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                <title>जयपुर डिस्कॉम टेंडर घोटाला: पूर्व एमडी व इंजीनियर पर केस, जांच में करोड़ों की गड़बड़ी उजागर, पुलिस जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर डिस्कॉम में ₹237 करोड़ के टेंडर घोटाले में एसीबी ने पूर्व एमडी आर.एन. कुमावत और अतिरिक्त मुख्य अभियंता के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में सामने आया कि चहेती फर्म को लाभ पहुँचाने के लिए नियमों में बदलाव कर परियोजना लागत बढ़ाई गई। एसीबी अब इस भ्रष्टाचार की गहराई से जांच कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-discom-tender-scam-case-investigation-on-former-md-and/article-147121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/acb.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर डिस्कॉम में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व एमडी आर.एन. कुमावत और अतिरिक्त मुख्य अभियंता अनिल गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में सामने आया है कि मिलीभगत कर परियोजना लागत को सैकड़ों करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया और नियमों में बदलाव किए गए।</p>
<p>वर्ष 2022 की बजट घोषणा के तहत 20 और 22 जीएसएस बनाने के लिए जयपुर डिस्कॉम ने टेंडर जारी किए थे। हैरानी की बात यह रही कि दोनों टेंडरों में केवल एक ही फर्म—आरसी इंटरप्राइजेज—ने भाग लिया। 21 सितंबर 2023 को वित्तीय बिड खोली गई, जिसके बाद कॉर्पोरेट लेवल पर्चेज कमेटी (सीएलपीसी) की बैठक हुई। इस कमेटी में तत्कालीन एमडी आर.एन. कुमावत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। कमेटी के निर्देशों के आधार पर बिड मूल्यांकन कमेटी का गठन किया गया।</p>
<p>4 अक्टूबर 2023 को बिड मूल्यांकन कमेटी की रिपोर्ट सीएलपीसी के सामने रखी गई। आरोप है कि इस दौरान फर्म के साथ मिलीभगत कर वित्तीय शर्तों में बदलाव किया गया, जिससे परियोजना लागत में करीब 237 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई। विभागीय जांच में भी गड़बड़ियों की पुष्टि हुई, जबकि एजी ऑडिट में 226 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च दर्शाया गया है। एसीबी को मिली शिकायत के बाद जांच शुरू की गई और विभाग से अनुमति मिलने पर बुधवार को दोनों अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।</p>
<p>जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 में एबी इंटरप्राइजेज के साथ मिलीभगत कर 3.37 करोड़ रुपये की जब्त धरोहर राशि भी वापस कर दी गई। एसीबी का कहना है कि अधिकारियों ने आपसी साठगांठ कर अपने पदों का दुरुपयोग किया और सरकारी धन को नुकसान पहुंचाया। मामले में अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।</p>
<p><strong>बॉक्स: घोटाले की मुख्य बातें</strong></p>
<ul>
<li>2022 में 20 और 22 जीएसएस के लिए टेंडर जारी</li>
<li>दोनों टेंडरों में एक ही फर्म ने लिया भाग</li>
<li>21 सितंबर 2023 को खोली गई फाइनेंशियल बिड</li>
<li>4 अक्टूबर 2023 को कमेटी बैठक में शर्तों में बदलाव</li>
<li>परियोजना लागत में 237 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी</li>
<li>एजी ऑडिट में 226 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च की पुष्टि</li>
<li>3.37 करोड़ रुपये की धरोहर राशि भी लौटाई गई</li>
<li>एसीबी ने पूर्व एमडी और अतिरिक्त मुख्य अभियंता पर केस दर्ज किया</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:11:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पब्लिक के पैसे से बने ऑक्सीजन प्लांटों में से अधिकतर पड़े बंद </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के बड़े अस्पतालों में लगाए गए आॅक्सीजन प्लांटों में अधिकतर के बंद रहने से आपातकालीन स्थिति में गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/most-of-the-oxygen-plants-built-with-public-money-are-closed/article-79312"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/public-k-pese-s-bne-oxygen-planto-me-s-adhiktar-bnd-pde...kota-news-25-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के बड़े अस्पतालों में कोरोना महामारी के दौरान नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। लेकिन अस्पतालों के रखरखाव में कमी के चलते उनमें से अधिकतर प्लांट बंद पड़े हैं। कोटा के लगभग सभी बड़े अस्पतालों में एक से दो प्लांट ही चल रहे हैं। बाकी प्लांट या तो खराब हैं या अस्पतालों के पास उन्हें चलाने की अनुमति नहीं है। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में आॅक्सीजन की जरूरत पड़ने पर मरीजों को गंभीर हालातों से गुजरना पड़ सकता है। </p>
<p><strong>एनएमसीएच में दो एसएसच में एक प्लांट चालू</strong><br />कोरोना महामारी के दौरान सबसे ज्यादा कोरोना से पीड़ित मरीजों को नवीन चिकित्सालय और सुपर स्पेशियलिस्ट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। जिसके चलते इन दोनों अस्पतालों में आॅक्सीजन प्लांटों का निर्माण किया गया था। उस दौरान एनएमसीएच में तीन आॅक्सीजन प्लांट और सुपर स्पेशियलिस्ट हॉस्पिटल में चार आॅक्सीजन प्लांट का निर्माण किया गया था। जहां एनएमसीएच के मौजूदा चार आॅक्सीजन प्लांटों में से दो और सुपर स्पेशियलिस्ट के छ: प्लांटों में से केवल एक प्लांट संचालित हैं। एनएमसीएच प्रशासन के अनुसार मौजूदा चार प्लांटों में से दो की अनुमति प्रशासन के पास है, वहीं बाकि दोनों प्लांट को चलाने की अनुमति के लिए पत्र लिखा हुआ है। वहीं एसएसएच के छ: में से बचे हुए पांच प्लांटों में से एक प्लांट खराब है वहीं बाकि को आवश्यकता पड़ने पर ही चलाने की योजना है।</p>
<p><strong>आपातकालीन स्थिति में हालात हो सकते हैं गंभीर</strong><br />कोटा के बड़े अस्पतालों में लगाए गए आॅक्सीजन प्लांटों में अधिकतर के बंद रहने से आपातकालीन स्थिति में गंभीर परिणाम हो सकते हैं। क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान भी आॅक्सीजन की कमी के चलते सैंकड़ों लोग गंभीर स्थिति में पहुंच गए थे और कई लोगों को जान तक गंवानी पड़ गई थी। जिसे देखते हुए ही सरकार ओर भामाशाहों की मदद से इन प्लांटों का निर्माण किया गया था। लेकिन देखरेख की कमी और अस्पताल प्रशासनों की लापरवाही के चलते कई प्लांट या तो चल नहीं रहे या उन्हें चलाने की अनुमति नहीं है।</p>
<p><strong>एमबीएस व जेके लोन में दो-दो प्लांट संचालित</strong><br />संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में आॅक्सीजन के सात प्लांट मौजूद हैं जिनमें से केवल दो प्लांट ही चालू अवस्था में हैं। वहीं एक प्लांट का कंप्रेसर खराब होने के चलते उसे बंद किया हुआ है। वहीं अन्य दो प्लांटों भी तकनीकी खामियों के चलते बंद पड़े हुए हैं जिनमें प्रत्येक की क्षमता 150-150 सिलेंडर की है। वहीं 150-150 सिलेंडर की क्षमता के दो प्लांटों को चलाने की अनुमति नहीं है। इसी तरह जेके लोन हॉस्पिटल में भी चार प्लांट मौजूद हैं जिनमें से केवल दो प्लांट ही संचालित हैं। बाकि दोनों प्लांटों को प्रशासन की ओर से बंद किया हुआ है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जितनी आवश्यकता है उसके अनुसार प्लांट चलाए हुए हैं, आवश्यकता पड़ने पर अन्य प्लांटों को भी चलाया जाएगा। बाकि दो प्लांट में से एक यूआईटी द्वारा और एक भामाशाह द्वारा दिया गया है। जिसके लिए कागजी कारवाई बाकि उसके लिए पत्र लिखा हुआ है।<br /><strong>- आरपी मीणा, अधीक्षक, नवीन चिकित्सालय, </strong></p>
<p>अस्पताल के अभी दो प्लांट चलाए हुए हैं साथ ही हमेशा तीन प्लांट रनिंग में रहते हैं, एक प्लांट का कंप्रेसर खराब है और बाकि में कुछ तकनीकी खामियां हैं जिन्हें आचार संहिता हटते ही ठीक करा लिया जाएगा। वहीं दो प्लांटों का अभी संचालन के लिए कागजी कारवाई बाकि है।<br /><strong>- धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 17:36:39 +0530</pubDate>
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