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                <title>international nurses day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>international nurses day RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस आज :डॉक्टर्स और मरीज के बीच की अहम कड़ी हैं नर्सेज</title>
                                    <description><![CDATA[नर्सेज की कमी पूरी कर वर्तमान नर्सेज पर दबाव कम किया जाए और समय पर नर्सेज को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-nurses-day-today-is-important-link-between-doctors-and/article-113812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/ind.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक मरीज जब बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है और उसका इलाज सबसे पहले नर्सेज के माध्यम से ही शुरू होता है। मरीज का इलाज शुरू होने से उसके ठीक होकर घर जाने तक डॉक्टर्स और मरीज के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में नर्सिंगकर्मी अपनी भूमिका निभाता है। डॉक्टर्स मरीज का इलाज करते हैं, उनका ऑपरेशन करते हैं, लेकिन इस बीच मरीज की केयर एक नर्सिंगकर्मी ही करता है। मरीज और नर्सिंगकर्मी के बीच एक भावनात्मक रिश्ता इस दौरान बन जाता है। नर्सिंगकर्मी की इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद अस्पतालों में नर्सेज की कमी चिंता का विषय है। राजस्थान प्रदेश के लगभग हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके अस्पतालों में आज भी मैन पावर की बहुत कमी है। इनमें सबसे ज्यादा जरूरत अगर किसी संवर्ग की है तो वो नर्सिंग संवर्ग है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी  सवाई मानसिंह अस्पताल सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में नर्सेज जरूरत के अनुपात में काफी कम है। ऐसे में ऑपरेशन या इलाज के बाद जो नर्सिंग केयर मरीजों को मिलनी चाहिए, वो नहीं मिल पा रही है। वर्तमान में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में करीब 70 हजार नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंगकर्मी हैं, लेकिन जरूरत इससे कहीं ज्यादा है। </p>
<p><strong>एक नर्सिंगकर्मी के जिम्मे पूरा वार्ड</strong><br />प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल सहित अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में एक वार्ड में 50-50 मरीज सिर्फ  एक या दो नर्सिंगकर्मियों के भरोसे हैं। आईसीयू और क्रिटिकल केयर इकाइयों में भी मरीजों के अनुपात में नर्सेज नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं आईएनसी के नियम</strong><br />इंडियन नर्सिंग काउंसिल के तय मापदंडों के अनुसार आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों पर एक नर्स का होना जरूरी है। अगर मरीज ज्यादा गंभीर है तो एक बैड पर एक नर्स होना चाहिए। जनरल वार्ड में छह मरीजों पर एक नर्स होनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में वर्तमान स्थिति में ये मापदंड सिर्फ  कागजों में ही हैं। नर्सिंग स्टॉफ के अवकाश लेने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नियमों के अनुसार 30 प्रतिशत लीव रिजर्व नर्सेज स्टॉफ  भी होना चाहिए। ऐसे में वर्तमान संख्या के साथ ही करीब 40 हजार नर्सेज की प्रदेश में और जरूरत है।</p>
<p>सरकारी अस्पतालों में नर्सेज की कमी के कारण नर्सिंग काउंसिल के मापदंड पूरे नहीं हो रहे हैं। इससे मरीजों को बेहतर नर्सिंग केयर नहीं मिल पा रही है। नर्सिंग स्टॉफ  पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में अलग से नर्सिंग निदेशालय स्थापित किए जाने की भी जरूरत है। <br />-खुशीराम मीणा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, <br />ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन।</p>
<p>अस्पतालों में नर्सेज की भारी कमी है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण नर्सेज का कार्यभार काफी बढ़ गया है। ऐसे में करीब 20 हजार नर्सेज और लीव रिजर्व नर्सेज सहित करीब 40 हजार नर्सेज की भर्ती और होनी जरूरी है। <br />-नरेंद्र सिंह शेखावत, कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष, <br />राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन।</p>
<p>नर्सिंगकर्मी मरीजों और डॉक्टर्स के बीच की अहम कड़ी है। इसलिए उनकी मांगों पर भी विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। नर्सेज की कमी पूरी कर वर्तमान नर्सेज पर दबाव कम किया जाए और समय पर नर्सेज को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाए। <br />-प्यारेलाल चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष, <br />राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 May 2025 09:42:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>International Nurses Day : इंसानी सेवा की अथक मिसाल हैं नर्सें</title>
                                    <description><![CDATA[ नर्सों के समर्पण भाव, उनकी अथक मेहनत और मरीजों की गुणवत्तापूर्ण देखभाल की बदौलत ही समूची स्वास्थ्य प्रणाली टिकी हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/international-nurses-day-nurses-are-a-tireless-example-of-human/article-77702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/florence.jpg" alt=""></a><br /><p>आधुनिक नर्सिंग आंदोलन की जन्मदाता फ्लोरेंस नाइटेंगल, जिन्हें विद द लैंप भी कहा जाता है,उनका जन्म 12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस में हुआ था। फ्लोरेंस नाइटेंगल ने  युद्ध में घायल सिपाहियों की देखरेख का एक ऐसा उच्चस्तरीय मानदंड स्थापित किया था कि उनके जन्मदिन को दुनिया के 130 से भी ज्यादा देशों में अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है।  इस समय दुनिया में 3 करोड़ के आसपास नर्स हैं और अगर कहा जाए कि दुनिया के स्वास्थ्य का सारा दारोमदार उनकी ही अथक मेहनत और इंसानी सेवा के लिए दिखाए जाने वाले उनके समर्पण भाव पर टिका है, तो अतिश्योक्ति न होगी। ये नर्स ही होती हैं, जो किसी बीमार व्यक्ति का सबसे ज्यादा ख्याल रखती है। <br />नर्सों के समर्पण भाव, उनकी अथक मेहनत और मरीजों की गुणवत्तापूर्ण देखभाल की बदौलत ही समूची स्वास्थ्य प्रणाली टिकी हुई है। इसलिए जरूरी है कि नर्सिंग पेशे के लिए महत्वपूर्ण संसाधन उपलब्ध हों, उन्हें वित्तीय संकट से न गुजरना पड़े वरना दुनियाभर का स्वास्थ्य ढांचा चरमरा जाता है। साल 2024 के लिए इंटरनेशनल नर्स डे की थीम है- नर्सों को सशक्त बनाना, स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को मजबूत करना है। इस थीम से पता चलता है कि आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में नर्सों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। <br />दो साल पहले दुनिया को अपनी हाहाकारी गिरफ्त में लेने वाली कोरोना महामारी के समय नर्सों की महत्ता पूरी दुनिया ने न सिर्फ  महसूसा था बल्कि उन्हीं के हाथों में इंसान की जिंदगी आकर टिक गई थी और यह कोई पहली बार नहीं हुआ, हमेशा से स्वास्थ्य देखभाल की दुनिया नर्सों पर ही टिकी रही है। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि अगर दुनिया के स्वास्थ्य को सुरक्षित और मजबूत बनाना है तो जरूरी है कि हम नर्सिंग जैसी संस्था को मजबूत बनाया जाए।</p>
<p>फ्लोरेंस नाइटेंगल जिनके नाम पर आज पूरी दुनिया में नर्स डे मनाया जाता है और जो आधुनिक नर्स पेशे की आधार हैंए उनकी अथक मेहनत और इंसान के प्रति समर्पण भाव ही दरअसल नर्सिंग पेशे की आत्मा है। फ्लोरेंस नाइटेंगल सिर्फ नर्स ही नहीं थीं, वह अपने जमाने की नर्सए समाज सुधारक और आधुनिक नर्सिंग पेशे की संस्थापक और दार्शनिक थीं।<br />क्रीमिया युद्ध के दौरान 1858 में नाइटेंगल को ब्रिटेन और सहयोगी देशों के सैनिकों की देखभाल के लिए तुर्की में तैनात किया गया था। वह घायल सैनिकों की दिनरात सेवा में लगी रहती थीं और देर रात, लालटेन लिए अस्पतालों का चक्कर लगाती रहती थीं, इसलिए उनका नाम लेडी विद द लैंप पड़ गया। उस साल यानी 1887 में उनकी सैनिकों के लिए की गई इस महान सेवा की सराहना ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया और राजकुमार अलबर्ट ने भी किया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 May 2024 15:52:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>International Nurses Day : अस्पतालों में मरीजों का बढ़ता भार, नर्सेज की भारी कमी नतीजा: मरीजों को नहीं मिल पा रही क्वालिटी नर्सिंग केयर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाईमानसिंह सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में नर्सेज जरूरत के अनुपात में काफी कम है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-nurses-day-increasing-load-of-patients-in-hospitals-severe/article-77693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/nurse.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में चिकित्सा के क्षेत्र में अब काफी विस्तार हो चुका है। जयपुर तो मेडिकल हब बन चुका है। वहीं प्रदेश के लगभग हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं लेकिन बावजूद इसके अस्पतालों में आज भी मैन पावर की बहुत कमी है। इनमें सबसे ज्यादा जरूरत अगर किसी संवर्ग की है तो वो है नर्सिंग संवर्ग। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाईमानसिंह सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में नर्सेज जरूरत के अनुपात में काफी कम है। <br />ऐसे में ऑपरेशन या इलाज के बाद जो नर्सिंग केयर मरीजों को मिलनी चाहिए वो नहीं मिल पा रही है। वर्तमान में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में करीब 70 हजार नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंगकर्मी हैं। जबकि करीब 18 हजार संविदा नर्सेज अस्पतालों में काम कर रहे हैं। 20 हजार से ज्यादा नर्सिंगकर्मियों की इन अस्पतालों में अब भी जरूरत है। वहीं नर्सिंग स्टाफ के अवकाश लेने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नियमों के अनुसार 30 प्रतिशत लीव रिजर्व नर्सेज स्टाफ भी होना चाहिए। ऐसे में वर्तमान संख्या के साथ ही करीब 40 हजार नर्सेज की प्रदेश में और जरूरत है। </p>
<p><strong>पूरा वार्ड एक या दो नर्सिंगकर्मियों के भरोसे</strong><br />इंडियन मेडिकल काउंसिल के नॉर्म्स के अनुसार अस्पतालों में मरीजों के अनुपात में नर्सेज की भारी कमी है। प्रदेश के सबसे बड़े सवाईमानसिंह अस्पताल सहित अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में एक वार्ड में 50-50 मरीज सिर्फ एक या दो नर्सिंगकर्मियों के भरोसे हैं। डॉक्टर और मरीज के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी नर्सिंग स्टाफ  है। इसके बावजूद सरकार अस्पतालों में इनकी कमी को नजरअंदाज किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं आईएनसी के नियम</strong><br />इंडियन नर्सिंग काउंसिल के तय मापदंडों के अनुसार आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों पर एक नर्स का होना जरूरी है। अगर मरीज ज्यादा गंभीर है तो एक बैड पर एक नर्स होना चाहिए। जनरल वार्ड में छह मरीजों पर एक नर्स होनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में वर्तमान स्थिति में ये मापदंड सिर्फ  कागजों में ही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 May 2024 12:35:06 +0530</pubDate>
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                <title>नर्सिंगकर्मियों के लिए एक दिन का विशेष आकस्मिक अवकाश घोषित</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान सरकार ने अंतराष्ट्रीय नर्सेज दिवस 12 मई के उपलक्ष में राज्य भर में आयोजित कार्यक्रमों समारोह में भाग लेने वाले नर्सिंग अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिन का विशेष आकस्मिक अवकाश घोषित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/one-day-special-casual-holiday-declared-for-nursing-workers/article-77127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/nursing-staff.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर । राजस्थान सरकार ने अंतराष्ट्रीय नर्सेज दिवस 12 मई के उपलक्ष में राज्य भर में आयोजित कार्यक्रमों समारोह में भाग लेने वाले नर्सिंग अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिन का विशेष आकस्मिक अवकाश घोषित किया है। राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष प्यारे लाल चौधरी एवं कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि एसोसिएशन की मांग पर राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए यह अवकाश घोषित किया है। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं (अराजपत्रित) राकेश शर्मा ने आज आदेश जारी किए। </p>
<p>उन्होंने बताया कि आचार संहिता के चलते अबकी बार राज्य भर में नर्सेज द्वारा जन सेवा के कार्य किए जायेंगे जयपुर में कैंसर रोगियों को फल वितरण सहित सेवा सप्ताह मना कर नर्सेज को रोगियों के प्रति अधिक विनम्रता एवं तत्परता से सेवा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 May 2024 16:29:14 +0530</pubDate>
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