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                <title>Germany - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Germany RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम एशिया संकट : डोनाल्ड ट्रंप ने की फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना, होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना करते हुए ईरान पर उनके रुख को खतरनाक बताया है। ट्रंप का दावा है कि परमाणु संपन्न ईरान दुनिया को बंधक बना लेगा। वहीं, जर्मनी ने अमेरिका की युद्ध नीति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-donald-trump-sharply-criticized-friedrich-merz-also/article-152097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच गहराते मतभेद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मर्ज़ को लगता है कि ईरान का परमाणु हथियार संपन्न होना ठीक है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि जर्मनी आर्थिक और अन्य मोर्चों पर इतना खराब प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि जर्मन चांसलर को नहीं पता कि वह क्या कह रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो पूरी दुनिया को बंधक बना लिया जाता। उन्होंने कहा कि वह अभी ईरान के संबंध में वह कदम उठा रहे हैं, जो अन्य देशों या राष्ट्रपतियों को बहुत पहले कर लेने चाहिए थे। यह तीखी प्रतिक्रिया मर्ज़ द्वारा ईरान मुद्दे पर अमेरिकी दृष्टिकोण की आलोचना के बाद आई है। जर्मन चांसलर ने कहा था कि ईरान का नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है और ऐसा प्रतीत नहीं होता कि अमेरिका के पास इस युद्ध से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट योजना है। मर्ज़ ने होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वहां होने वाले व्यवधान के ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:52:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ सिंह ने जर्मनी को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सहयोग के विस्तार के लिए किया आमंत्रित : तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को बनाया जटिल, आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का कर रही सामना</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मनी के साथ रक्षा तकनीक के सह-निर्माण और नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने "आत्मनिर्भर भारत" को वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के रूप में पेश किया। पश्चिमी एशिया के तनाव और ऊर्जा सुरक्षा के बीच, दोनों देशों ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajnath-singh-invites-germany-to-expand-cooperation-in-defense-production/article-151268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी और साजो-सामान के संयुक्त विकास और निर्माण के महत्व पर बल दिया है। जर्मनी की तीन दिन की यात्रा पर गये राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी सरकार का “आत्मनिर्भर भारत" अभियान सह-निर्माण, सह-विकास और सह-नवाचार का निमंत्रण है। म्यूनिख होकर बर्लिन पहुंचे रक्षा मंत्री ने मंगलवार को जर्मनी के सांसदों को संबोधित करते हुए दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने की पुरजोर वकालत की। यात्रा के पहले दिन उन्होंने रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी जर्मनी की संसद की स्थायी समिति को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है और तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को अत्यधिक जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश के अनुकूल ढलने की तत्परता के साथ एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देख रहा है और जर्मन उद्योग के साथ साझेदारी बढ़ाने से दोनों देशों को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “हम जर्मनी के अग्रणी औद्योगिक उद्यमों की स्थापित क्षमताओं को पहचानते हैं। साथ ही उन्नत और उभरती प्रौद्योगिकियों में प्रसिद्ध जर्मन मिटेलस्टैंड (लघु एवं मध्यम आकार की कंपनियों) के जोश और गतिशीलता की सराहना करते हैं। भारत में भी हमारे स्टार्टअप और उद्यमशील निजी कंपनियां तेजी से हमारे बड़े और स्थापित रक्षा उद्यमों की क्षमताओं को बढ़ा रही हैं और उनका पूरक बन रही हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत और जर्मनी स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं और हमारी साझेदारी और भी गहरी हो सकती है।”</p>
<p>आधुनिक वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए राजना​थ सिंह ने समन्वित प्रतिक्रियाओं और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। यूरोपीय संघ के स्तर पर भी विचारों में स्पष्ट एकरूपता दिखाई देती है और यह भारत के साथ उसके बढ़ते जुड़ाव में परिलक्षित होती है, जिसमें भारत-यूरोपीय संघ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी भी शामिल है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने दोहराया कि भारत और जर्मनी न केवल रणनीतिक साझेदार हैं, बल्कि वर्तमान समय के वैश्विक विमर्श को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “हम स्थापित लोकतंत्र हैं जो साझा मूल्यों से बंधे हैं, और गतिशील अर्थव्यवस्थाएं हैं जो लचीलेपन, नवाचार और दृढ़ औद्योगिक भावना से संचालित हैं। सांसदों और समिति के सम्मानित सदस्यों के रूप में आपका मार्गदर्शन, राय और समर्थन हमारे रक्षा और रणनीतिक सहयोग के भविष्य को और मजबूत और समृद्ध बना सकता है।”</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता को अब क्षेत्रीय मामला नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम वैश्विक स्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय अशांति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए दूरगामी प्रभावों वाले गंभीर घटनाक्रम है। साथ ही इससे होने वाली मानवीय क्षति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए पश्चिम एशियाई क्षेत्र पर निर्भर है, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं है, बल्कि यह एक कड़वी सच्चाई है जिसका हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।”</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जर्मनी के सांसदों को बताया कि पश्चिम एशिया पर गठित मंत्रियों का समूह लगातार बदलती स्थिति का आकलन कर रहा है और इसके प्रभाव को कम करने के लिए समयोचित उपाय सुझा रहा है। उन्होंने कहा, “प्रमुख मंत्रालयों को एक साथ लाकर की गयी हमारी चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना, मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करना और नागरिकों के साथ-साथ उद्योगों को बाहरी व्यवधानों से बचाना है। यह वैश्विक संकटों का सामना शांति, दूरदर्शिता और प्रभावी संस्थागत समन्वय के साथ करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है।”</p>
<p>जर्मनी के सांसद और सांसदीय समिति के अध्यक्ष थॉमस रोवेकैंप ने बैठक में श्री सिंह का स्वागत किया। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने बर्लिन पहुंचने पर हम्बोल्ट विश्वविद्यालय परिसर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को पुष्पांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री के आगमन पर बर्लिन हवाई अड्डे पर उनका सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया। म्यूनिख से बर्लिन की उनकी यात्रा के दौरान लड़ाकू विमानों की सुरक्षा में उन्हें जर्मन वायु सेना के एक विशेष विमान में ले जाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:23:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में गश्त की योजनाओं से पीछे हटने पर ट्रंप ने सहयोगी देशों पर जताई नाराजगी, बोले-ईरान के साथ जल्द हो सकता है खत्म संघर्ष </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए सहयोगियों की "सुस्ती" पर नाराजगी जताई है। उन्होंने ब्रिटेन और जर्मनी के हिचकिचाते रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए इन देशों को खुद आगे आना चाहिए। ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म होने का दावा किया, लेकिन त्वरित समाधान की संभावना से इनकार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-expressed-displeasure-at-allies-for-withdrawing-from-patrolling-plans/article-146795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों की आलोचना करते हुए कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में उत्साह की कमी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की ज़हाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है।</p>
<p>ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह जरूरी था।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, यह अभियान जल्द ही खत्म हो जाएगा। हमारी दुनिया कहीं ज्यादा सुरक्षित होगी। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फऱवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली ज़हाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है। </p>
<p>ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं खुश नहीं हैं और बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।</p>
<p>कई सहयोगियों ने पहले ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आह्वान पर अपनी नाराजगी ज़ाहिर कर दी है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सोमवार देर रात संकेत दिया कि उनका देश फ़ारस की खाड़ी में स्थित इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर गश्त करने में शामिल नहीं हो सकता है। बर्लिन में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, हमारे पास संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ या नाटो से जरूरी जनादेश नहीं है, जो हमारे मूल कानून के तहत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध शुरू करने से पहले अमेरिका और इजरायल ने जर्मनी से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया था।</p>
<p>इससे पहले, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा था कि ब्रिटेन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को साफ़ करने के लिए बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाले ड्रोन के इस्तेमाल की संभावना पर चर्चा कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ब्रिटेन  के युद्ध क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजने की संभावना कम ही है। अमेरिका के दो और अहम सहयोगी, जापान और ऑस्ट्रेलिया, ने भी सोमवार को संकेत दिया कि वे विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त के लिए नौसैनिक ज़हाज़ भेजने को शायद तैयार न हों। यह बात तब सामने आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अमेरिका खाड़ी के तेल पर निर्भर सात देशों से बात कर रहा है ताकि इस संकरे लेकिन रणनीतिक समुद्री गलियारे में ज़हाज़ों की सुरक्षा में मदद मिल सके।</p>
<p>ट्रंप ने रविवार को एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि इस संकरे जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक ज़हाज़ों की सुरक्षा में मदद के लिए कई सरकारों से संपर्क किया गया है। हालांकि, ट्रंप ने उन देशों के नाम नहीं बताए, लेकिन शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं, इस अहम जलडमरूमध्य में गश्त के लिए ज़हाज़ भेजेंगे।</p>
<p>ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश आगे आएं और अपने ही क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है उन्हें मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि उन्हें अपनी ऊर्जा इसी क्षेत्र से मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:26:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस-जर्मनी और ऑस्ट्रिया अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपनाएंगे ओपन-सोर्स </title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस, जर्मनी समेत कई यूरोपीय देश डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के चलते अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर स्वदेशी व ओपन-सोर्स तकनीक अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/france-germany-and-austria-will-abandon-american-software-and-adopt/article-141999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूरोप के कई देश अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देश ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपने या ओपन-सोर्स विकल्प अपनाने का फैसला किया है। इसका मकसद है डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल आजादी। फ्रांस में सरकारी कर्मचारियों को अब जूम और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे अमेरिकी वीडियो कॉलिंग टूल्स छोड़ने होंगे। साल 2027 तक करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारी फ्रांस के अपने वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम वीआईएसआई का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि गैर-यूरोपीय सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहना डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। सरकार चाहती है कि संवेदनशील बातचीत और सरकारी जानकारी यूरोप के अंदर ही सुरक्षित रहे। फ्रांस के सिविल सर्विस मंत्री डेविड अमिएल ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी, संवेदनशील डेटा और रणनीतिक नवाचारों को गैर-यूरोपीय कंपनियों के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता।</p>
<p><strong>अमेरिका-यूरोप तनाव से बढ़ी चिंता</strong></p>
<p>यूरोप में यह चिंता तब और बढ़ी जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के एक अधिकारी पर प्रतिबंध लगाए। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने उस अधिकारी की ईमेल सेवा बंद कर दी। इससे यह डर पैदा हुआ कि अमेरिकी कंपनियां कभी भी सेवाएं रोक सकती हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि उसने आईसीसी की सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की और वह यूरोपीय सरकारों के साथ मिलकर डेटा सुरक्षा पर काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि उसका डेटा यूरोप में ही रहता है और यूरोपीय कानूनों के तहत सुरक्षित है। फिर भी यूरोप में यह भावना मजबूत हुई कि अगर किसी देश या कंपनी पर बहुत ज्यादा निर्भरता होगी तो उसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>जर्मनी-ऑस्ट्रिया और डेनमार्क के भी बदले रास्ते</strong></p>
<p>जर्मनी के श्लेसविग-होल्सटीन राज्य ने पिछले साल 44 हजार कर्मचारियों की ईमेल सेवाएं माइक्रोसॉफ्ट से हटाकर ओपन-सोर्स सिस्टम पर ले गईं। ऑस्ट्रिया की सेना ने रिपोर्ट लिखने और दस्तावेज बनाने के लिए अपनाया है। इसकी एक वजह यह भी है कि माइक्रोसॉफ्ट अब ज्यादा डेटा क्लाउड पर ले जा रहा है, जबकि लिबर ऑफिस आमतौर पर ऑफलाइन चलता है।</p>
<p><strong>पहले आजादी-बाद में बचत</strong></p>
<p>डेनमार्क की सरकार और कोपेनहेगन व आरहूस जैसे शहर भी ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर आजमा रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भविष्य में जोखिम बन सकती है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि तकनीक के मामले में किसी एक देश या कंपनी पर निर्भर रहना खतरनाक है। यही वजह है कि अब यूरोप में पहले आजादी, बद में बचत की सोच बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:39:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरित ऊर्जा परियोजना समझौते पर डेनमार्क-जर्मनी ने किए हस्ताक्षर, 2030 तक 9.5 अरब यूरो का निवेश करने की बनाई योजना</title>
                                    <description><![CDATA[डेनमार्क और जर्मनी ने बोर्नहोम एनर्जी आइलैंड पवन परियोजना पर सहमति जताई। यह सीमा-पार पहल यूरोपीय ऊर्जा बाजार को जोड़ते हुए हरित बिजली आपूर्ति बढ़ाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/denmark-germany-sign-green-energy-project-agreement-plan-to-invest-95/article-140986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(13)2.png" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। डेनमार्क ने जर्मनी के साथ मिलकर बोर्नहोम एनर्जी आइलैंड नामक एक प्रमुख अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजना को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमति व्यक्त की है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। फ्रेडरिक्सन ने हैम्बर्ग में उत्तरी सागर शिखर सम्मेलन के दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह एक सीमा पार परियोजना है जो यूरोपीय ऊर्जा बाजार को एकीकृत करती है। यह जर्मन घरों, डेनमार्क के घरों और हमारी कंपनियों को हरित विद्युत प्रदान करती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह अपनी तरह की पहली परियोजना है। डीपीए की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी सागर शिखर सम्मेलन में जर्मनी और डेनमार्क ने बाल्टिक सागर में बोर्नहोम द्वीप पर एक संयुक्त ऊर्जा केंद्र स्थापित एवं संचालित करने के लिए भी एक समझौता पर हस्ताक्षर किया। </p>
<p>गौरतलब है कि, इस द्वीप को बाल्टिक सागर में स्थित अपतटीय पवन ऊर्जा संयंत्रों से जर्मनी और डेनमार्क तक विद्युत पहुंचाने वाले केंद्र के रूप में उपयोग करने की योजना है। परियोजना के अंतर्गत दोनों देशों ने आवश्यक उपकरणों के निर्माण एवं रखरखाव की लागत साझा करने पर सहमति व्यक्त की है। </p>
<p>इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया कि शिखर सम्मेलन में उपस्थित बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, आयरलैंड, आइसलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे और यूनाइटेड किंगडम के ऊर्जा मंत्रियों ने क्षेत्र में पवन ऊर्जा के विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस उद्योग में 2030 तक लगभग 9.5 अरब यूरो का निवेश करने की योजना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 18:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका में हिंसा पर जर्मन चांसलर ने व्यक्त की चिंता, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने मिनेसोटा में अमेरिकी नागरिकों की हत्या पर चिंता जताते हुए कहा कि संघीय एजेंटों की गोलीबारी की निष्पक्ष जांच जरूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/german-chancellor-expressed-concern-over-violence-in-america-know-the/article-140959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में संघीय एजेंटों के हाथों अमेरिका के नागरिकों की हत्या को रेखांकित करते हुए देश में हिंसा के स्तर को चिंताजनक करार दिया। उत्तरी जर्मन शहर हैम्बर्ग में मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से उन घटनाओं पर उनके विचार पूछे गये जिनमें अमेरिकी संघीय प्रवर्तन अभियानों के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों की मौत का मामला शामिल है।</p>
<p>जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, मेरा मानना है कि अमेरिकी अधिकारी अब इस बात की पूरी तरह से जांच करेंगे कि क्या इन मामलों में गोली चलाना आवश्यक था और क्या वास्तव में इसमें शामिल अधिकारियों को कोई खतरा था। </p>
<p>जर्मन चांसलर की ये टिप्पणियां मिनेसोटा के सबसे बड़े शहर मिनियापोलिस में इस महीने हुई दो घातक घटनाओं के बाद आयी हैं। शनिवार सुबह, एलेक्स प्रेट्टी की संघीय एजेंटों ने गोली मारकर हत्या कर दी, इससे पहले सात जनवरी को भी इसी तरह की एक घटना हुई थी, जब रेनी निकोल गुड को अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन अधिकारी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 15:31:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्मनी, इजरायल ने 'साइबरडोम' बनाने के लिए किया समझौता, साइबर और ड्रोन हमलों का लगाएगा पता</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मनी और इजरायल ने संयुक्त सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। साइबर व ड्रोन हमलों से निपटने के लिए जर्मन ‘डोम’ सिस्टम विकसित किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/germany-and-israel-sign-agreement-to-build-cyberdome-to-detect/article-139274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/israel,-germany-sign.png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मनी और इजरायल ने संयुक्त सुरक्षा कार्य को लेकर एक समझौता किया है, जिसमें साइबर हमलों को रोकने के लिए एक जर्मन 'डोम' का निर्माण भी शामिल है। </p>
<p>जर्मनी के द हैंडेल्सब्लाट अखबार ने की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते पर जर्मनी गृहमंत्री मंत्री अलेक्जेंडर डोबिडट और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ने हस्ताक्षर किया। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार ने स्पष्ट किया कि यह समझौता जर्मनी गृहमंत्री मंत्री अलेक्जेंडर डोबिडट के इजराइल के दो दिवसीय दौरे के दौरान हुआ। </p>
<p>अखबार ने बताया है कि यह सिस्टम स्वचालित रूप से साइबर हमलों और ड्रोन हमलों का पता लगाएगा और उन्हें रोकेगा। यह समझौता जर्मनी और इजरायल के साइबर सुरक्षा क्षमताओं के घनिष्ठ एकीकरण का प्रावधान करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 14:05:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बर्लिन पहुंचे राहुल गांधी, ओवरसीज कांग्रेस ने किया जोरदार स्वागत, प्रवासी भारतीयों से करेंगे संवाद</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जर्मनी की राजधानी बर्लिन पहुंच गए हैं। दौरे के दौरान वह प्रवासी भारतीयों से संवाद करेंगे और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। म्यूनिख में उन्होंने बीएमडब्ल्यू प्लांट का भी दौरा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-reached-berlin-overseas-congress-gave-warm-welcome/article-136279"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rahul-gandhi-germany-controversy.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बुधवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन पहुंच गये। राहुल गांधी का हवाई अड्डे पर इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (आईओसी) के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने स्वागत किया। राहुल गांधी बुधवार को बर्लिन में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अनुसार राहुल गांधी भारतीय प्रवासी समुदाय से संवाद करेंगे और यूरोप में पार्टी के विभिन्न अध्यक्षों से मिलकर प्रवासी भारतीयों से जुड़ें मुद्दों और पार्टी की विचारधारा को बढ़ावा देने पर चर्चा करेंगे। वह 20 दिसंबर तक जर्मनी के दौरे पर रहेंगे। </p>
<p>राहुल गांधी ने जर्मनी के बड़े शहरों में शामिल म्यूनिख में बीएमडब्ल्यू प्लांट का दौरा किया। दौरे के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, म्यूनिख, जर्मनी में बीएमडब्ल्यू वेल्ट और बीएमडब्ल्यू प्लांट के दौरे के दौरान बीएमडब्ल्यू की दुनिया का अनुभव करने का अवसर मिला, विश्व स्तरीय निर्माण को करीब से देखने का एक अविश्वसनीय अनुभव। टीवीएस की 450 सीसी मोटरसाइकिल को देखना एक यादगार अनुभव था, जिसे बीएमडब्ल्यू के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है। </p>
<p>इसके आगे राहुल गांधी ने कहा, विनिर्माण मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ है। दुख की बात है कि भारत में विनिर्माण में गिरावट आ रही है। विकास को गति देने के लिए हमें अधिक उत्पादन करने, सार्थक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां सृजित करने की आवश्यकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 15:39:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया में पवन-सौर ऊर्जा से बिजली बनाने में तीसरे स्थान पर पहुंचा भारत : जर्मनी को छोड़ा पीछे, चीन पहले और अमेरिका दूसरे नंबर पर </title>
                                    <description><![CDATA[ भारत ने इस मामले में जर्मनी को पीछे छोड़ दिया। पूरी दुनिया में जितनी बिजली पवन और सौर ऊर्जा से बनी, उसमें से 15% भारत ने बनाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-left-germany-at-third-place-in-the-world-in/article-110136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। 2024 में पवन और सौर ऊर्जा से बिजली बनाने में हमने जर्मनी को पीछे छोड़ दिया है। अब भारत इस मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वैश्विक स्तर पर पवन और सौर ऊर्जा से 15% बिजली का उत्पादन किया है। भारत में कम कार्बन स्रोतों (जैसे रिन्यूएबल एनर्जी और न्यूक्लियर एनर्जी) से 40.9% बिजली बनी है। यह 1940 के बाद पहली बार है, जब यह आंकड़ा 40% के पार गया है। एम्बर ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी रिव्यू की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। भारत अब पवन और सौर ऊर्जा से बिजली बनाने में दुनिया में तीसरे नंबर पर आ गया है। 2024 में भारत ने इस मामले में जर्मनी को पीछे छोड़ दिया। पूरी दुनिया में जितनी बिजली पवन और सौर ऊर्जा से बनी, उसमें से 15% भारत ने बनाई।</p>
<p><strong>भारत ने लगाई है जोरदार छलांग</strong><br />भारत में जो बिजली स्वच्छ स्रोतों से बनी, उसमें से 8% जलविद्युत और 10% पवन और सौर ऊर्जा से आई। पूरी दुनिया में 2024 में 858 टेरावाट स्वच्छ ऊर्जा जोड़ी गई। यह 2022 से 49% ज्यादा है। भारत में 2024 में जितनी बिजली बनी, उसमें से 7% सौर ऊर्जा यानी सोलर एनर्जी से आई। यह 2021 के मुकाबले दोगुना है। भारत अब चीन और अमेरिका के बाद तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बन गया है। एम्बर के प्रबंध निदेशक फिल मैकडॉनल्ड ने कहा, बैटरी स्टोरेज के साथ सौर ऊर्जा वैश्विक ऊर्जा बदलाव की धुरी बन गई है। इसका मतलब है कि सौर ऊर्जा अब दुनिया में ऊर्जा के तरीके को बदलने में सबसे महत्वपूर्ण चीज बन गई है। इस रिपोर्ट में 88 देशों को शामिल किया गया है। ये देश दुनिया की 93% बिजली की मांग को पूरा करते हैं।</p>
<p><strong>टारगेट पाने के लिए बढ़ाना होगा निवेश</strong><br />एम्बर के एशिया कार्यक्रम के निदेशक आदित्य लोला ने कहा कि एशिया में स्वच्छ ऊर्जा बहुत तेजी से बढ़ रही है। इससे इस क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। एम्बर के एक वरिष्ठ ऊर्जा विश्लेषक नेश्विन रोड्रिग्ज ने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा में बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन, अब उसके सामने यह चुनौती है कि वह मांग के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कैसे बढ़ाए। एम्बर की एक और रिपोर्ट बताती है कि अगर भारत को 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य हासिल करना है तो उसे हर साल 20% ज्यादा निवेश करना होगा। इसका मतलब है कि भारत को नवीकरणीय ऊर्जा में और अधिक पैसा लगाना होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Apr 2025 10:23:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एशियाई खेल 2023 :  खेलों से पहले स्पेन, जर्मनी का दौरा करेगी महिला हॉकी टीम</title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय महिला हॉकी टीम चीन के हांग्झोउ में होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी के लिये जुलाई में जर्मनी और स्पेन का दौरा करेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/asian-games-2023-womens-hockey-team-to-tour-germany-before/article-48383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/women.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय महिला हॉकी टीम चीन के हांग्झोउ में होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी के लिये जुलाई में जर्मनी और स्पेन का दौरा करेगी। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने शनिवार को यह जानकारी दी। साई ने बताया कि भारतीय टीम 12 जुलाई को जर्मनी जायेगी, जहां वह रसेलशाइम में प्रशिक्षण लेने के बाद जर्मनी और चीन से मुकाबला करेगी।</p>
<p>जर्मनी में अभियान खत्म करने के बाद भारतीय महिलाएं टेरासा जायेंगी, जहां उनका सामना मेजबान स्पेन, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड से होगा। यूरोप का यह दौरा एशियाई खेलों की तैयारी के लिहाज से भारत के लिये महत्वपूर्ण होगा, जो पेरिस ओलंपिक 2024 का क्वालीफिकेशन आयोजन भी है।</p>
<p>इस अंतरराष्ट्रीय दौरे का वित्तपोषण केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय खेल महासंघ योजना के तहत किया जा रहा है। भारतीय महिलाएं इस समय बेंगलुरु के साई केंद्र में हैं, जहां वे एशियाई खेलों के तैयारी शिविर में रविवार से भाग लेंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jun 2023 15:52:54 +0530</pubDate>
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                <title>मंदी की चपेट में जर्मनी की अर्थव्यवस्था! पहली तिमाही में जीडीपी में गिरावट दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[ कैपिटल इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ यूरोप अर्थशास्त्री फ्रांजिÞस्का पाल्मास ने कहा कि देश में रोजगार पहली तिमाही में बढ़ा और मुद्रास्फीति में कमी आई है, लेकिन उच्च ब्याज दरें खर्च और निवेश पर दबाव बनाए रखेंगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/germanys-economy-in-the-grip-of-recession-gdp-decline-in/article-46744"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/ger.jpg" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मनी अब औपचारिक रूप से मंदी की गिरफ्त में आ गई है। ताजा आंकड़ों से इस बात की जानकारी मिल रही है कि चालू साल की पहली तिमाही में जर्मनी की अर्थव्यवस्था में अप्रत्याशित गिरावट आई है।</p>
<p><strong>जीडीपी में कितने फीसदी की हुई गिरावट? : </strong>संघीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-मार्च में जर्मनी के सकल घरेलू उत्पाद में 0.3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। </p>
<p>2022 की आखिरी तिमाही में भी जर्मनी के जीडीपी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी। दो लगातार तिमाहियों में जीडीपी का नीचे आना तकनीकी रूप से मंदी को दशार्ता है।</p>
<p><strong>निवेश पर बढ़ेगा दबाव </strong><br />कैपिटल इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ यूरोप अर्थशास्त्री फ्रांजिÞस्का पाल्मास ने कहा कि देश में रोजगार पहली तिमाही में बढ़ा और मुद्रास्फीति में कमी आई है, लेकिन उच्च ब्याज दरें खर्च और निवेश पर दबाव बनाए रखेंगी। उन्होंने कहा कि जर्मनी ने तकनीकी मंदी का अनुभव किया है और पिछली दो तिमाहियों में प्रमुख यूरो जोन अर्थव्यवस्थाओं में सबसे खराब प्रदर्शन किया है।</p>
<p><strong>सरकार ने वृद्धि दर अनुमान को किया था दोगुना</strong><br />ये आंकड़े जर्मनी की सरकार के लिए बड़ा झटका हैं। पिछले महीने ही सरकार ने इस साल के लिए अपने वृद्धि दर के अनुमान को दोगुना कर दिया था। सरकार ने कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था 0.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। जनवरी में इसके 0.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया थ। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऊंची मुद्रास्फीति से उपभोक्ता खर्च प्रभावित हुआ है। अप्रैल में कीमतें एक साल पहले की तुलना में 7.2 प्रतिशत ऊंची हैं। दरअसल, जीडीपी किसी देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 11:09:12 +0530</pubDate>
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                <title>जर्मनी ने अपने आखिरी तीन परमाणु संयंत्रों को भी किया बंद</title>
                                    <description><![CDATA[आरडब्ल्यूई ऊर्जा फर्म ने एक बयान में तीन रिएक्टरों को ग्रिड से काट देने की पुष्टि करते हुए कहा यह एक युग का अंत है। आलोचकों ने थ्री माइल द्वीप, चेरनोबिल और फुकुशिमा में तबाही का हवाला देते हुए कहा कि तकनीक असुरक्षित और अस्थिर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/germany-also-closed-its-last-three-nuclear-plants/article-42968"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/fms1sqcakamkf-m.jpg" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मनी ने अक्षय ऊर्जा की दीर्घकालीन योजना के तहत शनिवार को अपने शेष तीन परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को बंद कर दिया। एम्सलैंड, नेकरवेस्टहेम 2 और इसार 2 को बीती रात बंद कर दिया गया।</p>
<p>आरडब्ल्यूई ऊर्जा फर्म ने एक बयान में तीन रिएक्टरों को ग्रिड से काट देने की पुष्टि करते हुए कहा यह एक युग का अंत है। आलोचकों ने थ्री माइल द्वीप, चेरनोबिल और फुकुशिमा में तबाही का हवाला देते हुए कहा कि तकनीक असुरक्षित और अस्थिर है।</p>
<p>हालांकि, परमाणु ऊर्जा के समर्थक का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों के बीच जीवाश्म ईंधन को पहले चरणबद्ध किया जाना चाहिए, परमाणु ऊर्जा का तर्क काफी कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पैदा करता है और ठीक से प्रबंधित होने पर ऊर्जा का एक सुरक्षित स्रोत हो सकता है। जापान में फुकुशिमा परमाणु आपदा के बाद 2011 में पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल द्वारा बाहर निकलने की योजना को गति दी गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Apr 2023 13:16:27 +0530</pubDate>
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