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                <title>voting percentage - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दोपहर 3 बजे तक 51.59 प्रतिशत मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह 10 बजे 18.33 और दोपहर 1 बजे 38.84 प्रतिशत था मतदान, शाम 6 बजे तक जारी रहेगी वोटिंग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/51-59--voter-turnout-by-3-pm/article-165383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(2)40.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा के 100 वार्डों के लिए शुक्रवार को हो रहे मतदान में कांग्रेस नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कोटा उत्तर से विधायक एवं पूर्व मंत्री शांति धारीवाल अपने पुत्र अमित धारीवाल, पुत्रवधू एकता धारीवाल और पुत्र गर्वित धारीवाल के साथ सिविल लाइंस स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मतदान केन्द्र पहुंचे और मतदान किया। परिवार के साथ मतदान करने के बाद धारीवाल ने नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनने का दावा किया।<br />पूर्व विधायक, कांग्रेस नेता और लोकसभा प्रत्याशी रहे प्रहलाद गुंजल ने वार्ड 87 के बसंत विहार स्थित मतदान केन्द्र पर वोट डाला। वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने भी वार्ड 51 स्थित एक निजी स्कूल के मतदान केन्द्र पर पहुंचकर मतदान किया।</p>
<p><strong>तीन बजे तक 51.59 प्रतिशत मतदान</strong><br />जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार शहर में मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। सुबह 7 से 10 बजे तक 18.33 प्रतिशत, दोपहर 1 बजे तक 38.84 प्रतिशत और दोपहर 3 बजे तक 51.59 प्रतिशत मतदान हो चुका था। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 16:36:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मतदान प्रतिशत बढ़ने में कारगर साबित हो सकते हैं यह उपाय - अतुल मलिकराम </title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024 के पांच चरणों का मतदान पूरा हो चुका है, हालांकि अब तक हुई 429 सीटों पर औसत मतदान लगभग 57.44 प्रतिशत रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>लोकसभा चुनाव 2024 के पांच चरणों का मतदान पूरा हो चुका है, हालांकि अब तक हुई 429 सीटों पर औसत मतदान लगभग 57.44 प्रतिशत रहा है। खुद चुनाव आयोग 60 फीसदी से कम मतदान को चिंताजनक मानता है। ऐसे में उन कारणों पर बात करना जरुरी है जो लगातार मतदान के प्रति लोगों के कम होते रुझान की वजह हो सकते हैं या उन वजहों पर ध्यान देने की आवश्यकता है जो कम मतदान का कारण बन रहे हैं। इसके लिए सबसे पहले कुछ सवाल उठाने, उनके हल खोजने और कुछ सुविधाओं को सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बात करना जरुरी है। ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि देश का कोई भी वयस्क नागरिक कहीं से भी मतदान कर सके? क्यों न 75 वर्ष से ऊपर या बीमार व्यक्तियों के लिए एक मोबाइल पोलिंग बूथ की व्यवस्था हो? ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि 75 वर्ष से ऊपर या जरूरतमंद मतदाताओं को लाने-छोड़ने की व्यवस्था हो! ऐसे ही क्यों न पर्यटन या जरुरी कामों से सफर कर रहे मतदाता भी अपने मताधिकार का उपयोग करने में सक्षम हों? यूं भी एक चुनाव में हजारों करोड़ रुपये का खर्च आता है, फिर ऐसी कुछ व्यवस्थाओं में कुछ करोड़ और खर्च कर के यदि मतदान प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है तो क्यों न इन उपायों पर गंभीरता से विचार किया जाये? </p>
<p>चुनाव आयोग के नियमानुसार आपको आपके निर्वाचन क्षेत्र में ही मतदान देने का अधिकार है। इसके लिए आपको मतदाता सूची में खुद को पंजीकृत करना जरुरी है। यहां तक तो ठीक है लेकिन क्यों न ऐसी कोई व्यवस्था हो जो ऐसे मतदाताओं को कवर करती हो जो किसी भी कारण, भले रोजगार हो, व्यवसाय हो, पर्यटन हो या मेडिकल इमरजेंसी, से अपने निर्वाचित क्षेत्र में मतदान वाले दिन उपलब्ध नहीं हैं। इन मतदाताओं के लिए प्रत्येक शहर में किसी भी निजी या सरकारी भवन में ऐसी व्यवस्था की जा सकती है जिससे वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके। हम एक एडवांस टेक्नोलॉजी वाले युग में जी रहे हैं, जहाँ हर रोज नए इन्वेंशन देखने को मिलते हैं, वहां क्या ऐसा कुछ नहीं हो सकता कि एक टेक्नोलॉजी बेस्ड सिस्टम हो, जो इंदौर के किसी मतदाता जो यदि कानपुर में हो तो वह कानपुर में ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल ऑनलाइन माध्यम से कर सके तथा इसका रिकॉर्ड इंदौर पोलिंग स्टेशन में दर्ज हो। जाहिर तौर पर इसमें कुछ बेसिक दिक्कतें जरूर हो सकती हैं लेकिन इन्ही दिक्कतों के ऊपर कम वोटिंग प्रतिशत का हल ढूंढा जा सकता है। जिस प्रकार सेना, सुरक्षा बलों या चुनाव ड्यूटी में लगाए गए कर्मचारियों को अपने मतदान केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होती और वे अपने कार्य स्थल से ही बैलेट पेपर पर वोट डाल सकते हैं, ऐसी ही कुछ व्यवस्था उन लोगों के लिए भी हो जो विभिन्न कारणों से अपने पोलिंग स्टेशन पर उपलब्ध नहीं हो पाते। </p>
<p>दूसरी ओर वर्तमान लोकसभा चुनाव की ही बात करें तो इस बार 100 साल से ज्यादा के 2.18 लाख वोटर हैं। क्यों न ऐसे वोटर्स के लिए एक मोबाइल बूथ की व्यवस्था हो। हर शहर में कुछ ऐसे मोबाइल बूथ कार्यरत हों जो चिन्हित मतदाताओं के एरिया में मौजूद हों, उनके घरों के समीप हों, जिससे उन्हें अपने मत का उपयोग करने में आसानी हो। इसी प्रकार 75 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को पोलिंग स्टेशन तक लाने-छोड़ने की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसी प्रकार प्रत्येक पोलिंग स्टेशन पर मोबाइल हेल्थ केयर वैन, पीने के पानी आदि सुरक्षात्मक व्यवस्थाओं की पहल भी की जा सकती है। </p>
<p>अंत में हम यह भी नहीं कह सकते कि वोट देना नागरिकों का कर्त्तव्य है तो कुछ भी कैसी भी परिस्थिति का सामना कर के, वह अपने कर्त्तव्य का पालन करें। यदि कम होते वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी करनी है तो उपरोक्त कारणों और उनके उपायों पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है, क्योंकि यदि ऐसे ही वोटिंग प्रतिशत कम होता गया तो इसे नागरिकों के लोकतंत्र से उठते विश्वास के रूप में भी देखा जायेगा, जो भारत जैसे विकासशील देश के लिए सम्मानजनक स्थिति नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 May 2024 15:07:37 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में चुनावी नवाचार एवं मतदान प्रतिशत</title>
                                    <description><![CDATA[देश में लोकसभा 2024 के लिए 543 सीटों में से प्रथम चरण में लगभग 102 सीटों के लिए मतदान सम्पन्न हो चुका है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मतदान का प्रतिशत पूर्व लोकसभा चुनाव 2019 की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/electoral-innovations-and-voting-percentage-in-the-country/article-75870"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/election-3.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में लोकसभा 2024 के लिए 543 सीटों में से प्रथम चरण में लगभग 102 सीटों के लिए मतदान सम्पन्न हो चुका है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मतदान का प्रतिशत पूर्व लोकसभा चुनाव 2019 की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम हुआ है। प्रथम चरण में 64 प्रतिशत मतदान हुआ है, जबकि लोकसभा 2019 में यह प्रतिशत 70 था। राज्यों में त्रिपुरा में सर्वाधिक 80 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि बिहार में सबसे कम 48 प्रतिशत मतदान हुआ है। बहुत से राज्यों में मतदान प्रतिशत 50 प्रतिशत के समक्ष रहा है। राजस्थान में भी प्रथम चरण में लोकसभा चुनाव 2019 की तुलना में लोकसभा चुनाव 2024 में लगभग 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। निश्चित ही मताधिकार प्रतिशत का गिरना लोकतंत्र की दृष्टि से चिंता का विषय है। इसके कारणों की जांच व विश्लेषण की आवश्यकता है। यद्यपि यह भी देखना है कि आगामी समय में 6 चरणों में 441 लोकसभा चुनाव में मताधिकार का उपयोग किया जाना है। देश में 543 लोकसभा सीटों के लिए लगभग 100 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे। जिसमें लगभग आधे मतदाता महिलाएं हैं तथा लगभग 60 प्रतिशत  मतदान युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो कि देश का भविष्य है। लोकसभा 2014 में 2019 के चुनाव में युवा मतदाता का प्रतिशत बढ़ा था जो कि सरकार बनाने में अधिक मददगार रहा था। लेकिन युवा मतदान के संदर्भ में एक चिंताजनक तथ्य यह आया है कि 18 से 25 वर्ष के युवा मतदाता का मात्र 38 प्रतिशत ने ही लोकसभा 2024 के लिए अपने आप को मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड करवाया है। इसका आशय है कि लगभग 62 प्रतिशत मतदाता जो बन सकते हैं उनकी मताधिकार में रुचि ही नहीं है। वह चुनाव के प्रति न सजग, न जागरूक। बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्टÑ आदि में केवल 25 प्रतिशत या कम ने अपने को मताधिकार के लिए रजिस्टर्ड करवाया है। ऐसे में यह मुद्दा चुनाव आयोग, केंद्रीय राज्य सरकार, राजनीतिक दल व विश्लेषकों के लिए गंभीर चिंतन व विश्लेषण का विषय है कि आखिर क्या कारण रहे हैं कि भारतीय चुनाव आयोग एवं सरकारी मशीनरी एवं तंत्र द्वारा मतदाता तक पहुंचाने के लिए किए गए नवाचारों की बावजूद मतदान प्रतिशत कम क्यों हुआ। देश में चुनाव सुधारों को लेकर गंभीर प्रयास लगभग दो दशक पूर्व चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन द्वारा किए गए थे तथा इसके पश्चात मतदाताओं को चुनाव से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम लागू किए गए हैं। देश स्वतंत्र निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव करवाने की जिम्मेदारी भारतीय चुनाव आयोग की है। भारतीय चुनाव आयोग मतदान तक पहुंचाने के प्रति अत्यधिक जागरुक है। विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं तथा आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी तकनीक एवं एप्स का भी सहारा लिया जा रहा है। चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए अनेक नवाचार लागू किए हैं। जिसके अंतर्गत मतदान का समय 2 घंटे बढ़ा दिया है। पहले 2 घंटे के लिए मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए पहली बार बने मतदाता, नव विवाहित वर-वधु आदि को हर बूथ पर 50 सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए जो कि चुनाव की ड्यूटी देते हैं डाक के स्थान पर सर्विस वोट डालने की व्यवस्था ड्यूटी स्थल पर ही किए जाने की व्यवस्था की गई है। 85 वर्ष या अधिक उम्र के मतदाताओं के लिए घर पर ही वोटिंग की सीधा प्रदान की गई है। सीनियर सिटीजन को वोट डालने में प्राथमिकता की व्यवस्था की गई है। चुनाव पूर्व स्विप कार्यक्रम चलाया जाता है जिसमें स्कूलों के छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नगर निगम आदि को जोड़ा जाता है। लेकिन लगता है कि यह प्रयास पर्याप्त नहीं है, राजनीतिक दलों मतदाताओं में राजनीतिक विश्लेषण का यह मानना है कि यह चुनाव कांटे की टक्कर का नहीं है। मतदाता का मानना है कि मोदी फैक्टर काम करेगा तो सरकार तो मोदी के नेतृत्व की बनेगी। आशा है कि यह चुनाव टक्कर का न होकर एक तरफा है तो मतदान करने से क्या फायदा है। स्थानीय नेताओं ने मतदाताओं को मतदान स्थल तक पहुंचने में कोई उत्साह नहीं दिखाया। दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान स्थल तक पहुंचना आसान नहीं होता है तथा यातायात व्यवस्था एक समस्या है, लेकिन निजी एवं सरकारी वाहन के चुनाव कार्य में व्यस्त हो गए तथा कार्यकर्ता एवं पार्टी द्वारा मतदान स्थल तक लाने व ले जाने में रुचि नहीं दिखाई। देश में शादी, लगातार सरकारी छुट्टियां, गर्मी का मौसम भी मतदान प्रतिशत में कमी का कारण बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि युवा मतदाता मताधिकार को लेकर उदासीन क्यों हुआ है, जबकि सोशल मीडिया पर तो वह सक्रिय रहता है, लेकिन मतदान स्थल पर वोट डालने की प्रति रुचि नहीं रखता है। आज का युवा रोजगार को लेकर अत्यधिक निराश है। राजनीतिक दलों द्वारा युवाओं को लेकर चुनावी घोषणाएं तो बहुत की जाती है लोक लुभावन वायदे किए जाते हैं लेकिन युवा मतदाताओं को निराशा ही हाथ लगी है।</p>
<p><strong>-डॉ. सुभाष गंगवाल</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Apr 2024 11:01:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>मतदान प्रतिशत घटने से भाजपा की जीत में नहीं पड़ रहा कोई फर्क : विनय सहस्रबुद्धि </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय जनता पार्टी के द्वारा मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए चुनाव पूर्व पूरी तैयारी थी, ऐसे में भाजपा के मतदाता हर मतदान केंद्र तक पहुंचे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vinay-sahasrabuddhi-decrease-in-voting-percentage-is-not-making-any/article-75799"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/trer-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश चुनाव प्रभारी विनय सहस्त्र बुद्धि ने बुधवार को चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मीडिया से भाजपा कार्यालय में बातचीत में पिछले पहले चरण के चुनाव में कम मतदान को लेकर पूछे सवाल पर कहा कि इससे भारतीय जनता पार्टी की जीत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी के द्वारा मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए चुनाव पूर्व पूरी तैयारी थी, ऐसे में भाजपा के मतदाता हर मतदान केंद्र तक पहुंचे हैं वहीं दूसरे चरण के मतदान में भी भाजपा की इसे लेकर पूरी तैयारी है और प्रयास करेंगे कि भाजपा के वोटर्स मतदान केंद्र तक पहुंचे। उन्होंने बाड़मेर के भाजपा उम्मीदवार कैलाश चौधरी के बाड़मेर में भाजपा के हारने पर पाकिस्तान के बाड़मेर में घुसपैठ करने के बयान पर कहा कि अन्य पार्टियों के नेता लंदन जाते हैं और वहां पर मौलवियों व पाकिस्तान के लोगों से बाड़मेर के चुनाव को लेकर बातचीत करते हैं तो कैलाश चौधरी का बयान इस विषय में प्रासंगिक नजर आता है जिसे उन्होंने स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने विपक्ष के मेनिफेस्टो में महिलाओं के मंगलसूत्र छीन लेने के प्रधानमंत्री के बयानों को लेकर कहा कि ऐसा उनके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बयान देते रहे हैं इसमें गलत क्या है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Apr 2024 15:31:03 +0530</pubDate>
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