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                <title>France - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एन.पी.टी. के आसपास की स्थिति चिंताजनक, पश्चिमी देश इस संधि का कर रहा राजनीतिकरण : रूसी दूत</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा में रूसी राजदूत गेनेडी गैतिलोव ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के राजनीतिकरण पर चिंता जताई है। उन्होंने फ्रांस द्वारा "रूसी खतरे" के बहाने परमाणु हथियारों के संचय को वैश्विक स्थिरता के लिए जोखिम बताया। रूस ने स्पष्ट किया कि नाटो की शत्रुतापूर्ण योजनाओं का जवाब देने के लिए उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-situation-around-npt-is-worrying-western-countries-are-politicizing/article-151953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia2.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिये रूस के स्थायी प्रतिनिधि गेनेडी गैतिलोव ने 'आर.आई.ए. नोवोस्ती' को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि परमाणु अप्रसार संधि (एन.पी.टी.) के आसपास की स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि पश्चिमी देश "संधि के मंच पर" कार्यों का राजनीतिकरण करना चाहते हैं। परमाणु अप्रसार संधि का 11वां समीक्षा सम्मेलन सोमवार को न्यूयॉर्क में शुरू हुआ। रूसी राजनयिक ने कहा, "सच कहूं तो, संधि के आसपास की स्थिति चिंताजनक है। पश्चिमी देश एन.पी.टी. मंच पर कार्यों का राजनीतिकरण करना जारी रखे हुए हैं, और संधि से असंबद्ध राष्ट्रीय मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला रहे हैं।"</p>
<p>गैतिलोव ने कहा कि "रूसी खतरे" के बहाने पेरिस परमाणु हथियारों का संचय कर रहा है, जो रूस की सुरक्षा के लिये तत्काल जोखिम पैदा करता है। राजनयिक ने कहा, "फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 'परमाणु' आकांक्षाओं का हमारे लिये एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्हें एक काल्पनिक रूसी खतरे के माध्यम से उचित ठहराया जा रहा है। हमारा मानना है कि ऐसा घटनाक्रम न केवल रूस की सुरक्षा के लिये तत्काल जोखिम पैदा करता है, बल्कि रणनीतिक स्थिरता पर भी बहुत नकारात्मक प्रभाव डालता है।"</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यह "हमारे देश के प्रति फ्रांस और पूरे नाटो सैन्य-राजनीतिक गुट के शत्रुतापूर्ण इरादों की भी पुष्टि करता है।" रूसी राजदूत ने दावा किया कि रूस ने पेरिस द्वारा परमाणु हथियारों के संचय का जवाब देने के लिये पर्याप्त उपाय तैयार किये हैं। राजनयिक ने कहा, "रूसी संघ स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। हम एक जिम्मेदार और संयमित दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, यदि फ्रांस और अन्य नाटो देशों की उपरोक्त योजनाओं को पूरी तरह से लागू किया जाता है, तो निस्संदेह हमारे पास रूस और उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये पर्याप्त उपाय मौजूद हैं।"</p>
<p>मैक्रों ने मार्च में घोषणा की थी कि फ्रांस अपनी परमाणु निवारण नीति को मजबूत कर रहा है और उन्होंने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि फ्रांस को पूरे यूरोप को कवर करने के लिये अपनी परमाणु रणनीति का विस्तार करने पर विचार करना चाहिए। डेनमार्क ने पहले ही फ्रांस के साथ एक रणनीतिक परमाणु निवारण समझौता कर लिया है, जिसका उद्देश्य नाटो के निवारण तंत्र को पूरक बनाना है। पोलैंड भी इस पहल में शामिल होने के लिये पेरिस के साथ बातचीत कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 16:02:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फीफा विश्व रैंकिंग : 8 साल बाद फ्रांस फिर नंबर वन पर पहुंचा, वियतनाम ने मलेशिया पर 3-1 जीत के बाद 99वें स्थान पर लगाई छलांग </title>
                                    <description><![CDATA[मार्च में शानदार प्रदर्शन के बाद फ्रांस लगभग 8 साल में पहली बार FIFA रैंकिंग में शीर्ष पर। ब्राजील और कोलंबिया पर जीत ने स्पेन और अर्जेंटीना को पीछे छोड़ा। इंग्लैंड चौथे, पुर्तगाल पांचवें स्थान पर, मोरक्को अफ्रीका में सबसे ऊंची रैंक वाली टीम। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/fifa-world-ranking-after-8-years-france-reaches-number-one/article-148937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड)। मार्च महीने के अंतरराष्ट्रीय मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस लगभग 8 साल में पहली बार फीफा विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर वापस आ गया है। फीफा रैंकिंग की ताजा अपडेट के अनुसार,  ब्राजील और कोलंबिया पर दोस्ताना मैचों में जीत ने फ्रांस को स्पेन और अर्जेंटीना से ऊपर पहुंचा दिया। ‘लेस ब्लूज’(फ्रांस की टीम) ने सितंबर 2018 के बाद पहली बार शीर्ष स्थान हासिल किया है। शीर्ष तीन टीमों के बीच अंकों का अंतर बहुत कम था, जिससे मुकाबला काफी कड़ा रहा। स्पेन, जो सितंबर 2025 से शीर्ष पर था, मिस्र के साथ गोल रहित ड्रॉ खेलने के बाद दूसरे स्थान पर खिसक गया, जबकि विश्व चैंपियन अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर आ गया।</p>
<p><strong>इंग्लैंड चौथे स्थान पर बरकरार :</strong></p>
<p>इंग्लैंड चौथे स्थान पर बना हुआ है, जबकि पुर्तगाल अपने हालिया मैचों में एक जीत और एक ड्रॉ हासिल करने के बाद ब्राजील से आगे निकलकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उसे ब्राजील की फ्रांस के हाथों हार का फायदा मिला। शीर्ष 10 में बाकी टीमों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नीदरलैंड, मोरक्को, बेल्जियम और जर्मनी अपने-अपने स्थानों पर बने हुए हैं।</p>
<p><strong>मोरक्को, अफ्रीका की सबसे ऊंची रैंक वाली टीम :</strong></p>
<p>मोरक्को 1,755.87 अंकों के साथ रैंकिंग में 8 स्थान पर बना हुआ है और अफ्रीका की सबसे ऊंची रैंक वाली टीम के रूप में अपना दर्जा बरकरार रखे हुए है। सेनेगल 14वें स्थान पर है, जबकि नाइजीरिया (26वें), अल्जीरिया (28वें) और मिस्र (29वें) इस महाद्वीप की शीर्ष पांच टीमों की सूची पूरी करते हैं।</p>
<p><strong>वियतनाम की बड़ी छलांग : </strong>रैंकिंग तालिका में और नीचे देखें तो वियतनाम ने सबसे बड़ी छलांग लगाई है। मलेशिया पर 3-1 की जीत के बाद वह नौ स्थान ऊपर चढ़कर 99वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, मलेशिया को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, वह 17 स्थान नीचे गिरकर 138वें स्थान पर आ गया है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 11:57:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाइजीरियाई राष्ट्रपति अब्दुर्रहमान त्चियानी ने कहा, बेनिन के उत्तरी इलाके फ्रेंच और यूक्रेनी भाड़े के सैनिकों के नियंत्रण में</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति त्चियानी ने दावा किया कि उत्तरी बेनिन में फ्रेंच और यूक्रेनी भाड़े के सैनिक सक्रिय हैं। उन्होंने फ्रांस पर नाइजर को अस्थिर करने के लिए आतंकवादियों को प्रायोजित करने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nigerian-president-abdourahmane-tiwani-said-northern-areas-of-benin-are/article-143709"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)18.png" alt=""></a><br /><p>अबुजा। नाइजीरियाई राष्ट्रपति अब्दुर्रहमान त्चियानी ने कहा है कि बेनिन के उत्तरी इलाके फ्रेंच और यूक्रेनी भाड़े के सैनिकों के नियंत्रण में हैं।त्चियानी ने मंगलवार को नाइजीरियाई प्रसारक आरटीएन को दिये एक साक्षात्कार में कहा, हम बेनिन में भी ऐसी ही हालत देख रहे हैं। हमने अपनी चिंताएं बताई और उन्होंने हमसे कहा कि हमें बेनिन के अच्छे से एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली से ईर्ष्या हो रही है, लेकिन यह रक्षा प्रणाली कहां है, उत्तरी बेनिन में एक भी बेनिनी सैनिक नहीं है। आतंकवादी, फ्रेंच और यूक्रेनी भाड़े के सैनिक इस इलाके के प्रभारी हैं। यही सच्चाई है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि 29 जनवरी की सुबह, नियामे हवाईअड्डे पर हमला हुआ। नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने फ्रांस, बेनिन और कोटे डी आइवर पर हमलावरों को प्रायोजित करने का आरोप लगाया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। बाद में त्चियानी ने कहा कि अगर नियामी हवाईअड्डे पर हमला सफल हो जाता, तो फ्रांस खुफिया सेवा ने सात और हमलों की योजना बनायी थी।</p>
<p>राष्ट्रपति त्चियानी ने यह भी दावा किया कि फ्रेंच एजेंट माली, बुर्किना फासो और नाइजर को अस्थिर करने में मदद करने के लिए भाड़े के सैनिकों को हथियार, पैसा और सामान दे रहे थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 17:59:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी विदेश मंंत्री सर्गेई लावरोव का दावा, तनाव बढ़ाने की दिशा में पहला कदम नहीं उठाएंगे हम, न्यू स्टार्ट की अवधि समाप्त</title>
                                    <description><![CDATA[नयी सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (न्यू स्टार्ट) की अवधि समाप्त होने के बाद रूस अमेरिका के कदमों पर कड़ी नजर रखेगा। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि किसी औपचारिक प्रतिबंध के अभाव में अब यह देखना अहम है कि वाशिंगटन कैसे व्यवहार करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-foreign-minister-sergei-lavrov-claims-that-we-will-not/article-142673"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)3.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मंगलवार को कहा कि नयी सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (न्यू स्टार्ट) की अवधि समाप्त होने के बाद अब रूस इस बात पर बारीकी से नजर रखेगा कि अमेरिका क्या कदम उठाता है। लावरोव ने रूस के राष्ट्रीय टीवी चैनल के एक साक्षात्कार में कहा, किसी भी प्रतिबंध की औपचारिक अनुपस्थिति के बाद अब हम बहुत करीब से देखेंगे कि अमेरिकी पक्ष कैसे कार्य करेगा। साथ ही, हम इस स्थिति को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभालेंगे और तनाव बढ़ाने की दिशा में पहल करने वाले पहले पक्ष नहीं बनेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस तनाव बढ़ाने की दिशा में पहला कदम नहीं उठाएगा।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस की क्षमताओं को ध्यान में रखे बिना भविष्य में किसी बहुपक्षीय हथियार नियंत्रण समझौते की कल्पना करना कठिन है। इसके आगे विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से कहा है कि अब चीनियों के साथ समझौता करना आवश्यक है। चीन ने कई बार अपना रुख स्पष्ट किया है और हम उसका सम्मान करते हैं। लेकिन अगर इस प्रक्रिया का ध्यान इस तरह के त्रिपक्षीय मोड की ओर स्थानांतरित किया जाता है, तो यह केवल मुद्दे के मूल सार को किनारे करने की इच्छा हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 18:29:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस-जर्मनी और ऑस्ट्रिया अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपनाएंगे ओपन-सोर्स </title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस, जर्मनी समेत कई यूरोपीय देश डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के चलते अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर स्वदेशी व ओपन-सोर्स तकनीक अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/france-germany-and-austria-will-abandon-american-software-and-adopt/article-141999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूरोप के कई देश अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देश ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपने या ओपन-सोर्स विकल्प अपनाने का फैसला किया है। इसका मकसद है डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल आजादी। फ्रांस में सरकारी कर्मचारियों को अब जूम और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे अमेरिकी वीडियो कॉलिंग टूल्स छोड़ने होंगे। साल 2027 तक करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारी फ्रांस के अपने वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम वीआईएसआई का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि गैर-यूरोपीय सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहना डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। सरकार चाहती है कि संवेदनशील बातचीत और सरकारी जानकारी यूरोप के अंदर ही सुरक्षित रहे। फ्रांस के सिविल सर्विस मंत्री डेविड अमिएल ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी, संवेदनशील डेटा और रणनीतिक नवाचारों को गैर-यूरोपीय कंपनियों के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता।</p>
<p><strong>अमेरिका-यूरोप तनाव से बढ़ी चिंता</strong></p>
<p>यूरोप में यह चिंता तब और बढ़ी जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के एक अधिकारी पर प्रतिबंध लगाए। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने उस अधिकारी की ईमेल सेवा बंद कर दी। इससे यह डर पैदा हुआ कि अमेरिकी कंपनियां कभी भी सेवाएं रोक सकती हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि उसने आईसीसी की सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की और वह यूरोपीय सरकारों के साथ मिलकर डेटा सुरक्षा पर काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि उसका डेटा यूरोप में ही रहता है और यूरोपीय कानूनों के तहत सुरक्षित है। फिर भी यूरोप में यह भावना मजबूत हुई कि अगर किसी देश या कंपनी पर बहुत ज्यादा निर्भरता होगी तो उसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>जर्मनी-ऑस्ट्रिया और डेनमार्क के भी बदले रास्ते</strong></p>
<p>जर्मनी के श्लेसविग-होल्सटीन राज्य ने पिछले साल 44 हजार कर्मचारियों की ईमेल सेवाएं माइक्रोसॉफ्ट से हटाकर ओपन-सोर्स सिस्टम पर ले गईं। ऑस्ट्रिया की सेना ने रिपोर्ट लिखने और दस्तावेज बनाने के लिए अपनाया है। इसकी एक वजह यह भी है कि माइक्रोसॉफ्ट अब ज्यादा डेटा क्लाउड पर ले जा रहा है, जबकि लिबर ऑफिस आमतौर पर ऑफलाइन चलता है।</p>
<p><strong>पहले आजादी-बाद में बचत</strong></p>
<p>डेनमार्क की सरकार और कोपेनहेगन व आरहूस जैसे शहर भी ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर आजमा रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भविष्य में जोखिम बन सकती है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि तकनीक के मामले में किसी एक देश या कंपनी पर निर्भर रहना खतरनाक है। यही वजह है कि अब यूरोप में पहले आजादी, बद में बचत की सोच बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:39:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड के पास फ्रांस ने भेजा राफेल से लैस परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर, जबरन कब्जे की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय एकजुटता दिखाते हुए फ्रांस ने परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को उत्तरी अटलांटिक की ओर तैनात किया, यूरोपीय संप्रभुता को समर्थन जताया और अमेरिका संदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-sends-rafale-equipped-nuclear-aircraft-carrier-to-greenland-in-preparation/article-141142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)11.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप के देश एकजुट होते दिख रहे हैं। अमेरिका को खुली चेतावनी देने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में अपने एकमात्र परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को भेजा है। यह राफेल फाइटर जेट से लैस है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने इस तैनाती के बारे में ऐलान किया है। माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सेना के हमले के खतरे को देखते हुए फ्रांसीसी नौसेना ऐक्शन में आई है। यही नहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से पेरिस में मिलने जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि मैक्रों यूरोपीय एकजुटता को एक बार फिर से अपना समर्थन जाहिर करेंगे। साथ ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकजुटता को भी अपना समर्थन देंगे।</p>
<p><strong>फ्रांसीसी स्ट्राइक कैरियर कहां जा रहा?</strong></p>
<p>फ्रांस, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता आर्कटिक में सुरक्षा खतरे, ग्रीनलैंड के आर्थिक तथा सामाजिक विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसको फ्रांस और यूरोपीय संघ दोनों ही सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि चार्ल्स डी गॉल को कहां तैनात किया जा रहा है, लेकिन समाचार एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि यह उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है। हाल के दिनों में यह इलाका अमेरिका और यूरोप के बीच भूराजनीतिक तनाव का केंद्र बनकर उभरा है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नेवल एयर ग्रुप ओरियन 26 सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए तोउलोन नौसैनिक अड्डे से रवाना हो गया है। </p>
<p><strong>स्ट्राइक कैरियर के साथ पूरा बेड़ा</strong></p>
<p>फ्रांस के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में चार्ल्स डी गॉल और उसके विमान, साथ ही कई एस्कॉर्ट और सपोर्ट जहाज शामिल हैं। इसमें एक डिफेंस फ्रिगेट, एक सप्लाई शिप और एक हमलावर पनडुब्बी है। यह अभ्यास ऐसे समय में होने जा रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड को लगातार अमेरिका में मिलाने की धमकी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>जंग के मूड में यूरोप, टूट सकता है नाटो </strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए कमर कस चुके हैं। अमेरिका की सेना इसके लिए लगातार तैयारी भी कर रही है। ट्रंप के इस रुख से 32 देशों की सदस्यता वाले सैन्य संगठन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ यूरोपीय देश एकजुट हो रहे हैं। ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी जैसे ताकतवर यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी भी दी है। </p>
<p>इस बीच नाटो चीफ ने चेतावनी दी है कि बिना अमेरिका के नाटो देश अपनी रक्षा नहीं कर सकते हैं। ग्रीनलैंड का प्रशासन डेनमार्क देखता है जो नाटो का सदस्य देश है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। दरअसल, अमेरिका यहां पर अपना गोल्डन डोम डिफेंस सिस्टम लगाना चाहता है ताकि रूस और चीन की मिसाइलों से अमेरिका को बचाया जा सके। </p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को दी टैरिफ की धमकी</strong></p>
<p>यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। नाटो का आर्टिकल 5 कहता है कि अगर एक सदस्य देश पर दुश्मन का हमला होता है तो यह सभी देशों पर अटैक माना जाएगा। यही नहीं इस जंग में नाटो के हर सदस्य देश को सैन्य सहायता देना होगा। </p>
<p>नाटो के महासचिव जनरल मार्क रट ने सोमवार को खुलासा किया कि अमेरिकी सैन्य सहायता के बिना यूरोप अपनी खुद की रक्षा नहीं कर सकता है। उन्होंने यूरोपीय सांसदों से कहा कि यूरोप और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत है।</p>
<p><strong>जर्मनी-पोलैंड बनाना चाहेंगे परमाणु बम</strong></p>
<p>एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिका ठीक इसी समय यूरोप को अपने ऊपर निर्भर बनाए रखेगा और उसे एक विरोधी ब्लॉक के रूप में उभरने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप के शासनकाल में नाटो के आंतरिक नियम बदलने जा रहे हैं। अगर अमेरिका नाटो से निकलता है तो यूरोपीय सुरक्षा ढांचा खंड-खंड हो जाएगा। </p>
<p>यूरोपीय देश सामूहिक सुरक्षा की जगह पर अपनी-अपनी सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर देंगे। उन्होंने कहा कि जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देश परमाणु बम हासिल करने पर बहस करने लगेंगे। वहीं ब्रिटेन और फ्रांस असलियत में अमेरिका की कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। ये दोनों देश पूरे यूरोप की उस तरह से सुरक्षा नहीं कर पाएंगे जैसे कि अमेरिका करता है।</p>
<p><strong>अमेरिकी सेना का ग्रीनलैंड में बेस</strong></p>
<p>जैसे-जैसे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, यह द्वीप भू-राजनीतिक दबाव का एक मापक बन गया है। इससे पता चलता है कि पुरानी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था किस तरह कमजोर पड़ने लगी है। इन सभी के केंद्र में पिटुफिक अंतरिक्ष ठिकाना है, जिसे पहले थुले एयरबेस के नाम से जाना जाता था। शीतयुद्ध के दौरान एक चौकी के रूप में इस्तेमाल यह बेस अब अमेरिकी सेना के अंतरिक्ष बल केंद्र का एक अहम हिस्सा है, जो मिसाइल का पता लगाने से लेकर जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने तक हर चीज के लिए आवश्यक है। ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि उस समय बढ़ रही है, जब युद्ध के बाद की नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था शांति और सुरक्षा बनाए रखने में तेजी से निष्प्रभावी साबित हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:26:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांसीसी पीएम बना रहे कैबिनेट में फेरबदल की योजना, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के पीएम सेबास्टियन लेकॉर्नू बजट पारित होने के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारी में। विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/french-pm-is-planning-to-reshuffle-the-cabinet-focus-will/article-140815"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(19)1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकॉर्नू देश का बजट पारित होने के बाद अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल की योजना बना रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री के करीबी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस का बजट फरवरी के मध्य तक अंतिम रूप से मंजूर हो सकता है।</p>
<p>इससे पहले, ला फ्रांस इंसूमिस और नेशनल रैली पार्टियों ने घोषणा की थी कि वे 2026 के राज्य बजट के एक और हिस्से को बिना संसदीय मतदान के अपनाने की सरकार की योजना के विरोध में लेकॉर्नू सरकार के खिलाफ एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाएंगी।</p>
<p>गौरतलब है कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेदों के चलते फ्रांसीसी संसद दिसंबर 2025 के अंत तक 2026 के राज्य बजट को पारित करने में विफल रही थी।</p>
<p>इस स्थिति को देखते हुए, दिसंबर के अंत में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक विशेष कानून पर हस्ताक्षर किए थे, ताकि नए बजट के अभाव में भी सरकारी संस्थानों के वित्तपोषण की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके। जनवरी में 2026 के राज्य बजट को पारित करने के प्रयास दोबारा शुरू किए गए हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 17:30:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को दी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी, सामने आई चौकाने वाली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने से इनकार करने पर फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ की धमकी दी है। उन्होंने मैक्रों का ग्रीनलैंड पर असहमति वाला निजी संदेश भी लीक किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-you-dont-join-the-board-of-peace-trump-threatens/article-140230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ समय सभी देशों पर ट्रेरिफ लगा रहे हैं, इससे पहले उन्होंने भारत को भी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसी बीच अब ट्रंप ने फ्रांस के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। बता दें कि यह चेतावनी फ्रांस द्वारा ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार करने के बाद सामने आई है। </p>
<p>मीडिया से रूबरू होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, अगर फ्रांस ने दुश्मनाना रवैया अपनाया तो भारी टैरिफ लगाया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि इससे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को बोर्ड में शामिल होने पर मजबूर होना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, इस विवाद को और हवा तब मिली जब ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर मैक्रों का एक निजी संदेश साझा किया। बता दें कि संदेश में ग्रीनलैंड को लेकर असहमति जताई गई थी और दावोस में G7 नेताओं के साथ मुलाकात का प्रस्ताव भी रखा गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:16:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का होगा सौदा, फरवरी में फ्रांस से हो सकती है राफेल की 36 अरब डॉलर की बिग डील </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा। फरवरी में राष्ट्रपति मैक्रों के भारत दौरे के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर संभव हैं। डील करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए की बताई जा रही है, जिसमें एफ4 और एफ5 वैरिएंट शामिल होंगे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-will-be-a-deal-between-india-and-france-to/article-139604"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। भारत ने तय कर लिया है कि भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करने के लिए फ्रांस से राफेल फाइटर जेट खरीदे जाएंगे। फ्रांस की डिफेंस वेबसाइट ने इस डील को लेकर कई तरह के दावे किए हैं। इसमें बताया गया है कि भारत, फ्रांसीसी राफेल फाइटर जेट का सबसे एडवांस वर्जन खरीदने जा रहा है। इसमें कहा गया है कि भारत और फ्रांस के बीच इस समझौते पर फरवरी महीने में दस्तखत किए जाएंगे। ये सौदा उस वक्त होगा, जब फरवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत का दौरा करेंगे। इसने कहा है कि भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा होगा, जिसे मेक इन इंडिया के तहत भारत में स्थानीय स्तर पर बनाया जाएगा।</p>
<p><strong>एफ5 का निर्माण भारत में नहीं, बल्कि फ्रांस में : </strong></p>
<p>रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत और फ्रांस के बीच जो समझौता होगा, उसमें 90 नए राफेल एफ4 लड़ाकू विमान छोटी और मध्यम अवधि में भारत को डिलीवरी दी जाएगी। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पास मौजूद 36 राफेल लड़ाकू विमानों को एफ4 वैरिएंट में अपग्रेड किया जाएगा। ये अपग्रेडेशन उसी तरह का होगा, जैसा फ्रांसीसी वायुसेना और फ्रांस की नौसेना के मौजूदा वैरिएंट को एफ4 वैरिएंट में अपग्रेड किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कॉन्ट्रैक्ट का पहला चरण होगा। जबकि दूसरे चरण में मध्यम और लबी अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्ट होगा, जिसमें 24 राफेल एफ5 का एक बैच शामिल होगा, जिनमें सभी का उत्पादन फ्रांस में ही डसॉल्ट एविएशन कंपनी करेगी। यानि एफ5 का निर्माण भारत में नहीं, बल्कि फ्रांस में ही होगा।</p>
<p><strong>राफेल एफ5 को लेकर अड़चन बाकी :</strong></p>
<p>फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और फ्रांस के बीच एफ5 राफेल को लेकर पेंच फंसी हुई है। भारत अपने नए डिलीवर किए गए राफेल एफ4 को स्वतंत्र रूप से एफ5 स्टैंडर्ड में अपग्रेड कर सकता है या नहीं, इसको लेकर अड़चनें बाकी है। अभी यह पता नहीं है कि क्या पुराने राफेल एफ3, जिन्हें एफ4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जाएगा, क्या उन्हें भी एफ5 में बदला जा सकता है? इसको लेकर अभी पूरी तरह से मामला साफ नहीं हो पाया है। फरवरी महीने में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत का दौरा करेंगे, जहां वो एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। ये शिखर सम्मेलन 16 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगा और इसी दौरान भारत और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर जेट को लेकर समझौते पर साइन होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>फ्रांस की जीडीपी कुछ प्रतिशत बढ़ जाएगी :</strong></p>
<p>समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपए की डील होने वाली है। यानि करीब 36 अरब डॉलर से ज्यादा की ये डील होगी। हालांकि फ्रांसीसी मीडिया ने कहा है कि फिलहाल ये डील कितने अरब डॉलर की होगी, इसकी जानकारी आधिकारिक तौर पर नहीं दी गई है, लेकिन उसका कहना है कि ये डील इतनी विशालकाय होगी कि फ्रांस की जीडीपी कुछ प्रतिशत बढ़ जाएगी। फ्रांसीसी मीडिया ने कहा है कि भारतीय वायुसेना ने राफेल फाइटर जेट का पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त इस्तेमाल किया है और वायुसेना अधिकारियों का विश्वास राफेल में काफी बढ़ गया है। इसीलिए ये डील ऐसे लोगों को चुप करा देगा, जो पिछले कुछ महीनों से राफेल की बुराई कर रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 11:12:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस: नए सामाजिक सुरक्षा बजट के विरोध में निजी डॉक्टरों की 10 दिनी हड़ताल शुरू, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं</title>
                                    <description><![CDATA[बजट प्रस्तावों और कड़े नियंत्रणों के विरोध में फ्रांस के निजी डॉक्टरों ने सोमवार से काम बंद कर दिया है। सरकार ने सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-begins-10-day-strike-of-private-doctors-in-protest-against/article-138470"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/french-doctors-begin-10-day-strike-over-new-budget.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस में निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने इस वर्ष के सामाजिक सुरक्षा बजट में प्रस्तावित उपायों के विरोध में सोमवार से 10 दिनों की हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल का आयोजन कर रही यूनियनों ने निजी क्लीनिकों को बंद करने और परामर्श रद्द करने या स्थगित करने का आह्वान किया है। निजी क्लीनिकों के ऑपरेशन थिएटर भी बंद रहने की संभावना है, जिसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों पर पड़ सकता है।</p>
<p>फ्रेंच मेडिकल ट्रेड यूनियंस के परिसंघ (सीएसएमएफ) का कहना है कि उन्हें इस आंदोलन में 'अत्यधिक भागीदारी' की उम्मीद है। उनके 85 प्रतिशत सदस्यों ने हड़ताल पर जाने की योजना बनाई है। फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट ने रविवार को कहा कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और स्वास्थ्य सुविधा प्रदाता एजेंसियों के साथ मिलकर 'देखभाल की निरंतरता बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए हैं, ताकि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान नागरिकों को जोखिम में न डाला जाए।'</p>
<p>फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि जरूरत पड़ी तो सरकार 'अधिग्रहण' जैसे सख्त कदम उठा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री ने फ्रांसिसी समाचार पत्र 'ला रिपब्लिक डू सेंटर' को दिए एक साक्षात्कार में कहा, अगर जरूरत पड़ी तो हम 'जबरन काम पर बुलाने' का सहारा भी ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगी कि मरीजों का इलाज हो सके। इसके साथ ही पेशेवरों के हड़ताल करने के अधिकार का भी सम्मान किया जाएगा।</p>
<p>नया सामाजिक सुरक्षा वित्तपोषण कानून उन शुल्कों और अतिरिक्त फीस को नियंत्रित करने के लिए तंत्र पेश करता है जो निजी डॉक्टर वसूलते हैं, विशेष रूप से वे जो आधारभूत रिफंड दरों से अधिक हैं। सरकार स्वास्थ्य बीमा कोष (सीएनएम) को 'जनरल प्रैक्टिशनर्स' द्वारा ली जाने वाली अतिरिक्त राशि को सीमित करने की शक्ति देकर स्वास्थ्य खर्च को नियंत्रित करना चाहती है। निजी डॉक्टर इस तरह के कड़े नियंत्रणों के साथ-साथ सिक लीव के नियमों में बदलाव का भी विरोध कर रहे हैं। 1 जनवरी से, सिक लीव एक महीने में एक ही लेने का प्रावधान है। डॉक्टरों का दावा है कि अधिकारी 'तानाशाहीपूर्ण तरीके' से व्यवहार कर रहे हैं। वे नए डिजिटल प्रबंधन उपकरणों का भी विरोध कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 16:40:42 +0530</pubDate>
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                <title>ब्रिटिश, फ्रांसीसी वायु सेनाओं के हवाई हमले में सीरिया में मौजूद आईएस का संदिग्ध हथियार भंडार नेस्तोनाबुद</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया के पल्मायरा में संयुक्त हवाई हमला कर आईएस के भूमिगत हथियार डिपो को नष्ट कर दिया। सुरंगों को निशाना बनाने के लिए गाइडेड बमों का उपयोग किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nestonabud-a-suspected-is-weapons-store-in-syria-was-hit/article-138308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/london.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटिश एवं फ्रांसीसी वायु सेनाओं ने शनिवार शाम सीरिया में एक संयुक्त अभियान चलाकर इस्लामिक स्टेट (आईएस) समूह द्वारा पहले उपयोग किए गए एक संदिग्ध भूमिगत हथियार भंडारण स्थल पर बमबारी की। यह जानकारी ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने दी। मंत्रालय ने शनिवार रात एक बयान में कहा कि ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स के विमानों ने प्राचीन स्थल पल्मायरा से कुछ मील उत्तर पहाड़ों में एक भूमिगत सुविधा की पहचान की। उसने साथ ही यह भी कहा कि इस सुविधा का उपयोग संभवत: हथियारों एवं विस्फोटकों के भंडारण के लिए किया जाता था।</p>
<p>बयान में कहा गया कि ब्रिटिश वायु सेना ने सुविधा केंद्र तक जाने वाली कई सुरंगों को निशाना बनाने के लिए पेववे ढ्ढङ्क निर्देशित बमों का उपयोग किया और प्रारंभिक संकेत यह हैं कि लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया। इसने आगे कहा कि सुविधा के आसपास के क्षेत्र में कोई नागरिक बस्ती नहीं है और हमले से नागरिकों को किसी प्रकार के नुकसान का कोई संकेत नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 18:58:28 +0530</pubDate>
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                <title>फीफा विश्व कप : फ्रांस ने यूक्रेन को हरा किया क्वालीफाई, नॉर्वे और इटली ने भी जीत दर्ज की</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस ने किलियन एमबापे के दो गोल और माइकल ओलिस के शानदार खेल की बदौलत यूक्रेन को 4-0 से हराकर 2026 विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया। ओलिसे और स्थानापन्न ह्यूगो एकिटिके ने भी गोल दागे। नॉर्वे ने एस्टोनिया को 4-1 से हराकर शीर्ष स्थान की दौड़ मजबूत की, जबकि इटली ने अंतिम क्षणों में दो हेडर से मोल्दोवा को 2-0 से मात दी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/fifa-world-cup-france-defeated-ukraine-to-qualify-norway-and/article-132496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/500-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। किलियन एम्बापे के दो गोल और माइकल ओलिस के प्रभावशाली प्रदर्शन की बदौलत फ्रांस ने ग्रुप डी के मुकाबले में यूक्रेन को 4-0 से हराकर 2026 विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर लिया। डिडिएर डेसचैम्प्स की नई लाइनअप को यूक्रेन की रक्षा पंक्ति को भेदने में संघर्ष करना पड़ा। मेहमान गोलकीपर अनातोली ट्रुबिन ने मध्यांतर से पहले मेजबान टीम को रोके रखा। हाफटाइम के बाद एमबापे ने संयमित चिप के साथ गोल के गतिरोध को तोड़ा। इस गोल ने मैच को फ्रांस के पक्ष में मोड़ दिया। ओलिसे ने एक तेज टर्न और क्लिनिकल लो ड्राइव से बढ़त को दोगुना कर दिया। एमबापे ने एक ढीली गेंद पर तेज शाट लगाते हुए स्कोर 3-0 कर दिया। स्थानापन्न ह्यूगो एकिटिके ने अंत में चौथा गोल किया, जो उनका पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय गोल भी था।</p>
<p><strong>नॉर्वे ने एस्टोनिया को हराया :</strong></p>
<p>नॉर्वे ने एस्टोनिया पर 4-1 से जीत के साथ ग्रुप में शीर्ष स्थान के लिए अपनी राह पकड़ी। इटली ने आखिरी क्षणों में दो हेडर लगाकर मोल्दोवा को 2-0 से हराया।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/fifa-world-cup-france-defeated-ukraine-to-qualify-norway-and/article-132496</link>
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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 11:55:49 +0530</pubDate>
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