<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/medical-treatment/tag-46295" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Medical Treatment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/46295/rss</link>
                <description>Medical Treatment RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरसता नयागांव गुजरान: न पक्की सड़क, न सुरक्षित श्मशान घाट</title>
                                    <description><![CDATA[कीचड़ के कारण एंबुलेंस आना बंद, चारपाई पर मरीज ले जाने को मजबूर ग्रामीण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/nayagaon-gujran-deprived-of-basic-amenities-decades-after-independence--no-paved-roads--no-proper-cremation-ground/article-162872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)41.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। ग्राम पंचायत बेसार के अंतर्गत आने वाले नयागांव गुजरान में आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के दशकों बाद भी गांव में विकास कार्य धरातल पर नहीं पहुंच पाए हैं। पक्की सड़क के अभाव और श्मशान घाट की बदहाल स्थिति के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में आज तक एक भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। बारिश केमौसम में रास्ते कीचड़ और पानी से भर जाते हैं, आवागमन मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है, जिन्हें खराब रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क नहीं होने और जलभराव के कारण गांव तकएंबुलेंस और अन्य वाहन पहुंचना मुश्किल हो जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर बैठाकर कीचड़ भरे रास्तों से मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। इससे समय पर उपचार मिलना भी चुनौती बन जाता है।</p>
<p><strong>श्मशान घाट पर अतिक्रमण, सुविधाओं का अभाव</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि गांव्र के श्मशान घाट की भूमि पर अतिक्रमण होचुका है। इसके कारण अंतिम संस्कार जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने श्मशान घाट से अतिक्रमण हटाने और वहां टीन शेड सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन द्वारा आयोजित विभिन्न शिविरों मेंलिखित आवेदन देकर समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया है। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर भी कई बार मांग उठाई गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। नयागांव गुजरान के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द सेजल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, जलभराव की समस्या का समाधान किया जाए तथा श्मशान घाट से अतिक्रमण हटाकर वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें आज भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>हमारे गांव में एक पक्की सड़कतक नहीं बन पाई है। बारिश के दिनों में हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजना और खुद घर से बाहर निकलना दूभर हो जाता है।<br /><strong>- चौथमल गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>हमारे गांव में श्मशान घाट की जमीन पर भी अतिक्रमण हो चुका है। अपनों के अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील घड़ी में भी हमें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>-बबलू गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>हमने पंचायत से लेकर प्रशासनिक शिविरों तक कई बार लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन हर बार सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है।<br /><strong>- रनजीत गुर्जर,ग्रामीण</strong></p>
<p>रास्ते में कीचड़ और जलभराव के कारण गांव के भीतर एम्बुलेंस का आना तो दूर, किसी सामान्य वाहन का पहुंचना भी असंभव है। आपातकालीन स्थिति में बीमारों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना हमारी मजबूरी बन गया है।<br /><strong>- सोनू गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>स्कूली बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर इस कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। जरा सी चूक बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के लिए भारी पड़ सकती है। जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण करवाया जाए।<br /><strong>- हंसराज गुर्जर, ग्रामीण</strong></p>
<p>विकास के जितने भी दावे किए जाते हैं, वे सब नयागांव गुजरान आकर कागजी साबित हो जाते हैं। जल्द ही श्मशान घाट से अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।<br /><strong>- मुकेश, ग्रामीण</strong></p>
<p>श्मशान की भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में भी 5 लाख रुपए की सैंक्शन (स्वीकृति) निकाली गई थी, लेकिन प्रशासन द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका, जिससे वहां आज भी कीचड़ और वैसी ही स्थिति बनी हुई है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरपंच द्वारा पूर्व में ही प्रस्ताव लिया जा चुका है। आज इस संबंध में सेक्रेटरी से बात कर ली गई है और उन्होंने इस पर सैंक्शन (स्वीकृति) भी निकाल दी है। इस संबंध में आगे की कार्रवाई कर जल्द से जल्द मौके से अतिक्रमण हटवाया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।<br /><strong>-  मदन लाल वर्मा, सरपंच बेसार उपखंड खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/nayagaon-gujran-deprived-of-basic-amenities-decades-after-independence--no-paved-roads--no-proper-cremation-ground/article-162872</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/nayagaon-gujran-deprived-of-basic-amenities-decades-after-independence--no-paved-roads--no-proper-cremation-ground/article-162872</guid>
                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 16:44:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%29-%282%2941.png"                         length="1742621"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एआई और इंटरनेट दो धारी तलवार </title>
                                    <description><![CDATA[भारत में डॉक्टर्स की कमी बड़ा कारण, गूगल से पूछ कर हजारों खुद की कर रहे उपचार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ai-and-the-internet--a-double-edged-sword/article-158105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(3)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति द्वारा आयोजित मासिक परिचर्चा की श्रंखला में गुरूवार को एआई व इन्टरनेट स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समझने के लिए बहुत उपयोगी हो सकते हैं लेकिन इलाज तय करने के लिए उस पर कितना निर्भर हो सकते हैं ( हाउ मच टू रिलाई ओन इंटरनेट एन्ड एआई फॉर ट्रीटमेंट आफ एनी एइलमेंट) विषय पर आयोजित किया गया। इसमें गवर्नमेंट कॉलेज के् डाक्टर्स,आयुर्वेद, होम्योपैथ,वकील टेक्नोलॉजी से जुडे विशेषज्ञों ने भाग लिया। परिचर्चा में कहा गया कि  इलाज तय करने के लिए केवल इंटरनेट या एआई पर पूरी तरह निर्भर होना उचित नहीं है। आॅनलाइन उपलब्ध जानकारी सामान्य होती है, जबकि हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सा इतिहास और लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार इंटरनेट पर अधूरी, पुरानी या भ्रामक जानकारी भी मिल सकती है, जिससे अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है। डॉक्टर की शारीरिक जांच, परीक्षणों और चिकित्सकीय अनुभव का विकल्प नहीं है। इसलिए इंटरनेट और एआई को स्वास्थ्य जागरूकता तथा प्रारंभिक जानकारी के साधन के रूप में उपयोग करना चाहिए, जबकि सही निदान और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।<br />प्रस्तुत है टॉक शो के अंश...  </p>
<p><strong>AI</strong><br />- केवल दी गई जानकारी के आधार पर जवाब देता है।<br />-  इनकी प्रत्यक्ष जांच नहीं कर सकता।<br />- केवल लिखे या बताए गए लक्षणों को समझता है।    <br />- उपलब्ध डेटा और पैटर्न के आधार पर सुझाव देता है।  <br />- रिपोर्टों का सामान्य विश्लेषण कर सकता है।    <br />- उपचार लागू नहीं कर सकता।                        </p>
<p><strong>Doctor</strong><br />- मरीज की शारीरिक जांच कर सकता है।    <br />- नाड़ी, रक्तचाप, तापमान आदि स्वयं माप सकता है।    <br />- चेहरे के भाव, चलने-फिरने और व्यवहार का अवलोकन कर सकता है।    <br />- मेडिकल इतिहास और वर्तमान स्थिति को जोड़कर निर्णय लेता है।<br />- जांच रिपोर्टों की व्यावहारिक व्याख्या कर सकता है।<br />- आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार शुरू कर सकता है। </p>
<p><strong>एआई सहयोगी, पर टच  थैरेपी जरूरी</strong><br />समाज में जिस तरह का परिवर्तन हो रहा है। डॉक्टर भी उसी के अनुरूप स्वयं को ढाल रहे हैं। एआई के इस युग में जिस तरह की गम्भीर बीमारियां हो रही हैं उनका सही इलाज करने के लिए मशीनों का उपयोग जांच में किया जा रहा है। लेकिन एआई का मतलब कृत्रिम बुद्धिमता है उसे इंसान ने ही बनाया है। ऐसे में यह बीमारियों की जानकारी के लिए सहयोगी तो हो सकता है लेकिन डॉक्टर नहीं बन सकता। बीमारी का सही इलाज तो डॉक्टर मरीज व उनके लक्षण को देखकर ही कर सकते हैं। बीमारी के इलाज में यदि  हर कोई व्यक्ति एआई का उपयोग करने लगेगा तो उसे लाभ होने की जगह नुकसान होने की संभावना अधिक है। अमेरिका में बिना डॉक्टर के इलाज के दवाई नहीं मिलती। जबकि भारत में हर कोई एआई व गूगल से पूछकर ही  स्वयं बीमारियों का उपचार मेडिकल से दवाईयां लाकर कर रहे हैं। यह मरीज के लिए हानिकारक हो सकता है।  <br /><strong>- डॉ. एस.एन. गौतम, वरिष्ठ न्यूरो सर्जन गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>एआई जिसके लिए बना है वही करे उपयोग</strong><br />बदलते समय के साथ ही जिस तरह से तकनीकी युग आया है। उसमें इससे दूर नहीं रहा जा सकता। तकनीक व एआई का उपयोग जानकारी के लिए किया जाना तो अच्छा है। लेकिन इसका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में हर किसी के द्वारा किया जाना सही नहीं है। एआई जिसके लिए बना है यदि वही इसका उपयोग करेंगे तो उसका लाभ होगा। लेकिन गलत व्यक्ति द्वारा उसका उपयोग करने पर उससे नुकसान ही होगा। मसलन परमाणु सही हाथ में होता है तो उर्जा उत्पन्न करता है। गलत हाथों में वही विस्फोट भी करता है। अर्थात एआई का भी सही जगह पर उपयोग होना ठीक है। कई मरीज डॉक्टर के पास आने से पहले ही एआई से पूरी जानकारी लेकर आते हैं। ऐसे में उन्हें बीमारी के बारे में समझाना मुुश्किल होता है। कई बार वह  समझने को तैयार नहीं होत।  एआई जानकारी के लिए तो सही है लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में बीमारी के इलाज में डॉक्टर ही सही सलाह दे सकते हैं। <br /><strong>-डॉ. नीलेश जैन, प्राचार्य  गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong> एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा आते है</strong><br />मैं कोरोल पार्क में मेडिकल स्टोर का संचालन करती हूं। मेरे पास बहुत सी बार नीट के विद्यार्थी आते और बताते हैं कि हमे नींद नहीं आ रही है, गोली दे दो, स्टूडेंट उसके बारे में एआई पर सर्च करके खुद ही बोलते है कि यह गोली ही दो,  हम बहुुत सी बार उनको समझाते है।  लेकिन नहीं मानते है और एआई के हिसाब से वहां पढ़ाई के दौरान खुद ही इलाज के बारे में एआई से सलाह ले लेते है। एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा आते हैं। मेरा मानना है कि एआई  डॉक्टर और मरीज के बीच रिश्ता खत्म करने का काम कर रहा हैं। <br /><strong>-सीमा प्रजापति, मेडिकल स्टोर संचालिका जिला अध्यक्ष मानवाधिकार सहयोग संगठन </strong></p>
<p><strong> स्वास्थ्य के लिए एआई ठीक नहीं है</strong><br /> स्वास्थ्य के लिए एआई ठीक नहीं हैं। कई बार मरीज बिना डॉक्टर से परामर्श लिए गोलियां खा लेता है जिससे उनकी किडनी खराब होने की संभावना बनी रहती है। आमतौर पर देखा जाएं तो 60 साल के बाद इंसान में विभिन्न प्रकार के शारीरिक बदलाव आते है जिसमें कम सुनना, बार-बार किसी बात को बोलना, कम दिखाई देना सहित  अन्य बदलाव उसमें आते हैं। इस बारे में यदि आप एआई पर देखेंगे तो आपको विभिन्न प्रकार की बीमारी एआई दिखा देगा। पर ये लक्षण हर व्यक्ति में होते हैं, आयुर्वेद में भी साइट इफैक्ट होते हैं। आयुर्वेद में हर बीमारी  व इंसान के हिसाब से दवाई निर्धारित की जाती हैं। जो कि एआई नहीं कर सकता हैं।  हमारे पास सर्जरी,मेडिसन सहित अन्य के विद्यार्थी आते है जो कि एआई से जानकारी लेकर आते हैं पर उनको ये भी पता नहीं होता है कि इनका उपयोग कैसे करना हैं। रोगी को डॉक्टर से ही इलाज लेना चाहिए।  <br /><strong>- वैध नित्यानंद शर्मा, प्राचार्य राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय  </strong></p>
<p><strong>डाक्टर्स की कमी भी बड़ा कारण</strong><br />मेरा मानना है कि जब डॉक्टर के पास मरीज देखने का लोड़ अधिक होगा।  तब मरीज एआई का उपयोग करता हैं। और जब डॉक्टर पेशेंट के सवाल का जवाब नहीं दे पाता है तो मरीज एआई से बीमारी का समाधान सर्च करता है। एआई से यदि आप बीमारी के बारे में पूछते है तो वहां गलत जानकारी भी हो सकती है।  एआई एल्गोरिदम से चलता है। मरीज बार-बार एआई से पूछता है तो वहां कुछ भी बता सकता हैं। एआई पर  नेगेटिव कंटेंट ज्यादा वायरल होते हैं। एआई पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। <br /><strong>- तरनदीप कौर, कॉ फाउंडर एन्ड सीईओ आइक्रा, आई स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>जानकारी ले सकते हैं उपचार नहीं</strong><br />एआई व गूगल के जमाने में आज हर व्यक्ति डॉक्टर बन रहा है। छोटी हो या बड़ी बीमारी होने पर खुद ही इन तकनीक का उपयोग कर इलाज व दवाई तलाश कर रहे हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाईयां भी ले रहे हैं। जबकि एक दवाई का असर हर बीमारी में ऐसा जैसा नहीं हो सकता। हर व्यक्ति एआई का उपयोग कर स्यवं ही विशेषज्ञ बन रहा है।  एआई पर एलोपैथी से  होम्योपैथी व आयुर्वेदिक की जानकारी अधिक मिल रही है। इसमें कोई भी कुछ भी तथ्य डाल रहा है। इसमें साइड  इफेक्ट की संभावना कम है। जबकि डॉक्टर टच थैरेपी से मरीज का सही इलाज कर सकते हैं। एआई जानकारी दे सकता है सही इलाज नहीं कर सकता। <br /><strong>-महेश शारदा, इंजीनियर शारदा मेडिकल स्टोर</strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया के नुकसान भी और फायदे भी , सब बाजार का खेल</strong><br />एआई से स्वास्थ्य संबंधित प्रश्न पूछ सकते है पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। देखा जाए तो 2008 में एक साथ तीन चीजे बाजार में लॉंच हुई थी जिसमें बिटकॉइन सहित अन्य थी। एआई अभी मार्केट में आया है और इसको डवलप किया जा रहा हैं। जैसे की एक बार आप सोशल मीडिया पर किसी चीज के बारे में सर्च करेंगे तो आपको एफबी, इंस्ट्राग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया  पर वे विज्ञापन दिनभर आते रहेंगे। बहुत सी बार हम एआई पर हम स्वास्थ्य संबंधित रिपोर्ट डालकर पूछते है तो वहां हमें जानकारी देता हैं। इसी तरह से हम अपनी जानकारी धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर शेयर करते जाते हैं। जिससे हमारी जानकारी हम सोशल मीडिया पर परोस रहे हैं।  पहले तो एफबी सहित अन्य सोशल मीडिया व रील से पता चलता था। पर अब एआई से पता चल रहा है कि अब किस के घर में क्या हो रहा हैं। मेरा मानना है कि टीनऐजर के लिए सोशल मीडिया ब्लॉक करना चाहिए। <br /><strong>- संजय कुमार विजय,एडवोकेट व स्कूल डायरेक्टर </strong></p>
<p><strong>बिना जानकारी स्वास्थ्य पर एआई का उपयोग हानिकारक</strong><br />परिवर्तन समाज का नियम है। पिछले कुछ समय में तकनीक के क्षेत्र में काफी तेजी से परिवर्तन हुआ है।  इस परिवर्तन में तकनीक जिसके लिए बनी है वही इसका उपयोग करे तो लाभ होगा। एआई का उपयोग करके ही कृषि के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। एआई का उपयोग अलग-अलग कई क्षेत्रों में तो किया जा सकता है। लेकिन स्वास्थ्य पर इसका उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह से करना गलत है। एआई बीमारी के उपचार में उतनी सही जानकारी नहीं दे सकता जितनी एक डॉक्टर मरीज को देखकर दे सकते हैं। इसलिए इलाज में तो एआई का उपयोग करना गलत होगा।  <br /><strong>- आर्यन सिंह, एआई एन्ड स्मार्ट टेक्नॉलॉजी विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>इंटरनेट बुरा नहीं बस उपयोग कितना और कैसे  करें </strong><br />मेरे नजरिया से एआई बुरा नहीं है। यह हमनें कई तरह की जानकारी देता है। हमें प्रारंभिक सूचना और जानकारी मुहैया कराता है। लेकिन मामला निर्भरता का है। विश्वास करने का है। कई बार तकनीक पर निर्भरता रोग के लेवल तक पहुंच जाती है। एआई कीवर्ड के हिसाब से सूचना देता है। सूचना लेने या जानकारी के बाद डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए। घर पर आॅक्सीमीटर से यदि आप प्लस नाप लें और ब्लड़ की आॅक्सीजन का पता लगा ले पर अंत में डॉ. से जरूर सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की तरह  एआई इलाज नहीं कर सकता हैं। मात्र आपके कीवर्ड से आपको सलाह दे सकता है। <br /><strong>-जनार्दन राय, रिटायर्ड कमांडेंट बीएसएफ </strong></p>
<p><strong> गूगल व एआई का खिलाड़ी अधिक कर रहे उपयोग</strong><br />एआई व गूगल का उपयोग आज हर क्षेत्र में जानकारी के लिए तो किया ही जा रहा है। अब तो लोग इससे अपनी बीमारियों का भी इलाज करने लगे हैं। खिलाड़ी चाहे वह किसी भी खेल का है उसे चोट लगने या बीमार होने पर वह एआई व गूगल से ही उसका उपचार व दवाई तलाशकर उसका उपयोग कर रहा है। जिससे सबसे अधिक स्ट्रॉराइड का उपयोग किया जा रहा है। यह खिलाड़ी व उनके शरीर के लिए नुकसान दायक है। ऐसे में कई खिलाड़ी तत्काल तो राहत पा रहे हैं लेकिन भविष्य में यह उनके लिए हानिकारक हो रहा है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बीमारी या चोट में इलाज और दवाई तो डॉक्टर की सलाह से ही लेना बेहतर है। <br /><strong>-अशोक औदिच्य,सचिव बॉडी बिल्डिंग</strong></p>
<p><strong>इंटरनेट पर  गलत या अधूरी जानकारी हो सकती है</strong><br />मान लीजिए किसी व्यक्ति को साधारण सिरदर्द हुआ। वह इंटरनेट पर खोज करता है। वह माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर या अन्य गंभीर बीमारियों की जानकारी देखकर  डर जाता है और बार-बार खोज करने लगता है। इससे उसकी चिंता और बढ़ जाती है। एआई  बीमारी के बारे में सामान्य जानकारी देने, संभावित कारणों को समझाने के लिए,दवाओं, जांचों और रिपोर्टों को समझाने के लिए तो ठीक है लेकिन एआई आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री नहीं जानता, बॉडी की  जांच नहीं कर सकता, कई बीमारियों के लक्षण एक जैसे होते हैं। इंटरनेट पर गलत या अधूरी जानकारी हो सकती है। कभी-कभी गलत निष्कर्ष भी दे सकता है। ऐसे में डाक्टर की सलाह पर ही पूरा भरोसा करना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. केवल कृष्ण डंग, वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता एआई</strong><br />एआई का उपयोग आज की आवश्यकता है। इससे बिना नहीं रहा जा सकता। लेकिन हर जगह इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिना डॉक्टर की सलाह के एआई का उपयोग करना नुकसान दायक हो सकता है। हर बीमारी के कई इलाज हो सकते हैं लेकिन हर इलाज हर व्यक्ति के लिए सही हो यह जरूरी नही हैं। ऐसे में जो काम डॉक्टर का है वह डॉक्टर को ही करने देना चाहिए। एआई सलाह व जानकारी दे सकता है लेकिन डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता। <br /><strong>- चेतन सैनी, निदेशकसुमंगलम ग्रुप</strong></p>
<p><strong>इलाज में विश्वसनीय तो डॉक्टर ही है</strong><br />एआई सूचनाओं का भंडार है।  एआई का उपयोग करके जानकारी प्राप्त की जा सकती है। वहां एक बीमारी के कई इलाज हो सकते हैं। लेकिन वह इलाज हर बीमारी व व्यक्ति पर अलग-अलग काम कर सकता है। ऐसे में एआई का उपयोग बीमारी के इलाज में व्यक्ति को स्वयं नहीं करना चाहिए। साइब्रर कांड्रीरिया की स्थिति बहुत खतरनाक है। इससे एंजाइटी बढ़ती है। जो रोग का रूप ले लेती है। एआई वही बताता है जो उसमें फीड किया हुआ है उसका अपना कोई निर्णय नहीं होता है। बीमारी में डॉक्टर का इलाज ही सही रहता है। इलाज में डॉक्टर ही विश्वसनीय है। <br /><strong>-आशुतोष माथुरिया, प्रिंसीपल, महात्मा गांधी मल्टीपरपज स्कूल गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong>विकसित देश के लिए तकनीकी  जरूरी</strong><br />अभी की युवा पीढ़ी एआई का उपयोग कर रही हैं और हेल्थ सहित अन्य विभिन्न मामलों में एआई से सलाह ले रही है जो कि गलत हैं। वर्मा के अनुसार इंसान कितनी भी तरक्की कर ले पर उसको अपनी जड़े नहीं छोड़नी चाहिए। यदि आजकल के युवा तकनीकी पर निर्भर रहेंगे तो दिक्कत आएंगी। अब रोबोटिक सर्जरी हो रही हैं। यदि किसी की तबीयत खराब है तो वहां एआई से सलाह लेने के बजाय डॉक्टर के पास जावे और इलाज लेंवे। वहीं हम अभी   इसी फील्ड़ में कार्य कर रहे है संभवतया 2027 तक हम जो डॉक्टर ओपीडी मे मरीज देखते है उनके लिए भी कुछ तकनीकी लेकर आ रहे हैं। उदाहरण देकर समझाया कि हमारे साथी को पीलिया के लक्षण दिखा रहे थे हमने जब डॉक्टर को दिखाया तो वहां अलग ही बीमारी निकाली। फिर हमने डॉक्टर की सलाह से इलाज करवाया। वहीं इसमें पारिवारिक संस्कार भी  महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तकनीक का सहारा लेमना चाहिए। तभी हम विकास कर सकेंगे। लेकिन स्वास्थ्य  संबंधित मामलों में केवल चेट जीपीटी या इंटरनेट पर ही भरोसा करना नुसान पहुंचा सकता है। <br /><strong>-जितेंद्र वर्मा, स्टार्टअप आर्किटेक्ट एन्ड प्रोजेक्ट राइटर(एआई)  </strong></p>
<p><strong>आधी-अधूरी जानकारी में खुद ही उलझ जाते हैं</strong><br />बच्चे आज कल घरवालों से बात नहीं करते और घर वाले भी बच्चों से सीधे संपर्क में नहीं रहते है। जिससे अभिभावक  बच्चों के बारे में समझ नहीं पाते और उनकी समस्याओं को भी नहीं समझ पाते।  बाद में डॉक्टरों से समाधान पूछते हैं। उसके बाद एआई पर समाधान पूछने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचते है और अपना अनुभव बताते हैं। जिसके बाद एआई से परामर्श लेते है जो मरीज को उल्टा उलझा देता हैं। अंत में डॉक्टर के पास जाते हैं और एआई से आधी-अधूरी जानकारी लेकर लोग खुद ही उलझ जाते है। <br /><strong>-वंदना योगी, वाईस प्रिंसिपल गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल वल्लभनगर</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ai-and-the-internet--a-double-edged-sword/article-158105</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ai-and-the-internet--a-double-edged-sword/article-158105</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:02:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/1200-x-600-px%29-%283%2912.png"                         length="1574522"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ल्ड डायबिटीज डे: मोबाइल लैपटॉप बना रहा डायबिटीज की रील, हर चौथे आदमी को मधुमेह, युवाओं और महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-diabetes-day--mobile-and-laptops-are-becoming-the-cause-of-diabetes--with-one-in-four-people-having-diabetes--the-risk-is-increasing-rapidly-among-youth-and-women/article-132403"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(40).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके।  हमारे शरीर में तनाव डायबिटीज का छिपा हुआ दुश्मन है। जब हम तनाव में रहते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन छोड़ता है जो ब्लड शुगर स्तर को बढ़ा देता है। चिकित्सकों का कहना है कि डायबिटीज का कोई स्थायी उपचार नहीं है, लेकिन एक संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p><strong>महिलाओं में भी डायबिटीज का खतरा</strong><br />प्रेग्नेंट महिलाओं में भी डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं में 10 से 14 प्रतिशत तक मामले सामने आ रहे हैं। अगर ब्लड शुगर कंट्रोल में न हो, तो गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर पड़ता है और प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है।  डिजिटलाइजेशन के इस दौर में मोटापा और बढ़ता स्क्रीन टाइम भी बड़ी चुनौती बन गए हैं। लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर पर रहने से शारीरिक गतिविधियां घट जाती हैं, खानपान बिगड़ता है और वजन बढ़ने लगता है। यही मोटापा आगे चलकर डायबिटीज का बड़ा कारण बनता है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />   <strong>     टाइप-1                                     टाइप-2</strong><br /><strong>            ओपीडी        आइपीडी     ओपीडी     आइपीडी</strong><br />2024        2458          99                  7701      349<br />2025        1841          33                  5696      188<br />     <strong>   टाइप-1                                     टाइप-2</strong><br /><strong>2025         ओपीडी     आइपीडी     ओपीडी     आइपीडी</strong><br />अगस्त          273          10                   838    37<br />सितम्बर      295           5                   221    19<br />अक्टूबर     257           -                   799    15<br />[स्रोत एमबीएस अस्पताल कोटा]</p>
<p><strong>ब्लड शुगर व बीपी की जांच जरूरी</strong><br />डॉ. नरेंद्र नागर, सीएमएचओ, कोटा के मार्गदर्शन में ओपीडी में आने वाले 30 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों का रक्तचाप और शुगर नियंत्रित किया जाता है। मधुमेह एक गैर-संचारी रोग है, जिसे जीवनशैली में बदलाव और चिकित्सक के उचित उपचार से नियंत्रित किया जा सकता है। वजन मापने वाले पैमाने (बीएमआई) पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिक वजन से मोटापा बढ़ता है और अंतत: उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां होती हैं।<br /><strong>- डॉ. यावर खान, प्रभारी, यूपीएचसी, केशवपुरा</strong></p>
<p><strong>हार्ट अटैक व लकवे का भी जोखिम </strong><br />डायबिटीज एक गंभीर गैर-संचारी रोग है, जिसके दो प्रमुख प्रकार होते हैं—टाइप-1 व टाइप-2, टाइप-2 डायबिटीज प्राय: मोटापा, फेमिली हिस्ट्री और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण होती है, जबकि टाइप-1 डायबिटीज अधिकतर बच्चों में पाई जाती है, जिसमें इंसुलिन लेना आवश्यक होता है। पारिवारिक हिस्ट्री से रोगी को यह पहचानना जरूरी है कि उसे कौन-सा प्रकार है, ताकि सही प्रबंधन किया जा सके। यदि पांच से दस साल तक डायबिटीज नियंत्रण में नहीं रहे, तो आंखों का परदा, किडनी और पैरों की नसें खराब हो सकती हैं। इसके अलावा हार्ट अटैक और लकवे का जोखिम भी बढ़ जाता है। <br /><strong>- डॉ नितेश कुमार बौद्ध, विभागाध्यक्ष,एंडोक्रिनोलॉजी, एनएमसीएच</strong></p>
<p><strong>अपनाएं स्वस्थ जीवनशैली </strong><br />मधुमेह से बचाव और नियंत्रण के लिए सबसे जरूरी है एक संतुलित जीवनशैली अपनाना। इसके लिए मीठे और तैलीय भोजन से परहेज करते हुए आहार में फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या साइकिल चलाएं। तनाव दूर रखने के लिए ध्यान, प्राणायाम और सकारात्मक सोच अपनाएं। नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करवाते रहें और धूम्रपान व मदिरा से दूरी बनाए रखें। याद रखें-स्वस्थ जीवनशैली ही मधुमेह पर नियंत्रण की सबसे बड़ी दवा है।<br /><strong>- डॉ धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p><strong>स्क्रीन टाइम सीमित करें, पर्याप्त नींद जरूरी</strong><br />हर व्यक्ति को 6 से 7 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। सोने-जागने का समय नियमित रखें और योग, ध्यान, संगीत, और परिवार के साथ समय बिताना तनाव कम करने के प्राकृतिक उपाय हैं। सकारात्मक सोच और नियमित दिनचर्या डायबिटीज नियंत्रण में मानसिक रूप से भी सहायक होती है। बच्चों में डायबिटीज से बचाव के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करें, उन्हें बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें और पौष्टिक भोजन दें। सोते समय भगवान का स्मरण जरूर करें। वहीं खाना दिन में चार बार खाएं या उसकी मात्रा कम रखें। ये आदतें न सिर्फ ब्लड शुगर को नियंत्रित रखेंगी बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाएंगी।<br /><strong>- डॉ. सुधीर उपाध्याय, वरिष्ठ फिजिशियन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-diabetes-day--mobile-and-laptops-are-becoming-the-cause-of-diabetes--with-one-in-four-people-having-diabetes--the-risk-is-increasing-rapidly-among-youth-and-women/article-132403</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-diabetes-day--mobile-and-laptops-are-becoming-the-cause-of-diabetes--with-one-in-four-people-having-diabetes--the-risk-is-increasing-rapidly-among-youth-and-women/article-132403</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 15:56:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/11-%2840%29.png"                         length="782541"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एआई से चिकित्सा उपचार में आई नई दक्षता : नवाचार और शोध समय की आवश्यकता, बिरला ने कहा- शोध और प्रतिबद्धता से ही बनेगा स्वस्थ भारत </title>
                                    <description><![CDATA[ओम बिरला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नैनो साइंस जैसे क्षेत्रों से चिकित्सा अनुसंधान और उपचार में नई दक्षता आई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-efficiency-innovation-and-research-time-in-medical-treatment-from/article-119565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/om-birla.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नैनो साइंस जैसे क्षेत्रों से चिकित्सा अनुसंधान और उपचार में नई दक्षता आई है। बिरला ने इन्नोवेटिव फिजिसियन फोरम के 7वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के बाद कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नैनो साइंस जैसे क्षेत्रों से चिकित्सा अनुसंधान और उपचार में नयी दक्षता आई है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार और शोध समय की आवश्यकता है। भारत की चिकित्सा प्रणाली गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और प्रामाणिक है, जिसकी वजह से मेडिकल टूरिज्म में बढ़ोतरी हो रही है।</p>
<p>लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत फार्मा और चिकित्सा अनुसंधान में वैश्विक हब के रूप में उभर रहा है। चिकित्सा पेशेवरों को दी बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि शोध और प्रतिबद्धता से ही स्वस्थ भारत बनेगा। सम्मेलन में नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया और ब्रिटेन के चिकित्सकीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/new-efficiency-innovation-and-research-time-in-medical-treatment-from/article-119565</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/new-efficiency-innovation-and-research-time-in-medical-treatment-from/article-119565</guid>
                <pubDate>Sat, 05 Jul 2025 17:20:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-06/om-birla.jpg"                         length="97026"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिकित्सा उपचार ने बढ़ाया सफलता की ओर एक और कदम : कोरियाई वैज्ञानिकों ने खोजा ट्यूमर कोशिकाओं को सामान्य कोशिकाओं में बदलने वाला अनडू बटन </title>
                                    <description><![CDATA[कोरियाई वैज्ञानिकों ने चिकित्सा के क्षेत्र में नई ऊंचाई हासिल की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/medical-treatment-extended-another-step-towards-success-korean-scientists-discovered/article-110498"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(4)19.png" alt=""></a><br /><p>कोरिया। कोरियाई वैज्ञानिकों ने चिकित्सा के क्षेत्र में नई ऊंचाई हासिल की है। शोधकर्ताओं ने एक ऐसा तरीका खोज निकाला है जिससे कैंसर को उलटने और ट्यूमर कोशिकाओं को वापस सामान्य करा जा सकता है। कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAIST) के शोधकर्ताओं ने कैंसर के इलाज में एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, जिन्होंने एक ऐसी तकनीक बनाई है, जिसके जरिए कोलन कैंसर कोशिकाओं को बिना मारे स्वस्थ कोशिकाओं में बदला जा सकता है। </p>
<p>बायो और ब्रेन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर क्वांग-ह्यून इस नए दृष्टिकोण का नेतृत्व कर रहे हैं, जो पारंपरिक कैंसर उपचारों से एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर गंभीर दुष्प्रभाव और पुनरावृत्ति जोखिम होते हैं।</p>
<p>कैंसर कोशिकाओं की स्वस्थ कोशिकाओं में वापस बदलने की क्षमता एक उल्लेखनीय घटना है। चो ने कहा कि यह अध्ययन दर्शाता है कि इस तरह के परिवर्तन को व्यवस्थित रूप से प्रेरित करना संभव है।</p>
<p>शोधकर्ताओं ने शोधपत्र के परिचय में बताया है कि हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा, स्तन कैंसर और तीव्र माइलॉयड ल्यूकेमिया पर किए गए अध्ययनों ने यह प्रदर्शित किया है कि ट्यूमर कोशिकाओं को विभेदित या ट्रांस-विभेदित करने के लिए प्रोत्साहित करके इस उलटफेर को पूरा किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/medical-treatment-extended-another-step-towards-success-korean-scientists-discovered/article-110498</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/medical-treatment-extended-another-step-towards-success-korean-scientists-discovered/article-110498</guid>
                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 11:00:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-04/257rtrer-%284%2919.png"                         length="432824"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मियों में पानी-बिजली और चिकित्सा सुविधा को लेकर सरकार गंभीर : पंत</title>
                                    <description><![CDATA[पंत ने कहा है कि गर्मियों के दौरान बड़े अधिकारी व्यवस्थाओं का फील्ड में जाकर निरीक्षण करेंगे और तमाम सरकारी मशीनरी आमजन को सुविधाओं के बारे में अवगत कराएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-is-serious-about-water-electricity-and-medical-treatment-in/article-79332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/6633-copy59.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में तेज गर्मी के चलते मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार आमजन को पानी, बिजली और चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए गंभीर है। मुख्य सचिव सुधांश पंत ने वीसी के जरिए सभी जिला कलेक्टरों को गर्मियों में आमजन को पानी, बिजली और चिकित्सा सुविधा में किसी तरह की कोताही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>पंत ने कहा कि गर्मियों के दौरान बड़े अधिकारी व्यवस्थाओं का फील्ड में निरीक्षण करेंगे और तमाम सरकारी मशीनरी आमजन को सुविधाओं के बारे में अवगत कराएगी। गत दिनों मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस संबंध में सीएस से फीडबैक लेकर आम जन को गर्मियों में किसी तरह की परेशानी नहीं होने संबंधित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-is-serious-about-water-electricity-and-medical-treatment-in/article-79332</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-is-serious-about-water-electricity-and-medical-treatment-in/article-79332</guid>
                <pubDate>Sat, 25 May 2024 18:53:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/6633-copy59.jpg"                         length="133458"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        