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                <title>rajasthan highcourt - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्कूलों के पास जंक फूड की बिक्री पर रोक,  हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए स्कूलों और 50 मीटर दायरे में हाई फैट, शुगर और साल्ट वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई। चार सप्ताह में पोषण समितियां और आठ सप्ताह में कैलोरी व पोषण जानकारी वाले मेन्यू बोर्ड लगाने के निर्देश। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/high-court-takes-suo-motu-cognizance-of-ban-on-sale/article-163779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जेन-जेड, जेन-अल्फा और जेन-बीटा के स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। जस्टिस अनूप कुमार ढंढ की एकलपीठ ने राज्य के स्कूलों में हाई फैट, शुगर और साल्ट वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल और उसके 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थ नहीं बेचे जा सकेंगे। अंतरिम तौर पर कार्बोनेटेड ड्रिंक, चिप्स, ट्रांस फैट वाले बेकरी उत्पाद और अन्य एचएफ एसएस खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक रहेगी। हाईकोर्ट ने सभी स्कूलों में चार सप्ताह के भीतर स्कूल खाद्य सुरक्षा और पोषण समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। आठ सप्ताह में स्कूल कैंटीन में प्रत्येक खाद्य पदार्थ की कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी वाला मेन्यू बोर्ड लगाना होगा। । कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित, ताजा और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना सरकार एवं स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है। मिड-डे मील और अन्य पोषण योजनाओं में भी खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित करनी होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार और एफएसएसएआई को छह सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। बच्चों, अभिभावकों और खाद्य विके्रताओं को जंक फूड के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने और नियमों के उल्लंघन की शिकायत के लिए अलग पोर्टल या हेल्पलाइन बनाने को भी कहा है। कोर्ट ने ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने सरकार से शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों के रिक्त पद भरने, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा, स्वास्थ्य जांच, शौचालय, पेयजल एवं खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर स्टेटस रिपोर्ट और एक्शन प्लान मांगा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 10:01:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट की जेडीए की कार्य प्रणाली पर टिप्पणी : ठेके और प्रतिनियुक्ति पर चल रहा जेडीए, कहा- लोगों को नहीं मिल रही मूलभूत सुविधाएं </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीए की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि 90 फीसदी कर्मचारी ठेके और प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। अदालत ने अतिक्रमण और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई तथा जेडीसी को 5 फरवरी को पेश होने के आदेश दिए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-courts-comment-on-the-working-system-of-jda-jda/article-140184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/court-hammer041.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीसी की मौजूदगी में जेडीए की कार्य प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जेडीए में 90 फीसदी लोग ठेके और प्रतिनियुक्ति पर लगे हुए हैं। अधिकारी आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन जेडीए में कोई प्रभावी काम नहीं हो रहा है। कई कर्मचारियों पर कार्रवाई के मामले चल रहे हैं, लेकिन उनमें भी कुछ नहीं हो रहा। जेडीए में कई रिटायर कर्मचारी भी काम कर रहे हैं।</p>
<p>अदालत ने कहा कि शहर में अतिक्रमण हो रहे हैं और लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही है। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड रहा है। इसके साथ ही अदालत ने जेडीसी को पांच फरवरी को पेश होने के आदेश दिए हैं। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश द्रव्यवती नदी के विकास सहित अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 12:01:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुठ्ठी भर उम्मीदवारों के लिए 22 लाख के हितों की नहीं दी जा सकती बलि : हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने नीट यूजी-2025 परीक्षा को पुन: आयोजित कराने के संबंध में दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-interests-of-22-lakhs-cannot-be-sacrificed-for-a/article-119882"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नीट यूजी-2025 परीक्षा को पुन: आयोजित कराने के संबंध में दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि मुठ्ठी भर उम्मीदवारों के शिकायत के निवारण के लिए देशभर में आयोजित की गई परीक्षा में शामिल 22 लाख अभ्यर्थियों के हितों की बलि नहीं ली जा सकती। साथ ही अदालत ने परीक्षा को पुन: आयोजित कराने और बोनस अंक देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश रोशन यादव व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाओं में कहा गया कि देशभर के 552 शहरों और 14 इंटरनेशनल केन्द्रों में नीट यूजी-2025 परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें सीकर जिले में 98 परीक्षा केन्द्र बनाए गए और 31,787 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। इस दौरान बिजली गुल होने सहित अन्य समस्याओं को लेकर 15 केन्द्रों की परीक्षा प्रभावित हुई और इसमें शामिल 5,390 अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान प्रतिकूल प्रभावित हुए।</p>
<p>याचिका में कहा गया कि जिले के कई परीक्षा केंद्रों में पांच मिनट से लेकर 28 मिनट तक बिजली गुल रही। जिससे अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र हल करने में परेशानी हुई। याचिका में कहा गया कि स्थानीय जिला कलक्टर की जिम्मेदारी थी कि वे बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते, ताकि याचिकाकर्ताओं को अनुकूल वातावरण में परीक्षा देने में सुविधा होती। इस विफलता के कारण याचिकाकर्ताओं का प्रदर्शन प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुआ और उन्हें अनावश्यक तनाव झेलना पड़ा। याचिका में यह भी कहा गया कि अंतिम उत्तर कुंजी के अनुसार याचिकाकर्ताओं के अंक 400 से 600 के बीच आए हैं और अधिकांश याचिकाकर्ता कट ऑफ के करीब थे। यदि परीक्षा में व्यवधान नहीं होता तो वे उच्च अंक प्राप्त कर चयनित होते। इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता एमएस राघव ने बताया कि कुल अभ्यर्थियों में से सिर्फ आधा फीसदी अभ्यर्थियों ने ही शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा केवल मुठ्ठी भर उम्मीदवार हाईकोर्ट पहुंचे हैं और 99.5 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा संचालन से संतुष्ठ नजर आए हैं।</p>
<p>इसके अलावा तूफान और खराब मौसम के कारण बिजली गुल होना नियंत्रण से परे था। मामले में एक कमेटी भी गठित की गई थी। जिसने पाया कि प्रभावित परीक्षा केन्द्रों और सामान्य केंद्रों में परीक्षा के लिए आवंटित अवधि में कोई अंतर नहीं था और ना ही याचिकाकर्ताओं को कोई नुकसान हुआ। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jul 2025 11:10:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आवासन मंडल आयुक्त को मिली राहत, उपभोक्ता आयोग की कार्रवाई पर रोक, आयोग ने आयुक्त सहित अन्य अधिकारी को किया था तलब </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश की पालना नहीं करने से जुडे मामले में आवासन मंडल आयुक्त को राहत दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/housing-board-commissioner-received-relief-prohibition-on-the-action-of/article-118739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश की पालना नहीं करने से जुडे मामले में आवासन मंडल आयुक्त को राहत दी है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में जिला उपभोक्ता आयोग की ओर से की जा रही कार्रवाई पर रोक लगा दी है। जस्टिस सुदेश बंसल ने यह आदेश आवासन मंडल आयुक्त की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। जिला उपभोक्ता आयोग ने गत दिनों आवासन आयुक्त सहित अन्य के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे।</p>
<p>सुनवाई के दौरान आवासन आयुक्त अदालत में पेश हुई। उनकी ओर से प्रकरण को लेकर मंडल की ओर से की गई कार्रवाई की अदालत को जानकारी दी गई। इस पर अदालत ने जिला उपभोक्ता आयोग की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि रमेश चन्द्र गुप्ता ने जनवरी, 1980 में मानसरोवर योजना में मध्यम आय वर्ग के आवास के लिए आवेदन किया था। परिवादी ने पता बदलने पर नए पते की सूचना भी आवासन मंडल को दी थी, लेकिन मंडल ने मकान का आरक्षण पत्र पुराने पते पर ही भेजा। जिससे वह तय अवधि में राशि जमा नहीं करा सका। वहीं बाद में कई बार प्रार्थना करने पर भी उसे मकान का आवंटन नहीं किया।</p>
<p><strong>वर्ष 2013 में दर्ज कराया था परिवाद :</strong></p>
<p>परिवादी ने साल 2013 में जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया। जिस पर 3 मई, 2016 को फैसला देते हुए आयोग ने साल 2010 की दर से दो माह में आवास आवंटित करने को कहा और साथ ही आवासन मंडल पर 1.10 लाख रुपए का हर्जाना लगाया। इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय आयोग तक अपील की गई, लेकिन मंडल को राहत नहीं मिली। दूसरी ओर परिवादी ने जिला आयोग में प्रार्थना पत्र पेश कर दोषी अफसरों पर अवमानना की कार्रवाई करने की गुहार की। जिस पर सुनवाई करते हुए गत दिनों आयोग ने मंडल के आयुक्त सहित अन्य अधिकारी को जमानती वारंट से तलब किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jun 2025 12:10:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गलत जानकारी देने पर हाईकोर्ट ने पचास हजार रुपए के हर्जाने के साथ याचिका को किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में गलत तथ्य बताकर याचिका दायर करने को गंभीर माना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-giving-wrong-information-the-high-court-dismissed-the-petition/article-115060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 पेपर लीक मामले में गलत तथ्य बताकर याचिका दायर करने को गंभीर माना है। साथ ही अदालत ने आपराधिक याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर पचास हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश पुरुषोत्तम दाधीच की आपराधिक याचिका को खारिज करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि उस पर अपनी प्रेमिका के लिए पन्द्रह लाख रुपए में एसआई भर्ती का प्रश्न पत्र खरीदने का आरोप है। मामले में वह निचली अदालत में सरेंडर करने भी गया था, लेकिन अदालत ने उसे अपनी कस्टडी में नहीं लिया। मामले में दर्ज एफआईआर में भी उसका नाम नहीं है और ना ही मामले में उसकी सीधी भूमिका सामने आई है। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता पर अपनी महिला मित्र के लिए पेपर खरीद कर उपलब्ध कराने का आरोप प्रमाणित है। वह पुलिस गिरफ्त से दूर चल रहा है। </p>
<p>ऐसे में उस पर 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया है और अदालत ने उसके गिरफ्तारी के स्थाई वारंट जारी कर रखे हैं। इसके अलावा उसने सरकारी वकील या अदालत में अपने सरेंडर को लेकर कोई दस्तावेज पेश नहीं किए हैं, जिससे साबित है कि वह सरेंडर के लिए अदालत में गया ही नहीं। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिका खारिज कर उस पर पचास हजार रुपए का हर्जाना लगाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 May 2025 13:08:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कार्यकाल पूरा होने के बाद भी नगरपालिकाओं के चुनाव नहीं, हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग से किया जवाब-तलब </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश की नगरपालिकाओं का कार्यकाल 25 नवंबर, 2024 को पूरा हो चुका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/even-after-the-completion-of-the-tenure-the-municipal-elections/article-112439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/high-courat-3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की 55 नगरपालिकाओं का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उनके चुनाव नहीं कराने और प्रशासक नियुक्त करने पर राज्य के मुख्य सचिव, स्वायत्त शासन सचिव, निदेशक और राज्य निर्वाचन आयोग से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस आनंद शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p>याचिका में अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने अदालत को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 243 यू और नगरपालिका अधिनियम की धारा 7 और धारा 11 के तहत नगरपालिकाओं का कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व उनके चुनाव कराए जाने जरूरी है। नगरपालिका अधिनियम के तहत पिछले बोर्ड की पहली बैठक के 5 साल पूरे होने से पहले चुनाव होने चाहिए। प्रदेश की नगरपालिकाओं का कार्यकाल 25 नवंबर, 2024 को पूरा हो चुका है। राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग ने इन नगरपालिकाओं के चुनाव कराने के बजाए यहां प्रशासक लगा दिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 18:34:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुत्री को भरण पोषण वयस्क होने तक ही मिलेगा : हाईकोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने पुन: निरीक्षण याचिका को आंशिक रुप से स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट बालोतरा के आदेश को बदलते कहा, कि पुत्रियों को वयस्क होने तक ही भरण पोषण भत्ता पाने का हक है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/daughter-will-get-high-court-only-till-it-is-nurtured/article-109388"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/court-hammer05.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पुन: निरीक्षण याचिका को आंशिक रुप से स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट बालोतरा के आदेश को बदलते कहा, कि पुत्रियों को वयस्क होने तक ही भरण पोषण भत्ता पाने का हक है। हाईकोर्ट जस्टिस मनोज कुमार गर्ग ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बदल दिया जिसमे उन्होंने पुत्रियों को उनके विवाह होने तक भरण पोषण भत्ता प्राप्त करने का अधिकारी माना था। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट बालोतरा के आदेश को आंशिक रूप से बदलते हुए चारों पुत्रियों को उनके वयस्क होने तक ही का भरण पोषण भत्ता प्राप्त करने की अधिकारी माना। बाड़मेर निवासी याचिकाकर्ता जीवाराम की ओर से पुन: निरीक्षण याचिका पेश करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। मामले के अनुसार प्रार्थी की पत्नी ने अपने व अपनी चार पुत्रियों के लिये भरण पोषण भत्ता प्राप्त करने के लिये फैमिली कोर्ट बालोतरा में एक प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 125 सीआर.पी.सी. का प्रस्तुत किया था। जिसे स्वीकार करते अधीनस्थ न्यायालय ने पत्नी व प्रत्येक पुत्री के लिए चार हजार रुपए मासिक भरण पोषण भत्ता देने का आदेश पारित किया था। आदेश में फैमिली कोर्ट बालोतरा ने प्रार्थी की चारों पुत्रियों को विवाह होने तक उन्हें भरण पोषण भत्ता प्राप्त करने का अधिकारी माना था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हैदर आगा व सलमान आगा ने बताया, धारा 125 सीआरपीसी के तहत अवयस्क संतान की परिभाषा में पुत्र व पुत्री दोनों शामिल होते हैं। </p>
<p>इस कानून में पुत्री के लिए अलग से कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में जब पुत्र को वयस्क होने तक ही ये भरण पोषण भत्ता मिलता है तो यही नियम पुत्री पर भी लागू होगा। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पेश पुन: निरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पुत्रियों के विवाह होने की बजाय वयस्क होने तक ही भरण पोषण भत्ता पाने का हकदार माना है। हाईकोर्ट ने भरण पोषण भत्ते को चार हजार रुपए मासिक से कम करने की प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Apr 2025 14:04:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अपरिपक्व एकल बुजुर्ग महिलाओं के कल्याण के लिए क्या है योजना : हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है कि मानसिक रूप से अपरिपक्व बुजुर्ग एकल महिलाओं के कल्याण के लिए उनके पास क्या योजना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/what-is-the-scheme-for-the-welfare-of-immature-single/article-109378"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है कि मानसिक रूप से अपरिपक्व बुजुर्ग एकल महिलाओं के कल्याण के लिए उनके पास क्या योजना है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में राज्य सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। वहीं अदालत ने मामले में अधिवक्ता पूर्वी माथुर को न्याय मित्र बनाते हुए उनसे भी इस संबंध में सुझाव देने को कहा है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश सीमा की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p>याचिका में अधिवक्ता ब्रजेश कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता 63 साल की एकल बुजुर्ग महिला है और मानसिक रूप से अपरिपक्व है। उसके पिता सचिवालय और मां चिकित्सा विभाग में कार्यरत थी। दोनों का पूर्व में निधन होने पर वह अपने भाई-भाभी के पास रहने लगी। वहीं कुछ सालों पहले उसकी भाभी का भी निधन हो गया।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने आश्रित फैमिली पेंशन के लिए पिता के विभाग में आवेदन किया, लेकिन विभाग ने उसका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसके पिता ने सरकारी सेवा में रहते हुए कभी भी याचिकाकर्ता की मानसिक दिव्यांगता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और ना ही कोई दस्तावेज पेश किए। ऐसे में उसे आश्रित फैमिली पेंशन दिलाई जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Apr 2025 11:24:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किशोर को अतीत के बोझ से मुक्त कर नई शुरुआत का अवसर देना उचित, 16 साल पुराना बर्खास्तगी आदेश निरस्त</title>
                                    <description><![CDATA[याचिका में अधिवक्ता सार्थक रस्तोगी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का साल 2008 में कांस्टेबल पद पर चयन हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/giving-a-teenager-free-from-the-burden-of-the-past/article-104764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/hogh-cort-chandigarh-court-hammer1457186614-821.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने किशोरावस्था में किए अपराध की जानकारी नहीं देने पर कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त करने के आदेश को गलत माना है। साथ ही अदालत ने 6 मई, 2008 को जारी बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को समस्त परिलाभों के साथ पुन: सेवा में लेने के आदेश दिए हैं। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेश कुमार की ओर से 16 साल पहले दायर याचिका का निस्तारण करते हुए दिए। अदालत ने राज्य सरकार को कहा कि अदालती आदेश की पालना में समस्त कार्रवाई तीन माह में पूरी की जाए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किशोर न्याय अधिकरण के तहत किशोर को किसी मामले में दोषी ठहराया जाता है तो अपील का समय समाप्त होने के बाद उसका समस्त रिकॉर्ड हटा दिया जाता है। ऐसे में किसी किशोर को उसके अतीत में किए अपराध के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि अतीत के अपराध के कारण उसके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता और उसे एक नई शुरुआत का अवसर दिया जाना चाहिए। याचिका में अधिवक्ता सार्थक रस्तोगी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का साल 2008 में कांस्टेबल पद पर चयन हुआ था।</p>
<p>विभाग ने 6 मई, 2008 को उसे यह कहते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया कि उसने नियुक्ति के समय किशोरावस्था में किए अपराध और मामले में किशोर बोर्ड की ओर से उसे दी गई सजा को छिपाया था। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को 16 नवंबर, 2004 को किशोर बोर्ड ने दोषी ठहराया था और चेतावनी देकर छोड़ दिया था। चार साल बाद उसका कांस्टेबल पद पर चयन हो गया। याचिका में बताया गया कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 19 के तहत किशोर अवस्था में किया गया अपराध किसी निर्योग्यता का कारण नहीं हो सकता। यदि उसे सजा मिलती है तो अपील का समय बीतने के बाद उस प्रकरण के पूरी रिकॉर्ड को हटा दिया जाता है। याचिकाकर्ता से जुडे मामले का रिकॉर्ड भी हटने के कारण उसे नियुक्ति के समय इसकी जानकारी नहीं दी थी। ऐसे में उसे सेवा में बहाल किया जाए। जिसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता को आईपीसी की धारा 436, 457 और धारा 380 के तहत दोषी माना गया था। याचिकाकर्ता ने इस तथ्य को छिपाया जो उसके चरित्र को दर्शाता है। ऐसे में कदाचार के कारण याचिकाकर्ता को सेवा से हटाया गया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत याचिकाकर्ता को समस्त परिलाभ सहित सेवा में पुन: बहाल करने के आदेश दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Feb 2025 12:01:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान हाईकोर्ट को मिलने वाले हैं 3 न्यायाधीश </title>
                                    <description><![CDATA[जल्द ही केन्द्र सरकार की ओर से मंजूरी के बाद राष्ट्रपति भवन में इन न्यायिक अधिकारियों के नियुक्ति वारंट जारी किए जाएगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-high-court-is-going-to-get-3-judges/article-98779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/555449.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। न्यायाधीशों की कमी झेल रहे राजस्थान हाईकोर्ट को 3 न्यायाधीश मिलने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने हाल ही में न्यायिक अधिकारी कोटे से 3 न्यायिक अधिकारियों प्रमिल कुमार माथुर, चंद्र प्रकाश श्रीमाली और चन्द्रशेखर शर्मा को हाईकोर्ट न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए केन्द्र सरकार को अपनी सिफारिश भेजी है। अब जल्द ही केन्द्र सरकार की ओर से मंजूरी के बाद राष्ट्रपति भवन में इन न्यायिक अधिकारियों के नियुक्ति वारंट जारी किए जाएगे। प्रमिल कुमार माथुर वर्तमान में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल हैं। वहीं चंद्र प्रकाश श्रीमाली जयपुर महानगर द्वितीय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं, जबकि चन्द्रशेखर शर्मा जोधपुर में डीजे पद पर कार्यरत हैं। </p>
<p>तीन न्यायिक अधिकारियों के हाईकोर्ट जज बनने के बाद यहां न्यायाधीशों की संख्या 35 हो जाएगी। अभी यहां 32 हाईकोर्ट जज कार्यरत है, जबकि हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 50 पद स्वीकृत हैं। हाईकोर्ट में अब तक कभी भी पूरे 50 पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। हाईकोर्ट की कॉलेजियम ने अधिवक्ता कोटे से कई नाम हाईकोर्ट जज की नियुक्ति के लिए भेजे थे, जिन पर स्वीकृति बाकी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Dec 2024 17:58:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान हाईकोर्ट ने बाल विवाह रोकने के लिए पंच-सरपंचों को जागरूक करने के दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में बाल विवाह रोकने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि इसके लिए गांव के सरपंचों और वार्ड पंचों को जागरूक करने की जरूरत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। राजस्थान में बाल विवाह रोकने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि इसके लिए गांव के सरपंचों और वार्ड पंचों को जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए हाईकोर्ट ने भजनलाल सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे पंच और सरपंचों को जागरूक करे। </p>
<p>इसके बाद भी कहीं बाल विवाह का मामला सामने आता हैं तो उसके लिए फिर पंच और सरपंच ही जिम्मेदार होंगे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 May 2024 12:24:58 +0530</pubDate>
                
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