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                <title>Crude oil production - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Crude oil production RSS Feed</description>
                
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                <title>होर्मुज बंद... तेल की नो टेंशन! ऑयल इंडिया लिमिटेड ने उत्पादन में दर्ज की रिकॉर्ड बढ़ोतरी, ऊर्जा सुरक्षा को मिला बल</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान के थार रेगिस्तान में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने रिकॉर्ड 1,202 बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का उत्पादन कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। CSS और फिशबोन ड्रिलिंग जैसी उन्नत तकनीकों से उत्पादन में 70% की वृद्धि हुई है। जैसलमेर के बाघेवाला फील्ड की यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में मील का पत्थर है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/no-tension-of-oil-off-hormuz-oil-india-limited-recorded/article-149198"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच देश के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान के थार रेगिस्तान में कच्चे तेल के उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। कंपनी ने जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से प्रतिदिन 1,202 बैरल उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 70 प्रतिशत अधिक है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जैसलमेर स्थित बाघेवाला फील्ड से निकला कच्चा तेल टैंकरों के जरिए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन की मेहसाणा इकाई तक पहुंचाया जाता है, जहां से पाइपलाइन के माध्यम से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की कोयली रिफाइनरी भेजा जाता है।</p>
<p>वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्थान फील्ड से कुल 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल के 32,787 मीट्रिक टन से काफी ज्यादा है। इस बढ़ोतरी के पीछे उन्नत तकनीकों और बेहतर संचालन की अहम भूमिका रही है। विशेष रूप से साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) तकनीक ने भारी और गाढ़े तेल को निकालने में सफलता दिलाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि थार क्षेत्र की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यह उपलब्धि हासिल करना बड़ी बात है। बाघेवाला फील्ड, जो बीकानेर-नागौर बेसिन का हिस्सा है, देश के प्रमुख ऑनशोर भारी तेल क्षेत्रों में शामिल है। यहां नई ड्रिलिंग तकनीकों जैसे फिशबोन ड्रिलिंग और बेयरफुट कम्प्लीशन का भी सफल प्रयोग किया गया है। कंपनी का मानना है कि यह सफलता भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगी और लंबे समय में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती देगी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 17:46:05 +0530</pubDate>
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                <title>अब बाड़मेर में धंसी जमीन</title>
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                        <![CDATA[ग्रामीणों ने कहा: तेल कुएं की वजह से धंसी। बाड़मेर जिले के क्रूड ऑयल प्रोडेक्शन क्षेत्र के एमपीटी के वेलपेड नंबर 3 से 7 के बीच सोमवार को करीब दो किलोमीटर इलाके की जमीन धंस गई और दरारें आ गई, इसके बाद से गांव के लोगों में दहशत है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/barmer/now-sunken-land-in-barmer/article-77035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(4)10.png" alt=""></a><br /><p>बाड़मेर। बाड़मेर जिले के क्रूड ऑयल प्रोडेक्शन क्षेत्र के एमपीटी के वेलपेड नंबर 3 से 7 के बीच सोमवार को करीब दो किलोमीटर इलाके की जमीन धंस गई और दरारें आ गई, इसके बाद से गांव के लोगों में दहशत है।  दरअसल, बाड़मेर नागाणा इलाके में क्रूड ऑयल का प्रोडेक्शन का काम बीते 15 सालों से चल रहा है। कंपनी के अलग-अलग वेलपेड बने हुए हैं। सोमवार को ग्रामीण वेलपेड नंबर 3 के नजदीक से निकल रहे थे कि इस दौरान उसके पास से जमीन धंसने और दरारें दिखने पर प्रशासन को सूचना दी गई।</p>
<p>सूचना पर तहसीलदार, विकास अधिकारी सहित रेवून्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। वहीं प्रशासन ने भू गर्भ वैज्ञानिकों को भी बुलाया है। वहीं कंपनी के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे है। प्रशासन ने लोगों को आगाह किया कि जमीन धंसने व दरारें वाली जगहों से दूर रहें। एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत का कहना है कि  यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दरारें पड़ने के पीछे क्या कारण है। कंपनी के भू-वैज्ञानिक और हमारे विभाग के वैज्ञानिक से पता करवा रहे हैं कि क्या दरारें आने के पीछे क्या कारण रहे हैं, जांच-पड़ताल चल रही है। डेढ़-दो किलोमीटर एरिया में दरारें आई हैं। कहीं ज्यादा हैं तो कहीं कम है। इसका पता करके पूरी रिपोर्ट लेने के बाद ही आगे कुछ बता पाऊंगा। क्रूड ऑयल प्रोडेक्शन इलाके के पास जमीन धंसने और दरारें आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि वेलपेड 3 से लेकर 7 के बीच में करीब 2 किलोमीटर एरिया में दरारें आई हैं। कलक्टर निशांत जैन ने बताया कि जांच करने के लिए टीमें भेजी हैं, आखिर ऐसे होने की वजह क्या रही है। </p>
<p><strong>जहां जमीन धंसी, उसके निकट तेल के कुएं</strong><br />नागाणा में धंसी जमीन-बाड़मेर जिला मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर एमपीटी नागाणा के पास अचानकजमीन के ऊपर तेड़े आने से जमीन धंस गई। करीब 3 किलोमीटर लंबी लकीरें आ गई जहां जमीन धंसी है उसके आस-पास तेल के कुएं हैं, ये 3 नम्बर गेट के पास हुआ है। ग्रामीणों की मानें तो यह तेल के कुएं की वजह से ऐसा हुआ है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 07 May 2024 11:16:53 +0530</pubDate>
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