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                <title>mobile veterinary van - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>mobile veterinary van RSS Feed</description>
                
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                <title>छह मोबाइल वैन के भरोसे लाखों मवेशी</title>
                                    <description><![CDATA[एक एक वैन पर कई गांवों का बोझ, समय पर उपचार करने में आ रही दिक्कत।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lakhs-of-cattle-dependent-on-just-six-mobile-vans/article-159243"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि के साथ पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन कोटा जिले में पशुओं की सेहत खुद बदहाल व्यवस्था के भरोसे चल रही है। जिले के हजारों गांवों और लाखों मवेशियों के उपचार की जिम्मेदारी केवल छह मोबाइल पशु चिकित्सा वैन पर टिकी हुई है। ऐसे में जब एक साथ कई गांवों से शिकायतें आती हैं तो वैन समय पर नहीं पहुंच पाती। इसका खामियाजा पशुपालकों को आर्थिक नुकसान और पशुओं को समय पर इलाज नहीं मिलने के रूप में भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशु परिवार की आय का प्रमुख स्रोत हैं। दूध उत्पादन, खेती और पशुपालन से जुड़ी आजीविका इन्हीं पर निर्भर है। ऐसे में यदि पशु बीमार हो जाए तो उसके उपचार में हुई थोड़ी-सी देरी भी पशुपालक के लिए भारी पड़ सकती है। कई मामलों में गंभीर रूप से बीमार पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिलने से उनकी मौत तक हो जाती है।</p>
<p><strong>पशुपालकों को करना पड़ता इंतजार</strong><br />सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के उपचार के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा वैन की सुविधा शुरू की थी ताकि चिकित्सक गांव-गांव जाकर उपचार कर सकें, लेकिन कोटा जिले में केवल छह वैन होने के कारण प्रत्येक वैन को प्रतिदिन कई गांवों में दौड़ लगानी पड़ती है। शिकायतों की संख्या अधिक होने से कई पशुपालकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि कई मामलों में अगले दिन तक नंबर आता है। दूर-दराज के गांवों में खराब सड़कें और लंबी दूरी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। एक गांव से दूसरे गांव तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। यदि बीच में कोई गंभीर आपातकालीन मामला आ जाए तो पहले से दर्ज शिकायतों का निस्तारण और अधिक देर से हो पाता है।</p>
<p><strong>बरसात में और बिगड़ जाती है स्थिति</strong><br />मानसून के दौरान हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कच्चे रास्तों पर कीचड़ और जलभराव के कारण मोबाइल वैन को कई गांवों तक पहुंचने में दिक्कत होती है। ऐसे समय में पशुओं में संक्रमण और मौसमी बीमारियां भी बढ़ जाती हैं, जिससे शिकायतों का दबाव और बढ़ जाता है। पशुपालकों का कहना है कि सरकार ने सुविधा तो शुरू की, लेकिन संसाधन पर्याप्त नहीं बढ़ाए। पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि मोबाइल वैन की संख्या वर्षों से लगभग स्थिर बनी हुई है। उनका कहना है कि प्रत्येक तहसील में अलग-अलग मोबाइल पशु चिकित्सा वैन उपलब्ध कराई जाए ताकि उपचार समय पर मिल सके।</p>
<p><strong>कोटा जिले में पशुओं की संख्या</strong><br />गाय-216343<br />भैंस-240628<br />भेड़-22434<br />बकरी-137387<br />घोड़ा-534<br />सूअर-6619<br />ऊंट-1862<br />बंदर-286<br />कुल पशु-626093</p>
<p>कई बार सुबह शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन वैन शाम तक पहुंचती है। गंभीर बीमारी होने पर इतनी देर इंतजार करना मुश्किल हो जाता है। दूध देने वाली भैंस बीमार हो जाए तो रोजाना नुकसान होता है। सरकार को गांवों की संख्या के हिसाब से और मोबाइल वैन उपलब्ध करानी चाहिए।"<br /><strong>-रामलाल मीणा, पशुपालक, चेचट</strong></p>
<p>चेचट और रामगंजमंडी तहसील में दर्जनों गांव आते हैं। इनके लिए केवल एक ही मोबाइल वैन संचालित की जा रही है। गांवों के बीच दूरी अधिक होने से प्रतिदिन केवल चार से पांच स्थानों पर ही पहुंचा जा सकता है। जबकि शिकायतों की संख्या रोजाना करीब दस तक रहती है।<br /><strong>-डॉ. दीपक मीणा, पशु चिकित्सक, मोबाइल वैन </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:43:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कब बजेगी टोल फ्री नम्बर 1962 की घंटी</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल वेटरनरी वैन का घर बैठे नहीं मिल रहा लाभ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/when-will-the-toll-free-number-1962-ring/article-76669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/kb-bjegi-toll-free-number-1962-ki-ghnti...kota-news-03-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पशुपालकों के बीमार पशुओं का इलाज करने के लिए पशुपालन विभाग ने मोबाइल वेटरनरी वैन तो शुरू कर दी, लेकिन अभी तक टोल फ्री नम्बर (कॉल सेंटर) 1962 को चालू नहीं किया है। इससे किसानों को उनके घर पर मोबाइल वेटरनरी वैन को बुलाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पशु चिकित्सा विभाग ने एक लाख पशुओं की संख्या पर एक मोबाइल वेटरनरी वैन चालू की है। ऐसे में कोटा जिले में छह मोबाइल वेटरनरी वैन शुरू की गई। ढाई माह बाद भी टोल फ्री नम्बर शुरू नहीं हो पाया है। पशुपालकों को इसके चालू होने का इंतजार है। </p>
<p><strong>निजी फर्म ने मई तक का मांगा समय</strong><br />पशुपालन विभाग के अनुसार गुजरात की एक फर्म को पूरे प्रदेश में मोबाइल वेटरनरी वैन के संचालन का जिम्मा दिया गया है। वैन और स्टॉफ भी निजी फर्म का है। निजी फर्म की ओर से पूरे प्रदेश में 536 वैन का <br />संचालन किया जाएगा। कोटा में फिलहाल छह वेटरनरी वैन संचालित हो रही है। वैन शुरू होने के बाद टोल फ्री नम्बर 1962 को भी शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन तकनीकी दिक्कत आने के कारण यह सेवा अभी तक शुरू नहीं हो पाई। निजी फर्म की ओर टोल फ्री नम्बर शुरू करने के लिए मई माह तक का समय मांगा गया है। </p>
<p><strong>वैन में उपचार की पूरी व्यवस्था</strong><br />पशुपालकों को राहत देने के उद्देश्य से कोटा जिले में छह मोबाइल वैन उपलब्ध कराई गई है। इस वाहन सेवा में पशुओं का उपचार सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा। वाहन में पशुओं के उपचार की पूरी व्यवस्था होगी। दवाओं को रखने के लिए इसमें फ्रिज भी लगाए हैं। इसके चिकित्सक व कंपाउंडर सहित तीन लोगों का स्टाफ होगा। साथ ही वाहन में उपचार से जुड़ी सभी सुविधाएं इसमें की गई है। जिससे इलाज के कारण पशुओं को तड़पना नहीं पड़ेगा।</p>
<p><strong>वैन में चालू रहेगा जीपीएस </strong><br />पशु चिकित्सा विभाग ने हर मोबाइल वेटरनरी यूनिट में जीपीएस लगाया है। जीपीएस का कंट्रोल जयपुर से रहेगा। ऐसे में इसमें तैनात चिकित्सक, पशुधन सहाय एवं वैन चालक गड़बड़ी नहीं कर सकेगा। टीम को वैन लेकर पशुपालक के घर जाना ही होगा और रिपोर्ट देनी ही होगी। जब तक टोल फ्री नम्बर चालू नहीं होगा तब तक वैन के माध्यम के गांवों में कैम्प लगाकर बीमार पशुओं का उपचार किया जाएगा। वर्तमान में रूट चार्ट के हिसाब से वेटरनरी वैन का संचालन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>1962 नम्बर पर करना होगा कॉल  </strong><br />मोबाइल वेटरनरी यूनिट में एक पशु चिकित्सक, एक पशुधन सहायक एवं मोबाइल वेटरनरी यूनिट चालक रहेंगे। सरकार ने एक लाख पशुओं की आबादी पर एक मोबाइल वैटेनरी यूनिट लगाई है। वैसे पूरे प्रदेश की बात की जाए तो पूरे राजस्थान में 536 मोबाइल वेटरनरी यूनिट काम करेगी। कॉल सेंटर चालू होने के बाद बीमार पशु का मालिक मोबाइल वेटरनरी यूनिट को बुलाने के लिए अपने मोबाइल से 1962 नम्बर पर कॉल करेगा और नाम पता बताएगा, उस नाम पते पर यह यूनिट पहुंच जाएगी।</p>
<p>सरकार ने मोबाइल वेटरनरी यूनिट तो शुरू कर दी, सभी पशुपालकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उसकी भैंस बीमार हो गई थी। ऐसे में मोबाइल वेटरनरी यूनिट की जरूरत थी, लेकिन वह नहीं मिली। बाद में पशु चिकित्सालय में ले जाकर उसका उपचार कराना पड़ा।<br /><strong>-श्योजी गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>कोटा जिले में छह मोबाइल वेटरनरी वैन का संचालन किया जा रहा है। निजी फर्म ने अभी तक टोल फ्री नम्बर 1962 चालू नहीं किया है। फर्म ने इसे चालू करने के लिए मई माह तक का समय मांगा तब तक गांवों में कैम्प लगाकर बीमार पशुओं का उपचार किया जा रहा है। <br /><strong>-डॉ. जयप्रकाश मीणा, वरिष्ठ पशु चिकित्सक, पशुपालन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 May 2024 15:02:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - मोबाइल वेटरनरी वैन सेवा ने फिर पकड़ी रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[गांवों में बीमार पशुओं को मिलने लगा उपचार । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---mobile-veterinary-van-service-again-gained-momentum/article-75612"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/trer7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में बीमार पशुओं को घर बैठे उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मोबाइल वेटरनरी वैन सेवा ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। कोटा जिले सहित पूरे प्रदेश में विभिन्न मांगों को लेकर मोबाइल वेटरनरी वैन में तैनात स्टॉफ गत दिनों हड़ताल पर चला गया था। इससे वेटरनरी वैन का संचालन बंद हो गया था और पशुपालकों को बीमार पशुओं का उपचार कराने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। पशुपालकों की समस्या को देखते हुए सेवा प्रदाता कम्पनी और वैन स्टॉफ के बीच वार्ता होने के बाद वैटरनरी वैन का फिर से संचालन शुरू हो गया। इससे अब पशुपालकों को राहत मिलने लगी है।</p>
<p><strong>कोटा में बंद हो गई थी छह वैन</strong><br />सरकार की ओर से जिले में ब्लॉक के हिसाब से मोबाइल वेटरनरी वैन संचालित की जा रही थी। कोटा जिले में छह ब्लॉक में वैन चल रही थी। 10 अप्रेल को प्रदेश स्तरीय आह्वान पर सभी छह वैन का स्टॉफ हड़ताल पर उतर गया था। इससे वैनों का संचालन बंद हो गया था। जिले में फरवरी माह में यह सुविधा शुरू की गई थी। इससे बीमार पशुओं को घर बैठे उपचार की सुविधा मिल रही थी। वैनों का संचालन बंद होने से पशुओं के उपचार की व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ गई थी। पशुपालकों को बीमार पशुओं का उपचार कराने में परेशानी हो रही थी।</p>
<p><strong>वार्ता के बाद बनी सहमति</strong><br />विभिन्न मांगों को लेकर कोटा जिले सहित पूरे प्रदेश में मोबाइल वैन में तैनात पशु चिकित्सक सहित पूरा स्टॉफ हड़ताल पर चला गया था। स्टॉफ का कहना था कि वैन सेवा शुरू होने के बाद से प्रदाता कम्पनी ने अभी तक उनकों  मानदेय का भुगतान नहीं किया है। वहीं नियमित रूप से दवाइयां भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार ज्वाइनिंग लेटर भी नहीं दिया है। कई बार अवगत करवाने के बावजूद सेवा प्रदाता कम्पनी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। सरकार के दखल के बाद सेवा प्रदाता कम्पनी और वैन स्टॉफ के बीच वार्ता हुई। वार्ता के बाद हड़ताल समाप्त हो गई और वेटरनरी वैन फिर से दौड़ने लगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Apr 2024 14:09:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>कहीं थम न जाए मोबाइल वेटरनरी वैन के पहिए</title>
                                    <description><![CDATA[कर्मचारियों में रोष है और अब हड़ताल पर जाने का निर्णय किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-wheels-of-the-mobile-veterinary-van-should-not-stop-anywhere/article-74790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/kahi-tham-na-jaye-mobile-veterniary-van-k-pahiye...kota-news-09-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में बीमार पशुओं को घर बैठे उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मोबाइल वेटरनरी वैन सेवा के कभी भी ब्रेक लग सकते हैं। वैन सेवा प्रदाता कम्पनी की ओर से कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में वैन में तैनात कर्मचारियों ने आगामी दिनों में हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। जिले में वर्तमान में छह मोबाइल वेटरनरी वैन संचालित हो रही है। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से वैन के पहिए थम जाएंगे। इससे पशुपालक घर बैठे पशुओं के उपचार की सुविधा से वंचित हो जाएंगे। </p>
<p><strong>न मानदेय मिल रहा न दवाइयां</strong><br />पशुपालकों को घर बैठे पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने मोबाइल वेटरनरी वैन सेवा इस साल 24 फरवरी को शुरू की थी। कोटा जिले में छह ब्लॉक के लिए छह वैन उपलब्ध कराई गई है। अभी छह वैन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रही है और घर बैठे बीमार पशुओं का उपचार कर रही है। एक मोबाइल वैन में तैनात पशु चिकित्सक ने बताया कि वैन सेवा शुरू होने के बाद से प्रदाता कम्पनी ने अभी तक उनकों  मानदेय का भुगतान नहीं किया है। वहीं नियमित रूप से दवाइयां भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार ज्वाइनिंग लेटर भी नहीं दिया है। इससे कर्मचारियों में रोष है और अब हड़ताल पर जाने का निर्णय किया है।</p>
<p><strong>एक लाख पशुओं पर एक वैन</strong><br />जिले में पशुओं की एक लाख जनसंख्या के अनुपात में मोबाइल वेटरनरी वैन को तैनात किया गया है। जिले में पशु संख्या के आधार पर वैन सौंपी गई है। कोटा जिले के लिए छह वैन आवंटित की गई है। यह वैन दो चरणों में उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में सभी वैन ब्लॉक वार संचालित की जा रही है और घरों पर जाकर बीमार पशुओं का उपचार भी कर रही है। मोबाइल वेटरनरी वैन के जरिए पशुओं का टीकाकरण, उनका गभार्धान एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही है। </p>
<p><strong>वैन में चिकित्सक सहित तीन कर्मी तैनात</strong><br />सरकार ने एक निजी फर्म को पूरे प्रदेश में मोबाइल वेटरनरी वैन संचालित करने के लिए अधिकृत किया है। इस समय निजी कम्पनी की ओर राज्य में 536 वैन संचालित की जा रही है। प्रत्येक मोबाइल वेटरनरी वैन में फर्म की ओर से एक पशु चिकित्सक, एक सहायक और एक ड्राइवर को तैनात किया गया है। साथ ही दवाओं के वितरण की व्यवस्था भी फर्म के स्तर पर की जा रही है। वैन में पशुओं के गोबर, मूत्र व खून के परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। </p>
<p>जिले में मोबाइल वेटरनरी वैन सेवा शुरू होने से पशुपालकों को काफी राहत मिली है। अब गांवों में वैन आने से घर बैठे ही बीमार पशुओं का उपचार हो रहा है। यदि मोबाइल वैन सेवा बंद हो जाएगी तो पशुपालकों को काफी परेशानी होगी। सरकार को इस मामले में दखल देकर कर्मचारियों की समस्या का समाधान करना चाहिए। <br /><strong>- श्योजी गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>जिले में छह मोबाइल वेटरनरी वैन सेवा संचालित हो रही है। वैन में तैनात निजी फर्म के कर्मचारियों ने मानदेय नहीं मिलने की शिकायत की है। वहीं अन्य समस्याएं भी बताई है। इन समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आगामी दिनों में हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यह मामला निदेशालय स्तर का है। इस सम्बंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है।<br /><strong>- डॉ. गिरिश सालफळे, उप निदेशक, पशुपालन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 09 Apr 2024 17:13:22 +0530</pubDate>
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