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                <title>voting data - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चुनाव के आंकड़ों में देरी से केरल में मचा विवाद : वी.डी. सतीशान ने लगाया मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप, आंकड़े तुरंत प्रकाशित करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 9 अप्रैल को हुए मतदान के आंकड़ों में देरी पर चिंता जताई है। उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रवार प्रतिशत और डाक मतपत्रों की जानकारी सार्वजनिक न होने को पारदर्शिता के खिलाफ बताया। सतीशान ने लोकतांत्रिक विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सटीक डेटा तत्काल जारी करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/controversy-created-in-kerala-due-to-delay-in-election-data/article-150154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/vd-satishnan.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर गंभीर चिंता जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर 9 अप्रैल, 2026 को हुए केरल विधानसभा चुनावों से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों के प्रकाशन में हो रही देरी को उजागर किया है। अपने पत्र में सतीशान ने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया है कि मतदान समाप्त होने के तीन दिन बीत जाने के बावजूद, विस्तृत और प्रामाणिक चुनावी आंकड़े अभी तक भारतीय चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि निर्वाचन क्षेत्रवार मतदान आंकड़े, निर्वाचन क्षेत्रवार मतदान प्रतिशत और डाक मतपत्रों के आंकड़े जैसी महत्वपूर्ण जानकारी अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। पारदर्शिता के महत्व पर बल देते हुए सतीशान ने कहा कि इस तरह के व्यापक आंकड़ों का शीघ्र प्रकाशन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सत्यापित जानकारी की समय पर उपलब्धता से जनता को जांच-पड़ताल करने में मदद मिलती है और चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ती है।</p>
<p>तत्काल कार्रवाई का आग्रह करते हुए सतीशान ने चुनाव आयोग से बिना किसी देरी के संपूर्ण चुनाव आंकड़ों को प्रकाशित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आम जनता, शोधकर्ताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों के लिए सटीक और प्रामाणिक आंकड़ों तक पहुंच आवश्यक है। यह मुद्दा अब राजनीतिक महत्व का हो गया है, क्योंकि 2026 के केरल विधानसभा चुनावों के संचालन और पारदर्शिता पर चल रही चर्चाओं के बीच इस देरी ने सबका ध्यान आकर्षित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:07:38 +0530</pubDate>
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                <title>मतदान के आंकड़े वेबसाइट पर डालने की याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[ उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा चुनाव मतदान के 48 घंटे के बाद प्रत्येक मतदान केंद्र पर डाले गए मतों के आंकड़े से संबंधित फॉर्म 17सी को वेबसाइट पर डालने की मांग संबंधी याचिका पर चुनाव आयोग की कड़ी आपत्ति के बाद विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-refuses-to-consider-the-petition-to-put-voting/article-79213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा चुनाव मतदान के 48 घंटे के बाद प्रत्येक मतदान केंद्र पर डाले गए मतों के आंकड़े से संबंधित फॉर्म 17सी को वेबसाइट पर डालने की मांग संबंधी याचिका पर चुनाव आयोग की कड़ी आपत्ति के बाद विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।</p>
<p>न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स के आवेदन को प्रथम दृष्ट्या और आशंका पर आधारित बताते हुए विचार करने से इनकार किया।</p>
<p>पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और ए एम सिंघवी से कहा कि हम योग्यता के आधार पर कुछ नहीं कह रहे...लेकिन इस समय आपके पास कोई अच्छा मामला नहीं है।</p>
<p>पीठ ने आगे कहा कि इसे लंबित रखते हैं। हम उचित समय पर इसकी जांच करेंगे। संबंधित अधिकारियों (चुनाव आयोग के) पर भरोसा करें।</p>
<p>चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने दलील दी कि आवेदन प्रक्रिया के दुरुपयोग का एक उत्कृष्ट मामला है, क्योंकि यह चुनाव प्रक्रिया के दौरान दायर की गई थी।</p>
<p>शीर्ष अदालत के समक्ष उन्होंने कहा कि आवेदन संदेह, आशंका और चुनाव प्रक्रिया की अखंडता पर झूठे आरोपों पर आधारित है। यह भी दलील दी कि उन्होंने (आवेदक) चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्तियां संलग्न की हैं, लेकिन 26 अप्रैल के फैसले को संलग्न नहीं किया है। उस दिन अदालत ने ईवीएम के साथ वीवीपैट गिनती के सत्यापन के संबंध में उनकी याचिका पर विचार किया था। उन्होंने आवेदकों पर भारी जुर्माना लगाने की गुहार लगाई।</p>
<p>इस पर अदालत के समक्ष आवेदकों के अधिवक्ताओं ने कहा कि जनहित याचिकाओं में नियमों और प्रक्रिया को सख्ती से लागू नहीं किया जा सकता।</p>
<p>पीठ ने हालांकि कहा कि जनहित याचिकाएं आजकल प्रचार वाली याचिकाएं बन गई हैं।</p>
<p>पीठ ने जब आवेदकों से सवाल पूछा कि वे 16 मार्च से पहले (जब चुनाव की तारीखों की घोषणा की गई थी) क्यों नहीं इस मामले को लेकर अदालत आए। इस पर आवेदकों के अधिवक्ताओं ने कहा कि जानकारी केवल तभी उपलब्ध कराई गई थी, जब चुनाव के पहले दो चरणों में खुलासे किए गए थे।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने इस मामले में 17 मई को चुनाव आयोग को 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रत्येक चरण के मतदान के 48 घंटे बाद सभी मतदान केंद्रों पर दर्ज किए गए मतों का लेखा-जोखा आयोग कबेवसाइट अपलोड करने के लिए नोटिस जारी किया।</p>
<p>चुनाव आयोग ने 22 मई को शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि वेबसाइट पर फॉर्म 17सी (प्रत्येक मतदान केंद्र पर डाले गए वोटों का हिसाब) अपलोड उचित नहीं होगा। फॉर्म के साथ शरारत की सकती है। फॉर्म के तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की संभावना है। इस प्रकार इससे 'काफी असुविधा और अविश्वास पैदा होने की आशंका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 May 2024 16:38:28 +0530</pubDate>
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