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                <title>Iran Israel conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Iran Israel conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट: यूरोपीय संघ का ईंधन आयात बिल 14.9 अरब डॉलर बढ़ा; ऊर्जा मंत्रियों की मंगलवार को अहम बैठक, इन मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण यूरोपीय संघ का ऊर्जा आयात बिल मात्र 28 दिनों में 13 अरब यूरो बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति ठप होने से जीवाश्म ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। रूसी गैस पर निर्भरता कम करने की कोशिशों के बीच यह संकट यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-eus-fuel-import-bill-increased-by-149/article-148567"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-power-crisis.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। यूरैक्टिव ने एक गोपनीय राजनयिक दस्तावेज के हवाले से कहा है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण यूरोपीय संघ को ऊर्जा आयात के बिल में 13 अरब यूरो (14.9 अरब डॉलर) की अतिरिक्त लागत चुकानी पड़ी है। ऊर्जा मंत्रियों की मंगलवार को होने वाली ऑनलाइन बैठक से पहले ब्रुसेल्स ने यूरोपीय संघ के देशों को भेजे दस्तावेज में कहा, "28 दिनों के संघर्ष ने संघ के जीवाश्म ईंधन आयात बिल में पहले ही 13 अरब यूरो जोड़ दिए हैं।"</p>
<p>अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे। ईरान इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है। इस बीच, फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों में तेल और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग - होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला नौपरिवहन प्रभावी रूप से ठप हो गया है। इस वजह से अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं। इस संघर्ष ने यूरोपीय संघ के देशों में ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि कर दी है, जो इसके साथ ही रूसी गैस और तेल का आयात बंद करने की तैयारी भी कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 16:34:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का जबरदस्त पलटवार: इजरायल के डिमोना स्थित परमाणु संयंत्र पर लगातार बरसाई मिसाइलें, 100 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने इजरायल के परमाणु अनुसंधान केंद्र (डिमोना) और अराद शहर पर भीषण मिसाइल हमला किया, जिसमें 100 से अधिक लोग घायल हुए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इसे नतांज हमले का प्रतिशोध बताया है। बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे "कठिन शाम" करार देते हुए दुश्मनों को कड़ा सबक सिखाने और सभी मोर्चों पर मजबूती से लड़ने का संकल्प लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/irans-strong-counterattack-missiles-continuously-rained-on-israels-nuclear-plant/article-147433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/is.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीब। ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने शनिवार रात एक खतरनाक मोड़ ले लिया, जब ईरान ने इजरायल के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दक्षिणी शहरों डिमोना और अराद पर भीषण मिसाइल हमला किया। इन हमलों में 100 से अधिक लोग जख्मी हो गए जिनमें से 11 की हालत गंभीर है। इन शहरों पर हुए हमलों का मुख्य उद्देश्य डिमोना के पास स्थित 'शिमोन पेरेज नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र' को निशाना बनाना था। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई इजरायल द्वारा नतांज परमाणु केंद्र पर किए गए हमलों के प्रतिशोध में की गई है।</p>
<p>ईरान के इन मिसाइल हमलों में दो बच्चों सहित 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 11 की हालत नाजुक बताई जा रही है। इजरायली मीडिया के अनुसार, देश की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में विफल रही, जिसकी अब उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।</p>
<p>गौरतलब है कि, डिमोना और अराद शहर नेगेव रेगिस्तान में स्थित हैं और इजरायल के संवेदनशील ढांचे का हिस्सा हैं। डिमोना को विश्व स्तर पर इजरायल के संदिग्ध परमाणु हथियार कार्यक्रम के केंद्र के रूप में जाना जाता है। अराद शहर कई प्रमुख इजरायली रक्षा बलों के ठिकानों के पास स्थित है और परमाणु संयंत्र में काम करने वाले कर्मियों का आवासीय केंद्र भी है। ईरान ने इन दोनों शहरों को इसलिए चुना क्योंकि ये परमाणु बुनियादी ढांचे और सैन्य रसद की एक साझा श्रृंखला बनाते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस स्थिति को "भविष्य के अभियान की एक बहुत कठिन शाम" करार दिया है। उन्होंने और आईडीएफ के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने संकल्प लिया है कि इजरायल सभी मोर्चों पर अपने दुश्मनों के खिलाफ मजबूती से लड़ना जारी रखेगा। नेतन्याहू ने प्रभावित शहरों के महापौरों से बात कर उन्हें सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 14:34:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईद-उल-फितर के पावन मौके पर शिया समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर अदा की नमाज: ईरान-इजरायल संघर्ष के विरोध में आवाज उठाते हुए अमेरिका विरोधी लगाए नारे</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के संभल में ईद की नमाज के दौरान शिया समुदाय ने बांहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ईरान-इजरायल संघर्ष और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। प्रशासन ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-the-holy-occasion-of-eid-ul-fitr-people-of-shia-community/article-147366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/eid.png" alt=""></a><br /><p>संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में ईद-उल-फितर के मौके पर कुछ स्थानों पर नमाज के दौरान विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। थाना हजरतनगर गढ़ी क्षेत्र के कस्बा सिरसी स्थित सादात मस्जिद में शिया समुदाय के लोगों ने बाहों पर काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज अदा की। नमाज के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के विरोध में नारेबाजी की। </p>
<p>प्रदर्शनकारियों ने ईरान-इजरायल संघर्ष के विरोध में आवाज उठाते हुए अमेरिका विरोधी नारे भी लगाए। इस दौरान कुछ लोगों ने अयातुल्लाह अली खामेनेई से जुड़ी घटनाओं को लेकर भी आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। नारेबाजी को लेकर पुलिस और कुछ प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की बहस भी हुई। हालांकि, स्थिति बाद में नियंत्रण में आ गई। प्रशासन ने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 18:32:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने रश्त में ड्रोन को किया ढेर : एमएवी द्वारा किया हमला, रिपोर्ट में दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[गिलान प्रांत के सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के डिप्टी-गवर्नर अली बाघेरी के अनुसार रश्त पर एमएवी द्वारा हमला किया गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-gave-information-to-the-drone-in-rasht/article-118509"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(2)39.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के वायु रक्षा बलों ने देर रात उत्तरी शहर रश्त में कई माइक्रो एरियल व्हीकल्स (एमएवी) का पता लगाया और उन्हें मार गिराया। रिपोर्ट में यह जानकारी दी। गिलान प्रांत के सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के डिप्टी-गवर्नर अली बाघेरी के अनुसार रश्त पर एमएवी द्वारा हमला किया गया था। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मानवरहित विमान इजरायल का था या नहीं।</p>
<p>13 जून को इजरायल ने ईरान के विभिन्न क्षेत्रों पर बड़े हवाई हमले किए। जिनमें परमाणु और सैन्य स्थल शामिल हैं। हमले में कई वरिष्ठ कमांडर, परमाणु वैज्ञानिक और नागरिक मारे गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की बौछार कर दी, जिसमें इजरायल के कई लोग हताहत हुए और भारी क्षति पहुंची। दोनों देशों के बीच मंगलवार को युद्ध विराम घोषित किया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Jun 2025 17:58:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान का इजरायल पर बड़ा हमला</title>
                                    <description><![CDATA[दो दिन पहले अमेरिका की ओर से इजरायल को दी गई चेतावनी सही निकली। ईरान ने सौ से अधिक ड्रोन और इतनी संख्या में मिसाइलों के जरिए इजरायल पर हमला बोल दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/irans-big-attack-on-israel-iran-israel-conflict/article-75128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/transfer-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>दो दिन पहले अमेरिका की ओर से इजरायल को दी गई चेतावनी सही निकली। ईरान ने सौ से अधिक ड्रोन और इतनी संख्या में मिसाइलों के जरिए इजरायल पर हमला बोल दिया। जिसे इजरायल से मजबूत एअर डिफेंस प्रणाली निष्क्रिय करने में जुटी है। अब इजरायल को उस पर पलट वार करने का मौका मिल गया है। युद्ध का नया मोर्चा खुलने की वजह से अब यह आशंकाएं बलवती हो गई है कि इसकी लपेट में पश्चिमी एशिया का एक बड़ा भाग आ गया है, उसके और व्यापक होने की आशंकाएं उठ खड़ी हुई हैं। इस युद्ध के छिड़ने की आंच सिर्फ पश्चिमी एशिया तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि पूरी दुनिया को भी प्रभावित कर  सकती है। विश्व पहले से दो साल से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध और छह माह से जारी हमास-इजरायल के संघर्ष से बनी कई चुनौतियों से उभर नहीं पाया। ऐसे में यह तीसरे युद्ध की त्रासदी फिर उसके सामने चुनौती बनकर उभर आई। </p>
<p>इसका पहला असर तेल के दामों में वृद्धि और उत्पादन पर होगा। कारण सिर्फ ईरानी हमले की आशंका भर से इसके दाम एक फीसदी बढ़ गए थे। इस नए युद्ध के और भड़क जाने से तेल के दाम कहां तक पहुंच जाएंगे। निश्चित रूप से भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है। ईरान के साथ युद्ध के और भड़कने की संभावना पर इजरायल का अमेरिका और पश्चिमी देश साथ देंगे। अमेरिका ने तो दो दिन पहले ही अपने दो जंगी जहाजों के साथ अपने सेंट्रल कमान के मुख्य कमांडर को इजरायल भेज दिया था।  यहां बता दें कि हमास पर इजरायली हमले को लेकर लालसागर समुद्री मार्ग पर कई देशों के व्यापारिक जहाजों पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से लगातार हमले बोले जा रहे हैं। जिन्हें नियंत्रित करने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन ने पहले से ही अपने युद्ध पोत तैनात कर रखे हैं। हूतियों के अलावा इजरायल के हमास पर हो रहे हमले के खिलाफ ईरान समर्थित हिजबुल्लाह उत्तरी इजरायल पर हमले बोल रहा है।</p>
<p>यहां बता दें कि जहां तक ईरानी हमलों का सवाल है तो उसके खिलाफ इजरायली सेना पहले से ही तैयार रही है। फिर उसका एअर डिफेंस मजबूत है, जो ईरानी मिसाइलों को विफल कर रहा है। लेकिन इसके उलटे ईरान के पास इजरायल जैसा एअर डिफेंस सिस्टम नहीं है। फिर खुद इजरायल की यह रणनीति भी रही थी कि 7 अक्टूबर को हुए हमले और हमास के खिलाफ  छेड़े संघर्ष के बाद युद्ध के मैदान में ईरान भी उतरे। </p>
<p>गौर करने वाली बात तो यह है कि एक दिन पहले ही ईरान की रिवॉल्यूशनरी फोर्स ने इजरायली अरबपति के व्यापारिक जहाज जो कि भारत की ओर आ रहा था, उसे अपने कब्जे में लेकर ईरान ले गए थे। ईरान की इस कार्यवाही का इजरायल ने कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी थी। इस जहाज पर सत्रह भारतीय सवार थे। जिन्हें मुक्त कराने के लिए भारत की ईरान सरकार से बातचीत चल रही थी। भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है कि वे जहां तक संभव हो सके, वे फिलहाल ईरान और इजरायल की यात्रा ना करें। <br /> इस नए युद्ध ने भारत के लिए आने वाले दिनों में नई मुसीबत खड़ी कर दी है। भारत के जिस तरह से रूस और यूक्रेन से मित्रवत संबंध रहे हैं। इसी तरह इजरायल और ईरान के साथ भी बने हुए हैं। उसे युद्धग्रस्त देशों से अपने देशवासियों को सुरक्षित निकालने की चुनौती होगी। ईरान में जहां करीब चार हजार भारतीय रहते हैं। तो इजरायल में करीब अठारह हजार लोग। यही नहीं इन दोनों देशों से हो रहे व्यापार और कारोबार प्रभावित होंगे। बता दें भारत और ईरान के बीच सालाना करीब 21 हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है। तो इजरायल के साथ करीब नब्बे हजार करोड़ रुपए का सालाना व्यापार होता है। भारत से चाय, कॉफी, चीनी ईरान भेजी जाती है। तो ईरान से पेट्रोलियम कोक, नट्स और एसाक्लिक एल्कोहल आदि।   दो सप्ताह पूर्व सीरिया स्थित ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हुए भीषण हमला हुआ था। इसमें ईरान के दूतावास के कई उच्चाधिकारियों और रिवॉल्यूशरी गार्ड फोर्स के वरिष्ठ कमांडरों की मौत हो गई थी। ईरान का आरोप था कि इस हमले के पीछे इजरायल का हाथ है। वह इसका बदला लेकर रहेगा। जबकि इस हमले के पीछे इजरायल ने साफ इंकार किया था। संभावित युद्ध को टालने के मकसद से अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन, तुर्किए और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से ईरान को समझाने की कोशिशें भी शुरू करने की बात की थी।  नया युद्ध छिड़ते ही इसे रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तुरंत आपात बैठक बुलाई गई है। वह कितनी कामयाब होगी, यह देखना बाकी है। कारण पूर्व में रूस-यूक्रेन युद्ध और हमास-इजरायल के बीच जंग को रोकने के युद्ध विराम को तमाम प्रयास विफल हो चुके हैं। ऐसे में उसकी पहल कोई रंग लाएगी, इसे देखना बाकी है।      </p>
<p>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Apr 2024 11:40:56 +0530</pubDate>
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