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                <title>World News - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मुफ्त भोजन खाने के बाद इंडोनेशिया में हड़कंप: 3 दिनों में करीब 2,000 छात्र-शिक्षक फूड पॉइजनिंग से बीमार, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[इंडोनेशिया में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के मुफ्त स्कूली भोजन कार्यक्रम के तहत दूषित खाना खाने से लगभग 2,000 छात्र और शिक्षक बीमार पड़ गए। तीन दिनों में सामने आए फूड पॉइजनिंग के मामलों ने इस बहुअरबी डॉलर योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/panic-in-indonesia-after-eating-free-food-about-2000-students-teachers/article-164685"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/indo.png" alt=""></a><br /><p>जकार्ता। इंडोनेशिया में पिछले तीन दिनों के भीतर सरकार के मुफ्त स्कूली भोजन कार्यक्रम से जुड़े फूड पॉइजनिंग के कई मामले सामने आये हैं, जिनमें करीब 2,000 छात्र और शिक्षक बीमार पड़ गये हैं। ताजा मामला मध्य जावा के रेमबांग स्थित एक उच्च विद्यालय का है, जहां दूषित खाना खाने से 777 लोगों की तबीयत बिगड़ गयी। इसकी जानकारी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने दी है। यह भोजन अरबों डॉलर की योजना के तहत दिया जाता है, जो राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की प्रमुख नीतियों में से एक है। इस योजना का उद्देश्य इंडोनेशिया के स्कूली बच्चों के पोषण में सुधार करना है।</p>
<p>बड़े पैमाने पर फूड पॉइजनिंग की संदिग्ध वजह बनने के साथ-साथ यह कार्यक्रम भ्रष्टाचार के आरोपों और इसकी लागत को लेकर भी आलोचनाओं से घिरा हुआ है। लासेम के इस उच्च विद्यालय में बुधवार को दोपहर के भोजन के समय 'मकान बर्गीज़ी ग्रैटिस' (एमबीजी) कार्यक्रम के तहत दिया गया खाना खाने के बाद कुल 752 छात्रों और 25 शिक्षकों को फूड पॉइजनिंग के लक्षण महसूस हुए। प्रधानाध्यापिका जुहारतुतिक ने बताया, "उन्हें दस्त (डायरिया) की शिकायत हो गयी और वे बारी-बारी से शौचालय का इस्तेमाल करने लगे। विद्यालय में कुल 40 शौचालय हैं, इसलिए वे सभी के लिए पर्याप्त नहीं पड़ रहे थे।"</p>
<p>इसके बाद विद्यालय ने लगभग 1,200 छात्रों और 95 कर्मचारियों को घर भेज दिया, जबकि कई लोगों को अस्पताल ले जाया गया। जुहारतुतिक ने कहा कि सरकार इलाज का सारा खर्च उठायेगी और स्थानीय खाद्य वितरक ने विद्यालय आकर 'जिम्मेदारी ली है'। एक स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि यह संदिग्ध प्रकोप मंगलवार को पूर्वी जावा के सिदोरजो स्थित एक इस्लामिक बोर्डिंग स्कूल में एमबीजी का भोजन खाने के बाद 730 लोगों के बीमार पड़ने के बाद सामने आया।</p>
<p>रेनी नाम की एक महिला ने बताया कि खाना खाने के बाद उनके बच्चे को चक्कर आने और उल्टी महसूस होने के साथ पेट की समस्या शुरू हो गयी। प्रभावित लोगों में से कुछ को अस्पताल में इलाज की आवश्यकता पड़ी, जबकि कुछ छात्र इतने कमजोर थे कि उन्हें ह्वीलचेयर पर ले जाना पड़ा। इस हफ्ते मुफ्त स्कूली भोजन से जुड़े फूड पॉइजनिंग के संदिग्ध मामलों से सैकड़ों अन्य लोग भी प्रभावित हुए हैं, जिनमें दक्षिण सुलावेसी के ताना तोराजा में कई विद्यालयों के सैकड़ों लोग शामिल हैं।</p>
<p>अनुचित भंडारण या ठीक से न पकाये गये भोजन को अक्सर फूड पॉइजनिंग के मामलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है, जिसमें शरीर दूषित भोजन को खारिज कर देता है। माता-पिता और शिक्षकों ने संवाददाताओं को बताया कि मुर्गियों का मांस चिपचिपा था, साथ ही खाना अधपका लग रहा था और उससे मछली जैसी बदबू आ रही थी। स्थानीय अधिकारी इन संदिग्ध मामलों के कारणों की जांच कर रहे हैं, और संभावित मिलावट की जांच के लिए भोजन के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गये हैं। लासेम में खाद्य वितरण इकाई के प्रमुख अहमद शोलेह शरीफुद्दीन ने माफी मांगी और 'छात्रों व शिक्षकों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी ली'।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 15:33:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मेलोनी सरकार ने लगातार 1,413 दिन पूरे कर बनाया नया इतिहास, PM Modi ने दी बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली में युद्धोत्तर इतिहास की सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाली प्रधानमंत्री बनने पर जॉर्जिया मेलोनी को बधाई दी। मेलोनी सरकार के 1,413 दिन पूरे होने पर पीएम मोदी ने इस उपलब्धि को इतालवी जनता का भरोसा बताते हुए भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modi-congratulated-meloni-for-becoming-the-longest-serving-prime/article-164675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/modi-(2).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इटली में युद्धोत्तर इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर रहने पर जॉर्जिया मेलोनी को बधाई दी है। मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “ मेरी मित्र प्रधानमंत्री मेलोनी को इटली के युद्धोत्तर इतिहास में सबसे लंबे समय तक निरंतर सेवा करने वाली प्रधानमंत्री बनने पर हार्दिक बधाई। यह उपलब्धि उनके नेतृत्व में इतालवी जनता के विश्वास और भरोसे का प्रतीक है। उनकी मित्रता ने भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और मैं अपने देश की जनता के लिए एक समृद्ध भविष्य के निर्माण हेतु उनके साथ घनिष्ठ सहयोग जारी रखने के लिए तत्पर हूं। आगामी वर्षों में उनकी निरंतर सफलता के लिए मेरी शुभकामनाएं।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इटली में पीएम मेलोनी की सरकार के आज 1413 दिन पूरे हो गए जिसके साथ ही वह देश के युद्ध पश्चात इतिहास में सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाली प्रधानमंत्री बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के नाम था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:23:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तिब्बत में फिर आया 5.0 तीव्रता का भूकंप, नेपाल त्रासदी के एक सप्ताह बाद झटकों से दहशत में आए लोग</title>
                                    <description><![CDATA[तिब्बत में गुरुवार को 5.0 तीव्रता का भूकम्प महसूस किया गया। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस (GFZ) के अनुसार, भूकम्प का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में था। नेपाल सीमा के पास 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से आई भीषण तबाही के बाद आए इस भूकम्प से क्षेत्र में दहशत फैल गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/50-magnitude-earthquake-again-hits-tibet-a-week-after-nepal/article-164605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>तिब्बत। तिब्बत में गुरुवार को एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस (GFZ) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.0 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था। झटके महसूस होने के बाद लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। यह भूकंप नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक त्रासदी के करीब एक सप्ताह बाद आया है। </p>
<p>गौरतलब है कि 26 अगस्त को नेपाल सीमा के पास तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से अचानक आई बाढ़ ने कई पहाड़ी कस्बों और घाटियों में भारी तबाही मचाई थी। नेपाल में इस त्रासदी में अब तक एक हजार से अधिक लोगों की मौत और करीब चार हजार लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई फ्लैश फ्लड के बाद करीब 100 नेपाली नागरिक भी लापता बताए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:38:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>समझौते से इनकार पर ईरान के खिलाफ ट्रंप का बड़ा एक्शन, बोले- शुरू करेंगे अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते से इनकार करने पर ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे सख्त आर्थिक अभियान की घोषणा की है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान से कारोबार करने या मदद देने वाले देशों को गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। वाशिंगटन ने तेहरान के साथ किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-action-against-iran-on-refusal-of-agreement-said/article-163370"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर पहले से लगे कड़े प्रतिबंधों के अलावा और भी ज्यादा आर्थिक दबाव डालने की घोषणा की है। उन्होंने इसे ईरान के खिलाफ इतिहास का सबसे जबरदस्त आर्थिक अभियान बताया है, क्योंकि ईरान ने अमेरिका के साथ समझौता करने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को समझौता करने का जितना बड़ा मौका मैंने दिया, उतना किसी और ने नहीं दिया। दुख की बात है कि वे इसका फायदा नहीं उठा पाए। इसलिए, आज मैं किसी भी देश के खिलाफ अब तक का सबसे जबरदस्त आर्थिक अभियान शुरू करने की घोषणा कर रहा हूँ।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि जो भी देश ईरान को अपने कारोबार और सरकारी संस्थाओं के जरिए मदद देगा, उसे भारी आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, आज मैं यह भी घोषणा कर रहा हूँ कि जो भी देश अपने वित्तीय संस्थानों, कारोबारों, हवाई अड्डों या सरकारी संस्थाओं को ईरान को किसी भी तरह की मदद देने की इजाजत देगा, उसे खुद भारी आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ेगा। तेल की तस्करी, स्वैप लाइन, कैश ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस, जहाजो की रजिस्ट्री, फ्रंट कंपनियाँ-यह सब अभी बंद होना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने ईरान के खिलाफ अपने आर्थिक अभियान को अभूतपूर्व स्तर पर अलग-थलग करने वाला कदम बताया और अमेरिकी सहयोगियों से इन उपायों में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, यह अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करने वाला कदम होगा। इससे पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा था कि अमेरिका पहले से लगे कड़े प्रतिबंधों के अलावा ईरान पर और भी ज्यादा आर्थिक दबाव डाल सकता है।</p>
<p>ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, हमारे पास ऐसी चीजें हैं जिन पर हम प्रतिबंध लगा सकते हैं। हमारे पास बहुत सख्त प्रतिबंध हैं, और देखते हैं क्या होता है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने अपने राजनीतिक सहयोगियों को सूचित किया है कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बजाय धीरे-धीरे आर्थिक रूप से उसका दम घोंटने की रणनीति अपना रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस हफ़्ते ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों का एक नया पैकेज पेश किए जाने की उम्मीद है, जबकि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहेगी।   मंगलवार को ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन तेहरान के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा है और न ही ऐसी कोई योजना बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 11:35:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इंडोनेशिया में फिर कांपी धरती! फ्लोरेस में 5.9 तीव्रता का भूकंप; दो दिन पहले 7.7 के झटके में 53 मौतें</title>
                                    <description><![CDATA[इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में सोमवार तड़के 5.9 तीव्रता का भूकंप आया। शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के दो दिन बाद यह नया झटका महसूस किया गया है। शनिवार के हादसे में 53 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/earth-trembles-again-in-indonesia-earthquake-of-59-magnitude-in/article-163131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/earthquake-in-japan.png" alt=""></a><br /><p>जकार्ता। इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में सोमवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। रिक्टर पैमाने पर भूकंव की तीव्रता 5.9 मापी गयी। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (जीएफजेड) के अनुसार, आज आए भूकंप का केंद्र शुरू में 8.57 डिग्री दक्षिण अक्षांश और 121.55 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था जमीनी सतह से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। भूकंप से तत्काल किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है।</p>
<p>इससे दो दिन पहले शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। शक्तिशाली भूकंप से फ्लोरेस के छह रीजेंसी प्रभावित हुए थे। इससे भूस्खलन हुआ, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और संचार सेवाएं बाधित हुईं। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, पिछले भूकंप में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। सबसे अधिक प्रभावित नगेकेओ रीजेंसी तक बचाव दलों को पहुंचने में दिक्कत हो रही है। कई इलाकों में भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध होने और संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण राहत एवं बचाव अभियान प्रभावित हुआ है।</p>
<p>15 अगस्त को फ्लोरेस में 230 से अधिक झटके दर्ज किए गए, जिनमें सबसे शक्तिशाली की तीव्रता 6.2 रही। इस बीच, फ्लोरेस से हजारों किलोमीटर दूर सुमात्रा में भी 6.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये। शनिवार के भूकंप के बाद इंडोनेशिया ने 14 दिनों की आपातकालीन प्रतिक्रिया अवधि घोषित की है। रविवार को भी खोज एवं बचाव अभियान जारी रहा और अधिकारी जीवित लोगों की तलाश के साथ नुकसान का आकलन करते रहे।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार फ्लोरेस के कुछ हिस्सों में ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति बहाल कर दी गई है। सिका, मंगगाराई, नगेकेओ, बीमा और सेलयार समेत विभिन्न क्षेत्रों में करीब 6,000 लोग शरण लिए हुए हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, पिछले भूकंप में कम से कम 914 मकान, 93 शैक्षणिक संस्थान, 36 स्वास्थ्य केंद्र और 38 सरकारी कार्यालय क्षतिग्रस्त हुए हैं। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान के बीच आगे के झटकों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 14:54:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंडोनेशिया: भूकंप से 51 लोगों की मौत, 9,290 लोग राहत शिविरों में पहुंचे, आपातकाल लागू</title>
                                    <description><![CDATA[इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद के झटकों से भारी तबाही हुई है। हादसे में 51 लोगों की जान चली गई और 113 से अधिक घायल हुए हैं। 9,000 से अधिक लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं, वहीं प्रांतीय सरकार ने 14 दिनों की आपातकालीन प्रतिक्रिया अवधि लागू की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/51-people-died-due-to-indonesia-earthquake-9290-people-reached/article-163071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/indonesia.png" alt=""></a><br /><p>जकार्ता। इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में शनिवार को आये 7.7 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद के झटकों में 51 लोगों की मौत हो गयी तथा 113 लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (बीएनपीबी) के अनुसार, 9,290 लोग राहत एवं निकासी केंद्रों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं। बीएनपीबी के डेटा, सूचना एवं आपदा संचार केंद्र के कार्यवाहक प्रमुख बर्टन एसपी पंजैतान ने रविवार को बताया कि सिका जिले में सबसे अधिक 3,356 लोग और मंगराई में 2,078 लोग राहत शिविरों में हैं।</p>
<p>पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांतीय सरकार ने भूकंप के बाद 15 से 28 अगस्त तक 14 दिन की आपातकालीन प्रतिक्रिया अवधि घोषित की है। राज्यपाल मेल्की लाका लेना द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने में मदद मिलेगी। भूकंप के बाद 341 झटके भी दर्ज किए गए। मंगराई में सबसे अधिक 23 लोगों की मौत हुई, जबकि पूर्वी मंगराई में 17, सिका में चार और पश्चिमी मंगराई, एंदे तथा नागेकेओ में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है।</p>
<p>भूकंप से 1,357 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें 914 मकानों को भारी, 126 को मध्यम और 317 को मामूली नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 93 शैक्षणिक संस्थानों, 36 स्वास्थ्य केंद्रों और 38 सरकारी कार्यालयों को भी नुकसान पहुंचा है। सिका जिले में 1,356 लोग समाडोर स्पोर्ट्स हॉल में शरण लिए हुए हैं, जबकि करीब 2,000 लोग 10 अलग-अलग स्थानों पर रह रहे हैं। नागेकेओ, पश्चिम नुसा तेंगारा के बिमा शहर और दक्षिण सुलावेसी के सेलयार द्वीप समूह में भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।</p>
<p>बर्टन ने कहा कि आपातकालीन प्रतिक्रिया के दौरान राहत शिविरों में लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी करना और आवश्यक सामग्री पहुंचाना प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि मंगराई जिले में प्रभावित लोगों के लिए आपातकालीन तंबू, 30 टन चावल, दवाइयां, एक हजार कंबल, एक हजार फोल्डिंग बेड, एक हजार चटाइयां, स्वच्छ पानी, पानी की टंकियां और जनरेटर की तत्काल आवश्यकता है। बीएनपीबी ने इससे पहले 47 लोगों की मौत और 101 लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी। राहत एवं बचाव कार्य जारी रहने के साथ मृतकों और घायलों के आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 16:45:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोलंबिया में भीषण सड़क हादसा, बस दुर्घटना में 17 लोगों की मौत, 20 अन्य घायल</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबिया के एंटीओक्विया प्रांत में रविवार को एक बस दुर्घटना में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 अन्य घायल हुए। यह बस टोलू से लौट रहे छात्रों को लेकर जा रही थी। घायलों में तीन की हालत गंभीर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/17-people-killed-20-others-injured-in-horrific-road-accident/article-136011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/colombia-bus-accident.png" alt=""></a><br /><p>मेक्सिको सिटी। कोलंबिया के उत्तर-पश्चिमी प्रांत एंटीओक्विया में रविवार को एक बस हादसे में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, यह बस कैरिबियन क्षेत्र के पर्यटक शहर टोलू से चली थी और भ्रमण पर गए बच्चों को लेकर लौट रही थी। एंटीओक्विया के गवर्नर आंद्रेस जूलियन रेंडन ने कहा कि यह दुर्घटना एंटीओक्विया के रेमेडियोस नगर पालिका में हुई। हालांकि, दुर्घटना के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। उन्होंने बताया कि घायलों में से तीन की हालत गंभीर है।</p>
<p>रेंडन ने सोशल प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, पूरा एंटीओक्विया प्रशासन समुद्र तट पर अपने स्नातक समारोह का जश्न मनाने के बाद बेलो नगर पालिका लौट रहे छात्रों से जुड़ी दुखद बस दुर्घटना में 17 लोगों की मौत पर शोक व्यक्त करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 15:00:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने 15 साल छोटी महिला से रचाई शादी </title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने शनिवार को अपनी लंबे समय की साथी जोडी हेडन से कैनबरा स्थित ‘द लॉज’ में एक निजी समारोह में शादी कर ली। वे कार्यकाल के दौरान विवाह करने वाले देश के पहले पीएम बने। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australian-pm-married-a-woman-15-years-younger-to-him/article-134117"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/austreila-pm.png" alt=""></a><br /><p>मेलबॉर्न। ऑस्ट्रेलियाई के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने शनिवार को अपनी लंबे समय से साथी रहीं जोडी हेडन से शादी कर ली। इसके साथ ही वे देश के इतिहास में ऐसे पहले प्रधानमंत्री बन गए, जिन्होंने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान शादी की। 62 वर्षीय अल्बनीज और 46 वर्षीय हेडन ने राजधानी कैनबरा स्थित प्रधानमंत्री आवास द लॉज के बगीचे में एक निजी समारोह में शादी की। इस समारोह में सिर्फ परिवार के सदस्य और कुछ करीबी दोस्त शामिल थे। </p>
<p>शादी के बाद जारी बयान में अल्बनीज ने कहा, हम बहुत खुश हैं। अपने परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में हमने साथ रहने का वादा किया है। ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीज ने सोशल मीडिया एक्स पर सिर्फ एक शब्द- विवाहित - लिखकर अपनी शादी की झलक साझा की। वीडियो में वे बो-टाई सूट में दिखाई दिए, जबकि हेडन सफेद शादी के गाउन में मुस्कुराती नजर आईं। जैसे ही दोनों ने हाथ पकड़ा, उन पर कंफेटी बरसी। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया कि दंपति सोमवार से शुक्रवार तक ऑस्ट्रेलियाई में ही हनीमून मनाएंगे।</p>
<p>और इस दौरान होने वाले सभी खर्चे वे खुद वहन करेंगे। एंथनी अल्बनीज की यह दूसरी शादी है। वे 2019 में अपनी पहली पत्नी से अलग हुए थे और उनके बेटे का नाम नाथन है। उन्होंने जोड़ी हेडन से लगभग पांच साल पहले मेलबर्न में एक व्यावसायिक कार्यक्रम के दौरान मुलाकात की थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Nov 2025 11:40:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिलीपींस को संघर्ष के लिए उकसा रहा चीन, जानें क्या है पूरा मामला ? </title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने स्कारबोरो शोल के पास नौसेना और कोस्ट गार्ड की नई पेट्रोलिंग से फिलीपींस को फिर उकसा दिया है। यह विवादित क्षेत्र दोनों देशों के लिए सामरिक रूप से अहम है। पिछले वर्ष कई संघर्ष हो चुके हैं, जिससे तनाव दोबारा बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-is-provoking-philippines-for-conflict-know-what-is-the/article-134115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/china-and-filipines.png" alt=""></a><br /><p>शंघाई। चीन एक बार फिर दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस को उकसा रहा है। इसके लिए उसने विवादित स्कारबोरो शोल के पास अपनी नौसेना और कोस्ट गार्ड को पेट्रोलिंग के लिए भेजा है। इस द्वीप समूह पर फिलीपींस भी अपना दावा करता है। पिछले एक साल में इस द्वीप समूह को लेकर दोनों देशों की नौसेना और कोस्टगार्ड्स के बीच कई बार गंभीर संघर्ष हो चुके हैं। ऐसे में चीन की इस नई चाल से दोनों देशों में संघर्ष के फिर से भड़कने का खतरा जताया जा रहा है। चीन की ऑफिशियल न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि चीन की मिलिट्री और कोस्ट गार्ड ने शनिवार को साउथ चाइना सी में स्कारबोरो शोल के आसपास पेट्रोलिंग की ताकि अपनी सॉवरेनिटी, समुद्री अधिकारों और हितों की पूरी तरह से रक्षा की जा सके।</p>
<p>बीजिंग में फिलीपींस एम्बेसी ने कमेंट के लिए रिक्वेस्ट का तुरंत जवाब नहीं दिया। लेकिन, जानकारी के अनुसार, फिलीपींस लगातार चीनी नौसेना की हरकतों पर नजर बनाए हुए है। इसके लिए फिलीपीन नौसेना ने कई युद्धपोतों, जासूसी जहाजों और गश्ती ड्रोन को तैनात किया है। स्कारबोरो शोल दक्षिण चीन सागर में एक विवादित एटोल है, जिस पर चीन, फिलीपींस और ताइवान सभी दावा करते हैं। यह वर्तमान में चीन के वास्तविक नियंत्रण में है। यह जगह यह फिलीपींस के लूजोन द्वीप से लगभग 220 किलोमीटर (120 समुद्री मील) पश्चिम में और चीन के हैनान द्वीप से 800 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है।</p>
<p><strong>सामरिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण </strong></p>
<p>स्कारबोरो शोल के आसपास का क्षेत्र सामरिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। इस कारण चीन और फिलीपींस दोनों इस द्वीप समूह पर कब्जे की होड़ में हैं। यह मछलियों का एक समृद्ध स्रोत है, जो स्थानीय मछुआरों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है। यह प्रमुख शिपिंग लेन (समुद्री व्यापार मार्ग) के पास स्थित है, जिससे हर साल 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का व्यापार होता है। फिलीपींस का तर्क है कि यह शोल संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि  के तहत उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र के 200 समुद्री मील के भीतर आता है। वहीं, चीन ऐतिहासिक अभिलेखों का हवाला देते हुए इस शोल को अपना अंतर्निहित क्षेत्र बताता है, जो युआन राजवंश के समय से हैं।</p>
<p> 2012 में चीन और फिलीपींस के जहाजों के बीच गतिरोध के बाद, चीन ने इस शोल पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था। स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने 2016 में फैसला सुनाया कि चीन के नाइन-डैश लाइन के भीतर ऐतिहासिक अधिकारों के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि स्कारबोरो शोल एक चट्टान है और इससे कोई ईईजेड उत्पन्न नहीं होता है, लेकिन दोनों देशों के मछुआरों के पास पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकार हैं। चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Nov 2025 11:24:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जकार्ता बना दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर, टोक्यो को छोड़ा पीछे, यूएन ने जारी की लिस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[यूएन की नई रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता 42 मिलियन की आबादी के साथ दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बन गया है, जिसने टोक्यो को पीछे छोड़ दिया। टॉप-10 में दिल्ली, कोलकाता, ढाका, शंघाई और मनीला समेत 9 एशियाई शहर शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jakarta-becomes-the-worlds-most-populous-city-leaving-tokyo-behind/article-134011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>जकार्ता। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बन गया है। यूएन की नई स्टडी के मुताबिक जकार्ता ने लिस्ट में टॉप पर आते हुए जापानी राजधानी टोक्यो को पीछे छोड़ दिया है। इस स्टडी में नए क्राइटेरिया का इस्तेमाल करते हुए सबसे ज्यादा आबादी वाले शहरों की लिस्ट जारी की गई है। इस लिस्ट में भारत की राजधानी दिल्ली और कोलकाता का नाम भी शुमार है। यूएन डिपार्टमेंट आॅफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स की वर्ल्ड अर्बनाइजेशन प्रॉस्पेक्ट-2025 रिपोर्ट में बताया गया है कि जनसंख्या डिवीजन के अनुमान के मुताबिक, इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 42 मिलियन (4.2 करोड़) लोग रहते हैं। यह किसी दूसरे शहर के मुकाबले सबसे ज्यादा संख्या है। जकार्ता 1970 के दशक तक कुछ मिलियन की आबादी का शहर था। हालिया वर्षों में जकार्ता की आबादी बहुत तेजी से बढ़ी है।</p>
<p><strong>दिल्ली और ढाका की आबादी</strong></p>
<p>बांग्लादेश की राजधानी में सबसे ज्यादा जनसंख्या ढाका है। ढाका की आबादी 37 मिलियन (3.7 करोड़) है। तीसरे नंबर पर 33 मिलियन (3.3 करोड़) की आबादी के साथ टोक्यो है। यह यूएन की 2018 की पिछली रिपोर्ट से बिल्कुल अलग है। उस समय जापानी राजधानी टोक्यो को सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर आंका गया था। जकार्ता, ढाका और टोक्यो के अलावा टॉप-10 लिस्ट में भारत की राजधानी दिल्ली की आबादी 3.02 करोड, चीनी शहर शंघाई की जनसंख्या 2.96 करोड़, चीनी सिटी ग्वांगझ में 2.76 करोड़, फिलीपींस के मनीला में 2.47 करोड़ लोग रहते हैं।</p>
<p><strong>एशियाई शहरों का दबदबा</strong></p>
<p>दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले शहरों में एशिया का दबदबा है। यूरोप और अरब के मुकाबले एशिया के शहरों में ज्यादा आबादी रहती है। दुनिया के 33 मेगासिटी में से 19 एशिया में हैं। वहीं इस लिस्ट के टॉप-10 सबसे ज्यादा आबादी वाले शहरों में से 9 एशिया के हैं। ये शहर- जकार्ता, ढाका, टोक्यो, नई दिल्ली, शंघाई, ग्वांगझू, मनीला, कोलकाता और सियोल हैं। टॉप-10 में एशिया के बाहर से अकेला शहर काहिरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1950 के बाद से शहरों में रहने वाले लोगों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 11:23:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐलान, दक्षिण अफ्रीका को 2026 में होने वाले जी20 सम्मेलन में नहीं करेंगे आमंत्रित, जानें क्यों ?</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रामाफोसा ने कहा कि उनका देश अपने अधिकार से जी20 सदस्य है और किसी देश की अनुमति की जरूरत नहीं। ट्रम्प के बयान को अफसोसनाक बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण अफ्रीका संप्रभु राष्ट्र है और जी20 में उसकी सदस्यता वैध है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-president-announces-that-south-africa-will-not-be-invited/article-133879"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(12).png" alt=""></a><br /><p>प्रिटोरिया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रामाफोसा ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि, उनका देश अपने अधिकार से जी20 का सदस्य है और सम्मेलन में शामिल होने के लिए उन्हें किसी देश के मशवरे की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि श्री ट्रम्प ने कहा था कि वह दक्षिण अफ्रीका को 2026 में फ्लोरिडा में होने वाले जी20 सम्मेलन में आमंत्रित नहीं करेंगे। इसके जवाब में रामाफोसा ने कहा, दक्षिण अफ्रीका अपने नाम और अधिकार से जी20 का सदस्य है। उसकी जी20 सदस्यता सभी सदस्य राष्ट्रों की मंज़ूरी से है।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका एक स्वायत्त संवैधानिक लोकतांत्रिक देश है और वैश्विक मंचों में सदस्यता एवं अधिकार के संबंध में किसी अन्य देश से अपमान स्वीकार नहीं करता है। उन्होंने एक बयान में कहा,  दक्षिण अफ्रीका हर देश की संप्रभुता का सम्मान करता है और वैश्विक समुदाय में किसी देश का या उसकी उपस्थिति और योग्यता का अपमान नहीं करेगा। रामाफोसा ने ट्रम्प के बयान को अफसोसनाक करार देते हुए जी20 में दक्षिण अफ्रीका की सदस्या के संबंध में लगाई जा रही अटकलों को सिरे से खारिज किया। </p>
<p><strong>अमेरिका ने वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल  नहीं भेजा</strong></p>
<p>ट्रम्प ने सोशल मीडिया का रुख करते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है और उसने जी20 की मेजबानी के दस्तावेजों के हस्तांतरण में प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। इस वजह से वह दक्षिण अफ्रीका को अगले साल फ्लोरिडा में होने वाले जी20 सम्मेलन में आमंत्रित नहीं करेंगे। इस सब के बावजूद ट्रम्प ने इस बात पर भी जोर दिया कि दक्षिण अफ्रीका जी20 का पूर्ण, सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहेगा।</p>
<p>इसके जवाब में रामाफोसा ने कहा कि, अमेरिका ने जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल को नहीं भेजा, इसलिए जी20 मेजबानी के आधिकारिक दस्तावेज दक्षिण अफ्रीका में अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को सौंपने पड़े। रामाफोसा के बयान में कहा गया, जी20 के संस्थापक सदस्य के तौर पर दक्षिण अफ्रीका ने हमेशा सर्वसम्मति, सहयोग और साझेदारी की उस भावना का सम्मान किया है, जो जी20 को परिभाषित करती है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका ने अपनी मर्जी से शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। बयान में यह भी कहा गया कि एक ओर जहां अमेरिकी सरकार ने इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी व्यवसायियों और नागरिक-समाज समूहों ने बी20 और जी20 सोशल जैसे जी20 आयोजनों में बड़ी संख्या में अपनी हिस्सेदारी दर्ज की।</p>
<p><strong>देश के खिलाफ दंडात्मक उपाय अपनाना निराशाजनक</strong></p>
<p>रामाफोसा ने कहा कि, अमेरिका से कूटनीतिक रिश्ते सुधारने की कई कोशिशों के बावजूद गलत सूचना और विकृतियों के आधार पर ट्रम्प का उनके देश के खिलाफ दंडात्मक उपाय अपनाना निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका द्वारा बॉयकॉट किया गया 2025 जी20 शिखर सम्मेलन जोहान्सबर्ग सदस्य राज्यों की तारीफों का केंद्र बना और उसका अंत बहुपक्षीय सहयोग की पुष्टि करने वाले घोषणापत्र के साथ हुआ। अमेरिका की आपत्तियों और बॉयकॉट के बावजूद 20 राष्ट्रनेताओं के एक समूह ने शनिवार को  घोषणापत्र पर अपने हस्ताक्षर किए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 11:42:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ताइवान ने चीन से जंग के लिए रक्षा पर 40 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च का किया ऐलान </title>
                                    <description><![CDATA[ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने घोषणा की है कि देश 2027 तक चीन से संभावित खतरे से निपटने के लिए रक्षा पर 40 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा और ताइवान लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/taiwan-announced-additional-spending-of-40-billion-dollars-on-defense/article-133772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/taiban.png" alt=""></a><br /><p>ताइपे। चीन से साल 2027 तक हमले के खतरे का सामना कर रहे ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग ते ने बुधवार को बड़ा ऐलान किया है। ताइवान चीन के खतरे से निपटने के लिए 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि रक्षा पर खर्च करेगा। ताइवानी राष्ट्रपति लाई ने कहा कि इतिहास ने यह साबित किया है कि अगर आक्रामकता के खिलाफ आप समझौते का प्रयास करते हैं तो यह केवल गुलामी लाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी समझौते के लिए कोई जगह नहीं है। लाई ने राष्ट्रपति भवन में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वतंत्रता तथा लोकतंत्र के मुख्य मूल्य हमारे देश की नींव है। ताइवान ने यह ऐलान ऐसे समय पर किया है जब चीन बहुत बड़े पैमाने पर जंग की तैयारी कर चुका है।</p>
<p><strong>अपनी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध: </strong></p>
<p>चीन की सेनाएं न केवल ताइवान बल्कि अमेरिका, जापान और फिलीपींस तक को धमका रही हैं। ताइवानी राष्ट्रपति ने इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट में लिखे अपने लेख में कहा था कि उनका देश रक्षा पर 40 अरब डॉलर और खर्च करेगा। उन्होंने कहा कि ताइवान यह दिखा रहा है कि वह अपनी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक ताइवान की रक्षा करने और चीन का ताइवान बनने से इंकार करने के बीच संघर्ष है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक वैचारिक संघर्ष या एकीकरण बनाम स्वतंत्रता का विवाद नहीं है।</p>
<p><strong>ताइवान तबाही की ओर जा रहा: चीन</strong></p>
<p>पिछले 5 साल से चीन ने अपने दबाव को बढ़ा दिया है और अपने दावे को दोहरा रहा है। चीन के इस दावे को ताइवान पूरी कड़ाई के साथ खारिज करता है। इससे पहले चीन के ताइवान मामलों के प्रवक्ता ने कहा था कि ताइपे बाहरी ताकतों को अनुमति दे रहा है ताकि वे उसके निर्णयों को निर्धारित कर सकें। चीनी प्रवक्ता ने कहा, यह ताइवान को केवल तबाही की ओर ले जाएगा। </p>
<p>ताइवान पर लगातार अमेरिका दबाव बना रहा है कि वह अपनी रक्षा पर और ज्यादा खर्च करे। यह ठीक उसी तरह से है जैसे अमेरिका यूरोप पर खर्च बढ़ाने के लिए दबाव बना रहा है। ताइवान का इरादा है कि वह साल 2030 तक अपनी रक्षा पर जीडीपी का 5 प्रतिशत खर्च करे। साल 2026 तक ताइवान सरकार 30 अरब डॉलर खर्च करने की योजना रखती है जो जीडीपी का 3.32 प्रतिशत है। साल 2009 के बाद पहली बार ऐसा है जब ताइवान का रक्षा बजट जीडीपी के 3 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गया है। ताइवान के रक्षा की गारंटी अमेरिका की है लेकिन जब से ट्रंप सत्ता में आए हैं, उन्होंने केवल एक हथियार डील को मंजूरी दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 12:18:00 +0530</pubDate>
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