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                <title>Reservation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Reservation RSS Feed</description>
                
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                <title>टाउनशिप पॉलिसी-2024 में बड़े बदलाव, संयुक्त उपक्रमों और ईडब्ल्यूएस आवास को लेकर स्पष्टता </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने टाउनशिप पॉलिसी-2024 में नए स्पष्टीकरण जारी किए हैं। अब खातेदार संयुक्त रूप से टाउनशिप विकसित कर सकेंगे। मॉर्गेज प्लॉट्स का कोटा 10% से घटाकर 7.5% कर दिया गया है। आवासीय योजनाओं में प्रति 100 भूखंडों पर 10 अनौपचारिक दुकानें और औद्योगिक क्षेत्रों में EWS/LIG के लिए 5% कोटा अनिवार्य होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/major-changes-in-township-policy-2024-clarity-regarding-joint-ventures-and/article-157984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/secratrait3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों और विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर कई महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब एक से अधिक खातेदार या आवंटी संयुक्त रूप से एसोसिएशन, कंसोर्टियम, फर्म अथवा जॉइंट वेंचर बनाकर टाउनशिप विकसित कर सकेंगे। ऐसे मामलों में परियोजना क्षेत्रफल के आधार पर केवल एक इकाई का डेवलपर के रूप में पंजीकरण होगा। सरकार ने 10 प्रतिशत मॉर्गेज प्लॉट्स की जगह 7.5 प्रतिशत मॉर्गेज प्लॉट्स का प्रावधान स्पष्ट किया है।</p>
<p>वहीं, आवासीय योजनाओं में प्रत्येक 100 भूखंडों पर 10 अनौपचारिक दुकानों (इन्फॉर्मल शॉप्स) का प्रावधान अनिवार्य किया गया है। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए भी महत्वपूर्ण स्पष्टता दी गई है। औद्योगिक योजनाओं में विकसित योग्य क्षेत्रफल का न्यूनतम 5 प्रतिशत हिस्सा ईडब्ल्यूएस/एलआईजी आवास हेतु आरक्षित रखना होगा। यदि आवासीय क्षेत्र प्रस्तावित नहीं है, तब भी एक भूखंड आरक्षित करना अनिवार्य होगा।</p>
<p>इसके अलावा मास्टर प्लान, जोनल प्लान अथवा सेक्टर प्लान की सड़कों के विकास, विद्युतीकरण, पेयजल, स्ट्रीट लाइट एवं वृक्षारोपण जैसे कार्य डेवलपर द्वारा कराए जाएंगे, जबकि ट्रंक सीवर लाइन और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज जैसे प्रमुख ढांचागत कार्य स्थानीय निकायों द्वारा किए जाएंगे। सरकार ने पॉलिसी में मौजूद कई तकनीकी त्रुटियों और तालिकाओं के संदर्भों को भी संशोधित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:32:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिद्दारमैया ने जाते-जाते शिवकुमार, राहुल के लिए खड़ी की मुश्किलें, पढ़ें क्या है पूरा मामला ?</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूरी देकर कांग्रेस नेतृत्व को बड़ी उलझन में डाल दिया है। इस फैसले से राहुल गांधी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार असहज स्थिति में हैं, क्योंकि वोक्कालिगा समुदाय की नाराजगी और नया आरक्षण समीकरण पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/siddaramaiah-created-problems-for-shivkumar-rahul-while-leaving-read-what/article-155452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dkk.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जाते-जाते राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की तैयार की गयी 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूर कर कांग्रेस नेतृत्व को असमंजस की स्थिति में खड़ा कर दिया है। उल्लेखनीय है कि सियासत में कभी-कभी ऐसे लम्हे आते हैं जब कोई सरकारी फाइल सिर्फ आगे नहीं बढ़ती, बल्कि उसका अपना एक अलग वजूद बन जाता है। कर्नाटक की जातिगत सर्वेक्षण रिपोर्ट भी एक ऐसा ही मोहरा है। जहां निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस अफसरशाही इत्मीनान और राजनीतिक अंतिम रूप के साथ इसे मंजूर किया है, उसने खामोशी से वही काम करना शुरू कर दिया है, जो आंकड़े अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं- </p>
<p><strong>ताकतवरों की नींद उड़ाना।</strong></p>
<p>रिपोर्ट की मंजूरी देने की एक आम प्रक्रिया है लेकिन इसके भीतर ज्यादा दिलचस्प हलचल छिपी हुई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी अब खुद को ऐसी असहज स्थिति में पा रहे हैं, जहां उन्हें एक ऐसे दस्तावेज़ पर जवाब देना भारी पड़ रहा है। वे उसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं कर सकते। कर्नाटक के सियासी मिजाज के मंझे खिलाड़ी सिद्दारमैया ने शायद वही किया है, जो तजुर्बेकार सियासतदान अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं एक ऐसा माहौल छोड़ जाना, जो कानूनी तौर पर तो बिल्कुल साफ-सुथरा हो लेकिन राजनीतिक रूप से काफी उलझा हुआ हो। यह रिपोर्ट एक बार मंजूर होने के बाद अब सिर्फ कोई सुझाव नहीं रह गयी है। यह एक ऐसा सवाल बन चुकी है, जो जवाब के इंतजार में है।</p>
<p>शिवकुमार के लिए यह मुद्दा फिलहाल सबसे अहम है और सीधे उनके क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। राज्य का जातीय समीकरण कभी भी हवा-हवाई नहीं होता। यह उन समुदायों के रूप में सामने आता है, जो पुरानी बातें याद रखते हैं, ऐतराज जताते हैं और एकजुट होते हैं। वोक्कालिगा समुदाय का एक वर्ग, जो पहले भी जातीय सर्वेक्षण को लेकर हुए विवादों को लेकर संवेदनशील रहा है, इसके क्रियान्वयन की दिशा में उठाए जाने वाले किसी भी कदम पर कड़ी और सतर्क निगाह रख सकता है। पद्धति और आंकड़ों पर बहस भले ही दफ्तरों में हो, लेकिन पहचान और प्रतिनिधित्व का सवाल सड़कों पर तय होता है।</p>
<p>राहुल गांधी की परेशानी का स्तर थोड़ा अलग है। जातिगत जनगणना के हक में उनका लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक रुख अब इसे अमली जामा पहनाने में टेडी खीर नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी आदत के मुताबिक, इस सूरत-ए-हाल को नीति के विकास के रूप में नहीं, बल्कि एक सियासी विरोधाभास के तौर पर देखना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एक भाषा बोलती है और राज्यों में दूसरी। कांग्रेस जैसा लाजिमी है, इस बात से सरासर इनकार करती है।</p>
<p>अब कांग्रेस के सामने दो रास्ते खुलते हैं, और दोनों में से कोई भी रास्ता आरामदेह नहीं है। अगर इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया जाता है, तो इसके प्रशासनिक ईमानदारी और फिर उसके बाद आने वाली राजनीतिक हिचकिचाहट का एक और भारतीय उदाहरण बन जाने का खतरा है। इसने पिछड़े समुदायों और सामाजिक न्याय के पैरोकारों के बीच जो उम्मीदें जगाई हैं, वे इतनी आसानी से खत्म नहीं होंगी। ऐसी सूरत में इस रिपोर्ट को इस बात के लिए कम याद किया जायेगा कि इसमें क्या कहा गया था, बल्कि इस बात के लिए ज्यादा याद किया जायेगा कि इसके साथ क्या नहीं किया गया।</p>
<p>अगर इसे लागू किया जाता है, तो इसके नतीजे ज्यादा त्वरित और साफ तौर पर दिखाई देने वाले होंगे। आरक्षण का नये सिरे से निर्धारण समुदायों का प्रतिनिधित्व और जनसांख्यिकीय दावे सक्रिय रूप से राजनीति के केंद्र में आ जायेंगे। समर्थन और विरोध दोनों एक साथ खड़े होंगे। कानूनी पेचीदगियां सामने आ सकती हैं। प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं तथा गठबंधन को संभालना और भी मुश्किल हो जायेगा। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए इसका मतलब पार्टी के अनुशासन और अपने समुदाय की भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी और श्री गांधी के लिए इसका मतलब अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को उसकी तमाम अपरिहार्य उलझनों के साथ प्रशासनिक हकीकत में बदलना होगा। दोनों ही सूरतों में दबाव खत्म नहीं होता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में सिद्दारमैया के इस रिपोर्ट को मंजूर किये जाने को सिर्फ कागजी या प्रक्रियात्मक कार्रवाई से बढ़कर देखा जा रहा है। इस जिम्मेदारी को पार्टी के भीतर खामोशी लेकिन मजबूती के साथ दूसरों के कंधों पर डालने के तौर पर देखा जा रहा है- एक तजुर्बेकार सियासतदान का यह तय करने का तरीका कि एक बार जो फैसला ले लिया गया, वह आराम से सिर्फ उनका ही होकर न रह जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:09:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओबीसी आरक्षण पर बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: मौजूदा ओबीसी उप-वर्गीकरण रद्द, 66 समुदाय सूची में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने ओबीसी सूची का उप-वर्गीकरण ढांचा रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट बैठक के बाद जारी अधिसूचना के अनुसार, अब केवल 66 समुदायों को 7% आरक्षण का लाभ मिलेगा। सरकार पिछली तृणमूल सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्रों की नए सिरे से समीक्षा करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-west-bengal-government-existing-obc-sub-categorization-canceled/article-154454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bengal-cm.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बुधवार को राज्य सरकार की नौकरियों और पदों में आरक्षण से जुड़े अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची के मौजूदा उप-वर्गीकरण ढांचे को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सरकार ने सात प्रतिशत आरक्षण के लिए ओबीसी श्रेणी के तहत केवल 66 समुदायों को बनाए रखने का फैसला किया है। यह अधिसूचना मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में नबन्ना (सचिवालय) में हुई दूसरी कैबिनेट बैठक के एक दिन बाद आई है। इस बैठक में राज्य सरकार ने ओबीसी सूची की दोबारा जांच करने और पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए प्रमाण पत्रों की समीक्षा करने का निर्णय लिया था।</p>
<p>मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक में लिए गए इस फैसले को इसके कानूनी और राजनीतिक निहितार्थों के कारण नए प्रशासन का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। सोमवार को हुई बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा था, "मंत्रिमंडल ने ओबीसी श्रेणी के भीतर मौजूदा उप-वर्गीकरण प्रणाली को समाप्त करने, पश्चिम बंगाल सरकार के तहत ओबीसी समुदायों के लिए आरक्षण के प्रतिशत की समीक्षा करने और राज्य की ओबीसी सूची की नए सिरे से जांच करने का निर्णय लिया है।"</p>
<p>पॉल ने कहा था, "इस मामले की नए सिरे से जांच की जाएगी। राज्य सरकार उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के निर्देशों के अनुसार ही जातियों या समूहों को सूची में शामिल करने के बारे में फैसला करेगी।"राज्यपाल के निर्देश पर मंगलवार को जारी एक अधिसूचना में नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने घोषणा की कि 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी के तहत सात प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा। पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण और उप-वर्गीकरण से जुड़ा यह विवाद वाम मोर्चा सरकार के अंतिम दौर और मार्च 2010 से मई 2012 के बीच तृणमूल कांग्रेस सरकार के पहले कार्यकाल के समय का है। उस अवधि के दौरान, राज्य में 77 समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया था। इनमें से वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल के दौरान 42 मुस्लिम समुदायों को शामिल किया गया था। इसके बाद आरोप लगे कि आरक्षण का लाभ धर्म के आधार पर दिया जा रहा है, जिससे यह मामला कानूनी विवादों में फंस गया।</p>
<p>ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद ओबीसी सूची में 35 और समुदायों को जोड़ा, जिससे यह संख्या बढ़कर 77 हो गई, जिनमें से 75 मुस्लिम समुदाय से थे। वर्ष 2023 में, ममता सरकार ने एक नया ओबीसी आरक्षण कानून बनाया, जिसके तहत सभी 77 समुदायों को इसके दायरे में ले आया गया। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में ओबीसी समुदायों की कुल संख्या बढ़कर 179 हो गई थी। इस नए आरक्षण कानून को हालांकि अदालत में चुनौती दी गई, जहां याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि धर्म के आधार पर दिए गए आरक्षण को रद्द किया जाना चाहिए।</p>
<p>इसके बाद, 22 मई 2024 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य की ओबीसी सूची में 113 समुदायों को शामिल करने के फैसले को रद्द कर दिया, जबकि 66 समुदायों को सूची में बने रहने की अनुमति दी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि कई समुदायों को शामिल करने का काम मुख्य रूप से धार्मिक आधार पर किया गया था। इस फैसले के बाद वर्ष 2010 से जारी किए गए लगभग पांच लाख ओबीसी प्रमाणपत्र अमान्य हो गए थे। तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बाद में उच्च न्यायालय के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। मार्च 2025 में, पिछली राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग एक नया सर्वेक्षण करेगा और एक संशोधित ओबीसी सूची तैयार करेगा।</p>
<p>इसी साल जून में, ममता सरकार ने 76 नए समुदायों को शामिल करते हुए एक नई सूची जारी की, जिससे कुल ओबीसी श्रेणियों की संख्या 140 हो गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने संशोधित सूची के माध्यम से व्यावहारिक रूप से लगभग सभी पुराने समुदायों को वापस शामिल कर लिया है। पिछले साल 17 जून को, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उस संशोधित अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस रोक के आदेश को चुनौती देते हुए फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। पिछले साल जुलाई में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी थी और वर्तमान में यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष लंबित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:21:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कैबिनेट बैठक : पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन समेत कई बड़े प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर, विकास कार्यों को मिलेगी गति </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में राज्य ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है। इससे पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ होगा। बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र नियमावली 2026 और छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाने जैसे कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cabinet-meeting-approval-may-be-given-on-many-big-proposals/article-154204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cm2.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की संभावना है। पंचायत चुनाव टलने की अटकलों के बीच राज्य ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के प्रस्ताव से सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट की बैठक में राज्य ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव लाया जाएगा। पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच इस आयोग के गठन को बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग बनने के बाद ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ होगा।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक बैठक में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र नियमावली 2026 को भी मंजूरी के लिए रखा जाएगा। साथ ही पशु चिकित्सा के छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता चार हजार रुपये से बढ़ाकर आठ हजार रुपये करने का प्रस्ताव भी पेश होगा। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लखनऊ के शहीद पथ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में 1010 बेड का मल्टी स्पेशिएलिटी इमरजेंसी सेंटर, टीचिंग ब्लॉक और नया ओपीडी ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव आएगा।</p>
<p>इसके अलावा प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर के विस्तार के लिए भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। मिर्जापुर में निजी क्षेत्र की सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए आशय पत्र जारी करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विकास कार्यों को और गति मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 14:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमित यादव का केंद्र पर प्रहार: सरकार कर रही मजदूरों के अधिकारों का हनन, आंदोलन में गिरफ्तार वर्करों और नेताओं को रिहा करने की अपील </title>
                                    <description><![CDATA[समाजवादी मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव अमित यादव ने मजदूर दिवस पर भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने 12 घंटे कार्य के कानून को शोषण बताते हुए मजदूरों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया। सपा ने गिरफ्तार मजदूर नेताओं की रिहाई और महिला श्रमिकों के लिए आरक्षण की पुरजोर मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amit-yadavs-attack-on-the-center-appeals-to-release-the/article-152338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/amit-yadav.png" alt=""></a><br /><p>जौनपुर। समाजवादी मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव अमित यादव ने शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार ने उद्योगपतियों के हित का ध्यान रखते हुए मजदूरों से 12 घंटे काम लेने का कानून बनाकर उनके अधिकारों का हनन कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर श्री यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी की सोच है कि समाज के हर वर्ग को समान भागीदारी मिले। इसी क्रम में ईट भट्ठों पर कार्य करने वाली महिला श्रमिक को भी संसद तक पहुंचाने के उद्देश्य से ओबीसी, एससी, एसटी एवं अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उठाई गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज मजदूर दिवस के दिन समाजवादी मजदूर सभा की मांग हैं कि कुछ दिनों पूर्व हुए मजदूर आंदोलन में गिरफ्तार हुए मजदूरों और मजदूर नेताओं को जल्द से जल्द रिहा किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 16:52:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title> बार काउंसिल ऑफ राजस्थान चुनाव : व्यवस्था और फर्जी मतदान की शिकायत, हाईकोर्ट स्थित पोलिंग बूथ में मतदान रद्द </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान बार काउंसिल के चुनावों में जयपुर हाईकोर्ट बूथ पर फर्जी वोटिंग और अव्यवस्थाओं के चलते मतदान रद्द कर दिया गया। 8 साल बाद हो रहे इन चुनावों में 234 प्रत्याशी मैदान में हैं और पहली बार महिला आरक्षण लागू किया गया है। अब जयपुर में मतदान की नई तारीख घोषित होगी, जबकि अन्य जिलों में प्रक्रिया जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/complaint-about-arrangement-and-fake-voting-election-canceled-at-high/article-151286"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)35.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के अधिवक्ताओं की नियामक संस्था बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चुनाव आज हो रहे हैं। सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक प्रदेश के हर जिले में अदालतों में मतदाता बूथ बनाए गए हैं। वहीं जयपुर के हाईकोर्ट स्थित पोलिंग बूथ में व्यवस्थाओं और फर्जी वोटिंग को लेकर हंगामा हो गया। इसके बाद यहां मतदान को रद्द कर दिया गया। अब चुनाव के लिए नई तारीख घोषित की जाएगी। राजस्थान हाईकोर्ट में स्थित पोलिंग बूथ पर करीब 50 मिनट देरी से मतदान आरंभ हुआ। इस दौरान सबसे पहले 94 वर्षीय रिटायर्ड जस्टिस विजय शंकर दवे ने पहला वोट डाला।</p>
<p>3 साल की देरी के बाद करीब 8 साल बाद हो रहे इन चुनाव में 23 पदों के लिए 234 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। इसके लिए कुल 258 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। जहां प्रदेश के 84,247 अधिवक्ता बतौर मतदाता के रूप में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव में इस बार पहली बार महिला वकीलों को आरक्षण दिया गया है। वहीं इस बार सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी की निगरानी में चुनाव कराए जा रहे हैं। मतदान के बाद सभी मतपेटियां जिला जज के पास जमा कराई जाएगी, जो कल पुलिस सुरक्षा में जोधपुर पहुंचेगी। जहां 29 अप्रैल से मतगणना शुरू होगी। करीब 1 महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद चुनाव परिणाम घोषित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:57:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला आरक्षण बिल में संशोधन नहीं हो पाया, मैं सभी माताओं-बहनों से माफी मांगता हूं, मोदी ने कहा- विपक्ष ने नारी शक्ति की उड़ान को रोका</title>
                                    <description><![CDATA[महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिरने पर पीएम मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस समेत कई दलों पर “लटकाना, अटकाना, भटकाना” की राजनीति का आरोप लगाया। पीएम ने कहा, महिलाओं के अधिकार रोककर जश्न मनाना नारी सम्मान के खिलाफ है। इसे “ईमानदार प्रयास की हत्या” बताते हुए उन्होंने कहा—देश की महिलाएं यह अपमान कभी नहीं भूलेंगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/womens-reservation-bill-could-not-be-amended-i-apologize-to/article-150969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy77.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संशोधन विधेयक गिरने के बाद शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। उन्होंने इस बिल के गिरने का जिम्मेदार विपक्ष को ठहराया। मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस का काम लटकाना, अटकाना और भटकाना है।<span>  </span>मोदी ने कहा कि देश की महिलाओं ने इस पूरे घटनाक्रम को ध्यान से देखा। मुझे भी गहरा दुख हुआ जब प्रस्ताव गिरने के बाद कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा जैसी वंशवादी राजनीति करने वाली पार्टियां जश्न मना रही थीं। महिलाओं के अधिकारों को रोकने के बाद इस तरह का व्यवहार बेहद निराशाजनक था। यह सिर्फ मेज थपथपाने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह नारी गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिलाएं ये अपमान भूलेंगी नहीं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ण्पीएम ने कहा कि महिलाएं बहुत कुछ सह सकती हैं, लेकिन अपमान को कभी नहीं भूलतीं। संसद में जो कुछ हुआ, उसकी छाप देश की हर महिला के मन में लंबे समय तक बनी रहेगी। जब भी ये नेता जनता के बीच जाएंगे, महिलाओं को यह जरूर याद रहेगा कि इन्हीं लोगों ने उनके अधिकारों से जुड़े प्रस्ताव का विरोध किया और उसके गिरने पर खुशी जताई थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इस ईमानदार प्रयास को विफल करना भ्रूण हत्या के समान </span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने इस ईमानदार प्रयास को विफल कर दिया, जो एक तरह से भ्रूण हत्या के समान है और इस तरह वे नारी शक्ति तथा संविधान के अपराधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण के खिलाफ रही है और हर बार इसमें रोड़े अटकाती रही है। इस बार भी कांग्रेस ने बहाने बनाकर, तकनीकी पेच खड़े कर देश को गुमराह किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 10:34:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला आरक्षण से जुड़ा विधयेक पारित नहीं होना लोकतंत्र की बड़ी जीत : केंद्र सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कर रही थी साजिश, प्रियंका ने कहा- यह विपक्ष की एकता की जीत</title>
                                    <description><![CDATA[गांधी ने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने को “लोकतंत्र की जीत” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इसके जरिए परिसीमन में मनमानी और जातिगत जनगणना से बचना चाहती थी। विपक्ष की एकता को उन्होंने अहम बताया। साथ ही कहा, महिलाएं अब दिखावे नहीं, असली मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रही हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bill-related-to-womens-reservation-not-being-passed-big-victory/article-150911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(11)2.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधयेक लोकसभा में पारित नहीं होने को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया है। गांधी शनिवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और देश के संघीय ढांचे में बदलाव की साजिश कर रही थी, जिसे विपक्ष ने मिलकर विफल कर दिया। उन्होंने कहा, यह संविधान की जीत है, देश की जीत है और विपक्ष की एकता की जीत है। सत्ता पक्ष के नेताओं के चेहरों पर यह साफ दिख रहा था कि उन्हें बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संकेत दिया था कि यदि विपक्ष सहमत नहीं होगा, तो वह कभी चुनाव नहीं जीत पाएगा। इन बयानों से ही सरकार की मंशा स्पष्ट हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर एक ऐसा बिल पास करवाना चाहती थी, जिससे उसे परिसीमन में मनमानी करने की आजादी मिल जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष से समर्थन लेना और उसके बाद परिसीमन प्रक्रिया में स्वतंत्रता हासिल करना। इस बहाने वह जातिगत जनगणना के आंकड़ों से भी बचना चाहती थी। उन्होंने कहा, यह सिर्फ महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि परिसीमन से जुड़ा हुआ बड़ा सवाल था। ऐसे में विपक्ष का समर्थन करना संभव नहीं था। कांग्रेस महासचिव ने भाजपा पर महिलाओं के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की महिलाएं सब देख रही हैं। उन्होंने उन्नाव, हाथरस, महिला खिलाड़ियों के आंदोलन और मणिपुर की घटनाओं का उललेख करते हुए कहा कि सरकार ने इन मामलों में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा, आज वही सरकार संसद में महिलाओं की हितैषी बनने की कोशिश कर रही है, लेकिन देश की महिलाएं अब जागरूक हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने यह साबित कर दिया है कि जब सभी दल साथ आते हैं, तो सरकार को चुनौती दी जा सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रियंका ने यह भी कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने के पक्ष में हैं, बशर्ते इसे सही तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने सरकार द्वारा इस दिन को ब्लैक डे कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सरकार के लिए झटका है और ऐसा झटका जरूरी था। उन्होंने कहा, देश की महिलाएं अब सिर्फ प्रचार और दिखावे से प्रभावित नहीं होंगी। वे वास्तविक मुद्दों को समझ रही हैं और सरकार से जवाब मांग रही हैं। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 14:17:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राज्यसभा में उठी 13 वर्षो से ठप पड़ी राष्ट्रीय एकता परिषद को सक्रिय करने और इसकी बैठक बुलाने की मांग, समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने बोला तीखा हमला</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा में राष्ट्रीय एकता परिषद को 13 साल बाद सक्रिय करने, आईटी रोजगार संकट, किसानों की दिक्कतें, छावनी चुनाव, फर्जी प्रमाणपत्र और महंगे इलाज जैसे मुद्दे उठे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/demand-raised-in-rajya-sabha-to-activate-the-national-unity/article-141667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पिछले 13 वर्षों से ठप पड़ी राष्ट्रीय एकता परिषद् को सक्रिय करने और इसकी बैठक बुलाने की मांग सोमवार को राज्यसभा में की गयी। समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने वर्ष 1961 मेंं राष्ट्रीय एकता परिषद का गठन किया था। इस परिषद का कार्य राष्ट्रीय एकता के विषयों पर सरकार को सलाह देना था। </p>
<p>उन्होंने कहा, करीब सवा सौ सदस्यों वाली इस परिषद में प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं और राज्यों के मुख्यमंत्री उसके सदस्य होते हैं । इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, पत्रकार और शिक्षाविद आदि भी इसके सदस्य होते हैं। उन्होंने कहा कि यह परिषद समान नागरिकता और धार्मिक सछ्वावना जैसे जीवन का आधार माने जाने वाले मूल्यों पर विचार विमर्श के बाद सलाह देती थी। उन्होंने कहा कि अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आज इन मूल्यों पर हमला हो रहा है। यह परिषद इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है लेकिन पिछले 13 वषों से इसकी कोई बैठक नहीं हुई है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार को इस परिषद को दोबारा सक्रिय करने का निर्देश दिया जाना चाहिए जिससे कि जीवन का आधार माने जाने वाले मूल्यों की रक्षा की जा सके। काग्रेस के अशोक सिंह ने देश में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों में कर्मचारियों की भर्ती में कमी और उनके वेतन का मुद्दा उठाया । उन्होंने कहा कि इन कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या निरंतर कम हो रही है और कालेजों में होने वाले परिसर प्लेसमेंट में भी कमी आई । उन्होंने कहा कि जिन छात्रों को नियुक्ति पत्र मिले हैं उन्हें ज्वाइन नहीं कराया जा रहा। सदस्य ने कहा कि एआई के कारण कंपनी 25 प्रतिशत कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही हैं और वेतन ढांचा कई वर्षों से वही बना हुआ है और इसमें बढोतरी नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि केवल डिजिटल नारों से युवाओं का कल्याण नहीं हो सकता और सरकार को एक इस बारे में श्वेत पत्र लाना चाहिए </p>
<p>भाजपा के सतपाल शर्मा ने छावनी बोर्डों के काफी समय से लंबित चुनावों को जल्द कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इसके कारण छावनी क्षेत्रों में विकास और बुनियादी कार्य लटके पड़े हैं। उन्होंने पारदर्शिता बढाने के लिए  छावनी बोर्ड अधिनियम में सुधार किये जाने की मांग की। भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर उनके हक छीने जा रहे हैं। उनकी आरक्षण की सुविधा भी प्रभावित हो रही है। नौकरियों पर नकली लोग पदों पर कब्जा कर रहे हैं। </p>
<p>बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने किसानों की समस्या का मुद्दा उठाया और कहा कि उन्हें विभिन्न तरह की दिक्कतों का सामाना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मंडियों में खरीद नहीं हो पा रही है विशेष रूप से धान की खरीद बहुत अधिक प्रभावित है जिससे किसानों को सस्ते  दाम अपनी उपज बेचनी पड़ रही है। </p>
<p>अन्नाद्रमुक के एम धनपाल ने लोगों की सेवा और समाज कल्याण में योगदान के लिए तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता को भारत रत्न दिये जाने की मांग की। आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने निजी अस्पतालों में दिनों दिन महंगे होते जा रहे उपचार और मरीजों की समस्याओं को उठाया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 13:22:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पर रोक : हाईकोर्ट ने आरक्षण में गड़बड़ी बताई, सरकार से जवाब तलब; जानें वजह</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को अपने महत्वपूर्ण निर्णय में प्रदेश में चल रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/uttarakhand-panchayat-election-hc-stay-news-2025/article-118270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/edit.png" alt=""></a><br /><p>नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को अपने महत्वपूर्ण निर्णय में प्रदेश में चल रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी। साथ ही सरकार से जल्द से जल्द जवाब देने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेन्दर और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने वीरेन्द्र सिंह बुटोला और गणेश दत्त कांडपाल की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आज यह आदेश जारी किए।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं की ओर से पृथक पृथक रूप से दायर याचिकाओं में कहा गया कि सरकार ने प्रदेश में चल रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जो आरक्षण तय किया है वह गलत है। सरकार की ओर से जो आरक्षण नियमावली बनाई गई है, उसे गजट नोटिफिकेशन नहीं किया गया है। इसलिए आरक्षण की प्रक्रिया गलत है। इस बिन्दु पर खंडपीठ ने विगत 20 जून को सुनवाई करते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।</p>
<p>आज सरकार इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। दूसरी ओर सरकार की तरफ से कहा गया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव घोषित हो गए हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार इसमें अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर की ओर से कहा गया कि पूरी मशीनरी चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त है। ऐसे में रोक लगाना गलत है। अधिवक्ता अनिल जोशी ने बताया कि अदालत ने अंत में पूरी चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से कहा है कि वह जल्द से जल्द जवाब पेश करे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव चल रहे हैं। सरकार ने दो दिन पूर्व चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Jun 2025 14:11:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉलेज एडमिशन में लाडलियों को मिला रिजर्वेशन, ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में होगा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में तीन गर्ल्स कॉलेज हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कन्या महाविद्यालय नहीं हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/laadlis-get-reservation-in-college-admission/article-116845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय महाविद्यालयों में एडमिशन लेने वाली छात्राओं के लिए खुशखबरी है। कॉलेज आयुक्तालय ने सह शिक्षा (कोएड) गवर्नमेंट कॉलेजों में 30 प्रतिशत सीटें बालिकाओें के लिए आरक्षित की है। ताकि, उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ सके। यह सुविधा बालिकाओं को इसी सत्र से मिलेगी। हालांकि, तीस प्रतिशत सीटें रिर्जव रखी जाने से छात्रों को सीट मिलने के अवसर कम हो जाएंगे। क्योंकि, बालिकाएं एडमिशन के लिए आवेदन राजकीय कन्या महाविद्यालय के साथ कोएड कॉलेजों में भी करती हैं। ऐसे में गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन नहीं होने पर उनका रुख कोएड कॉलेजों में होगा और उनकी परसेंटेज लड़कों के मुकाबले अधिक होती है। ऐसे में नियमित प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या अधिक रह सकती है। </p>
<p><strong>ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में होगा फायदा</strong><br />हाल ही में जारी हुए 12वीं बोर्ड के परिणाम में प्रथम श्रेणी से पास होने वाले विद्यार्थियों में लड़कियों की संख्या अधिक है। ऐसे में कॉलेजों में कटऑफ का लेवल हाई रहने से एडमिशन की मारामारी बनी रहेगी। शहर में तीन गर्ल्स कॉलेज हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कन्या महाविद्यालय नहीं हैं। ऐसे में राजकीय कोएड कॉलेजों में बालिकाओं के लिए सीट मिलने के अवसर बढ़ जाएंगे।</p>
<p><strong>सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ</strong><br />कॉलेज शिक्षकों का कहना है, सह शिक्षा वाले सरकारी कॉलेजों में एडमिशन में बालिकाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें रिजर्व करने से उच्च शिक्षा में उनकी संख्या बढ़ेगी। शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में गर्ल्स कॉलेज नहीं होने से अभिभावक छात्राओं को रेगुलर एडमिशन नहीं दिलाते। जिसकी वजह से वे सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाती हैं। ऐसे में सरकार ने एडमिशन में तीस प्रतिशत सीटें आरक्षित कर देने से अभिभावकों का रुझान बढ़ेगा। बालिकाओं को आसानी से एडमिशन मिलने से उनकी संख्या में इजाफा होने के साथ स्कॉलरशिप सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।  </p>
<p><strong>शहरी कॉलेजों में हाई रहेगा कटऑफ का पारा </strong><br />जिले में राजकीय कन्या महाविद्यालय 6 हैं। इनमें दो इसी वर्ष नए खुले हैं। जिनमें कैथून व सुकेत शामिल हैं। नवीन कन्या महाविद्यालयों में इसी सत्र से एडमिशन दिए जाएंगे। हालांकि, कैथून, सुकेत व रामपुरा कॉलेज के मुकाबले जेडीबी आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स गर्ल्स कॉलेज साधन संसाधनों में मजबूत स्थिति में है। ऐसे में छात्राओं इन कॉलेजों में एडमिशन लेने में प्राथमिकता रहेगी  लेकिन कटऑफ अधिक होने के कारण छात्राओं का रुख शहर के कोएड कॉलेजों की ओर बढ़ेगा। जिससे कटऑफ का लेवल अधिक  होने से छात्रों के लिए सीटें मिलना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि,गर्ल्स कॉलेज में छात्र आवेदन नहीं कर सकते लेकिन छात्राएं कोएड कॉलेज में एडमिशन के लिए एप्लाई कर सकतीं हैं। ऐसे में छात्राओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित होने से छात्रों के अवसर कम हो जाएंगे।  </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br />कॉलेजों में सीटों की संख्या के मुकाबले दोगुने आवेदन आते हैं। परसेंटेज अधिक होने के बावजूद एडमिशन नहीं मिल पाता है। ऐसे में सरकार ने कुल सीटों में से 30 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित कर देने से एडमिशन की राह आसान कर दी है। <br /><strong>- वैशाली नागर, छात्रा, आकशवाणी </strong></p>
<p>12वीं बोर्ड आर्ट्स में मेरी 85% बनी है। रिजल्ट अच्छा रहने से कटऑफ अधिक रहेगी। ऐसे में हमारे लिए तीस प्रतिशत सीटे आरक्षित रहने से रेगुलर एडमिशन मिलने की संभावना बढ़ गई है। <br /><strong>- प्रियंका गोचर, छात्रा बोरखेड़ा</strong></p>
<p>सरकार ने बालिका शिक्षा बढ़ाने की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है। उच्च शिक्षा में छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए राजकीय महाविद्यालयों (कोएड) में छात्राओं को प्रवेश में 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई है। इसका फायदा ग्रामीण अंचल के महाविद्यालयों में नजर आएगा। छात्राओं का रेगुलर एडमिशन होगा तो उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।<br /><strong>- प्रो. रोशन भारती, प्रिंसिपल गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 15:51:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुस्लिम ठेकेदारों को 4 फीसदी आरक्षण खुलेआम तुष्टीकरण की राजनीति, भाजपा ने की कांग्रेस की आलोचना </title>
                                    <description><![CDATA[समुदायों के समर्थन से सत्ता में आए मुख्यमंत्री ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को क्यों भुला दिया और कर्नाटक में हिंदुओं के साथ हो रहे अन्याय की उपेक्षा क्यों की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/percent-reservation-for-muslim-contractors-openly-appease%C2%A0/article-108248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/bjp-logo2.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक प्रदेश भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकारी निविदाओं में मुस्लिम ठेकेदारों को चार फीसदी आरक्षण देने का फैसला खुलेआम तुष्टीकरण की राजनीति है। येदियुरप्पा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि सरकारी निविदाओं में चार प्रतिशत आरक्षण मुसलमानों को दिया जायेगा। सवाल यह है कि सिर्फ मुसलमानों को ही क्यों? सभी समुदायों के समर्थन से सत्ता में आए मुख्यमंत्री ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को क्यों भुला दिया और कर्नाटक में हिंदुओं के साथ हो रहे अन्याय की उपेक्षा क्यों की। </p>
<p>आरोप लगाया कि विदेश में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्रों के लिए वित्तीय सहायता 20 लाख से बढ़ाकर 30 लाख कर दी गई है। साथ ही मुस्लिम महिलाओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए धन आवंटित किया गया है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा , कर्नाटक और पूरे देश में लव जिहाद से सबसे ज़्यादा हिंदू महिलाएं प्रभावित हैं। फिर मुस्लिम महिलाओं की आत्मरक्षा के लिए खास तौर पर पैसे क्यों आरक्षित किए जा रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री भूल गए हैं कि वे सिर्फ मुसलमानों के नहीं बल्कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर बहुसंख्यक समुदाय के कल्याण की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि भाजपा भ्रष्ट और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण से प्रेरित सरकार के ख़लिाफÞ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी।</p>
<p>समाज के हर वर्ग को वित्तीय सहायता दिये जाने की मांग की।   भाजपा नेता ने वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एवं सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना द्वारा उल्लिखित हनी ट्रैप विवाद पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, उन्होंने खुलासा किया कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 48 नेता इस हनी ट्रैप का शिकार हुए हैं। गृह मंत्री ने शुरू में कहा था कि मामले की जांच की जाएगी, लेकिन बाद में उन्होंने यह कहते हुए अपना बयान वापस ले लिया कि कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। भाजपा और जनता दल (सेक्युलर)) की मांग है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए या फिर उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश से जांच करायी जाए। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 22 Mar 2025 11:03:12 +0530</pubDate>
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