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                <title>BS Yediyurappa - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भाजपा को मिल रहा है बहुमत, इसलिए चुनाव बाद जेडीएस से गठबंधन नहीं: येदियुरप्पा</title>
                                    <description><![CDATA[येदियुरप्पा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा कर्नाटक को दिए कार्यक्रमों की वजह से भाजपा चुनाव जीतने जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-is-getting-majority-thats-why-yeddyurappa-not-alliance-with/article-45176"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/शीर्षक-रहित-(630-×-400-px)-की-कॉपी-(1).png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरू। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने बुधवार को दावा किया कि राज्य में भाजपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी और ऐसे में सरकार बनाने के लिए जेडीएस के साथ चुनाव के बाद गठबंधन करने का कोई सवाल ही नहीं है।</p>
<p>येदियुरप्पा ने शिकारीपुरा में अपना वोट डालने के बाद संवाददाताओं से यह बात कही। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु जनादेश आने सवाल पर उन्होंने कहा  ''सरकार बनाने के लिए जेडीएस के साथ चुनाव बाद गठबंधन करने का कोई सवाल ही नहीं उठता क्योंकि भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने जा रहा है।"</p>
<p>येदियुरप्पा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा कर्नाटक को दिए कार्यक्रमों की वजह से भाजपा चुनाव जीतने जा रही है। उन्होंने कहा, ''लगभग पूरे राज्य में ङ्क्षसचाई सहित विकास हुआ है और इसलिए मैं कह रहा हूं कि हम पूर्ण बहुमत से जीत रहे हैं और हम सरकार बनाने जा रहे हैं।"</p>
<p>उनके पुत्र विजयेंद्र ने भी अपने पिता की तरह ही सरकार बनाने के लिए जेडीएस के साथ चुनाव के बाद कोई समझौता नहीं होने पर सहमति व्यक्त की और कहा कि भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने वाला है क्योंकि कर्नाटक के लोग त्रिशंकु विधानसभा से तंग आ चुके हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा ''बिल्कुल, मैं उनसे सहमत हूं। पिछले तीन हफ्तों में, मीडिया ने भी देखा होगा कि जिस तरह से चलन बदल रहा है। कर्नाटक के लोग इस त्रिशंकु विधानसभा से तंग आ चुके हैं। इसलिए, यह जनता के हित में अच्छा नहीं है।" लोगों को एहसास हो गया है और मुझे यकीन है कि वे भाजपा को स्पष्ट जनादेश देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 May 2023 12:53:32 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक:येद्दियुरिअप्पा का फिर बढ़ता कद</title>
                                    <description><![CDATA[लिंगायत समुदाय सबसे बड़ा ऐसा जातीय समुदाय है, जो न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी सबसे अधिक प्रभावशाली है। कभी यह समुदाय   कांग्रेस का सबसे बड़ा समर्थक था लेकिन बाद में कांग्रेस की आन्तरिक गुटबंदी के चलते इससे छिटक कर बीजेपी के साथ आ गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/karnataka-yeddyurappa-s-growing-stature-again/article-20806"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/yeddyurappa.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक विधानसभा के चुनाव अब कुछ ही महीने दूर हैं इसलिए सत्तारूढ़ बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी के रणनीतिकार अभी से ऐसे कदम उठाने में लगे हैं ताकि दक्षिण के इस राज्य में पार्टी फिर सत्ता में आ सके। इसके लिए पार्टी नेतृत्व ने पिछले दिनों एक ऐसा बड़ा निर्णय किया है, जो पार्टी के स्थापित मानदंडों के नियमों और परम्पराओं के एकदम विपरीत है।<br /><br />यह  निर्णय राज्य के चार मुख्यमंत्री रहे बीएस येद्दियुरिअप्पा को पार्टी के सर्वोच्च स्तर पर निर्णय लेने वाले केंद्रीय संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाए जाने का था। जब पिछले साल उन्हें  मुख्यमंत्री पद से हटाया गया तो यह माना जा रहा था कि अब उन्हें पार्टी की सक्रिय राजनीति से दूर रखा जाएगा। खुद उन्होंने भी कहा था कि वे अब पार्टी में कोई पद नहीं चाहते, लेकिन पार्टी फिर सत्ता में लाने के लिए काम करते रहेंगे। हालांकि उनके बाद बने मुख्यमंत्री बसवराज ने उन्हें कैबिनेट स्तर का दर्जा देते हुए यह कहा कि वे जब तक चाहें मुख्यमंत्री के लिए निर्धारित सरकारी बंगले में रह सकते हैं। बाद में कुछ  आलोचना होने के  बाद येद्दियुरिअप्पा ने न केवल कैबिनेट मंत्री का ओहदा लेने से इंकार कर दिया, बल्कि मुख्यमंत्री का बंगला भी खाली कर दिया। मुख्यमंत्री पद से हटने से पहले उन्होंने इस बात को पुख्ता किया था कि उनके दोनों बेटे राघवेन्द्र और विजयेन्द्र बीजेपी के इतने बड़े स्थापित बन जाए ताकि पार्टी अगले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी का उम्मीदवार बनाए। यह माना जा रहा था कि पार्टी में उनकी भूमिका के बाद अब मार्गदर्शक जैसी होगी है। लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है जिसमें कभी  भी कुछ भी हो सकता है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें  पार्टी के संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाकर राज्य के राजनीतिक बिसात पर ऐसी गोट चली, जिसका कोई अंदाज नहीं लगा सकता था। राज्य में  लिंगायत समुदाय सबसे बड़ा ऐसा जातीय समुदाय है, जो न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी सबसे अधिक प्रभावशाली है। कभी यह समुदाय   कांग्रेस का सबसे बड़ा समर्थक था लेकिन बाद में कांग्रेस की आन्तरिक गुटबंदी के चलते इससे छिटक कर बीजेपी के साथ आ गया। येद्दियुरिअप्पा इसी समुदाय से आते है। लगभग तीन दशक पूर्व वे इस समुदाय के बड़े नेता के रूप में उभरने  शुरू हुए। इसी के चलते ढाई दशक पूर्व दक्षिण के इस राज्य में पहली बार सत्ता में आई। तब उनके बारे में कहा गया था कि दक्षिण में कमल खिलने का श्रेय उन्हीं को जाता है। कुछ साल बाद पार्टी में आन्तरिक कलह के चलते उन्होंने पार्टी छोड़कर अपना नया दल बना लिया। लेकिन 2018 के राज्य विधानसभा चुनावों से पूर्व वे फिर पार्टी में लौट आए। उन्हें न केवल राज्य पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया, बल्कि पार्टी की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री के  चेहरे के रूप में पेश किया गया। पार्टी को बहुमत से कुछ  कम सीटें मिली। फिर भी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उन्हें  सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया। उनकी सरकार केवल ढाई दिन चली, क्योंकि वे सदन में अपना बहुमत सिद्ध नहीं कर सके। इसके स्थान पर आई कांग्रेस जनता दल-स की सरकार बनी, जो एक साल से अधिक नहीं चल सकी। बीजेपी दल बदल करवाकर फिर सत्ता  में आ गई और येद्दियुरिअप्पा फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने। पार्टी नियमों और परम्परा के कोई भी नेता 75 वर्ष का होने के बाद संगठन और सरकार में किसी पद नहीं रह सकता। विधानसभा चुनावों ने पूर्व जब उन्हें अध्यक्ष बनाया गया, तो वे 77 वर्ष के थे लेकिन चुनाव जीतने के लिए पार्टी ने  अपने ही नियमों को तक पर रख दिया। जब उन्हें दोबारा  मुख्यमंत्री बनाया गया तभी यह तय हो गया था कि उन्हें अपना कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया जाएगा। इसी के चलते पिछले साल जुलाई में उन्हें पद छोड़ने को कहा गया। उनके स्थान पर बनाए गए मुख्यमंत्री बसवराज भी लिंगायत समुदाय के ही है, लेकिन समुदाय में उनका कद  येद्दियुरिअप्पा  जितना नहीं बन सका हालांकि बसवराज सरकार ने बीजेपी के गोरक्षा और धर्मांतरण जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाया, लेकिन पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को लगा कि केवल इन कदमों के बल पार्टी राज्य में दोबारा साथ में नहीं आ सकती। इसलिए येद्दियुरिप्पा को  फिर से पार्टी की मुख्य धारा में लाने का निर्णय किया। वे इस समय 80 वर्ष के आसपास हैं, फिर भी नियमों को तोड़कर उन्हें पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड का सदस्य बना दिया गया, ताकि पार्टी की चुनावों में जीत सुनिश्चित हो सकें।</p>
<p>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Aug 2022 11:35:29 +0530</pubDate>
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                <title>कर्नाटक के 23वें मुख्यमंत्री बने बसवराज बोम्मई, राज्यपाल ने दिलाई पद और गोपनीयता की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[बसवराज बोम्मई ने कर्नाटक के 23वें मुख्यमंत्री के रूप में बुधवार को शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने आज राजभवन में बोम्मई को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। बोम्मई ने आज अपने दिन की शुरुआत अंजनेया स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना करके की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%87-23%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%88--%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%AA%E0%A4%A6-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%AA%E0%A4%A5/article-1286"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/e7xkumiuyaa6xaz.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरू। बसवराज बोम्मई ने कर्नाटक के 23वें मुख्यमंत्री के रूप में बुधवार को शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने आज राजभवन में बोम्मई को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। बोम्मई ने आज अपने दिन की शुरुआत अंजनेया स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना करके की और अपने निवास को लौट गए। बाद में उन्होंने मल्लेश्वरम स्थित भाजपा के राज्य मुख्यालय का दौरा किया, जहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने उनका स्वागत किया। जहां उन्होंने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।<br /> <br /> निवर्तमान मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने बोम्मई को नए सीएम के रूप में चुने जाने पर बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि वह विकास के पथ पर कर्नाटक का नेतृत्व करेंगे। येदियुरप्पा ने ट्वीट कर कहा कि बोम्मई को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में चुने जाने पर बधाई। मुझे विश्वास है कि आप कर्नाटक को विकास के पथ पर ले जाएंगे और राज्य के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेंगे। एक अन्य ट्वीट में येदियुरप्पा ने बोम्मई को उनके कुशल और सफल प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि बोम्मई को हार्दिक बधाई। लाखों कार्यकर्ताओं के आशीर्वाद से, पार्टी के सभी नेताओं के समर्थन से, मैं बोम्मई के कुशल और सफल प्रदर्शन की कामना करता हूं। <br /> <br /> इससे पूर्व येदियुरप्पा के इस्तीफे के एक दिन बाद मंगलवार को बसवराज बोम्मई को राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया। 61 वर्षीय बोम्मई को पार्टी की बैठक में सर्वसम्मति से कर्नाटक भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। इस बैठक में कर्नाटक इकाई के प्रभारी अरुण सिंह, केंद्रीय पर्यवेक्षक धर्मेंद्र प्रधान और जी किशन रेड्डी ने हिस्सा लिया। बैठक में निवर्तमान मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील भी शामिल हुए।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 28 Jul 2021 16:42:42 +0530</pubDate>
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