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                <title>Migrant Workers - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Migrant Workers RSS Feed</description>
                
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                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर निशाना : कोविड़ जैसी अव्यवस्था अब एलपीजी संकट में भी, दिहाड़ी श्रमिकों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए एलपीजी संकट की तुलना कोविड कुप्रबंधन से की है। उन्होंने कहा कि "नीति शून्य" सरकार के कारण गरीब और प्रवासी श्रमिक पलायन को मजबूर हैं। राहुल ने इसे कूटनीतिक चूक और विनिर्माण क्षेत्र की बर्बादी बताते हुए जनता से चुप्पी तोड़ने का आह्वान किया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-target-on-the-center-is-chaos-like-covid/article-149249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि केंद्र के पास रसोई गैस (एलपीजी) संकट से निपटने की कोई नीति नहीं है और इस समय भी वही अवस्था देखने को मिल रही है जो देश के लोगों ने कोविड के समय देखी थी। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "केंद्र सरकार ने कहा था-एलपीजी संकट को कोविड की तरह हैंडल करेंगे और सच में वही किया। बिल्कुल कोविड के जैसे ही नीति शून्य, घोषणा बड़ी और बोझ गरीबों पर। हर रोज 500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा शहर छोड़ो, गाँव भागो।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि जो मज़दूर कपड़ा मिल्स और फैक्टरियों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं। कपड़ा क्षेत्र पहले से ही गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में है। विनिर्माण क्षेत्र दम तोड़ रहा है। राहुल गांधी ने इस संकट की वजह बताते हुए कहा "और यह संकट आया कहाँ से। कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती। जब अहंकार नीति बन जाए तो अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।"</p>
<p>उन्होंने संकट के समय लोगों को चुप नहीं रहने का आह्वान करते हुए कहा कि सवाल एक ही है कि हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है। चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 16:01:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे पर राज्यसभा में चर्चा कराने की मांग, भाकपा सांसद संदोष कुमार ने दिया नोटिस</title>
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                        <![CDATA[सांसद संदोष कुमार पी ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वहां रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा पर राज्यसभा में चर्चा हेतु नियम 267 के तहत नोटिस दिया है। उन्होंने सरकार से आपातकालीन निकासी योजना और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। खाड़ी देशों में भारतीयों की आजीविका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को देखते हुए यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cpi-mp-sandosh-kumar-gave-notice-demanding-discussion-in-rajya/article-145773"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सांसद संदोष कुमार पी ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे पर राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा कराने का नोटिस दिया है। उन्होंने सोमवार को सदन में सामान्य कामकाज स्थगित कर इस गंभीर विषय पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है। </p>
<p>संदोष कुमार ने नोटिस में उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और मानवीय स्थिति गंभीर होती जा रही है। इससे वहां काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा, आजीविका और आवागमन को लेकर चिंता बढ़ गई है। सांसद ने कहा कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार, पेशेवर और उनके परिवार रहते हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था और मेजबान देशों दोनों के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार को स्थिति पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए और भारतीय समुदाय के लिए प्रभावी सहायता तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने सरकार से यह भी मांग की, कि संसद में इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया जाए और जरूरत पडऩे पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा तथा संभावित निकासी की तैयारी की जाए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 11:34:07 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>राजस्थान के प्रवासी कार्यकर्ताओं ने छोड़ी देश में अमिट छाप : भजनलाल शर्मा </title>
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                        <![CDATA[राजस्थान के प्रवासी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रवाद की भावना के साथ काम किया है ये ही हमारी पूंजी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-draft--add-your-title/article-80219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/cm-meeting.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाजपा प्रदेश कार्यालय में लोकसभा चुनाव प्रवासी कार्यकर्ताओं की प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश संगठन सह प्रभारी विजया राहटकर, लोकसभा चुनाव प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत, कैलाश चौधरी और भाजपा प्रदेश महामंत्री जितेंद्र गोठवाल मंच पर उपस्थित रहे।</p>
<p>भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा के सभी चुनाव प्रवासी कार्यकर्ताओं, नेताओं, पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का कार्य सराहनीय तथा प्रशंसनीय है। पहले प्रदेश में चुनाव प्रचार का जिम्मा संभालते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी के समर्थन में अच्छा मतदान करवाया और फिर देशभर में चुनाव की कमान संभाली। सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान देशभर में राजस्थान के कार्यकर्ताओं ने ऊर्जा, जोश और जुनून के साथ कार्य करते हुए अपनी छाप छोड़ी है। राजस्थान के प्रवासी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रवाद की भावना के साथ काम किया है ये ही हमारी पूंजी है।</p>
<p>भाजपा के प्रवासी कार्यकर्ताओं ने हर राजस्थानी मतदाता से संपर्क कर पार्टी को मजबूत करने का काम किया है।<br />विजया राहटकर, सह प्रभारी राजस्थान</p>
<p>भाजपा ने पंजाब में हिन्दू-सिख सामांजस्य बना रहे इस का ध्यान रखते हुए बूथ स्तर पर काम किया। <br />गजेन्द्र सिंह शेखावत, लोकसभा प्रत्याशी भाजपा</p>
<p>चुनाव में प्रवासी राजस्थानी कार्यकर्ता जहां-जहां गए वहां से अब यह सुनने को मिल रहा है कि उन्होंने ने माहौल बना दिया।<br />कैलाश चौधरी, प्रत्याशी</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jun 2024 15:51:42 +0530</pubDate>
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                <title>प्रवासी कामगारों से मजबूत होती अर्थव्यवस्था</title>
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                        <![CDATA[अलग-अलग देशों में जैसे-जैसे भारतीय मजदूरों की संख्या बढ़ेगी, भारत को अपनी राजनयिक मौजूदगी बढ़ाने पर विचार करना चाहिए ताकि वहां काम करने वाले भारतीयों की परेशानियों का जल्दी समाधान हो सके।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/economy-strengthened-by-migrant-workers/article-78630"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>इंंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) की 7 मई 2024 को जारी विश्व प्रवासन रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में भारत विदेशों में काम करने वाले भारतीय कामगारों से सबसे ज्यादा धन पाने वाले देशों के रूप में सूचीबद्ध हुआ है। मैक्सिको, चीन, फिलीपींस व फ्रांस जैसे देश भी इस सूची में भारत की तुलना में नीचले पायदानों पर है। भारत के लिये यह गौरव की बात है और इससे दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनने के भारत के प्रयासों को भी बल मिलेगा। नया भारत एवं सशक्त भारत के निर्माण में विदेशों में रह रहे भारतीय कामगारों ने अपने खून-पसीने की कमाई से अर्जित धनराशि में से वर्ष 2022 में 111 बिलियन डॉलर अपने देश भेजे हैं। यह आंकड़ा जहां विश्व में भारतीय श्रमशक्ति की गौरवपूर्ण गाथा को दर्शाता है, वहीं देश की अर्थव्यवस्था में उनके अमूल्य योगदान को दिखाता है। आईओएम की ताजा रिपोर्ट वैश्विक प्रवास पैटर्न में महत्त्वपूर्ण बदलावों का खुलासा करती है, जिसमें विस्थापित लोगों की रिकॉर्ड संख्या और अंतरराष्ट्रीय प्रेषण में बड़ी वृद्धि शामिल है। पूरे विश्व में अनुमानित 281 मिलियन अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों के साथ, संघर्ष, हिंसा, आपदा और अन्य कारणों से विस्थापित व्यक्तियों की संख्या आधुनिक रिकॉर्ड में उच्चतम स्तर तक बढ़ गई है, जो 117 मिलियन तक पहुंच गई है, जो विस्थापन संकट को संबोधित करने की तात्कालिकता को रेखांकित करती है। भारत में अनुमानित 1.8 करोड़ लोग अंतरराष्ट्रीय प्रवासी के रूप में काम करने के लिए विदेश जाते हैं। भारतीय अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, डॉक्टरों आदि जैसे पेशेवरों का अनुपात बढ़ गया है। इनके वेतन ज्यादा होता है और वे बड़ी मात्रा में पैसा भारत भेजते हैं। इनके अलावा भारतीय कामगार भी बड़ी संख्या में विदेशों में अपने श्रम से धन अर्जित करके न केवल अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। निश्चित रूप से यह उन कामगारों के भारत के प्रति आत्मीय लगाव एवं देशप्रेम को ही दर्शाता है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में योगदान करने वाले इन श्रमवीरों के प्रति देश कृतज्ञ है। निश्चित रूप से इसका भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, वहीं दुनिया में भारतीय श्रम-शक्ति एवं प्रतिभाएं अपनी क्षमता, कौशल एवं प्रतिभा से विपुल आर्थिक, सामाजिक एवं विकासमूलक योजनाओं की नई संभावनाओं के द्वार खोलती है, जिससे दुनिया में भारत की ताकत को नए पंख लगते हैं।</p>
<p>भारतीय कामगारों, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं एवं कौशल के लिए शीर्ष प्रवासन गलियारे संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और सऊदी अरब हैं जबकि राजनीतिक कारणों से भारत में प्रवेश करने वाले प्रवासियों की सबसे अधिक संख्या बांग्लादेश से आती है। प्रश्न है कि भारतीय कामगार एवं प्रतिभाएं जितनी बड़ी संख्या में विदेशों में जाकर अपनी क्षमताओं एवं प्रतिभा का लोहा मनवा रही है, विदेशी प्रतिभाएं उतनी संख्या में भारत नहीं आ रही है। वोट बैंक बढ़ाने के लिये बांग्लादेश आदि पड़ोसी देशों से गरीब एवं मुसलमानों का बड़ी संख्या में देश में आना, यहां के विकास को अवरोध करता है। इस तरह के लोगों के आने से देश में जनसंख्या बढ़ रही है, वही उनका भारत के विकास में योगदान नगण्य है और उनका भारत से कोई मजबूत एवं आत्मीय रिश्ता भी कायम नहीं हो पाता है, यह एक समस्या के रूप में भारत के विकास को बाधित करता है। </p>
<p>दुुनिया में भारतीय श्रम एवं कौशल की बड़ी मांग है। क्योंकि भारतीय मजबूर मेहनती, ईमानदार एवं कार्यनिष्ठ होते हैं। विकसित देशों में श्रमिकों की भारी कमी के बीच खेती, निर्माण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में काम करने के वास्ते भारतीय कामगारों को विदेश भेजने के लिए विकसित देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते करने का भारत सरकार का इरादा है। भारत सरकार उन देशों के साथ एग्रीमेंट करने जा रही है, जहां आबादी तेजी से घट रही है। वैसे हम पहले ही जापान और फ्रांस के साथ लेबर सप्लाई एग्रीमेंट कर चुके हैं। इजरायल के साथ भी एक करार है, जिसके तहत हजारों भारतीय वहां खेती और मजदूरी के लिए भेजे जा रहे हैं। यूनान ने भारत से संपर्क किया है कि वह कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 10,000 कामगारों को उसके यहां भेजे। </p>
<p>विदेशों से धन भेजने के आकंड़े का बढ़ना दर्शाता है कि प्रवासियों का अपनी मातृभूमि के बीच कितना मजबूत, आत्मीय व स्थायी संबंध है। लेकिन इसके साथ ही भारत सरकार का दायित्व बनता है कि इस उपलब्धि की खुशी मनाते वक्त प्रवासियों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी पहचाना जाए और उनका समाधान किया जाये। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि प्रवासी कामगारों को वित्तीय शोषण, प्रवासन लागत के कारण बढ़ते दबाव, नस्लीय भेदभाव व कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिनके निराकरण के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। दुनिया की महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर भारत अपने प्रवासी कामगारों की समस्याओं के समाधान के लिये संबंधित देशों से रणनीतिक तरीकों से रास्ता निकालना चाहिए।</p>
<p>निस्संदेह, भारत सरकार को प्रवासी कामगारों की समस्याओं के समाधान के लिये हमारे दूतावासों के जरिये विशेष कदम उठाने चाहिए। दरअसल, खाड़ी सहयोग परिषद के रा’यों में जहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं, उनके अधिकारों का उल्लंघन जारी है। खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कामगारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। विशेष तौर पर अर्द्ध-कुशल श्रमिकों और अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के कई तरह के संकटों को बढ़ा दिया था। बड़ी संख्या में उनकी नौकरियां खत्म हुई, वेतन नहीं मिला। सामाजिक सुरक्षा के अभाव में कई लोगों को कर्ज में डूबना पड़ा। जिसके चलते बड़ी संख्या में ये कामगार स्वदेश लौटे।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों की तरफ भारतीय छात्रों के बढ़ते रुझान की ओर भी आईओएम की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट इशारा कर रही हैं। बहरहाल, प्रवासन के बदलते परिदृश्य में प्रवासी भारतीयों के अधिकारों व हितों की रक्षा के लिये ठोस प्रयासों की जरूरत है। किसी भी तरह श्रमिकों का शोषण न हो और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को संबोधित करने की जरूरत है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय कामगारों के लिये सुरक्षित व व्यवस्थित प्रवासन मार्ग संभव हो सके। यह समावेशी विकास की पहली शर्त भी है। हमारा नैतिक दायित्व बनता है कि विदेशों में कामगारों के हितों की रक्षा के साथ ही भारत में रह रहे उनके परिवारों का भी विशेष ख्याल रखा जाए। जिससे उनका देश के प्रति लगाव और गहरा हो सके।</p>
<p>सरकार कामगारों को विदेश भेजने की पहल में काफी सक्रिय दिख रही है। कम से कम दो जरूरी बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। पहला, जिन कामगारों की बात की जा रही है वे ’यादा पढ़े-लिखे या कुशल नहीं हैं, ऐसे में यह जरूरी है कि इन लोगों का चयन पारदर्शी तरीके से हो। अगर जरूरत पड़े तो इस प्रक्रिया में किसी तीसरे भरोसेमंद पक्ष को भी शामिल किया जाए। दूसरी बात, अलग-अलग देशों में जैसे-जैसे भारतीय मजदूरों की संख्या बढ़ेगी, भारत को अपनी राजनयिक मौजूदगी बढ़ाने पर विचार करना चाहिए ताकि वहां काम करने वाले भारतीयों की परेशानियों का जल्दी समाधान हो सके। सरकार की इस पहल का स्वागत कई कारणों से अवश्य किया जाना चाहिए। भारत में कुशल और मेहनती कामगारों की तादाद बहुत ज्यादा है। कई वर्षों से संगठित और अनौपचारिक तरीके से ये कामगार कई देशों में जाते रहे हैं और इसका अंदाजा विदेश से भारत भेजी जाने वाली राशि से मिलता है। भारत भी अपने व्यापारिक साझेदार देशों के साथ किए जाने वाले विभिन्न समझौतों में भी कामगारों की आवाजाही की वकालत करता रहा है।</p>
<p>भारतीय कामगारों, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं एवं कौशल के लिए शीर्ष प्रवासन गलियारे संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और सऊदी अरब हैं जबकि राजनीतिक कारणों से भारत में प्रवेश करने वाले प्रवासियों की सबसे अधिक संख्या बांग्लादेश से आती है। प्रश्न है कि भारतीय कामगार एवं प्रतिभाएं जितनी बड़ी संख्या में विदेशों में जाकर अपनी क्षमताओं एवं प्रतिभा का लोहा मनवा रही है, विदेशी प्रतिभाएं उतनी संख्या में भारत नहीं आ रही है।</p>
<p><strong>-ललित गर्ग</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong></p>]]>
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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 11:01:20 +0530</pubDate>
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