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                <title>Taliban - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>काबुल नरसंहार: अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर लगाया 400 लोगों की हत्या का आरोप, पाकिस्तानी सरकार ने किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमले का आरोप लगाया है, जिसमें 400 लोगों की मौत हो गई। तालिबान ने इसे "मानवता के विरुद्ध अपराध" बताया, जबकि पाकिस्तान ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसने केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। सीमा पर बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghanistan-accused-pakistan-of-killing-400-people-pakistani-government-rejected/article-146787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-attacked1.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की सेना पर राजधानी काबुल में नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमला करने का आरोप लगाया, जिसमें कम से कम 400 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी मंगलवार को अल जजीरा ने दी। हालांकि, पाकिस्तान ने इस दावे को झूठा और जनमत को गुमराह करने वाला बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उसने सोमवार को केवल काबुल और नांगरहार प्रांत में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। </p>
<p>अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के अनुसार, काबुल के उमर व्यसन उपचार अस्पताल पर हमला स्थानीय समयानुसार सोमवार रात लगभग नौ बजे (16:30 जीएमटी) हुआ। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अस्पताल में 2,000 बिस्तरों की क्षमता है और इस हमले में इमारत के बड़े हिस्से नष्ट हो गए। उन्होंने आगे कहा, दुर्भाग्यवश, मृतकों की संख्या अब तक 400 तक पहुंच चुकी है और लगभग 250 अन्य लोग घायल हुए हैं। बचाव दल वर्तमान में घटनास्थल पर मौजूद हैं और आग पर काबू पाने एवं पीड़ितों के शवों को निकालने का काम कर रहे हैं।</p>
<p>अफगान सरकार के एक अन्य प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने अस्पताल हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है और काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया है। उन्होंने एक्स पर कहा कि अफगान सरकार ऐसे कृत्य को सभी स्वीकृत सिद्धांतों एवं मानवता के विरुद्ध अपराध मानती है।</p>
<p>वहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया। एक्स पर एक पोस्ट में, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि हमलों में काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान और अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी लड़ाकों के सैन्य प्रतिष्ठानों एवं आतंकवादी समर्थन अवसंरचना को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का उपयोग निर्दोष पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा की गई लक्षित कार्रवाई सटीक एवं सावधानीपूर्वक थी ताकि कोई भी अप्रत्यक्ष नुकसान न हो। मंत्रालय ने कहा कि अफगान प्रवक्ता मुजाहिद का दावा पाकिस्तान विरोधी भावना भड़काने और तालिबान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के लिए अवैध समर्थन को छिपाने के उद्देश्य से किया गया है।</p>
<p>पाकिस्तान की ओर से ये टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से आतंकवाद से निपटने के प्रयासों को तुरंत तेज करने के आह्वान के कुछ घंटों बाद आईं। पाकिस्तान काबुल पर सशस्त्र समूहों, विशेष रूप से पाकिस्तानी तालिबान को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है  जिसके बारे में उसका कहना है कि वह पाकिस्तान में हमले करता है।</p>
<p>इससे पहले, अफग़ान अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को दक्षिण-पूर्वी अफग़ानिस्तान में हुई गोलीबारी में दो बच्चों सहित चार लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता मुस्तगफर गुरबाज ने कहा कि पाकिस्तान से दागे गए मोर्टार के गोले खोस्त प्रांत के गांवों में गिरे और कई घरों को नष्ट कर दिया। दोनों देशों के बीच पिछले महीने उस समय झड़प शुरू हुई जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले किए जिसमें इस्लामाबाद ने सशस्त्र समूहों को निशाना बनाने की बात की। अफगानिस्तान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और जवाबी हमला किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:21:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अफगान तालिबान ने आतंकी समूहों की सहायता वाले आरोपों को किया खारिज, कहा पड़ोसी देशों से संचालित</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान ने विदेशी आतंकी समूहों को मदद देने के आरोप नकारे। कहा, इस्लामिक स्टेट ने पड़ोसी देशों में ठिकाने बनाए, अफगानिस्तान पूरी तरह सुरक्षित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghan-taliban-rejects-allegations-of-supporting-terrorist-groups-says-operated/article-142149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगान तालिबान ने अफगानिस्तान में सक्रिय विदेशी आतंकवादी समूहों को किसी भी प्रकार की सहायता देने के आरोपों को खारिज कर दिया। उसने आरोप लगाया कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने पड़ोसी देशों में ठिकाने स्थापित किए हैं, जो पाकिस्तान की ओर एक अप्रत्यक्ष इशारा है। तालिबान के प्रवक्ता मुजाहिद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई देशों द्वारा तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान से कथित आतंकवादी गतिविधियों के बारे में व्यक्त की गई चिंताओं का जवाब देते हुए गुरुवार को कहा कि अफगानिस्तान सुरक्षित है और इस्लामी अमीरात में कोई विदेशी या दुष्ट समूह मौजूद नहीं है।</p>
<p>अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की हार का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इस आतंकी समूह ने हमारे पड़ोसी देशों में अपने ठिकाने बना लिए हैं। मुजाहिद ने देशों द्वारा उठाई गई सुरक्षा चिंताओं को बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि ये चिंताएं संयुक्त राष्ट्र में तालिबान के प्रतिनिधित्व की कमी के कारण उत्पन्न हुई हैं।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने किसी भी पड़ोसी देश का नाम नहीं लिया, जहां उनके अनुसार इस्लामिक स्टेट खोरासान ने कथित तौर पर शरण ली थी लेकिन तालिबान अधिकारियों ने एक से अधिक बार पाकिस्तान पर इस्लामिक स्टेट के गुर्गों को पनाह देने, सहायता करने, प्रशिक्षण देने एवं वित्तपोषण करने का आरोप लगाया है।</p>
<p>बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सत्र में, संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी, अलेक्जेंडर जुएव ने चेतावनी दी कि इस्लामिक अमीरात में आईएस-केपी क्षेत्र और उससे परे दोनों जगह सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है, जो तालिबान द्वारा बार-बार किए गए उन दावों के विपरीत है कि उसने देश के भीतर इसे हरा दिया है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट का खतरा लगातार बना हुआ है और इसके लिए तत्काल समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि यह खतरा अफगानिस्तान से परे पश्चिम और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों तक फैल रहा है और यहां तक कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच रहा है। पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने तालिबान पर आतंकी समूहों की सहायता करने और उन्हें बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब से इस्लामी समूह काबुल में सत्ता में वापस लौटा है, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूच अलगाववादियों जैसे आतंकवादी संगठनों को नई ताकत मिली है।</p>
<p>उन्होंने काबुल पर इन समूहों को सुरक्षित पनाह देने और अफगान क्षेत्र में परिचालन की स्वतंत्रता प्रदान करने का आरोप लगाया, जिसका उपयोग उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ विभिन्न हमले करने के लिए किया। अहमद ने इस्लामाबाद के बयान को दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी देशों में से एक रहा है और उसे कई नुकसान उठाने पड़े हैं, जिनमें 90,000 से अधिक लोगों की जान जाना और अवसंरचना एवं समग्र आर्थिक विनाश शामिल है।</p>
<p>चीन के प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान में अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और उइघुर आतंकवादियों जैसे आतंकी समूहों की मौजूदगी एवं गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की और तालिबान से कार्रवाई करने का आग्रह किया। काबुल के शहर-ए-नाव जिले में एक चीनी रेस्तरां पर आईएसआईएस के हमले का उल्लेख करते हुए, चीन के राजदूत ने कहा कि अफगान धरती पर आतंकवादी गतिविधियां बढ़ रही हैं और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:20:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत ने अफगानिस्तान को शुरू किया दवाओं का एक्सपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान की दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तालिबान सरकार ने भारत से दवाओं का आधिकारिक आयात शुरू किया है। शुरुआत में 25 तरह की दवाएं मंगाई जाएंगी। इससे अफगान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-started-exporting-medicines-to-afghanistan/article-136212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-paksitan-and-afganistan.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब भारत से दवाओं का आयात शुरू कर दिया है। तालिबान सरकार ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की दवाओं की गुणवत्ता खराब है और वे अफगान लोगों पर बुरा प्रभाव डाल रही हैं। इसके बाद तालिबान ने पाकिस्तान से दवाओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब काबुल की एक प्राइवेट फर्म के प्रतिनिधियों ने एक जानी-मानी भारतीय कंपनी के ब्रांच ऑफिस के उद्घाटन के साथ भारत से अफगानिस्तान में दवाओं के ऑफिशियल इंपोर्ट शुरू होने की घोषणा की है।</p>
<p><strong>25 तरह की दवाएं मंगा रहा अफगानिस्तान:</strong></p>
<p>हुर्रियत रेडियो इंग्लिश के पोस्ट के अनुसार, शुरूआती दौर में, 25 तरह की दवाएं इंपोर्ट की जाएंगी। इसमें भविष्य में अफगानिस्तान की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस प्रक्रिया को बढ़ाने की योजना है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान फार्मास्युटिकल सर्विसेज यूनियन के सदस्यों ने पुष्टि की कि देश में फिलहाल 400 से ज्यादा कंपनियां दवाओं के इंपोर्ट में लगी हुई हैं, जो हेल्थ स्टैंडर्ड के हिसाब से अच्छी क्वालिटी की दवाएं हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।</p>
<p><strong>अफगानिस्तान को दवा देता रहेगा भारत</strong></p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया कि एक भारतीय कंपनी के अधिकारियों ने दवा उत्पादन में अपने 90 सालों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए, हेल्थकेयर सेक्टर में अफगानिस्तान के साथ लगातार सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। तालिबान प्रशासित सरकार के पाकिस्तान से दवाओं के इंपोर्ट पर रोक लगाने के बाद, इंपोर्ट करने वालों को दवाएं हासिल करने के लिए दूसरे रास्ते खोजने की सलाह दी गई थी, जिसके बाद भारत से दवाओं के इंपोर्ट की यह ठोस पहल शुरू हुई।</p>
<p><strong>पाकिस्तान को बड़ा झटका</strong></p>
<p>पाकिस्तानी दवा निर्माता कंपनियां हर साल अफगानिस्तान को बड़ी मात्रा में दवाओं का निर्यात कर भारी मुनाफा कमाती थीं। उनकी दवाओं की गुणवत्ता निम्नस्तर की होती थी। इससे पाकिस्तानी कंपनियों की लागत कम आती थी, लेकिन वे अफगानिस्तान को पूरी कीमत पर दवाओं का निर्यात करती थीं। इससे अफगान लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता था। अब तालिबान सरकार के प्रतिबंध से पाकिस्तानी दवा निर्माता कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार बंद हो गया है। ऐसे में उन्हें दूसरे अल्टरनेटिव को देखना होगा, जहां माल पहुंचाने का लागत अफगानिस्तान के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 11:56:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने किया इनकार : बोले-  बगराम एयरबेस तो छोड़ो, एक इंच जमीन नहीं देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने बगराम एयरबेस पर अमेरिका के साथ किसी तरह की बातचीत से इनकार किया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/taliban-who-is-in-power-in-afghanistan-refused-bagram-airbase/article-127558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news22.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने बगराम एयरबेस पर अमेरिका के साथ किसी तरह की बातचीत से इनकार किया है। तालिबान आर्मी के चीफ ऑफ स्टाफ फसीहुद्दीन फितरत ने कहा कि हमारी जमीन के किसी हिस्से पर भी विदेशी ताकत से समझौता नहीं किया जाएगा। तालिबान सेना प्रमुख के अलावा अफगानिस्तान की सरकार ने भी अमेरिका को बगराम एयरबेस किसी सूरत में नहीं देने की बात कही है। तालिबान सेना प्रमुख कारी फसीहुद्दीन फितरत ने रविवार को कहा कि वॉशिंगटन बातचीत के जरिए बगराम पर फिर से नियंत्रण करना चाहता है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अमेरिकी इस बेस को बलपूर्वक हमसे नहीं ले सकते हैं। इसलिए राजनीतिक बातचीत के जरिए बगराम को लेने के चक्कर में लगे हैं। मैं साफ करना चाहता हूं कि बगराम एयरबेस पर अमेरिका के साथ कोई भी समझौता हमें अस्वीकार है।</p>
<p><strong>ट्रंप ने बगराम मांगते हुए अंजाम भुगतने की दी थी धमकी</strong><br />फितरत की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद आई है। ट्रंप ने बगराम नहीं देने पर तालिबान को अंजाम भुगतने की धमकी दी है। रणनीतिक रूप से अहम यह एयरबेस 2001 से 2021 तक यानी दो दशक अमेरिकी सेना का प्रमुख अड्डा रहा है। अब एक बार फिर से ट्रंप प्रशासन की नजर इस बेस पर है।</p>
<p><strong>20 साल जंग को तैयार </strong><br />तालिबान सेना प्रमुख से पहले अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने भी ट्रंप की धमकी को खारिज किया। उन्होंने कहा कि हम अमेरिका को साफ-साफ कह देना चाहते हैं कि हम आपसे अगले 20 साल लड़ने के लिए तैयार हैं। हम अपनी जमीन आपको कतई नहीं देगे। अफगान विदेश मंत्रालय के राजनीतिक निदेशक जाकिर जलाली ने कहा कि अफगानी लोग विदेशी सैनिक स्वीकार नहीं करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Sep 2025 11:43:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अफगानिस्तान में फिर जहर बो रहा पाक : भड़के तालिबान ने दी चेतावनी, बताया- इस्लाम के नाम पर धब्बा</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर काबिज तालिबान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/taliban-who-is-sowing-poison-again-in-afghanistan-warned-the/article-124132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)54.png" alt=""></a><br /><div>काबुल। पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर काबिज तालिबान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। इसका असर जमीन से लेकर जुबान तक देखने को मिल रही है। दोनों तरफ से एक दूसरे के खिलाफ बयान दिए जा रहे हैं और सीमा पर भी तनातनी बनी हुई है। बताया जा रहा है कि इसका प्रमुख कारण पाकिस्तान में तालिबान विरोधी नेताओं की एक बैठक है, जिसे एक थिंक टैंक आयोजित कर रहा है। तालिबान का कहना है कि इस बैठक को पाकिस्तान सरकार का समर्थन हासिल है। उसने कहा है कि पाकिस्तान का दोस्ती और दुश्मनी वाला दोहरा रवैया नहीं चलेगा। इतना ही नहीं, तालिबान समर्थकों को कहना है कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर धब्बा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>तालिबान विरोधी नेताओं को कौन बुला रहा</strong></div>
<div>दरअसल, पाकिस्तान के एक थिंक टैंक साउथ एशियन स्ट्रैटजिक स्टेबिलिटी इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी ने इस महीने के अंत में अफगानिस्तान के तालिबान विरोधी नेताओं की एक बैठक बुलाने का ऐलान किया है। ऐसा पहली बार होगा, जब पाकिस्तानी जमीन पर तालिबान विरोधी नेताओं की बैठक होगी। पाकिस्तान को पारंपरिक रूप से तालिबान का समर्थक माना जाता है। ऐसे में उसने अभी तक तालिबान विरोधी धड़े से दुश्मनी बनाकर रखी हुई थी। लेकिन, वर्तमान भू-राजनीतिक हालात के कारण वह तालिबान विरोधियों को साध रहा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>कौन-कौनसे नेता बैठक में होंगे शामिल</strong></div>
<div>रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान विरोधी नेताओं की इस बैठक में यूनिस कानूनी, मोहम्मद मोहकिक, अत्ता मोहम्मद नूर और सलाहुद्दीन रब्बानी शामलि हैं। ऐसी भी अटकलें हैं कि इस बैठक में पंजशीर के शेर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद भी शामिल होंगे। लेकिन, यह भी कहा जा रहा है कि अहमद मसूद इस बैठक से किनारा कर सकते हैं, क्योंकि इसमें शामिल होने से उनके अपने समर्थकों में गलत संदेश जा सकता है और वह पारंपरिक रूप से सहयोगी ताकतों को खो सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत को भी नुकसान पहुंचाने की तैयारी</strong></div>
<div>अगस्त 2023 में अफगानिस्तान में जब तालिबान ने कब्जा जमाया तो पाकिस्तान ने इसे अपनी जीत और भारत की हार के रूप में प्रचारित किया। पाकिस्तान ने कहा कि इससे भारत का अरबों डॉलर का निवेश डूब गया है। हालांकि, समय के साथ भारत और तालिबान साथ आए और पाकिस्तान दूर होता चला गया। हालात इतने खराब हैं कि तालिबान पाकिस्तान को देखना तक नहीं चाहता है। ऐसे में पाकिस्तान, तालिबान को परेशान कर भारत के हितों को नुकसान पहुंचाना चाहता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>तालिबान विरोधी नेताओं को साधने से क्या फायदा</strong></div>
<div>पाकिस्तान जानता है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर अब उसका कोई नियंत्रण नहीं बचा है। ऐसे में पाकिस्तान तालिबान को कमजोर करने के लिए अलग-अलग ताकतों से दोस्ती कर रहा है। इसमें अफगानिस्तान में सक्रिय आईएसआईएस-खुरसान भी शामिल है। लेकिन, आईएसआईएस की कमजोर पकड़ को देखते हुए पाकिस्तान अब तालिबान विरोधी नेताओं को साध रहा है, जिससे अफगानिस्तान को फिर से गृहयुद्ध की आग में ढकेला जा सके। इससे तालिबान पर दबाव बनेगा और वह पाकिस्तान की शर्तों को मानने के लिए मजबूर हो जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Aug 2025 15:12:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली में अफगान दूतावास पर कब्जा करना चाहते हैं तालिबानी, भारत को बुरा फंसाया</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान को चीन, पाकिस्तान समेत 14 देशों में इसकी अनुमति भी मिल गई है लेकिन अभी तक संयुक्त राष्ट्र समेत ज्यादातर देशों ने इसकी मंजूरी नहीं दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/taliban-want-to-capture-the-afghan-embassy-in-new-delhi/article-45945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/f-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तालिबानी आतंकियों और अफगानिस्तान की पूर्व अशरफ गनी सरकार के बीच वर्चस्व की जंग का अखाड़ा अब भारत बन गया है। चीन, पाकिस्तान समेत दुनिया के कई अन्य देशों में अफगानिस्तान के दूतावासों पर कब्जा करने के बाद अब तालिबानी आतंकी भारत में भी अपने पैर पसारने लगे हैं। अफगानिस्तान पर शासन कर रही तालिबानी सरकार ने नई दिल्ली में अफगान दूतावास पर कब्जा करने की औपचारिक कोशिश की लेकिन उसे दूतावास के अशरफ गनी काल के शीर्ष राजनयिक ने तत्काल खारिज कर दिया। वहीं इस पूरे घटनाक्रम से अब भारत बुरी तरह से फंस गया है। दरअसल, अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के ढाई साल बीत जाने के बाद भी तालिबानी अभी तक दुनिया से मान्यता हासिल नहीं कर सके हैं। </p>
<p>तालिबान ने दुनिया से संपर्क करने के लिए अफगानिस्तान के विभिन्न देशों में स्थित दूतावासों में अपने अधिकारियों को नियुक्त करना शुरू किया है। तालिबान को चीन, पाकिस्तान समेत 14 देशों में इसकी अनुमति भी मिल गई है लेकिन अभी तक संयुक्त राष्ट्र समेत ज्यादातर देशों ने इसकी मंजूरी नहीं दी है। अब तालिबान और भारत सरकार के बीच रिश्ते काफी मधुर हो गए हैं।</p>
<p><strong>तालिबान के इशारे पर दूतावास में खेल!</strong><br />भारत ने हाल ही में अपने दूतावास को फिर से खोल दिया है। तालिबान को अब अशरफ गनी सरकार के दौरान के राजदूत फरीद मामूमदजय को बदलने का बड़ा मौका दिख रहा है। इससे पहले तालिबान ने काफी प्रयास किए लेकिन भारत में उसकी दाल नहीं गली थी। वहीं अशरफ गनी सरकार के समय से भारत में राजदूत फरीद मामूमदजय और तालिबान के विदेश मंत्रालय के बीच जंग जैसा माहौल है। राजदूत फरीद तालिबानी विदेश मंत्रालय के आदेश को नहीं मान रहे हैं और पूरे दूतावास पर कब्जा बनाए हुए हैं।</p>
<p><strong>विवाद की शुरूआत 14 मई को</strong><br />इस पूरे विवाद की शुरूआत गत रविवार यानि 14 मई को हुई जब मीडिया में खबरें आईं कि तालिबान ने दिल्ली में अफगान दूतावास के एक कर्मचारी मोहम्मद कादिर शाह को अपना भारत में राजदूत नियुक्त किया है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अब मोहम्मद कादिर खान ही दिल्ली दूतावास में राजदूत का काम देखेंगे। अफगानिस्तान के टोलो न्यूज ने एक ट्वीट करके बताया कि भारत में रह रहे अफगान शरणार्थियों ने वर्तमान राजदूत फरीद मामूमदजय और दो अन्य राजनयिकों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। इसके बाद सोमवार को अफगान दूतावास ने एक बयान जारी करके इन मीडिया रिपोर्ट को खारिज कर दिया। राजदूत फरीद मामूमदजय ने कहा कि अफगान दूतावास एक व्यक्ति के उस दावे को खारिज करता है जिसमें उसने कहा था कि वह अब तालिबान की ओर से नई दिल्ली में दूतावास का प्रभारी है। उन्होंने कहा कि कादिर झूठी सूचना फैला रहे हैं और दूतावास के अधिकारियों के खिलाफ निराधार आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। माना जा रहा है कि कादिर शाह ने तालिबान के इशारे पर यह कदम उठाया है।</p>
<p><strong>तालिबान बनाम फरीद मामूमदजय</strong><br />भारत अफगानिस्तान पर वही नीति अपना रहा है जो ज्यादातर अन्य देश कर रहे हैं। भारत ने अभी तक तालिबान की सरकार को मान्यता नहीं दी है। भारत अभी भी फरीद मामूमदजय को ही अफगानिस्तान का राजदूत मानता है। इन सबके बीच भारत अब तालिबान के साथ बेहतर रिश्ते बना रहा है। भारत ने दूतावास को फिर से खोलने के साथ-साथ अफगानिस्तान को कई टन गेहूं भेजा है। तालिबान अपने राजदूत को नियुक्त करना चाहता है लेकिन इसके लिए भारत को वीजा देना होता। इसका तोड़ निकालते हुए तालिबान ने पहले से भारत में मौजूद अफगान अधिकारी कादिर को नियुक्त करने की चाल अब चली है। तालिबानी अक्सर भारत में अपने दूतावास को निर्देश देते रहते हैं लेकिन उनके निदेर्शों का यहां पर पालन नहीं होता है। हाल ही में अफगानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र की बैठक में तालिबान को मान्यता नहीं दिया गया। इसके बाद भी तालिबानी रूस,चीन, पाकिस्तान, ईरान, कतर समेत 14 देशों में अपने राजदूत नियुक्त कर चुके हैं। नई दिल्ली में अफगान दूतावास में मचे घमासान से भारत सरकार बुरा फंस गई है। एक तरफ राजदूत फरीद मामूमदजय हैं जिनके भारत के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और दूसरी ओर तालिबानी हैं जो भारत के साथ रिश्ते बेहतर कर रहे हैं। भारत को मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए अभी तालिबान की सख्त जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 10:56:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र ने की तालिबानी सजाओं पर पाबंदी की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह महीने में ही अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से 274 पुरुषों, 58 महिलाओं और दो लड़कों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/un-demands-ban-on-taliban-punishments/article-45051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/manoj-(630-×-400-px)-(16).jpg" alt=""></a><br /><p>काबुल। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के बाद से सार्वजनिक मृत्युदंड देने, कोड़े मारने और पत्थर मारने की सजा के लिए सोमवार को तालिबान की कड़ी आलोचना की गई और देश के शासकों से इस तरह की गतिविधियों को रोकने को कहा गया। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह महीने में ही अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से 274 पुरुषों, 58 महिलाओं और दो लड़कों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे गए। एजेंसी की मानवाधिकार प्रमुख फियोना फ्रेजर ने कहा, शारीरिक दंड देना, प्रताड़ना के खिलाफ समझौते का उल्लंघन है और इसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने मृत्युदंड पर तत्काल पाबंदी की मांग की। तालिबान के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अफगानिस्तान के कानून इस्लामी नियमों और दिशानिदेर्शों के अनुरूप हैं और बड़ी संख्या में अफगान नागरिक इन नियमों को मानते हैं। उसने एक बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और इस्लामी कानून के बीच टकराव की स्थिति में सरकार इस्लामी कानून का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>हवा हवाई निकला उदार नियमों का वादा : संयुक्त राष्ट्र की सोमवार को जारी रिपोर्ट में अगस्त 2021 में सत्ता में आने से पहले और बाद, दोनों समय तालिबानी गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के सत्ता में आने के बाद सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने की पहली सजा अक्टूबर 2021 में उत्तरी कापिसा प्रांत में दी गयी। </p>
<p>इसके अनुसार इस मामले में व्यभिचार के दोषी एक महिला और पुरुष को मौलवियों और स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी में 100-100 कोड़े मारे गये थे। तालिबान के ओहदेदारों ने दिसंबर 2022 में हत्या के एक दोषी को मौत की सजा दी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद सार्वजनिक मृत्युदंड का यह पहला मामला था। पीड़ित के पिता की राइफल से ही इस सजा को अंजाम दिया गया और यह मौलवियों तथा तालिबान अधिकारियों के सामने पश्चिमी फराह प्रांत में हुआ। सरकार के शीर्ष प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि सजा देने का फैसला बहुत सोच-समझकर किया गया और इसे देश की तीन सर्वोच्च अदालतों तथा तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबातुल्ला अखुंदजादा की मंजूरी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 May 2023 10:36:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन से शुरू होकर अफगानिस्तान तक जाएगी सड़क, सीपीईसी को पाकिस्तान से आगे बढ़ाने पर राजी हुआ तालिबान</title>
                                    <description><![CDATA[मुलाकात के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि दोनों पक्ष अफगान लोगों के लिए अपनी मानवीय और आर्थिक सहायता जारी रखने और अफगानिस्तान में सीपीईसी के विस्तार पर सहमत हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/road-starting-from-china-to-afghanistan-taliban-agreed-to-take/article-44956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/manoj-(630-×-400-px)-(13).jpg" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद।  अफगानिस्तान की सत्ता तालिबान के हाथ में है जिसे सरकार के रूप में किसी भी देश ने मान्यता नहीं दी है। लेकिन चीन और पाकिस्तान शुरूआत से ही अफगानिस्तान में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अब खबर है कि तालिबान चीन और पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का विस्तार करने के लिए सहमत हो गया है। संभावना है कि संकटग्रस्त देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर को फंड करने के लिए तालिबान के हाथ अरबों डॉलर का निवेश लगा है। चीन पहले ही अपने बीआरआई प्रोजेक्ट्स को पाकिस्तान से आगे ईरान और तुर्की तक ले जाना चाहता है। चीन के विदेश मंत्री किन गांग और उनके समकक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने शनिवार को इस्लामाबाद में मुलाकात की। दोनों ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और 60 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को पड़ोसी देश अफगानिस्तान तक ले जाने पर साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया। मुलाकात के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि दोनों पक्ष अफगान लोगों के लिए अपनी मानवीय और आर्थिक सहायता जारी रखने और अफगानिस्तान में सीपीईसी के विस्तार पर सहमत हुए हैं।</p>
<p><strong>तालिबान को निवेश की सख्त जरूरत</strong><br />चीनी और पाकिस्तानी अधिकारियों ने लगभग एक दशक पहले शुरू हुई बीआरआई के तहत निर्मित सीपीईसी प्रोजेक्ट को अफगानिस्तान तक विस्तारित करने पर चर्चा की है। नकदी संकट से जूझ रहे तालिबान ने भी इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश हासिल की इच्छा जाहिर की है। तालिबान सरकार में विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने भी इस्लामाबाद में अपने चीनी और पाकिस्तानी समकक्षों से मुलाकात की और इस समझौते पर पहुंचे। उनके उप प्रवक्ता हाफिज जिया अहमद ने इसकी पुष्टि की।</p>
<p><strong>तालिबान के हमदर्द देश</strong><br />तालिबान ने चीन से देश के समृद्ध संसाधनों में निवेश को बढ़ावा देने की भी उम्मीद जताई है, जिसका अनुमान 1 ट्रिलियन डॉलर है। तालिबान सरकार ने उत्तरी अमु दरिया बेसिन से तेल निकालने के लिए चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की एक सहायक कंपनी के साथ जनवरी में अपना पहला कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। चीन और पाकिस्तान के मंत्रियों ने अफगानिस्तान की विदेशी वित्तीय संपत्तियों को अनफ्रीज करने पर भी जोर दिया है। चीन, रूस और ईरान तालिबान से अच्छे संबंधों पर जोर देने वाले देशों में से हैं। औपचारिक मान्यता न देने के बावजूद इन्होंने तालिबान को करोड़ों की मदद मुहैया कराई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 May 2023 10:56:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लड़कियों की शिक्षा की वकालत करना पड़ा भारी, वकील को तालिबान ने किया गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[यूएनएएमए ने ट्वीटर पर कहा कि पेनपाठ के प्रमुख और लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने वाले वकील मतिउल्लाह वेसा को सोमवार को काबुल में गिरफ्तार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taliban-arrests-girls-education-advocate/article-41055"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/fsqnwiiwcaivi2i.jpg" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने मंगलवार को कहा कि अफगानी शासक तालिबान ने लड़कियों के शिक्षा अधिकार के लिए लडऩे वाले एक प्रमुख कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया है। यूएनएएमए ने ट्वीटर पर कहा कि पेनपाठ के प्रमुख और लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने वाले वकील मतिउल्लाह वेसा को सोमवार को काबुल में गिरफ्तार किया गया। यूएनएएमए वहां के अधिकारियों से उनके ठिकाने, उनकी गिरफ्तारी के कारणों को स्पष्ट करने और उनकी पहुंच कानून एवं परिवार तक सुनिश्चित करने की मांग करता है।</p>
<p>तालिबान 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में वापस लौटा है जिसके बाद उसने देश के सभी स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों से अपने यहां कार्यरत महिला कर्मचारियों को काम से निकालने का आदेश दिया। निजी और राज्य उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला शिक्षा को निलंबित कर दिया गया और लड़कियों के लिए माध्यमिक शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अफगान अधिकारियों के इस फैसले की कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वैश्विक नेताओं द्वारा कड़ी आलोचना की गई। अगस्त 2022 में जारी यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा से वंचित करने के लिए प्रतिबंध लगाने के बाद से देश की अर्थव्यवस्था को कम से कम 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है, जो देश के जीडीपी का 2.5 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर 30 लाख लड़कियां अपनी शिक्षा पूरी कर लेती और कार्यबल के रूप में कार्य करने में सक्षम होतीं, तो वे अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में कम से कम 5.4 अरब डॉलर का इजाफा करतीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Mar 2023 15:31:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तालिबान सरगना ने प्रशासन में काम कर रहे अधिकारियों के रिश्तेदारों को बर्खास्त करने का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान नेता अखुंदजादा ने सभी तालिबानी अधिकारियों को उनके प्रशासन में पहले से ही काम कर रहे अपने बेटों तथा अन्य रिश्तेदारों को बर्खास्त करने का भी आदेश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taliban-leader-orders-dismissal-of-relatives-of-officials-working-in-administration/article-40402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/haibatullah.jpg" alt=""></a><br /><p>काबुल। तालिबान के सर्वोच्च नेता ने भाई-भतीजावाद के खिलाफ एक फरमान जारी कर अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन में अधिकारियों को सरकारी पदों पर अपने रिश्तेदारों की भर्ती करने से रोक दिया है। तालिबान नेता अखुंदजादा ने सभी तालिबानी अधिकारियों को उनके प्रशासन में पहले से ही काम कर रहे अपने बेटों तथा अन्य रिश्तेदारों को बर्खास्त करने का भी आदेश दिया है। तालिबान के इस आदेश की सोशल मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। यह फरमान तालिबान सरकार के ट्विटर अकाउंट पर शनिवार देर रात को पोस्ट किया गया। फरमान में कहा गया है, मंत्रालयों, विभागों में सभी अधिकारियों और स्वतंत्र प्राधिकारियों को आदेश दिया जाता है कि किसी को भी सरकारी पदों पर परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों को नियुक्त करने की अनुमति नहीं है। इस ट्वीट में फैसले के पीछे की वजह का उल्लेख नहीं है, लेकिन अफवाहें हैं कि कई तालिबान अधिकारियों ने उच्च पदों पर अनुभवी पेशेवरों को नियुक्त करने के बजाय अपने बेटों तथा रिश्तेदारों की भर्ती कर दी है।</p><p>इस फैसले पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सोमवार को तालिबान सरकार के प्रवक्ता की टिप्पणी नहीं मिल पायी। तालिबान ने 20 साल बाद अमेरिकी और नाटो बलों की वापसी के बाद अगस्त 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता पर कब्जा किया था। अखुंदजादा के फरमान में सभी तालिबान अधिकारियों को रिक्त पदों पर अपने बेटों, परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों के बजाय अन्य लोगों की भर्ती करने का भी आदेश दिया गया है। तालिबान के शीर्ष नेतृत्व में इन दिनों विवाद चल रहा है। ऐसे में यह आदेश काफी अहम माना जा रहा है।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Mar 2023 10:55:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तालिबान सरकार के लिए चाणक्य बनने को तैयार भारत! देगा विदेश नीति और कूटनीति की ट्रेनिंग</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान सरकार ने इस ट्रेनिंग को लेकर खुद एक आदेश जारी किया है। इसमें तालिबान अधिकारियों से ट्रेनिंग में शामिल होने की अपील की गई है। उन्हें यह भी बताया गया है कि ट्रेनिंग के बाद इन अधिकारियों को एक रिपोर्ट भी सौंपनी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ready-to-become-chanakya-for-taliban-government-india-will-give/article-39679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/v-12.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। भारत ने तालिबान सरकार के विदेश मंत्रालय में कार्यरत अधिकारियों और डिप्लोमेट्स को ट्रेनिंग देने का फैसला किया है। यह ट्रेनिंग काबुल में भारतीय दूतावास के अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से देंगे। इसमें अंग्रेजी की समझ रखने वाले तालिबान अधिकारी शामिल होंगे। उन्हें विदेश नीति और कूटनीति की बारीकियों को समझाया जाएगा। तालिबान सरकार ने इस ट्रेनिंग को लेकर खुद एक आदेश जारी किया है। इसमें तालिबान अधिकारियों से ट्रेनिंग में शामिल होने की अपील की गई है। उन्हें यह भी बताया गया है कि ट्रेनिंग के बाद इन अधिकारियों को एक रिपोर्ट भी सौंपनी होगी।</p>
<p><strong>तालिबान ने अपने अधिकारियों को जारी किया आदेश</strong> : अफगानिस्तान के इस्लामी विदेश मंत्रालय कूटनीति संस्थान की तरफ से जारी पत्र के अनुसार, इसमें विदेश मंत्रालय के अंतर्गत शामिल सभी आतंरिक शाखाओं में काम करने वाले अधिकारी हिस्सा ले सकते हैं। पत्र में लिखा है कि काबुल में भारत के दूतावास ने ज्ञापन के माध्यम से, विदेश मंत्रालय ने कर्मचारियों के लिए एक अल्पकालिक आॅनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन की मंजूरी दी है। </p>
<p><strong>14 से 17 मार्च तक होगी ट्रेनिंग </strong>: इस पाठ्यक्रम को एमिनर्सिंग विद इंडियन थॉट्स का नाम दिया गया है। इसे 14 से 17 मार्च तक आयोजित किया जाना है। तालिबान ने पत्र के आखिर में लिखा है कि जो प्रतिभागी इस ट्रेनिंग में हिस्सा लेंगे, उन्हें आखिर में एक संक्षिप्त रिपोर्ट मंत्रालय को प्रस्तुत करनी होगी। इस पत्र पर मुफ्ती नुरुल्लाह आजम के हस्ताक्षर भी हैं। हालांकि, भारत की तरफ से इस ट्रेनिंग को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Mar 2023 10:58:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तालिबान प्रशासन व्याख्याता मशाल को तत्काल रिहा करें: संयुक्त राष्ट्र</title>
                                    <description><![CDATA[मशाल ने महिलाओं की उच्च शिक्षा को समाप्त करने वाले फरमान का विरोध करते हुए, दिसंबर में टीवी पर अपने डिग्री प्रमाणपत्रों को फाड़कर हंगामा खड़ा कर दिया। हाल के दिनों में घरेलू चैनलों ने मशाल को काबुल के आसपास किताबें ढोते और राहगीरों को देते हुए दिखाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/united-nations-immediately-release-taliban-administration-lecturer-mashal/article-36487"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/mashal.jpg" alt=""></a><br /><p>काबुल। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार से जुड़े विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने तालिबान प्रशासन से विश्वविद्यालय पत्रकारिता के व्याख्याता इस्माइल मशाल की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की है। बेनेट ने ट्वीट किया,  मैं तालिबान द्वारा शांतिपूर्ण शिक्षा कार्यकर्ता एवं विश्वविद्यालय व्याख्याता इस्माइल मशाल की गिरफ्तारी को लेकर चिंतित हूं। मशाल ने महिलाओं की उच्च शिक्षा को समाप्त करने वाले फरमान का विरोध करते हुए, दिसंबर में टीवी पर अपने डिग्री प्रमाणपत्रों को फाड़कर हंगामा खड़ा कर दिया। हाल के दिनों में घरेलू चैनलों ने मशाल को काबुल के आसपास किताबें ढोते और राहगीरों को देते हुए दिखाया। </p>
<p>जिसके बाद, अफगानिस्तान की महिलाओं की आजादी और शिक्षा को लेकर आवाज उठाने वाले मशाल को तालिबान के अधिकारियों ने हिरासत में लिया है। मशाल के सहयोगी फरीद अहमद फाजली ने मीडिया को बताया कि तालिबान शासन के  सदस्यों ने व्याख्याता को  बेरहमी से पीटा और उन्हें बहुत ही अपमानजनक तरीके से ले गए। सूचना और संस्कृति मंत्रालय के निदेशक अब्दुल हक हम्माद ने मशाल की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए  ट्वीट किया, शिक्षक मशाल कुछ समय से व्यवस्था के खिलाफ भड़काऊ गतिविधियों में शामिल थे। इसलिए, सुरक्षा एजेंसियां उन्हें जांच के लिए ले गईं हैं। फाजली ने कहा ,''मशाल ने काबुल के तीन विश्वविद्यालयों में एक दशक से अधिक समय तक व्याख्याता के पद पर कार्य किया। उन्हें बिना किसी अपराध इसलिए हिरासत में लिया गया, क्योंकि वह महिलाओं और पुरुषों को मुफ्त में किताबें दे रहे थे। उन्हें कहाँ रखा गया है, यह अभी तक नहीं पता चला है।''</p>
<p>मशाल ने महिलाओं की उच्च शिक्षा और सार्वजनिक जीवन जीने पर तालिबान सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने को लेकर गत दिसंबर को एक चैनल पर विरोध करते नजर आए थे, जिसमें उन्हें अपने डिग्री प्रमाण पत्र को नष्ट करते हुए दिखाया गया। तालिबान सरकार के खिलाफ विरोध जारी रखते हुए उन्होंने  काबुल के आसपास लोगों को किताबें बांटनी शुरू कर दीं। उनके इस सराहनीय कार्य को यहां के कई स्थानीय  टीवी पर दिखाया। इससे पहले व्याख्याता ने मीडिया से कहा, एक इंसान और एक शिक्षक के रूप में, मैं उनके लिए कुछ और करने में असमर्थ था और मुझे लगा कि मेरे प्रमाणपत्र बेकार हो गए हैं। इसलिए, मैंने उन्हें फाड़ दिए। मैं अपनी आवाज उठा रहा हूं। मैं अपनी बहनों के साथ खड़ा हूं...मेरा विरोध जारी रहेगा, भले ही इसमें मेरी जान भी चली जाए। उन्होंने कहा कि तालिबान ने अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने पर एक नरम शासन का वादा किया था, लेकिन इसके बजाय, उन्होंने महिलाओं पर कठोर प्रतिबंध लगाए हैं। उन्हें सार्वजनिक जीवन से बाहर कर दिया है। </p>
<p>गौरतलब है कि अधिकारियों ने गत दिसंबर को सभी सहायता समूहों को अपनी महिला कर्मचारियों को काम पर आने से रोकने का आदेश दिया। तब से उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में महिलाओं को काम करने की छूट दी है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में महिलाओं को काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, किशोरियों के लिए माध्यमिक विद्यालय भी एक साल से अधिक समय से बंद हैं और महिलाओं के पार्क, जिम और सार्वजनिक स्नानागार में जाने से पर भी पाबंदी लगा दी गयी है।तालिबान ने लड़कियों को यूनिवर्सिटी में पढऩे पर रोक लगाने के बाद अब महिलाओं को पूरी तरह शिक्षा से दूर करने वाला कदम उठाया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, तालिबान ने लड़कियों के प्राथमिक स्कूलों में जाने पर रोक लगा दी है। शिक्षकों से कहा गया है कि वे अब किसी भी उम्र की लड़कियों को नहीं पढ़ा पाएंगे। शिक्षा मंत्रालय और शरिया कानून लागू करने वाले मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक में इस पर फैसला लिया गया। तालिबान ने एक और सख्ती की है। उसने वयस्क महिलाओं के मस्जिदों में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है। महिला अधिकार कार्यकर्ता खदीजा के मुताबिक तालिबान के आने के बाद अफगानिस्तान में जो सुधार 20 साल में हुए थे, अब उन पर अंकुश लग चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Feb 2023 16:42:58 +0530</pubDate>
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