलाओं को इंडक्शन कुकटाप, कालीबाई भील योजना के अन्तर्गत स्कूटी वितरण एवं विवेकानन्द स्कॉलरशिप योजना के लाभान्वितों को स्वीकृति पत्र का वितरण सहित कई सौगातें दी जाएगी तथा किसानों को विभिन्न योजनाओं के अनुदान हस्तान्तरण होगा। गरीब और अन्त्योदय समारोह में निर्माण श्रमिकों को डीबीटी, डेयरी बूथ अलॉटमेंट, स्वामित्व योजना के तहत पट्टा वितरण एवं विद्युत चालित चाक का वितरण सहित विभिन्न सौगातें दी जाएगी। दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण भी वितरित किए जाएंगे। समारोह के तहत जनता को विभिन्न कार्यों के शिलान्यास एवं लोकार्पण की भी सौगात दी जाएगी। युवा एवं रोजगार उत्सव में सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।  सरकार कौशल नीति एवं युवा नीति भी जारी करेगी। </p>
<p>साथ ही विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान भी शुरू किए जाएंगे। निवेश उत्सव के तहत 31 मार्च को राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में हस्ताक्षरित निवेश एमओयू की ग्राउंड ब्रेकिंग एवं निवेश प्रस्तावों की मॉनिटरिंग के लिए मोबाइल एप का शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही निवेशकों को भू-आवंटन पत्र प्रदान किए जाएंगे। लॉजिस्टिक, डेटा सेंटर व टैक्सटाईल पॉलिसी का विमोचन भी होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 10:43:50 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान के निर्माण में मत्स्य संघ की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व के सर्वाधिक प्राचीन पर्वतों की श्रेणी में सम्मिलित अरावली पर्वत श्रृंखला के अवशेषों के प्रतीक राजस्थान को भौगोलिक दृष्टि से भारत के सबसे बड़े प्रदेश होने का गौरव हासिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/initiative-of-matsya-sangh-in-construction-of-rajasthan/article-74055"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(10)---copy.png" alt=""></a><br /><p>विश्व के सर्वाधिक प्राचीन पर्वतों की श्रेणी में सम्मिलित अरावली पर्वत श्रृंखला के अवशेषों के प्रतीक राजस्थान को भौगोलिक दृष्टि से भारत के सबसे बड़े प्रदेश होने का गौरव हासिल है। लेकिन वर्तमान राजस्थान के इस कलेवर को आकार देने में लगभग आठ वर्ष का समय लगा। कभी राजपूताना नाम से पहचान बनाने वाले इस प्रांत की देशी रियासतों के विलीनीकरण की प्रक्रिया का श्रीगणेश तत्कालीन भरतपुर, अलवर, करौली, धौलपुर रियासत को मिलाकर गठित मत्स्य संघ के गठन से हुआ। देश विभाजन के साथ ही भारत को 1947 में ब्रिटिश हुकूमत से छुटकारा मिला। अंग्रेजोंं ने जाते-जाते भारत के विभिन्न राज्यों की देशी रियासतों को अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखने अथवा भारत पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प खुला रखा। तब लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू के लिए जम्मू कश्मीर रियासत को छोड़ शेष देशी रियासतों के एकीकरण का बीड़ा उठाया। पटेल की समझबूझ युक्त कूटनीति से राजस्थान के वर्तमान स्वरूप का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस प्रदेश का भू-भाग मानव सभ्यता के प्रत्येक काल खण्ड का साक्षी रहा है। इस अभियान की शुरूआत दिल्ली में 27 फरवरी 1948 को केन्द्रीय सरकार की पहल से हुई। अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली रियासत के तत्कालीन नरेशों ने केन्द्र के प्रस्ताव पर चारों रियासतों के विलीनीकरण के साथ मत्स्य नाम से नए राज्य संघ के गठन संबंधी सहमति व्यक्त की। इन रियासतों की आमदनी 18 करोड़ 30 लाख कुल क्षेत्रफ ल 7536 वर्ग मील तथा जनसंख्या एक लाख 83 हजार आंकी गई। मत्स्य प्रदेश की राजधानी अलवर रही। धौलपुर नरेश राजप्रमुख, अलवर नरेश उप राजप्रमुख एवं शोभाराम प्रधानमंत्री बनाए गए। भरतपुर से युगल किशोर चतुर्वेदी, गोपीलाल यादव, उप प्रधानमंत्री तथा अलवर से मास्टर भोलानाथ, धौलपुर से डॉ.मंगलसिंह एवं करौली से चिरंजीलाल शर्मा मंत्री नियुक्त किए गए। तत्कालीन केन्द्रीय विद्युत एवं खनिज मंत्री नरहरि विष्णु गाडगिल ने 18 मार्च 1948 को मत्स्य संघ का उद्घाटन किया। श्री गाडगिल से एक सप्ताह पश्चात् विलीनीकरण के अगले चरण में 25 मार्च को राजस्थान संघ का उद्घाटन कराया गया। इस संघ मे हाड़ौती क्षेत्र के कोटा, बूंदी, झालावाड मेवाड़ के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ तथा टोंक, किशनगढ़ और शाहपुरा रियासतें सम्मिलित हुईं।</p>
<p>विलीनीकरण प्रक्रिया के तीसरे चरण में उदयपुर रियासत के मिलने से गठित संयुक्त राजस्थान का 18 अप्रैल, 1948 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने उदयपुर में उद्घाटन किया। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर रियासतों के स्वतंत्र बने रहने की मन: स्थिति में सरदार पटेल के प्रयासों से इन तीनों रियासतों के साथ जैसलमेर रियासत भी अब वृहद राजस्थान का हिस्सा बन गई। सरदार पटेल ने 30 मार्च, 1949 को जयपुर में इसका उद्घाटन किया। विडम्बना यह रही कि अलवर-करौली-भरतपुर- धौलपुर रियासत को मिलाकर मत्स्य संघ के गठन से देशी रियासतों के एकीकरण की पहल के बावजूद नए संघ का पृथक अस्तित्व बना हुआ था।</p>
<p>ब्रज संस्कृति से परिपूर्ण भरतपुर एवं धौलपुर रियासत के नरेशों के समक्ष यह धर्म संकट था कि वे राजस्थान में ही रहें अथवा उत्तर प्रदेश में शामिल हों। इसके समाधान के लिए रियासती मंत्रालय द्वारा श्री शंकर राव देव की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति ने व्यापक जनसम्पर्क एवं एकत्रित साक्षियों के आधार पर मत्स्य संघ को राजस्थान में मिलाने की सिफारिश की। इस पर भारत सरकार की एक मई 1949 की विज्ञप्ति के फलस्वरूप मत्स्य संघ 15 मई को वृहद राजस्थान का अंग बन गया। छठे चरण में सिरोही रियासत का विलय 7 फ रवरी 1950 को हुआ। इससे पहले जनवरी माह में सिरोही के विभाजन के साथ आबू एवं देलवाड़ा तहसीलों को तत्कालीन बम्बई प्रांत और शेष हिस्सा राजस्थान में शामिल करने का निर्णय लिया गया था। पुन: राज्यों के पुनर्गठन के समय छ: वर्ष के अंतराल पर आबू-देलवाड़ा-राजस्थान में मिलाए गए। अब तक केन्द्र शासित तत्कालीन अजमेर मेरवाड़ा राज्य को एक नवम्बर 1956 को राजस्थान में मिलाने से वर्तमान राजस्थान के एकीकरण का सातवा चरण पूरा हुआ।</p>
<p>ब्रिटिश शासन राजा महाराजाओं तथा जागीरदारों सामंतों की त्रिस्तरीय गुलामी के शिकंजे में फंसी राजस्थान की जनता अलग-अलग रियासतों में कुशल नेतृत्व के चलते स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित हुई। आम जनता के विभिन्न वर्गों ने अंग्रेजी साम्राज्य का जुआ उतारने का संकल्प लिया। इसके विस्तृत इतिहास के संकलन और लेखन की दृष्टि से गहन शोध की आवश्यकता है। राष्ट्रीय चेतना का ज्वार उत्पन्न करने वाले आनंद मठ के विद्रोह के एक सौ वर्ष के अंतराल पर 1857 की सैनिक क्रांति के अनाम नायकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को सार्वजनिक किया जाना अपेक्षित है। देशी रियासतों के नरेशों के लिए वार्षिक प्रिवीपर्स की राशि भी निर्धारित की गई।<br /><strong>-गुलाब बत्रा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Mar 2024 12:17:30 +0530</pubDate>
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