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                <title>Rajnath Singh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Rajnath Singh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजनाथ सिंह ने जर्मनी को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सहयोग के विस्तार के लिए किया आमंत्रित : तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को बनाया जटिल, आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का कर रही सामना</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मनी के साथ रक्षा तकनीक के सह-निर्माण और नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने "आत्मनिर्भर भारत" को वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के रूप में पेश किया। पश्चिमी एशिया के तनाव और ऊर्जा सुरक्षा के बीच, दोनों देशों ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajnath-singh-invites-germany-to-expand-cooperation-in-defense-production/article-151268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी और साजो-सामान के संयुक्त विकास और निर्माण के महत्व पर बल दिया है। जर्मनी की तीन दिन की यात्रा पर गये राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी सरकार का “आत्मनिर्भर भारत" अभियान सह-निर्माण, सह-विकास और सह-नवाचार का निमंत्रण है। म्यूनिख होकर बर्लिन पहुंचे रक्षा मंत्री ने मंगलवार को जर्मनी के सांसदों को संबोधित करते हुए दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने की पुरजोर वकालत की। यात्रा के पहले दिन उन्होंने रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी जर्मनी की संसद की स्थायी समिति को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है और तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को अत्यधिक जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश के अनुकूल ढलने की तत्परता के साथ एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देख रहा है और जर्मन उद्योग के साथ साझेदारी बढ़ाने से दोनों देशों को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “हम जर्मनी के अग्रणी औद्योगिक उद्यमों की स्थापित क्षमताओं को पहचानते हैं। साथ ही उन्नत और उभरती प्रौद्योगिकियों में प्रसिद्ध जर्मन मिटेलस्टैंड (लघु एवं मध्यम आकार की कंपनियों) के जोश और गतिशीलता की सराहना करते हैं। भारत में भी हमारे स्टार्टअप और उद्यमशील निजी कंपनियां तेजी से हमारे बड़े और स्थापित रक्षा उद्यमों की क्षमताओं को बढ़ा रही हैं और उनका पूरक बन रही हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत और जर्मनी स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं और हमारी साझेदारी और भी गहरी हो सकती है।”</p>
<p>आधुनिक वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए राजना​थ सिंह ने समन्वित प्रतिक्रियाओं और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। यूरोपीय संघ के स्तर पर भी विचारों में स्पष्ट एकरूपता दिखाई देती है और यह भारत के साथ उसके बढ़ते जुड़ाव में परिलक्षित होती है, जिसमें भारत-यूरोपीय संघ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी भी शामिल है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने दोहराया कि भारत और जर्मनी न केवल रणनीतिक साझेदार हैं, बल्कि वर्तमान समय के वैश्विक विमर्श को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “हम स्थापित लोकतंत्र हैं जो साझा मूल्यों से बंधे हैं, और गतिशील अर्थव्यवस्थाएं हैं जो लचीलेपन, नवाचार और दृढ़ औद्योगिक भावना से संचालित हैं। सांसदों और समिति के सम्मानित सदस्यों के रूप में आपका मार्गदर्शन, राय और समर्थन हमारे रक्षा और रणनीतिक सहयोग के भविष्य को और मजबूत और समृद्ध बना सकता है।”</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता को अब क्षेत्रीय मामला नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम वैश्विक स्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय अशांति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए दूरगामी प्रभावों वाले गंभीर घटनाक्रम है। साथ ही इससे होने वाली मानवीय क्षति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए पश्चिम एशियाई क्षेत्र पर निर्भर है, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं है, बल्कि यह एक कड़वी सच्चाई है जिसका हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।”</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जर्मनी के सांसदों को बताया कि पश्चिम एशिया पर गठित मंत्रियों का समूह लगातार बदलती स्थिति का आकलन कर रहा है और इसके प्रभाव को कम करने के लिए समयोचित उपाय सुझा रहा है। उन्होंने कहा, “प्रमुख मंत्रालयों को एक साथ लाकर की गयी हमारी चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना, मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करना और नागरिकों के साथ-साथ उद्योगों को बाहरी व्यवधानों से बचाना है। यह वैश्विक संकटों का सामना शांति, दूरदर्शिता और प्रभावी संस्थागत समन्वय के साथ करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है।”</p>
<p>जर्मनी के सांसद और सांसदीय समिति के अध्यक्ष थॉमस रोवेकैंप ने बैठक में श्री सिंह का स्वागत किया। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने बर्लिन पहुंचने पर हम्बोल्ट विश्वविद्यालय परिसर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को पुष्पांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री के आगमन पर बर्लिन हवाई अड्डे पर उनका सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया। म्यूनिख से बर्लिन की उनकी यात्रा के दौरान लड़ाकू विमानों की सुरक्षा में उन्हें जर्मन वायु सेना के एक विशेष विमान में ले जाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:23:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ तारागिरी युद्धपोत : राजनाथ सिंह ने कहा-मजबूत और सक्षम नौसेना समय की आवश्यकता, ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को नौसेना को समर्पित किया। ब्रह्मोस मिसाइल और उन्नत रडार से लैस यह युद्धपोत 75% स्वदेशी सामग्री से बना है। राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताते हुए समुद्री मार्गों और डिजिटल केबलों की सुरक्षा के लिए नौसेना को अनिवार्य बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taragiri-warship-joins-naval-fleet-rajnath-singh-said-strong/article-149027"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnatha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मजबूत और सक्षम नौसेना को समय की जरूरत बताते हुए कहा है कि भारतीय नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, 'चोक पॉइंट्स' और राष्ट्रीय हितों से से जुड़े डिजिटल ढांचों की सुरक्षा कर रही है जिससे भारत जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में पहचान बना रहा है। प्रोजेक्ट 17 ए श्रेणी के चौथे अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में श्री सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। आधुनिक नौसैनिक जहाज निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण यह नवीनतम स्टील्थ फ्रिगेट, लगभग 6,670 टन के वजन के साथ, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सहयोग से बहु-भूमिका अभियानों के लिए निर्मित किया गया है। यह उन्नत स्टील्थ तकनीक का उपयोग करता है, जिससे इसकी रडार पहचान क्षमता काफी कम हो जाती है और इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घातक बढ़त मिलती है। पचहत्तर प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और कम समय में निर्मित आईएनएस तारागिरी भारत की जहाज निर्माण क्षमता और मजबूत सार्वजनिक-निजी सहयोग का उदाहरण है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आईएनएस तारागिरी को केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और सशक्त नौसैनिक शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, " यह जहाज उच्च गति से संचालित हो सकता है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इसमें ऐसे तंत्र लगे हैं जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत जवाब दे सकते हैं। इसमें आधुनिक रडार, सोनार और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल प्रणालियाँ तथा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं, जो इसकी क्षमता को और बढ़ाती हैं। उच्च तीव्रता वाले युद्ध से लेकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोधी अभियान, तटीय निगरानी और मानवीय मिशनों तक, यह हर भूमिका में पूरी तरह सक्षम है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक है और जो तीन ओर से समुद्र से घिरा है, वह अपने विकास को समुद्र से अलग नहीं देख सकता। उन्होंने कहा कि देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और ऊर्जा सुरक्षा भी समुद्र पर निर्भर है, इसलिए एक मजबूत और सक्षम नौसेना का निर्माण विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। समुद्री क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चौबीसों घंटे अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। उन्होंने कहा, " "समुद्र के विशाल क्षेत्र में कई संवेदनशील बिंदु हैं, जहाँ हमारी नौसेना वस्तुओं के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय रहती है। जब भी तनाव बढ़ता है, भारतीय नौसेना व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि दुनिया भर में अपने नागरिकों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। यही क्षमता भारत को एक जिम्मेदार और सशक्त समुद्री शक्ति बनाती है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में विश्व का अधिकांश डेटा समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों से गुजरता है और इनमें किसी भी प्रकार की क्षति वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य उन्मुख ढांचे में देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें केवल अपनी तटरेखा की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, संकरे मार्गों और डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए, जो हमारे राष्ट्रीय हितों से जुड़ी हैं। भारतीय नौसेना इन सभी प्रयासों में सक्रिय है। आईएनएस तारागिरी जैसे उन्नत जहाजों का निर्माण और तैनाती पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि की गारंटी है।"</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता, भारतीय नौसेना हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ी रहती है और "आईएनएस तारागिरी हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।" सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कि भारतीय नौसेना को दुनिया की सबसे मजबूत नौसेनाओं में शामिल किया जाएगा, रक्षा मंत्री ने कहा , "आज हम केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी जगह बना रहे हैं। डिजाइन से लेकर अंतिम तैनाती तक हर चरण में भारत की भागीदारी है। आईएनएस तारागिरी इसी दृष्टि का प्रतीक है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: बोले-देश की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर लड़ना होगा, आजकल के युद्ध सीमाओं से परे</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैनिक स्कूल, घोराखाल के हीरक जयंती समारोह में भविष्य के युद्धों के प्रति आगाह किया। उन्होंने सीमाओं से परे साइबर और आर्थिक युद्ध को बड़ी चुनौती बताया। राजनाथ सिंह ने एक सशक्त सेना के साथ-साथ सतर्क नागरिकों की आवश्यकता पर जोर दिया, जो डिजिटल और खाद्य सुरक्षा जैसे मोर्चों पर देश की रक्षा करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajnath-singhs-big-statement-said-that-to-protect-the-country/article-147393"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आजकल के युद्धों को सीमाओं से परे बताते हुए हर हाल में देश की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने में सक्षम नागरिकों द्वारा समर्थित एक सशक्त सेना की आवश्यकता पर जोर दिया है। सिंह ने उत्तराखंड के घोराखाल स्थित सैनिक विद्यालय के स्थापना दिवस और हीरक जयंती समारोह को शनिवार को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि संघर्षों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है, क्योंकि आज किसी भी राष्ट्र को आर्थिक, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध के माध्यम से कमजोर किया जा सकता है, जिसके लिए प्रत्येक नागरिक को हर समय सतर्क और तैयार रहना आवश्यक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में आर्थिक, डिजिटल, ऊर्जा और यहां तक कि खाद्य सुरक्षा भी शामिल है। उन्होंने किसी भी परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने में सक्षम नागरिकों द्वारा समर्थित एक सशक्त सेना की आवश्यकता पर जोर दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajnath-singhs-big-statement-said-that-to-protect-the-country/article-147393</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 09:44:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच राजनाथ ​सिंह का बड़ा बयान: बोले-ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता जरूरी, विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन' में भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता के लिए MSMEs और स्टार्टअप्स को AI व रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीक अपनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर 'अदिति' और 'iDEX' चुनौतियों के नए संस्करण भी लॉन्च किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-west-asia-crisis-rajnath-singhs-big-statement-said/article-147099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत को मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने के मिशन मोड में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक है। </p>
<p>राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा आयोजित दो दिन के राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में गुरुवार को 'उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियां' विषय पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, नव-उद्यमों, रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार विजेताओं, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, निजी रक्षा कंपनियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों को संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ड्रोन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान और इजराइल के बीच तनाव तक चल रहे संघर्ष इस बात के प्रमाण हैं कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और प्रतिरोधी ड्रोन प्रौद्योगिकियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता केवल उत्पाद स्तर पर ही नहीं बल्कि कलपुर्जे के स्तर पर भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, ड्रोन के ढांचों से लेकर उसके सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरियों तक, सब कुछ भारत में ही निर्मित होना चाहिए। यह कोई आसान कार्य नहीं है। अधिकांश देशों में जहां ड्रोन बनाए जाते हैं, वहां अनेक महत्वपूर्ण कलपुर्जे वर्तमान में चीन से आयात किए जाते हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी देश के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण बड़े उद्योगों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, नव-उद्यमों और नवोन्मेषकों के योगदान पर निर्भर करता है, साथ ही सरकार की स्पष्ट नीतिगत दिशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है, जो देश की विशिष्ट रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप हो। उन्होंने निजी क्षेत्र से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया और सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया ताकि भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने रक्षा भारत नव-उद्यम चुनौती के 14वें संस्करण और आईडेक्स ढांचे के अंतर्गत 'अदिति चुनौतियों' के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी से प्राप्त कुल 107 समस्या विवरण जारी किए गए, जिनमें 82 रक्षा भारत नव-उद्यम चुनौती के अंतर्गत और 25 अदिति चुनौतियों के अंतर्गत शामिल हैं, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से संबंधित 101 नवाचार चुनौतियों की एक नई पहल भी शुरू की गई, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नव-उद्यमों द्वारा डिजाइन-आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करना है। इन चुनौतियों को रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा और विजेता नव-उद्यमों को मार्गदर्शन, परीक्षण सुविधाएँ तथा उनकी आपूर्ति श्रृंखला में संभावित एकीकरण के अवसर प्रदान किए जाएँगे।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने आईडेक्स और अदिति को परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से नव-उद्यमों, नवोन्मेषकों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को रक्षा बलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन समाधान विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक लगभग 676 नव-उद्यम, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा व्यक्तिगत नवोन्मेषक रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ चुके हैं। अब तक 548 अनुबंध किए जा चुके हैं और 566 चुनौतियाँ शुरू की गई हैं। इनमें से 58 प्रतिरूपों को लगभग 3853 करोड़ रुपये के मूल्य पर खरीद के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त लगभग 2326 करोड़ रुपये के 45 खरीद अनुबंध पहले ही किए जा चुके हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि नवाचार धीरे-धीरे ठोस उत्पादों और प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित हो रहा है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, स्वचालन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जो एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन है। उन्होंने इन उद्यमों और नव-उद्यमों से इन प्रौद्योगिकियों को अपनाने और समेकित करने का आह्वान किया ताकि संसाधनों और क्षमताओं का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी और संयोगात्मक विनिर्माण जैसी प्रौद्योगिकियां वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र को नया रूप दे रही हैं, जबकि डिजिटल ट्विजन और उन्नत अनुकरण उपकरण नई संभावनाओं को खोल रहे हैं। डिजिटल ट्विजन का अर्थ वास्तविक प्रणाली का आभासी मॉडल तैयार करना है, जिससे जटिल प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है और अधिक सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सुदृढ़ करने के लिए कई पहलें की हैं। इस वर्ष के केंद्रीय बजट में इन्हें इक्विटी, तरलता और व्यावसायिक समर्थन प्रदान करने के लिए तीन स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे ये अग्रणी उद्यम बन सकें। इसका उद्देश्य इनके विकास को तेज करना और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से सरकार इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। पंजीकरण और पहचान को सरल बनाने के लिए उद्यम पोर्टल और उद्यम सहायक पोर्टल जैसे डिजिटल मंच शुरू किए गए हैं, ताकि छोटे उद्योगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल किया जा सके और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या 2012-13 में लगभग 4.67 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। यह वृद्धि उद्यमिता की बढ़ती भावना को दर्शाती है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि नव-उद्यम अपने अनूठे विचारों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक बन रहे हैं और कई अल्प समय में ही यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त कर रहे हैं। निकट भविष्य में और भी ऐसे उद्यम सामने आएँगे। इसके लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और समर्पण आवश्यक है। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नव-उद्यमों से नवाचार करने, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया।</p>
<p>रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना तथा डिजाइन, विकास और निर्माण से लेकर संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के एकीकरण को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि 200 समस्या विवरण इन उद्यमों, उद्योगों, नव-उद्यमों और युवा नवोन्मेषकों को आधुनिक उत्पाद विकसित करने और अपने कौशल को बढ़ाने का अवसर देंगे।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को सुधार वर्ष के रूप में मनाते हुए मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना, गुणवत्ता प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं को सशक्त बनाना शामिल है। रक्षा क्षेत्र में कार्यरत उद्योगों का एक डिजिटल डाटाबेस 'सृजन दीप' भी बनाया गया है, जिसमें 40,000 से अधिक उद्योग सूचीबद्ध हैं, ताकि अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिल सके।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग के पाँच प्रकाशनों का विमोचन भी किया, जिनका उद्देश्य नीतिगत पहलों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, रक्षा निर्यात को प्रोत्साहित करना और उद्योग हितधारकों के लिए व्यापार सुगमता सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्री ने एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया, जिसमें 20 बड़ी रक्षा कंपनियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भागीदार, आपूर्तिकर्ता और नवोन्मेषक के रूप में शामिल करने के लिए अपने कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही 24 भारतीय और विदेशी कंपनियां उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों जैसे स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, संयोगात्मक विनिर्माण और स्मार्ट सामग्री का प्रदर्शन कर रही हैं।</p>
<p>इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा अध्यक्ष डॉक्टर समीर वी कामत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:37:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुखोई-30 हादसे में शहीद पायलटों को राहुल गांधी और राजनाथ सिंह ने दी श्रद्धांजलि, स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[असम में सुखोई-30 विमान दुर्घटना में शहीद हुए स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रवेश दुर्गाकर के निधन पर देश शोकाकुल है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वीर जवानों की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए उनके साहस और राष्ट्र सेवा को नमन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/defense-minister-rajnath-singh-and-rahul-gandhi-expressed-grief-over/article-145468"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वायु सेवा के सुखोई विमान दुर्घटना में दो पायलटों के निधन पर शोक व्यक्त किया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर शुक्रवार को अपने शोक संदेश में कहा, भारतीय वायुसेना के वीर जवान स्क्वाड्रन लीडर अनुज एवं फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर का विमान दुर्घटना में शहीद होने का समाचार अत्यंत दु:खद और पीड़ादायक है। भारत के इन वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। इस दुख की घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है।</p>
<p>इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने असम के कार्बी आंगलोंग इलाके में दुर्घटनाग्रस्त सुखोई विमान हादसे में वायु सेना के दो पायलटों के निधन पर शोक व्यक्त किया है। रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, सुखोई-30 विमान हादसे में दोनों पायलटों स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रवेश दुर्गाकर के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। देश के लिए उनकी हिम्मत और सेवा को हमेशा गर्व और आभार के साथ याद किया जाएगा। दुखी परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। दुख की इस घड़ी में देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है।</p>
<p>गौरतलब है कि, वायु सेना का लड़ाकू विमान सुखोई-30 गुरुवार को असम के कार्बी आंगलोंग इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना में दोनों वीर पायलटों की मौत हो गयी। वायु सेना ने शुक्रवार को इन दोनों पायलटों के निधन की पुष्टि की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 13:22:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दुश्मन देशों की उड़ने वाली है नींद, सशस्त्र बलों की क्षमता बढाने के लिए 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने सशस्त्र बलों के लिए ₹79,000 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें पिनाका रॉकेट सिस्टम, स्वदेशी ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम (IDDIS), अस्त्र मिसाइलें और आर्टिलरी के लिए आधुनिक हथियारों की खरीद शामिल है, जो सेना की मारक क्षमता को बढ़ाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/under-the-chairmanship-of-union-defense-minister-rajnath-singh-defense/article-137640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rajnaht-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा खरीद सौदों के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में तीनों सेनाओं के लिए आवश्यकता के आधार पर खरीद के इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी। </p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस वर्ष की अंतिम बैठक में मंजूर किये गये इन खरीद सौदों की कुल अनुमानित लागत लगभग 79,000 करोड़ रुपये है और इनमें सेना की तोपखाना रेजिमेंट के लिए लॉयटर म्यूनिशन सिस्टम, लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट एम्युनिशन तथा इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDDIS) मार्क-2 की खरीद को मंजूरी दी गई।</p>
<p>बैठक में नौसेना के लिए बोलार्ड पुल टग्स, हाई फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो मैनपैक तथा हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को लीज पर लेने के प्रस्तावों को आवश्यकता पर खरीद की स्वीकृति प्रदान की गई। वायु सेना के लिए ऑटोमैटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, अस्त्र मार्क-(IDDIS) मिसाइलें, फुल मिशन सिम्युलेटर तथा स्पाइस-1000 लॉन्ग रेंज गाइडेंस किट्स आदि की खरीद को आवश्यकता की स्वीकृति दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 16:10:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया बी आर ओ की पांच हजार करोड़ रूपये की 121 परियोजनाओं का उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख में 5,000 करोड़ से अधिक लागत की 121 परियोजनाओं का उद्घाटन किया। सड़कों, पुलों और सुरंगों से सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, सैन्य क्षमता, पर्यटन और विकास को नई मजबूती मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/defense-minister-rajnath-singh-inaugurated-121-projects-of-bro-worth/article-135083"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rajnath-singh-news.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पांच हजार करोड़ रूपये से अधिक लागत वाली 121 ढांचागत परियोजनाओं का रविवार को लद्दाख में उद्घाटन किया। रक्षा मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी कर बताया कि पहली बार एक साथ इतनी ज्यादा परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ है। इनमें से दो केंद्र शासित प्रदेशों - लद्दाख और जम्मू-कश्मीर - और  बाकी सात राज्यों - अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम में हैं। इनमें 28 सड़कें, 93 पुल और 04 अन्य परियोजनाएं हैं। सीमा सड़क संगठन के इतिहास में यह पहला मौका है जब इतनी परियोजनाओं का एक साथ उद्घाटन किया गया है।</p>
<p>इन परियोजनाओं से दूरदराज के गांवों और अग्रिम सैन्य चौकियों में अंतिम छोर तक पहुंच बनाने में काफी मदद मिलेगी। इससे ये क्षेत्र राष्ट्रीय मुख्यधारा के करीब आएंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह परियोजनाएं सरकार की विकसित भारत के विजन के अनुरूप सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत करने की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है ।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने दौलत बेग ओल्डी रोड पर श्योक टनल पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये उद्घाटन किए। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों में से एक में बनी ये परियोजनाएं रणनीतिक क्षेत्र को हर मौसम में विश्वसनीय संपर्क सुनिश्चित करेंगी। उन्होंने कहा कि यह 920 मीटर लंबी कट एंड कवर टनल सुरक्षा, गतिशीलता और तेजी से तैनाती की क्षमताओं को काफी बढ़ाएगी।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बलों के कर्मियों की अद्वितीय बहादुरी, प्रतिबद्धता और बलिदान का सम्मान करने के लिए अरुणाचल प्रदेश में गलवान युद्ध स्मारक का भी वर्चुअली उद्घाटन किया। रक्षा मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों को विकसित करने के सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि ये कनेक्टिविटी के साधन सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए जीवन रेखा हैं। उन्होंने कहा, सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत बुनियादी ढांचे के कई फायदे हैं। यह सैन्य गतिशीलता, रसद के सुचारू परिवहन, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि और सबसे महत्वपूर्ण बात, विकास, लोकतंत्र और सरकार में मजबूत विश्वास सुनिश्चित करता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि जिस तेजी से भारत सड़कों, सुरंगों, स्मार्ट फेंसिंग, इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर और सर्विलांस सिस्टम से अपनी सीमाओं को मजबूत कर रहा है, वह इस बात का सबूत है कि कनेक्टिविटी सुरक्षा की रीढ़ है, न कि कोई अलग चीज। उन्होंने बी आर ओ की तारीफ़ करते हुए कहा कि उसने तेजी और कुशलता से और स्वदेशी समाधानों के जरिए मुश्किल परियोजनाओं को पूरा करके राष्ट्रीय विकास को काफी तेजी दी है। </p>
<p>ऑपरेशन सिंदूर पर रक्षा मंत्री ने कहा, हमारे सशस्त्र बलों ने पहलगाम में हुए भयानक आतंकवादी हमले के जवाब में यह ऑपरेशन शुरू किया था। सभी जानते हैं कि उन आतंकवादियों का क्या हुआ। हम और भी बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन हमारे बलों ने साहस और धैर्य दिखाते हुए सिर्फ वही किया जो जरूरी था। इतना बड़ा ऑपरेशन हमारी मजबूत कनेक्टिविटी की वजह से ही संभव हो पाया। सशस्त्र बलों को समय पर लॉजिस्टिक्स पहुँचाए गए। सीमावर्ती इलाकों के साथ हमारी कनेक्टिविटी बनी रही, जिससे यह ऑपरेशन एक ऐतिहासिक सफलता बन गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 18:29:18 +0530</pubDate>
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                <title>युद्ध अब सेकंडों में : राजनाथ सिंह ने तटरक्षक को दी हाई-टेक चेतावनी, AI-ड्रोन से लैस होकर समुद्री खतरों से निपटने का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[सिंह ने सोमवार को यहां भारतीय तटरक्षक के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अब युद्ध महीनों में नहीं, बल्कि घंटों और सेकंडों में मापा जाता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/war-now-in-seconds-rajnath-singh-gave-high-tech-warning-to/article-128265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/rajnath-singh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युद्धों के बदलते स्वरूप और इनमें नई-नई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) से ऐसा भविष्योन्मुखी रोडमैप विकसित करने को कहा है जो नई चुनौतियों का पूर्वानुमान लगा सके, अत्याधुनिक तकनीकों को एकीकृत कर सके और रणनीतियों के अनुकूल हो।</p>
<p>सिंह ने सोमवार को यहां भारतीय तटरक्षक के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अब युद्ध महीनों में नहीं, बल्कि घंटों और सेकंडों में मापा जाता है, क्योंकि उपग्रह, ड्रोन और सेंसर संघर्ष की प्रकृति को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तैयारी, अनुकूलनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया बल के दृष्टिकोण की आधारशिला होनी चाहिए।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत का मार्ग समृद्धि और सुरक्षा के दो स्तंभों पर टिका है। उन्होंने आईसीजी के आदर्श वाक्य, 'वयं रक्षाम:' यानी हम रक्षा करते हैं का उल्लेख करते हुए इसे केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक प्रतिज्ञा बताया। उन्होंने कहा कि "यह प्रतिज्ञा, जो प्रत्येक आईसीजी कर्मी में निहित है, यह सुनिश्चित करेगी कि हम आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत सौंपें।"</p>
<p>सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि समुद्री खतरे तेज़ी से तकनीक-संचालित और बहुआयामी होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि "तस्करी या समुद्री डकैती के जो तरीके पहले आसानी से समझ में आते थे, वे अब जीपीएस स्पूफिंग, रिमोट-नियंत्रित नावों, एन्क्रिप्टेड संचार, ड्रोन, सैटेलाइट फ़ोन और यहाँ तक कि डार्क वेब पर चलने वाले नेटवर्क का इस्तेमाल करके परिष्कृत गतिविधियों में बदल गए हैं।" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आतंकवादी संगठन अपनी गतिविधियों की योजना बनाने के लिए डिजिटल मैपिंग और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि "पारंपरिक तरीके अब पर्याप्त नहीं हैं, हमें अपने समुद्री सुरक्षा ढाँचे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग-आधारित निगरानी, ड्रोन, साइबर रक्षा प्रणाली और स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र को एकीकृत करके अपराधियों और विरोधियों से आगे रहना होगा।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने आगाह किया कि साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध अब काल्पनिक खतरे नहीं, बल्कि वर्तमान वास्तविकताएं हैं। उन्होंने कहा कि "कोई देश मिसाइलों से नहीं, बल्कि हैकिंग, साइबर हमलों और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के ज़रिए हमारी प्रणालियों को पंगु बनाने की कोशिश कर सकता है। आईसीजी को ऐसे खतरों से बचाव के लिए अपने प्रशिक्षण और उपकरणों को निरंतर उन्नत करते हुए, अनुकूलन करना होगा। जवाबी कार्रवाई के समय को सेकंडों में कम करने और हर समय तत्परता सुनिश्चित करने के लिए स्वचालित निगरानी नेटवर्क और एआई-सक्षम प्रणालियां आवश्यक हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 17:29:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न कोई बात, न ही मुलाकात : पहलगाम हमले के बाद पहली बार एक मंच पर दिखे भारत-पाक के रक्षा मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/neither-talk-nor-meeting-was-seen-on-a-platform-for/article-118666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(1)51.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान पाकिस्तान की तरफ से रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ इस बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद यह पहला मौका था, जब दोनों देशों के रक्षा मंत्री एक मंच पर थे, लेकिन इस दौरान राजनाथ सिंह और ख्वाजा आसिफ के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।</p>
<p><strong>अलग-थलग पड़े ख्वाजा आसिफ</strong><br />मीटिंग हॉल में भारत और पाकिस्तान के रक्षा मंत्रियों ने अलग-अलग एंट्री ली और सदस्य देशों के ग्रुप फोटो सेशन में शामिल हुए। लेकिन राजनाथ सिंह और ख्वाजा आसिफ के बीच किसी तरह का दुआ-सलाम नहीं हुआ। यहां तक कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से कोई औपचारिक अभिवादन भी नहीं किया। मेजबान देश चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन ने हॉल में राजनाथ सिंह का स्वागत किया और इस दौरान राजनाथ सिंह ने रूसी रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव से मुलाकात भी की।</p>
<p>पूरे हॉल में पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अलग-थलग नजर आए और उन्हें अकेले अपने डेलिगेशन के साथ खड़े देखा गया। भारत और पाकिस्तान के रक्षा मंत्रियों के बीच पहले से कोई मुलाकात का कार्यक्रम नहीं था, लेकिन इस ब्रिक्स समिट के दौरान दोनों नेताओं के बीच तल्खी साफ तौर पर देखने को मिली। इसकी वजह पहलगाम आतंकी हमला और फिर उसके बाद भारत की तरफ से आॅपरेशन सिंदूर के तहत की गई सैन्य कार्रवाई है। भारत ने मौजूदा तनाव की वजह से पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक बातचीत को रोक दिया है। यहां तक कि पाकिस्तान के साथ छह दशक पुराने सिंधु जल समझौते को भी भारत की तरफ से स्थगित कर दिया गया है।</p>
<p><strong>राजनाथ का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार </strong><br />इस समिट में रक्षा मंत्री राजनाथ ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने न सिर्फ पहलगाम हमले का जिक्र किया बल्कि लश्कर-ए-तैएबा का नाम लेकर उसके लिए जिम्मेदार टीआरफ के पाकिस्तानी कनेक्शन को भी उजागर किया। राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को बताते हुए भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।</p>
<p>शिखर सम्मेलन के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की साजिश को बेनकाब करते हुए रउड के जॉइंट ड्राफ्ट पर भी साइन करने से इनकार कर दिया, जिसमें पाकिस्तान आतंकवाद के संदर्भ में बलूचिस्तान का जिक्र करना चाहता था। साथ ही चीन और पाकिस्तान उसमें पहलगाम हमले का संदर्भ जोड़ने लिए तैयार नहीं थे। भारत के कड़े रुख की वजह से ही बैठक के बाद कोई साझा बयान या रेजोल्यूशन पेश नहीं किया गया, क्योंकि भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करने के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं है।</p>
<p>पाकिस्तान इस ड्राफ्ट में अपने प्रांत बलूचिस्तान का जिक्र करके वहां चल रहे विद्रोह के लिए बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराने की चाल चल रहा था, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया। पाकिस्तान पहले से ही भारत पर बलूचिस्तान को अस्थिर करने के आरोप लगाता रहा है, जबकि वहां पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों की वजह से आम जनता अपने लिए आजादी की मांग कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jun 2025 13:26:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर आतंकवादियों और उनके संरक्षकों के लिए कड़ा संदेश : राजनाथ </title>
                                    <description><![CDATA[सिंह ने सैनिक के जीवन को साहस और बलिदान का प्रतीक बताते हुए कहा कि राष्ट्र हमेशा सशस्त्र बलों द्वारा मातृभूमि के लिए दी गई सेवाओं का ऋणी रहेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajnath-a-strong-message-to-operation-sindoor-terrorists-and-their/article-118043"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)70.png" alt=""></a><br /><p>जम्मू। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवादियों के साथ-साथ उनके संरक्षकों को दो टूक संदेश दिया है कि नया भारत दृढ़ निश्चयी है और अब वह आतंकवाद का जवाब ताकत तथा रणनीति से देगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति भारत की नीति में बदलाव सैनिकों की बेजोड़ वीरता और समर्पण का परिणाम है। सिंह ने शुक्रवार को उधमपुर स्थित सेना की उत्तरी कमान में सैनिकों के साथ बातचीत करते हुए पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने में सशस्त्र बलों तथा खुफिया एजेंसियों की सटीकता, समन्वय और साहस की सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के प्रति भारत की नीति में बदलाव इस बेजोड़ वीरता और समर्पण का परिणाम है।</p>
<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर महज सैन्य कार्रवाई नहीं</strong><br />रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि सीमा पार के आतंकवादियों और उनका समर्थन करने वालों के लिए एक चेतावनी बताया कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। अगर इसकी एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाया गया तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि मैं अपने पड़ोसी देश को यह बताना चाहता हूं। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। इसे रोका गया है। सिंह ने सैनिक के जीवन को साहस और बलिदान का प्रतीक बताते हुए कहा कि राष्ट्र हमेशा सशस्त्र बलों द्वारा मातृभूमि के लिए दी गई सेवाओं का ऋणी रहेगा। </p>
<p><strong>यदि आप मजबूत हैं, तो हमारी सीमाएं मजबूत होंगी</strong><br />अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित ‘बड़ाखाना’ में रक्षा मंत्री ने जवानों से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने सैनिकों के जीवन में शक्ति और स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यदि आप मजबूत हैं, तो हमारी सीमाएं मजबूत होंगी। जब सीमाएं मजबूत होंगी, तो भारत मजबूत होगा। इस अवसर पर खुखरी नृत्य, भांगड़ा, कलारी पट्टू और झांझ पटक जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 09:29:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रशिक्षण भाजपा संगठन का अभिन्न अंग :  पूरे विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी, राजनाथ ने कहा-  हर संकट के समय सबसे पहले जनता के बीच पहुंचें</title>
                                    <description><![CDATA[ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है, जहाँ प्रशिक्षण को संगठन की कार्यशैली का अभिन्न अंग माना गया है ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-integral-part-of-the-training-bjp-organization-has-become/article-117699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>पचमढ़ी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है, जहाँ प्रशिक्षण को संगठन की कार्यशैली का अभिन्न अंग माना गया है और जनसंघ से लेकर अब तक पार्टी की एक चीज जो नहीं बदली, वो है प्रशिक्षण की परंपरा।</p>
<p>सिंह ने कल मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में आयोजित प्रदेश के पार्टी सांसदों और विधायकों के 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है, जहाँ प्रशिक्षण को संगठन की कार्यशैली का अभिन्न अंग माना गया है। जनसंघ के जमाने से लेकर आज भाजपा जब भारत ही नहीं पूरे विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है, ऐसे में जो चीज़ नहीं बदली है वह है पार्टी की प्रशिक्षण की परंपरा, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की विचारधारा और गरीब कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता।</p>
<p>उन्होंने पार्टी नेताओं को अनेक सीख और हिदायतें देते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे नेताओं ने विचार और मूल्यों की राजनीति को स्थापित किया। आज भी हमारा कार्यकर्ता चुनाव हार सकता है, लेकिन विचार से नहीं हटता। यही वजह है कि भाजपा एक साधारण दल नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग किसी विभाग के मंत्री हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि वे विभाग प्रमुख नहीं, बल्कि जनसेवक हैं। मंत्री की कुर्सी सेवा की चौकी है। नीतियों में समरसता दिखाई देना चाहिए, तुष्टिकरण नहीं। हमारे लिए सारी दुनिया एक परिवार है, ऐसे में जाति-पंथ के आधार पर फैसले कैसे हो सकते हैं। हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि हमारा जन्म सत्ता के गलियारों में नहीं, बल्कि संघर्षों की आंच में हुआ है।</p>
<p>सिंह ने कहा कि सभी सांसद और विधायक हमेशा संगठन से जुड़े रहें, क्योंकि संगठन तब भी था, जब सत्ता नहीं थी। वे कार्यकर्ताओं को सम्मान दें और उनकी बात सुनें, क्योंकि भाजपा की असली ताकत जनता का भरोसा और कार्यकर्ताओं का परिश्रम ही है। जनता की सेवा हमारे “डीएनए” में है, हम जनसेवक हैं, शासक नहीं हैं। जनता का भरोसा और कार्यकर्ताओं का परिश्रम ही भाजपा की असली ताकत है। जनता का भरोसा जीतें और हर संकट के समय सबसे पहले जनता के बीच पहुंचें। सभी अपनी सोच और दृष्टि को बड़ा रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Jun 2025 18:58:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ सिंह ने सैन्य अधिकारियों के साथ की उच्च स्तरीय बैठक : पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की, अधिकारियों ने आगे की रणनीति के बारे में दी जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारियों ने रक्षा मंत्री को भारतीय सेनाओं द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की जा रही कार्रवाई और आगे की रणनीति के बारे में भी बताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rajnath-singh-gave-information-about-the-strategy-ahead-by-reviewing/article-113559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)42.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र सेनाओं के ऑपरेशन सिंदूर से हताश और बौखलाए पाकिस्तान के रात पश्चिमी सीमा से लगते क्षेत्रों में मिसाइल और ड्रोन से विफल हमलों के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार सुबह यहां एक उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि रक्षा मंत्री ने यहां साउथ ब्लॉक में पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा स्थिति और भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।</p>
<p>उन्होंने बताया कि बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और रक्षा सचिव राजेश कुमार ने हिस्सा लिया। सूत्रों के अनुसार शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने रक्षा मंत्री को पाकिस्तानी सेना की पश्चिमी सीमा से लगते क्षेत्रों में हमले की कोशिश और भारतीय सशस्त्र सेनाओं द्वारा इसे विफल किये जाने की जानकारी दी। अधिकारियों ने रक्षा मंत्री को भारतीय सेनाओं द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की जा रही कार्रवाई और आगे की रणनीति के बारे में भी बताया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 May 2025 17:08:43 +0530</pubDate>
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