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                <title>kota stone - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ट्रम्प टैरिफ : कोटा स्टोन, सेंड स्टोन मसालों का निर्यात होगा कम, हाड़ौती के निर्यात पर पड़ेगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीयों को यहां की वस्तुएं  मिलना ही बंद हो जाएंगी या पहले से काफी महंगे दामों में मिलेगी। जिससे लोगों पर आर्थिक भार बढ़ने से वे भी इनका उपयोग व उपभोग कम कर पाएंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trump-tariff--export-of-kota-stone--sand-stone--coriander-and-spices-will-decrease/article-123042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/6622-copy13.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने से यह पहले से दो गुना हो गया है। जिससे भारत के अन्य प्रदेशों के साथ ही हाड़ौती से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर असर पड़ेगा। यहां से निर्यात होने वाले कोटा स्टोन, सेंड स्टोन, मसाले व धनिया की मात्रा कम हो जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अन्य देशों की तुलना में भारत पर अधिक टैरिफ लगाया जा रहा है। पहले से ही 25 फीसदी टैरिफ लग रहा था जिसे बढ़ाकर अब 50 फीसदी कर दिया गया है। ऐसे में भारत से अमेरिका में निर्यात होने वाले सामानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वहीं कोटा व हाड़ौती से यहां की विशेषता लिए जो सामान अमेरिका में निर्यात होते हैं वे भी प्रभावित होंगे। कोटा के व्यापारियों व उद्यमियों का कहना है कि भारत पर टैरिफ बढ़ाने का असर यहां से ’यादा अमेरिका पर रहेगा।  ऐसे में यहां से होने वाला निर्यात या तो कम हो जाएगा या सरकार के निर्णय की पालना में पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। जिससे  रहने वाले भारतीयों को यहां की वस्तुएं  मिलना ही बंद हो जाएंगी या पहले से काफी महंगे दामों में मिलेगी। जिससे लोगों पर आर्थिक भार बढ़ने से वे भी इनका उपयोग व उपभोग कम कर पाएंगे। </p>
<p><strong>दूसरे देशों के माल से प्रतिस्पर्धा होगी मुश्किल</strong><br />अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ के कारण कोटा से निर्यात होने वाला कोटा स्टोन व सेंड स्टोन पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इन दोनों का निर्यात पहले से कम हो जाएगा। पहले ही कोविड के समय से इसका व्यापार प्रभावित हुआ है। साथ ही टैरिफ बढ़ने से अमेरिका में भारत के माल की कीमत अधिक होगी।  जबकि दूसरे देशों से वहां आने वाले सामान की कीमत कम टैरिफ के कारण अपेक्षाकृत कम रहेगी। ऐसे में उस सामान से  मार्केट में प्रतिस्पर्धा कर पाना मुश्किल होगा। <br /><strong>- राजेश गुप्ता, उद्यमी</strong></p>
<p><strong>कोटा स्टोन व सेंड स्टोन पर पड़ेगा असर</strong><br />कोटा व हाड़ौती से तो अमेरिका में सीधे तौर पर सेंड स्टोन, कोटा स्टोन, धनिया व मसालों का निर्यात होता है। अमेरिका द्वारा टैरिफ दो गुना करने से यहां से अमेरिका में होने वाला निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिका को निर्यात संबंधी भारत सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। यदि सरकार ने वहां  निर्यात करना बंद कर दिया तो अन्य देशों को किया जाएगा। जिससे भारत पर इसका काम असर होगा। <br /><strong>- राजेन्द्र जैन, उद्यमी</strong></p>
<p><strong>भारत के लिए विकल्प, अमेरिका के लिए नहीं</strong><br />अमेरिका द्वारा भारत पर इतना अधिक टैरिफ लगाने से हाड़ौती समेत पूरे देश से ओवरआॅल  निर्यात पर तो असर पड़ेगा। यहां का माल अमेरिका में रहने वालों को पहले से अधिक महंगा मिलेगी। विशेष रूप से जिन वस्तुओं व सामानों के लिए अमेरिका भारत पर निर्भर है। हालांकि भारत सरकार जिस तरह के फैसले ले रही है ऐसे में  भारत के लिए तो यूरोपीय देशों से जीरो फीसदी पर व्यापार समझौते करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में भारत उन देशों को माल बेचकर अपना काम चला लेगा। जबकि अमेरिका के लोगों को यहां की वस्तुएं नहीं मिलने से वहां  फर्क पड़ेगा। <br /><strong>- कौशल बसंल, उद्यमी</strong></p>
<p><strong>भारत में घरेलू व्यापार बढ़ेगा</strong><br />अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से देश से होने वाला निर्यात बंद कर दिया जाएगा। अमेरिका की स्थान पर अन्य देशों को निर्यात कर भारत तो उस सामान का उपयोग घरेलू व्यापार में खपत कर लेगा लेकिन अमेरिका पर इसका अधिक असर पड़ेगा। हालांकि कोटा व हाड़ौती के व्यापारी 10 अगस्त से हमारा स्वाभिमान स्वदेशी अभियान चलाएंगे। जिससे लोगों को स्वदेशी सामान खरीदने के लिए जागरूक किया जाएगा। जब वहां के सामान की भारत में खपत ही नहीं होगी तो स्वदेशी की मांग व खपत अधिक होने से यहां के व्यापार व लोगों को लाभ होगा। <br /><strong>- संदीप पाड़िया, उद्यमी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 17:04:40 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा का पहला स्टार्टअप अपनी उड़ान भरने से पहले ही दम तोड़ने लगा</title>
                                    <description><![CDATA[ये लिमिटेड कंपनी होने व अनलिस्टेड होने की वजह से इसे लोन या अन्य कोई सहायता नहीं मिली। इसके बने हुए प्रोडक्ट को भी सरकारी निर्माण में प्राथमिकता नहीं दी गई। विभाग ने भी उदासीनता दिखाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-s-first-startup-died-even-before-it-could-take-off/article-77930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा स्टोन से निकलने वाली स्लरी से टाइल्स बनाने का उद्योग अपने शुरुआती दौर में पूरे उछाल पर रहा। किंतु बाद में बैंकों और राज्य सरकार की ओर से फंड उपलब्ध नहीं कराने के कारण इसकी स्थिति बिगड़ी गई और अब हालात यह है कि इससे टाइल्स बनाना लगभग बंद सा हो गया है। कोटा में देश का पहला स्टार्टअप अपनी उड़ान भरने से पहले ही दम तोड़ने लगा है। जनसेवा और शहर में स्लरी से बढ़ रही समस्या के समाधान को लेकर जिन्होंने इस उद्योग को चालू करने में मेहनत की वह सफल नहीं हो पाई। वर्तमान में यह उद्योग लगभग मृतप्राय: हो चुका है। </p>
<p><strong>प्रोडक्ट को सरकारी निर्माण में नहीं दी प्राथमिकता</strong><br />हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व महासचिव मुकेश त्यागी ने बताया कि राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पॉलिसी के अनुसार इस तरह के प्लांट को लगाने के लिए कंपनी एक्ट के सेक्शन 8 में एसपीवी (विशेष उद्देश्यों के लिए बनाई गई कंपनी) बनाई, जो पाषाण वेलफेयर फाउंडेशन के नाम से रजिस्टर्ड की गई थी। ये लिमिटेड कंपनी होने व अनलिस्टेड होने की वजह से इसे लोन या अन्य कोई सहायता नहीं मिली। इसके बने हुए प्रोडक्ट को भी सरकारी निर्माण में प्राथमिकता नहीं दी गई। विभाग ने भी उदासीनता दिखाई।</p>
<p><strong>सरकार बदली तो प्लांट को लगा ग्रहण</strong><br />तत्कालीन भाजपा सरकार ने कोटा स्टोन की स्लरी का उपयोग जनसेवा में करने तथा लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से यहां पर कोटा में स्वच्छ भारत अभियान के तहत इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया में कोटा स्टोन स्लरी से टाइल्स, इंटरलॉक, पेवर ब्लॉक व सीएलसी ब्लॉक बनाने के लिए पहले स्टार्टअप की शुरुआत जून, 2018 में की थी। जिसके लिए रीको ने पाषाण वेलफेयर फाउंडेशन को डम्पिंग यार्ड के पास 15 हजार मीटर जमीन निशुल्क आवंटित की थी और तत्कालीन राज्य सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस प्लांट व मशीनरी के लिए करीब 80 लाख रुपए अनुदान देने की घोषणा की थी। लेकिन दिसंबर 2018 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इस उद्योग पर जैसे ग्रहण सा लग गया। सरकार ने इस ओर ध्यान देना ही बंद कर दिया और यह प्लांट गर्त में जाने लगा। बैंकों ने लिमिटेड कंपनी होने के कारण इसको फंड उपलब्ध नहीं कराया। ऐसे में यह प्लांट बंद होने के कगार पर है।</p>
<p><strong>सीबीआरआई रिसर्च से निकले थे प्रॉडक्ट</strong><br />आईआईटी, रूड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के वैज्ञानिकों ने कोटा स्टोन स्लरी के उपयोग पर निरंतर अनुसंधान कर सके मिश्रण से टाइल्स, पेवर ब्लॉक, इंटरलॉक एवं सीएलसी ब्लॉक बनाने में सफलता पाई। तत्कालीन भाजपा सरकार एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस प्लांट व मशीनरी के लिए अनुदान की घोषणा की थी।</p>
<p><strong>शहर ही नहीं ग्राम पंचायतों में भी लगी है टाइल्स</strong><br />कोटा शहर के स्वामी विवेकानगर, इंद्रा विहार और कोटा जेल में स्लरी से बनी टाइल्स का ही उपयोग हुआ है। स्वामी विवेकानगर में तो करीब 6-7 लाख टाइल्स लगी हुई है। इतना ही नहीं जिले की कई ग्राम पंचायतों में भी स्लरी से बनी हुई टाइल्स का उपयोग किया गया है। प्लांट के शुरुआती दौर में स्लरी से बनी टाइल्स की जमकर बिक्री हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 15:23:58 +0530</pubDate>
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