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                <title>lunar - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>2025 में 4 सूर्य और चंद्र ग्रहण : सूर्य के केवल एक हिस्से को ही ढकेगा चंद्रमा, भारत में नहीं दिखेगा</title>
                                    <description><![CDATA[चंद्र ग्रहण को अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका और उत्तरी तथा दक्षिणी अटलांटिक महासागर के ऊपर के क्षेत्रों में देखा जा सकेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/in-2025-4-sun-and-lunar-eclipse-will-cover-only/article-103884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer37.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। इस साल यानी 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को होगा। ये सूर्य ग्रहण आंशिक होगा यानी चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से को ही ढकेगा। मार्च के महीने में ही चंद्र ग्रहण भी होने जा रहा है। पहले चंद्र ग्रहण और सूरज ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। इस साल चार बड़ी खगोलीय घटनाएं होंगी। इसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण है। हालांकि भारत में इनमें से सिर्फ एक ही दिखाई देगा। इस साल की पहली बड़ी खगोलीय घटना 14 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण के साथ होगी। 14 मार्च को जब चंद्र ग्रहण होगा तो भारत में दिन का समय होगा। ऐसे में इसे यहां नहीं देखा जा सकेगा। चंद्र ग्रहण को अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका और उत्तरी तथा दक्षिणी अटलांटिक महासागर के ऊपर के क्षेत्रों में देखा जा सकेगा।</p>
<p><strong>क्यों होता है सूरज और चंद्र ग्रहण</strong><br />चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। वहीं सूर्य ग्रहण की बात की जाए तो सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है। भारत में इस साल उल्कापिंड वर्षा भी देखने को मिल सकती है। ये तब होता है, जब पृथ्वी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह द्वारा छोड़े गए मलबे के बादल से गुजरती है।</p>
<p><strong>मार्च के आखिर में सूर्य ग्रहण</strong><br />मार्च की 29 तारीख को आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। हालांकि भारतीय इसे भी नहीं देख पाएंगे। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी अटलांटिक महासागर, यूरोप और उत्तर-पश्चिमी रूस में दिखाई देगा। इसके बाद 7-8 सितंबर को चंद्र ग्रहण होगा। ये पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और भारत में दिखाई देगा। यह ग्रहण रात 8:58 बजे शुरू होकर 2:25 बजे तक चलेगी। इस दौरान चांद गहरे लाल रंग का दिखाई देगा। ये चंद्र ग्रहण भारत के पड़ोसी देशों, यूरोप, अंटार्कटिका, पश्चिमी प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया और हिंद महासागर क्षेत्र में भी दिखाई देगा। इस साल की आखिरी खगोलीय घटना 21-22 सितंबर को आंशिक सूर्य ग्रहण के साथ होगी। हालांकि यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा। यह आंशिक सूर्य ग्रहण न्यूजीलैंड, पूर्वी मेलानेशिया, दक्षिणी पोलिनेशिया और पश्चिम अंटार्कटिका में देखा जा सकता है। ऐसे में इस साल होने वाले चार सूर्य और चंद्र ग्रहण में से भारत में सिर्फ एक दिखाई देगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Feb 2025 12:47:47 +0530</pubDate>
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                <title>चांग ई-6 चंद्र अन्वेषण यान का प्रक्षेपण करेगा चीन, होगी सॉफ्ट लैंडिंग</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस, इटली और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के वैज्ञानिक उपकरण चांग'ई-6 लैंडर पर हैं, जबकि पाकिस्तान का एक छोटा उपग्रह ऑर्बिटर पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-will-launch-change-6-lunar-exploration--soft-landing-will/article-76649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>वेनचांग। चीन चांग ई-6 चंद्र अन्वेषण यान प्रक्षेपित करेगा। चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) ने कहा कि स्थानीय समयानुसार शाम 5 बजे से 6 बजे के बीच यान का प्रक्षेपण शाम 17:27 बजे लक्षित है। चांग'ई-6 मिशन को चंद्रमा के रहस्यमय सुदूर हिस्से से नमूने एकत्र करने और फिर पृथ्वी पर वापस लाने का काम सौंपा गया है। मानव चंद्र अन्वेषण के इतिहास में अपनी तरह का यह पहला प्रयास है। सीएनएसए ने कहा कि लॉन्ग मार्च-5 वाई8 रॉकेट, चांग'ई-6 को ले जाएगा। चांग'ई-6 अंतरिक्ष यान में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर, एक आरोही और एक रिटर्नर शामिल है। यान अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विकसित चार पेलोड ले जाएगा। फ्रांस, इटली और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के वैज्ञानिक उपकरण चांग'ई-6 लैंडर पर हैं, जबकि पाकिस्तान का एक छोटा उपग्रह ऑर्बिटर पर है।</p>
<p>सीएनएसए द्वारा 12 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लगभग 50 मेहमानों को चांग ई-6 द्वारा ले जाए गए अंतरराष्ट्रीय पेलोड पर केंद्रित एक कार्यशाला में भाग लेने और हैनान में लॉन्च का गवाह बनने के लिए आमंत्रित किया गया है। अपोलो बेसिन के रूप में जाना जाने वाला एक प्रभाव क्रेटर, जो चंद्रमा के दूर की ओर दक्षिणी ध्रुव-एटकेन बेसिन के भीतर स्थित है, को चांग'ई-6 मिशन के लिए प्राथमिक लक्ष्य लैंडिंग और नमूना स्थल के रूप में चुना गया है। अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर पहुंचने के बाद सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। लैंडिंग के 48 घंटों के भीतर, चंद्रमा की सतह से चट्टानों को निकालने के लिए एक रोबोटिक हाथ बढ़ाया जाएगा, जबकि जमीन में छेद करने के लिए एक ड्रिल का उपयोग किया जाएगा। वैज्ञानिक तरीके से पता लगाने का काम साथ-साथ किया जाएगा। नमूनों को एक कंटेनर में सील करने के बाद, आरोही चंद्रमा से उड़ान भरेगा और चंद्र कक्षा में ऑर्बिटर के साथ डॉक करेगा। सीएनएसए ने कहा कि पूरा मिशन लगभग 53 दिनों तक चलने की उम्मीद है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 May 2024 14:13:42 +0530</pubDate>
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