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                <title>West Asia - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>West Asia RSS Feed</description>
                
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                <title>पीएम मोदी और ट्रंप ने की पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा : होर्मुज खुला रखने पर जोर, अमेरिका-ईरान में फिर वार्ता संभव</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालातों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता के लिए अपनी तत्परता भी जाहिर की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modi-and-trump-discussed-the-situation-in-west-asia/article-150454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi8.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ फोन पर द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और विशेष रूप से होर्मुज से समुद्री जहाज़ों के सुरक्षित आवागमन के बारे में चर्चा की। ट्रंप के साथ बातचीत के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी बातचीत हुई।  </p>
<p>मोदी ने कहा कि मुझे मेरे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया। हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की। हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति  वार्ता के असफल होने के बाद मोदी और ट्रंप के बीच पहली बार बातचीत हुई है और इसे पश्चिम एशिया की स्थिति के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p><strong>ट्रम्प ने कहा: हम ईरान से बातचीत को तैयार</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया में तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की कोशिशें तेज कर दी हैं। पाक ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर की मेजबानी का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि हम ईरान से बातचीत के लिए तैयार हैं। अगले दो दिनों में हमारी मुलाकात पाकिस्तान में हो सकती है।  सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर खुद इस दिशा में पहल कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि 21 अप्रैल को खत्म हो रहे 2 सप्ताह के संघर्ष विराम से पहले ही वार्ता का दूसरा दौर आयोजित किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:25:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>वॉर या नो वॉर...क्या खत्म होगी जंग? ट्रंप के संबोधन से पहले तेज हुई कूटनीतिक हलचल, 2 अप्रैल को करेंगे राष्ट्र को संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें ईरान संघर्ष समाप्ति की बड़ी घोषणा संभव है। चीन और पाकिस्तान ने शांति के लिए पांच सूत्रीय फार्मूला पेश किया है, जिसमें तत्काल युद्धविराम और समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया गया है। तेहरान ने भी बातचीत के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में शांति की उम्मीद जागी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/war-or-no-war-is-us-president-trump-going-to/article-148764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दुनिया की नजरें अब डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित संबोधन पर टिकी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें जारी सैन्य टकराव को समाप्त करने से जुड़ी अहम घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है। ट्रंप के द्वारा दिए गए हाल के बयानों से संकेत मिल रहा है कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अब उसके लिए निर्णायक मुद्दा नहीं रही।</p>
<p>इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर चीन और पाकिस्तान ने 31 मार्च को बीजिंग में साझा पहल पेश कर शांति की नई राह सुझाई है। इस पहल को इशाक डार और वांग यी ने आगे बढ़ाया, जिसमें पांच सूत्रों के जरिए तत्काल युद्धविराम और संवाद की बहाली पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव में नागरिक ढांचे पर हमले रोकने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समाधान तलाशने की बात प्रमुख है।</p>
<p>हालांकि ईरान ने पाकिस्तान की प्रत्यक्ष मध्यस्थता पर आपत्ति जताई है, लेकिन क्षेत्र में शांति स्थापित करने की अपील का समर्थन किया है। तेहरान का यह रुख संकेत देता है कि वह बातचीत के पक्ष में है, पर मध्यस्थ की भूमिका को लेकर सतर्क रणनीति अपना रहा है। अब वैश्विक समुदाय की निगाहें ट्रंप के संबोधन पर टिकी हैं—क्या वे चीन-पाकिस्तान की पहल को स्वीकार करेंगे या अपनी शर्तों के साथ इस संघर्ष के अंत की घोषणा करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:12:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा ऐलान: दो-तीन हफ़्ते में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी खत्म, तेहरान के साथ नहीं होगा कोई समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को दो-तीन हफ्तों में समाप्त कर सकता है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी युद्ध विराम की इच्छा जताई है, बशर्ते भविष्य में हमले न होने की गारंटी मिले। चीन और पाकिस्तान ने भी वैश्विक ईंधन संकट के बीच तुरंत सीजफायर की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-amid-iran-war-operation-epic-fury-will/article-148668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। वॉशिंगटन ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान युद्व को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान के विरूध अपने मिलिट्री हमलों को बहुत जल्द खत्म कर सकता है इसके लिए तेहरान को किसी भी डील पर जाने की आवश्यकता नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि क्या ईरान के साथ सफल डिप्लोमेसी "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" नाम के ऑपरेशन को जल्द ही खत्म कर सकता है। इसके लिए शायद दो या तीन हफ्ते लग सकते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही ईरान में अपने सैन्य अभियान को समाप्त कर सकता है। इसके लिए दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। वाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि अमेरिकी बल बहुत जल्द ईरान से बाहर निकल जाएंगे और उन्होंने इसके लिए दो से तीन सप्ताह की समय सीमा का संकेत दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे ही अमेरिका ईरान से बाहर निकलेगा वैश्विक ईंधन कीमतों में गिरावट आ सकती है।</p>
<p>ट्रंप का ये बयान ऐसे समय में आया है जब कि पश्चिम ए​शिया संकट अपन चरम पर है। ट्रंप के बयान से साबित होता है आखिर कैसे इस युद्व को समाप्त किया जा सकता है। उधर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी देश में इज़राइल और यूनाइटेड स्टेट्स के साथ चल रही जंग को खत्म करने की इच्छा जताई है, लेकिन वे इस बात की गारंटी चाहते हैं कि यह लड़ाई दोबारा नहीं होगी। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने यूरोप के राष्ट्रपति के साथ फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि हमारे पास इस लड़ाई को खत्म करने की ज़रूरी इच्छा है, बशर्ते ज़रूरी शर्तें पूरी हों।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हम अपना काम पूरा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि शायद दो सप्ताह के भीतर, या फिर उनका काम पूरा होने में कुछ दिन और लग सकते हैं, लेकिन हम उनके पास मौजूद हर एक चीज़ को नष्ट कर देना चाहते हैं। अब, यह संभव है कि हम उससे पहले ही कोई समझौता कर लें, क्योंकि हम पुलों पर प्रहार करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियान रोकने के बाद पेट्रोलियम की कीमतों में कमी आएगी। ट्रंप ने कहा, "मुझे बस ईरान से हटना है और हम बहुत जल्द ऐसा करेंगे। इसके बाद ईधन की कीमतें धड़ाम से नीचे गिरेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी कंपनियों की संपत्तियों को निशाना बनाने की ईरानी धमकी को लेकर चिंतित नहीं हैं।</p>
<p>इससे पहले मंगलवार की रात को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ़ एक नए खतरे को महसूस करते हुए जवाबी हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को ब्रिटेन जैसे उन देशों को खरी खोटी सुनाई जिन्होंने युद्व के दौरान अमेरिका की मदद नहीं की। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि दुनिया भर में फ्यूल की कमी को देखते हुए, इन देशों को अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए अगर कोई भी देश ऐसा नहीं करता है तो वो खुद ईरान जाकर तेल खरीद लें।</p>
<p>हालांकि, फ्रांस और इटली ने अमेरिकी-इज़राइली मिलिट्री ऑपरेशन का विरोध किया है। फिलहाल, हमलों में कमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं और यहीं कारण है कि पाकिस्तान लड़ाई में बीच-बचाव करना चाहता है। चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को बीजिंग में मुलाकात के बाद तुरंत सीज़फ़ायर की मांग की और जल्द से जल्द शांति बातचीत करने की अपील की।</p>
<p>जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस बारे में चिंतित हैं, तो ट्रंप ने संवाददाताओं को उत्तर दिया, "नहीं।" इससे पहले, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा था कि यदि ईरान में हत्याएं होती हैं, तो वह बुधवार से पश्चिम एशिया में माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, गूगल और एनवीडिया सहित 18 कंपनियों की संपत्तियों पर हमला करेगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान की राजधानी तेहरान सहित देश के विभिन्न ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे व्यापक क्षति हुई और अनेक नागरिक हताहत हुए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे। ईरान के आसपास बढ़ते तनाव के कारण फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजार में तेल और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के प्रमुख मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य की वास्तविक नाकेबंदी हो गई है और इसने क्षेत्र में तेल निर्यात एवं उत्पादन के स्तर को भी प्रभावित किया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 11:32:53 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम एशिया तनाव के बीच पाकिस्तानी पीएम ने की ईरानी राष्ट्रपति से टेलिफोन पर बात: अमेरिका-ईरान की मेजबानी का रखा प्रस्ताव, युद्ध समाप्त करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की औपचारिक पेशकश की है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से वार्ता के बाद, पाकिस्तान ने निर्णायक संवाद के लिए मेजबान बनने को 'सम्मान' बताया। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-west-asia-tension-pakistani-pm-spoke-to-iranian-president/article-147795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pakistan3.png" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान। पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है, ताकि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को समाप्त किया जा सके।</p>
<p>पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, अमेरिका और ईरान की सहमति के अधीन, पाकिस्तान सार्थक और निर्णायक बातचीत को सुगम बनाने तथा जारी संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए मेजबान बनने के लिए तैयार है और इसे अपने लिए सम्मान की बात मानता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र और उससे आगे शांति और स्थिरता के हित में पश्चिम एशिया के युद्ध को समाप्त करने के लिए जारी संवाद के प्रयासों का स्वागत करता है और उनका पूर्ण समर्थन करता है।  </p>
<p>पीएम शरीफ का यह प्रस्ताव उनके मंगलवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ हुई टेलीफोन और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक दार की उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ एक दिन पहले हुई बातचीत के बाद आया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 14:18:10 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष जारी: तेहरान में अब तक 600 लोगों की मौत, जान-माल का भारी नुकसान  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में जारी अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान के कारण तेहरान में अब तक 636 लोग मारे गए हैं और हजारों घायल हैं। सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद देश में 40 दिनों का शोक घोषित है। संघर्ष में अब तक कुल 1,348 नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि ईरान ने जवाबी हमलों की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/conflict-with-america-israel-continues-600-people-have-died-so-far/article-147637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/war.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान की राजधानी तेहरान में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को तेहरान की आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख मोहम्मद इस्माइल तवक्कोली के हवाले से बताया, इस दौरान (संघर्ष शुरू होने के बाद से) राजधानी में 636 लोग मारे गए हैं और अब तक 6,848 लोग घायल हुए हैं। तेहरान में लगभग 430 जगहों पर हमले हुए हैं। </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने 12 मार्च को कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान के परिणामस्वरूप ईरान में 1,348 नागरिक मारे गए और 17,000 से ज्यादा लोग घायल हुए। यह अभियान 28 फरवरी को ईरान के कई शहरों में शुरू किया गया था, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ। </p>
<p>ईरान ने इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका और इजरायल ने शुरू में दावा किया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से होने वाले कथित खतरे का मुकाबला करने के लिए उनका पूर्ववर्ती हमला जरूरी था, लेकिन जल्द ही उन्होंने यह साफ कर दिया कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन देखना चाहते हैं। </p>
<p>सैन्य अभियान के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई मारे गये। इस्लामिक गणराज्य ने 40 दिनों के शोक की घोषणा की। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:05:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायल ने दी ईरान पर आने वाले दिनों में संयुक्त हमले होने की धमकी, कहा ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में अभियान जारी रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने ईरान पर सैन्य हमलों को और तेज करने का ऐलान किया है। डोनाल्ड ट्रंप के अभियान में कटौती के संकेतों के बावजूद, काट्ज़ ने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना के पास ईरान में हजारों लक्ष्य हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में सभी युद्ध उद्देश्यों की प्राप्ति तक यह अभियान जारी रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/israel-threatened-joint-attacks-on-iran-in-the-coming-days/article-147424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iraesl.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने शनिवार को कहा कि ईरान पर संयुक्त हमले आने वाले दिनों में 'काफी बढ़ेंगे', हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी तरफ सैन्य अभियान में कटौती के संकेत भी दिये हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, एक सुरक्षा मूल्यांकन के दौरान, काट्ज़ ने कहा कि ईरान और उसके बुनियादी ढांचे के खिलाफ इजरायली रक्षा बलों और अमेरिकी सेना के हमलों की तीव्रता इस सप्ताह बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में अभियान जारी रहेगा।"</p>
<p>इजरायली सेना ने संकेत दिया है कि उसके पास अभी भी ईरान में 'हजारों' लक्ष्य हैं तथा वह कई और हफ्तों के संचालन के लिए तैयारी कर रही है। सीएनएन ने काट्ज़ के हवाले से कहा, "जब तक सभी युद्ध उद्देश्य प्राप्त नहीं हो जाते, हम नहीं रुकेंगे।" ये टिप्पणियां ट्रंप द्वारा यह कहे जाने के एक दिन बाद आई हैं कि अमेरिका अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के 'बहुत करीब' है और पश्चिमी एशिया में सैन्य प्रयासों को 'कम करने' पर विचार कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:05:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शांति की अपील: PM Modi ने की मैक्रां, ओमान के सुल्तान हैतम और इब्राहिम से बातए पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस, ओमान और मलेशिया के नेताओं से बातचीत कर पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर जोर दिया। भारत ने ऊर्जा ठिकानों और तेल रिफाइनरियों पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया है। मोदी ने कूटनीति और संवाद के जरिए क्षेत्र में स्थिरता लाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-spoke-to-macron-sultan-haitam-and-ibrahim-of/article-147119"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/pm-modi-oman-visit.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में लम्बे खिंच रहे युद्ध और उससे उत्पन्न चुनौतियों के बीच गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति एम्मेनुअल मैक्रां, ओमान के सुल्तान हैतम बिन तारिक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से फोन पर बातचीत की। प्रधानंमत्री ने इन तीनों नेताओं से पश्चिम एशिया में लड़ाई को रोकने और उसके बाद वहां शांति तथा स्थिरता को पुनर्स्थापित करने के लिए बातचीत और कूटनीति की राह को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत पर बल दिया।</p>
<p><strong>पीएम ने एक्स पर दी जानकारी</strong></p>
<p>मैक्रां के साथ हुई वार्ता के बारे में प्रधानमंत्री ने डिजिटल सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा,‘मैंने उनसे पश्चिम एशिया की स्थिति और तनाव कम करने की तत्काल आवश्यकता, साथ ही संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने पर चर्चा की। ओमान के सुल्तान से बातचीत के बारे में मोदी ने कहा, अपने भाई, ओमान के सुल्तान हैतम बिन तारिक से भी सार्थक बातचीत की और ओमान की जनता को अग्रिम ईद की शुभकामनाएं दीं। ओमान की संप्रभुता के उल्लंघन की कड़ी निंदा की </p>
<p>मोदी ने कहा कि भारत ने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की पुन: कड़ी निंदा की है तथा ओमान में रह रहे भारतीय नागरिकों सहित वहां रह रहे हजारों लोगों बाहरी लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के ओमान के प्रयासों की सराहना की है।</p>
<p><strong>पीएम इब्राहिम के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा </strong></p>
<p>मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री इब्राहिम ने बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और क्षेत्र में तनाव कम करने तथा शीघ्र शांति बहाल करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाए जाने के लिए पुन: अपनी प्रतिबद्धता जताई। </p>
<p><strong>खाड़ी क्षेत्र में तेल-गैस कुंओं और रिफाइनरियों पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए: भारत</strong></p>
<p>भारत ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस के कुंओं तथा तेल रिफाइनरियों पर हमलों को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा है कि इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि भारत ने यह संघर्ष शुरू होने पर ही कहा था कि नागरिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने पहले ही पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया था। इस क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हालिया हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और ये पूरे विश्व के पहले से ही अनिश्चित ऊर्जा परिदृश्य को और अस्थिर करते हैं। ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:07:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-इजरायल वार्ता: पीएम मोदी और नेतन्याहू ने की फोन पर बात, रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और गाजा शांति योजना के मुद्दों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर नए साल की बधाई दी। दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प और गाजा शांति योजना के कार्यान्वयन पर चर्चा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modi-and-netanyahu-spoke-on-phone-discussed-issues-related/article-138777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/india-israel.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भारत- इजरायल रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों और गाजा शांति योजना पर चर्चा की। बातचीत के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, मुझे अपने मित्र, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करके और उन्हें तथा इजराइल के लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं देकर प्रसन्नता हुई। हमने आने वाले वर्ष में भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।</p>
<p>हमने क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और आतंकवाद के खिलाफ और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ लडऩे के अपने साझा संकल्प की एक बार फिर पुष्टि की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि नेतन्याहू ने पीएम मोदी के साथ बातचीत के लिए टेलीफोन किया था। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ नववर्ष की शुभकामनाओं का आदान प्रदान किया और दोनों देशों के लोगों के लिए शांति और समृद्धि की कामना की।</p>
<p>उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, गहरे आपसी विश्वास और दूरदर्शी दृष्टिकोण के मार्गदर्शन में आने वाले वर्ष में भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के लिए साझा प्राथमिकताओं की पहचान की। उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति को दोहराया और इस खतरे के खिलाफ लडऩे की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की।</p>
<p>प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पीएम मोदी को गाजा शांति योजना के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी दी। पीएम मोदी ने क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में प्रयासों के लिए भारत के निरंतर समर्थन की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने संपर्क में बने रहने पर भी सहमति व्यक्त की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 17:59:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में युद्ध के विस्तार का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना महामारी के दंश से दुनिया पूरी तरह से अब तक उबर भी नहीं पाई है। उस पर पिछले ढाई साल की अवधि में ही एक के बाद एक छिड़े तीन-तीन युद्धों के दौर से उसे जूझने को मजबूर होना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/danger-of-expansion-of-war-in-west-asia/article-75974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/t1rer.png" alt=""></a><br /><p>कोरोना महामारी के दंश से दुनिया पूरी तरह से अब तक उबर भी नहीं पाई है। उस पर पिछले ढाई साल की अवधि में ही एक के बाद एक छिड़े तीन-तीन युद्धों के दौर से उसे जूझने को मजबूर होना पड़ रहा है। दो साल से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पिछले छह माह से इजरायल-हमास के बीच जारी संघर्ष भी रूक नहीं पाया। अचानक पिछले पखवाड़े में ईरान-इजरायल के बीच लड़ाई से तीसरा मोर्चा और खुल गया। हालांकि इस मोर्चे के फिलहाल शांत होने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन ईरान समर्थित हिजबुल्लाह विद्रोही संगठन की ओर से इजरायल के उत्तरी क्षेत्र में पैंतीस रॉकेटों के जरिए बोले गए ताजा हमले के क्या मायने हैं? ऐसे में पश्चिमी एशिया में छिड़े छद्म युद्ध के फिर व्यापक रूप लेने की आशंकाएं ऐसे छिपी हुई हैं मानो राख के ढेर में छिपी आंच। युद्ध पीड़ित गाजा में भुखमरी बढ़ रही है। चिकित्सा सुविधाएं ना के बराबर। पर्याप्त मानवीय सहायता भी प्रभावितों तक नहीं पहुंच पा रही। ऐसे में पहले से ही जलवायु संकट से उपजे हालात और खाद्यान्न आपूर्ति से जूझते विश्व को भीषण ऊर्जा संकट और महंगाई के दौर से गुजरने के लिए विवश होना पड़ सकता है। इजरायल-ईरान के बीच आरंभिक जंगी पहल से ही तेल के दाम 90 अमेरिकी डॉलर तक जा पहुंचे। </p>
<p>भविष्य में तेल के दामों की उछाल कहां तक पहुंच सकती है, अनुमान लगाया जा सकता है। युद्ध ने यदि अधिक विस्तार लिया तो ईरान होर्मुज जलडमरू मध्य मार्ग को रोक देगा। इस मार्ग के जरिए भारत सहित अन्य देशों को रोजाना सऊदी अरब से 63 लाख बैरल, यूएई, कुवैत, कतर और इराक से 33 लाख गैलन, ईरान से 13 लाख गैलन कच्चे तेल का निर्यात होता है। विश्व की बीस फीसदी एलएनजी का व्यापार होता है।  बता दें कि ईरान-इजरायल के बीच तनावपूर्ण स्थिति तब बनी जब एक अप्रैल को सीरिया के दमिश्क में ईरानी दूतावास पर हमला हुआ था, जिसमें उसके कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए थे। ईरान ने इसका सीधा आरोप इजरायल पर लगा दिया था। वहीं इसके नेताओं ने इसके बदले इजरायल का धरती से वजूद मिटाने की कसमें तक खाईं। दो हफ्ते बीतने से पहले ही उसने इजरायल पर तीन सौ मिसाइलों के जरिए हमला बोल दिया। इस पर इजरायल ने दावा किया कि उसने ज्यादातर मिसाइलें अपने मजबूत एअर डिफेंस के जरिए नष्ट कर दीं। हालांकि मिसाइलों को नष्ट करने के बारे में अमेरिका का भी यह दावा है कि उसने इस बड़े हमले को ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर नाकाम कर दिया था।  लेकिन यह तो मानना पड़ेगा कि पिछले कुछ दशकों के बाद ईरान ने पहली बार इजरायल पर हमला बोलकर चुनौती दी है। </p>
<p>इसके जवाब में इजरायल ने बमवर्षक ड्रोन और मिसाइलों के जरिए ईरान के बड़े सैन्य ठिकाने वाले शहर इशफाहान पर बम बरसाए। इशफाहान के बारे में यह माना जाता है कि ईरान यहीं अपने परमाणु बम बनाने का काम कर रहा है। हमला कितना बड़ा था, इसके बारे में फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। कुछ खबरों में तीन बड़े धमाकों की आवाजें सुनाई देने की बात कही गई है। हालाकि बहुत सालों पहले इजरायल इस शहर में अपने हमले बोल चुका है। ईरान ने अपना ताजा बयान जारी कर बताया है कि अब उसका इजरायल से बदला लेने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन इस बयान के बावजूद युद्ध के विस्तार की संभावनाएं तो अपने स्थान पर बनी हुई हैं। यह सर्वविदित है कि हमास और हिजबुल्लाह जैसे विद्रोही सैन्य बलों को ईरान से हर तरह की वित्तीय और सैन्य मदद मिलती आ रही है। इन्हीं के माध्यम से वह इजरायल के खिलाफ  छद्म युद्ध छेड़ता आ रहा है। लेकिन गत 7 अक्टूबर को हमास की ओर से हुए अप्रत्याशित हमले में करीब बारह सौ इजरायली मारे गए थे और सैकड़ों लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा को घेरकर हमास के खिलाफ  जोरदार हमला बोल दिया था। जो आज तक जारी है। ईरान के हमले के पीछे एक प्रमुख वजह भी मानी जा रही है कि इजरायली सुरक्षा बलों ने हमास के एक बड़े कमांडर इस्माइल के तीन बेटों को मार गिराया था। ईरान के हमले के तुरंत बाद इजरायल ने गाजा में हमले और बढ़ा दिए हैं। रविवार को उसने रफाह शहर में जोरदार हमला बोला। इजरायल-हमास संघर्ष में अब तक बत्तीस हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और करीब बहत्तर हजार घायल हुए। अस्सी फीसदी आबादी को विस्थापित होने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दोनों देशों के बीच नई जंग छिड़ने के बाद इजरायल की यह रणनीति सफल रही कि उसने 7 अक्टूबर को हमास के आतंकी हमले के पीछे ईरान को सामने पाया। तो दूसरी ओर इजरायल पर हुए हमले में ईरानी मिसाइल कार्यक्रम की कमजोरी भी उजागर हुई। </p>
<p><strong>-(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Apr 2024 12:48:19 +0530</pubDate>
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