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                <title>Nuclear Test - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Nuclear Test RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका का परमाणु परीक्षण पर स्पष्टीकरण : सिस्टम टेस्ट होगा न कि परमाणु विस्फोट, यह परीक्षण अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हाल ही में बताए गए परमाणु परीक्षण वास्तविक विस्फोट नहीं, बल्कि ‘सिस्टम टेस्ट’ होंगे। ये नॉन-क्रिटिकल एक्सप्लोजन हैं और अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण का हिस्सा हैं। परीक्षणों का उद्देश्य हथियारों के हिस्सों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करना है। स्थानीय लोग सुरक्षित रहेंगे।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/americas-clarification-on-nuclear-test-will-be-a-system-test/article-131414"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने स्पष्ट किया है कि हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु हथियार परीक्षणों की जो बात कही है, उसमें वास्तविक रूप से परमाणु विस्फोट नहीं बल्कि ‘सिस्टम टेस्ट’ होगा।</p>
<p>एक सवाल के जवाब में बताया कि ये परीक्षण अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा हैं। उनके अनुसार- हम जिन परीक्षणों की बात कर रहे हैं, वे सिस्टम टेस्ट हैं, न कि परमाणु विस्फोट। इन्हें ‘नॉन-क्रिटिकल एक्सप्लोजन’ कहा जाता है।</p>
<p>राइट ने बताया कि इन परीक्षणों के जरिए हथियारों के विभिन्न हिस्सों को जांचा जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे आवश्यक संरचना और विस्फोट की तैयारी की जरूरतों को सही ढंग से पूरा करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या नेवादा रेगिस्तान के पास रहने वाले लोग विस्फोट के बाद बनने वाले मशरूम आकार के बादल की चपेट में आ सकते हैं तो उन्होंने कहा- इस बारे में कोई चिंता नहीं है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 16:31:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title> डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- पाकिस्तान कर रहा परमाणु परीक्षण, फिर अलापा पुराना राग; मैंने युद्ध को रुकवाया</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहा है और उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोका था। एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भी परमाणु परीक्षण करेगा क्योंकि रूस, चीन और उत्तर कोरिया ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने आठ युद्ध रोकने का दावा भी किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-said-pakistan-is-conducting-nuclear-tests-again-repeats/article-131396"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहा है और दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होने से रुकवाया था। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका भी परमाणु परीक्षण करेगा क्योंकि रूस, चीन तथा उत्तर कोरिया जैसे देश भी परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भी परमाणु परीक्षण कर रहा है।    </p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए हैं और भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होने से रुकवाया। उन्होंने कहा कि मुझे एक और हल करना है, रूस-यूक्रेन युद्ध। ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को मई में सैन्य संघर्ष रोकने के लिए मजबूर किया था और इसके लिए उन्होंने भारत को व्यापार रोकने की धमकी दी थी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 12:57:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पोकरण परमाणु परीक्षण के 50 साल पूरे</title>
                                    <description><![CDATA[बुद्व पूर्णिमा का वह दिन था 18 मई 1974 जब पश्चिमी राजस्थान की पोकरण फायरिंग रेंज में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/pokaran-nuclear-test-completes-50-years/article-78408"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/pokran.png" alt=""></a><br /><p>चास बरस पहले वह भी शनिवार का दिन था। रेत के समंदर से नई दिल्ली में किए गए फोन से केवल एक वाक्य कहा गया-बुद्धा इस्माइलिंग याने बुद्व मुस्कराए। इस फोन से कुछ देर पहले थार मरूस्थल की धरती कांपी थी और बाद की खबर से दुनिया धमक गई। बुद्व पूर्णिमा का वह दिन था 18 मई 1974 जब पश्चिमी राजस्थान की पोकरण फायरिंग रेंज में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया। नया इतिहास रचने वाली तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी का परमाणु परीक्षण स्थल का दौरा कभी ऊंघते हुए शहर के रूप में अभिषप्त जैसलमेर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर अंकित कर दिया। संयोगवश अब 18 मई 2024 का दिन भी शनिवार है। जब पचास बरस पहले परमाणु परीक्षण का ऐतिहासिक पृष्ठ जुड़ा। अलबत्ता इस बार बुद्व पूर्णिमा 23 मई को होगी। इसी इतिहास में 24 वर्ष पश्चात 11 एवं 13 मई 1998 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के पांच परमाणु परीक्षण करके नया अध्याय जोड़ा गया। दोनों बार भारत पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की परवाह नहीं की गई।<br />इन्दिरा गांधी की तरह तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी परमाणु परीक्षण स्थल का अवलोकन करने आये थे। वाजपेयी ने 1965 में भारत पाक युद्ध के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के प्रसिद्ध नारे-जय जवान-जय किसान में जय विज्ञान शब्द जोड़ने की घोषणा की थी। वाजपेयी 21 मई 1998 को पोकरण आये थे। तत्कालीन रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नाडीस, राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल दरबारा सिंह और मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत एवं डॉ.ए.पी.जी. अब्दुल कलाम भी उनके साथ आए थे। संयोगवश यह लेखक न्यूज एजेंसी यूनीवार्ता, यूएनआई के प्रतिनिधि के नाते जयपुर से गई प्रेस पार्टी में सम्मिलित था। भूमिगत गहरे परीक्षण स्थल से बाहर आते समय लेखक के प्रश्न- इस धरती पर आकर आपको क्या अनुभूति हुई के उत्तर में वाजपेयी ने हथेली से ‘वी’ की मुद्रा बनाकर कहा-जय जवान-जय किसान और जय विज्ञान। फील्ड फायरिंग रेंज में सैनिक सम्मेलन तथा पोकरण की जनसभा में भी वाजपेयी ने इसी नारे का उद्घोष किया।<br />भारत के पहले परमाणु परीक्षण के अत्यंत गोपनीय अभियान में 1967 से 1974 के वर्षों में लगभग 75 वैज्ञानिक इंजीनियर प्राण-प्राण से जुटे रहे। भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के तत्कालीन निदेशक रामन्ना प्रोजेक्ट हैड तथा भौतिक विज्ञानी पी के आयंगर ने इसका डिजाइन तैयार किया था। इस टीम में भारत के राष्ट्रपति रहे डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भी शामिल थे। जिन्होने मिसाईल मैन के रूप में 1998 के पांच परमाणु परीक्षणों से अमेरिकी सेटेलाईट को भी धत्ता बताई।<br />पहले परमाणु परीक्षण पर निगाह रखने के लिए परीक्षण स्थल से लगभग पांच कि.मी. दूर बनाए गए मचान पर वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सैन्य अधिकारी विराजमान थे। इस परमाणु बम का व्यास लगभग सवा मीटर और वजन 1400 किलो था। सेना इसे बालू रेत में छिपाकर परीक्षण स्थल पर लाई। परीक्षण की आखरी तैयारी देखने के लिए वैज्ञानिक वीरेन्द्र सेठी को साईट पर भेजा गया। लेकिन जीप स्टार्ट नहीं होने पर शनिवार 18 मई 1974 को सुबह 8 बजे निर्धारित समय के पांच मिनट बाद परीक्षण होते ही धूल का गुबार उठा तथा थार मरूस्थल में से 8 से 10 कि.मी. दूरी तक धरती कांप उठी। क्षेत्रीय जनता हतप्रभ थी। भारत सरकार की घोषणा से इस परीक्षण की जानकारी मिली। चूंकि भारत पीटीबीटी समझौता करने वाले देशों में शामिल था। लिहाजा ऐसे देश किसी वातावरण में परीक्षण नहीं कर सकते थे। वातावरण से अभिप्राय आसमान पर, पानी के अंदर, समुद्र शामिल थे। तब भारत ने कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाया और भूमिगत परीक्षण करके अपना लक्ष्य पूरा करने के साथ विश्व को चौंकाया। रमन्ना की आत्मकथा इयर्स ऑफ  पिलिग्रिमिज के अनुसार इस अत्यंत गोपनीय प्रोजेक्ट की जानकारी श्रीमती इन्दिरा गांधी, उनके मुख्य सचिव पी एम हकसर, पी एन धर वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. नाग चौधरी, भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के निदेशक एच एन सेठना तथा खुद रमन्ना तक सीमित थी। ततकालीन रक्षामंत्री जगजीवन राम को भी परीक्षण के पश्चात् सूचित किया गया। पर्यटन दृष्टि से इस परमाणु परीक्षण का <br />अप्रत्यक्ष लाभ जैसलमेर को मिला। परमाणु परीक्षण स्थल का अवलोकन करके इन्दिरा गांधी अचानक जैसलमेर पहुंची और कलात्मक शिल्प सौंदर्य युक्त पटुवों की हवेली देखी। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी को पत्र लिखाकर इस विरासत के सरंक्षण संवर्द्वन के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा। और तब से कदम दर कदम पीले पत्थरों से बना जैसाण दुर्ग तथा रेतीले समंदर से सना जैसलमेर देशी विदेशी सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र बन गया। मरू मेले ने तो इसमें चार चांद लगा दिए है।                            </p>
<p><strong>-गुलाब बत्रा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 May 2024 10:17:53 +0530</pubDate>
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