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                <title>Indian Navy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ तारागिरी युद्धपोत : राजनाथ सिंह ने कहा-मजबूत और सक्षम नौसेना समय की आवश्यकता, ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत</title>
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                        <![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को नौसेना को समर्पित किया। ब्रह्मोस मिसाइल और उन्नत रडार से लैस यह युद्धपोत 75% स्वदेशी सामग्री से बना है। राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताते हुए समुद्री मार्गों और डिजिटल केबलों की सुरक्षा के लिए नौसेना को अनिवार्य बताया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taragiri-warship-joins-naval-fleet-rajnath-singh-said-strong/article-149027"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnatha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मजबूत और सक्षम नौसेना को समय की जरूरत बताते हुए कहा है कि भारतीय नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, 'चोक पॉइंट्स' और राष्ट्रीय हितों से से जुड़े डिजिटल ढांचों की सुरक्षा कर रही है जिससे भारत जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में पहचान बना रहा है। प्रोजेक्ट 17 ए श्रेणी के चौथे अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में श्री सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। आधुनिक नौसैनिक जहाज निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण यह नवीनतम स्टील्थ फ्रिगेट, लगभग 6,670 टन के वजन के साथ, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सहयोग से बहु-भूमिका अभियानों के लिए निर्मित किया गया है। यह उन्नत स्टील्थ तकनीक का उपयोग करता है, जिससे इसकी रडार पहचान क्षमता काफी कम हो जाती है और इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घातक बढ़त मिलती है। पचहत्तर प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और कम समय में निर्मित आईएनएस तारागिरी भारत की जहाज निर्माण क्षमता और मजबूत सार्वजनिक-निजी सहयोग का उदाहरण है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आईएनएस तारागिरी को केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और सशक्त नौसैनिक शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, " यह जहाज उच्च गति से संचालित हो सकता है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इसमें ऐसे तंत्र लगे हैं जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत जवाब दे सकते हैं। इसमें आधुनिक रडार, सोनार और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल प्रणालियाँ तथा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं, जो इसकी क्षमता को और बढ़ाती हैं। उच्च तीव्रता वाले युद्ध से लेकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोधी अभियान, तटीय निगरानी और मानवीय मिशनों तक, यह हर भूमिका में पूरी तरह सक्षम है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक है और जो तीन ओर से समुद्र से घिरा है, वह अपने विकास को समुद्र से अलग नहीं देख सकता। उन्होंने कहा कि देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और ऊर्जा सुरक्षा भी समुद्र पर निर्भर है, इसलिए एक मजबूत और सक्षम नौसेना का निर्माण विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। समुद्री क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चौबीसों घंटे अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। उन्होंने कहा, " "समुद्र के विशाल क्षेत्र में कई संवेदनशील बिंदु हैं, जहाँ हमारी नौसेना वस्तुओं के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय रहती है। जब भी तनाव बढ़ता है, भारतीय नौसेना व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि दुनिया भर में अपने नागरिकों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। यही क्षमता भारत को एक जिम्मेदार और सशक्त समुद्री शक्ति बनाती है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में विश्व का अधिकांश डेटा समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों से गुजरता है और इनमें किसी भी प्रकार की क्षति वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य उन्मुख ढांचे में देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें केवल अपनी तटरेखा की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, संकरे मार्गों और डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए, जो हमारे राष्ट्रीय हितों से जुड़ी हैं। भारतीय नौसेना इन सभी प्रयासों में सक्रिय है। आईएनएस तारागिरी जैसे उन्नत जहाजों का निर्माण और तैनाती पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि की गारंटी है।"</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता, भारतीय नौसेना हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ी रहती है और "आईएनएस तारागिरी हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।" सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कि भारतीय नौसेना को दुनिया की सबसे मजबूत नौसेनाओं में शामिल किया जाएगा, रक्षा मंत्री ने कहा , "आज हम केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी जगह बना रहे हैं। डिजाइन से लेकर अंतिम तैनाती तक हर चरण में भारत की भागीदारी है। आईएनएस तारागिरी इसी दृष्टि का प्रतीक है।"</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:02 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>आज समुद्र में उतरेगा भारत का आईएनएस अंजदीप, दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढ-ढूंढकर करेगा तबाह</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारतीय नौसेना ने 27 फरवरी को चेन्नई में अत्याधुनिक आईएनएस अंजदीप को कमीशन किया। स्वदेशी युद्धपोत को विशेष परिस्थितियों के लिए किया गया डिजाइन। 'डॉल्फिन हंटर' के नाम से है मशहूर। दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने व नष्ट करने में सक्षम।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/indias-ins-anjadeep-will-enter-the-sea-today-and-will/article-144794"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/dolfin-hunter.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय नौसेना तटीय सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में 27 फरवरी  को चेन्नई बंदरगाह पर डॉल्फिन हंटर पोत आईएनएस अंजदीप को तैनात करने जा रही है। यह पोत एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना के तहत बनाए जा रहे 8 पोतों में से तीसरा है। समुद्र में भारत की ताकत और बढ़ जाएगी। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स की ओर से निर्मित अंजदीप एक अत्याधुनिक युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से तटीय और उथले जल क्षेत्रों में परिचालन की चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p><strong>क्या है खासियत?</strong></p>
<p>यह पोत डॉल्फिन हंटर के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऐसे क्षेत्र देश की समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी शुक्रवार को यहां आईएनएस अंजदीप के कमीशनिंग समारोह में भाग लेंगे।</p>
<p><strong>अंजदीप नाम कैसे रखा गया?</strong></p>
<p>बता दें कि अंजदीप का नाम कर्नाटक के कारवार तट (अरब सागर) के निकट स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना की भारत के व्यापक समुद्री हितों की सुरक्षा के साथ-साथ तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों की निगरानी तथा रक्षा क्षमता और मजबूत होगी। पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) भूमिका के अलावा यह पोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों तथा खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने में भी सक्षम है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 12:29:50 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>MI-17 हेलीकॉप्टरों के हवाई प्रदर्शन, वीरता पुरस्कार विजेताओं के साथ 77वें गणतंत्र दिवस का आगाज</title>
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                        <![CDATA[77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर ‘ध्वज’ हवाई फॉर्मेशन का शानदार प्रदर्शन हुआ। एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने तिरंगा और तीनों सेनाओं के ध्वज लहराए।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/77th-republic-day-begins-with-gallantry-award-winners-in-aerial/article-140886"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/air.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राजधानी में कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य आगाज 'ध्वज' फॉर्मेशन के शानदार हवाई प्रदर्शन के साथ हुआ। 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 वी4 हेलीकॉप्टरों ने उल्टे 'वाई' के आकार में उड़ान भरते हुए आकाश में तिरंगा और तीनों सेनाओं के ध्वज लहराए।</p>
<p>इस विशेष फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत ने किया, जो राष्ट्रीय ध्वज लेकर चल रहे थे। उनके साथ डिप्टी फॉर्मेशन लीडर विंग कमांडर आशुतोष खंडूरी ने भारतीय सेना का ध्वज, विंग कमांडर अभिषेक मल्होत्रा ने भारतीय नौसेना और विंग कमांडर अभिषेक शुक्ला ने भारतीय वायु सेना का ध्वज थाम रखा था।</p>
<p>गणतंत्र दिवस परेड का नेतृत्व परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार, जनरल ऑफिसर कमांडिंग (दिल्ली क्षेत्र) ने संभाली। उनके साथ डिप्टी परेड कमांडर मेजर जनरल नवराज ढिल्लों, चीफ ऑफ स्टाफ (दिल्ली क्षेत्र मुख्यालय) मौजूद थे। परेड की परंपरा के अनुसार, परेड कमांडर के पीछे देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार विजेता चल रहे थे। इनमें परमवीर चक्र और अशोक चक्र से सम्मानित सैन्य अधिकारी और जवान शामिल थे।</p>
<p>परमवीर चक्र विजेताओं में सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव पीवीसी और सूबेदार मेजर संजय कुमार पीवीसी ने गौरव के साथ उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं अशोक चक्र विजेताओं में मेजर जनरल सी.ए. पीठावालिया और कर्नल डी. श्रीराम कुमार शामिल थे, जिनका राष्ट्र ने तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ स्वागत किया।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jan 2026 14:22:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: विकास, सुरक्षा और विवाद, रणनीतिक ताकत बनाम पर्यावरण की चिंता</title>
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                        <![CDATA[ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट भारत की समुद्री रणनीति को मजबूती देगा। यह व्यापार, सुरक्षा और हिंद-प्रशांत दृष्टि के लिए अहम है, हालांकि पर्यावरण व आदिवासी प्रभावों पर संतुलन जरूरी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/great-nicobar-project-development-security-and-controversy-strategic-strength-versus/article-140841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(23).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर । ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट को नीति आयोग ने 2021 में एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर योजना के रूप में आगे बढ़ाया। इसके तहत इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट, आधुनिक टाउनशिप और गैस-सोलर आधारित पावर प्लांट विकसित किए जाने हैं। इस प्रोजेक्ट को अंडमान एंड निकोबार आइलैंड्स इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लागू कर रहा है। ऊपरी तौर पर यह एक आर्थिक विकास परियोजना दिखती है, लेकिन रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह एक डुअल यूज प्रोजेक्ट है-यानी नागरिक सुविधाओं के साथ-साथ इसका सैन्य उपयोग भी संभव है। शांति के समय यह प्रोजेक्ट व्यापार बढ़ाएगा और संकट के समय सैन्य बढ़त देगा। ग्रेट निकोबार की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए बेहद अहम है। यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक है। भारत का करीब 60% समुद्री व्यापार और चीन का लगभग 80% ऊर्जा व व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है। </p>
<p><strong>संतुलन की तलाश</strong></p>
<p>ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की समुद्री रणनीति और हिंद-प्रशांत विजन का अहम हिस्सा है। यह देश की सुरक्षा, व्यापार और वैश्विक कूटनीति को मजबूती दे सकता है। लेकिन साथ ही, इतने नाजुक पर्यावरण और आदिवासी समाज की कीमत पर विकास करना दीर्घकाल में नुकसानदेह साबित हो सकता है। जरूरत है पारदर्शी निर्णय, वैज्ञानिक पर्यावरण प्रबंधन और स्थानीय समुदायों को साथ लेकर चलने की। तभी ग्रेट निकोबार सच में भारत की रणनीतिक ताकत भी बनेगा और प्राकृतिक धरोहर भी बची रहेगी।</p>
<p><strong>पर्यावरण को लेकर क्या गलत या बढ़ा-चढ़ाकर कहा जा रहा है?</strong></p>
<p>कुछ बातें जरूरत से ज्यादा सरलीकृत या गलत तरीके से पेश की जा रही हैं:<br />पूरा द्वीप खत्म हो जाएगा-असल में विकास द्वीप के सीमित हिस्से तक केंद्रित है, पूरा ग्रेट निकोबार नहीं।<br />कोई पर्यावरणीय अध्ययन नहीं हुआ-पर्यावरण प्रभाव आकलन किया गया है, हालांकि इसकी गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल जरूर हैं।<br />सिर्फ सैन्य प्रोजेक्ट है-यह पूरी तरह सैन्य नहीं, बल्कि नागरिक-सैन्य मिश्रित (डुअल यूज) परियोजना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि असली मुद्दा विकास बनाम पर्यावरण नहीं, बल्कि कैसे विकास किया जाए है।</p>
<p><strong>ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट क्या है?</strong></p>
<p>ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट से भारत की ना सिर्फ सिंगापुर और कोलंबो पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी, बल्कि मलक्का, सुंडा और लोम्बोक जलडमरूमध्य में हमारी सर्विलांस काफी ज्यादा मजबूत हो जाएगी। मलक्का, ये वो संकरा समुद्री रास्ता है, जिसे चीन सबसे ज्यादा डरता है। भारत अंडमान-निकोबार से युद्ध के समय चीन के सप्लाई चेन को ब्लॉक कर सकता है, जिससे चीन का करीब 80 प्रतिशत कारोबार ही ठप पड़ जाएगा और इसीलिए चीन इस प्रोजेक्ट से खौफजदा है। अंडमान और निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से मलक्का स्ट्रेट से मलक्का स्ट्रेट सिर्फ 500-600 किलोमीटर दूर है। जबकि अंडमान-निकोबार का सबसे दक्षिणी छोर इंदिरा पॉइंट, जो ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित है, मलक्का स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के बेहद करीब है। यहां से इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप की दूरी सिर्फ 140-160 किलोमीटर है। जबकि, ग्रेट निकोबार से मलक्का स्ट्रेट की मुख्य शिपिंग लेन सिर्फ 75-80 किलोमीटर दूर है। </p>
<p><strong>कितना एरिया प्रभावित होगा?</strong></p>
<p>ग्रेट निकोबार द्वीप का कुल क्षेत्रफल: लगभग 1,045 वर्ग किलोमीटर<br />प्रोजेक्ट से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र: करीब 130-160 वर्ग किलोमीटर<br />(इसमें पोर्ट, एयरपोर्ट, टाउनशिप, पावर प्लांट और उससे जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है)<br />यानी कुल द्वीप का लगभग 12-15% हिस्सा<br />भारत के दूसरे इलाकों से तुलना करें तो यह चंडीगढ़ शहर के कुल क्षेत्रफल: 114 वर्ग किलोमीेटर से थोड़ा सा बड़ा है। <br />वहीं वहां से कटने वाले जंगल की बात करें तो वह अरावली के कई छोटे संरक्षित वन क्षेत्रों को मिलाकर जितना एरिया कवर होता है उतना ही जंगल कटेगा। अगर 150 वर्ग किलोमीटर में जंगल कटता है। आसपास दूसरे जंगल, आबादी, सड़कें, विकल्प मौजूद होते हैं, जो इकोसिस्टम को बनाए रखने में मदद करते हैं। </p>
<p><strong>पर्यावरण पर संभावित प्रभाव</strong></p>
<p>ग्रेट निकोबार द्वीप जैव विविधता के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यहां घने उष्णकटिबंधीय वर्षावन, मैंग्रोव, कोरल रीफ और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। प्रस्तावित विकास से कुछ गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव सामने आ सकते हैं।</p>
<p>वनों की कटाई: हजारों हेक्टेयर जंगल साफ होने से जैव विविधता को नुकसान।<br />वन्यजीवों पर असर: निकोबार मेगापोड जैसे स्थानिक (एंडेमिक) पक्षियों और समुद्री कछुओं के आवास खतरे में।<br />आदिवासी जीवन: शॉम्पेन और निकोबारी आदिवासी समुदायों की आजीविका और सांस्कृतिक जीवन पर असर।<br />भूकंपीय जोखिम: यह इलाका भूकंप और सुनामी के लिहाज से संवेदनशील है, जिससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठते हैं।</p>
<p><strong>प्रोजेक्ट को रोकने के लिए क्या दलील दी जा रही?</strong></p>
<p>इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिए द्वीपसमूह की इकोलॉजिकल कमजोरी और जीएनआई प्रोजेक्ट का पर्यावरण और स्थानीय आदिवासी समुदाय पर पड़ने वाले प्रभाव को उठाया जाता है। इन्हें मुद्दा बनाकर मुकदमेबाजी हो सकती है, पर्यावरण विद हंगामा मचा सकते हैं, ऐसे संगठन अंतर्राष्ट्रीय जांच की मांग कर सकते हैं, ताकि बाहरी शक्तियों को इस क्षेत्र में दखल देने का रास्ता खुले और इस प्रोजेक्ट में लगने वाले फंड को रोकने के लिए कई तरकीबें आजमा सकते हैं। ताकि इस प्रोजेक्ट की रफ्तार को धीमा किया जा सके। चीन के नजरिए से देखें तो निकोबार में भारत की मजबूत हवाई और नौसैनिक क्षमता, मलक्का में उसके लिए खतरा है। यद्ध के समय भारत चीन की इस कमजोरी पर सीधा हमला कर सकता है। इसीलिए इस प्रोजेक्ट को लेकर चीन डरा हुआ है। </p>
<p>अंडमान और निकोबार का भूगोल बंगाल की खाड़ी के पड़ोस में भारत की समुद्री सीमाओं को मजबूत बनाता है। ये हमें कई देशों की समुद्री सीमा से जोड़ता है, जिनमें बांग्लादेश भी शामिल है। भारत का ये प्रोजेक्ट 10 अरब डॉलर से ज्यादा है और अमेरिका भी इस प्रोजेक्ट को भारतीय नौसेना की बड़ी क्षमता मानता है, इसीलिए अमेरिका के एक्टिविस्ट अंतर्राष्ट्रीय अखबारों में इस प्रोजेक्ट के खिलाफ खूब लिख रहे हैं। लेकिन भारत के लोगों को देश की सुरक्षा के लिए इस सैन्य प्रोजेक्ट के साथ खड़ा रहना चाहिए और ऐसे तत्वों का विरोध करना चाहिए, जो गलतफहमी फैला रहे हैं। हो सकता है, पर्यावरण को लेकर कुछ खतरें हों, लेकिन एक बात हमेशा याद रखने की जरूरत है कि देश हित से बढ़कर कुछ नहीं है और दुनिया का कौन सा देश अपने हित के लिए पर्यावरण की परवाह कर रहा है?</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/great-nicobar-project-development-security-and-controversy-strategic-strength-versus/article-140841</link>
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                <pubDate>Mon, 26 Jan 2026 09:48:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>हिंद महासागर में मालदीव के पास पहुंचा चीन का पांचवां जासूसी जहाज </title>
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                        <![CDATA[भारतीय महासागर क्षेत्र में चीन की समुद्री गतिविधियों से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। चीन का पांचवां जासूसी जहाज दा यांग यी हाओ हिंद महासागर में दाखिल हुआ है। भारतीय नौसेना ने निगरानी तेज कर दी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-fifth-spy-ship-reaches-maldives-in-indian-ocean/article-135960"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/china-news.png" alt=""></a><br /><p>माले। भारतीय महासागर क्षेत्र में चीन की समुद्री गतिविधियों को लेकर भारत की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन का पांचवां जासूसी जहाज दा यांग यी हाओ हिंद महासागर में दाखिल हो चुका है। इससे पहले चीन चार जहाजों को पहले ही हिंद महासागर में भेज चुका है जो युआन वांग-क्लास के जहाज हैं। इनमें दो जहाजों के नाम युआन वांग-5 और युआन वांग-6 हैं, जो रिसर्च जहाज हैं। आधिकारिक तौर पर इन्हें वैज्ञानिक रिसर्च पोत बताया जाता है, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये जहाज मिसाइल ट्रैकिंग, सैटेलाइट निगरानी और समुद्र तल की रणनीतिक मैपिंग जैसे मिलिट्री जासूसी के लिए भेजा गया है। </p>
<p>पांचवां चीनी रिसर्च जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में दाखिल होने वाला सबसे नया जहाज है, जो समुद्र तल और खनिज रिसर्च करने में सक्षम है। ये जहाज मालदीव की तरफ जा रहा है, जबकि दूसरे जहाज फिलहाल ये जासूसी जहाज समुद्र की मैपिंग करते हैं, जो संघर्ष के समय काफी महत्वपूर्ण होता है।  रिसर्च से समुद्र में कहां पत्थर हैं, कहां पानी कम है, कहां ज्यादा है समेत कई तरह के दूसरे क्रिटिकल जानकारियां जुटाई जाती हैं।</p>
<p><strong>पहले भी भारतीय क्षेत्रों के नजदीक भेजे गए है जासूसी जहाज</strong></p>
<p>दा यांग यी हाओ नाम के इस जहाज को बिग ओशियन नंबर वन के नाम से भी जाना जाता है। यह अत्याधुनिक सेंसरों से लैस है और समुद्र की गहराई में खनिज संसाधनों की खोज और सी-बेड मैपिंग कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जासूसी जहाज दिसंबर 2025 के मध्य में हिंद महासागर क्षेत्र में दाखिल हुआ है। वहीं, चीन के जासूसी जहाजों के पहुंचने के बाद भारतीय नौसेना ने भी निगरानी गतिविधियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की मैपिंग भविष्य में पनडुब्बी ऑपरेशन , समुद्री संचार मार्गों और सैन्य तैनाती के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है।</p>
<p>यह पहली बार नहीं है जब चीनी रिसर्च जहाज हिंद महासागर भेजे गये हैं। इससे पहले युआन वांग-5 और युआन वांग-6 जैसे जहाज भारतीय मिसाइल परीक्षण क्षेत्रों के नजदीक भेजे गये हैं। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये जहाज चीन के अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों के लिए अहम डेटा जुटाते हैं। खासतौर पर बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों और सैटेलाइट ट्रैकिंग से जुड़ी जानकारी चीन की सैन्य क्षमता को मजबूत कर सकती है।</p>
<p>भारतीय नौसेना इन गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है। भारतीय नौसेना स्टाफ के वाइस चीफ वाइस-एडमिरल संजय वत्सयान ने 31 अक्टूबर को कहा था कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले हर चीनी जहाज पर कड़ी और लगातार नजर रख रही है, जिसमें नौसैनिक और रिसर्च जहाज भी शामिल हैं। उन्होंने कहा था कि हमें पता है कि वे क्या कर रहे हैं, वे कब आते हैं और कब जाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि नौसेना इस क्षेत्र में काम करने वाली बाहरी शक्तियों पर लगातार नजर रख रही है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 11:57:39 +0530</pubDate>
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                <title>इतिहास में पहली बार हिंद महासागर में एक साथ उतरे भारत और यूके के युद्धपोत, दोनों देशों का पश्चिमी हिंद महासागर में संयुक्त समुद्री अभ्यास कोंकण शुरू</title>
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                        <![CDATA[भारत और यूनाइटेड किंग्डम (यूके) ने पश्चिमी हिंद महासागर में एक बहुत बड़ा संयुक्त समुद्री अभ्यास शुरू किया है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/for-the-first-time-in-history-the-warships-of-india/article-128836"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(12)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंग्डम (यूके) ने पश्चिमी हिंद महासागर में एक बहुत बड़ा संयुक्त समुद्री अभ्यास शुरू किया है। इस अभ्यास का नाम कोंकण है। यह अभ्यास रविवार को शुरू हुआ है। इसमें यूके का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप शामिल है। इस ग्रुप का नेतृत्व एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स विमानवाहक पोत कर रहा है। भारतीय नौसेना का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी इसमें हिस्सा ले रहा है। भारतीय ग्रुप का नेतृत्व आईएनएस विक्रांत कर रहा है। यह इतिहास में पहली बार हुआ है कि ब्रिटिश और भारतीय कैरियर स्ट्राइक ग्रुप एक साथ समुद्री अभ्यास कर रहे हैं। इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों की नौसेनाओं की समुद्री और हवाई क्षमताओं को बढ़ाना है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भी बहुत जरूरी है। साथ ही, यह भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग की नींव भी रखेगा। यह अभ्यास कुल चार दिनों तक चलेगा।</p>
<p><strong>हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विश्वास :</strong></p>
<p>इसमें दोनों देशों की पनडुब्बियां और कई तरह के विमान भी शामिल होंगे। इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य दोनों नौसेनाओं की संयुक्त समुद्री और हवाई क्षमताओं को बढ़ाना है। ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने इस बारे में अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि भारत और यूके दोनों ही एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विश्वास रखते हैं। इसका मतलब है कि वे चाहते हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सभी देश बिना किसी डर के व्यापार कर सकें और अपने समुद्री मार्गों का उपयोग कर सकें। उनका एक बड़ा लक्ष्य एक आधुनिक रक्षा और सुरक्षा साझेदारी बनाना है। यह साझेदारी यूके-भारत विजन 2035 का एक बहुत जरूरी हिस्सा है। इस विजन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टारर ने इस साल की शुरूआत में सहमति जताई थी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 11:21:46 +0530</pubDate>
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                <title>इंडियन नेवी का अंड्रोथ युद्धपोत करेगा दुश्मनों की पनडुब्बी बर्बाद, 6 अक्टूबर को होगा कमीशन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नया जहाज पुराने की विरासत को आगे बढ़ाएगा। इस जहाज में आधुनिक हथियार, सेंसर, संचार प्रणाली और वाटरजेट प्रोपल्शन फिटेड हैं। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/indian-navys-underoth-wars-will-be-destroyed-on-october-6/article-127755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय नौसेना एक नया जहाज अपनी फ्लीट में जोड़ने वाली है। अंड्रोथ नाम का यह आधुनिक पनडुब्बी रोधी जहाज (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) 6 अक्टूबर 2025 को विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में कमीशन होगा। समारोह की कमान पूर्वी नौसेना कमांड के प्रमुख उपाध्यक्ष राजेश पेंढारकर संभालेंगे। यह 16 जहाजों वाली इस सीरीज का दूसरा जहाज है, जो नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल होगा।</p>
<p><strong>जहाज की खासियतें: 80% से ज्यादा स्वदेशी हिस्से</strong><br />अंड्रोथ को कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड ने बनाया है। इसमें 80% से ज्यादा हिस्से भारत में ही बने हैं। यह भारत सरकार की आत्मनिर्भरता की दृष्टि का प्रतीक है। देश की समुद्री स्वावलंबन की मिसाल है। जहाज निर्माण निदेशालय की देखरेख में और कोलकाता की वॉरशिप ओवरसीइंग टीम की निगरानी में बना। नौसेना को यह 13 सितंबर 2025 को सौंपा गया।</p>
<p><strong>नाम का महत्व: लक्षद्वीप से जुड़ा</strong><br />अंड्रोथ का नाम लक्षद्वीप द्वीपसमूह के अंड्रोथ द्वीप से लिया गया है। यह भारत के विशाल समुद्री क्षेत्रों की रक्षा के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता दिखाता है। पहले भी एक आईएनएस अंड्रोथ (पी69) था, जो 27 साल तक देश की सेवा करता रहा। नया जहाज पुराने की विरासत को आगे बढ़ाएगा। इस जहाज में आधुनिक हथियार, सेंसर, संचार प्रणाली और वाटरजेट प्रोपल्शन फिटेड हैं। यह पानी के नीचे के खतरे जैसे पनडुब्बियों को आसानी से ढूंढ सकता है, ट्रैक कर सकता है। नष्ट कर सकता है। यह समुद्री निगरानी, खोज और बचाव अभियान तथा तटीय रक्षा के काम भी करेगा। </p>
<p><strong>नौसेना के लिए बड़ा कदम</strong><br />अंड्रोथ का कमीशन होना भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा। यह नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता बढ़ाएगा। यह साबित करता है कि भारत खुद ही विश्वस्तरीय युद्धपोत डिजाइन, विकसित और बना सकता है। स्वदेशी प्रयासों से बने ऐसे जहाज देश की ताकत का प्रतीक हैं। यह नया जहाज नौसेना को और सशक्त बनाएगा, ताकि भारत के समुद्री इलाके हमेशा सुरक्षित रहें। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 13:19:38 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur PS]]>
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                <title>नौसेना में शामिल होगा स्टील्थ फ्रिगेट तमाल, रूस में बने युद्धपोत से पश्चिमी बेड़े को मिलेगी नई ताकत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारतीय नौसेना में जल्द ही एक और शक्तिशाली युद्धपोत शामिल होने वाला है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/stealth-frigate-tamal-will-join-the-navy-western-fleet-will/article-115720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(1)27.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय नौसेना में जल्द ही एक और शक्तिशाली युद्धपोत शामिल होने वाला है। रूस में बना तमाल नाम का यह आधुनिक फ्रिगेट (युद्धपोत) जून के अंत तक भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, तमाल फ्रिगेट को रूस के कलिनिनग्राद स्थित यांतर शिपयार्ड में कमीशन किया जाएगा। यह युद्धपोत सितंबर तक भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचेगा। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति और मजबूत होगी। एक अधिकारी ने बताया कि यह मुंबई स्थित पश्चिमी बेड़े का हिस्सा होगा। तमाल, रूस के साथ हुए 2.5 बिलियन डॉलर के सौदे का हिस्सा है। इस सौदे में भारत के लिए चार और क्रिवक/तलवार श्रेणी के फ्रिगेट शामिल हैं। इनमें से दो यांतर शिपयार्ड में और बाकी दो रूस से तकनीक लेकर गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में बनाए जाएंगे।</p>
<p><strong>समंदर में और ताकतवर हो रहा है भारत :</strong></p>
<p>इस सौदे के तहत पहला फ्रिगेट, आईएनएस तुशील, पिछले साल दिसंबर में यांतर शिपयार्ड में कमीशन किया गया था। यह फरवरी में भारत पहुंचा था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में इसे नौसेना में शामिल किया गया था। राजनाथ सिंह ने इस युद्धपोत को भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का गर्वपूर्ण प्रमाण और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया था। तुशील और तमाल उन्नत क्रिवाक श्रेणी के फ्रिगेट हैं। ऐसे छह युद्धपोत पहले से ही सेवा में हैं। इनमें तीन तलवार श्रेणी के जहाज हैं, जो सेंट पीटर्सबर्ग के बाल्टिक शिपयार्ड में बने हैं। बाकी तीन तेग श्रेणी के जहाज हैं, जो यांतर शिपयार्ड में बने हैं।</p>
<p><strong>यह पिछली तेग श्रेणी के फ्रिगेट से दोगुना है :</strong></p>
<p>इन नए फ्रिगेट में लगभग 26% स्वदेशी सामान हैं। यह पिछली तेग श्रेणी के फ्रिगेट से दोगुना है। इसमें 33 कंपनियों का योगदान है, जिनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, ब्रह्मोस एयरोस्पेस (भारत-रूस का संयुक्त उद्यम) और नोवा इंटीग्रेटेड सिस्टम्स (टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी) शामिल हैं। इन नए फ्रिगेट में कई आधुनिक हथियार लगे हैं। इनमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, उन्नत मध्यम दूरी की एंटी-एयर और सरफेस गन, आॅप्टिकली नियंत्रित क्लोज-रेंज रैपिड फायर गन सिस्टम, टारपीडो और रॉकेट शामिल हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 May 2025 13:32:42 +0530</pubDate>
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                <title>3 प्रमुख युद्धपोत नौसेना के बेड़े में शामिल, मोदी ने कहा - दुनिया की बड़ी समुद्री ताकत बन रहा है भारत </title>
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                        <![CDATA[मोदी ने नौसेना डॉकयार्ड में तीन प्रमुख नौसैनिक युद्धपोतों - आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरि और आईएनएस वाघशीर को नौसेना के बेड़े में शामिल किये जाने के मौके पर यह बात कही। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/3-major-warships-included-in-navys-fleet-modi-said/article-100857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/modi-3.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि तीन अत्याधुनिक और प्रमुख प्लेटफार्म का एक ही दिन नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाना मजबूत तथा आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के निर्माण तथा नौसेना को 21 वीं सदी के अनुरूप सशक्त बनाने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दिखाता है। मोदी ने यहां नौसेना डॉकयार्ड में तीन प्रमुख नौसैनिक युद्धपोतों - आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरि और आईएनएस वाघशीर को नौसेना के बेड़े में शामिल किये जाने के मौके पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि 21 वीं सदी की नौसेना को सशक्त बनाने की तरफ हम एक बड़ा कदम उठा रहे हैं और आज का भारत दुनिया की एक बड़ी समुद्री शक्ति बन रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह पहली बार हो रहा है जब एक डिस्ट्रायर, एक फ्रिगेट और एक सबमरीन को एक साथ कमीशन किया जा रहा है और सबसे गर्व की बात है कि  ये तीनों ही प्रमुख प्लेटफार्म मेड इन इंडिया हैं। आज का भारत दुनिया की एक बड़ी समुद्री शक्ति बन रहा है। भारत पूरे विश्व और विशेषकर ग्लोबल साउथ में एक भरोसमंद और जिम्मेदार साथी के रूप में पहचाना जा रहा है। उन्होंने कहा , ''भारत विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की भावना से काम करता है। भारत ने हमेशा खुले, सुरक्षित, समावेशी और समृद्ध हिन्द प्रशांत क्षेत्र का समर्थन किया है। भारत पूरे हिन्द महासागर क्षेत्र में पहले मदद का हाथ बढ़ाने वाले देश के रूप में उभरा है। जल हो, थल हो , नभ हो या गहरा समुद्र या असीम अंतरिक्ष हर जगह भारत अपने हितों को सुरक्षित कर रहा है। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन भारत की समुद्री विरासत, नौसेना के गौरवशाली इतिहास और आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए एक बड़ा दिन है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने भारत में नौसेना को एक नई ताकत और द्दष्टि दी। आज सरकार ने शिवाजी महाराज की भूमि पर 21वीं सदी की भारतीय नौसेना को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। </p>
<p>मोदी ने कहा कि आज का कार्यक्रम हमारी गौरवशाली विरासत को हमारी भविष्य की आकांक्षाओं से जोड़ता है। भारत का लंबी समुद्री यात्राओं, वाणिज्य, नौसेना रक्षा और जहाज उद्योग से जुड़ा एक समृद्ध इतिहास है। इस समृद्ध इतिहास से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि आज का भारत दुनिया में एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। आज लॉन्च किए गए प्लेटफॉर्म उसी की एक झलक दिखाते हैं। प्रधानमंत्री ने चोल वंश की समुद्री शक्ति को समर्पित आईएनएस नीलगिरि और सूरत युद्धपोत सहित नए प्लेटफार्मों के लॉन्च का उल्लेख किया, जो उस युग की याद दिलाता है जब गुजरात के बंदरगाह भारत को पश्चिम एशिया से जोड़ते थे। उन्होंने कुछ साल पहले पहली पनडुब्बी कलवरी के कमीशन के बाद पी 75 श्रेणी की छठी वाग्शीर पनडुब्बी के कमीशन का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये नए प्लेटफॉर्म भारत की सुरक्षा और प्रगति दोनों को बढ़ाएंगे।</p>
<p>वैश्विक सुरक्षा, अर्थशास्त्र और भू-राजनीतिक गतिशीलता को आकार देने में भारत जैसे समुद्री राष्ट्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए, प्रधान मंत्री ने आर्थिक प्रगति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय समुद्री सीमा की रक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और व्यापार आपूर्ति लाइनों और समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने क्षेत्र को आतंकवाद, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। </p>
<p>मोदी ने समुद्र को सुरक्षित , समृद्ध बनाने, रसद दक्षता बढ़ाने और शिपिंग उद्योग का समर्थन करने में वैश्विक भागीदार बनने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने दुर्लभ खनिजों और मछली स्टॉक जैसे समुद्री संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने और उन्हें प्रबंधित करने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। नए शिपिंग मार्गों और संचार के समुद्री मार्गों में निवेश के महत्व को ध्यान में रखते हुए और इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि भारत इस दिशा में लगातार कदम उठा रहा है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि हाल ही महीनों में, भारतीय नौसेना ने सैकड़ों लोगों की जान बचाई है और हजारों करोड़ रुपए के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्गो को सुरक्षित किया है, जिससे भारत, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल में वैश्विक विश्वास बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने आसियान, ऑस्ट्रेलिया, खाड़ी देशों और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर प्रकाश डाला, इसका श्रेय महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति और क्षमताओं को दिया। उन्होंने सैन्य और आर्थिक, दोनों दृष्टिकोणों से आज के आयोजन के दोहरे महत्व पर जोर दिया। इक्वसवीं सदी में भारत की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने और आधुनिक बनाने के महत्व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि चाहे जमीन हो, पानी हो, हवा हो, गहरा समुद्र हो या अनंत अंतरिक्ष हो, भारत हर जगह अपने हितों की रक्षा कर रहा है। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2025 17:35:30 +0530</pubDate>
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                <title>हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे नौसेना: राजनाथ</title>
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                        <![CDATA[सिंह ने कहा कि दुनिया के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से होकर गुजरता है, जो इसे मूल्यवान बनाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/navy-rajnath-was-ready-to-deal-with-every-situation/article-91029"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/rajnath-singh-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्थिक, व्यापार, परिवहन और समग्र राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूत नौसैनिक क्षमता की जरूरत पर बल देते हुए नौसेना के शीर्ष कमांडरों से मौजूदा अस्थिर वैश्विक परिदृश्य में हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।   सिंह ने गुरुवार को यहां नौसेना के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन के दूसरे संस्करण में कमांडरों को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत को और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए और कमांडरों को समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर आज के अस्थिर वैश्विक परिदृश्य में हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। </p>
<p><strong>भारत के समुद्री डकैती विरोधी अभियानों की विश्वभर में सराहना</strong><br />सिंह ने कहा कि दुनिया के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से होकर गुजरता है, जो इसे मूल्यवान बनाता है। वहीं, समुद्र में समुद्री डकैती, अपहरण, ड्रोन हमले, मिसाइल हमले और समुद्री केबल कनेक्शन में व्यवधान जैसी घटनाएं इसे बेहद संवेदनशील बनाती हैं। हमारी नौसेना ने इंडो-पैसिफिक के सभी हितधारक देशों के आर्थिक हितों की रक्षा करने और हिंद महासागर क्षेत्र में माल की सुचारू आवाजाही में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके समुद्री डकैती विरोधी अभियानों को न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी सराहना मिल रही है। भारत को अब इस पूरे क्षेत्र में एक पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के रूप में देखा जाता है। जब भी जरूरत होगी, हम क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Sep 2024 11:43:29 +0530</pubDate>
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                <title>वायु, जमीन और जल में जवानों का शौर्य प्रदर्शन</title>
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                        <![CDATA[भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती थार के रेगिस्तान में चल रहे संयुक्त युद्धाभ्यास त्रिशक्ति प्रहार के दौरान सैकड़ों जाबाजों ने वायु सेना के मालवाहक विमान से हथियारों से लैस जांबाजों ने आसमान से छलांग लगाई और धरती पर आते ही दुश्मन को मार गिराया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaisalmer/bravery-displayed-by-soldiers-in-air-land-and-water/article-62284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/jaisalmer.png" alt=""></a><br /><p>जैसलमेर। भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती थार के रेगिस्तान में चल रहे संयुक्त युद्धाभ्यास त्रिशक्ति प्रहार के दौरान सैकड़ों जाबाजों ने वायु सेना के मालवाहक विमान से हथियारों से लैस जांबाजों ने आसमान से छलांग लगाई और धरती पर आते ही दुश्मन को मार गिराया।<br /> आधुनिक हथियारों से लैस भारतीय जांबाजों ने पलक झपकते ही दुश्मन को खत्म कर दिया। इस दौरान थल सेनाध्यक्ष मनोज पांडे ने सभी जवानों की हौसला अफजाई की।  युद्धाभ्यास में आर्मी, एयरफोर्स और नेवी अपना दमखम दिखा रही है। इसमें तीनों सेनाओं के करीब 30 हजार सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। मॉडर्न टेक्नोलोजी से लैस ड्रोन से युद्धाभ्यास की निगरानी रखी जा रही है। जवान जब दुश्मन की ओर कदम बढ़ाते हैं, तब ड्रोन के जरिए आॅपरेशन की निगरानी की जाती है। </p>
<p><strong>यह युद्धाभ्यास महत्वपूर्ण </strong><br />अभ्यास के दौरान खुफिया व अन्य जानकारी रखने, टोही विमान से लंबी दूरी के हमले, सटीक हमलों से दुश्मन को नेस्तनाबूद करने का अभ्यास किया जा रहा है। चीन सीमा पर विवाद के चलते यह युद्धाभ्यास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य रूप से भारतीय वायु सेना की दक्षिणी पश्चिमी कमान की आॅपरेशनल कैपेबिलिटी और रेडिनेस का प्रदर्शन भी शामिल है। मानव रहित हवाई वाहन, सटीक-निर्देशित मिसाइल, लोइटर युद्ध सामग्री, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, संचार प्रणाली और आॅटोमेटिक स्पेक्ट्रम मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी स्पेशल टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग की जा रही है।</p>
<p><strong>विश्वयुद्ध जैसी स्थिति देखते हुए अभ्यास</strong><br />विश्व में युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए नई रणनीति के तहत अभ्यास किया जा रहा हैं। जिसमें नए हथियारों की टेस्टिंग भी की जाएगी। आर्मी के टी-90 एस और अर्जुन टैंक, हॉवित्जर, हेलिकॉप्टर और अन्य हथियार शामिल हैं। लड़ाकू विमान, अटैक हेलिकॉप्टर अपाचे, हैवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर और नेवी के विभिन्न विमान भी हिस्सा ले रहे हैं। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जैसलमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Nov 2023 09:59:12 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75आई में होगी जर्मनी की एंट्री, 6 महाशक्तिशाली पनडुब्बियों का दिया आफर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राजनयिक सूत्रों के अनुसार, गवर्मेंट टू गवर्मेंट डील के जरिए इन पनडुब्बियों के बेचने का एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/germanys-entry-in-indian-navys-project-75i-will-be-offered-for/article-42021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/a-161.png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मनी ने भारत को छह महाशक्तिशाली पनडुब्बियों का आफर दिया है। इन पनडुब्बियों को गवर्मेंट टू गवर्मेंट डील के तहत खरीदा जा सकता है। जर्मन विदेश मंत्री की आगामी भारत यात्रा के दौरान इस डील पर विस्तार से बातचीत होने की उम्मीद है। भारतीय नौसेना प्रोजेक्ट-75आई के तहत छह उन्नत डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की खरीद करना चाहती है। इसकी अनुमानित लागत 45000 करोड़ रुपए से अधिक है। तकनीकी दिक्कतों के कारण यह परियोजना कुछ समय से अटकी हुई है। इसका असर भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों के बेड़े पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>जर्मन रक्षा मंत्री की भारत यात्रा के दौरान हो सकती है डील</strong><br />राजनयिक सूत्रों के अनुसार, गवर्मेंट टू गवर्मेंट डील के जरिए इन पनडुब्बियों के बेचने का एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे औपचारिक रूप से जल्द ही भारत सरकार के सामने पेश किया जाएगा। अधिकारियों और राजनयिक सूत्रों ने कहा कि अगले महीने में जर्मन रक्षा मंत्री भारत यात्रा पर आ रहे हैं, जिसके दौरान प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पेश किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि फरवरी में जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज की भारत यात्रा के दौरान भी यह मुद्दा चर्चा में आया था।</p>
<p><strong>2020 से ही छह पनडुब्बियां खरीदना चाहता है भारत</strong><br />जनवरी 2020 में भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने मझगाँव डॉक्स लिमिटेड (एमडीएल) और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को पी-75 (प्रोजेक्ट-75) डील के लिए भारतीय भागीदारों के रूप में चुना था। इसका मतलब कि जो भी विदेशी कंपनी पनडुब्बियों के सौदे के लिए चुनी जाती है, वे इन दोनों भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर उसका निर्माण करेंगी। इसका निर्माण भारत में ट्रांसफर आॅफ टेक्नोलॉजी के जरिए किया जाएगा।</p>
<p><strong>कौन-कौन सी विदेशी कंपनियां दौड़ में शामिल</strong><br />भारत को पनडुब्बी बेचने की दौड़ में पांच विदेशी निमार्ता देवू शिपबिल्डिंग एंड मरीन इंजीनियरिंग (दक्षिण कोरिया), नेवल ग्रुप (फ्रांस), नवंतिया (स्पेन), रोसोबोरोनेक्सपोर्ट (रूस) और थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस, जर्मनी) शामिल हैं। भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75आई के प्रस्ताव के लिए अनुरोध मूल रूप से जुलाई 2021 में एमडीएल और एलएंडटी को जवाब देने के लिए 12 सप्ताह की डेडलाइन के साथ जारी किया गया था। हालांकि, तब से लेकर अब तक इसे कई बार बढ़ाया जा चुका है। अब नई डेडलाइन अगस्त 2023 तक है।</p>
<p><strong>जर्मन कंपनी को मिल सकती है डील</strong><br />भारतीय नौसेना के मानदंडों को केवल जर्मनी और दक्षिण कोरिया की कंपनियां ही पूरी करती हैं। दक्षिण कोरिया अपनी पनडुब्बियों के लिए ज्यादा पैसे मांग रहा है। इतना ही नहीं, दक्षिण कोरियाई पनडुब्बी तकनीक के मामले में जर्मन पनडु्ब्बी से काफी पीछे है। ऐसे में संभावना है कि जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स को यह टेंडर मिल सकता है। टीकेएमएस चार तरह की पनडुब्बियों का निर्माण करती है। संभावना है कि भारत उसकी डॉल्फिन क्लास की पनडुब्बियों की खरीद करे।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Apr 2023 11:21:14 +0530</pubDate>
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