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                <title>World Earth Day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>World Earth Day RSS Feed</description>
                
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                <title>विश्व पृथ्वी दिवस : उदयपुर में सैकण्डरी यूरेनियम तो जालौर में आरईई की खोज, उद्योगों को मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश स्तर पर खनिज अनुसंधान और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए उदयपुर और बीकानेर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके तहत उदयपुर में पृथ्वी की गहराइयों में पाए जाने वाले दुर्लभ तत्वों की खोज का कार्य किया जाएगा, जबकि बीकानेर में सिरेमिक पर नए शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/world-earth-day-secondary-uranium-discovered-in-udaipur-and-ree/article-151279"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)32.png" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। प्रदेश स्तर पर खनिज अनुसंधान और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए उदयपुर और बीकानेर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके तहत उदयपुर में पृथ्वी की गहराइयों में पाए जाने वाले दुर्लभ तत्वों की खोज का कार्य किया जाएगा, जबकि बीकानेर में सिरेमिक पर नए शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। योजना के अनुसार उदयपुर में लगभग सौ करोड़ रुपए की लागत से रेयर अर्थ एलिमेंट (आरईई) यानी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की खोज की जाएगी। ये तत्व अत्यंत सीमित मात्रा में पाए जाते हैं और इनकी उपस्थिति पार्ट पर मिलियन (पीपीएम) स्तर पर होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से रेयर अर्थ एलिमेंट अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनका उपयोग आधुनिक तकनीकों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी निर्माण में होता है। देशभर में ऐसे दुर्लभ तत्वों की संख्या अधिकतम 15 मानी जाती है, जिनकी खोज और दोहन भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। </p>
<p>इन दोनों परियोजनाओं के माध्यम से राजस्थान न केवल खनिज संसाधनों के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि औद्योगिक और तकनीकी विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा। आरईई के एक्सीलेंस सेंटर का प्रस्ताव मोहनलाल सुखाड़िया विभाग के भू-विज्ञान विभाग न तैयार किया है।</p>
<p><strong>17 तत्वों का समूह होता है आरईई</strong><br />रेयर अर्थ एलिमेंट में कुल 17 तत्वों का समूह होता है, जो लैंथेनाइड शृंखला के साथ-साथ दो अन्य तत्वों को शामिल करता है। ये तत्व आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये तत्व रेयर नाम से जाने जाते हैं, लेकिन वास्तव में ये पूरी तरह दुर्लभ नहीं होते बल्कि एक साथ बड़े भंडार में कम मिलते हैं और इन्हें निकालना कठिन होता है। लैंथेनाइड शृंखला में शामिल 15 तत्वों में लैंथेनम, सेरियम, प्रसीओडिमियम, नियोडिमियम, प्रोमेथियम, समेरियम, यूरोपियम, गैडोलिनियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, इटरबियम व ल्यूटेटियम शामिल हैं। रेयर अर्थ एलिमेंट भविष्य की तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं।  </p>
<p><strong>जिले में सैकंडरी यूरेनियम की उपस्थिति</strong><br />सुखाड़िया विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग की ओर से बीते 7 दशकों से जिले में यूरेनियम की खोज पर सर्वे किया जा रहा है। उदयपुर के अंबेरी, उमरड़ा, कानपुर, लकड़वास, ओड़ा एवं डाकन कोटड़ा में ब्लैक शेल्स चट्टानों में सैकंडरी यूरेनियम की उपस्थिति पाई गई है। दरअसल, ग्रेनाइट रॉक में प्राइमरी यूरेनियम पाया जाता है। इसके अतिरिक्त एक अन्य सर्वे में कॉपर लेड जिंक की भी उपस्थिति पाई गई है। यह सर्वे भीलवाड़ा से शुरू हुआ, जो राजसमंद और उदयपुर तक पहुंचा है। उदयपुर के दरीबा, ताणा और भींडर में कई स्थानों पर इसकी उपलब्धता पाई गई है। ऐसे में सर्वे को आगे बढ़ाते हुए सलूंबर तथा बांसवाड़ा तक भी ले जाया जा सकता है।</p>
<p><br />वापस भेजा है प्रस्ताव<br />डायरेक्टर ऑफ माइनिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आरईई के एक्सीलेंस सेंटर को लेकर पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया था। क्लीयरेंस को लेकर कुछ नए अपडेट किए गए हैं। इस प्रस्ताव को भी तैयार कर भेज दिया गया है। उपकरण खरीद को लेकर बजट जारी हो गया है तथा टेंडर प्रक्रिया कर दी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:32:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>विश्व पृथ्वी दिवस पर निगम ग्रेटर स्वच्छता की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[ नगर निगम जयपुर ग्रेटर की ओर से पिक द प्लास्टिक महाभियान चला कर सभी वाटर बॉडीज से प्लास्टिक कचरे को साफ किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/corporations-greater-cleanliness-initiative-on-world-earth-day/article-75625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/trer-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगर निगम जयपुर ग्रेटर की ओर से पिक द प्लास्टिक महाभियान चला कर सभी वाटर बॉडीज से प्लास्टिक कचरे को साफ किया जा रहा है। प्लास्टिक वर्सेज प्लेनेट थीम पर यह कार्य किया जा रहा है।</p>
<p>निगम ग्रेटर आयुक्त रुक्मणी रियाड ने शहर को साथ एवं स्वच्छ बनाए रखने के लिए नगर निगम के सातों जनों में यह अभियान शुरू किया गया इस अभियान के दौरान सभी साल में प्रस्थान स्कूलों में सफाई करवाई जा रही है और प्लास्टिक बॉडी को भी साफ कर लोगों में सफाई का संदेश दिया जा रहा है उन्होंने कहा कि आमजन भी नगर निगम के सफाई अभियान में अपना सहयोग करें और अपने घर के बाहर न कचरा डालें ना किसी को कचरा डालने दें और यदि कोई कचरा डाल रहा है तो उसके लिए स्वयं भी समझाइश करें। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान द्रव्यवती त्रिवार प्रोजेक्ट में भी जगह-जगह पहले गंदगी को भी हटाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Apr 2024 12:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रहा है भारत</title>
                                    <description><![CDATA[किसी भी देश के विकास के तौर तरीकों को लेकर विकासवादियों और पर्यावरण वादियों में सदैव बहस होती आई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/india-is-turning-into-a-concrete-jungle/article-75609"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/trer-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>किसी भी देश के विकास के तौर तरीकों को लेकर विकासवादियों और पर्यावरण वादियों में सदैव बहस होती आई है। विकास का अर्थ क्या है? क्या आधारभूत सरंचनाएं तैयार करना ही विकास है? क्या जैविक जंगलों की बलि देकर कंक्रीट के जंगल तैयार करना ही विकास है? आधुनिक जगत में यह आज भी शोध का विषय है कि सम्यक विकास कैसे हो? यानि देश में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे आधारभूत ढांचा खड़ा किया जाए। भारत के संदर्भ में बात करें तो आज तक हम विकास का एक समुचित मॉडल तैयार नहीं कर पाए, जिससे विकास और पर्यावरण में संतुलन स्थापित हो। यही कारण है कि भारत लगातार कंक्रीट के जंगल में तब्दील होता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण कहीं पीछे छूटता जा रहा है।  नए विश्लेषण से पता चला है कि 2005-06 से 2022-23 तक पिछले 17 सालों में भारत का निर्मित क्षेत्र लगभग 25 लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है। इस रुझान ने इस अवधि के दौरान देशभर में तीव्र गति से हो रहे शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास को उजागर किया।</p>
<p>हैदराबाद में राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) और इसरो द्वारा जारी वार्षिक भूमि उपयोग और भूमि कवर के व्यापक मूल्यांकन में यह बात उभर कर आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2005-06 और 2022-23 की अवधि के दौरान निर्मित भूमि में लगभग 31 प्रतिशत की समग्र वृद्धि के साथ बढ़ोतरी देखी गई। इस अवधि के दौरान लगभग 35 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र जुड़ गया है, जिसमें भूमि कवर से सालाना लगभग 2.4 प्रतिशत की औसत वृद्धि हुई है, जिसमें बंजर भूमि और कृषि भूमि भी शामिल हैं। भारत के सालाना भूमि उपयोग और भूमि कवर एटलस शीर्षक वाले एनआरएससी मूल्यांकन के अनुसार बंजर भूमि, जिसमें खराब और अनुत्पादक भूमि शामिल है, ने 12.3 प्रतिशत तक निर्मित क्षेत्र के विस्तार में अहम योगदान दिया। एटलस से पता चलता है कि निर्मित क्षेत्रों की वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा कृषि भूमि में बदलाव या डायवर्जन के कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्मित क्षेत्र में विस्तार का एक बड़ा हिस्सा कृषि भूमि से उत्पन्न हुआ, जिसमें 6.3 प्रतिशत दोहरी या तिगुनी सालानाए 5.3 प्रतिशत खरीफ की फसल, 3.1 प्रतिशत रबी की फसल, 2.9 प्रतिशत वृक्षारोपण और 5.8 प्रतिशत परती भूमि का हिस्सा शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार तेजी से बढ़ते राज्यों के लिए निर्मित क्षेत्र का रुझान काफी स्थिर प्रतीत होता है, जहां 17 वर्षों में क्षेत्रफल में मामूली वृद्धि हुई है। मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में निर्मित क्षेत्र में स्पष्ट वृद्धि देखी गई। एनआरएससी एटलस के अनुसार निर्मित क्षेत्र शब्द इमारतों (छत वाली संरचनाओं), पक्की सतहों (सड़कों, पार्किंग स्थल),व्यावसायिक और औद्योगिक स्थलों (बंदरगाहों, लैंडफिल, खदानों, रनवे) और शहरी हरियाली वाले क्षेत्रों (पार्क, उद्यान) से संबंधित है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, राज्य और केंद्र पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2005-06 में 1.28 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2022-23 में 11.92 लाख करोड़ रुपए हो गया। नई सड़कें, राजमार्ग, रेलवे लाइनें और अन्य बुनियादी ढांचे से संबंधित विकास परियोजनाएं इस प्रगति के स्पष्ट संकेत हैं। राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर 2005 से 2023 के बीच गुजरात में (175 प्रतिशत), कर्नाटक में (109 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (94 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (75 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल में (58 फीसदी) राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई बढ़ी।</p>
<p>हालांकि इस तरह का बुनियादी ढांचागत विकास महत्वपूर्ण है, लेकिन ये कृषि भूमि और पर्यावरण की कीमत पर है, जो किसानों के लिए आजीविका का स्रोत है। एनआरएससी एटलस ने भी इसका खुलासा किया है। लेकिन किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया है,  ऐसी विकास परियोजनाओं के लिए नाम मात्र के मुआवजे के खिलाफ किसानों ने हाल ही में विरोध प्रदर्शन किया। गुजरात में किसानों ने वापी से शामलाजी तक राष्ट्रीय राजमार्ग 56 के विकास का विरोध किया था। फरवरी 2024 में, मध्य प्रदेश में भी किसान इंदौर के पश्चिमी रिंग रोड और इंदौर-बुधनी रेल लिंक के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में सामने आए। कुल मिलाकर एनआरएससी एटलस की रिपोर्ट यह संदेश देती है कि हमें भौतिक विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन बिठाते हुए ही काम करना होगा।<br /><strong>-राम शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Apr 2024 11:04:34 +0530</pubDate>
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